This Airplane Lost its Roof at 24,000 ft | What Happened Next? | Dhruv Rathee
नमस्कार दोस्तों 28 अप्रैल साल 1988 दोपहर
के करीब 1 बजे हवाई में अलोहा एयरलाइंस की
फ्लाइट 243 अपनी उड़ान भरने के लिए तैयार
हो रही
[संगीत]
थी यह एक बड़ा ही सुहाना दिन था अच्छी
खासी धूप निकली थी और ज्यादातर लोग यहां
छुट्टी मनाने आए थे हवाई को अगर आप नहीं
जानते तो यह एक ग्रुप ऑफ आइलैंड्स है
पैसिफिक ओशन के बीच जो अमेरिका का हिस्सा
है बड़े ही सुंदर आइलैंड्स हैं और इनकी
राजधानी है होनोलूलू ये फ्लाइट एक्चुअली
में हीलो से होनोलूलू जा रही थी हीलो सदन
मोस्ट आइलैंड है हवाई का लेकिन ये
डिस्टेंस कोई ज्यादा नहीं है सिर्फ 35
मिनट की फ्लाइट है ये एक रूटीन फ्लाइट ये
अलोहा एयरलाइन यहीं की लोकल एयरलाइंस है
जो अलग-अलग आइलैंड्स को कनेक्ट करने का
काम करती है अब क्योंकि ये डिस्टेंस इतने
छोटे हैं तो यह वाला स्पेसिफिक प्लेन
ऑलरेडी आठ बार उड़ान भर चुका था सुबह से
तीन अलग-अलग राउंड ट्रिप्स पर जा चुका था
लेकिन ये कोई अनयूजुअल बात नहीं है ऐसे प्
के लिए यह बिल्कुल नॉर्मल चीज है सब कुछ
जैसा चलना चाहिए वैसे चल रहा था पैसेंजर्स
बोर्ड करते हैं फ्लाइट के दरवाजे बंद किए
जाते हैं और ठीक
1:2 पर ये फ्लाइट उड़ान भरती
है बस एक अनयूजुअल चीज होती है यहां पर जब
एक पैसेंजर बोर्ड कर रही थी प्लेन में तो
दरवाजे के अंदर घुसने से पहले उसने साइड
में देखा कि जो प्लेन की बॉडी थी अलग-अलग
शीट्स होती हैं जो रिवेट से अटैच होती है
तो एक शीट में थोड़ा सा क्रैक दिखाई दे
रहा था लेकिन उसने यह चीज किसी को बताई
नहीं यह सोचकर कि क्या फर्क पड़ता है इतनी
रेपुटेड एयरलाइन है यह प्लेन रेगुलरली
उठता रहता है इसके रेगुलर इंस्पेक्शंस
होते हैं अगर कोई दिक्कत होती तो यह लोग
नोटिस कर लेते पक्का यह छोटी-मोटी कोई
गलती होगी लेकिन यह एक गलती कितनी भारी
पड़ने वाली थी कोई सोच भी नहीं सकता था
प्लेन की उड़ान भरने के सिर्फ 10-15 मिनट
बाद ही एयर हॉस्टेसेस ट्रॉली लेकर आती हैं
और पैसेंजर्स को ड्रिंक सर्व करती हैं सीट
बेल्ट साइन अभी तक हटा नहीं था क्योंकि
आमतौर पर यह तभी हटता है जब प्लेन
क्रूजिंग एल्टीट्यूड पर पहुंच जाता है और
इस प्लेन के लिए क्रूजिंग एल्टीट्यूड
24000 फीट था फ्लाइट में तीन एयर
हॉस्टेसेस है जो पैसेंजर्स को ड्रिंक सर्व
कर रही है और उड़ान भरने के ठीक 20 मिनट
बाद यह फ्लाइट 24000 फीट के क्रूजिंग
एल्टीट्यूड पर पहुंचती है और जैसे हीय इस
हाइट पर पहुंचती है एक बड़ा सा धमाका होता
है सभी पैसेंजर्स को धमाके की बड़ी तेज
आवाज सुनाई देती है और अचानक से रैपिड
डीकंप्रेशन हो जाता है सांस लेने में
प्रॉब्लम होने लगती है और चारों तरफ सामान
