The Rise of Nationalism in Europe One Shot: FULL CHAPTER | Warrior 2026 | Class 10 History Chapter 1
मैं सिद्धार्थ शर्मा क्लास 10थ का वॉरियर
का पहला लेक्चर लेकर आ गया हूं। जिस
चैप्टर का नाम है द राइज ऑफ रैशलिज्म इन
यूरोप। इस क्लास के अंदर मैं पूरे चैप्टर
को कंप्लीट समझा दूंगा। मैं आप लोग को
गारंटी दे रहा हूं कि डेढ़ से दो घंटे के
लेक्चर पढ़ने के बाद कोई भी क्वेश्चन आपको
इस लेक्चर के बाहर से नहीं आएगा। अगर आपको
नोट्स चाहिए तो नीचे डिस्क्रिप्शन बॉक्स
में लिंक है। आप वहां से सारे नोट्स फ्री
ऑफ कॉस्ट डाउनलोड कर सकते हो। अब इस
चैप्टर की शुरुआत करने से पहले मैं आपको
बताता हूं कि दुनिया में चार तरीके से
गवर्नेंस की जाती है। पहला होता है
मोनार्की। यानी कि जब किसी कंट्री का लीडर
कोई राजा या रानी हो। इसका बेहतरीन
एग्जांपल है सऊदी अरेबिया। जैसे मोहम्मद
बिन सलमान या हाउस ऑफ साउथ जो है वो वहां
के मोनार्क हैं। सेकंड नंबर पे आ जाता है
डेमोक्रेसी। जहां पे वहां के जो वोटर्स
होते हैं वो अपने पसंद के आदमी को वोट
देके पावर में लाते हैं। जो अगले 5 साल के
लिए उनके देश को चलाता है उनके बिहाफ में।
इंडिया, यूएसए ये सब एक डेमोक्रेटिक
कंट्री हैं। तीसरे नंबर पर आता है
डेमोक्रेटिक मोनार्की। जहां पावर 50-50%
होती है। थोड़ी पावर राजा के पास होती है
तो थोड़ी पावर वहां के प्राइम मिनिस्टर के
पास होती है। इसका एक बेहतरीन एग्जांपल है
यूनाइटेड किंगडम दोस्तों और लास्ट आ जाता
है डिक्टेटरशिप। जब किसी कंट्री का आर्मी
का जनरल अपने आप को सर्वशक्तिमान घोषित कर
देता है। और कहता है आज से इस कंट्री का
लीडर मैं जो चाहूं वो होगा। इसका बेहतरीन
एग्जांपल है नॉर्थ कोरिया। जहां के
डिक्टेटर है किम जोंग। लेकिन क्या आपको
पता है कि एक टाइम था जब दुनिया की सारी
कंट्रीज जो थी उसमें से 90% कंट्री के ऊपर
मोनार्की रहा करता था। वहां से कैसे
अलग-अलग देश बने? कैसे अलग-अलग देश
डेमोक्रेसी बने। ये सब कहते हैं कि इन सब
चीजों के पीछे फ्रेंच रिवॉल्यूशन का हाथ
था। तो सबसे पहले आइए यही समझ लेते हैं कि
कैसे फ्रांस खुद एक मोनार्की से एक
डेमोक्रेसी की तरफ गया। सबसे पहला टॉपिक
आप लोग को आज की क्लास में समझना है जो
बहुत इंपॉर्टेंट है। पांच नंबर के लिए
आपकी बोर्ड एग्जाम में आ सकता है। वो है
सेंस ऑफ कलेक्टिव बिलोंगिंग। किससे फ्रांस
के लोग एक हो पाए? कैसे फ्रांस के लोगों
ने डिसाइड किया कि अब हम लोग राजा रानी से
हटेंगे और हम अपना एक खुद का देश बनाएंगे।
इसका पहला पॉइंट है कि किस तरीके से
फ्रांस के लोगों ने अपने रॉयल फ्लैग को
अपने फ्रेंच फ्लैग से रिप्लेस कर दिया था।
यहां पे आपके सामने फ्रांस का रॉयल फ्लैग
है। मैंने फ्रांस के राजा से पूछा साहब इस
फ्लैग का मतलब क्या है? तो वो कहता है कि
ये जो फ्लैग है यह हमारी रॉयल पावर को
रिप्रेजेंट करता है। यह जो फ्लैग है यह
हमारे डिवाइन राइट को दर्शाता है। यह
बताता है लोगों को कि हमारे को स्वयं जीसस
क्राइस्ट ने सिलेलेक्ट किया है आप लोगों
के ऊपर रूल करने के लिए। हमारा जन्म ही
हुआ आपके ऊपर रूल करने के लिए और आपका
जन्म हुआ हमारा गुलाम बनने के लिए। ये जो
फ्लैग है ये बताता है कि किस तरीके से
हमारी अथॉरिटी ही सबसे सुप्रीम अथॉरिटी
होगी। हमसे ऊपर कुछ नहीं होगा। अब आप खुद
बताइए इस तरीके के फ्लैग से कोई आम पब्लिक
कनेक्टेड फील करेगी क्या? सब कुछ रॉयल
रॉयल रॉयल रॉयल। इसीलिए सबसे पहले फ्रांस
के लोगों ने रॉयल फ्लैग को फ्रेंच फ्लैग
से रिप्लेस किया। एक फ्रेंच फ्लैग के अंदर
तीन कलर्स होते हैं। सबसे पहले आप देख
सकते हो ब्लू कलर लिबर्टी को रिप्रेजेंट
करता है। लिबर्टी का मतलब होता है आजादी।
फ्रांस के लोगों को आजादी चाहिए थी। अपनी
पसंद के लीडर को इरेक्ट करने की। आजादी
चाहिए थी अपनी पसंद का बिजनेस करने की।
आजादी चाहिए थी। जहां चाहे वहां जाने की।
इसके अलावा वाइट कलर रिप्रेजेंट करता है
इक्वलिटी। आप लोगों को पता होगा किस तरीके
से फ्रांस की सोसाइटी तीन ग्रुप्स में
बंटी हुई थी। तीन एस्टेट्स में बटी हुई
थी। क्लर्जी, नोबिलिटी, पीज़ेंट्स। सबसे
ज्यादा पावर और सबसे ज्यादा अथॉरिटी
क्लर्जी के पास थी। देन नोबिलिटी और देन
पीज़ेंट्स। वो लोग चाहते थे कि नहीं हमारे
देश में इक्वलिटी होनी चाहिए। हम सब इक्वल
होने चाहिए। इसके अलावा रेड कलर को
रिप्रेजेंट करता था फ्रेटरनिटी।
फ्रेटरनिटी का मतलब होता है भाईचारा।
फ्रांस के लोगों ने रॉयल फ्लैग को एक
फ्रेंच फ्लैग से रिप्रेजेंट चेंज करा।
सेकंड पॉइंट आता है कि फ्रांस के लोगों ने
दो कांसेप्ट लेकर आए। एक लेकर आए लापात्री
का और एक लेकर आए लेसिटोयन का। लापात्री
का मतलब होता है द फादरलैंड। जैसे आज
हमारे भारत में हम अपने भारत को भारत माता
का दर्जा देते हैं। हमने अपने भारत को मां
का स्वरूप दे रखा है। उसी तरीके से उन
लोगों ने अपने देश को लाभ पात्री यानी द
फादरलैंड का दर्जा दिया। उन्होंने कहा कि
नहीं अब बहुत हो गया। हम लोग बहुत हमारा
बंटवारा हो गया। किस तरीके से हम फर्स्ट
स्टेट, सेकंड स्टेट और थर्ड स्टेट में
बैठे हुए। इनफ इज़ इनफ। अब हम सब सिटीजन
कहलाएंगे। वी ऑल विल बी लेसिटोयन।
तो फ्रांस के लोगों ने ये और किया ताकि
उनके बीच में कलेक्टिव बिलोंगिंग आ सके।
वो एक हो सके। इसके अलावा वहां के लोगों
ने कई सारी हंस बनाई, कई सारे कंपोज़िशंस
बनाए।
इसका एक बेहतरीन एग्जांपल है ला मर्सिलेज़।
जब फ्रांस के लोग क्रांति के लिए निकलते
थे। जब एक के पीछे एक वो मार्च करते हुए
चलते थे तब वो लोग ला मर्सिलेस को
गुनगुनाते हुए जाते थे। यह इतना ज्यादा
फेमस हो गया जब फ्रांस आजाद हुआ तो यह
वहां का नेशनल एंथम बना। दोस्तों इसके
अलावा फ्रांस के लोगों ने नेशनल असेंबली
का स्थापना करी। आप बोलेंगे सर नेशनल
असेंबली यह फोटो कहीं देखी देखी तो लग रही
है। आपको याद है किस तरीके से नाइंथ क्लास
में हमने पढ़ा था कि जो लुई 16 था लुईस 16
यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका को आजादी
दिलाना चाहता था और उसके लिए उसने लोन
लेकर यूएसए के लोगों को पैसा दिया कि तुम
इस पैसे का इस्तेमाल करो और अपने आप को
आजाद करा लो। जब लोन चुकाने की बारी आई तो
उसने अपने ही देश के थर्ड एस्टेट के लोगों
से कहा कि मैं तुम्हारे ऊपर टैक्स
लगाऊंगा। और उस टैक्स को लगाने के लिए
उसने एस्टेट जनरल की मीटिंग बुलाई थी।
जिसमें तीनों स्टेट के लोग थे और लुईस 16
भी था। लेकिन थर्ड स्टेट के जो लोग थे उस
मीटिंग से वॉकआउ कर गए थे और उन्होंने
टेनिस कोर्ट पे जाके ओथ ली थी और उन्होंने
डिसाइड किया था कि अब हम एक नेशनल असेंबली
बनाएंगे। एक ऐसी असेंबली बनाएंगे जिसके
अंदर फ्रांस के सारे वो लोग जिनके पास वोट
देने का अधिकार है वो इकट्ठा होंगे और
अपनी पसंद के लीडर को वो वोट देंगे और वो
उनके बिहाफ में कंट्री को रूल करेगा। तो
फ्रांस के लोगों ने नेशनल असेंबली बनाई
ताकि उनके बीच में कलेक्टिव बिलोंगिंग का
सेंस आ सके। एंड लास्ट बट नॉट द लीस्ट कि
फ्रांस के लोगों ने कई सारी सीक्रेट
सोसाइटीज बनाई। इन सीक्रेट सोसाइटीज के
अंदर कई सारे ऐसे लाइक माइंडेड लोगों को
इकट्ठा किया गया जिनका जो ये चाहते थे कि
हां राजा को हटाया जाए और फ्रांस नाम का
एक देश बनाया जाए। एक डेमोक्रेटिक कंट्री
बनाई जाए। ऐसे कई सीक्रेट्स क्लब बनाए गए।
लेकिन सबसे फेमस जो सीक्रेट क्लब था उसका
नाम था जैकोबिन जिसको शुरुआत किया था
मैगज़िमेलियन रोबिस्पियरी ने। जब
मैगज़िमेलियन रोबिस्परी ने जैकोबिन क्लब
बनाया था तो लोग उसको मसीहा समझते थे।
लोगों को लगता था अब यही हमें प्रोटेक्ट
करेगा लेकिन बहुत जल्दी उनको पता चलने
वाला था कि ये कोई मसीहा नहीं बल्कि यह भी
एक डेविल है। तो इस तरीके से फ्रांस के
लोगों ने ये पांच चीजें करी थी ताकि उनके
बीच में एक एकता बन सके। वो लोग यूनाइट हो
सके। अपने राजा के खिलाफ लड़ाई लड़ सके।
और यह आपका सबसे पहला क्वेश्चन है। अब आप
मुझसे बोलेंगे सर आपने लेक्चर की
स्टार्टिंग में एक बात बोली थी। आपने कहा
था कि आप पूरा लेक्चर पढ़ाओगे लेकिन आपने
फ्रंट पेज की एनसीईआरटी में जो पेंटिंग दे
रखी है वो तो पढ़ा ही नहीं। देखिए मैं
आपको एक सिंपल सी बात बोलना चाहता हूं कि
डेढ़ से 2 घंटे के अंदर एनसीईआरटी की
एक-एक लाइन एक-एक फोटो हर चीज जो
इंपॉर्टेंट है वो मैं सब पढ़ा दूंगा। बस
थोड़ा से मैंने फ्लो को चेंज किया है ताकि
तुम्हें ये स्टोरी की तरह पूरी वो चैप्टर
समझ में आ जाए। तो आपको थोड़ा सा पेशेंस
रखना होगा। क्लियर हो गया? अब ठीक है सर।
फ्रांस के लोगों ने सेंस ऑफ कलेक्टिव
बिलोंगिंग करी। फिर आगे क्या? तो हुआ यह
कि जब ये सब चीजें हुई तो फ्रांस के लोग
यूनाइट हो सके अपने राजा के खिलाफ। और
उन्होंने अपने राजा के खिलाफ आवाज उठाई।
और इस तरीके से लुईस 16 जो कि बोरबन
डायनेस्टी के राजा थे 1792 के अंदर उनको
पावर से हटना पड़ा। लुईस 16 के बाद पावर
में आए थे मैगिमिलन रूबीस पेरी। और इस
टाइम पे जब ये पावर में आए तो इन्होंने
बनाई एक नेशनल कन्वेंशन।
मैग्ज़िमिलियन रोबिस पियरी 1793 से 1794 तक
पावर में रहे थे। लेकिन जब यह पावर में थे
तो यह बहुत ज्यादा पैरेनॉइड हो गए थे। ये
शकी हो गए थे सब। इनको लगता था हर कोई
इनके खिलाफ षड्यंत्र रच रहा है। हर कोई
जैसे लुईस इसी को हटाया था वैसे ही हर कोई
इसको हटाना चाहता है। तो ये क्या करता था?
इसको जिस पे भी शक होता था ये उसको गुलेटन
करवा देता था। याद है वो मशीन जिसमें आपकी
गर्दन को इस तरीके से रखा जाता था और ऊपर
से एक ब्लेड आती थी और फटाक से आपके मुंडी
को आपके धड़ से अलग कर दिया करती थी।
मैगजी मिलियन रोबिस पेरी ने 1793 से 94 के
बीच में यानी डेढ़ दो साल के बीच में इसने
16,000 लोगों को गुलेट कराया। फ्रांस के
लोगों को ये बात समझ में आ गई थी कि ये तो
लुईस 16 से भी ज्यादा बुरा है। हमें इसको
भी हटाना पड़ेगा। तो फ्रांस के लोगों ने
इसके बाद लेकर आए वो द डायरेक्टरी।
उन्होंने कहा भाई एक आदमी के पास सारी
पावर नहीं देंगे क्योंकि अगर एक आदमी के
पास सारी पावर आ जाती है तो वो बावड़ा सा
हो जावे है। तो उन्होंने इस बार द
डायरेक्टरी लेकर आए जिसमें एक आदमी नहीं
जिसमें पावर पांच लोगों में बंटी होती थी
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लेकिन डायरेक्टरी की यही सबसे बड़ी
प्रॉब्लम थी कि डायरेक्टरी वाले किसी एक
कंक्लूजन तक पहुंच ही नहीं पाते थे। जब
कोई डिसीजन लेना होता था तो वन कहता था यह
करेंगे, टू कहता था वो करेंगे, थ्री कहता
था यह करेंगे, फोर कहता था वो करेंगे और
फाइव कहता था वो करेंगे। जिसके कारण
फ्रांस के लोगों को समझ में आ गया कि ये
तो किसी काम के नहीं है। इसके बाद फिर
फ्रांस के लोग गए अपनी आर्मी के जनरल
नेपोलियन बोनापाते के पास। दरअसल नेपोलियन
फ्रांस की आर्मी का जनरल था और इसके अंडर
में फ्रांस ने कई सारी जंगे जीत रखी थी।
नेपोलियन लगभग जिस जंग में जाता था वहां
से वो विजय होके निकलता था। फ्रांस के लोग
उसको बहुत इज्जत करते थे। उन्होंने कहा
हमने सब करके देख लिया। लुईस 16 के बाद
रोबिस पेरी आया। रोबिस पेरी के बाद
डायरेक्टरी आया। अब हमें सिर्फ और सिर्फ
आप पर भरोसा है। आप ही हमारे देश को चला
सकते हो। नेपोलियन ने कहा ठीक है। मैं आप
इतनी रिक्वेस्ट कर ही रहे हो तो मैं आपके
लिए देश को चलाने को तैयार हूं। लेकिन
नेपोलियन ने कहा मेरा एक शर्त है। मैं
पावर में आऊंगा तो मैं सबसे पहले कुछ
चेंजेस करूंगा। कुछ रिफॉर्म्स करूंगा।
लोगों ने कहा अपने रिफॉर्म्स को क्या नाम
दोगे? इसने कहा नेपोलियनिक कोड बोलेगा
ब्रो। कैसी बातें कर रहा है? अगर बबुआ सर
ने किया होता तो बबुआ कोड हो जाता। लेकिन
क्योंकि नेपोलियन ने किया था इसलिए उसका
नाम नेपोलियनिक कोड था। नेपोलियन ने कहा
मैं पांच चीजें करूंगा। और यही आपका बोर्ड
एग्जाम का सेकंड मोस्ट इंपोर्टेंट
क्वेश्चन है इस चैप्टर से। सबसे पहले
नेपोलियन कहता था कि आई विल रिमूव ऑल द
प्रिविलेजेस बेस्ड ऑन बर्थ एंड एस्टैब्लिश
इक्वालिटी बिफोर लॉ एंड सिक्योर राइट टू
प्रॉपर्टी।
आप सभी को मैंने थोड़ी देर पहले बताया था
कि किस तरीके से फ्रांस की सोसाइटी जो थी
वो तीन स्टेट में बंटी हुई थी। सी फॉर
चर्च, सी फॉर क्लर्जी। चर्च में काम करने
वाले सारे लोग फादर, प्रीस्ट, सिस्टर ये
सब के सब क्लर्जी का पार्ट होते थे और
इनकी सोसाइटी में सबसे ऊपर वैल्यू हुआ
करती थी।
सेकंड नंबर पर आते थे नोबिलिटी। नोबिलिटी
के अंदर आर्मी के सारे ऑफिसर्स और राजा के
जितने भी मिनिस्टरर्स हुआ करते थे वो सब
नोबिलिटी के अंदर आते थे। इनकी रैंक सेकंड
होती थी सोसाइटी में। और सबसे लास्ट में
आते थे पीज़ेंट्स।
दोस्तों, वैसे तो पीज़ेंट्स का मतलब किसान
होता है। लेकिन फ्रांस के कॉन्टेक्स्ट में
पीज़ेंट में सब आ जाते थे। डॉक्टर से लेकर
इंजीनियर तक, स्वीपर से लेकर क्लीनर तक सब
आ जाते थे उसके अंदर।
तो उसने कहा कि यह जो आपने डिवीजन कर रखा
है यह बेस्ड ऑन बर्थ है। यानी अगर मैं
क्लर्जी हूं तो मेरा बेटा भी क्लर्जी
होगा। मेरा पोता भी क्लर्जी होगा। मेरा
परपोता भी क्लर्जी होगा। अब अगर मान लीजिए
मैं पीजेंट हूं तो मेरा बेटा भी पीजेंट
होगा। जो कष्ट मैंने अपनी जिंदगी सहा है।
मेरे बेटे को भी वो कष्ट सहना पड़ेगा। अगर
वो कोशिश करे कि वो पढ़ाई लिखाई करके
मेहनत करके वो सोसाइटी में ऊपर आ जाए। वो
नोबिलिटी या क्लर्जी बन जाए तो इट विल नॉट
पॉसिबल।
नेपोलियन ने कहा यह गलत है। मैं इसके
खिलाफ जाता हूं। और नेपोलियन ने यह
प्रिविलजेस बेस्ड ऑन बर्थ जो थे वो हटा
दिए। नेपोलियन ने कहा अब मैं इक्विटी
बिफोर लॉ लाऊंगा। यानी कि सबसे ऊपर लॉ
होगा। लॉ के सामने सब बराबर होंगे। चाहे
तुम क्लर्जी हो, चाहे तुम नोबिलिटी हो,
चाहे तुम पीजेंट्स हो। इससे पहले फ्रांस
में हर किसी के पास प्रॉपर्टी खरीदने का
अधिकार तक नहीं था। लेकिन नेपोलियन ने कहा
कि नहीं मैं सबको प्रॉपर्टी खरीदने का
अधिकार देता हूं। तुम बोलोगे सर नेपोलियन
तो बहुत बढ़िया आदमी निकला। यह पॉइंट तो
आपको नेपोलियन को देना पड़ेगा। बिल्कुल।
तो पहला पॉइंट हम लोग दे देते हैं
नेपोलियन को। इसके बाद नेपोलियन कहता था
कि मैं गिल्ड रिस्ट्रिक्शंस हटा दूंगा और
ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन सिस्टम पूरे
फ्रांस का सुधार दूंगा। सर ये गिल्ड
रिस्ट्रिक्शंस क्या होते हैं? दरअसल होता
ये था दोस्तों कि फ्रांस जो थी वो फ्रांस
पूरा का पूरा फ्रांस कई सारी गिल्ड कई
सारे टुकड़ों में बैठा हुआ रहता था। और हर
टुकड़े की अपनी गिल्ड होती थी। अपना एक
यूनियन हुआ करता था। फॉर एग्जांपल आपको
देखा मैंने फ्रांस के नौ टुकड़े कर दिए।
यह वन है, यह टू है, यह 3 4 5 6 7 8 9
अब फाइव वाला जो टुकड़ा होता था वहां के
जो ट्रेड यूनियन होते थे वो किसी और को
किसी और को फाइव में ट्रेड नहीं करने देते
थे। यानी कोई और अपना माल ना पांच में बेच
सकता था, ना पांच से कोई आदमी बाहर जाके
अपना माल बेच सकता था। इस तरीके की ट्रेड
यूनियन हुआ करते थे। इस तरीके की मोनोपोली
बना रखी थी कि यहां पर बिजनेस सिर्फ हम
करेंगे। यहां पर जो भी सेल होगा सिर्फ हम
बेचेंगे। ना कोई बाहर से अंदर आएगा ना कोई
अंदर से बाहर जाएगा। नेपोलियन ने कहा ये
गलत है। और मैं इस तरीके के गिल्ड
रेस्ट्रिकशंस को हटाता हूं। मैं पूरे के
पूरे फ्रांस को खोल के रख दूंगा। और अब
मैं पूरे फ्रांस में खोल के रख दूंगा।
बताओ कोई भी आदमी कहीं भी जाके बिनेस कर
सकता है। कहीं भी जाके ट्रेड कर सकता है।
कहीं भी जाके व्यापार कर सकता है। तो
नेपोलियन ने इस तरीके से गिल्ड
रेस्ट्रिकशंस को रिमूव करके रख दिया था।
इसके अलावा आप बोलोगे सर नेपोलियन ने तो
ये भी काम अच्छा किया। क्यों? मैं आपसे
पूछूंगा क्यों नापोलियन ने ये काम अच्छा
किया? तो इसका सिंपल सा आप जवाब दोगे कि
जब ये पूरा मार्केट खुल जाएगा तो आप यहां
पे रह रहे आदमी को अपना माल बेचने के लिए
ये आदमी भी कोशिश करेगा। ये आदमी भी कोशिश
करेगा। ये आदमी भी कोशिश करेगा और ये आदमी
भी कोशिश करेगा। तो जब ये आपस में सब लोग
कमपीट करेंगे इसको इंप्रेस करने के लिए,
इसको अपना गुड बेचने के लिए तो ना केवल
उनको अपने प्राइसेस कम करने पड़ेंगे। उनको
अपनी क्वालिटी भी सुधारनी पड़ेगी। इससे
फायदा होता है कंज्यूमर का। लेकिन जब
गिल्ड रेस्ट्रिकशंस लगे हुए थे तब सबको यह
बात पता थी कि हम कितना ही महंगा बेचे,
कितना ही घटिया माल बेचे इस फाइव नंबर के
आदमी के पास और कोई ऑप्शन ही नहीं है।
इसको हमारा माल खरीदना ही पड़ेगा।
नेपोलियन ने कहा कि नहीं यह गलत है।
कंज्यूमर का इसमें नुकसान हो रहा है। सर
नेपोलियों कोड का हमें तो सेकंड पॉइंट भी
अच्छा लगा। तो नेपोलियनिक कोड का सेकंड
पॉइंट भी अपन नेपोलियन को दे देते हैं।
बहुत ही अच्छी बात कर रहा है अभी तक ये।
तीसरा पॉइंट नेपोलियन ये कहता था कि मैं
पूरे देश में यूनिफॉर्म लॉस लेकर आऊंगा।
स्टैंडर्डाइज वेट करूंगा और मेजरमेंट और
कॉमन करेंसी लेकर आऊंगा।
इमेजिन करो इंडिया में आज 28 स्टेट्स हैं।
और हर स्टेट का अपना लॉ हो।
मध्य प्रदेश वाले बोले हम अपने हिसाब से
चलाएंगे। हमें जो करना है हम वो करेंगे।
उत्तर प्रदेश वाले बोले हमारे लॉज़ अलग
होंगे। आंध्र प्रदेश वाले बोले हमारे लॉज़
अलग होंगे। जम्मू कश्मीर वाले बोले हमारे
लॉज़ अलग होंगे। क्या ऐसे देश चल सकता है?
