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यक्षिणी एपिसोड 1 | Yakshini Episode 1 | Mai Yakshini Teri Maut

18:15HindiTranscribed Jul 28, 2026
0:01

[संगीत]

0:05

रात के 2:00 बज रहे थे और विराट मेघालय और

0:09

असम बॉर्डर के बीच पड़ने वाली किनोई नदी

0:13

को पार कर रहा था। दूर-दूर तक अंधेरा छाया

0:17

हुआ था। एक गहरे सन्नाटे ने किनोई नदी को

0:21

घेर कर रखा हुआ था और उसी नदी के ऊपर काले

0:25

बादल मंडरा रहे थे। जिन्हें देखकर ऐसा लग

0:29

रहा था कि किसी भी पल वो बरसने वाले हैं।

0:32

[संगीत]

0:32

नदी में घुटनों तक पानी था जो धीमी रफ्तार

0:35

के साथ बहे जा रहा था। विराट के एक हाथ

0:39

में मोबाइल का टॉर्च था तो दूसरे हाथ में

0:42

साइकिल का हैंडल।

0:44

विराट पैदल पैदल मोबाइल के टॉर्च की रोशनी

0:47

के सहारे नदी पार कर ही रहा था कि तभी

0:50

उसका मोबाइल बजने लग जाता है। [संगीत]

0:54

विराट फोन उठाते हुए कहता है

0:57

हां वंदना बोलो। मोबाइल के अंदर से एक औरत

1:00

की आवाज सुनाई देती है। कहां तक पहुंचे आप

1:04

जी? किश्नोई नदी तक पहुंच गया हूं वंदना।

1:07

बस ये किश्नोई नदी पार की और फिर मैं सीधे

1:10

तुम्हारे पास।

1:15

वंदना की घबराते हुए आवाज सुनाई देती है।

1:19

क्या? कि क्या कहा कि नदी पार कर रहे हो

1:23

आप। और नहीं तो क्या? अब तुम्हें तो पता

1:26

ही है कि बंगलामुंडा गांव से रौगंका मूचा

1:29

गांव जाने का एकमात्र यही रास्ता है और वह

1:32

भी नदी पार करके जाना पड़ता है। आपको इतनी

1:35

रात में वापस नहीं आना चाहिए था।

1:38

ग्रेवयार्ड कोठी में ही रुक जाना चाहिए

1:40

था। आपको पता है ना नदी के पास वो घूमती

1:44

है?

1:45

विराट हैरानी के साथ पूछता है। वो घूमती

1:50

है मतलब

1:52

आपको सब पता है पर फिर भी आप जानबूझकर ऐसा

1:55

बोल रहे हैं ना। मां जी ने बताया था ना कि

1:58

नदी पार करते वक्त उसका नाम नहीं लेना

2:00

चाहिए। वरना वो सच में आ जाती है। वंदना

2:04

तुम भी ना कहां मां की बातों में आ गई।

2:07

लगता है मां ने तुम्हें भी यक्षिणी की

2:10

कहानी विराट अपनी बात पूरी करता उससे पहले

2:14

ही वंदना घबराते हुए कहती है शी चुप हो

2:18

जाओ जी हे काली मां मेरे पति की रक्षा

2:21

करना और अनजाने में इनसे जो अनर्थ हुआ है

2:24

उसके लिए माफ कर देना अब ये कभी उसका नाम

2:27

नहीं लेंगे विराट हंसते हुए कहता है

2:31

[हंसी] क्या वंदना तुम भी ना यह यक्षिणी

2:34

वक्षनी कुछ नहीं होती समझी तुम यह सब बस

2:37

मनगढ़ंत बातें हैं जो गांव वालों ने बनाई

2:40

है और कुछ नहीं। आप नहीं मानते तो मत

2:43

मानिए। पर मैं तो मानती हूं। आप ना जल्दी

2:46

से आ जाइए बस। हां वंदना आ रहा हूं। बस यह

2:51

नदी तो पार कर लूं पहले। हम अच्छा मैं

2:54

रखती हूं। अरे ऐसे कैसे? तुम्हें नहीं

2:58

लगता तुम कुछ भूल रही हो। [संगीत]

3:04

मैं भूल रही हूं। क्या भूल रही हूं?