इधर-उधर उड़ने लगता है टोटल केस और
जबरदस्त कंफ्यूजन आखिर हो क्या रहा है कुछ
पैसेंजर्स अपने आसपास देखते हैं तो उन्हें
दिखाई देता है प्लेन की छत और आसपास की
दीवारें गायब है ऊपर उन्हें खुला आसमान
दिख रहा है हुआ क्या है दोस्तों कि प्लेन
के शुरुआती हिस्से का लगभग 35 स्क्वायर
मीटर का हिस्सा हटकर अलग हो चुका
है अब आमतौर पर होता क्या है दोस्तों
एरोप्लेंस के अंदर केबिन्स में हवा को
हमेशा प्रेशराइज करके रखा जाता है ताकि हम
नॉर्मली सांस ले पाएं नहीं तो 24000 फीट
की हाइट पर जो एटमॉस्फेरिक प्रेशर होता है
वो बहुत कम हो जाता है हवा पतली हो जाती
है और हम नॉर्मली सांस नहीं ले सकते उतनी
हाइट पर इसलिए एरोप्लेंस का अपना एक
प्रेशराइजेशन सिस्टम होता है जो हवा को
पंप करके रेगुलेट करके रखता है अगर किसी
कारण से ये सिस्टम खराब हो जाए और
एरोप्लेन उतने ही टीटू पर उड़ रहा हो तो
इमरजेंसी के केस में वो ऑक्सीजन मास्क्स
टपक आपने सुना होगा ना वो सेफ्टी
ब्रीफिंग्स में हमेशा कहते हैं इन द इवेंट
ऑफ लॉस ऑफ केबिन प्रेशर ऑक्सीजन मास्क्स
विल ड्रॉप इन ऑक्सीजन मास्क्स में टिपिकली
15 से 20 मिनट की ऑक्सीजन होती है जिस समय
में पायलट को प्लेन को नीचे लाना होता है
और एक ऐसे एल्टीट्यूड पर ले जाना होता है
जहां पर नॉर्मली सांस ली जा सके यह हो गया
10000 फीट के नीचे अब हमारी इस कहानी में
फ्लाइट 243 में क्या हुआ ऑक्सीजन मास्क्स
नीचे तो टपके लेकिन ऑक्सीजन मास्क सिस्टम
काम ही नहीं कर रहा था प्लेन की छत फटने
की वजह से ऑक्सीजन मास सिस्टम भी पूरी
तरीके से तबाह हो चुका था लोगों को
हाइपोक्लोरमिक
लोगों को चक्कर आने लगे कंफ्यूजन होने लगा
और ऐसे केस में एक से 2 मिनट लगता है
सिर्फ बेहोश होने में मिशल honda's जो रो
15 के पास थी जब यह धमाका हुआ इंटरकॉम के
जरिए कॉकपिट से कांटेक्ट करने की कोशिश
करती हैं लेकिन दूसरी तरफ से कोई जवाब
नहीं आता दूसरी एयर हॉस्टेस सीबी लांसिंग
जो एक पैसेंजर को ड्रिंक सर्व कर रही थी
रो फाइव के पास जब छत उड़ी प्लेन की तो वो
भी हवा में उड़ गई प्लेन से
बाहर तीसरी उनकी कॉलीग जेन साटो रो टू के
पास थी वो जमीन पर गिर जाती है एक लगेज जब
उनके मुंह पर लगता है तो चारों तरफ हंगामा
मचा हुआ था मिशेल को जब पायलेट्स की तरफ
से कोई जवाब नहीं मिला तो वो एक-एक
पैसेंजर से जाकर पूछने लगी क्या तुम्हें
प्लेन उड़ाना आता है क्या तुम्हें प्लेन
उड़ाना आता है क्या आपको प्लेन उड़ाना आता
है पैसेंजर्स उनकी ये बातें सुनकर और डर
गए कि यार प्लेन उड़ाने के लिए भी हमसे
पूछ रहे हो पायलेट्स का क्या हुआ है यहां
पर अगर पायलेट्स नहीं है तो हम सारे क्रैश
कर जाएंगे जमीन पर रेंगते हुए वो
धीरे-धीरे कॉकपिट के नजदीक पहुंचती हैं और