सेम यही हाल फ्रांस के थे। सबके अपने-अपने
लॉज़ चलते थे। नेपोलियन ने कहा ये नहीं हो
पाएगा। और नेपोलियन ने पूरे देश के अंदर
यूनिफॉर्म लॉज़ लेकर आ गया। इसके अलावा
पूरे देश में अलग-अलग वेट और मेज़मेंट हुआ
करता था। अब मैं आज से कुछ साल पहले तक
भोपाल में रहता था। मैं भोपाल से कुछ टाइम
पहले बोर गया। अब भोपाल में मैं किराने की
दुकान में जाता था। कहता था भैया 1 किलो
शक्कर दे दो वो दे देता था। बेंगलुरु में
जाके भी जब मैंने उससे कहा 1 किलो शक्कर
दे दो वो दे देता है। आज मैं उत्तर प्रदेश
में हूं। मैं उनसे कहता हूं भैया 1 किलो
शक्कर दे दो। भाई साहब यह भी दे देता है
क्योंकि पूरे देश के अंदर यूनिफॉर्म वेट
और मेज़रमेंट इस्तेमाल हो रहा है। मांस
मध्य प्रदेश में भी किलो में नापा जा रहा
है। कर्नाटका में भी किलो में नापा जा रहा
है और उत्तर प्रदेश में भी किलो में नापा
जा रहा है। पूरे देश में ऐसा नहीं कि कहीं
किलो में हो रहा है तो कहीं पाउंड में हो
रहा है। नहीं पूरे देश में यूनिफॉर्म वेट
और मेजरमेंट है। आज हमारे पूरे देश के
अंदर एक करेंसी चलती है इंडियन रूपी। सोचो
कर्नाटक में कुछ और चलती होती है। मध्य
प्रदेश में कुछ और चलती होती और उत्तर
प्रदेश में कुछ और चलती होती। तो नेपोलियन
ने कहा पूरे देश के अंदर यूनिफॉर्म लॉस
होंगे जो पूरे देश के अंदर होंगे।
यूनिफॉर्म वेट और मेजरमेंट होगा और कॉमन
करेंसी होगी जो सबको माननी पड़ेगी। सर ये
पॉइंट भी नेपोलियन का अच्छा है। तीन पॉइंट
जाते हैं सर नेपोलियन को टिंगडिंग।
चौथा पॉइंट नेपोलियन ने ये कहा कि मैं
फ्यूडल सिस्टम को हमारे देश से हटा रहा
हूं।
अब फ्यूडल सिस्टम का मतलब क्या होता है?
पूरे के पूरे फ्रांस की जो जमीन होती थी
जमीन क्या करते थे? जमीन सारी के सारे
नोबल्स के पास हुआ करती थी। ठीक है?
नोबल्स क्या करते थे? वो सारी की सारी
जमीन जो होती थी वो नाइट्स को बांट देते
थे। यानी कि योद्धाओं को बांट देते थे। और
योद्धा क्या करते थे? वो सारी की सारी
जमीन पीजेंट्स को बांट देते थे। यानी कि
किसानों को बांट देते थे। अब किसान जिसका
मेन काम है जमीन पर खेती करना। उसकी खुद
की वह जमीन नहीं हुआ करती थी। वह जमीन
उसको नाइट्स देते थे और नाइट्स को वह जमीन
नोबल देते थे। अब यह जो सिस्टम हुआ करता
था इसमें क्या होता था कि नोबल नाइट को का
जमीन देता था। नाइट पीज़ेंट को जमीन देता
था और ये जमीन का आदान-प्रदान होता था दो
चीजों के लिए। एक होती थी लॉयल्टी
और एक होता था रेवेन्यू।
लॉयल्टी और रेवेन्यू। इन दो चीजों के बदले
जमीन का आदानप्रदान होता था।
यानी कि नोबल अगर नाइट को जमीन देता था।
वह कहता था मैं आपसे दो चीजें डिमांड करता
हूं। लॉयल्टी और रेवेन्यू। यानी कल को अगर
जरूरत आ पड़ी तो आपको लॉयल्टी मुझे
प्रॉमिस करनी पड़ेगी। आप मेरे लिए लड़ोगे।
और साथ ही साथ जो ये जमीन मैं आपको दे रहा
हूं इससे जो भी आप पैसा कमाओगे उसका
रेवेन्यू में आप मुझे शेयर दोगे। और सेम
चीज इस नाइट पीज़ से डिमांड करता था
रॉयल्टी और रेवेन्यू। तो इस तरीके का फुडल
सिस्टम चला करता था पूरे के पूरे फ्रांस
में। नेपोलियन कहता था मैं इसके भी खिलाफ
हूं। साथ ही साथ पूरे के पूरे फ्रांस में
सर्फडोम का सिस्टम चला करता था। सरफडोम का
मतलब होता है बॉन्डेड लेबर। बॉनडेड लेबर।
दरअसल यूरोपियंस क्या करते थे? अफ्रीका
जाते थे। और अफ्रीका जाने के बाद ये क्या
करते थे? वहां जाते थे। और एक आदमी से
बोलते थे अरे यार तुम्हारे तो बहुत सारे
बच्चे हैं। तो वो अफ्रीका का आदमी जो जंगल
में रहता था वो कहता था हां मेरे तो बहुत
सारे बच्चे हैं यार। तो वो उससे कहते थे
कि एक काम करो आप यहां जंगल में रहते हो।
अब कुछ जंगली जानवर आ जाता है तो आप क्या
करते हो? तो बोले हुलाला हूं मैं यहां से
ऐसे निकालता हूं तीर कमान और चला देता
हूं। बोले अगर शेर आ जाएगा तो तीर कमान से
कैसे मरेगा? उन्होंने कहा हुला लाला हूं
बात तो तू सही कह रहा है। तो ये लोग क्या
करते थे? अपनी सड़ी गली पुरानी कबाड़ वाली
जो बंदूक होती थी वो उनको पकड़ा देते थे।
इतने तो ये बंदूक है। अब आपको कुछ नहीं
करना है। जैसे ही आपके सामने कोई वाइल्ड
एनिमल आया आपको बस ट्रिगर दबाना है और वो
फट के चार हो जाएगा। उन्होंने कहा उला
लाला यह तो बढ़िया चीज है। बोले बस इसके
बदले आपके जो ये 2530 लड़के हैं उनमें से
हमें 101 लड़के आप गिफ्ट कर दो। तो एक
खटारा सी बंदूक के बदले 15-20 लड़के ले
जाया जाते थे। अब इन लड़कों को अफ्रीका से
यूरोप ले जाया जाता था। और फिर इनसे
जबरदस्ती काम करवाया जाता था खेतों में,
घरों में, फैक्ट्रीज में, इंडस्ट्रीज में।
इनको सैलरी नहीं दी जाती थी। इनको वापस
जाने नहीं दिया जाता था। इनसे कहा जाता था
तुम्हारी कीमत हम तुम्हारे पिताजी को देकर
आए। अब जिंदगी भर के लिए तुम हमारे गुलाम
हो। दिस इज सर्फडोम।
नेपोलियन इसके भी खिलाफ था। तो नेपोलियन
ने यह सारी की सारी चीजें करी थी जिसे
नेपोलियोंनीिक कोड कहते थे। लेकिन एक चीज
और नेपोलियन ने करी थी जो आपको पांचवा
पॉइंट याद रखना है। नेपोलियन ने पूरे के
पूरे फ्रांस का एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम को
ठीक कर दिया था। वो कैसे? नेपोलियन ने
क्या करा? पूरे के पूरे फ्रांस को 130
डिपार्टमेंट्स में बांटा।
130 डिपार्टमेंट्स में बांटा। आप यहां पर
देख सकते हो। डिपार्टमेंट नंबर एक,
डिपार्टमेंट नंबर दो, डिपार्टमेंट नंबर
तीन, डिपार्टमेंट नंबर चार, डिपार्टमेंट
नंबर पांच। ऐसे करके पूरे के पूरे फ्रांस
को 130 डिपार्टमेंट में बांटा। और हर
डिपार्टमेंट के ऊपर एक मेयर बिठा दिया। तो
130 डिपार्टमेंट के 130 मेयर हो गए। इसके
बाद नेपोलियन ने क्या करा? डिपार्टमेंट्स
का ग्रुप बनाया। जैसे कि आप देख सकते हैं
ये दो डिपार्टमेंट का एक ग्रुप है। ये तीन
डिपार्टमेंट का एक ग्रुप है। ये चार
डिपार्टमेंट का एक ग्रुप है। और
डिपार्टमेंट का जो ग्रुप होता था उसके ऊपर
एक आदमी बिठाया जाता था जिसे कहा जाता था
सब प्रीफेट।
ऐसे करके देश में कई सारे सब प्रीफेक्ट हो
गए। और सारे सब प्रीफेट के ऊपर एक आदमी
बिठाया जाता था जिसे प्रीफेट कहा जाते थे
और प्रीफेट डायरेक्ट नेपोलियन को रिपोर्ट
किया करता था।
तो इस तरीके से फ्रांस को रूल करने के लिए
नेपोलियो ने इस तरीके से फ्रांस का
एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम बनाया जो कि बहुत
तगड़ा था। अब आप बोलोगे कि सर नेपोलियन ने
तो कितना तगड़ा काम किया। पांचों के
पांचों पॉइंट बहुत अच्छे थे। ये सब पढ़ के
आपके दिमाग में तो ये आएगा कि नेपोलियन तू
तो जेम मालूस निकला रे। क्या तेरे नाम का
मैं छाती पे टैटू बनवा लूं क्या? लेकिन
इतनी जल्दी नहीं।
नेपोलियन ने बहुत सारे अच्छे काम किए और
इस कारण लोगों नेपोलियन का स्वागत भी
किया, उसका सपोर्ट भी किया। लेकिन देखते
ही देखते जिन लोगों ने शुरुआत में
नेपोलियन का स्वागत किया था बाद में वही
नेपोलियन के अगेंस्ट हो गए। जिन लोगों ने
के आने पर बहारों फूल बरसाओ गाया था वही
नेपोलियन के ऊपर पत्थर बरसाने लगे। और ऐसा
क्या हुआ? यही हमें अब समझना है और ये
क्वेश्चन सीबीएसई आजकल पूछने लगी है। अगला
टॉपिक है कि व्हाट वर द लिमिटेशंस ऑफ
नेपोलियनिक कोड? तो सबसे पहला लिमिटेशंस
ये बनाया गया है कि नेपोलियन ने अपने
सिटीजंस को हैवली टैक्स करना शुरू कर दिया
था।
नेपोलियन कहता था कि मैं कॉन्स्टेंट वॉर
में हूं। मैं जंग लड़ रहा हूं। मैं फ्रांस
को और बड़ा करना चाहता हूं। मैं जर्म
क्रूशिया पे कब्जा करना चाहता हूं।
स्विट्जरलैंड पे कब्जा करना चाहता हूं।
ऑस्ट्रंगेरियन एंपायर पे कब्जा करना चाहता
हूं। वो चाहता था और फ्रांस और बड़ा हो
जाए जिसके लिए वो कास्टेंटली मिलिट्री
कैंपेनेंस किया किया करता था और नेपोलियन
अपने लोगों से कहता था कि मैं जो ये
मिलिट्री कैंपेन कर रहा हूं इसके लिए मुझे
पैसा चाहिए। उस पैसे से मैं गोला बारूद
हथियार खरीदूंगा और यह पैसा मैं आपके ऊपर
टैक्स लगा के वसूलूंगा। तो नेपोलियन ने
अपने लोगों के ऊपर हैवी टैक्स लगा दिए थे
जो लोगों को पसंद नहीं आ रहे थे। तीसरी
बात बताई गई है कि नेपोलियन स्ट्रिक्ट
सेंसरशिप रखता था।
कौन क्या बोल रहा है, क्या छप रहा है,
क्या सुना जा रहा है। नेपोलियन इस पर कड़ी
निगरानी रखता था। नेपोलियन ने ऐसे बहुत
सारे आर्मी के लोग सिविल में छोड़ रखे थे
ताकि अगर कोई नेपोलियन के खिलाफ कोई
षड्यंत्र भी रास्ता पाया जाता था या उसके
खिलाफ कोई बोलता भी पाया जाता था तो उसको
उठा के जेल में डाल दिया जाता था और कुछ
केस में तो मरवा भी दिया जाता था।
तीसरा पॉइंट बताया गया कि नेपोलियन यंग
मैन को जबरदस्ती कंपलसरी मिलिट्री सर्विस
के लिए फोर्स करता था।
वो कहता था मैं मिलिट्री कैंपेन कर रहा
हूं। अगर आपके घर में कोई लड़का है तो
उसको मेरी मिलिट्री के अंदर सर्व करना ही
पड़ेगा। चाहे कुछ भी हो जाए।
अब आप खुद बताइए कि ये सपना नेपोलियन का
था कि वो पूरी दुनिया पे कब्जा करना चाहता
था। लेकिन उसके सपने को साकार करने के लिए
मैं अपना इकलौता बेटा क्यों कुर्बान कर
दूं। लोग इस बात से परेशान थे। और लास्ट
बात बताई गई है कि किस तरीके से नेपोलियन
जो था वो धीमे-धीमे करके एक डिक्टेटर की
तरह बिहेव करने लगा था।
मैं आपको एक बहुत ही तगड़ा एग्जांपल देता
हूं नेपोलियन की चीज को समझाने के लिए।
मैंने आपसे पहले ही कहा था किताब में
मौजूद हर इंपॉर्टेंट चीज मैं आपको
बताऊंगा। आपकी एनसीआरटी के अंदर ये पिक्चर
दे रखी है। इस पिक्चर का टाइटल है द ट्री
ऑफ लिबर्टी।
नेपोलियन। आप यहां पर देख सकते हैं जितने
भी दिख रहे हैं आपको तीन कलर की यूनिफार्म
पहने हुए ब्लू, वाइट और रेड कलर की ये
फ्रेंच सोल्जर्स हैं। नेपोलियन अपने
सोल्जर्स के साथ पड़ोस के इलाकों पे कब्जा
करता था। जब ये वहां जाते थे तो वहां के
लोग इनका खूब स्वागत करते थे। इनके ऊपर
फूल बरसाया जाता था। इनको अपने घरों में
बुलाया जाता था। इनको खाना खिलाया जाता
था। नेपोलियन भी जब वहां जाते थे तो वहां
पे वो ट्री ऑफ लिबर्टी की तरह अपने आप लगा
दिया जाता था। का कहते थे हम आपके
लिबरेटर्स हैं। हम आपको आजादी दिलाने आए
हैं। आपके राजा आपके तानाशाह के खिलाफ हम
आपको निकाल के ले जाएंगे। लेकिन बहुत
जल्दी नेपोलियन के जो सोल्जर्स थे वो अपना
डिसिप्लिन खो जाते थे। जैसे ही अपने कुछ
सोल्जर्स को नेपोलियन छोड़ के आगे बढ़
जाता था दूसरे इलाके पे कब्जा करने के लिए
तो नेपोलियन जिन सोल्जर्स को पीछे छोड़
जाता था। कई बार वो डिसीजंस अब वो अपना
डिसिप्लिन खो देते थे। किस तरीके से इस
पिक्चर में दिखाया गया है कि किस तरीके से
किसानों के ठेलों को वो लोग सीज कर लिया
करते थे। उनके माल को कब्जे में ले लिया
करते थे। किस तरीके से जिस इलाके में वो
जाते थे वहां की यंग वूमेन को हैरेस किया
करते थे। कई केसेस में उनको बैक टच किया
करते थे और कई तो रेप के भी किस्से सामने
आए थे। किस तरीके से ये लोग क्या करते थे?
