Government-Backed Safe Investment Explained | Liquidity & Margin Benefits | Safer than FD?
द कंटेंट प्रेजेंटेड इन दिस वीडियो इज़
इंटेंटेड सोलरली फॉर एजुकेशनेशनल एंड
इनेशनल पर्पज ओनली। इट शुड नॉट बी
कंसीडर्ड एज़ फाइनेंसियल एडवाइस ऑर अ
रेकमेंडेशन टू ट्रेड और इन्वेस्ट। ऑल डेटा
चार्ट्स, इमेजेस एंड फाइनेंसियल
इनफार्मेशन यूज्ड इन दिस वीडियो आर बेस्ड
ऑन हिस्टोरिकल रिसर्च एंड एनालिसिस फॉर
एजुकेशन एंड इलुस्ट्रेशन पर्पज़ ओनली। एंड
डू नॉट गारंटी एनी फ्यूचर प्रॉफिट्स और
आउटकम्स। व्यूअर आर एडवाइस टू कंडक्ट देयर
ओन रिसर्च बिफोर मेकिंग एन इन्वेस्टमेंट
और ट्रेडिंग डिसीजन। क्या कोई प्रोडक्ट
एफडी से भी ज्यादा सेफ हो सकता है? यस। द
गिल्ट इन्वेस्टमेंट्स। हमें रोज कहीं ना
कहीं गिल्ट सिक्योरिटीज [संगीत]
या गिल्ट इन्वेस्टमेंट्स को लेकर बहुत
सारे क्वेरीज आते हैं। और आज मैं आपको
आपके [संगीत] गिल्ट सिक्योरिटीज से लेकर
सारे कंफ्यूजन को दूर करूंगा। तो इस
वीडियो में एंड तक बने रहें और आराम से
समझें व्हाट आर गिल्ट सिक्योरिटीज।
आगे बढ़ने से पहले एक इंपॉर्टेंट
अनाउंसमेंट। इस मंथ का वेबिनार होने वाला
है टैक्स मैनेजमेंट को लेकर। मार्केट में
अर्न करना जरूरी है लेकिन उससे ज्यादा
जरूरी है उस इनकम का लीगल [संगीत] टैक्स
मैनेजमेंट। आप इक्विटी डेरिवेटिव्स,
कमोडिटी, क्रिप्टो या फिक्स्ड इनकम
सिक्योरिटीज में इन्वेस्ट या ट्रेड करते
[संगीत] हो। इस पर लगते हैं अलग-अलग तरह
के टैक्स। जैसे लॉन्ग टर्म शॉर्ट टर्म
कैपिटल गेन, एफओ पर बिजनेस एंड प्रोफेशनल
टैक्स, क्रिप्टो टैक्सेशन, फिक्स्ड इनकम
सिक्योरिटीज पर टैक्स। [संगीत] सबसेेंट
लॉस होने पर टैक्स को कैसे मैनेज करें? इस
सबका डिटेल इन डेप्थ नॉलेज लेने के लिए
जॉइ करें दिस मंथ फ्री वेबिनार लिंक इन द
डिस्क्रिप्शन। मार्केट में रिसर्च के दो
सिस्टम्स होते हैं। टेक्निकल एंड
फंडामेंटल जिसमें से टेक्निकल एनालिसिस
सिस्टम इज मोर प्रॉमिनेंट। लेकिन लोग
टेक्निकल एनालिसिस को हमेशा आधा ही सीखते
हैं। [संगीत] दैट इज कैंडल्स, इंडिकेटर्स
एटसेट्रा। टेक्निकल एनालिसिस का रियल
अप्लाइड सिस्टम कभी नहीं सीखते। आपने कई
बार हमसे [संगीत] रिक्वेस्ट की टू ट्रेन
यू इन द रियल कांसेप्ट ऑफ़ अप्लाइड
टेक्निकल एनालिसिस। दैट इज हाउ वी क्रिएट
अ स्ट्रेटजी फॉर यू पीपल विद अ रियल
माइंडसेट। आज वो मैं आपको सिखाऊंगा ताकि
आप कभी भी [संगीत] किसी पे भी अपनी रिसर्च
और अपनी इन्वेस्टमेंट्स के लिए डिपेंडेंट