3:07

यक्षिणी के बारे में याद रख सकती हो।

3:10

लेकिन यह याद नहीं रख सकती कि आज हमारी

3:12

शादी की सालगिरह है। गलती हो गई जी। माफ

3:16

कीजिएगा। आपकी फिक्र में तो मैं भूल ही गई

3:19

थी। विराट मुंह बनाते हुए कहता है,

3:23

[संगीत] अब भूल गई थी तो उसकी सजा तो

3:25

मिलेगी तुम्हें। सजा के लिए तैयार रहना।

3:28

वरना प्यार से पूछती है, अच्छा तो क्या

3:31

सजा देंगे आप? तुम्हारी सजा यह है कि

3:35

तुम्हें

3:37

तुम्हें आज रात भर जागना पड़ेगा। वरना

3:40

शर्मा जाती है और शर्माते हुए कहती है आप

3:43

भी ना कैसी-कैसी बातें करते हैं आप। अरे

3:47

अपनी पत्नी से ऐसी बातें नहीं करूंगा तो

3:50

किससे करूंगा? ठीक है। आ जाइए। मैं इंतजार

3:53

कर रही हूं आपका। जल्दी आना। वंदना फोन कट

3:57

कर देती है और विराट वापस से नदी पार करने

4:00

लग जाता है।

4:06

अभी विराट ने एकद कदम ही आगे बढ़ाए थे कि

4:09

तभी उसको पायल बचने की आवाज सुनाई देती

4:12

है। विराट को लगता है कि उसके पीछे से कोई

4:16

लड़की भागते हुए निकली हो। पायल [संगीत]

4:19

की आवाज सुनकर विराट जहां पर था वहीं पर

4:22

रुक जाता है और पीछे मुड़कर देखने लग जाता

4:25

है। जब वो पीछे मुड़ता है तो सिवाय अंधेरे

4:29

के उसे कुछ दिखाई नहीं देता। उसके पीछे

4:32

कोई नहीं था। यह वंदना भी ना यक्षिणी का

4:36

नाम लेकर मेरे मन में उसका वहम डाल दिया

4:39

और वही वहम डरा रहा है अब मुझे और वैसे भी

4:42

मैं तो खुद यक्षिणी से मिलना चाहता हूं।

4:44

बड़े चर्चे सुने हैं उसके। सुना है बड़ी

4:48

खूबसूरत है। इतना कहकर विराट वापस से आगे

4:52

बढ़ने लग जाता है। विराट मुश्किल से अभी

4:55

एक दो कदम चला ही था कि तभी उसे नदी के

4:59

किनारे पर एक काला साया दिखाई देने लग

5:01

जाता है। [संगीत]

5:08

उस काले साए को देखकर विराट के कदम अपने

5:11

आप थम जाते हैं। साई को देखकर ऐसा लग रहा

5:15

था कि जैसे वो विराट का ही इंतजार कर रहा

5:18

था। [संगीत]

5:22

काली साई के पास से पायल के बजने की आवाज

5:25

और चमेली के फूल की खुशबू आ रही थी। विराट

5:31

के हाथ पैर कपकपाने लग गए थे। विराट डरते

5:34

हुए कहता है,

5:36

अ कहीं कहीं वंदना की बात सच तो नहीं थी?