लोगों को जबरदस्ती उनके घुटनों पर टिका
देते थे और कहते थे हमें इज्जत दो। हमें
इज्जत दो। अब हम तुम्हारे माई बाप हैं। हम
जो बोलेंगे तुमको वो करना पड़ेगा।
तो जैसा कि आपने देखा कि सरकाज्म दिखाया
गया है। ये एक सरकाज्म दिखाया गया है कि
किस तरीके से कहने को अपने आप को जो
लिबरेटर्स कहा करते थे वो किस तरीके से आम
पब्लिक के ऊपर जुल्म ढाया करते थे।
इन सब चीजों के बीच में नेपोलियो ने कुछ
ऐसा किया जो उसके कॉफिन की लास्ट नील
साबित हुई। मैं बात कर रहा हूं दोस्तों
बैटल ऑफ लिप्सिक की। बैटल ऑफ लिप्सिक 1813
में लड़ा गया था। आइए इसको मैं थोड़ा सा
आप लोग को डिटेल में बताता हूं। नेपोलियन
ने क्या किया? नेपोलियन यहां पर था।
नेपोलियन का ये देश है जिसका नाम है
दोस्तों फ्रांस।
यहां पर एक देश था जिसका नाम था रशिया।
फ्रांस और रशिया के बीच में एक जगह पड़ती
थी जिसे कहा जाता था पुरुशिया।
अब आप इससे पहले बोलोगे ऐ चश्मेश पुरुषिया
कौन सी जगह है? दोस्तों आज जिसे आप जर्मनी
कहते हो वंस अपॉन अ टाइम उसे पूशिया कहा
जाता था। अब नेपोलियन चाहता था सब इलाके
पर कब्जा करना। तो नेपोलियन ने क्या किया
दोस्तों? नेपोलियन अपने फ्रांस से निकला
और फ्रांस से होता हुआ ये पुरुशिया में
गया और पुरुशिया के बाद ये रशिया में गया।
तो जब नेपोलियन ये सब कर रहा था जब
नेपोलियन आगे जाता जा रहा था तो जितने भी
आसपोस के देश थे वो नेपोलियन से चिढ़ने
लगे थे। ये क्या बात हुई? यह कैसे हमारे
इलाकों में कब्जा कर सकता है? यह कैसे
पड़ोस के देशों के ऊपर कब्जा करता जा रहा
है? तो नेपोलियन के खिलाफ चार कंट्रीज ने
मिलके एक ग्रुप बनाया और उस ग्रुप का नाम
था सिक्स्थ कोिशन।
इस सिक्स्थ कोशन के अंदर चार कंट्रीज थी।
ऑस्ट्रिया, स्वीडन, पुरुशिया, रशिया। इसको
याद रखने की ट्रिक है एएसपीआर।
कौन सा प्यार? एएसपीआर। ऑस्ट्रिया,
स्वीडन, पुरुशिया, रशिया। इन्होंने कहा कि
इससे पहले नेपोलियन हमारे इलाके पर कब्जा
करे। हमारी कंट्री पर कब्जा करे। हम सबको
एक हो जाना चाहिए। ग्रुप बना लेना चाहिए।
सिक्स्थ कोिशन और हमें नेपोलियन के खिलाफ
जंग लड़नी चाहिए।
तो इन लोगों ने क्या किया? नेपोलियन के
खिलाफ जंग लड़ी। जहां एक तरफ एएसपीआर था
वहीं दूसरी तरफ अकेला नेपोलियन था।
अब नेपोलियन इतना ज्यादा कॉन्फिडेंट था कि
नेपोलियन ने पहले पुरुषिया पे कब्जा किया
और पुरुषिया के बाद ये रशिया चला गया।
अब यही इसकी सबसे बड़ी गलती साबित हुई
क्योंकि रशिया बहुत बड़ा देश था। रशिया ने
कुछ ऐसी चीजें करी जिसके कारण नेपोलियन
बहुत रह गया। तो सबसे पहले तो रशिया ने
क्या किया कि जैसे-जैसे नेपोलियन और उसकी
आर्मी आगे जाती जा रही थी। रशिया वाले
पीछे होते जा रहे थे। नेपोलियन आगे आता
रशिया वाले पीछे हो जाते। नेपोलियन आगे
आता रशिया वाले पीछे हो जाते। नेपोलियन और
उसकी आर्मी को लगा अरे यह तो डरपोक निकले।
सरेंडर कर रहे हैं।
लेकिन उनको क्या पता था कि वह एक ट्रैप
में फंसते जा रहे थे। क्योंकि जब रशिया के
लोग पीछे रिट्रीट करते जा रहे थे तो वह
कुएं पानी के कुएं के अंदर जहर मिला देते
थे। फसलों को जला दिया करते थे। घरों को
तोड़ दिया करते थे। इसे कहा जाता था
स्कॉज्ड अर्थ स्ट्रेटजी।
इससे क्या होता था? जब नेपोलियन की आर्मी
आगे जाती थी तो उनके पास पीने का पानी
नहीं होता था। खाने को खाना नहीं होता था
और ठंड में बचने के लिए सर पर छत नहीं हुआ
करती थी। और वो रशिया के ट्रैप में फंसते
चले गए। साथ ही साथ एएसपीआर नाम का जो
सिक्स्थ कोशन था इनके पास 1 लाख सोल्जर्स
नेपोलियन से ज्यादा थे।
तीसरा पॉइंट आप ये भी कह सकते हो कि
जैसे-जैसे फ्रांस आगे बढ़ता जा रहा था इन
लोगों ने उसको ट्रैप करने का कोशिश किया
और आगे एक टाइम पे ऐसा आया जब उन्होंने
फ्रांस के ऊपर नेपोलियन के ऊपर उसकी आर्मी
के ऊपर चारों डायरेक्शन से हमला किया।
नॉर्थ साउथ ईस्ट वेस्ट। और लास्ट चौथा
रीजन नेपोलियन के हारने का यह था कि
नेपोलियन के जो एलई थे जो सेक्सन सोल्जर्स
हुआ करते थे उन्होंने लास्ट में नेपोलियन
को धोखा दे दिया। इन चार रीज़न के कारण
नेपोलियन बैटल ऑफ लिप्सिक हार गया। और जब
नेपोलियन बैटल ऑफ लिप्सिक हार गया तो वो
पीछे-पीछे धीमे-धीमे करके रिट्रीट कर रहा
था। उसी टाइम पे पुरुशिया में एक जगह थी
जिसका नाम था लिप्सिक। पुरुशिया में एक
जगह थी जिसका नाम था लिब्सिक।
इन चारों कंट्रीज ने यानी ऑस्ट्रिया,
स्वीडन, क्रूशिया, रशिया नेपोलियन को
लिप्सिक में घेरा और नेपोलियन को यहां पे
हरा दिया। लेकिन क्या आपको जानते हैं कि
सिक्स्थ कोशन ने यानी एएसपीआर नेपोलियन को
बैटल ऑफ लिप्सिक हरा जरूर दिया लेकिन उसको
मारा नहीं। क्यों? जानते हो? उन्होंने
नेपोलियन को उठा के एग्जाइल पे एल्बा नाम
के एक आइलैंड पे भेज दिया। इसका एक रीज़
था। दरअसल किसी भी बड़े नेता का या किसी
भी बड़े सोल्जर्स का या किसी भी बड़े
आर्मी जनरल का बहुत बड़ा फैन बेस हुआ करता
था। अगर आप उसको मार दोगे तो उसके
सपोर्टर्स आज नहीं तो कल उसकी मौत का बदला
लेने आएंगे। तो ये एक तरीका होता था कि
देखो हमने आपके नेता को हमने आपके लीडर को
हरा जरूर दिया लेकिन मारा नहीं। क्योंकि
हम यह कहना चाहते हैं कि आपने जो किया वो
गलत था। लेकिन हम आपको एक और मौका दे रहे
हैं। नेपोलियन को हराने के बाद उन्होंने
एग्जाइल पे भेज दिया एल्बा नाम के आइलैंड
पे। आपकी एनसीआरटी के अंदर एक और बहुत
प्यारी फोटो है जिसमें बताया गया है कि
किस तरीके से नेपोलियन जब बैटल ऑफ लिप्सिक
हारने के बाद वापस आ रहा था तो उसके क्या
हाल थे।
यहां पर नेपोलियन को एक पोस्टमैन की तरह
दिखाया गया है। और इस पोस्टमैन के बैक से
निकलता हुआ हर लेटर एक कंट्री को
रिप्रेजेंट कर रहा है। और यह बता रहा है
कि जैसे-जैसे नेपोलियन वापस जाता जा रहा
था वो सारी कंट्रीज जिस पे इसने कब्जा
किया था कभी ना कभी वो इसके कंट्रोल से
इसके झोले से छूटती जा रही थी। तो ये
पेंटिंग ये बताती है दोस्तों आप लोग को।
अब नेपोलियन एल्बा भेज दिया गया। लेकिन जब
नेपोलियन को एलबा भेज दिया गया तो
नेपोलियन ने क्या करा? 10 महीने के अंदर
ही एल्बा से नेपोलियन एस्केप कर गया।
जिन सोल्जर्स को उस आइलैंड पे नेपोलियन को
कैदी बनाए रखने के लिए रखा गया था।
नेपोलियन ने उनको इन्फ्लुएंस किया और उनसे
बोला क्या तुम पागल हो? मैं नेपोलियन बोना
पार्थ हूं। मैं वो हूं जिसने फ्रांस को
इतनी ग्लोरी दिलाई। मैं वो हूं जिसने
फ्रांस को इतनी जंग जिताई। तुम मुझे कैदी
बना के रखोगे। मुझे प्रिजनर बना के रखोगे।
और वह सारे लोग नेपोलियन के साथ हो गए। 10
महीने के अंदर बैटल ऑफ लिप्जी खाने के 10
महीने बाद ही नेपोलियन एल्बा से भाग खड़ा
हुआ। लेकिन नेपोलियन इधर-उधर नहीं जाने
वाला था। वो अपनी गद्दी को अपनी छीनी गई
गद्दी को वापस लेने जा रहा था। नेपोलियन
गया पेरिस। और जैसे ही नेपोलियन पेरिस गया
जो सोल्जर्स और आए थे नेपोलियन से लड़ने
के लिए नेपोलियन ने उनको भी अपने अंडर में
ले लिया। और इसने धीमे से फ्रांस पर वापस
से कब्जा कर लिया। और फिर शुरू होता है
100 डेज रूल का। क्योंकि जब नेपोलियन वापस
गया तो उसने एग्जैक्ट 100 दिन तक रूल किया
था।
अब भाई जो लोग पुराने लोग थे जिन्होंने
पहले नेपोलियन को हराया था वो चिढ़ गए।
उन्होंने कहा यार ये क्या बात हुई? अभी
बैटल ऑफ लिप्सिक में हराया था हमने।
सिक्स्थ कोशन वर्सेस नेपोलियन। ऑस्ट्रिया,
स्वीडन, पुरुशिया, रशिया वर्सेस नेपोलियन।
इतनी मुश्किल से हराया। यह वापस आ गया
ठुमकता ठुमकता। तो इन्होंने कहा ठीक है
फिर से लड़ा देंगे इस बार 1815 में बैटल
होना था बैटल का नाम था बैटल ऑफ वाटर लू
लेकिन इस बार एक चेंज था आप सभी बच्चों को
पता होगा कि जो पिछला बैटल था उसमें
एएसपीआर
था ऑस्ट्रिया स्वीडन प्रश प्रूशिया रशिया
इस बार स्वीडन ने कहा कि हमारा इस वॉर से
कोई लेना देना नहीं है हम यह वॉर नहीं
लड़ेंगे हमारा हो गया और स्वीडन इस वॉर से
हार गया हट
ब्रिटेन हट गया लेकिन ब्रिटेन आ गया उसकी
जगह ए बी पी आर ब्रिटेन ने कहा कि यार
हमें नेपोलियन से बदला लेना है आज नहीं तो
कल हमें शक है नेपोलियन हम पे हमला कर
देगा तो इस बार स्वीडन की जगह ब्रिटेन आ
गया तो जैसा कि मैंने आपको बताया एक तरफ
थे एबीपीआर ऑस्ट्रिया ब्रिटेन पुरुशिया
रशिया वहीं दूसरी तरफ था नेपोलियन अकेला
होना क्या था। इस बार भी नेपोलियन हारने
वाला था। भाई एबीपिया ने दौड़ा-दौड़ा के
नेपोलियन को मारा। नेपोलियन के ऊपर कंबल
डाल डाल के नेपोलियन को मारा गया। बैटल ऑफ
वाटर लू भी नेपोलियन हार गए। लेकिन इस बार
ये जो पोलशन था इस बार जो ये टीम थी
इन्होंने वो गलती नहीं करी जो नेपोलियन से
पिछली बार हो गई थी। इन्होंने कहा इस बार
तेरे को बेटा एग्जाइल पे तो भेजेंगे।
लेकिन इस बार एग्जाइल पे भेजने से पहले
तेरे साथ हम एक ट्रीटी साइन कराएंगे जिसका
नाम है ट्रीटी ऑफ वियना।
क्योंकि तुम बड़े बदमाश हो। इससे पहले
तेरे को ट्रीटी ऑफ तेरे को एलबा भेजा था।
वहां से तू भाग खड़ा हुआ। इस बार
एग्रीमेंट साइन करके जा तू भाई। नहीं तो
फिर तुम वापस आ गए तो। अब दरअसल जैसा कि
मैंने आपको बताया कि इस बार नेपोलियन को
बैटल ऑफ बॉटल में ऑस्ट्रिया, ब्रिटेन,
पुरुशिया और रशिया ने हराया था।
इनमें से ऑस्ट्रिया नाम का जो देश है,
इसकी कैपिटल थी। इसकी कैपिटल का नाम है
वियनाम। इसकी कैपिटल का नाम है वियना।
और क्योंकि यह वाली ट्रीटी ऑस्ट्रिया की
कैपिटल वियना में साइन करी गई थी। इसका
इसलिए नाम था ट्रीटी ऑफ़ वियना।
सोचो अगर ये ट्रीटी उत्तर प्रदेश की
कैपिटल लखनऊ में साइन करी होती तो इसका
नाम हो जाता ट्रीटी ऑफ़ लखनऊ। अब ट्रीटी ऑफ़
वियना में क्या किया गया? एक राउंड टेबल
लगाई गई।
इस राउंड टेबल में सबसे पहले एक तरफ बैठे
ड्यूक मैटरनिच जो ऑस्ट्रिया के जो
ऑस्ट्रिया के चांसलर हुआ करते थे। आप
बोलोगे चांसलर क्या होता है? जैसे हमारे
देश में एक पोस्ट होती है प्रेसिडेंट की
वैसे ही ऑस्ट्रिया और जर्मनी जैसे देश में
एक पोस्ट होती है उसे कहते हैं चांसलर।
तो ऑस्ट्रिया का चांसलर था ड्यूक मैटरनिच।
और क्योंकि ये ये ट्रीटी साइन करवा रहा
था। इसके देश में इसके शहर में हो रही थी।
तो बीचों-बीच में ये बैठ गया। एक तरफ
नेपोलियन को बिठाया गया और दूसरी तरफ
ब्रिटेन, क्रूशिया और रशिया के लोगों को
बिठाया गया। अब आप इमेजिन करिए यहां पर
ड्यूक मैटरनिज बैठे हुए हैं। चांसलर ऑफ
ऑस्ट्रिया। इधर नेपोलियन बैठे हुए हैं और
इधर ब्रिटेन, पुरुष और रशिया वाले बैठे
हुए हैं। अब नेपोलियन कह रहा है हां हार
गया बैटल ऑफ़ व्हाट लू। बताओ क्या साइन
करना है? इन्होंने कहा ट्रीटी ऑफ वियना का
पहला पॉइंट यह है
कि जो बोर्बन डायनेस्टी याद करो लुईस 16
जिस डायनेस्टी से था जो बोर्बन डायनेस्टी
को फ्रांस से हटाया गया है उसी बोर्बन
डायनेस्टी को वापस से रिस्टोर किया जाएगा।
अब तुम बोलोगे रिस्टोर
क्या लुईस 16 को मारा नहीं गया था?
बिल्कुल मारा गया था। लेकिन पूरे खानदान
को थोड़ी मार दिया था। लुईस 16 को मार
दिया। उसकी वाइफ मैरी एंथोइनथ को मार
दिया। लेकिन कोई तो बचा होगा बोर्बन
डायनेस्टी का। तो ये एबीपीआर वालों ने
सबसे पहला पॉइंट ट्रीटी ऑफ़ वियना का ये
कहा कि हम बोर्बन डायनेस्टी को वापस से
पावर में ला रहे हैं। अब तुम बोलोगे
एबीपीआर वालों को बोर्बन डायनेस्टी से
क्या प्यार था? दरअसल ऑस्ट्रिया, ब्रिटेन,
क्रूशिया, रशिया में भी मोनार्क्स रहा
करते थे। कोई राजा या रानी रहा करते थे।
और यह चाहते थे कि फ्रांस में भी कोई
मोनार्क यानी कोई राजा या रानी रहे। तब
लोग डेमोक्रेसी की डिमांड नहीं करेंगे।
इसलिए इन्होंने बोर्बन डायनेस्टी को
रिस्टोर कर दिया और बोरबन डायनेस्टी के
राजा लुईस 18 को फ्रांस का नया राजा बना
दिया।
सेकंड पॉइंट बताया गया है कि अंडर
नेपोलियन बोनापार्थ फ्रांस ने जितनी भी
टेरिटरी पे कब्जा किया था। चाहे वो
स्विट्जरलैंड की हो, चाहे पुरुशिया की हो,
चाहे ऑस्ट्रिया की हो, चाहे ब्रिटेन की
हो, चाहे रशिया की हो। फ्रांस को वो सारी
की सारी टेरिटरीज वापस देनी पड़ी।
तीसरा पॉइंट ये बनाया गया है कि फ्रांस के
आसपास कई सारे स्टेट सेटअप किए। यानी कि
मान लेते हैं कि ये फ्रांस है। ये फ्रांस
है।
और फ्रांस के ऊपर चले जाए तो यहां पर मान
लेते हैं नीदरलैंड्स है।
यहां पर मान लेते हैं पुरुशिया है।
तो इन्होंने क्या किया? फ्रांस के आसपास
कई सारे छोटे-छोटे स्टेट्स बना दिए।
फ्रांस के आसपास कई सारे छोटे-छोटे
स्टेट्स बना दिए
ताकि कल को वापस से फ्रांस में कोई सरफिरा
आदमी आ जाए और उसके सर पर क्रांति चढ़
जाए। तो जब वो फ्रांस से निकल के
लेदरलैंड्स कब्जा करने जाएगा तो पहले उसको
यह इलाके पे कब्जा करना पड़ेगा। ये इलाके
पे कब्जा करना पड़ेगा। तब तक नेदरलैंड्स
वाले अपनी डिफेंस को मजबूत कर लेंगे और
प्रिपयर्ड हो जाएंगे। तो फ्रांस के आसपास
कई सारे स्टेट सेटअप करे गए ताकि कल को
वापस से कोई नेपोलियन जैसा सरफिरा आ जाए
तो वो उससे बचने तक के लिए प्रिपेयर हो
सके। उनको टाइम मिल सके। इसके अलावा चौथा
पॉइंट ये बताया गया है कि किस तरीके से
चौथे पॉइंट को जरा ध्यान से समझिएगा। मैं
चौथे पॉइंट को आप लोगों को नेक्स्ट स्लाइड
में बताना चाहूंगा। तो थोड़ा सा ये डिटेल
में समझने वाला पॉइंट है। चौथे पॉइंट में
ये बताया गया कि अगर आप यहां पे देखें
यहां पर आपके सामने फ्रांस है।
ठीक है?
