0:09
अभिमन्यु के हाथ में जो
0:11
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड मीटर था वो
0:13
लगातार बजते जा रहा था। उसकी आवाज
0:16
धीरे-धीरे तेज होती जा रही थी। युग
0:19
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड मीटर को देखते
0:21
हुए कहता है यार यह इतना आवाज क्यों कर
0:24
रहा है? तू इसे बंद क्यों नहीं करता? वरना
0:25
जंगली जानवर जाग जाएंगे। और यदि वह जाग गए
0:28
तो भूत प्रेत हमें मारे या ना मारे लेकिन
0:31
वह हमें जरूर मार डालेंगे। अभिमन्यु
0:33
चिढ़ते हुए युग से कहता है युग तू तो ऐसे
0:36
बोल रहा है जैसे मैं यह सब जानबूझकर कर
0:38
रहा हूं। यह डिवाइस अपने आप ही बचता है और
0:41
वह भी तब जब आपके आसपास कोई पैरानॉर्मल
0:44
एक्टिविटी हो रही हो। मतलब यह है कि हमारे
0:47
आसपास जरूर कोई ना कोई अदृश्य शक्ति है।
0:49
अभिमन्यु उस इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड
0:52
मीटर को चारों तरफ घुमाने लग जाता है और
0:54
जिस डायरेक्शन में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक
0:56
फील्ड मीटर से ज्यादा आवाज आ रही थी उस ओर
0:59
जाने लग जाता है। युग अभिमन्यु को रोकते
1:01
हुए कहता है कहां जा रहा है तू? अभिमन्यु
1:04
बांस के पेड़ से निकलते हुए कहता है भूत
1:07
को पकड़ने। चल जल्दी से मेरे पीछे आजा।
1:10
बहुत हंस रहा था ना तू मुझ पर। चल आजा आज
1:13
तुझे भूत दिखाता हूं। अरे मैं तो युग अपनी
1:17
बात पूरी कर पाता उससे पहले ही अभिमन्यु
1:19
वहां से चला जाता है। युग भी अपना सामान
1:21
उठाता है और अभिमन्यु के पीछे-पीछे जाने
1:26
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड मीटर से आ रही
1:28
आवाज का पीछा करते-करते युग और अभिमन्यु
1:31
दोनों ने काला झाड़ी जंगल पार कर लिया था
1:33
और वह किश्नोई नदी के पास पहुंच गए थे।
1:36
अभिमन्यु इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड मीटर
1:39
को हवा में लेफ्ट राइट करते हुए कहता है
1:41
आवाज तो यहीं से आ रही है। मतलब भूत यहीं
1:44
कहीं है हमारे आसपास। युग चिढ़ते हुए कहता
1:47
है यह क्या बोल रहा है अभिमन्यु तू? यह
1:49
भूत-वूत कुछ नहीं होते। छोड़िए तेरी मशीन।
1:52
युग तू 2 मिनट चुप रहेगा। मुझे अपना काम
1:55
करने दे समझा? डिस्टर्ब मत कर। हम लोग भूत
1:57
के बहुत करीब हैं। देखना आज मैं उसे पकड़
2:00
ही लूंगा। अभिमन्यु इलेक्ट्रोमैग्नेटिक
2:02
फील्ड मीटर को लेकर किश्नोई नदी के
2:04
शुरुआती किनारे तक पहुंच गया था। नदी शांत
2:07
लहरों के साथ बह रही थी जिसमें घुटनों तक
2:09
पानी था। चांद की चांदनी नदी के पानी पर
2:12
छाई हुई थी। जैसे ही अभिमन्यु
2:14
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड मीटर लेकर नदी
2:17
में अपना पहला कदम रखता है।
2:19
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड मीटर बजना अपने
2:21
आप बंद हो जाता है। अभिमन्यु और युग दोनों
2:24
शॉक्ड हो जाते हैं और सोचने लग जाते हैं
2:26
कि अचानक से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड बंद
2:29
कैसे हो गया? वातावरण में अचानक से शांति
2:32
छा गई थी। अभिमन्यु इलेक्ट्रोमैग्नेटिक
2:35
फील्ड मीटर को अपने हाथ से ठोकते हुए कहता
2:37
है, अरे यह क्या इसमें से आवाज क्यों नहीं
2:39
आ रही है? हम कहीं यह खराब तो नहीं हो
2:42
गया? युग नदी के बाहर ही खड़ा हुआ था। वो
2:45
वहीं से अभिमन्यु को ताना मारते हुए कहता
2:47
है, खराब तो तब होगा ना जब यह सही होगा।
2:50
इतना घटिया तो है तेरा यह डिवाइस? क्या
2:52
नाम बताया था तूने? हां,
2:54
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड मीटर। तुझे पता
2:56
है इसने आवाज करना बंद क्यों कर दिया?