वहां उन्हें दिखता है कि उनकी कॉलीग जेन
के सर से खून निकलना शुरू हो चुका है
कॉकपिट के अंदर देखने की कोशिश करती हैं
वो तो उन्हें कुछ दिखाई नहीं देता कॉकपिट
का व्यू पूरी तरीके से ब्लॉक्ड
है कुछ चंद मिनट यहां पर बचे हैं जिसके
बाद ये सारे पैसेंजर्स बेहोश हो जाएंगे और
मारे जाएंगे लेकिन
बहुत तेज हवाएं भी सह रहे हैं ऑलमोस्ट 500
किमी प्रति घंटे की स्पीड से हवाएं चल रही
हैं आंखें खोलना मुश्किल हो रहा है और साथ
ही साथ जो तापमान है वो -45 डिग्री
सेल्सियस का है इस हाइट पर अगर ऑक्सीजन
किसी तरीके से मिल भी गई तो इतनी ठंड में
ज्यादा देर तक जिंदा रहना पॉसिबल नहीं है
क्योंकि ज्यादातर पैसेंजर्स ने निक्र और
टीशर्ट पहनी हुई है हवाई एक ट्रॉपिकल जगह
है जहां पर लोग बीचेस को और जंगलों को
देखने जाते हैं यहां कभी बर्फ नहीं गिरती
तो कोई भी पैसेंजर इस टेंपरेचर के लिए
प्रिप प्रेड नहीं है मिशेल इकलौती एयर
हॉस्टेस जो होश में बची है वहां पर पायलट
को बार-बार कांटेक्ट करने की कोशिश करती
रहती
है लेकिन कोई जवाब नहीं आता इस सारे खतरे
के बीच एक अच्छी खबर यह थी कि पायलेट्स
एक्चुअली में जिंदा थे और जिंदा ही नहीं
दोस्तों पायलेट्स पैसेंजर से कहीं ज्यादा
बेहतर कंडीशन में थे उनका ऑक्सीजन मास्क
थैंकफूली काम कर रहा था कमांड संभाले हुए
थे 44 साल के कैप्टन रॉबर्ट शनस थाइम एक
बेहद एक्सपीरियंस जो 11 साल से अलोहा
एयरलाइंस के लिए काम कर रहे थे इनके साथ
दूसरी तरफ थी 36 साल की फर्स्ट ऑफिसर मीमी
टॉम किंस जब वो धमाका हुआ था दोनों को एक
बड़ा झटका लगा था और पीछे मुड़ के जब
दोनों ने देखा तो उन्हें दिखाई दिया कि
प्लेन की छत गायब थी और कॉकपिट डोर भी
मिसिंग था बहुत सारा मलबा चारों तरफ फैला
हुआ था लेकिन दोनों इमीडिएट काम पर लग
जाते हैं सबसे पहले अपना ऑक्सीजन मास्क
पहनते हैं और हालातों को समझते हुए एक
इमरजेंसी डिसेंट करने का निर्णय लेते हैं
करीब 500 किमी प्रति घंटे स्पीड से वो
4100 फीट पर मिनट डिसेंड करते हैं लेकिन
वक्त का यह खेल सिर्फ प्लेन को थोड़ा सा
नीचे लाने तक सीमित नहीं था इनके लिए एक
दूसरी और भी बड़ी प्रॉब्लम सामने आती है
पता चलता है कि इस हादसे की वजह से जो
प्लेन का नोज है आगे वाला हिस्सा जिसमें
बैठे हुए हैं वो थोड़ा सा नीचे हो गया है
करीब 1 मीटर से सिर्फ प्लेन का जो जमीनी
हिस्सा है उसी की मदद से ही कॉकपिट और
केबिन एक साथ जुड़े हुए हैं अभी भी अगर
ज्यादा देर तक ये ऐसे ही उड़ते रहे तो
झुकते झुकते ये दोनों हिस्से टूट कर एक
दूसरे से अलग भी हो सकते हैं मीमी टॉम
किंस होनू लुलू को कांटेक्ट करती हैं और
उन्हें इंफॉर्मेशन
को होनू लुलू में उतारने की छोड़ो माओवी
में उतार लो वो ज्यादा पास है