फ्रांस के आप ऊपर चले जाइए तो यहां पे
नॉर्थ है और फ्रांस के अगर आप नीचे आ जाइए
तो यहां पे साउथ है। ठीक है? फ्रांस के
नॉर्थ में नीदरलैंड्स को फ्रांस के नॉर्थ
में नेदरलैंड्स नाम का एक किंगडम था।
इन लोगों को बेल्जियम नाम की कंट्री
बेल्जियम नाम की कंट्री गिफ्ट कर दी गई।
ट्रीटी ऑफ वियना में फ्रांस ने से
बेल्जियम लिया और नीदरलैंड्स को गिफ्ट कर
दिया।
यही नहीं साउथ की बात करें तो साउथ में
बताया गया है कि किस तरीके से जेनेवा वाज़
एडेड टू पिडमोंट। यानी कि साउथ में पिडम
वाले इलाके में
जेनोवा गिफ्ट कर दिया।
भाई फ्रांस से कोई कंट्री से कोई फ्रांस
से कोई चीज निकाली तो उसको आजाद करने की
जगह गिफ्ट कर रहे हैं ये लोग। नीदरलैंड्स
को बेल्जियम दे दिया। पिडमंड को जेनोवा दे
दिया।
और मैं एक इतना गरीब हूं कि मेरा बर्थडे
में कोई मुझे ₹50 का लिफाफा ना दे रहा है।
और यहां पर कंट्रीियां गिफ्ट हो रही हैं।
तो यह भी ट्रीटी ऑफ वियना के अंदर देखा
गया।
यह पॉइंट बहुत इंपॉर्टेंट है। यह आगे जाके
इस्तेमाल होगा। इसलिए ये वाले पॉइंट को
याद रखिएगा कि किस तरीके से नीदरलैंड्स को
बेल्जियम गिफ्ट कर दिया गया।
इसके बाद बताया गया है कि किस तरीके से एक
चीज जो नेपोलियन ने करी थी वो नहीं छेड़ी
गई। नेपोलियन ने 39 जर्मन फेडरेशन का एक
ग्रुप बनाया था। दरअसल क्या हुआ था? ऐसे
छोटे-छोटे छोटे-छोटे 39 स्टेट्स हुआ करते
थे। लापोलियन ने ये 39 स्टेट्स को मिला के
एक जर्मन फेडरेशन बनाया। जानते हो क्यों?
अब 39 फेड स्टेट्स में 39 लोग होंगे तो
पता नहीं कल किसका दिमाग फट जाए। कल पता
नहीं किसके दिमाग में क्रांति छा जाए और
वो बाकियों पे कब्जा कर दे, फ्रांस पे
कब्जा कर दे। तो नपोलियन ने कहा 39 लोगों
को मॉनिटर करना। कंट्रोल करने से अच्छा है
इन 39 के ऊपर एक आदमी बिठा दो। उसको
कंट्रोल करो। तो जो ऑस्ट्रिया, ब्रिटेन,
पुरुशिया, रशिया जिन्होंने ये बैटल जीता
था उन्होंने सब कुछ अनडू कर दिया लेकिन ये
अनडू नहीं किया क्योंकि उनको भी लगता था
ये बात तो सही है। 39 लोगों को कंट्रोल
करने से अच्छा है एक आदमी को कंट्रोल करो।
तो इसलिए उन्होंने इस चीज को कोई भी किसी
ने नहीं छेड़ा। ये थी आपकी ट्रीटी ऑफ़
वियना जो आपको अगला क्वेश्चन पांच नंबर के
लिए पूछा जाएगा।
यानी इस चैप्टर से अभी तक मैंने तुम्हें
तीन क्वेश्चन बता दिए जो एग्जाम में पूछे
जा सकते हैं। एक फ्रांस के लोगों ने सेंस
ऑफ कलेक्टिव बिलॉन्गिंग के लिए क्या-क्या
किया? दूसरा नेपोलियोनिक कोड क्या है? और
तीसरा ट्रीटी ऑफ़ वियना के पांच पॉइंट
बताइए। ये पांच तीन ये तीन क्वेश्चन जो
हैं ये चारप नंबर के एग्जाम में पूछे जाते
हैं। इसलिए आपको इनको रट के चलना है। डन
हो गई बात। लेकिन फ्रांस में जो ये हुआ था
उससे सब लोग खुश नहीं थे। फ्रांस में जो
यह हुआ था उससे सब लोग खुश नहीं थे। यह जो
रिवोल्यूशनरीज थे इनको लगता था यह क्या
बात हुई? बड़ी मुश्किल से लुईस को हटाया
रोबिस पेरी आ गया। रोबिस पेरी को हटाया
डायरेक्टरी आ गई। डायरेक्टरी को हटाया
नेपोलियन आ गया। अब नेपोलियन को हटाया तो
वापस से बोर्बन डायनेस्टी आ गई। यानी ये
तो हम घूम के स्क्वायर वन हो गए हैं। जहां
से निकले थे वापस से वहीं आ गए हैं। तो
इतने आंदोलन का इतने लोगों की मौत का इतने
लोगों की शहादत का क्या मतलब रहा? तो ये
जो बहुत सारे रिवोल्यूशनरीज थे वो इस बात
से चिड़े हुए थे। लेकिन उनको यह बात भी पता
थी कि जो यह नई नवेली सरकार बनी है ये
लुईस 18 की नई नवेली जो सरकार बनी है वापस
से बोर्बन डायनेस्टी की वो इन
कंजर्वेटिव्स को बिल्कुल पसंद नहीं करती
है। वो इन रिवोल्यूशनरीज को बिल्कुल पसंद
नहीं करती। क्योंकि इन्हीं रिवोल्यूशनरीज
के कारण ही सबसे पहले बोर्बन डायनेस्टी को
हटाया गया था। लुईस 16 को हटाया गया था।
तो यहां पर यही बताया गया है कि सबसे पहले
तो इन लोगों को यह डर था कि हमें कोई
सप्रेस ना कर दे। यह लुईस 18 यह जो
नया-नया राजा बना है ये वारन डायनेस्टी जो
नई-नई पावर में आई है ये सबसे पहले हमें
उठा के जेल में डालेगी तो ये सब के सब
अंडर ग्राउंड हो गए। इन्होंने अंडरग्राउंड
होने के बाद कई सारे सीक्रेट ग्रुप्स
बनाए। जिसमें ये अपने जैसे लोगों को
ट्रेनिंग देते थे। लोगों को भड़काते थे।
चलो फिर एक हो जाओ। फिर एक बार क्रांति
करते हैं। पहले हरा चुके हैं। एक बार फिर
हराएंगे इन लोगों को। तो इन लोगों ने कई
सारे लोगों को ट्रेन किया। कई सारे लोगों
के साथ अपने आइडिया शेयर किए।
लिबरल नेशनलिस्ट अपोज मोनार्की फॉर्म। और
ये सब के सब जो थे इनका सिर्फ एक टारगेट
था कि हमें राजा रानी नहीं चाहिए। हमें
हटाना पड़ेगा। लुईस एटीन को हमें हटाना
पड़ेगा। ये लोग लिबर्टी ऑफ़ फ्रीडम के लिए
लड़ते थे। इनको आजादी चाहिए थी।
तो ऑब्वियस सी बात है जो एक रिवोल्यूशनरी
जब इकट्ठा होंगे तो आज नहीं तो कल कोई
क्रांति तो आएगी। आज नहीं तो कल कोई ना
कोई लड़ाई तो होगी। और आपको ये
रिवॉल्यूशनरीज के आने के बाद तीन रिवॉलशंस
को याद रखना है। सबसे पहला रिवॉल्यूशन
जुलाई में हुआ था। जुलाई 1830 फ्रांस में।
इसमें क्या हुआ? इसमें यह हुआ कि लुई
फिलिप नाम का एक आदमी था जो खुद बोर्बन
डायनेस्टी से बिलोंग करता था। यह लुई
फिलिप गया रिवोल्यूशनरीज के पास और इसने
जाके बोला हेलो मुझे आप लोगों से बात करनी
है। रिवोल्यूशनरी ने कहा अरे ये तो बोरन
डायनेस्टी का आदमी है। अरे ये तो लुई
फिलिप है। अरे इसका भाई तो राजा बना हुआ
है। इसको मारो। ये अपनी कंप्लेंट कर देगा।
हम लोग अंडरग्राउंड छुपे हुए थे। इसको
हमारे बारे में कैसे पता चला? तो लुई
फिलिप ने कहा कि आई केम इन गुड फेथ।
मैं आपके साथ कॉम्प्रो करना चाहता हूं।
मेरे आईडिया तो सुनो। रिवोल्यूशनरी ने कहा
बताओ क्या दिक्कत है? डरा ही दिया हमको तो
एकदम। तो लुई फिलिप कहता है मैं मानता हूं
कि जो इस समय राजा बना हुआ है लुईस 18
मेरा रिश्तेदार है। लेकिन मुझे वो आदमी
पसंद नहीं है। उसकी जगह तुम मुझे राजा बना
दो। तुम लोग रिवॉल्यूशन की तैयारी तो कर
ही रहे हो चुप-चुप के। मैं तुम्हारा साथ
दूंगा। चलो एक हो जाते हैं और अपन मिलके
लड़ाई झगड़ा करेंगे। तुम लुईस 18 को हटा
के मुझे राजा बना दो। लुईस फिलिप को राजा
बना दो और मैं पावर 50-50 करने को तैयार
हूं। यानी कि मैं फ्रांस को
कॉन्स्टिट्यूशन मोनार्क बनाने को तैयार
हूं। यानी अगर तुमने मुझे राजा बना दिया
तो 50% पावर मैं अपने पास रखूंगा और 50%
पावर मैं तुम लोगों को दे दूंगा।
और इस तरीके से जुलाई रिवॉल्यूशन हुआ और
जुलाई रिवॉल्यूशन के अंदर नई नवेला अभी जो
लुईस 18 राजा बना था बैटल ऑफ वाटर लू
हारने के बाद ट्रीटी ऑफ वियनस साइन करने
के बाद इसको राजा बनाया गया था उसको हटा
दिया गया और लुई फिलिप को वापस राजा बना
दिया गया। तो ये तो पहला आंदोलन हुआ था जो
फ्रांस में हुआ था। अब बात करते हैं सेकंड
आंदोलन की जो कि बेल्जियम में हुआ था। आप
लोगों को थोड़ी देर पहले मैंने आपको एक
चीज बताई थी। और मैंने आप लोगों को बताया
था कि किस तरीके से ट्रीटी ऑफ वियना में
नीदरलैंड्स को बेल्जियम गिफ्ट कर दिया गया
था। नेदरलैंड्स को बेल्जियम गिफ्ट कर दिया
गया था।
बेल्जियम ने कहा हम कोई खिलौना है जो
तुमने गिफ्ट कर दिया। हमसे पूछा
और जुलाई के रिवॉल्यूशन के तुरंत अगले
महीने यानी अगस्त 1830 में बेल्जियम के
लोगों ने किंगडम ऑफ नेदरलैंड्स के खिलाफ
लड़ाई लड़ी और अपने आप को इंडिपेंडेंट
घोषित कर दिया जो कि दूसरा रिवॉल्यूशन था
दोस्तों।
तीसरा रिवॉल्यूशन ग्रीस में हुआ और ये
रिवॉल्यूशन 1831 से 1832 में हुआ था।
जानते हैं ग्रीस की क्या कहानी थी। दरअसल
ग्रीस के बाजू में एक कंट्री है जिसका नाम
है टर्की। उस टाइम पर टर्की में ऑटोमन
एंपायर का कब्जा था जो कि एक इस्लामिक
एंपायर था और ऑटोमन एंपायर चाहता था कि
पूरी दुनिया पे इस्लामिक रूल हो जाए। तो
ऑटोमन एंपायर ने इसके लिए ग्रीस पे भी
कब्जा कर रखा था। अब जो ग्रीस के लोग थे
वो क्रिश्चियन हुआ करते थे। ग्रीक
ऑर्थोडॉक्स क्रिश्चियन। और ग्रीस के लोग
क्रिश्चियन। ऑटोमैन एंपायर के लोग मुस्लिम
तो क्रिश्चियन और मुस्लिम यानी कि रिलीजन
की लड़ाई थी यहां पे। बड़ी मुश्किल से
ग्रीस के लोगों ने कहा कि नहीं ये बहुत
गलत है। हमें मारा जा रहा है। उन्होंने
पूरी दुनिया के क्रिश्चियन से अपील करी कि
देखो किस तरीके से हमें मार रहे हैं। हमें
कन्वर्ट कर रहे हैं। हमें बचाओ। तो ग्रीस
के लोगों की बहुत सारे लोगों ने मदद करी।
और आखिरकार ग्रीस के लोगों ने ऑटोमन
एंपायर को हराया और उनसे साइन करवाई
ट्रीटी ऑफ़ कॉन्स्टेंटो पोल। और इस तरीके
से ग्रीस भी ऑटोमैन एंपायर के कब्जे से
छूट गया।
आपकी एनसीईआरटी के अंदर इसी इसी लड़ाई से
एक पिक्चर दे रखी है। ये पिक्चर ये वाली
पिक्चर मैं आप लोगों को बताता हूं कि इसी
इसी से एक पिक्चर दे रखी है। चलिए थोड़ी
देर बाद मैं आपको बताऊंगा। लेकिन किस
तरीके से हमने देखा कि रिवॉल्यूशनरीज के
कारण तीन रिवॉल्यूशन हुए। 1 जुलाई 1830
में फ्रांस में हुआ।
बोर्बन डायनेस्टी के लुईस 18 को हटाकर लुई
फिलिप को पावर में लाया गया ताकि पावर
50-50 हो सके। दूसरा बताया गया कि किस
तरीके से बेल्जियम के लोगों ने नी
नेदरलैंड से आजादी पाई अगस्त 1830 में और
तीसरा बताया किस तरीके से ग्रीस के लोगों
ने ऑटोमन एंपायर से आजादी पाई। अब सब कुछ
ठीक चल रहा था कुछ टाइम तक। कुछ टाइम तक
लेकिन तभी यूरोप में कुछ ऐसा हुआ जो वापस
से एक आंदोलन को जन्म दे गया। दरअसल हुआ
यह कि यूरोप में पपुलेशन बहुत रैपिड लेवल
पर ग्रो करने लग गई।
लोगों के चार-चार बच्चे होने लगे। पांच-प
बच्चे होने लगे। 10-10 बच्चे होने लगे। अब
आप बोलोगे सर आपको इसमें भी दिक्कत है।
पापुलेशन बढ़ रही है तो दिक्कत है। अरे
क्या दिक्कत है? हो जाने दो ना बच्चे।
बढ़िया। बच्चे की प्रॉब्लम ये थी कि जहां
एक तरफ पॉपुलेशन बढ़ रही थी, वहीं दूसरी
तरफ लगातार क्रॉप फेल होती जा रही थी। कभी
सूखा पड़ जाता था तो कभी बाढ़ आ जाती थी।
कभी किसी क्रॉप में कोई बीमारी पड़ जाती
थी जिसके कारण क्रॉप फेल होती जा रही थी।
अगर पापुलेशन बढ़ेगी तो उस पॉपुलेशन को
खाना भी तो खिलाओगे। पापुलेशन बढ़ रही थी।
एग्रीकल्चर बढ़ नहीं रहा था जिसके कारण
लोग भुखमरी से परेशान होने लगे थे। वहीं
यहां पे ये बताया गया कि किस तरीके से उस
टाइम पर इंग्लैंड के बड़े-बड़े शहर लिवर
पूल और मैनचेस्टर में इंडस्ट्रीज सेटअप
होना शुरू हो गई थी। और उस इंडस्ट्रीज में
जो सस्ती चीजें बनती थी वह फ्रांस में आकर
बिकने लगी थी। तो जो फ्रांस के लोकल लोग
थे जो पहले हाथों से चीजें बनाते थे और
फिर उसको बेचते थे और पैसा कमाते थे। अब
उनका धंधा बंद हो गया था क्योंकि फ्रांस
के लोग अब इंग्लैंड की चीजें खरीदना पसंद
कर रहे थे क्योंकि ना केवल वो सस्ते थे और
वो अच्छे भी थे।
तो अब आप यह समझिए कि फ्रांस के लोगों के
पास कुछ बिक भी नहीं रहा है क्योंकि सब के
सब अब इंग्लैंड का माल खरीद रहे हैं।
लोगों की जेब में पैसा नहीं था और लास्ट
बट नॉट द लीस्ट कि पैसा था नहीं लेकिन
टैक्स वगैरह बढ़ते जा रहे थे। ये सब के सब
आप देख सकते हैं एक परफेक्ट रेसिपी है एक
और आंदोलन की और जो कि हुआ भी। इस बात से
हैरान परेशान हो के फ्रांस के लोगों ने
लुईस 16 का घर घेर लिया।
वो सिर्फ एक जवाब चाहते थे कि हमारे पास
खाने को नहीं है। हमारा सामान बिक नहीं
रहा है क्योंकि सब लोग इंग्लैंड की
इंडस्ट्री से बना हुआ सामान खरीद रहे हैं।
क्रॉप फेल हो रही है। सब कुछ होता जा रहा
है। आप कुछ कर क्यों नहीं रहे हो हमारे
लिए? लेकिन लुई फिलिप जो था वो इस बात से
इतना डर गया कि वो वहां से भाग खड़ा हुआ।
अपना ही देश छोड़ के लुई फिलिप भाग खड़ा
हुआ। अभी-अभी राजा बना था ये। और यह भाग
गया भाई साहब। अब अगेन जब राजा ही भाग गया
तो फिर देश कैसे चलाया जाएगा? तो फिर बनाई
गई नेशनल असेंबली
और नेशनल असेंबली ने यह डिसाइड किया कि अब
हम वोट देंगे और वोट देके अपने पसंद के
आदमी को सेलेक्ट करेंगे। वो आने वाले कुछ
साल के लिए हमारे देश को चलाएगा हमारे
बिहाफ पे। लेकिन यहां पे एक बात मैं आपको
बता दूं कि जो ये नेशनल असेंबली थी इसमें
यूनिवर्सल एडल्ट फ्रेंचाइजी नहीं थी।
इसमें सिलेक्टेड फ्रेंचाइजी
क्योंकि इस नेशनल असेंबली के अंदर केवल
एडल्ट मेल्स को वोट देने का अधिकार था
जिसकी उम्र 21 साल से ज्यादा थी।
यानी कि इस नेशनल असेंबली में भी वोट देने
के अधिकार की ऐज जो रखी गई थी वो 21 साल
रखी गई थी। हमारे देश में 18 है। और इस
नेशनल असेंबली में भी वोट देने का अधिकार
सिर्फ मेल्स के पास था। फीमेल्स के पास
नहीं था। अब आप देख सकते हो किस तरीके से
नेशनल असेंबली आ गई। आप बोलोगे सर बहुत
कंफ्यूजिंग है। कोई आया, कोई गया, कोई
आया, कोई गया। एक छोटा सा रिककैप हो जाता
तो मजा सा आ जाता। आइए फटाफट एक रिककैप
करा लेते हैं। मैंने आपको बताया किस तरीके
से लुईस 16 बॉर्बन डायनेस्टी के थे। और
इन्होंने देखा था कि यूएसए के ऊपर
यूनाइटेड किंगडम यानी ब्रिटिशर्स ने कब्जा
कर रखा था। तो यह इन्होंने लोन लेकर यूएसए
को पैसा दिया और यह पैसे से यूएसए से कहा
कि तुम अपने आप को आजादी दिला दो यूके से
और इस लोन को चुकाने के लिए अपने ही देश
के थर्ड एस्टेट के लोगों के ऊपर टैक्स लगा
दिया। ये इसकी सबसे बड़ी गलती थी क्योंकि
उसके बाद जो आंदोलन हुए उसने इसकी गद्दी
नहीं इसकी जान तक ले ली। लुईस स्टीन के
बाद पावर आई थी मैगजी मिलियन रूबीस पेरी
के पास जो 1793 से 94 तक पावर में यानी कि
डेढ़ दो साल पावर में रहा था। जिस दौरान
यह पावर में रहा था, लोगों को शुरुआत में
लगता था कि बहुत अच्छा आदमी है। जैकोबिन
क्लब इसी ने फॉर्म किया था। लेकिन देखते
ही देखते पता चला कि बहुत शकी आदमी है।
इसने अपने कार्यकाल में 16,000 लोगों को
गुलेट करवाया। लोग समझ गए थे कि अब एक
आदमी के पास पावर नहीं देनी है। तो पावर
पांच लोगों में बांटी गई। डायरेक्टरी आई।
लेकिन ये पांच लोग कभी भी किसी डिसीजन तक
पहुंच ही नहीं पाते थे। तो उसके बाद पावर
फ्रांस की आर्मी के जनरल नेपोलियन
बोनापार्थी को दी गई। लेकिन नेपोलियन
बोनापार्थी भी बहुत जल्दी डिक्टेटर की तरह
बिहेव करने लगा। लोगों से टैक्स लेने लगा।
उनके लड़कों को जबरदस्ती आर्मी में फोर्स
करने लगा भरने के लिए। तो नेपोलियन को
बैटल ऑफ वाटर लू में हराया गया और उससे
ट्रीटी ऑफ़ वियना साइन करवाई गई। और उसके
बाद कंजर्वेटिव्स की सरकार आई। ये वो लोग
थे जो चाहते थे कि राजा रानी का ही रूल
होना चाहिए। इसलिए इन्होंने बोर्बन
डायनेस्टी को पावर में लेकर आए। लुईस 18
को पावर में लेकर आए। लेकिन रिवोल्यूशनरीज
के साथ मिलके लुई फिलिप ने अपना षड्यंत्र
रचा और अपने ही परिवार के आदमी को हटा के
खुद राजा बन गया और 50-50 पावर शेयर कर
ली। लेकिन फ्रांस में जो क्रॉप फेलियर हो
रहा था, पॉपुलेशन बढ़ रही थी और
इंडस्ट्रियलाइजेशन इंग्लैंड के होने के
कारण लोगों का माल नहीं बिक रहा था। तो
लोग जब इससे सवाल पूछने गए तो लुई फिलिप
भाग गया। तो इसके बाद नेशनल असेंबली की
स्थापना हुई थी। 1848 में। लेकिन यह बात
ध्यान रखिएगा कि नेशनल असेंबली भी अभी
परफेक्ट नहीं है क्योंकि इसमें 21 साल से
ज्यादा वालों के पास वोट देने का अधिकार
है और केवल मेल्स के पास वोट देने का
अधिकार है। यहां पर आपके सामने फ्रांस की
पूरी कहानी समाप्त होती है। अगर आपने यह
पढ़ लिया तो आप यकीन माने फ्रांस के लोगों
से ज्यादा आपको फ्रांस की कहानी से पता चल
गई है। अब आइए अब हम उस इमेज को पढ़ लेते
हैं जो इमेज इस चैप्टर के पहले पेज पर थी।
दोस्तों मैंने आपसे कहा था फोडूंगा कुछ
नहीं। इस इमेज में सबसे पहले आप यहां पे
देख सकते हो यहां पे एक स्टैचू ऑफ लिबर्टी
बना रखा है। जिनके एक हाथ में टॉर्च ऑफ
इनलाइटमेंट है तो दूसरे हाथ में चार्टर ऑफ
राइट ऑफ मैन है।
एक हाथ में टॉर्च ऑफ एनलाइटमेंट है। यानी
कि ये लोगों को बोल रही है कि मैं इस मेरी
इस टॉर्च की रोशनी से तुम आगे बढ़ो। मैं
तुम्हें ज्ञान दे रही हूं। मैं तुम्हें
रास्ता दिखा रही हूं। बड़े चलो तुम। व
दूसरे हाथ में राइट्स ऑफ मैन है। यानी अब
पहली बार लोगों को राइट्स मिलने वाले थे।
चाहे वो किसी भी तरीके का राइट हो। लेकिन
पहली बार राइट्स की बात हो रही थी। इसके
बाद बताया गया है कि किस तरीके से इस
स्टैचू को ऑलरेडी यूएसए और स्विट्जरलैंड
क्रॉस कर चुके हैं। जो ये बता रहे हैं कि
ये दोनों देश ऑलरेडी एक नेशन स्टेट बन
चुके हैं। वहीं अभी-अभी स्टैचू के पास
पहुंचा है फ्रांस। जो इस बात का सबूत है
कि अब फ्रांस भी एक देश बनने वाला है और
फ्रांस के जस्ट पीछे जर्मनी है जो यह बता
रहा है कि तुरंत फ्रांस के बाद अब जर्मनी
एक देश बनेगा।
इस लंबी सी लाइन को ऊपर से जीसस क्राइस्ट
और बाकी एंज्स जो हैं वो अपना आशीर्वाद दे
रहे हैं और लोगों से बोल रहे हैं जो कर
रहे हो सही कर रहे हो बढ़े चलो आगे करे
चलो।
यहां पर आप देख सकते हो किस तरीके से
ग्राउंड पर कई सारे एब्सोल्यूटिस्ट
इंस्टट्यूट्स के सिंबल्स पड़े हुए हैं।
बेड़ियां पड़ी हुई है। चैन पड़ी हुई है।
क्राउन पड़ा हुआ है। जो जो स्टैचू ऑफ
स्टैचू के पास से निकलता जा रहा है वो
अपने जिनसे आजादी ले रहा है उनके सिंबल्स
को तोड़ के यहीं फेंकता हुआ जा रहा है। और
लास्ट यहां बताई गई है कि इस लाइन में
पीछे अगर आप चले जाएं तो यहां पे आपको
आदमी, औरत हर क्लास का अमीर, गरीब,
क्लर्जी, नोबिलिटी, पीज़ेंट सब आपको देखने
को मिलेगा। तो इस तरीके की इमेज आपसे
एग्जाम में पिक्चर स्टडी में पूछ ली जाती
है। आइए कुछ वर्ड्स हैं जिनके बारे में
मैं आप लोग को बता दूं। ये दो नंबर की इन
लोगों की डेफिनेशन। इन सब की डेफिनेशन आप
लोगों को दो नंबर के लिए एग्जाम में पूछी
जा सकती है। इसलिए इसको अच्छे से याद करना
हमारे लिए जरूरी है। सबसे पहला वर्ड आ
जाता है एब्सोल्यूटेस्ट।
एब्सोल्यूटिस्ट कौन होते हैं?