5:42

यह यक्षिणी तो नहीं? विराट उस साईं को

5:46

देखकर इतना डर गया था कि उसका पूरा चेहरा

5:49

पसीने से लथपथ हो गया था। विराट के हाथ

5:52

पैर ठंडे पड़ गए थे। उसका दिल जोरों से

5:55

धड़कने लग गया था। उसकी समझ में नहीं आ

5:58

रहा था कि वो क्या करें। विराट डरते हुए

6:02

कहता है,

6:04

कौन है? कौन है वहां पर? कोई जवाब नहीं

6:08

आता है। सन्नाटा अभी भी छाया हुआ था।

6:13

विराट अपने मोबाइल का टॉर्च उस काले साए

6:16

पर मारने लग जाता है। जब उस टॉर्च की

6:19

रोशनी उस काले साए पर पड़ती है तो विराट

6:22

देखता है कि वो साया किसी और का नहीं

6:25

बल्कि एक लड़की का था।

6:28

नदी के किनारे पर एक बहुत ही खूबसूरत

6:31

लड़की खड़ी थी जिसकी उम्र करीब 24 साल और

6:35

लंबाई 5 फीट2 इंच थी। उसकी लंबी सी गर्दन,

6:40

गुलाबी से हंठ, बाल खुले हुए जो उसकी कमर

6:43

तक आते थे। उसका गोरा बदन और उसी गोरे बदन

6:48

पर उसने काली साड़ी पहन रखी थी। वो लड़की

6:52

किसी अप्सरा से कम नहीं लग रही थी। वो

6:54

इतनी खूबसूरत थी कि कोई भी मर्द उसका रूप

6:58

देखकर अपनी हदों को भूलकर उसकी बाहों में

7:01

मदहोश होना चाहे।

7:03

वो लड़की अपने हाथ से विराट को इशारा करते

7:06

हुए अपने पास बुलाती है। उस लड़की को

7:09

देखकर विराट भूल गया था कि यक्षिणी जैसी

7:12

कोई चीज भी होती है। विराट अपनी साइकिल को

7:16

वहीं पर छोड़ देता है और जल्दी-जल्दी उस

7:19

लड़की के पास जाने लग जाता है जैसे उसके

7:23

बदन में कोई आग लग गई हो। विराट उस लड़की

7:27

के पास जाकर उससे धीरे से पूछता है, कौन

7:31

हो तुम? और यहां पर क्या कर रही हो? क्या

7:35

नाम है तुम्हारा? लड़की अपने चेहरे पर

7:38

मुस्कान लाते हुए कहती है,

7:41

नाम

7:43

में क्या रखा है? जो रखा है काम में रखा

7:48

है।

7:49

[संगीत]

7:51

कैसा काम? लड़की विराट की आंखों में देखते

7:55

हुए कहती है,

7:58

वही काम जो तुम घर पर जाकर अपनी पत्नी के

8:02

साथ करने वाले थे। तुम उसे आज रात भर

8:06

जगाना चाहते थे ना। क्या तुम मुझे नहीं

8:09

जगाओगे?

8:11

उस लड़की की आंखों में एक नशा सा था जिसे

8:14

देखकर विराट सब कुछ भूल गया था। ऐसा लग

8:18

रहा था जैसे वो उसके वश में आ गया हो।

8:21

विराट भी उस लड़की की आंखों में देखते हुए

8:23

कहता है, हां, क्यों नहीं? मैं तुम्हें आज

8:27

रात क्या कल परसों नरसों हमेशा जगा कर

8:31

रखूंगा। कभी नहीं सोने दूंगा तुम्हें।

8:34

[संगीत]