1:8 वो माओवी टावर को कांटेक्ट करके
सिचुएशन बताती हैं इस वक्त करीब 3 मिनट
हुए थे जब से प्लेन की छत फटी थी लेकिन
थैंकफूली प्लेन 14000 फीट पर आ चुका था इस
हाइट पर ज्यादातर पैसेंजर्स के लिए सांस
लेना इतना मुश्किल नहीं था और क्योंकि यह
3 मिनट के अंदर ही हो गया था ज्यादातर लोग
बेहोशी से बच गए और अक्सिया का रिस्क कम
से कम खत्म हुआ मीमी टॉम किंस माऊ
एयरपोर्ट को कांटेक्ट करके कहती हैं कि
सारी इमरजेंसी सर्विसेस अपनी तैयार रखो
कुछ भी हो सकता
है ढेर सारे फायर फाइटर्स और रेस्क्यू
व्हीकल्स रनवे पर आकर तैयार रहते हैं हर
कोई इस प्लेन के लैंड करने का इंतजार कर
रहा है करीब एक मिनट बाद प्लेन 100000 फीट
की हाइट पर आ गया था लेकिन एक और प्रॉब्लम
सामने आती है सामने एक बड़ी सी 10000 फीट
की पहाड़ी द हालिया काला समिट यह पहाड़ी
माओवी एयरपोर्ट और प्लेन के बिल्कुल
बीचोबीच मौजूद थी कैप्टन रॉबर्ट्स प्लेन
को धीरे करते हैं 210 नॉट 200 नॉट 170 नॉट
और धीरे करते रहते हैं जितना धीरे हो सके
उतना धीरे इसे उड़ाते हैं अगर इससे नीचे
चले गए तो फ्लाइट कंट्रोल करने में
प्रॉब्लम हो सकती है लेकिन इस 170 नॉट की
स्पीड को मेंटेन करते हुए वो दो आइलैंड्स
के बीच में से प्लेन को निकालते हैं
पहाड़ी से बचते हुए प्लेन टर्न करता है और
एयरपोर्ट की तरफ मोड़ लेता है ये वो पॉइंट
था जब पैसेंजर्स की जान में जान आती है
उन्हें फाइनली रिलाइज होता है कि हमारे
प्लेन में एक पायलट है जो ना सिर्फ जिंदा
है वो प्लेन को ठीक-ठाक उड़ा भी पा रहा है
जैसे-जैसे रनवे की तरफ प्लेन नीचे आने
लगता है मिमी टॉम किंस लैंडिंग गियर को
नीचे लाती हैं तीन सेट ऑफ व्हील्स होने
चाहिए दो पीछे की तरफ एक आगे की तरफ पीछे
वाले को मेन गियर कहा जाता है और इंडिकेटर
दिखा रहा था कि मेन गियर तो सक्सेसफुली
रिलीज हो चुका है लेकिन जो नोज गियर है
आगे वाला व्हील है वो नीचे नहीं आ पा रहा
है अब टेक्निकली देखा जाए बिना इस आगे
वाले पहिए के बिना इस नोज र के लैंड करना
पॉसिबल तो है इस चीज को बेली लैंडिंग कहा
जाता है इमरजेंसी केसेस में कई बारी की
जाती है लेकिन इस स्पेसिफिक केस में जहां
प्लेन का बीच वाला हिस्सा इतना कमजोर हो
चुका है छत ऑलरेडी मिसिंग है पायलेट्स को
यह डर है कि अगर इस तरीके की लैंडिंग
अटेंप्ट करी गई तो पक्का पक्का प्लेन
क्रैश कर जाएगा और अगर फ्यूल टैंक में कुछ
हुआ तो ब्लास्ट भी हो सकता है दि एर पलेन
इन द कंडीशन इट वाज इन वाज द ही ट हैव अ
नोज गियर बज वन द नोज टच डाउ न द रनवे इ व
है ब्रोकन द एयरप्लेन अपर्ट देर फर
ब्रेकिंग प्रोली द फ्यूल टैंक्स अर्ट व
कुड लीड टू अ वेरी ड्रामाटिक फायर एंड
एक्सप्लोजन लेकिन इसके अलावा और कोई ऑप्शन