एब्सोल्यूटिस्ट वो होते हैं जिनके पास
एब्सोल्यूट पावर होती है। जो कहते हैं जो
हम कह रहे हैं वही होगा। हम कहे दिन तो
दिन, हम कहे रातों रात। जो हम कहेंगे वही
होगा। उन्हें एब्सोल्यूटिस्ट कहा जाता है।
चाहे वो कोई राजा हो या वो कोई डिक्टेटर
हो। दूसरा वर्ड आ जाता है यूटोपियन।
यूटोपियन का मतलब एक ऐसी सोसाइटी जिसमें
सब कुछ अच्छा हो। जिसमें कुछ गलत नहीं हो
रहा है। सब कुछ बढ़िया है। कोई बीमार नहीं
है। कोई गरीब नहीं है। किसी के साथ कोई
अन्याय नहीं हो रहा है। यानी कि इन श बोले
राम राज्य आ चुका है। लेकिन आपको भी पता
है एक इस तरीके की आइडियल सोसाइटी
नामुमकिन है होना।
इसके अलावा आपको यहां पर बताया गया कि किस
तरीके से एक पिक्चर दे रखी है यह वाली। यह
पिक्चर है क्लब ऑफ थिंकर्स की। आइए इस
पिक्चर को थोड़ा सा समझते हैं। बहुत ही
इंटरेस्टिंग पिक्चर है दोस्तों। इस पिक्चर
में अगर आप देखें तो सबसे पहले आपको इस
पिक्चर के अंदर आपको दो रूल्स देखने को
मिलेंगे। और वो दो रूल क्या है? आइए बताता
हूं। राइट साइड के ऊपर वो दो रूल है। आप
देख सकते हो ये पिक्चर है। ये राइट साइड
वाला बोर्ड आपको पढ़ना है। राइट साइड
वाला। राइट साइड वाला रोड बोर्ड में इस
क्लब में अगर आप शामिल होना चाहते हो तो
आपको यह दो रूल फॉलो करने पड़ेंगे।
पहला रूल ये कह रहा है कि साइलेंस इज द
फर्स्ट कमांडमेंट ऑफ दिस लर्नर सोसाइटी।
कि अगर आप क्लब ऑफ थिंकर्स का पार्ट बनना
चाहते हो तो चुप रहना पड़ेगा।
चुप रहना पड़ेगा। बोल नहीं सकते हो। है ये
क्लब ऑफ थिंकर्स।
लेकिन बोलना अलाउड नहीं है। दूसरा पॉइंट
यह बताया गया है कि किस तरीके से सबको
एक-एक मजल डिस्ट्रीब्यूट किया जाएगा। मज़ल
डिस्ट्रीब्यूट किया जाएगा। वो मज़ल इसलिए
कि कल को तुम्हें बहुत ही तलब मच जाए सच
बोलने की कि नहीं अब तो मैं सच बोल के ही
रहूंगा। तो मज़ल को अपने मुंह में ठूस लेना
और चुपचाप बैठ जाना। ये दो रूल बताए गए
हैं इस लर्नड सोसाइटी के।
अगर आप लेफ्ट में चले जाए तो यहां पर
लेफ्ट में एक और बोर्ड लगा हुआ है और उस
बोर्ड में लिखा हुआ है कि द मोस्टेंट
क्वेश्चन ऑफ टुडे यानी कि आज का
इंपॉर्टेंट क्वेश्चन ये है कि कब तक हमारे
को सोचना अलाउड है? सोचो किस लेवल पर
सोसाइटी को सप्रेस करके रखा गया था। बोलना
तो छोड़ो सोचना तक कब तक अलाउड है? लोग यह
सब सोच रहे थे कि कभी ऐसा ना हो कि कोई
ऐसा है जो हमारे सोचने तक पे बैन लगा दे।
जब फ्रांस में यह सब हो रहा था तो यहां पे
बताया गया है कि किस तरीके से दो ग्रुप
बनके तैयार हुए थे। पहला ग्रुप है
एरिस्टोक्रेट लोगों का। एरिस्टोक्रेट लोग
वो होते थे जो सोशली और पॉलिटिकली
डोमिनेंट हुआ करते थे। इनके पास पावर हुआ
करती थी। ये बड़ी-बड़ी पोस्ट पे हुआ करते
थे। ये थोड़े अमीर हुआ करते थे। यह वह हुआ
करते थे जिनका सबसे बड़ा काम होता था लैंड
ओनरशिप। इनके पास बड़ी-बड़ी जमीनें होती
थी। यह वह जमीनों को किरायों पर चढ़ाते थे
और उस किराए से ये पलते थे। ये वो होते थे
जो लैंग्वेज भी फ्रेंच बोला करते थे। कहते
थे हम इलीट क्लास हैं। हमारा रॉयल फैमिली
से बिलोंगिंग है। हम सिर्फ फ्रेंच
बोलेंगे।
ये वो होते थे जो एक दूसरे से शादी के
बंधन में बटे हुए रहते थे। यानी मेरी बेटी
की शादी उसके बेटे से, उसके बेटी की शादी
इसकी बेटी से, इसकी बेटी की शादी उसके
बेटे से।
तो आपस में शादी करके क्लोज ग्रुप बना रखा
था। हमारे ग्रुप में कोई ना अंदर आएगा ना
हमारे ग्रुप से कोई बाहर जाएगा। व दूसरी
तरफ थी आपके सामने एक न्यू मिडिल क्लास।
इससे पहले क्या होता था? अमीर होते थे और
गरीब होते थे। लेकिन अब एक मिडिल क्लास
निकल के आया। ये मिडिल क्लास कौन थे और
कहां से बने? तो पहली बात यहां पे बताई गई
कि ये मिडिल क्लास वो थे जब फ्रांस में और
यूरोप में इंडस्ट्रियलाइजेशन शुरू हुआ। तब
उस इंडस्ट्री में काम करने। यह तो आएंगे
नहीं अपना सोफे के कवर वाला कपड़ा पहन के।
उस काम करने के लिए तो लोग लगेंगे ना
मेहनती लोग लगेंगे। तो जो लोग इंडस्ट्रियल
रिवोल्यूशन आने के बाद फैक्ट्रीज में
इंडस्ट्रीज में नौकरी करने गए उससे बन के
आई मिडिल क्लास।
ये जो मिडिल क्लास के लोग थे ये लोग जो थे
ये चाहते थे कि पावर्स जो है इनसे छीन के
बाहर निकलनी चाहिए। सारी पावर जो इनके पास
है ये गलत है। ये जो न्यू मिडिल क्लास था
इसके अंदर इंडस्ट्रियलिस्ट थे, बिजनेसमैन
थे, लॉयर थे, डॉक्टर थे, एजुकेटर थे। यानी
इसके अंदर आपको सब देखने को मिलेंगे।
साथ ही साथ क्या आपको पता है कि यह लोग
क्या करते थे कि यह लोग ने शिप पे बैठ के
इंडिया आए। इंडिया से मसाले उठा लिए।
चाइना गए वहां से सिल्क उठा लिया।
इसके अलावा सेंट्रल एशिया गए वहां से
ग्लास उठा लिया। ऐसे करके सारी की सारी
चीजें ये लोग यहां से लेकर आते थे और ये
अमीर लोगों को बेचते थे। अमीर लोग बावले
हुआ करते थे। अरे ये क्या मोटा-मोटा कपड़ा
पहना हुआ। ये देखो सिल्क चाइना से लाए।
दुनिया में किसी को नहीं पता कैसे बनता
है। अब इन लोग को तो शो ऑफ करना रहता था।
हां हां दे दो दे दो। कितने रुपए? इतने
रुपए। ये लो मुंह पे मार दी पैसे। ये
देखिए चाय इंडिया में उगती है। आपको पता
भी नहीं है चाय पियोगे तो कितना मजा आएगा।
अच्छा केटी पार्टी में अब की सहेलियों को
यही पिलाऊंगी। लाओ लो दे दो दे दो। तो ये
लोगों ने इन्हीं से पैसा कमा कमा के ये
लोग लोअर क्लास से मिडिल क्लास की तरह का
गए थे। तो आपने देखा किस तरीके से दो
ग्रुप बन गए थे दोस्तों। अब यहां पर एक और
वर्ड जिसके बारे में आपको पता होना चाहिए
वो है लिबरलिज्म।
लिबरलिज्म एक लैटिन वर्ड से निकाला गया है
जिसका मतलब है लिबर जिसका मतलब है लिबर और
लिबर का मतलब होता है फ्री।
फ्री आजादी। किस चीज से आजादी? और इसी के
बिहाफ पे तीन तरीके के लिबरलिज्म बताएं।
सबसे पहला आता है पॉलिटिकल लिबरलिज्म।
आजादी होनी चाहिए अपने लीडर को सेलेक्ट
करने की। कौन तुम्हारी कंट्री को रूल
करेगा यह चूज करने की आजादी होनी चाहिए।
सेकंड नंबर पर आता है इकोनमिक लिबरलिज्म।
आजादी होनी चाहिए अपनी पसंद का बिजनेस
करने की, अपनी पसंद का काम करने की। जहां
चाहे वहां जाके बिजनेस करने की और तीसरा आ
जाता है सोशल लिबरलिज्म। आजादी होनी चाहिए
अपनी एक इक्वलिटी की, इक्वल ट्रीटमेंट की,
इक्वल अपॉर्चुनिटीज की आजादी होनी चाहिए।
इसके अलावा एक कांसेप्ट और आता है जिसको
कहते हैं ज़ोल्वेरिन।
ज़ोल्वेरिन दरअसल एक प्रूसियन इनिशिएटिव पर
बनाया गया था। मैंने आपको बताया था
प्रूशिया जो आज जिसे तुम जर्मनी कहते हो
वंस अपॉन अ टाइम वो प्रू थी।
तो पुरुषिया ने डिसाइड किया कि भाई हम
यूरोप में इतनी सारे देश हैं। इतने सारे
देश हैं हम यूरोप में। हमने सबने
अपनी-अपनी बॉर्डर बंद कर रखी है। सबकी
अपनी करेंसी है। सबके अपने नियम है। सबका
अपना-अपने लोग हैं। क्यों ना हम अपने पूरे
देश की बॉर्डर खोल दें। जिसको जहां बिजनेस
करना है करो। जिसको जहां जाके रहना है
रहो। सब कुछ अपन ओपन कर देते हैं। करेंसी
तक कॉमन कर देते हैं। इवन ज़ोल्वेरिन का एक
कांसेप्ट आज भी चलता है। आज भी यूरोपियन
यूनियन जो है वो जोवेरिन का ही एक मॉडर्न
फॉर्म है। मेरा एक दोस्त है वो जर्मनी में
रहता है। तो उसकी तीन दिन का कॉलेज रहता
है। चार दिन उसकी छुट्टी रहती है। तो अपनी
जर्मन गाड़ी को उठा के कभी फ्रांस चला
जाए, कभी स्विट्जरलैंड चला जाए, कभी इटली
चला जाए तो कभी कहीं चला जाए। क्योंकि
बॉर्डर ओपन है। आपको वीजा वीजा नहीं लेना
पड़ता है। आप अपनी गाड़ी से वहां जा सकते
हो। तो आपको ड्राइविंग लाइसेंस अलग-अलग
नहीं देना पड़ता है। सेम करेंसी सब जगह
चली जाती है। आपको बार-बार करेंसी
ट्रांसफर कन्वर्ट नहीं करानी पड़ती है। तो
ये है zबेरिन जो कि क्रूशियन इनिशिएटिव पे
था। सारी बाउंड्रीज खोल दी गई थी और
करेंसी को 30 से कम करके दो कर दिया गया
था ताकि बिजनेस आसान हो सके। लोगों का और
ट्रेड गुड्स का ट्रांसपोर्टेशन हो सके।
लास्ट बट नॉट द लीस्ट वो है
कंजर्वेटिवज्म। कंजर्वेटिव्स कौन होते
हैं? कंजर्व का मतलब होता है बचा के चलना।
प्रोटेक्ट करके चलना। कंजर्वेटिव्स वो
होते थे जो कहते थे कि हमें प्रोटेक्ट
करके चलना है। हां हमारे कुछ राजा महाराजा
थे जिन्होंने बहुत गलत किया। लोगों को
मारा, चीजें तोड़ी, लोगों को पनिशमेंट की।
लेकिन जो हुआ सो हुआ उसे भूल जाओ। अब हमें
आगे बढ़ना चाहिए। लेकिन अपने पास को
प्रोटेक्ट करके, अपने पास की हिस्ट्री पे
करके। मैं तुमसे कहता हूं ब्रिटिशर्स बहुत
बुरे तुमने कहा सही बात है। बहुत बुरे थे।
बहुत बुरे थे। मैं कहता हूं ये ले पत्थर।
मैं लेता हूं डंडा। चल तू जाके सुप्रीम
कोर्ट तोड़ दे। मैं जाके इंडिया गेट तोड़
देता हूं। तू जाके गेटवे ऑफ इंडिया तोड़
दे। ब्रिटिशर्स बहुत बुरे थे। लेकिन अगर
उनके द्वारा बनाई गई अगर उनके हेट में
उनके द्वारा बनाई गई अगर मैं सारी चीजें
तोड़ दूंगा तो हमारा ही नुकसान होगा। और
यही कहते थे कंजर्वेटिव्स कि पास्ट में
हुआ हुआ भूल जाओ। आगे बढ़ो। ऐसा नहीं कि
हेट्रेट के चक्कर में उनसे चिढ़ के चक्कर
में अब तुम उनके लोग मार दो। उनकी चीजें
तोड़ दो। ऐसा मत करो। तो यह कुछ वर्ड्स
हैं जो आप लोगों से एग्जाम में पूछे जाते
हैं। कुछ और वर्ड्स भी हैं जैसे कि एक है
सफरे। सफरेज का मतलब होता है राइट टू वोट।
भाई मैंने आपको थोड़ी देर पहले बताया कि
नेशनल
असेंबली बनाई गई फ्रांस में।
और नेशनल असेंबली ने कहा 21 साल से ज्यादा
के सभी लोगों के पास वोट है। अब आप देख
सकते हो 18 से 21 साल वालों के पास वोट
देने का अधिकार नहीं है। और आप देख सकते
हो फीमेल्स के पास भी वोट देने का अधिकार
नहीं है। तो अगर ये लोग और ये लोग वोट
देने के अधिकार की लड़ाई लड़ेंगे तो उसी
को सप्रेच कहा जाता है। और लास्ट वर्ड जो
आपसे पूछा जाता है वो है फेमिनिस्ट।
जब आप औरतों के अधिकार की लड़ाई लड़ते हो।
औरतों के अधिकार। अब किस तरीके का अधिकार?