2:58
अभिमन्यु उदासी के साथ पूछता है, क्यों?
3:01
क्योंकि शायद तुझे पता नहीं है
3:03
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड का एटमॉस्फयर पर
3:06
फर्क पड़ता है। मतलब यह कि जब वातावरण
3:08
चेंज होता है तो मैग्नेटिक फील्ड भी चेंज
3:10
होता है। जिस कारण जब हम जंगल से यहां तक
3:13
आए तो इसने यहां पर आकर आवाज करना बंद कर
3:16
दिया क्योंकि जंगल के अंदर के एटमॉस्फेयर
3:18
में और नदी के पास के एटमॉस्फेयर में बहुत
3:20
डिफरेंस है। तुझे कैसे पता यह सब?
3:23
इलेक्ट्रॉनिक एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियर
3:25
हूं बेटा। इतना तो पता ही होगा। तेरी तरह
3:28
झोलाछाप पैरानॉर्मल एक्टिविटी एक्सपर्ट
3:30
नहीं हूं। मैं नहीं मानता। मुझे तो लगता
3:33
है कि मेरा यह डिवाइस हमें बिल्कुल सही
3:34
जगह पर लाया है। युग अभिमन्यु को घूरते
3:37
हुए कहता है और तुझे ऐसा क्यों लगता है?
3:40
इसके दो कारण हैं। पहला कारण यह कि जब हम
3:42
जंगल से यहां नदी तक आए तो उस बीच भी
3:45
एटमॉस्फेयर चेंज हुआ होगा। तब यह बंद
3:47
क्यों नहीं हुआ? यहां नदी पर आकर ही बंद
3:50
क्यों हुआ? युग हैरानी के साथ पूछता है।
3:52
और दूसरा कारण दूसरा कारण यह है कि आज से
3:55
13 साल पहले यक्षिणी हर पूर्णिमा और
3:58
अमावस्या की रात किश्नोई नदी पार करने
4:01
वाले मर्दों के साथ संभोग करके उनके दिल
4:04
का खून पीकर उन्हें मार देती थी। युग
4:07
शॉक्ड होते हुए कहता है, तो यह कहानी तुझे
4:09
भी पता है? यह कहानी नहीं हकीकत है। और यह
4:13
बात बंगला मुंडा और रोंका मुचा गांव के
4:16
बच्चे-बच्चे को पता है। समझा? छोड़ यह सब।
4:19
तो हां क्या बता रहा था मैं कि देख
4:21
यक्षिणी मर्दों के साथ संभोग करके उन्हें
4:24
मार देती थी यहीं पर इसी नदी के पास तो
4:28
उनकी आत्मा भी यहां भटक ही रही होगी ना
4:30
समझा इसलिए तो मेरा यह डिवाइस यहां पर आकर
4:33
बंद हो गया युग घूरते हुए अभिमन्यु से
4:36
पूछता है तू यह यक्षिणी भूत प्रेत डैन पर
4:39
भरोसा करता है हां करता हूं क्यों तू नहीं
4:43
करता नहीं अभिमन्यु युग के पास जाते हुए
4:46
कहता है तो फिर गले में यह काली मां मां
4:49
का लॉकेट क्यों पहना हुआ है? युग के गले
4:51
में काली मां का लॉकेट था जिसमें उन्होंने
4:53
रौद्र रूप धारण किया हुआ था और उनके पैरों
4:56
पर भगवान शिव थे। युग उस लॉकेट को हाथ
4:59
लगाते हुए कहता है यह लॉकेट मां ने मुझे
5:02
दिया था। उन्हीं की याद में पहनता हूं। अब
5:05
वो तो है नहीं इसलिए युग अपनी बात पूरी