भी नहीं है और करें तो क्या करें पायलेट्स
डिसाइड करते हैं कि इसी तरीके से लैंडिंग
करी जाएगी जैसे ही रनवे दिखने लगता है
पैसेंजर्स लैंडिंग के लिए तैयार होते हैं
कुछ लोग भगवान से प्रार्थना करने लग गए थे
दूसरी तरफ कुछ लोग अपने आसपास के लोगों से
गले मिल रहे थे शायद यह आखिरी बार हो कि
वह एक दूसरे को देख पाए ज्यादातर
पैसेंजर्स अभी भी बहुत बुरे तरीके से डरे
हुए थे और उसके पीछे कारण भी जायज था
जैसे-जैसे प्लेन नीचे आ रहा था वो
धीरे-धीरे साइड टू साइड ऐसे हिलने लग गया
था पायलट ने रिलाइज किया कि लेफ्ट वाला जो
इंजन है वो फेल हो चुका था मैनुअली
रीस्टार्ट करने की कोशिश करी जाती है इस
इंजन को लेकिन अफसोस कुछ नहीं होता इस
वक्त तक रनवे पर मौजूद सारी इमरजेंसी
सर्विसेस तैनात थी फायर फाइटर्स एंबुलेंस
इवेक्युएशन टीम्स हर कोई वर्स्ट सिचुएशन
के लिए प्रिपेयर कर रहा था किस तरीके से
डैमेज को कम से कम रखा जा सके वैसे
इंटरनेट पर ब्राउज करते वक्त अगर आपको भी
अपना डैमेज कम से कम रखना है तो आज के
वीडियो के स्पंस नड वीपीए आपके लिए काफी
यूजफुल होंगे जब भी आप इंटरनेट पर किसी भी
वेबसाइट पर जाते हो आपका डाटा कलेक्ट किया
जाता है उस डाटा का इस्तेमाल करके आपको
टारगेटेड आड्स दिखाई जाती है और आपका एक
डिजिटल प्रोफाइल बनाया जाता है एक बढ़िया
तरीका ऑनलाइन ट्रैकिंग को रोकने का और
अपनी प्राइवेसी बढ़ाने का है एक वीपीएन का
इस्तेमाल करना नड वीपीएन के जरिए आप अपने
आईपी एड्रेस को स्पूफ कर सकते हैं जिससे
कि आपको ऑनलाइन ट्रैक कर पाना मुश्किल हो
जाता है और आपकी पर्सनल इंफॉर्मेशन
सिक्योर रहती है इसके अलावा ट्रेवलिंग
करते वक्त भी वीपीए काफी यूजफुल चीज है
अगर किसी देश में कोई कंटेंट ब्लॉक्ड होता
है कोई कंट्री रिस्ट्रिक्शंस को बायपास
करना हुआ ये भी एक वीपीएन के जरिए बड़ी
आसानी से किया जा सकता है अगर आप
इंटरेस्टेड है इस लिंक को यूज कीजिए
nvpc.in
की 30 डे मनी बैक गारंटी भी है तो n
vpn.com ये लिंक नीचे डिस्क्रिप्शन में
मिल जाएगा जाकर चेक आउट कर सकते हैं अब
अपनी कहानी पर वापस आते हैं 1:5 पायलेट्स
माओवी टावर से कहते हैं वी विल नीड ऑल द
इक्विपमेंट यू हैव गॉट जितनी इक्विपमेंट
आपके पास है हमें सबकी जरूरत पड़ेगी इसी
बीच रनवे पर खड़ा हुआ एक बंदा प्लेन को
बाइनल से देख रहा था कि तभी उसे दिखाई
देता है एक्चुअली में नोज गियर तो
सक्सेसफुली रिलीज हो चुका है यानी कि
प्लेन को बेली लैंडिंग की जरूरत नहीं
पड़ेगी पायलट को इफॉर्म किया जाता है और
पायलट की जान में जान आती है और फिर
1:5 ठीक 13 और 42 सेकंड बाद एक्सप्लोजन के
अलोहा एयरलाइंस फ्लाइट 243 रनवे पर टच
डाउन करती
है कैप्टन ब्रेक्स इस्तेमाल करने के अलावा