मैं चाहता हूं औरतों को वोट देने का
अधिकार मिले। औरतों को प्रॉपर्टी में
इक्वलिटी इक्वल अधिक वो मिले, शेयर मिले।
औरतों को बाहर जाके नौकरी करने का अधिकार
मिले। और औरतों को इक्वल सैलरी का अधिकार
मिले तो आप औरतों के किसी भी अधिकार के
लिए अगर लड़ाई लड़ते हो तो उसे फेमिनिस्ट
कहा जाता है। उस आदमी को फेमिनिस्ट कहा
जाता है जो औरतों के अधिकार के लिए लड़ाई
लड़ता है। क्लियर हो गया? अब आइए कुछ
क्वेश्चंस को अपन प्रैक्टिस करते हैं। कुछ
एमसीक्यूस, कुछेंट क्वेश्चन बताता हूं
ताकि आपको पता चले जो आधा से ज्यादा
चैप्टर पढ़ाया है वो आपको समझ में आया है
कि नहीं। पहला क्वेश्चन व्हिच टाइप ऑफ़
गवर्नमेंट वाज़ मेनली ड्रिवन इन यूरोप
आफ्टर द डिफिट ऑफ़ नेपोलियन इन 1815?
1815 बैटल ऑफ़ वाटर लू में नेपोलियन के
हारने के बाद यूरोप में किसकी सरकार आई
थी? आपको यह बताना है क्वेश्चन 2021 का
है। आपको वीडियो अभी पॉज़ करना है और इन
चार में से जो सही जवाब है ए, बी, सी, डी
आपको वह लिखना है। लिख दिया? कर दिया
आंसर। बच्चों, इसका सही जवाब है
कंजर्वेटिव्स। याद करिए वर्बन डायनेस्टी
वापस रिस्टोर कर दी गई थी। लुईस 18 को
राजा बना दिया गया था। और ये वही लोग थे
जो चाहते थे कि ठीक है जो गलती हुई सो हुई
है। लेकिन पास को इज्जत करो। राजा रानी की
इज्जत करो। तो सही जवाब है कंजर्वेटिव।
आइए दूसरे क्वेश्चन पे जाते हैं। व्हिच ऑफ़
द फॉलोइंग कंट्री डिड द फर्स्ट लिबरलिस्ट
नेशनलिस्ट अपील टेक प्लेस इन जुलाई 1830?
बहुत ईजी क्वेश्चन है। पॉज द वीडियो एंड
आंसर इन कमेंट सेक्शन। कर दिया। अब मैं
आपको पहले भी बता चुका हूं कि एक
रिवॉल्यूशन हुआ था जुलाई 1830 में। एक हुआ
था अगस्त 1830 में। और एक हुआ था 1831 और
1832 में। पहला रिवॉल्यूशन फ्रांस में हुआ
था। दूसरा रिवॉल्यूशन बेल्जियम में हुआ था
और तीसरा रिवॉल्यूशन ग्रीस के अंदर हुआ
था। उसने जुलाई बोला है। जुलाई का
रिवॉल्यूशन फ्रांस में हुआ था। ए इज द
राइट आंसर। जितने बच्चों ने ए करा था उनका
जवाब बिल्कुल सही है। अब जितना मैंने
पढ़ाया है उसमें से कुछ इंपॉर्टेंट
क्वेश्चन जो बार-बार रिपीट होते हैं वो भी
सुन लो। पहला आपको नपोलियोनिक कोड के पांच
पॉइंट लिखने हैं। मैंने शुरुआत में आपको
नेपोलियोनिक कोड पढ़ाया था। 2010 2017 का
क्वेश्चन।
अगला चार रीज़न बताइए। जो लोगों ने शुरुआत
में नेपोलियन का स्वागत किया था वो
नेपोलियन के अगेंस्ट हो गए। क्यों?
2012-13 का क्वेश्चन है। मैंने आपको बताया
था कि नेपोलियन
बहुत ज्यादा स्ट्रिक्ट सेंसरशिप रखने लगा
था। लोग क्या बोल रहे हैं, क्या सुन रहे
हैं, क्या लिख रहे हैं उस पे। नेपोलियन
लोगों से हैवी टैक्स वसूल रहा था अपने
मिलिट्री कैंपियंस के लिए। नेपोलियन
लड़कों को जबरदस्ती अपनी आर्मी में भर्ती
करता जा रहा था और नेपोलियन जो था वह
डिक्टेटर बनता जा रहा था। यह चार पॉइंट आप
यहां लिखेंगे। तीसरा क्वेश्चन आपको बताना
है कि सेंस ऑफ कलेक्टिव बिलोंगिंग करने के
लिए यानी कि एक होने के लिए यूनिटी बनाने
के लिए फ्रांस के लोगों ने क्या-क्या
किया? अच्छा क्वेश्चन है। 15, 16, 17 और
25 में पूछा गया था। तो मैंने आपको बताया
था किस तरीके से रॉयल फ्लैग को फ्रेंच
फ्लैग में कन्वर्ट किया गया। हाइम्स और
कंपोजिशंस बनाई गई जैसे ला मर्स लेस
लापात्री लेस टिटोयन का कासेप्ट बनाया गया
सीक्रेट क्लब्स बनाए गए जैसे कि जैकोबिन
क्लब्स ये सारी चीजें आप लोग को यहां पे
लिख के आनी है अब ठीक है सर आपने खूब सारे
हमें वॉर्स के बारे में बताया खूब सारे
हमें रिवॉलशंस के बारे में बताया यार
वॉर्स और रिवॉल्यूशन के अलावा भी कोई चीज
काम आती है बिल्कुल और यही मुझे आपको अगला
बताना है यहां पे बताया गया है कि
नेशनलिज्म सिर्फ वॉर के साथ नहीं होता है।
नेशनलिज्म के लिए आर्ट भी बहुत इंपॉर्टेंट
होता है। जैसे भारत में किस तरीके से भारत
माता की इमेज बनाई गई। वो भारत माता की
इमेज से एक-एक भारतीय उससे कनेक्टेड फील
हुआ। उसी तरीके से फ्रांस में यूरोप में
भी ऐसा बहुत कुछ आर्ट बनाई गई। इसके अलावा
पोएट्रीज लिखी गई जिससे लोगों की भावनाएं
जगे। उनको पता चले कि उनके लोगों को कितने
सारे लोग शहीद हुए। क्या-क्या उनके साथ
बलिदान लिए गए उनके।
इसके अलावा स्टोरीज लिखी गई, म्यूजिक बनाए
गए ताकि नेशनलिज्म के सेंटीमेंट्स को
नेशनलिज्म के आईडिया को बनाया जा सके।
इसके अलावा जो लोग थे उस टाइम पे जो
रोमांटिक आर्टिस्ट हुआ करते थे वो लोगों
से कहते थे हर चीज के पीछे ना साइंस और
रीज़ मत ढूंढा करो। कुछ चीजों को इमोशन से
भी देखा करो। इंट्यूशन से भी देखा करो।
मिस्टिकल फीलिंग से भी देखा करो। ऐसा नहीं
है कि मैं अगर कुछ कह रहा हूं कि ऐसा करना
है तो तुम पूछो। अच्छा इसके पीछे की साइंस
क्या है? कुछ चीजें इमोशंस पर चलती हैं।
कुछ चीजें फीलिंग्स पर चलती हैं। तो ये
लोग वो प्रमोट किया करते थे। इसका एक
बेहतरीन एग्जांपल है जोहंड गॉडफिड हर्डर।
अब जोहें गॉडफड हर्डर जो थे ये फ्रांस ये
जर्मनी में जर्मन कल्चर को ये ढूंढने के
निकले थे। मैंने आपको बताया जर्मनी नाम का
कोई देश तो था नहीं। पुरुशियन एंपायर हुआ
करता था। पुरुषियन एंपायर
क्रूशियन एंपायर
अब हुआ यह कि जब फ्रांस आजाद हो गया तो
आसपोस के जो देश थे उन्होंने कहा नहीं
नहीं हमें भी अब आजाद होना है। अगर फ्रांस
कर सकता है तो हम क्यों नहीं कर सकते हैं?
तो क्रूशियन एंपायर में जोहान गॉडफिट
हर्डर लोगों को कहते थे कि अरे जर्मन
कल्चर रिवाइव करो। हम सब जर्मन हैं। हमारा
भी एक देश होना चाहिए जर्मनी नाम का।
और जोहंड गॉडफिट हर्डर ने जर्मन कल्चर को
रिवाइव करने के लिए लोगों से कहा कि कॉमन
लोगों के पास जाओ दासक के पास जाओ गांव
जाओ गांव के लोगों से मिलो नो को उन लोगों
से मिलो जो बुजुर्ग हो चुके हैं वो आपको
बताएंगे व्हाट इज जर्मन कल्चर क्योंकि इस
पुश एंपायर के अंदर तो हम अपना कल्चर तक
भूल गए हैं। वो कहते थे वर्नाकुलर
लैंग्वेज के ऊपर हमें ट्रू फोकलोर लिखनी
चाहिए। वर्नाकुलर लैंग्वेज का मतलब होता
है लोकल लैंग्वेज। अगर आप तमिलनाडु चले
जाओ तो वहां तमिल बोली जाती है। कर्नाटक
चले जाओ तो वहां कन्नडा बोली जाती है।
केरला चले जाओ वहां मलयालम बोली जाती है।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना चले जाओ वहां
तेलुगु बोली जाती है। तो अगर आपको लोकल से
कनेक्ट करना है तो उनकी लैंग्वेज बोलनी
पड़ेगी। और यही बताया गया है कि वर्नाकुलर
लैंग्वेज में फोर क्लो लिखो।
अब यहां पर मैं आपको थोड़ी देर पहले बताया
था कि आर्ट आर्ट कितना बड़ा रोल प्ले करता
है। याद थोड़ी देर पहले 183132 में ग्रीस
का आंदोलन पढ़ाया मैंने आपको।
उसमें मैंने आपको बताया किस तरीके से
ऑटोमैन एंपायर जो कि एक इस्लामिक एंपायर
था वो ग्रीक ऑर्थोडॉक्स क्रिश्चियन के
लोगों को मार रहे थे, कन्वर्ट कर रहे थे
और किस तरीके से फिर लोगों ने ग्रीस के
लोगों ने क्रिश्चियन से अपील करी और वो
लोग उनके सपोर्ट में आए। उनको आजादी
दिलाई। ट्रीटी ऑफ़ कॉन्स्टेटिनो पोल साइन
करा के इनको आजाद कराया।
यह पिक्चर ने बहुत बड़ा रोल प्ले किया है।
इस पिक्चर में आप देख सकते हो किस तरीके
से ऑटोमैन एंपायर के जो योद्धा थे,
वॉरियर्स थे वो किस तरीके से ग्रीस के
लोगों को हैरेस कर रहे हैं।
महिलाओं के कपड़े उतारे जा रहे हैं। उनको
बैक टच किया जा रहा है। कई बार रेप तक
केसेस सामने आए। ऐसी पेंटिंग्स बनाई गई कि
देखो किस तरीके से लोगों को मारा जा रहा
है। क्या किया जा रहा है? और यह पेंटिंग्स
जब बाकी यूरोप के लोगों ने देखी तो उनका
दिल कचोट सा गया। उन्होंने कहा हमारे
लोगों के साथ ऐसा हो रहा है। हम उनकी
आजादी के लिए लड़ेंगे। हम उनको सपोर्ट
करेंगे। तो आर्ट का एक बहुत बड़ा रोल है।
आर्ट से लोग कनेक्ट होते हैं। और ये
कनेक्शन बताया गया है। अब मैं आपको एक केस
बताता हूं पोलैंड का। सिर्फ 20 मिनट और ये
लेक्चर चलेगा और 20 मिनट के बाद द राइज ऑफ
नेशनलिज्म इन यूरोप जैसा बड़ा सा लेक्चर
मैं आपका खत्म कर दूंगा। कोई जरूरत नहीं
है आपको। बड़े-बड़े लें्थी-ीदी लेक्चर्स
देखने की, वन शॉट्स देखने की, कुछ नहीं।
यह एक वन शॉर्ट इज मोर दन सफिशिएंट ना
केवल पूरी थ्योरी बता रहा हूं। एमसीक्यूस
जो जो आ सकते हैं, शॉर्ट आंसर, लॉन्ग आंसर
जो जो आ सकते हैं, वो भी मैं आपको बता रहा
हूं। आइए पोलैंड का एक केस समझते हैं।
पोलैंड नाम का कोई देश हुआ नहीं करता था।
और पोलैंड के ऊपर पोलैंड जो आप देख रहे
हैं, ये जो आप पोलैंड देख रहे हैं, थोड़े
पोलैंड के ऊपर रशिया ने कब्जा कर रखा था।
थोड़े पोलैंड के ऊपर पुरुशिया ने कब्जा कर
रखा था। थोड़े पोलैंड के ऊपर ऑस्ट्रिया ने
कब्जा कर रखा था। रशिया, पुरुशिया,
ऑस्ट्रिया ने कब्जा कर रखा था। कब्जा इतना
खतरनाक हो रखा था कि पोलैंड के लोगों को
उनकी लैंग्वेज यानी पोरिश तक बोलने नहीं
दी जाती थी और उनसे कहते थे रशिया वाले
कहते थे रशियन बोलो पुरुषिया वाले कहते थे
पुरुष बोलो और ऑस्ट्रियन कहते थे कुछ मत
बोलो तो इनकी लैंग्वेज इस तक इंपोज कर दी
गई थी फिर बताया गया है कि किस तरीके से
इवन दो इट इज़ नो लगर एक्सिस्ट इंडिपेंडेंट
टेरिटरी नेशनल फीलिंग्स वर केप्ट अलाइव
थ्रू म्यूजिक एंड लैंग्वेज मानव पोलैंड एक
देश नहीं था रशिया पुरुष शिया और
ऑस्ट्रिया ने कब्जा कर रखा था। लेकिन उसके
बावजूद पोलैंड के लोगों ने राष्ट्रभक्ति
नेशनलिज्म को बनाए रखा अपने अंदर।
यहां पे बताया गया है कि किस तरीके से
कैरोल कुरपिंस्की जो थे वो एक पॉलिश आदमी
थे। पोलैंड के व्यक्ति थे और इन्होंने
पॉलिश लैंग्वेज के अंदर कई सारे ओपेरास और
म्यूजिक्स लिखे, डांस बनाई ताकि लोग जो
हैं वो अपने कल्चर से अपनी लैंग्वेज को
भूल ना जाए। किस तरीके से दो डांस फॉर्म
बनाए गए? जैसे कि पोलनेज़ और मजुरका।
यह भी डांस फॉर्म नेशनलिज्म के सेंटीमेंट
को बनाए रखने के लिए रखे थे। ये एमसीक्यू
में पूछ लेता है कि ये दोनों कहां के हैं?