5:09
करता उससे पहले ही अभिमन्यु कहता है। कुछ
5:11
भी हो पर भरोसा तो करता है ना। भले ही मां
5:14
के कारण क्यों ना तो फिर भूतों पर भी
5:16
भरोसा करना सीख जा। पर जो चीज दिखाई नहीं
5:19
देती उस पर विश्वास कैसे करूं? दिखते तो
5:22
हमें भगवान भी नहीं है। पर फिर भी हम उन
5:24
पर विश्वास करते हैं ना। तुझे पता है यह
5:27
जो भूत होते हैं यह हर वक्त हमारे साथ
5:29
रहते हैं। हमारे साथ खाते हैं, सोते हैं,
5:32
उठते हैं, बैठते हैं, सब काम करते हैं। पर
5:34
यह हमें दिखाई नहीं देते। पता है क्यों?
5:37
क्यों? क्योंकि इनके पास भी भगवानों की
5:39
तरह शक्तियां होती हैं। शैतानी शक्तियां।
5:42
भगवान और भूत दोनों एक ही सिक्के के दो
5:45
पहलू हैं। देख दोनों की हिंदी और इंग्लिश
5:48
की शुरुआत ही अक्षर भ और जी से ही स्टार्ट
5:51
होते हैं। चाहे फिर वो इंग्लिश का घोस्ट
5:53
हो और गॉड हो या फिर हिंदी का भूत और
5:57
भगवान। तू तो सही में इंटेलिजेंट वाली
5:59
बातें करने लग गया यार। तुझे यह सब बातें
6:01
कैसे पता? तेरे पापा ने बताई। युग हैरानी
6:04
के साथ पूछता है। क्या कहा? मेरे पापा ने
6:07
बताई है। पर कब? यार उनकी किताबों में
6:10
लिखा है यह सब। तूने उनकी किताबें नहीं
6:12
पढ़ी क्या? क्या तो लिखते थे यार वो
6:15
रोंगटे खड़े हो जाते थे पढ़ते-पढ़ते। युग
6:18
उदास होते हुए कहता है नहीं मैंने नहीं
6:21
पढ़ी। वैसे भी वो सब बस कहानियां है और
6:23
कुछ नहीं। वो कहानी नहीं है युग। तुझे पता
6:27
है एक लेखक वही लिखता है जो उसकी जिंदगी
6:29
में घटित होता है। हो सकता है यह सब तेरे
6:35
यार देख मुझे मेरे पापा के बारे में बात
6:37
नहीं करनी। मैं बहुत थक गया हूं। मुझे अभी
6:40
आराम करना है इसलिए मैं घर ग्रेवयार्ड
6:41
कोठी जाना चाहता हूं। पर तू इतनी रात में
6:44
ग्रेवयार्ड कोठी क्यों जा रहा है? तू तेरे
6:46
रिश्तेदारों के घर रोंका मुचा गांव जा ना।
6:49
मुझे उनके पास नहीं जाना। क्यों? युग
6:52
अभिमन्यु के सवाल का कुछ जवाब नहीं देता
6:54
है। अभिमन्यु युग के कंधों पर हाथ रखते
6:57
हुए कहता है, तू अभी भी उनसे नाराज है
6:59
क्या? नाराजगी किस बात की? नाराज तो हम
7:02
उनसे होते हैं जो हमारे अपने होते हैं और
7:04
वह मेरे अपने थोड़ी हैं। यार ऐसा मत बोल
7:07
यार अभिमन्यु छोड़ ना तू यह सब और जाने दे
7:10
मुझे। अरे ऐसे कैसे? एक काम [संगीत] करता
7:13
हूं। मैं भी तेरे साथ चलता हूं। सुना है
7:16
यक्षिणी के दो ठिकाने थे। पहला किश्नोई
7:18