ना रहो। आप आईबीबीएम की ऐप पर जाकर इस
पूरे रियल अप्लाइड टेक्निकल एनालिसिस
कांसेप्ट को देख सकते हो। हमारे इस रियल
अप्लाइड [संगीत]
टेक्निकल एनालिसिस कांसेप्ट की फुल
ट्रेनिंग न्यू ईयर की ऑजन पर हाईली
डिस्काउंटेड प्राइसेस पर अवेलेबल है फॉर अ
वेरी वेरी लिमिटेड टाइम। डोंट मिस द
अपोरर्चुनिटी। आल्सो वाच द इनिशियल एपिसोड
फ्री। डाउनलोड द आईबीपीएम मैप नाउ। सबसे
पहले समझते हैं कि व्हाट इज द मीनिंग ऑफ
गिल्ट। गिल्ट का मतलब होता है गवर्नमेंट
ऑफ इंडिया की सिक्योरिटी। सिंपल वर्ड्स
में जब आप गिल्ट खरीदते हो, आप सरकार को
लोन देते हो। [संगीत] यह गवर्नमेंट ऑफ
इंडिया या स्टेट गवर्नमेंट के थ्रू इशू
किए जाते हैं। इनके डिफॉल्ट होने के
चांसेस ऑलमोस्ट जीरो होते हैं क्योंकि
सरकार रीपे करती है। रेट ऑफर्ड एफडी की
तरह ही होते हैं। इसीलिए इन्हें गिल्ट एज
या हली सेफ भी कहा जाता है। सेफ
इन्वेस्टमेंट्स के लिए गिल्ट व्हिच इज
इक्वल टू ट्रस्ट प्लस स्टेबिलिटी। अब अगला
क्वेश्चन इज गिल्ट सेफर देन एफडी? यस एज
इनके डिफॉल्ट होने के चांसेस ऑलमोस्ट ज़ीरो
होते हैं। इट इज़ बैक्ड अप बाय गवर्नमेंट
ऑफ इंडिया। गिल्ट इज इक्वल टू गवर्नमेंट
ऑफ इंडिया को लोन एंड एफडी इज इक्वल टू
बैंक का प्रॉमिस। आप समझ ही गए होंगे। अब
समझते हैं डिफरेंस बिटवीन गिल्ट एंड गिल्ट
फंड। गिल्ट जब आप गिल्ट सिक्योरिटीज
डायरेक्ट गवर्नमेंट से खरीदते हो लाइक
बाइंग ट्रेजरी बिल, सर्टिफिकेट ऑफ
डिपॉजिट, किसान विकास पत्र, 8% बोंड्स तो
उन्हें हम बोलते हैं गिल्ट। फिक्स्ड
इंटरेस्ट रेट मिलता है लेकिन लिक्विडिटी
इशूज़ आते हैं। अब हम बात करते हैं गिल्ट
फंड के बारे में। यह एक ऐसा म्यूचल फंड है
जो सिर्फ गिल्ट्स सिक्योरिटीज़ में
इन्वेस्ट करता है। रेट ऑफ गिल्ट की तरह ही
फिक्स्ड होते हैं। एज़ दे आर इन्वेस्टिंग
डायरेक्टली इन गिल्ट सिक्योरिटीज़। एनएवी
इंटरेस्ट रेट के हिसाब से वेरी स्लाइट ऊपर
नीचे होता है। अब समझते हैं व्हाई गिल्ड्स
फंड्स आर बेटर देन गिल्ड्स? यह बहुत
इंपॉर्टेंट कांसेप्ट है। सबसे पहली चीज जब
आप गिल्ट फंड्स लेते हैं तो आपको
डवर्सिफिकेशन मिलता है। गिल्ट फंड्स
इन्वेस्ट इन मल्टीपल गवर्नमेंट
सिक्योरिटीज़ दैट गिव्स बेटर
फ्लेक्सिबिलिटी एंड एन ओपोरर्चुनिटी टू
पार्क रिजर्व्स इन डिफरेंट-डिफरेंट
प्रोडक्ट्स एंड दस गेटिंग मोर हैेजिंग एंड
चांस ऑफ़ पुटिंग रिजर्व्स एट डिफरेंट
इंटरेस्ट रेट्स। देखिए अलग-अलग गवर्नमेंट
सिक्योरिटीज़ में गिल्ट आपका लगाता है