बचे हुए इंजन नंबर टू का थ्रस्ट रिवर्सर
भी इस्तेमाल करते हैं और प्लेन धीरे-धीरे
शांति से आकर रुक जाता
है रनवे पर मौजूद सभी इमरजेंसी टीम्स राहत
महसूस करती हैं प्लेन से इमरजेंसी एग्जिट
के जरिए पैसेंजर्स को नीचे उतारा जाता है
उस वक्त इसका एक असली वीडियो भी लिया गया
था जिसे आप स्क्रीन पर देख सकते हैं
जिसमें पैसेंजर्स सेफली स्लाइड के जरिए
नीचे उतर रहे हैं सभी पैसेंजर्स कैप्टन को
शाबाशी देते हैं और धन्यवाद करते हैं उनकी
जिंदगियां बचाने के लिए हालांकि ज्यादातर
लोग सेफ थे लेकिन कई पैसेंजर्स को भारी
चोट लगी थी एक 84 साल की फीमेल पैसेंजर जो
सीट नंबर 5a पर बैठी थी वो सबसे ज्यादा
इंजर्ड थी एक स्कल फ्रैक्चर के साथ 6a पर
बैठे हुए पैसेंजर का राइट वाला हाथ टूट
गया था 4a और 4f पर बैठे हुए पैसेंजर्स को
सीरियस इंजरी हुई थी बेसिकली ज्यादातर
पैसेंजर्स जो रोज 4567 पर बैठे थे उन्हें
भारी चोट आई थी क्योंकि उसी एरिया की छत
फटी थी और रोज 8 से लेकर रोज 21 पर जो
पैसेंजर बैठे थे उन्हें सिर्फ माइनर इंजरी
हुई थी इसके अलावा 21 पैसेंजर्स ऐसे भी थे
जिन्हें बिल्कुल कोई इंजरी नहीं हुई थी
एयर हॉस्टेस जेन सैटो अभी भी बेहोश थी और
वो एक कंकन से सफर करती हैं एयर हॉस्टेस
मिशेल
जिंदा बच गया है सिवाय एक के 58 साल की
एयर हॉस्टेस सीबी लैंसिंग इकलौती मृत्यु
इस पूरे हादसे
में बाद में सर्च टीम्स ने बहुत ढूंढने की
भी कोशिश करी थी लेकिन अफसोस इनकी बॉडी
कभी नहीं मिल पाई और यह हमेशा के लिए
समुद्र की गहराइयों में गायब हो
गई लेकिन बाकी बचे हुए 94 लोग अपने भाग्य
को धन्यवाद दे रहे थे कि वह जिंदा बच गए
क्या यह सिर्फ लक की बात थी कि वह यहां
जिंदा बच पाए नहीं यहां एक टेक्निकल
इक्विपमेंट को बहुत बड़ा क्रेडिट जाता है
मैं बात कर रहा हूं सीट बेल्ट्स की सबसे
बड़ा कारण जिसकी वजह से इतने सारे लोग
जिंदा बच पाए जैसा मैंने शुरू में बताया
था क्योंकि यह फ्लाइट क्रूजिंग एल्टीट्यूड
तक नहीं पहुंची थी तो सीट बेल्ट साइन अभी
भी ऑन था और लोगों ने अपनी सीट बेल्ट लगा
रखी थी अगर रोज 45678 में बैठे हुए लोगों
ने अपनी सीट बेल्ट ना लगाई होती तो वह भी
हवा में उड़कर प्लेन से सीधा बाहर जाते इस
हादसे के बाद जैसे ही खबर फैलती है इस
प्लेन की फोटोज दुनिया भर के अखबारों में
छपती हैं बिना छत की ये मिरेकल फ्लाइट
इसके बाद अमेरिका का नेशनल ट्रांसपोर्टेशन
सेफ्टी बोर्ड इन्वेस्टिगेटर्स की एक टीम
भेजता है इस इंसीडेंट में इन्वेस्टिगेट
करने के लिए आखिर क्या कारण जिसकी वजह से
यह हादसा हुआ इन्वेस्टिगेशन टीम पता करती
है कि यह वाला जो प्लेन था ये
8968 फ्लाइट साइकिल्स और
3549 6 फ्लाइट आवर्स पूरे कर चुका था इस
प्लेन का जो फ्यूज लाज था जो मेन बॉडी