नदी और दूसरा ग्रेवयार्ड कोठी। तुझे कैसे
7:22
पता यह बात? मुझे तो बहुत कुछ पता है
7:24
यक्षिणी के बारे में। आखिर ऐसे ही थोड़ी
7:26
सर्टिफाइड पैरानॉर्मल एक्टिविटी एक्सपर्ट
7:28
बना हूं मैं। यार बातें करना छोड़ और चल
7:31
जल्दी। अब जाकर सीधे सोना है मुझे। वैसे
7:34
अच्छा हुआ तू मिल गया मुझे। मैं तो रास्ता
7:36
ही भूल गया था। रास्ता ही तो दिखाने आया
7:38
हूं मैं तुझे। क्या बोला? कुछ नहीं। वो
7:41
देख वो रही तेरी ग्रेवयार्ड कोठी।
7:43
अभिमन्यु ने अपने हाथ से राइट साइड की ओर
7:45
इशारा करते हुए कहा। जिस ओर अभिमन्यु ने
7:48
इशारा किया था जब युग उस तरफ देखता है तो
7:50
वह देखता है कि ग्रेवयार्ड कोठी का ऊपरी
7:52
सिरा नदी से साफ-साफ दिख रहा था।
7:54
ग्रेवयार्ड कोठी ऊपरी सतह पर बनी थी जिस
7:57
कारण उसका गुंबद देखा जा सकता था।
7:59
ग्रेवयार्ड कोठी नदी से करीब 600 700 मीटर
8:03
दूर थी। ग्रेवयार्ड कोठी के ऊपर काले-काले
8:06
बादल मंडरा रहे थे जिन्हें देखकर ऐसा लग
8:08
रहा था कि वह काली शक्तियां थी जो युग के
8:11
आने का वहां पर इंतजार कर रही थी। युग और
8:14
अभिमन्यु पैदलपदल ग्रेवयार्ड कोठी की तरफ
8:17
जाने लगते हैं। कुछ ही देर चलने के बाद वह
8:20
दोनों ग्रेवयार्ड कोठी के पास पहुंच
8:21
[संगीत] जाते हैं। ग्रेवयार्ड कोठी खेतों
8:24
के एकदम बीच में बनी हुई थी। आसपास
8:26
दूर-दूर तक कोई घर नहीं था। ग्रेवयार्ड
8:29
कोठी के पास करीब दो हेक्टेयर जमीन थी जो
8:32
खाली पड़ी हुई थी। ग्रेवयार्ड कोठी दो
8:34
मंजिला थी जिसमें बाहर से खिड़कियां देखने
8:37
से लग रहा था कि करीब 50 से 60 कमरे
8:40
होंगे। कोठी में ग्रे कलर किया [संगीत]
8:42
गया था। अभिमन्यु ग्रेवयार्ड कोठी को
8:45
देखते हुए कहता है, यार, यह तो किसी फिल्म
8:48
की हॉरर कोठी जैसी लग रही है। देख कोठी के
8:50
ऊपर काले बादल भी कैसे मंडरा रहे हैं। युग
8:53
चिढ़ते हुए कहता है, यार, यह फिल्मों की
8:56
नहीं मेरे पूर्वजों की कोठी है जो
8:57
उन्होंने अंग्रेजों से खरीदी थी। हां, पता
9:00
है मुझे। मैंने डिटेल्स निकाली थी इस कोठी
9:02
की। यह अंग्रेज लोग भी ना बड़े कमाल के
9:06
थे। कैसे? तुझे पता है यह कोठी कब और
9:08
क्यों बनाई गई थी? नहीं। आज से 200 साल
9:11
पहले 24 अगस्त 1608 में अंग्रेज अपने
9:15
इंडिया में आए थे। उस वक्त उनका भारत में
9:17
शासन नहीं था और ना ही उनके रहने के लिए
9:20
कोई ठिकाना था। जब वो मेघालय में आए तो
9:22
उन्हें अपने बंगलामुंडा गांव में भी रहने
9:24