इसलिए इसको आपको याद रखना है।
इसके बाद बताया गया है कि किस तरीके से एक
आर्म्ड रिवोल्यूशन भी हुआ। एक आर्म्ड
रेवेलियन भी हुआ। पोलैंड के लोगों ने कहा
इनफ इज इनफ। हमें आजादी चाहिए। रशिया,
ऑस्ट्रिया, पुरुशिया सब छोड़ के जाओ।
हमारा देश छोड़ के जाओ। आजाद करो हमें।
लेकिन रशियन आर्मी ने उसको किस तरीके से
क्रश कर दिया। आंदोलन जरूर क्रश हो गया।
पोलिश लैंग्वेज तक बैन कर दी। लेकिन उसके
बावजूद पोलैंड के जो चर्च में काम करने
वाले प्रीस्ट थे वो अपने सरमंस और अपनी
प्रेयर पोलिश लैंग्वेज के अंदर देते थे।
ताकि उनकी लैंग्वेज लोग भूल ना जाए, मर ना
जाए। जब रशियन सोल्जर्स को यह बात पता चली
तो चर्च से पीस्ट को फादर को इन सबको भी
निकाल निकाल के जेल में डाल दिया गया कि
मना किया है पोलिश बोलने को तब भी तुम
पोलिश बोल रहे हो। सोचो सिर्फ अपनी
लैंग्वेज को बचाने के लिए लोगों ने कितनी
बड़ी-बड़ी सैक्रिफाइस दी। कितने बड़े-बड़े
अपनी जिंदगी तक को दांव पे लगा दिया।
फिर यहां पे बताया गया है कि किस तरीके से
जो ये जो मैंने आपको बताया कि किस तरीके
से जेल तक कर दिया गया और कुछ लोगों को तो
साइबेरिया तक भेज दिया गया। जर्मन
नेशनलिज्म की बात करें तो जर्मनी के अंदर
दो भाई थे जिनका नाम था ग्रीन ब्रदर्स। यह
जर्मन सिटी हेनऊ में पैदा हुए थे और ये भी
चाहते थे कि जर्मन कल्चर बना रहे तो ये छ
साल तक जर्मनी के गांवगांव गए। गांव वालों
से बुजुर्गों से जर्मन कल्चर से रिलेटेड
जितनी भी लैंग्व स्टोरीज थी उन सबको
इकट्ठा किया, कंपाइल किया, पब्लिश किया।
क्योंकि यह भी चाहते थे कि देश उनका आजाद
हो। लोग जर्मन कल्चर को समझे। उनके अंदर
की देशभक्ति जागे और जर्मनी को आजादी
दिलाए।
यहां पे बताया गया है कि ग्रीम ब्रदर्स ये
बात जानती थी कि उनका देश तब तक आजाद नहीं
होगा। क्रूशिया से जर्मनी तब तक नहीं बदगा
जब तक फ्रेंच डोमिनेशन उनके देश से नहीं
हट जाएगा। और उसके लिए फ्रेंच डोमिनेशन को
हटाने के लिए उन्होंने हर संभव चीज करी
ग्रीम ब्रदर्स ने जो वो कर सकते थे।
बताया गया है ग्रीम ब्रदर वर्क हेल्प
प्रिजर्व जर्मन लैंग्वेज एंड हेरिटेज
मेकिंग देम पाइयर्स ऑफ जर्मन कल्चर एंड
नेशनलिज्म। इन्होंने इतना कंट्रीब्यूशन
किया ग्रीम ब्रदर्स ने कि इनको पाइनियर्स
ऑफ जर्मन कल्चर एंड नेशनलिज्म कहा गया है।
अब ठीक है सर। ग्रीम ब्रदर्स के कहने पे
ये सब हुआ। ये सब हो रहा था। तो जैसा कि
आपने देखा कि फ्रांस में किस तरीके से
राजा को हटा के पावर लोगों के पास आई।
डेमोक्रेसी के पास आई। इस चीज से इंप्रेस
होके अब बाकी अड़ोस पड़ोस के देश जो थे जैसे
कि जर्मनी हो गया, जैसे कि पोलैंड हो गया,
जैसे कि इटली हो गया। जैसे कि
ऑस्टोहंगेरियन एंपायर हो गया। अब ये लोग
भी चाहते थे कि इनके देश से भी राजा को
हटाया जाए, एडीकेट किया जाए और इनके देश
के अंदर भी लोगों के पास पावर आए।
इसके लिए एक सबसे इंपॉर्टेंट चीज बताई गई
है कि किस तरीके से इन अदर रीजंस ऑफ यूरोप
लिबरल मिडिल क्लास मैन एंड वुमेन डिमांडेड
कॉन्स्टिट्यूशनलिज्म एंड नेशनल
यूनिफिकेशन। अब सब लोग यूरोप के लोग जो थे
वो चाहते थे उनके देश में भी
कॉन्स्टिट्यूशन बने। जैसे फ्रांस में बना।
अब बाकी यूरोप के कंट्रीज भी चाहते थे कि
उनका देश भी यूनिफाई हो सके। जर्मनी,
पुरुशिया से जर्मनी बन सके। पोलैंड को
पोलैंड बनाया जा सके। रशिया, ऑस्ट्रिया,
पुरुशिया को हटाया जा सके। इटली को देश
बनाया जा सके। यूनाइटेड किंगडम को देश
बनाया जा सके।
इन द जर्मन रीजन मेनी पॉलिटिकल एसोसिएशन
ऑफ़ मिडिल क्लास प्रोफेशनल बिज़नेस एंड
प्रोस्परस आर्टिसन गैदर्ड इन फ्रैंकफर्ट
टू वोट फॉर ऑल जर्मन नेशनल असेंबली। और
जर्मन में जर्मनी में अब ये आंदोलन पीक
पकड़ने लगा।
दरअसल हुआ यह कि बहुत सारे मिडिल क्लास
लोग जर्मनी के इकट्ठा हुए और उन्होंने
बनाई ऑल जर्मन नेशनल असेंबली। और यह ऑल
जर्मन नेशनल असेंबली फ्रैंकफोर्ड
पार्लियामेंट ऑफ चर्च ऑफ सेंट पॉल पहुंचे।
और इन्होंने क्या करा? जर्मनी का जो राजा
था जिसका नाम था जिसका नाम था फ्रेडरिक
विलम द फोर्स। इसको बुलाया और फ्रेडरिक
विलम द फोर्स से बोला कि देखो जैसे फ्रांस
में पावर 50-50 हुई थी। हम भी चाहते हैं
कि हमारा देश बने। पुरुशिया से हटा के
जर्मनी नाम का हम देश बनाना चाहते हैं। हम
आपको पूरी तरीके से नहीं हटाएंगे। चलो
पावर 50-50 कर लेते हैं। डेमोक्रेटिक
मोनार्की बना लेते हैं। लेकिन एटलीस्ट
अपना देश बना लेते हैं। तो फ्रैंकफोर्ड
पार्लियामेंट में यह प्रस्ताव रखा गया
फ्रेडरिक विलियम द फोर्थ के सामने। अब
फ्रेडरिक विलियम द फोर्थ जो थे उनके लिए
ये लोग कॉन्स्टिट्यूशन वगैरह सब बना के
लाए थे। तो जब फ्रेडरिक विलियम द फोर्थ जा
रहे थे तो आसपोस के देश वालों ने उनको फोन
लगाया। बोले विलियम क्या कर रहे हो? बोले
यार अगर मैंने अबकी बार इनकी बात नहीं
मानी और कॉन्स्टिट्यूशन नहीं बनाया तो यह
लोग मुझे बहुत मारेंगे। तो पड़ोस के देश
वालों ने कहा मत कर लाला मत कर। क्योंकि
अगर तुमने यह साइन कर लिया तो हमारे देश
के लोग भी ये डिमांड करने लगेंगे और हमारे
देश के लोग भी हमसे बोलने लगेंगे कि अब
हमारे देश को भी आजादी दिलाओ।
तो उसने कहा क्या करूं? बोले जाकर मना कर
दो। और फ्रेडरिक विलियम द फोर्थ ने एंड
मूवमेंट पर जाकर डेमोक्रेटिक मोनार्की को
मना कर दिया और केवल मोनार्की को हां बोल
दिया। तो आपने देखा किस तरीके से फ्रेडरिक
विलियम द फोर्थ ने लास्ट मोमेंट पे
रिजेक्ट कर दिया और जितने लोग
कॉन्स्टिट्यूशन की डिमांड कर रहे थे उनको
उठा के जेल में डाला और पनिशमेंट दे दी।
कुछ साल बाद फ्रेडरिक विलियम द फोर जो थे
वो बूढ़े हो गए। और जब वो बूढ़े हो गए तो
इनका जो छोटा भाई था ऑलदो ये छोटा देखने
में दिख नहीं रहा। ये खुद मुझे दिख रहे
हैं इनके एक पैर कब्र पे है। तो इनका जो
छोटा भाई था ये राजा बन गया जिसका नाम था
प्रिंस विलहम। और इसका एक और नाम आप पढ़
सकते हो केजर विलियम वन। कुछ-कुछ किताब
में केजर विलियम वन लिखा है। कहीं-कहीं
लिखा हुआ है प्रिंस विलहम। दोनों एक ही
आदमी के नाम है। अब इसके भाई को पता था कि
पिछली बार जब आंदोलन हुआ था तो मेरे भाई
ने क्रश कर दिया था। लेकिन अबकी बार अगर
आंदोलन होगा तो मैं नहीं संभाल पाऊंगा। तो
इसने सोचा कि इससे पहले लोग आके मेरी कॉलर
पकड़े। क्यों ना मैं लोगों को वो दे दूं
वो चाहते हैं। तो इसने क्या करा? इसने
अपना एक चीफ मिनिस्टर अपॉइंट किया जिसका
नाम था ऑटोवन बिस्मार्क। उसको बुलाया इधर
आओ। ऑटोवन बिस्मार्क गया। बोले जी सर क्या
हो गया? बोले मैं तेरे को अपना चीफ
मिनिस्टर बना रहा हूं। हम अपना एक देश
बनाएंगे जर्मनी नाम का देश। ऑटोमन
बिस्मार्क ने कहा मुश्किल वक्त कमांडो
सख्त। बताओ मैं क्या करूं? बोले यार
प्रॉब्लम यह है कि हमारी कंट्री का बहुत
सारा इलाका दूसरी कंट्रीियों ने कब्जा कर
रखा है। फॉर एग्जांपल बहुत सारे इलाके पे
हमारे देश के बहुत सारे इलाके पे फ्रांस
ने कब्जा कर रखा है। बहुत सारे इलाके पे
ऑस्ट्रिया ने कब्जा कर रखा है। बहुत सारे
इलाके पे डेनमार्क ने कब्जा कर रखा है। तो
तुम्हें क्या करना है? हमारा जो इलाका है
जिस पे दुश्मन ने कब्जा कर रखा है उसको
छुड़वाओ और हमारा एक नया देश बनाओ जर्मनी
नाम का। उस देश का मैं बनूंगा राजा। तुम
बनोगे चीफ मिनिस्टर। ओटोमन बिस्मार्क ने
कहा ठीक है। और ओटोमन बिस्मार्क ने 7 साल
के अंदर तीन वॉर्स लड़े फ्रांस, ऑस्ट्रिया
और डेन पुरुष फ्राउस, ऑस्ट्रिया और
ऑस्ट्रिया, डेनमार्क से। आप इसको ऐसे याद
रख सकते हैं कि इसने तीन तीन वॉर लड़े और
इसने फाड़ के रख दिया। फाड़ फ्रांस,
ऑस्ट्रिया, डेनमार्क। फ्रांस, ऑस्ट्रिया,
डेनमार्क। फ्रांस, ऑस्ट्रिया, डेनमार्क।
इसने फाड़ कर रख दिया। क्लियर हो गया? तो
इस तरीके से आखिरकार
7 साल बाद इन लोगों ने फ्रांस, ऑस्ट्रिया
और डरमार से अपनीप इलाके का कब्जा छुटवाया
और इन्होंने अपना एक नया देश बनाया जिसका
कैदर विलियम बन जो थे जो उसका राजा बने
ठीक है सर जर्मनी तो बना दिया आपने और
जर्मनी को बनाने में चीफ आर्किटेक्ट का
काम किया है एक ऑटो वन बिस्मार्क में उसके
चीफ मिनिस्टर ने। मैंने कहा बिल्कुल अब
इटली का क्या यह जो तुम लड़कियों के बूट
के बराबर का जो मैप देख रहे हो यह इटली सर
आपको कैसे पता लड़कियों के बूट ऐसे होते
हैं? न्यूज़ में देखा था यार। तुम है ना
मेरी बातें पकड़ा मत करो। पर्सनल हो जाते
हो तुम लोग। यह देखो यह देखिए हील वाला
जूता। चलो वापस आ जाओ। तो ये आपके सामने
इटली का मैप है। पूरा की पूरा जो इटली था
वो सात स्टेट्स में बटा हुआ था। सेवन
स्टेट्स में इटली बटा हुआ था। इन सेवन
स्टेट में से केवल एक इलाका जिसका नाम था
सरदीनिया पिदमोनद। केवल सर्जिनिया पिदमोन
जो था वह इटली के राजा के पास था। बाकियों
पर दुश्मन का कब्जा था। फॉर एग्जांपल अगर
आप नॉर्थ में चले जाएं तो वहां पे
ऑस्ट्रोह हैब्सबर्ग एंपायर का कब्जा था।
अगर आप साउथ में चले जाएं तो वहां पे
बोर्बन डायनेस्टी ऑफ़ स्पेन का कब्जा था।
जी हां, ये दूसरी बोर्बन डायनेस्टी है।
बोर्बन डायनेस्टी ऑफ़ स्पेन।
और बीचोंबीच में पोप का कब्जा था।
यानी कि इटली में केवल सारदीनिया और
पिडमंड जो था यह वाला जो इलाका था वो इटली
के राजा के पास था। नॉर्थ वाला ऑस्ट्रियन
हैब्स के पास था। साउथ वाला स्पेन की
बोर्मेंट डायनेस्टी के पास था और बीच वाला
पोप के पास था।
तो इन्होंने कहा अब हम भी अपना देश
बनाएंगे। तो इन्होंने क्या किया? सबसे
पहले अपना देश बनाने के लिए ये लोगों ने
कई सारे आंदोलन किए। कई बार कोशिश करी। और
उनमें से एक आदमी जो बार-बार कोशिश करता
था उनका नाम था गुजिप मजीनी। गुजिब मजीनी
1807 में पैदा हुए थे जनोवा में। और पैदा
होने के बाद ये चाहते थे कि इनका देश एक
देश बन सके। क्योंकि इनके देश पे जब
दुश्मनों का कब्जा था ये बात इनको बहुत
कचोट के रख देती थी। तो गुजिब मसीनी ने एक
सोसाइटी बनाई यंग इटली नाम की और एक
सोसाइटी बनाई यंग यूरोप नाम की। यहां से
आपको एमसीक्यू बन जाता है कि बताइए यह
दोनों सीक्रेट सोसाइटी किसने बनाई? चाहे
यंग इटली हो, चाहे यंग यूरोप हो, दोनों की
दोनों सीक्रेट सोसाइटी मजीनी ने बनाई थी
क्योंकि इसको मजा आता था सोसाइटी बनाने
में। ऐसे याद कर लेना तुम। मजीनी कहता था
गॉड हैड इंटेंडेड नेशंस टू बी अ नेचुरल
यूनिट ऑफ़ मैनकाइंड। यानी मज़नी कहता था कि
भगवान नेशंस को ऐसा बनाया ताकि वो एक रह
सके।
भगवान नहीं चाहता है कि नेशंस अलग-अलग
रहे। एक नेशन में रहने वाले एक सेम
लैंग्वेज बोलने वाले लोगों को साथ रहना
चाहिए। उसके ऊपर किसी का कब्जा नहीं होना
चाहिए। मजीनी इतना खतरनाक था कि एक बार
इसने लुग्वारिया नाम की एक जगह थी इटली
में। इसने वहां पे कोशिश करी भी थी आंदोलन
करने की। लेकिन बेचारे को पकड़ दिया के
इसको एग्जाइल में भेज दिया गया था
स्विट्जरलैंड 1831 में। लेकिन जब इसको
एग्जाइल पे भेजा गया तो ये वहां पे चुप
नहीं रहे। इन्होंने वहां जाकर अपनी दूसरी
सीक्रेट सोसाइटी बना ली थी जो मैंने अभी
आपको थोड़ी देर पहले बताई थी। यंग यूरोप
यह जब यह एग्जाइल में थे ना स्विट्जरलैंड
यूरोप की कैपिटल बर्न में इन्होंने ये
वाली सीक्रेट सोसाइटी बनाई थी यंग यूरोप
इन्होंने कई सारी सीक्रेट सोसाइटी बनाई।
ये इतना खतरनाक आदमी था कि मैटरनेज अब तुम
बोलोगे सर यह नाम कहीं सुनाना लग रहा है।
अरे थोड़ी देर पहले बताया था कि बैटल
ऑफ वाटर लू जो हुआ था।
1815 में उस बैटल ऑफ वाटर लू में एक तरफ
एबीपीआर ऑस्ट्रिया ब्रिटेन पुरुषिया रशिया
थे वहीं दूसरी दूसरी तरफ हमारा नेपोलियन
था।
मैंने आपको इसमें बताया था कि ऑस्ट्रिया
का जैसे हमारे वहां प्रेसिडेंट होता है।
ऑस्ट्रिया में चांसलर होता था और
ऑस्ट्रिया के चांसलर का नाम था ड्यूक
मैटरनिच। यह वही था जिसने टीटी ऑफ़ वियना
साइन करवाई थी। ड्यूक मैटरनिच ने मज़िनी को
मोस्ट डेंजरस एनिमी ऑफ़ सोशल ऑर्डर कहा था।
यानी कि समाज के लिए सबसे खतरनाक आदमी।
यहां पे आपका एमसीक्यू बन जाता है कि
मजीनी को ये किसने कहा था? आपको याद रखना
है मैटरनिस्ट ने कहा था। तो जब मजीनी कई
बार कोशिश करता था लेकिन ये सक्सेस नहीं
हो पाता था। तो मजीनी से एक आदमी मिलने
गया जिसका नाम था गरीबा।
गरीबा ने कहा मैं आपकी यंग इटली नाम की जो
सीक्रेट सोसाइटी है उसका पार्ट बनना चाहता
हूं। और हम दोनों मिलके इटली को आजाद
कराएंगे। इन्हने कहा ठीक है क्या करोगे?
तो गरीबा ने कहा मैं अपनी आर्मी बनाऊंगा
जिसका नाम है रेड शर्ट आर्मी और इस रेड
शर्ट आर्मी की मदद से हम इटली को आजाद
कराएंगे। तो सबसे पहले ये गए साउथ में और
जब ये साउथ में गए तो इन्होंने क्या करा?
पूरे के पूरे साउथ को घेर लिया और
इन्होंने साउथ इटली में सबसे पहले कब्जा
किया क्योंकि बोर्मन डायनेस्टी जो थी
स्पेन की वो इनसे लड़ नहीं पाई।
इसके बाद इन्होंने क्या किया? यह गए पोप
के पास। अब पोप कौन होता है?
क्रिश्चियनिटी के अंदर दो सेक्ट होते हैं।
एक होते हैं कैथोलिक क्रिश्चियन और एक
होते हैं प्रोटेस्टेंट क्रिश्चियन। जो
कैथोलिक क्रिश्चियंस होते हैं उनका पूरी
दुनिया में एक लीडर होता है जिसे पोप कहते
हैं। और वो जो पोप होते हैं वो इटली के
बीचोंबीच एक कंट्री है जिसका नाम है
वेटिकन सिटी। आज भी ये वहां रहते हैं
वेटिकन सिटी के अंदर।
वैसे तो वेटिकन सिटी एक अलग देश है।
दुनिया का सबसे छोटा देश है। आज से कुछ
साल पहले मैं बता रहा हूं इसमें टोटल इस
पूरे देश के अंदर 1000 लोग थे। मेरी
बिल्डिंग के अंदर हजार लोग काम करते हैं।
तो पोप जो थे वो वेटिकन सिटी में रहते थे
और इन्होंने क्या कर रखा था? वेटिकन सिटी
के साथ-साथ सेंटर इटली के ऊपर कब्जा कर
रखा था। और इनको सपोर्ट करती थी फ्रांस की
आर्मी। क्योंकि फ्रांस वाले भी कैथोलिक
क्रिश्चियन थे। तो अपने पोप को सपोर्ट
करने के लिए फ्रांस ने आर्मी भेज रखी थी।
गरीबाडी ने साउथ इटली को आजाद कराने के
बाद सेंट्रल हिटरी को कवर कर लिया और
फ्रांस के ट्रूप से कहा कि देखो यह तो अब
हम कब्जा करके रहेंगे। पोप हमारे भी प्रिय
हैं। हम उनके साथ लड़ना नहीं चाहते। हम
आपसे कह रहे हैं आप तुरंत छोड़ के चले
जाइए। पोप को छोड़ दीजिए। हम संभाल लेंगे।
हम उनको नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। इस तरीके
से फ्रांस के ट्रूप्स ने यहां से रिट्रीट
कर लिया लड़े बगैर और साउथ फ्रांस का सॉरी
सेंट्रल इटली भी जो था वो अब इटली का
पार्ट बन गया।
अब जब यह सब हो रहा था तो इटली का भी एक
चीफ मिनिस्टर था जिसका नाम था काउंट
केमिलियो केवोर।
इटली के राजा विक्टर इमैनुअल द सेकंड ने
अपने चीफ मिनिस्टर से कहा काउंट केमिलियो
केवोर से तेरा खून कब खोलेगा? अगर सारा ही
काम गरीब्डी को करना है तो तू काहे का चीफ
मिनिस्टर बना बैठा है बे? काउंट कैमिल्यू
केवोर जो था वो बहुत ही क्षतिर डिप्लोमेट
था। उसको पता था बातें कैसे मनवाई जाती
हैं। और काउंट कैमिलियो केवोर नॉर्थ नॉर्थ
इटली के पास गया और वहां पर जाकर
ऑस्ट्रियन हेब्सबर्ग एंपायर से बोला कि
भाई आप यह देश छोड़ के चले जाइए नहीं तो
आपके साथ बहुत बुरा होगा। और इसकी शाति
डिप्लोमेसी के कारण नॉर्थ इटली भी बिना
लड़ाई झगड़े करे इटली का पार्ट बन गया। यह
पूरे इटली के यूनिफिकेशन को होने के लिए
11 साल लगे। लेकिन आखिरकार इटली नाम का
देश बनके तैयार हो गया। फिर इटली भी बन
गया। अब तो और किसकी बात करोगे? अब बात
करते हैं ब्रिटेन की जो कि हमारा लास्ट
है। 18th सेंचुरी यानी कि 1700 से लेकर
1799 का वक्त था।
18th सेंचुरी की अगर हम बात करें तो
इंग्लैंड नाम का ब्रिटेन नाम का कोई देश
नहीं था। यहां पे चार अलग-अलग एथनिसिटी के
लोग रहते थे। अगर आप वेल्स चले जाए तो
यहां वेल्चश लोग रहते थे। इंग्लैंड के
अंदर इंग्लिश लोग रहते थे। स्कॉटलैंड के
अंदर स्कॉट लोग रहते थे। यहां स्कॉटिश लोग
रहते थे और आयरलैंड के अंदर आयरिश लोग
रहते थे। तो इन चारों अलग-अलग इलाकों में
चार अलग-अलग एथेनिसिटी के लोग रहते थे। तो
हुआ क्या? सबसे पहले यह हुआ कि 16th
सेंचुरी में यानी कि लगभग लगभग 1500 से
1599 की बात करी जा रही है। इस टाइम पे एक
राजा थे जिनका नाम था किंग हेनरी द एट। यह
नाम नहीं भी याद रखोगे तो भी चल जाएगा।
लेकिन अगर लिख के आ जाओगे तो एग्जामिनर का
दिमाग फट जाएगा। तो किंग हेनरी द एट जो थे
उन्होंने इंग्लैंड के साथ वेल्स को मिला
दिया। तो सबसे पहले इन्होंने वेल्स के साथ
इंग्लैंड को मिला दिया। किंग हेनरी द ए।
ठीक है?
इसके 100 साल बाद यानी कि 1600 के बाद
सीधा चले जाओ 1700 में एक एक्ट असा साइन
किया गया जिसका नाम था एक्ट ऑफ यूनियन ऑफ
177
और इसके साथ इंग्लैंड और वेल्स के साथ-साथ
स्कॉटलैंड को भी मिला दिया गया। ठीक है
सर। तो पहले इंग्लैंड को वेल्स से मिलाया
गया और फिर इंग्लैंड और वेल्स के साथ
स्कॉटलैंड को मिला दिया गया। फिर इसके 100
साल बाद ये पूरा जो आप टापू देख रहे हो
इसका नाम था आयरलैंड। इस आइलैंड में नॉर्थ
वाले आइलैंड का जो पार्ट है यहां पर
प्रोटेस्टेंट क्रिश्चियंस रहते थे।
प्रोटेस्टेंट क्रिश्चियंस
यहां पे भी प्रोटेस्टेंट क्रिश्चियंस रहते
थे और यहां पे भी पूरे इलाके में भी
प्रोटेस्टेंट क्रिश्चियंस रहते थे और बाकी
के आइलैंड में कैथोलिक क्रिश्चियंस रहते
थे। तो ये ब्रिटेन वालों ने ग्रेट ब्रिटेन
वाले यानी जो अब तक स्कॉटलैंड, इंग्लैंड
और वेल्स हो रखे थे। क्योंकि यह भी
प्रोटेस्टेंट थे और यहां के भी
प्रोटेस्टेंट तो इन्होंने प्रोटेस्ट
क्रिश्चियन से बोला कि हम आपको गोला बारूद
हथियार देंगे। आप अपने देश के लोगों से
लड़ो और आप हमारे साथ जुड़ जाओ। तो
इन्होंने क्या किया? प्रोटेस्टेंट
क्रिश्चियन जो नॉर्थ आयरलैंड वाले थे उनको
रिपब्लिक ऑफ आइलैंड यानी बाकी के लोगों के
साथ दिया। तो प्रोटेस्टेंट
क्रिश्चियन वालों को कैथोलिक क्रिश्चियन
वालों से दिया। और इस तरीके से एक
ये चारों मिलके आखिरकार 1801 में यह भी
इनके साथ जुड़ गए। और इन चारों ने मिलके
एक देश बना लिया जिसका नाम है यूनाइटेड
किंगडम।
यूनाइटेड किंगडम। यूनाइटेड किंगडम कोई एक
देश नहीं है। चार कंट्री को मिला के बनाया
है। इंग्लैंड, वेल्स, स्कॉटलैंड और नॉर्दन
आयरलैंड। केवल नॉर्दन आयरलैंड। क्योंकि
नॉर्दन आयरलैंड के नीचे जो कंट्री है उसका
नाम है रिपब्लिक ऑफ आयरलैंड। वो अलग
कंट्री है। आपने कॉर्नर मैग्रोगोर के बारे
में सुना होगा। यूएफसी का यूएफसी का फाइटर
है वो। वो यहां से आता है। रिपब्लिक ऑफ
आयरलैंड्स जो कि यूके का पार्ट नहीं है।
इस तरीके से ब्रिटेन नाम का एक देश बनके
तैयार हुआ। आइए कुछ क्वेश्चन से अपन
प्रैक्टिस करते हैं कि आपको यह समझ में
आया कि नहीं आया। पहला क्वेश्चन आप बताइए
यंग यूरोप नाम की सीक्रेट सोसाइटी किसने
बनाई थी? इस क्वेश्चन का आंसर मैं नहीं
दूंगा क्योंकि ये होमवर्क क्वेश्चन है। आप
अभी इसी वक्त वीडियो को पॉज करिए और आंसर
कमेंट सेक्शन में लिखिए। इंपॉर्टेंट
क्वेश्चन है। अब जहां एक तरफ हमने पढ़
लिया फ्रांस को आजादी दिला दी। जर्मनी को
देश बना दिया, इटली को देश बना दिया, यूके
को देश बना दिया। अब क्या?