जिससे एक सेंस ऑफ़ डवर्सिकेशन या पूरी
डवर्सिफिकेशन मिल जाती है अलग-अलग
इंटरेस्ट रेट पे। दूसरा प्रोफेशनल
मैनेजमेंट। फंड मैनेजर डिसाइड करता है कौन
सा बॉन्ड कब खरीदना है या बेचना है और
बेस्ट एंड वॉइस पॉसिबल रेट्स। राइट? फंड
मैनेजर इंटरेस्ट रेट चेंजेस को एक्सप्लइट
करके बेटर पे बैकक जनरेट कर सकते हैं। जो
डायरेक्ट गिल्ड में पॉसिबल नहीं है।
अकॉर्डिंग टू डाटा। गिल्ट फंड का सीएजीआर
रेंज करता है 6 टू 8 टके के बीच में
डिपेंडिंग ऑन द टाइम फ्रेम ऑफ
इन्वेस्टमेंट जबकि नॉर्मल गिल्ट में ये
फिक्स्ड हो जाता है। थर्ड लिक्विडिटी
डायरेक्ट गिल्ट को आपको मैच्योरिटी तक
होल्ड करना पड़ता है। गिल्ट फंड को आप कभी
भी सेल कर सकते हो। इनफैक्ट ये इतने
लिक्विड होते हैं कि अगर आप एक महीने के
बाद भी रिडीम करते हो तो विदाउट एनी
एग्जिट लूट एंड वैल्यू लॉस आप इन्हें
रिडीम कर लेते हो। फोर्थ मार्जिन यस गिल्ट
फंड्स आर काउंटेड एज मार्जिन एज ड्रॉडाउन
चांसेस आर नेगिलिजिबल हेंस इनको एक्सचेंज
पर प्योर लिक्विड मार्जिन के बराबर कंसीडर
किया जाता है और इस पे आपको 90 से 95 90
टू 95 टके तक का मार्जिन मिल जाता है। सो
प्योर लिक्विड मार्जिन मेंटेन करने की कोई
जरूरत नहीं पड़ती है। वह भी बिना लॉस ऑफ़
अपॉर्चुनिटी कॉस्ट के क्योंकि लॉजिकली आप
गिल्ट फंड्स में इन्वेस्टेड हो जिसका
इंटरेस्ट आपको मिलता है। इस फंड को
एक्सचेंज पर डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए
मार्जिन की तरह यूज़ किया जा सकता है। और
अगर आप इस पर डेरिवेटिव ट्रेडिंग करके जो
भी निकाल लो जो भी एडिशनल निकाल लो दैट इज़
योर एडेड एडवांटेज वेयर यू नो आईबीबीएम इज
द बेस्ट। भाई ऐसी नॉलेज के लिए भी आपको
सिर्फ आईबीबीएम ही पे आना पड़ता है और
आईबीबीएम ही आपको ऐसा नॉलेज देता है। सो
फॉलो अस लाइक अस सब्सक्राइब अस और अगर
वीडियो अच्छा लगे देन शेयर दिस वीडियो विद
एज मेनी पीपल एस पॉसिबल जो अपने फंड्स को
सेफली पार्क करना चाहते हैं विदाउट द
हेडेक ऑफ लिक्विडिटी। सो अब आप ये भी समझ
लीजिए दैट गिल्ट फंड्स हैव नो इंपैक्ट ऑफ
मार्केट फॉलिंग और राइजिंग। आप गवर्नमेंट
ऑफ इंडिया को लोन दे रहे हो। गिल्ट्स आर
फिक्स्ड इंटरेस्ट बियरिंग इंस्ट्रूमेंट्स।
सो बाजार गिर रहा है, बाजार बढ़ रहा है। इन
पे कोई फर्क नहीं है। आपने गवर्नमेंट ऑफ
इंडिया को एक फिक्स्ड इंटरेस्ट पे लोन
दिया है और वो आपको क्रेडिट मिलेगा ही
मिलेगा। अब अगला क्वेश्चन आता है व्हेन इज
द इंटरेस्ट रेट क्रेडिटेड इन द गिल्ड फंड?