जिसे कहा जाता है वो कमजोर हो गई थी फिटीग
और कोरोजन की वजह से जब-जब यह प्लेन हवा
में होता था इस पर लगी हुई मेटल शीट्स
एक्सपेंड करती थी प्रेशराइज्ड केबिन की
वजह से और जब जब यह जमीन पर होता था यह
फ्यूजल आज कांट्रैक्ट करता था ये
कांस्टेंट एक्सपेंशन कंट्रक्शन एक्सपेंशन
कंट्रक्शन की वजह से कमजोर हो गया था ये
एक बोइंग 737 प्लेन था जिसका फ्यूज लाज
एलुमिनियम शीट मेटल पैनल्स का बना होता है
जो कि एक फ्रेम में सरकंफ्रेंस अरेंज्ड
होती हैं हर एक पैनल एक दूसरे को ओवरलैप
करता है 3 इंचे से और जो ओवरलैपिंग एरिया
है उसे लैप जॉइंट कहा जाता है क्योंकि इन
शीट्स की थिकनेस सिर्फ 1 मिलीमीटर की थी
तो बोइंग ने अपना एक बॉन्डिंग प्रोसेस
डेवलप किया था जिससे कि ये पूरी स्किन एक
स्ट्रेस को अब्जॉर्ब करे एक सिंगल यूनिट
की तरह ये कंपनी एक इपोक्कैम
के अलग-अलग पार्ट्स को इकट्ठा जोड़ने के
लिए जब ये ग्लू ड्राई हो जाती थी तो एक
स्ट्रांग बॉन डेवलप होती थी जिससे कि जो
स्ट्रेस है वो डिस्ट्रीब्यूटर्स में और
क्रैक्स ना फॉर्म हो और ग्लू इकलौता जरिया
नहीं था इन शीट्स को साथ में जोड़कर रखने
का ग्लू की स्ट्रांग बॉन्ड के बाद तीन रोज
रिवेट्स के लगाए जाते थे ये हर एक ओवरलैप
में लगाए जाते थे हर एक एक शीट का हिस्सा
जो ओवरलैप करता था वहां वहां इन रिबट्स को
लगाया जाता था जिससे कि एरोप्लेन का पूरा
फ्रेम तैयार हो सके और सिक्योर बना रह सके
बोइंग ने जो पहला बैच बनाया था इन 737
एरोप्लेंस का उनमें इसी तरीके का इस्तेमाल
किया गया है लेकिन इस तरीके में कुछ
प्रॉब्लम्स बाद में नोटिस हो रही थी
इन्होंने पाया कि जब मॉइश्चर ज्यादा होता
है हवा में तो पानी की वजह से बॉन्ड्स
कमजोर पड़ जाती हैं जो इपोक्कैम
सारा स्ट्रेस इन शीट्स पर लग रहा है व
ग्लू की जगह इन रिवेट्स पर चला जाता है
इसी प्रॉब्लम की वजह से साल 1972 में
बोइंग ने डिसाइड किया कि वो एक नया तरीका
इस्तेमाल करेंगे इन शीट्स को साथ में
जोड़कर रखने का हॉट बॉन्डिंग का वो
इस्तेमाल करेंगे इसमें हीट और प्रेशर का
इस्तेमाल किया जाता है दो शीट्स को साथ
में जोड़कर रखने के लिए अब इंटरेस्टिंग
चीज ये है दोस्तों कि ये जो हॉट बॉन्डिंग
वाला सिस्टम था ये ऑलरेडी 1972 से
इस्तेमाल किया जा रहा था और अहा एयरलाइंस
का ये जो फ्लाइट 243 का इंसीडेंट हुआ था
ये 16 साल बाद हुआ था
इस तो ब्लेम यहां इस एयरलाइन पर किया गया
कि आखिर यह क्यों इस पुराने एरोप्लेन का
अभी भी इस्तेमाल करने लग रहे थे बोइंग ने
तो साल 1972 में ही एक सर्विस बुलेटिन इशू
कर दिया था कि यह इशू है हमारे प्लेंस में
यह दिक्कत हो सकती है इनफैक्ट 1987 में इस
घटना से एक साल पहले बोइंग ने अलर्ट
सर्विस बुलेटिन इशू किया था कि जो पुराने