अब हम पढ़ते हैं एलगोरी क्या होता है?
एलिगोरी का मतलब होता है जब आप अपनी
कंट्री को परसोनिफाई कर देते हो। भारत
माता क्या है भारत माता? क्या भारत माता
का कोई एड्रेस है? कोई आधार कार्ड है?
क्या आपको पता है कैसे दिखती हैं? कहां
मिलेंगी मुझे भारत माता? भारत माता एक
इमेजिनरी फिगर है। हमने उनमें जान फूंकी
है। ऐसा असली में कोई होता नहीं है। तो जब
आप किसी चीज को ह्यूमैनिफाई कर देते हो,
जब आप किसी चीज को सिंबल्स की मदद से
ह्यूमैनिफाई कर देते हो तो उसे एलिगोरी
कहा जाता है। यहां पे आपके सामने जर्मनी
की एलिगोरी है और जर्मनी की एलिगोरी का
नाम है। मैं आपको कोई और कलर के पेन से
लिख के दिखाता हूं कि जर्मनी
की एलिगोरी का नाम है जर्मेनिया
और ये जर्मेनिया के बारे में आपसे एग्जाम
में पूछा जाता है। एक-एक चीज का एक-एक
मतलब है। फॉर एग्जांपल इनके हाथ में आपको
एक स्वॉर्ड देखने को मिलेगी। यह तीसरे
नंबर पे आप देख सकते हो। यहां पे आपको एक
स्वॉर्ड देखने को पड़ेगी। यह स्वर्ड बता
रही है कि जर्मेनिया कह रही है कि मैं
अपनी कंट्री को डिफेंड करने के लिए तैयार
हूं। भले इसके लिए मुझे तुम्हें चीनना ना
पड़ जाए।
इस स्वर्ड के ऊपर तुम्हें ऑलिव ब्रांच
देखने को मिलेगी और वो ऑलिव ब्रांच यह कह
रही है कि जर्मेनिया कह रही है माना मेरे
हाथ में तलवार है लेकिन मैं इसका इस्तेमाल
नहीं करना चाहती हूं। मैं चाहती हूं पीस
लेकिन अगर तुमने मेरे देश पर हमला किया तो
मैं अपने देश को डिफेंड करने से भी ना
चूकंगी। इसके बाद अगर आप चले जाए तो यहां
पर आपको क्राउन ऑफ ओक देखने को मिलेगा जो
यह हीरोइज्म को दर्शाता है। इसके अलावा
अगर आप बीच में चले जाए तो आपको शील्ड
देखने को मिलेगी जो कि ये बता रहा है कि
पावर और प्रोटेक्शन ये दोनों ही चीजें ये
रिप्रेजेंट करती है और लास्ट में अगर आप
सबसे नीचे चले जाएं तो पांचवें नंबर पे
आपको ब्रोकन चेस देखने को मिलेगी। जो यह
जर्मनी बता रही है, यह ऐलान कर रही है कि
अब हम गुलामी से बाहर निकल चुके हैं।
लास्ट टॉपिक इस चैप्टर से आ जाता है वो है
नेशनलिज्म।
नेशनलिज्म का मतलब होता है देशभक्ति। अपने
देश से प्यार करना। लेकिन कई बार जब
नेशनलिज्म एक लेवल ऊपर चली जाती है तो
निकल के आता है इंपेरलिज्म।
इंपेरलिज्म में आप अपने देश से इतना प्यार
करते हो कि आप दूसरे के देश से हेट करने
लगते हो। आप छोटे देशों के ऊपर, गरीब
देशों के ऊपर, वीक देशों के ऊपर हमला करने
के बारे में सोचते हो। उनके रिसोर्सेज को
लूटने के बारे में सोचते हो। उनको अपनी
कॉलोनी बनाने के बारे में सोचते हो।
यूनाइटेड किंगडम एक इंपेरलिस्ट कंट्री थी।
जो दूसरे देशों पर कब्जा कर लेती थी।
यूएसए ने अभी वेनेजुएला पे कब्जा करके एक
इंपेरलिज्म का शो किया है। एक दूसरे देश
पे हमला कर देना उसके रिसोर्सेज के लिए।
जस्ट बिकॉज़ वो वीक है। इसे इंपेरियलिज्म
कहा जाता है। तो इन दोनों की डेफिनेशन आप
लोगों को याद रखनी है। छोटे-छोटे दो-दो
नंबर के लिए आती है। इंपेरलिज्म हम क्यों
पढ़ रहे हैं? दरअसल ये यूरोप का एक हिस्सा
है। यहां पे आप देख सकते हैं यहां पे आपको
टर्की देखने को मिलेगा।
इधर आ जाएंगे तो आपको यहां पे इटली देखने
को मिलेगा।
टर्की और इटली के बीचोंबीच में जो यह वाला
इलाका है जिसके अंदर आपको स्लोवेनिया,
क्रोशिया, बोसिया, सर्बिया, रोमानिया,
बुल्रिया, मर्सडोनिया, लेबानिया, ग्रीस,
मॉन्टेनियन ग्रो ये वाले देश देखने को
मिलेंगे। इस इलाके को बालकन रीजन कहा जाता
है। इस इलाके में कई सारे छोटे-छोटे देश
हैं। ये एक देश जानते हो क्यों नहीं है?
क्योंकि इन सबकी अलग-अलग कल्चर है,
अलग-अलग ट्रेडिशन है। ये सब अलग-अलग
एथनिसिटी के लोग हैं। तो इन सब ने
अपना-अपना देश बना के रखा हुआ था। लेकिन
ये इतने छोटे-छोटे देश थे कि इनके आसपोस
के जितने भी बड़े देश थे वो इनके ऊपर हमला
करना चाहते थे। इनको अपने साथ मिक्स करना
चाहते थे। इनके रिसोर्सेज लूटना चाहते थे।
चाहे वो कोई भी देश हो सबकी नजर इनके
रिसोर्सेज पे इनकी जमीन पे हुआ करती थी।
तो बालकन रीजन वाला जो इलाका है हर कोई
बालकन रीजन वाले इलाके पे हमला करना चाहता
था। और फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने बात को बहुत
ही ज्यादा बिगाड़ दिया। दरअसल
ऑस्ट्रोहंगेरियन एंपायर के एक प्रिंस थे
जिनका नाम था आर्क ड्यूक फ्रांस फर्दनंद।
इनको एक इलाके में जाना था जिसका नाम था
सारा जेवो।
अब सारा जेवो पे ऑस्ट्रोहंगेरियन क्योंकि
ऑस्ट्रोहंगेरियन भी एक इंपेरलिस्ट कंट्री
थी। छोटी गरीब वीक कंट्रीज के ऊपर हमला कर
दिया करती थी। तो ऑस्ट्रोहंगेरियन ने सारा
जेवो पे कब्जा कर रखा था।
और आर्क ड्यूक फ्रांस परंत जो
ऑस्ट्रोहंगेरियन एंपायर के प्रिंस थे उनकी
जिद थी कि नहीं मैं तो जाकर रहूंगा मुझे
जाना है सारा जेवो
अब साराजे में बहुत सारे सर्बियन
नेशनलिज्म के लोग थे जो सर्बिया के थे और
इनको ये बात बिल्कुल पसंद नहीं थी कि
ऑस्ट्रो अंगेरियन एंपायर ने इनके इलाके पे
कब्जा कर रखा है। बहुत सारे लोगों ने
प्रिंस को सजेस्ट किया मत जाओ। वहां के
लोग हमसे खुश नहीं है। वहां के लोगों को
आजादी चाहिए। वहां पे तुम्हारी जान को
खतरा हो सकता है। तुम्हें वहां मार दिया
जा सकता है। लेकिन वो मानने को तैयार
नहीं। वो गया ना केवल गया। वो खुली कार
में गया और अपनी वाइफ को साथ लेकर गया।
कहता मैं काफिला ले निकलूूंगा। तो जब वो
वहां पे जा रहा था अपने काफिले के साथ।
आगे एक गाड़ी पीछे एक गाड़ी और ये बीच में
खुली कार से जा रहे थे। तभी 19 साल का एक
लड़का था जिसका नाम था जेम्स प्रिंसेप और
उसने सॉरी गैब्रिलो प्रिंसेप। यह ब्लैक
हैंड नाम की सोसाइटी से बिलोंग करता था जो
चाहता था सारा जीवों को ऑस्ट्रोहंगेरियन
एंपायर से आजादी दिलाना।
जैसे ही प्रिंस की गाड़ी निकली इसने बम
उठाया और बम उनकी गाड़ी के ऊपर फेंक दिया।
लेकिन किस्मत से प्रिंस जो थे इस हमले में
बच गए। और प्रिंस की गाड़ी आगे निकल गई और
पीछे वाली गाड़ी पे वो बम गिर गया। प्रिंस
जब आगे भगाते हुए उसका ड्राइवर ले गया।
उसके ड्राइवर ने कहा कि मानव बोला था आपसे
मत चलो। आपकी जान को खतरा है। अभी अपन
मरते मरते बचे। आ प्रिंस कहता है अरे ठीक
है ठीक है। गलती हो गई। लेकिन मैंने सुना
पीछे वाली गाड़ी पे बम पड़ गया। बोले हां
पड़ गया आपके चक्कर में। बोले गाड़ी
घुमाओ। हॉस्पिटल लेके चलो। मुझे उसको
देखना है। ड्राइवर ने कहा क्या बोल रहे
हैं आप? हमें सीधा निकलना चाहिए। लेकिन
प्रिंस ठहरा प्रिंस। उसने कहा तुरंत गाड़ी
घुमाओ। ड्राइवर ने गाड़ी घुमाई। हॉस्पिटल
के लिए जा रहे थे। लेकिन जिस टर्न से उनको
जाना था उस टर्न को मिस करके वो गलत टर्न
ले लेते हैं और जिस टर्न में वो जा रहे
होते हैं उसी टर्न पर प्रिंसेस मुटकी
मुंडी लटका के जा रहा होता है वो कहता है
शिट मुझसे कैसी गलती हो गई मुझसे कैसे मिस
हो गया यार और जब वो अपने आप को कोस रहा
होता है उसी टाइम पे साइड से प्रिंस
निकलता है वो कहता है इस बार मैं नहीं
छोडूंगा और वो उठाता है बम और तुरंत फेंक
के मार देता है और इस हमले के अंदर आर्क
ड्यूक फ्रांस परनंद जो थे जो कि
ऑस्ट्रोहंगेरियन एंपायर के प्रिंस उनका
अससिनेशन हो जाता है। वो मर जाते हैं।
ऑस्ट्रोहंगेरियन एंपायर जो था वो इस चीज
की पूरा का पूरा ब्लेम सर्बिया पे ठोक
देता है। और कहता है ये ब्लैक हैंड नाम का
जो सीक्रेट सोसाइटी ग्रुप है ये सर्बिया
के लोग चलाते थे। इनको बिल्कुल पसंद नहीं
था। सारा जेबों पे हमने हमला कर रखा कब्जा
कर रखा था और ये चाहते थे कि इसको आजादी
दिलाना।
और इनके कारण हमारा प्रिंस मरा है। तो
इसकी जिम्मेदारी आपकी है। और इन लोगों ने
सर्बिया के ऊपर हमला करने के बारे में
सोचा। लेकिन क्योंकि सर्बिया छोटा देश था।
रशिया आया उनके सपोर्ट में और रशिया ने
कहा कि नहीं ऑस्ट्रोंगेरियन एंपायर तुम
सर्बिया को नहीं मार सकते हो। जब रशिया
सर्बिया के सपोर्ट में आया तो
ऑस्ट्रोंगेरियन एंपायर के सपोर्ट में
जर्मनी आ गया। और जब जर्मनी ऑस्ट्रंगेरियन
एंपायर के सपोर्ट में आ गया तो रशिया और
सर्बिया के सपोर्ट में फ्रांस और ब्रिटेन
आ गए। और इस तरीके से दो ग्रुप बन गए
जिसके बाद वर्ल्ड वॉर वन की शुरुआत हुई।
इस चैप्टर से जो भी इंपॉर्टेंट डेट्स हैं
ये सारी की सारी इंपॉर्टेंट डेट्स मैंने
यहां लिख दी है। मुझे कई बार बच्चे
Instagram पे मैसेज करते हैं कि सर
इंपॉर्टेंट डेट्स बता दो। कौन-कौन सी डेट
याद करनी है? कोई दिक्कत नहीं है।
लेक्चर से जो जो आ सकता है, चैप्टर से जो
जो आ सकता है, सब इस वन शॉट में लेकर आया
हूं मैं। तुम्हें बस एक वनशॉट देखना है और
तुम्हें याद करना है। इसके अलावा तुम्हें
कुछ नहीं करना है।
कुछ क्वेश्चंस हैं। जैसे कि पहला क्वेश्चन
है कि किसे आर्किटेक्ट ऑफ यूनिफिकेशन ऑफ़
जर्मनी कहा जाता है? वीडियो को पॉज करिए।
कमेंट सेक्शन में आंसर करिए। किया आपने
आंसर कि नहीं किया? अरे करो भाई। क्या कर
रहे हो? बैठ के देख रहे हो। भाई
यूनिफिकेशन ऑफ जर्मनी का आर्किटेक्ट ऑटोवन
बिस्मार्क को कहा जाता है जो उनके चीफ
मिनिस्टर थे। अगला क्वेश्चन फीमेल एलिगोरी
ऑफ़ फ्रांस के बारे में क्या चीज सही नहीं
है? मैंने आपको जर्मनी के एलिगोरी के बारे
में बताया था। फ्रांस की एलिगोरी का नाम
है मैरिएन।
मैरिएन।
तो फ्रांस की एलिगोरी के बारे में क्या
चीज सही नहीं है? आपके सामने चार ऑप्शन
है। पॉज द वीडियो एंड आंसर इन द कमेंट
सेक्शन। किया आपने सच्ची बात बोल रहे हो
ना करा कि नहीं करा दोस्तों इसका सही जवाब
है इसका सही जवाब है बी शी टूक पार्ट इन
फ्रेंच रिवोल्यूशन मैं आपको पहले भी बता
चुका हूं कि एलिगोरी जो होता है वो कभी भी
रियल नहीं होता है तो जब वो रियल हो ही
नहीं सकता तो वो फ्रेंच रिवोल्यूशन में
पार्टिसिपेट कैसे कर सकती थी चार क्वेश्चन
जो और इंपॉर्टेंट आ जाते हैं। आपको टीचर्स
के पीछे भागने की जरूरत नहीं है।
इंपॉर्टेंट क्वेश्चन भी मैं ही बताता हुआ
जा रहा हूं आपको। पहला क्वेश्चन ऑटो वन
बिस्मार्क ने यूनिफिकेशन ऑफ जर्मनी कैसे
करी? दूसरा क्वेश्चन ब्रिटेन का
यूनिफिकेशन कैसा हुआ? तीसरा क्वेश्चन
इटालियन यूनिफिकेशन कैसे हुआ? यह सारी
चीज़ें हमने डिटेल में पढ़ी है। किस तरीके
से लिबरलिज्म हुआ था ऑफ़ यूरोप में। उसने
क्या असर डाला आपको यह बताना है। इसी के
साथ दोस्तों हमारा ये वाला लेक्चर समाप्त
होता है। जैसा कि मैंने आप लोग को बताया
कि क्लास 10थ के बच्चों के लिए वॉरियर में
हम उन लोगों को एक दिन में एक चैप्टर वो
भी रिकॉर्डेड फॉर्मेट में दे रहे हैं।
इसका कुछ रीज़न है। पहला रीज़न ये है कि हम
चाहते हैं कि आपको ओवरलोड ना किया जाए। अब
अगर मैं यही लेक्चर आपको लाइव पढ़ाने जाता
तो यह लेक्चर मुझे पढ़ाने में 3 घंटा लग
सकता था और अभी आपके पास टाइम नहीं है।
टाइम इज मनी फॉर यू राइट नाउ। आपकी लाइव
क्लासेस चल रही हैं साइंस की। आपकी लाइव
क्लासेस चलेंगी आगे जाके और भी। मैं चाहता
हूं कि YouTube पे मैं आप लोग को
रिकॉर्डेड फॉर्मेट में क्लासेस देता रहूं
ताकि जब आपको वक्त लगे जितने पेज में आप
देखना चाहे 15x 1.5x 2x आप उस पेज में
देखिए। कोई टॉपिक ऐसा हुआ है जो आपको आता
है आप उसको फास्ट फॉरवर्ड करके बढ़ा के
स्किप करके देख लीजिए। और इसमें वॉरियर की
सीरीज में मैं आपको चार डे का चैलेंज लेकर
आया हूं। हर दिन एक चैप्टर कराऊंगा। चार
दिन के अंदर हिस्ट्री खत्म कर दूंगा। तेरे
अंदर इतना कॉन्फिडेंस होगा तू बोलेगा यार
सर ने हिस्ट्री खत्म करा दिया। और इस चार
दिन के चैप्टर चैलेंज के अंदर आज पहला डे
खत्म हो गया है। यानी कि हमने राइज़ ऑफ
नेशनलिज्म इन यूरोप कर दिया। अगर तुम यहां
तक आ गए हो और अगर तुम डे वन का चैलेंज
कंप्लीट कर गए हो तो अभी इसी वक्त वीडियो
को पॉज करो और कमेंट सेक्शन में लिख के
जाओ डे वन कंप्लीटेड। कल मैं तेरे लिए डे
टू चैलेंज लेकर आऊंगा और तू लिख के जाएगा
डे टू कंप्लीटेड और हर दिन जब तू ये जो
चैलेंज लिखता जाएगा कमेंट करता जाएगा तेरा
अलग ही कॉन्फिडेंस होता जाएगा। कल आने
वाला हूं मैं तुम्हारे लिए नेशनलिज्म इन
इंडिया का लेक्चर लेकर। तो भैया अब इसका
बैकलग मत होने देना। प्लीज अपने दोस्तों
को भी साथ लेके चलो। यहां पे हमारा लेक्चर
समाप्त होता है। अगर लेक्चर अच्छा लगा हो
तो एक छोटा सा कमेंट छोड़ के जरूर जाइएगा।
और हिस्ट्री के बाद आप क्या पढ़ना चाहते
हैं वो भी बताइएगा। चार दिन के हिस्ट्री
के चैलेंज के बाद आप कौन सा चैलेंज लेना
चाहते हैं? आज के लिए दोस्तों केवल इतना
ही। मिलते हैं अगली क्लास में एक नए
लेक्चर के साथ। टिल नेक्स्ट टाइम बच्चों
बाय-बाय। टेक केयर। ऑल द बेस्ट। डे, वन
कंप्लीटेड जरूर लिख के जाइएगा।
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