8:36

इतना कहते ही विराट उस लड़की को अपने सीने

8:39

से सटा लेता है और अगले ही पल दोनों नदी

8:42

की रेत पर निर्वस्त्र पड़े हुए थे। दोनों

8:46

के जिस्मों की गर्मी से रेत उनके शरीर पर

8:48

चिपक गई थी। उस लड़की के बदन में से चमेली

8:52

के फूलों की खुशबू आ रही थी। लड़की नीचे

8:56

थी और विराट उसके ऊपर। विराट के माथे की

9:00

पसीने की बूंद यह साफ जाहिर कर रही थी कि

9:03

वो थक चुका था और उसके बदन की सारी ताकत

9:07

खत्म होने वाली थी। पर उस लड़की का चेहरा

9:10

देखकर ऐसा लग रहा था जैसे अभी कुछ हुआ ही

9:13

नहीं था। उसके अंदर की प्यास अभी नहीं

9:17

बुझी थी।

9:18

विराट अपने चर्मोत्कर्ष अवस्था में

9:21

पहुंचने वाला था और कुछ ही पलों में वो उस

9:24

लड़की के बदन पर ध्वस्त होने वाला था। तभी

9:27

उसकी नजर उस लड़की के वक्ष पर पड़ती है और

9:30

वो देखता है कि उस लड़की के वक्ष पर

9:33

धीरे-धीरे झुर्रियां आने लगी थी।

9:40

उसके हाथ पैरों की नसे बाहर निकलने लगी

9:43

थी। उसके बाल काले से सफेद होने लगे थे।

9:48

देखते ही देखते वो लड़की अचानक से बूढ़ी

9:52

औरत में तब्दील हो जाती है। यह सब देखकर

9:55

विराट की आंखें फटी की फटी रह गई थी। उसका

9:59

गर्म बदन अचानक से ठंडा पड़ गया था। विराट

10:03

कांपते हुए कहता है,

10:06

कौन हो तुम? वो लड़की धीरे से कहती है,

10:11

मैं यक्षिणी तेरी मौत।

10:16

यह सुनकर विराट के रोंगटे खड़े हो जाते

10:18

हैं और वो झट से उससे दूर हटने लगता है।

10:21

पर उसी वक्त यक्षिणी उसे अपने दोनों हाथों

10:24

से पकड़ लेती है और कहती है अभी कहां जा

10:28

रहे हो प्रियतम? मेरी प्यास अभी बुझी नहीं

10:31

है। तुम तो मुझे कल परसों नरसों

10:37

हमेशा तक जगाना चाहते थे ना? क्या हुआ? थक

10:41

गए या डर गए?

10:44

मेरा असली रूप देखकर [हंसी]

10:49

विराट उसका खौफनाक चेहरा देखकर इतना डर

10:52

गया था कि कुछ नहीं बोल पा रहा था। उसको

10:55

यक्षिणी की आंखों में खुद की मौत नजर आ

10:58

रही थी। यक्षिणी गुस्से में कहती है,

11:01

वासना की प्यास में तू यह भूल गया कमीने

11:04

कि तेरी पत्नी वंदना तेरा घर पर इंतजार कर

11:07

रही है और तू यहां पर मेरे साथ तुम मर्द

11:11

कभी एक स्त्री से प्यार कर ही नहीं सकते।

11:14

तुम्हारी हवस कभी खत्म नहीं होने वाली।

11:17

इतना कहकर यक्षिणी अपना हाथ विराट के सीने

11:20

पर रख देती है। यक्षिणी के लंबे-लंबे काले

11:23

नाखून थे जो चाकू की तरह पहने थे। विराट

11:27

डरते हुए कहता है नहीं नहीं ऐसा मत करो

11:33

जाने दो मुझे

11:36

जाने ही तो दे रही हूं भोली भटोला

11:40

भोली भटोला

11:43

इतना कहकर यक्षिणी अपना हाथ विराट के सीने

11:46

के अंदर घुसा देती है और उसी वक्त जोर से

11:49

काले बादल गरजने लगते हैं और बारिश होने

11:52

लगती है। विराट के शरीर का खून नाखूनों के

11:56

सहारे यक्षिणी के शरीर में जाने लगता है।

12:00

जैसे-जैसे खून यक्षिणी के शरीर के अंदर जा

12:03

रहा था, वो वापस से जवान होती जा रही थी।

12:08

यक्षिणी वापस से अपने पुराने रूप में आ गई

12:10

थी और विराट का शरीर सूख कर सफेद पड़ गया

12:14

था। उसके अंदर खून की एक बूंद तक नहीं थी।

12:18

पर उसकी [संगीत] धड़कनें अभी भी चल रही

12:20

थी।

12:21

यक्षिणी अपना मुंह विराट के कान के पास ले

12:24

जाती है और फुसफुसाते हुए कहती है राम रो

12:28

ना राम रो राम रो ना राम रो इतना कहकर

12:33

यक्षिणी अपना खून से सना हाथ विराट के

12:36

सीने से बाहर निकालने लग जाती है। जैसे ही

12:39

यक्षिणी अपना हाथ विराट के सीने से बाहर

12:42

निकालती है, विराट अपना दम तोड़ देता है

12:45

क्योंकि यक्षिणी के हाथ में विराट का दिल

12:48

था जो सिकुड़ चुका था। अगले ही पल यक्षिणी

12:52

विराट का दिल लेकर गायब हो जाती है। ठीक

12:55

उस तरह जिस तरह बारिश की बूंदे होती हैं।

13:00

[संगीत]