आपको जो गिल्ट फंड्स होते हैं उस पे
इंटरेस्ट कब मिलता है? देखिए मोस्ट ऑफ द
गवर्नमेंट ऑफ इंडिया बोंड्स इंटरेस्ट सेमी
एनुअली या एनुअली पे करते हैं। कुछ शॉर्ट
टर्म बॉन्ड्स या स्पेशल पर्पस सिक्योरिटी
सिर्फ मैच्योरिटी पर इंटरेस्ट देती हैं।
और एक गिल्ट फंड डायवर्सिफिकेशन देते हुए
इन सब में इन्वेस्ट करता है। दैट इज व्हाई
वी ऑलवेज फेवर गिल्ट फंड्स। अब बोंड्स का
इंटरेस्ट फंड को कूपन डेट पर क्रेडिट किया
जाता है। क्रेडिट कूपन डेट पे होता है।
लेकिन एनएवी कैलकुलेशन में ये एक्रूड
इंटरेस्ट की तरह रिफ्लेक्ट होता रहता है।
इसलिए एनएवी कंटीन्यूअस राइज करती रहती
है। सिर्फ कूपन डेट्स पर नहीं। फंड
मैनेजर्स यूजली इस इंटरेस्ट को ऑटोमेटिकली
रीइन्वेस्ट कर देते हैं। ये रीइन्वेस्टेड
इंटरेस्ट एनएवी को ग्रेजुअली बढ़ाता रहता
है। इवन बिफोर रिडमशन। दैट्स अ वेरी ग्रेट
फीचर। अगला कैन वी डू एसआईपी इन गिल्ड्स?
हां जी। आप गिल्ट में पूरी तरह एसआई की कर
सकते हैं। उसके लिए आप आईबीपीएम टीम से टच
कर सकते हैं कि व्हिच इज़ द बेस्ट गिल्ट
फंड्स जिसमें आपको अपना एसआईपी करना चाहिए
या लमसम इन्वेस्ट करना चाहिए ताकि आपको
मार्जिन भी प्रॉपर्ली मिले। देखिए कई बार
आपको गलत गिल्ट्स की वजह से मार्जिनस नहीं
मिलते। तो हेंस आप कोशिश कीजिए कि
एक्सचेंज अप्रूव्ड गिल्ट्स पर ही अपना जो
फंड है वो डिप्लॉय करें और उसके लिए आप
आईबीपीएम टीम से जरूर टच कर सकते हैं। वो
आपको पूरी सपोर्ट करेंगे प्लस आपको बेस्ट
ऑफ द बेस्ट गिल्ट्स में आपका फंड पार्क भी
करवा देंगे। अब समझते हैं डिफरेंस बिटवीन
गिल्ट एंड लिक्विड फंड्स। ये एक बहुत बड़ा
क्वेश्चन है। देखिए दोस्तों गिल्ड फंड्स
तो आपको समझ आ ही चुका है। नाउ लेट्स
अंडरस्टैंड लिक्विड फंड्स एंड बाय द एंड
ऑफ़ दिस एक्सप्लेनेशन आपको समझ आ जाएगा कि
व्हाई गिल्ड फंड्स आर बेटर देन लिक्विड
फंड्स। आप लिक्विड फंड्स को बहुत ज्यादा
फेवर करते हो। मैंने देखा है लेकिन गिल्ड
फंड्स आर मच बेटर। कैसे? लिक्विड फंड्स एक
ऐसा म्यूच्यूल फंड होता है जो इन्वेस्ट
करता है शॉर्ट टर्म इंस्ट्रूमेंट्स में।
शॉर्ट टर्म डेप्ट इंस्ट्रूमेंट्स में जैसे
कमर्शियल पेपर्स, बैंक सीडीस मैच्योरिटी
अप टू 91 डेज की होती है इनमें। ये एक
ओवरनाइट फंड की तरह ऑपरेट करते हैं। व्हिच
आर द लिक्विड फंड्स। इनमें रिसीव बैक कम
होता है। सीएजीआर अप्रोक्स 4 से 5 टके का