नहीं दिया क्योंकि अंग्रेज गाय सूअर सब
9:27
खाते थे और हमारे हिंदू धर्म में गाय को
9:30
देवी मां की तरह पूजा जाता है। उस वक्त
9:32
अंग्रेजों के एक जर्नल ने मोटी रकम देकर
9:35
जमीन खरीदनी चाही पर गांव वालों ने मना कर
9:38
दिया। फिर क्या हुआ? होना क्या था? हम
9:41
सबको पता है कि इंडिया में लालची लोग भरे
9:43
हुए हैं। उस वक्त बंगलामुडा के राजा
9:45
अंग्रेजों से मोटी रकम भी हथियाना चाहते
9:47
थे और प्रजा को निराश भी नहीं करना चाहते
9:50
थे। इसलिए उन्होंने बंगलामुंडा गांव के
9:52
बाहर जो कब्रिस्तान वाली जमीन थी वह
9:54
उन्हें बेच दी। गांव वाले तो दिन में भी
9:56
वहां पर जाने से डरते थे। पर यह अंग्रेज
9:59
कहां किसी से डरने वाले थे? उन्हें भारत
10:01
का खजाना जो लूटना था। उन्होंने
10:03
कब्रिस्तान के ऊपर ही कोठी बना दी। गांव
10:05
वाले शुरू-शुर में इसे लाशों वाली कोठी
10:08
कहते थे। फिर अंग्रेजों ने ही इसे
10:10
ग्रेवयार्ड कोठी नाम दे दिया। अच्छा जब भी
10:13
दूसरे गांव से अंग्रेज सैनिक आते थे तो
10:15
उन्हें यहीं पर ठहराया जाता था। यहीं पर
10:17
खातिरदारी की जाती थी। उनके अय्याशियों का
10:20
सारा सामान था। यहां पर रात-रात भर मुजरा
10:23
चलता था। तवाइफें नाचा करती थी और तू कह
10:26
रहा था ना कि यह यक्षिणी नहीं होती। तुझे
10:28
पता है यहां के अंग्रेज अफसरों ने अपनी
10:31
डायरी में यक्षिणी का जिक्र किया है।
10:33
यक्षिणी का नाम सुनकर युग चिढ़ जाता है और
10:35
चिढ़ते हुए कहता है, तेरी यह कहानी खत्म
10:38
हो गई हो तो क्या अब हम कोठी के अंदर चलें
10:40
या रात भर यहीं पर बैठकर कहानी सुनाने
10:42
वाला है? हां चल मैंने रोका है? तुझे यह
10:46
कहानी सुनने में मजा आ रहा था। इसीलिए मैं
10:48
सुना रहा था। ग्रेवयार्ड कोठी का दरवाजा
10:50
करीब 10 फुट ऊंचा था। जब युग और अभिमन्यु
10:53
दरवाजे के पास पहुंचते हैं तो अभिमन्यु
10:55
देखता है कि दरवाजे पर एक बड़ा सा ताला
10:57
लगा हुआ था जिस पर जंग लग गया था।
10:59
अभिमन्यु ताले को हाथ लगाते हुए कहता है
11:02
अरे इस पर तो ताला लगा हुआ है। तेरे पास
11:05
ताले की चाबी है क्या? युग अपना बैग
11:08
टटोलने लग जाता है और कहता है, रखी तो थी
11:11
इसकी चाबी मेरे पास। कहां गई? दिख क्यों
11:13
नहीं रही? हां, यह रही। युग अपने बैग से
11:16
ताले की बड़ी सी चाबी निकाल लेता है।
11:18
[संगीत] एक औरत की आवाज सुनाई देती है।
11:20
खोल जल्दी खोल जल्दी दरवाजा। युग हैरानी
11:24
के साथ कहता है यार तूने आवाज सुनी?