13:06

टाइप राइटर के बटन दबने की आवाज सुनाई

13:08

[संगीत] दे रही थी। एक आदमी जो कि कोल्ड

13:11

पट पहना हुआ था। एक बंद [संगीत] कमरे में

13:14

सफेद टाइप राइटर के ऊपर कहानी टाइप कर रहा

13:16

था।

13:18

उस आदमी ने बड़ा सा गोल चश्मा पहना

13:20

[संगीत] हुआ था। कमरे के अंदर चारों तरफ

13:23

बुक सेल्फ रखी हुई थी। [संगीत] जिनमें

13:25

करीब हजार से भी ज्यादा किताबें जमी हुई

13:28

थी। टेबल के [संगीत] ऊपर ही एक ऐश ट्रे थी

13:32

जिसमें कुछ आधी जली तो कुछ पूरी जली

13:34

सिगरेट और ऐश रखी हुई थी। लेखक [संगीत]

13:37

खुद से कहता है चलो यह भाग तो पूरा हुआ।

13:42

अब दूसरे भाग में वंदना अपने पति की मौत

13:45

का बदला लेगी। साथ में यक्षिणी के अभिशाप

13:48

का पता लगाएगी और उसे इस अभिशाप से मुक्ति

13:51

दिलाएगी। [संगीत]

13:54

रीडर्स को बहुत दुख होगा विराट की मौत से।

13:57

पर क्या करें? मौतें होंगी। तभी तो हॉरर

14:00

कहानी आगे बढ़ेगी। इतना कहकर लेखक एक

14:03

सिगरेट जलाता है और उसके कश खींचते हुए

14:06

अपने मोबाइल से किसी को फोन करने लग जाता

14:08

है। फोन के अंदर से उबासी लेते हुए आवाज

14:12

सुनाई देती है। हेलो, कौन? हेलो जगदीश वो

14:17

मैं बोल रहा था कि कहानी तैयार हो गई है।

14:21

अच्छा सर आप हैं।

14:24

क्या कहा आपने कहानी तैयार हो गई? ये तो

14:28

बहुत अच्छी बात है सर। पर [संगीत] बुरा मत

14:31

मानिएगा। सर यह बात आप मुझे सुबह भी बता

14:34

सकते थे।

14:36

इतनी रात में कॉल करने की क्या जरूरत थी?

14:39

लेखक सिगरेट का कश खींचते हुए कहता है,

14:42

क्या कहा इतनी रात में? आखिर अभी वक्त ही

14:45

क्या हुआ है? बस लेखक ने इतना ही कहा था

14:48

कि तभी उसकी नजर उसके हाथ की पुरानी सी

14:51

वॉच पर पड़ती है और वो देखता है कि रात के

14:54

3:05 हो रहे थे। लेखक अपनी गलती महसूस

14:58

करते हुए कहता है, [संगीत] "अरे, 3:00 बज

15:01

गए? इतनी रात हो गई। मुझे तो पता ही नहीं

15:04

चला। मुझे तो लगा अभी 910 बज रहे होंगे।"

15:07

कोई बात नहीं सर मैं समझ सकता हूं। आप

15:10

इतनी लगन के साथ कहानी लिखते हैं कि आपको

15:14

वक्त का एहसास ही नहीं होता। हां, यह तो

15:17

है। देखना जब यह किताब आएगी तो लोगों के

15:20

रोंगटे खड़े हो जाएंगे। रात-रात भर जागकर

15:24

यह कहानी लिखी है मैंने। वो तो होनी ही है

15:27

सर। आखिर आपकी कहानी में जान होती है।

15:30

इतनी जान कि सोए हुए मुर्दों को भी जगा दे

15:35

और उनको भी कहानी सुनने के लिए मजबूर कर

15:37

दे। [संगीत]