होता है। डिफॉल्ट के चांसेस कम होते हैं।
पर फिर भी होते हैं। फाइनल रिसीव बैक
कॉम्प्रोमाइज होता है। इसी वजह से डिफॉल्ट
होने की प्रोबेबिलिटी बनी रहती है। अब
क्यों बनी रहती है? एज़ लिक्विड फंड्स
यूज़ली इन्वेस्ट करते हैं शॉर्ट टर्म
कॉर्पोरेट डिबेंचर्स, बैंक पेपर्स। सो यस
चांसेस आर वेरी नेग्लिजिबल क्योंकि 90 डेज
का ड्रॉडाउन पीरियड होता है या यू नो आप
शॉर्ट टर्म इन्वेस्टमेंट्स में जा रहे हो
बट डिफॉल्ट के चांसेस एक्सिस्ट करते हैं।
इंटरेस्ट रेट प्रॉब्लम बड़ा रहता है
क्योंकि आप बहुत छोटे-छोटे टाइम फ्रेम के
लिए इन्वेस्ट कर रहे हो तो अगली बार
इन्वेस्ट करने जाते हैं तो भैया ब्याज
नहीं मिलता, सेम इंटरेस्ट नहीं मिलते तो
रीइ्वेस्टमेंट प्रॉब्लम भी बनी रहती है।
सेम कूपन नहीं मिलते। तो कई बार इसमें सेम
लेवल ऑफ इंटरेस्ट आप नहीं बना पाते। अब
समझते हैं व्हाई डस देयर इज अ वेरी लिटिल
वेरी वेरी लिटिल फ्लक्चुएशन इन द गिल्ट
फंड। अब कई लोग मुझसे ये पूछते हैं सर
क्या गिल्ट फंड प्राइसेस ऊपर नीचे होते
हैं गिल्ट फंड के? देखिए गिल्ट फंड एक
गवर्नमेंट ऑफ इंडिया की सिक्योरिटी होती
है। इट्स अ फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट बेयरिंग
इंस्ट्रूमेंट। इसे समझिए आप। तो अब आप एक
बात बड़ी गौर से समझिए। यहां पर आपको ये
बात समझनी बहुत जरूरी है। मान लेते हैं
आपने एक बैंक [गला साफ़ करने की आवाज़]
एफडी में 60 टके पर अपना कोई फंड पार्क
किया। राइट? आपने ये फंड पार्क कर दिया।
अब एक साल बाद आपने अगर ₹100 लगाए थे तो
आपको 107 मिलेंगे ही मिलेंगे। बिकॉज़ दैट्स
अ फिक्स्ड इंटरेस्ट बेयरिंग इंस्ट्रूमेंट
योर एफडी बैंक एफडी।
अब हुआ क्या कि मीनवाइल ओपन मार्केट में
जो फिक्स्ड इंटरेस्ट बियरिंग
इंस्ट्रूमेंट्स होते हैं दैट इज एफडीस,
बोंड्स, डिबेंचर्स इनका जो रेट है वो एट
हो गया बढ़ गया। तो आपकी जो एफडी हुई हुई
है वो 1 टके से कम की हुई हुई है। थोड़ा कम
तो इस समय आपका ये जो एफडी है ओपन मार्केट
में डिस्काउंट हो जाएगी। हालांकि एफडी बाय
सेल नहीं हो रही है। मैं सिर्फ आपको
एक्सप्लेनेशन दे रहा हूं। क्यों? क्योंकि
आपकी एफडी 60 टके पे हुई है और आज बाजार
का ओपन रेट 8 टके का है एफडी का। तो आपकी
एफडी जो अभी आपने करा रखी है वो हल्की सी
सस्ती हो जाएगी अगर आप इसे बेच पाते हैं।
क्यों? क्योंकि जो सामने वाला इसे खरीदने