11:26
अभिमन्यु पूछता है कैसी आवाज? औरत की आवाज
11:30
यार वो कह रही थी खोल जल्दी दरवाजा।
11:36
क्या कहा औरत की आवाज? लगता है तेरे कान
11:39
बज रहे हैं। अभी तू मुझे कह रहा था कि मैं
11:41
कहानी सुना रहा हूं। अब तू क्या कर रहा
11:43
है? चल जल्दी ओपन कर कोठी। मैं भी तो
11:46
देखूं इसमें क्या-क्या राज बंद है। युग
11:48
चाबी को ताले के अंदर डाल देता है। जैसे
11:50
ही चाबी ताले के अंदर जाती है आसमान में
11:53
तेज बिजली चमकती है। बिजली इतनी तेज चमकी
11:56
थी कि ऐसा लग रहा था आधी रात में उजाला हो
11:59
गया हो। युग चाबी को ताले के अंदर घुमाने
12:02
लग जाता है। पर जंग लगा होने के कारण चाबी
12:04
घूम नहीं रही थी। युग चाबी घुमाते हुए
12:07
कहता है, अरे यह क्या? यह घूम क्यों नहीं
12:10
रही? घूम जा, घूम जा अब खुल भी जा। शिट
12:13
अभिमन्यु हैरानी के साथ पूछता है क्या हुआ
12:16
यार चाबी अंदर ही टूट गई क्या कहा चाबी
12:19
टूट गई पर कैसे यार इतनी पुरानी चाबी है
12:23
ऊपर से जंग लगी हुई थी तो टूटेगी ही ना
12:25
अभिमन्यु अपने सिर पर हाथ रखते हुए कहता
12:28
है तो फिर अब क्या करें युग कुछ कहता उससे
12:31
पहले एक औरत की आवाज सुनाई देती है पत्थर
12:34
उठा और तोड़ दे ताला युग कहता है अच्छा
12:38
आईडिया है पर तू लड़की की आवाज में क्यों
12:40
बोल रहा है अभिमन्यु हैरानी के साथ कहता
12:42
है। मैंने क्या कुछ बोला? मैं तो जब से
12:45
चुप हूं। युग अभिमन्यु की बात पर ध्यान
12:47
नहीं देता है। वो पास में ही जमीन पर रखा
12:50
बड़ा सा पत्थर उठाता है और उसकी मदद से
12:52
दरवाजे पर लगा ताला तोड़ने लग जाता है।
12:55
तीन बार पत्थर से ताले पर वार करने पर ही
12:57
खट से ताला टूट जाता है। जैसे ही ताला
13:00
टूटता है औरत के चीखने की आवाज सुनाई देती
13:05
युग कुंडी खोलकर दरवाजे को अपने हाथों से
13:08
धक्का देने लग जाता है। पर दरवाजा इतना
13:10
भारी था कि उस अकेले से धक्का नहीं दिया
13:12
जा रहा था। इसलिए अभिमन्यु भी उसकी मदद
13:14
करने लग जाता है। अभिमन्यु और युग अपनी
13:17
पूरी ताकत लगाकर दरवाजा खोल देते हैं।
13:20
जैसे ही दरवाजा खुलता है, धड़ाते हुए
13:22
जोरों से बारिश होने लग जाती है। दरवाजा
13:25
खुलते ही एक औरत की फिर चीखने की आवाज
13:31
युग डरते हुए कहता है, कौन है? कोठी के
13:35
अंदर से औरत की आवाज सुनाई देती है।
13:38
मैं यक्षिणी तेरी मौत [संगीत]
13:46
ये है यक्षिणी की कहानी।
13:50
[संगीत] यक्षिणी एक आग है। यक्षिणी तेरा
14:08
जिस तरह इस कहानी ने आपके दिल में जगह
14:11
बनाई है, ऐसे ही और कहानियों को सुनने
14:13
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