15:39

वैसे अभी जो कहानी आपने लिखी है उसका नाम

15:42

क्या है? इस कहानी का नाम है यक्षिणी एक

15:46

[संगीत] डायन।

15:50

मोबाइल के अंदर से हैरानी के साथ आवाज

15:52

सुनाई देती है। क्या कहा सर? यक्षिणी। हां

15:56

यक्षिणी क्या हुआ? तुम इतने शॉक्ड क्यों

15:59

हो रहे हो? सर मैंने सुना है यह जो

16:02

यक्षिणी है यह आपके गांव के पास जो कि नदी

16:05

है वहां पर घुमा करती है और मर्दों के साथ

16:09

वो सब यानी वही सब करके उन्हें मार देती

16:13

है। हां। तो तो सर आपको डर नहीं लगता जिस

16:17

गांव में यक्षिणी घूमती है वहीं पर रहकर

16:20

उसके बारे में कहानी लिखकर अगर यक्षिणी ने

16:23

आपको कुछ कर दिया तो? जगदीश

16:27

यक्षिणी इतनी बुरी नहीं होती जितना गांव

16:29

के लोग और तुम सब समझते हो। मतलब मतलब यह

16:33

कि यक्षिणियां बहुत अच्छी होती हैं।

16:35

[संगीत] इतनी अच्छी कि दूसरों की खुशी के

16:38

लिए अपना सब कुछ कुर्बान करने के लिए

16:40

तैयार हो जाए। पर कभी-कभी जिंदगी में कुछ

16:43

ऐसी घटना घटती है कि आपकी पूरी जिंदगी बदल

16:46

जाती है। कैसी घटना सर? मैं कुछ समझा

16:50

नहीं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हमारे

16:54

ब्रह्मांड में अनेक लोक हैं। जिसमें देवी

16:56

देवताओं, सुर, असुर, राक्षसों का वास होता

16:59

है। इन सभी लोकों की दूरी पृथ्वी से

17:02

अलग-अलग है। कहा जाता है कि इन सभी लोकों

17:05

में विष्णु लोक सबसे ऊपर है और सबसे निचला

17:09

लोक यक्ष, यक्षिणियों और अप्सराओं का है।

17:12

जो पृथ्वी से सबसे नजदीक हैं। जो लोक

17:15

पृथ्वी के सबसे नजदीक हैं, उस लोक के देवी

17:18

देवताओं की पूजा करने से वह देवी देवता

17:21

जल्दी प्रसन्न होते हैं। जगदीश बीच में ही

17:24

बोल पड़ता है, ऐसा क्यों सर, उस लोक के

17:27

देवी देवता इतनी जल्दी प्रसन्न क्यों होते

17:29

हैं? क्योंकि लगातार ठीक दिशा और समय पर

17:33

किसी मंत्र की साधना करने से उन देवी

17:35

देवताओं तक तरंगे जल्दी पहुंचती हैं। यक्ष

17:39

यक्षिणियों के लोक में से ही एक यक्षिणी

17:42

द्वापर युग के अंत में पृथ्वी पर आई थी।

17:45

जिसको एक अभिशाप मिला था। एक ऐसा अभिशाप

17:48

जिसने उसकी जिंदगी बदल दी थी। कैसा अभिशाप

17:52

सर? आप किस अभिशाप की बात कर रहे हैं? और

17:56

उसे यह अभिशाप किसने दिया था?

18:01

[संगीत]

18:03

एक दूसरे लोक से पृथ्वी पर आई यक्षिणी को

18:07

एक अभिशाप मिला था। आखिर क्या था वह

18:09

अभिशाप और किसने दिया था?

18:11

[संगीत]

18:12

जानने के लिए सुनिए।

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