जाएगा वो बोलेगा अरे भाई इस समय तो मैं
एफडी 8 टके पे करा सकता हूं। तुमने तो 60
टके पे करा रखी है। तो वो 1 टके का
डिफरेंस कौन पे करेगा? वो आपको पे करना
पड़ेगा। अगर मैं इसे एफडी की जगह समझिए
यहां एक गिल्ट लिख दूं। गिल्ट फंड राइट तो
गिल्ट फंड में यही होता है। आपने गिल्ट
इन्वेस्टमेंट किया एट 60 टका। 60 टके पे
आपने गिल्ट इन्वेस्टमेंट किया और अब गिल्ट
का ओपन मार्केट रेट गवर्नमेंट ऑफ इंडिया
ने इंटरेस्ट इंक्रीस कर दिया तो 8 टके का
हो गया। तो जो 60 टके पे गिल्ट हुआ हुआ है
वो मार्केट में डिस्काउंट हो जाएगा। लेकिन
इसका मतलब क्या आपको एम टू एम आ गया या
गिल्ट गिर गया? नहीं क्योंकि ईयर एंड में
वो गिल्ट 107 होगा ही होगा। लेकिन इस समय
ओपन मार्केट में वो गिल्ट हल्का सा
डिस्काउंट ले जाएगा। यानी ओपन मार्केट में
वो गिल्ट 105 106 के आसपास ऑफर होने
लगेगा। क्योंकि इस एक टके का कंपनसेशन
आपको देना पड़ेगा। लेकिन ईयर एंड में तो
वो इतना होना ही होना है। अब आप इतनी बात
समझिए कि फिक्स्ड इंटरेस्ट बेयरिंग
इंस्ट्रूमेंट अपने कूपन डेट या अपने
मैच्योरिटी डेट के हिसाब से ही कूपन आपके
पास क्रेडिट करते हैं। तब तक ओपन मार्केट
में वो गिल्ट डिस्काउंट पे चला जाएगा। इसे
समझिए कि आपने ₹100 लगाए थे। अब आपने अगर
₹100 लगाए इसे समझिए इस बात को। वो एक साल
बाद आपके अकाउंट में 107 रिफ्लेक्ट होंगे।
राइट? क्योंकि आपने इसे 60 टके पे
इन्वेस्ट किया। अब बाजार का ओपन रेट हो
गया 8 टका। अब ये 1 साल बाद 107 होंगे। ये
₹100 अब कोई खरीदने जाएगा। अभी आपको ये ₹7
मिले नहीं है। तो ये ओपन मार्केट में एक
डिस्काउंट फैक्टर ले जाएगा और आपका यही
गिल्ट 99, 98 इस पे ट्रेड होने लगेगा। अगर
6 महीने गुजर चुके हैं तो यहां पर ₹3 का
इंटरेस्ट एक्रू हो जाएगा। तो ये ओपन
मार्केट में 103 या 104 का होना चाहिए। तो
डिस्काउंट लेकर ये 102 के आसपास ट्रेड
होने लगेगा क्योंकि 6 महीने का इंटरेस्ट
एक्रूव हो गया है। तो गिल्ट का जो कूपन
होता है वो एक्रूव होता रहता है। क्योंकि
जैसे-जैसे इंटरेस्ट या मैच्योरिटी पास आती
है एक्रू जो इंटरेस्ट होता है कूपन डेट
होती है वो पास आ जाती है और ग्रेजुअली
कूपन बढ़ता रहता है। तो गिल्ट्स डू नॉट
हैव एनी डिफॉल्ट चांसेस। लेकिन ब्याज तो
ब्याज की तरह ही मिलेगा ना। हल्का सा वो
ऊपर नीचे होता है और क्यों होता है? अब आप
अगली बात समझिए। ये इंटरेस्ट रेट कैसे
बदलता है? आप इसे बहुत क्लोजली फॉलो करते
हो लेकिन आप लोग समझते नहीं। आरबीआई का
रेपो और रिवर्स रेपो। यह हम बार-बार देखते
हैं। हम बाजार के लोग हैं। आरबीआई का रेपो
रेट, रिवर्स रेपो रेट हम रेगुलर चेक करते
हैं। अगर आरबीआई अपना रेपो रेट, रिवर्स
रेपो रेट घटा देती है तो जो फिक्स्ड
इंटरेस्ट बेयरिंग इंस्ट्रूमेंट है वो
डिस्काउंट हो जाते हैं। और अगर बढ़ा देती
है तो वो बढ़ जाते हैं। जिसकी वजह से
गिल्ट यानी फिक्स्ड इंटरेस्ट बेयरिंग
सिक्योरिटीज में हल्का सा 25 बेसिस पॉइंट
50 बेसिस पॉइंट का फ्लक्चुएशन रहता है।
दैट इज़ 25 बेसिस पॉइंट का मतलब होता है,
दैट इज़ 25 बेपी = 0.25 एंड 50 बीपीएस =
0.50.
सो, जो अपनी आरबीआई है वो अह 25 बेसिस
पॉइंट और 50 बेसिस पॉइंट इसी फॉर्म में
बात करती है। मैं अभी आपसे इसी फॉर्म में
बात करना चाहता हूं कि व्हेन वी से 8 टका
इट मींस 800 बीपीएस। 100 बीपीएस इक्वल टू
एक टका। इस बात को समझिए। सो गिल्ट्स डू
नॉट कैरी एनी डिफॉल्ट चांसेस। लेकिन
फिक्स्ड यानी इंटरेस्ट रेट इंस्ट्रूमेंट्स
में अगर चेंज आता है, फिक्स्ड इंटरेस्ट
रेट बेयरिंग में रेट्स में चेंज आता है तो
हल्का सा गिल्ट में चेंजेस आते हैं। दैट
डज़ नॉट मीन दैट गिल्ट इज गोइंग इंटू अ
रिस्क और लॉस। इस बात को समझिए। आई होप इट
क्लेरिफाई। अब दोस्तों जब इतना समझ गए हो
तो समझ गएगे कि गिल्ट आर मच बेटर
इंस्ट्रूमेंट्स देन बैंक एफडी क्योंकि वो
आपको मार्जिन फैसिलिटी भी देते हैं,
लिक्विड फैसिलिटी भी देते हैं,
डवर्सिफिकेशन फैसिलिटी भी देते हैं, हर
फैसिलिटी देते हैं। तो आई बिलीव
यू नो हाउ टू इन्वेस्ट। आपको मेरा काम था
नॉलेज देना। उस नॉलेज को लेना ना लेना
आपका काम है। सो आई कैन फाइनली से गिल्स
आर अ परफेक्ट मिक्स ऑफ़ सेफ्टी, प्रोफेशनल
मैनेजमेंट एंड लिक्विडिटी स्पेशली इफ यू
वांट गवर्नमेंट बैक्ड पॉजिटिव फ्लोस एंड
दे ऑफर टू पार्क योर रिजर्व्स विदाउट
लॉकिंग योर फंड्स टिल मैच्योरिटी। होप
आपको यह वीडियो अच्छा लगा हो और अगर आपको
इस पर फर्दर गाइडेंस चाहिए तो आपको पता है
कहां आना है द वंस इन अ मंथ फ्री आईबीबीएम
बाय वेबिनार होपफुली जिसने भी इस वीडियो
को देखा सराह शेयर किया उसे मैं इस
वेबिनार में जरूर देखूंगा वि दिस थैंक यू
सो मच एंडिंग माय वीडियो योर होस्ट
सुधांशु सिंह
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