प्लेंस हैं इनके उनकी सही तरीके से
इंस्पेक्शन और रिपरेशन करी जाए अगर कोई
एयरलाइन अभी इन्ह अभी भी इस्तेमाल कर रही
है तो इसके अलावा बोइंग ने अपना एक सेफ्टी
डिजाइन भी बनाया था कि अगर फ्यूज लाज में
कोई टियर होता है तो वह जो टियर है वह 10
बा 10 इंच के स्क्वायर में ही बना रहे
इन्होंने टियर स्टैप्स लगाए थे हर 25
सेंटीमीटर में बॉडी में प्लेन की इससे अगर
कोई एक पार्ट फटता है प्लेन की बॉडी का तो
पूरी प्लेन की बॉडी ना फट है लेकिन हमारी
फ्लाइट 243 के केस में हालत इतनी खराब थी
इस प्लेन की कि इसके अंदर ढेर सारे
क्रैक्स मौजूद
थे इतने सारे क्रैक्स कि यह टेयर स्टैप्स
भी किसी काम के नहीं रहे एनटीएस बी ने कहा
कि जब यह फ्लाइट अपने क्रूजिंग एल्टीट्यूड
पर पहुंची जो प्रेशर था वो अपने पीक पर
पहुंच गया जिसकी वजह से ये सारे अलग-अलग
क्रैक्स एक साथ जुड़ गए और पूरा का पूरा
सेक्शन छत का साथ में फट
गया जो फाइनल रिपोर्ट निकाली एनटीएस बी ने
उसमें तीन मेन कारण बताए गए इस हादसे के
पीछे पहला अलोहा एयरलाइंस की मैनेजमेंट ने
मेंटेनेंस प्रोग्राम को प्रॉपर्ली
सुपरवाइज नहीं किया और इंस्पेक्शंस और
क्वालिटी कंट्रोल्स को सही से असेस नहीं
किया दूसरा अमेरिका की फेडरल एविएशन
एडमिनिस्ट्रेशन पर भी सवाल उठाया गया कि
इनकी एजेंसी ने एयर वर्जीने डायरेक्टिव
देते समय सभी जॉइंट्स की इंस्पेक्शन की
मांग नहीं करी जबकि बोइंग ने कहा था कि यह
करना चाहिए हालांकि एफ एए ने यह जरूर कहा
था अलोहा एयरलाइंस को कि तुम एक नए
टेस्टिंग मेथड का इस्तेमाल करो अपनी प्लेन
की बॉडीज में क्रैक्स ढूंढने के लिए एडी
करंट टेक्नीक जिसमें इलेक्ट्रिक करंट मेटल
से ले जाया जाता है और छोटे-छोटे क्रैक्स
ढूंढे जाते हैं जो नॉर्मल इंसानों को
आंखों से दिख भी ना सके अलोहा एयरलाइंस ने
कहा कहा कि उन्होंने इस टेक्नीक का
इस्तेमाल किया था क्रैक्स ढूंढने के लिए
लेकिन बाद में पाया गया कि ये झूठ बोल रहे
थे इन्होंने कभी अपने प्लेंस का
इंस्पेक्शन ढंग से किया ही नहीं था तीसरा
जब पुरानी बॉन्डिंग टेक्नीक में
प्रॉब्लम्स देखी गई तो बोइंग और एफ एए
दोनों ने इन इश्यूज को हल्के में लिया
बोइंग ने अपने 737 प्लेन को डिजाइन किया
था कि वो 20 साल तक उड़ सके जिसमें 51000
फ्लाइट आवर्स और 75000 साइकिल्स का टाइम
लिमिट रखा गया था हालांकि अलोहा फ्लाइट
243 के प्लेन ने इससे कम फ्लाइट आवर्स
उड़े थे लेकिन ये प्लेन ऐसा था जो बहुत
सारी छोटी-छोटी फ्लाइट्स करता था इसकी वजह
से इसका फ्लाइट साइकिल काउंट 90000 पर था
जबकि बोइंग ने कहा था कि हमारी सर्विस
लाइफ 75000 साइकिल्स की है यह अपनी 20 साल
की लाइफ टाइम के एंड पर भी था एक और कारण
जिसकी वजह से यह हादसा हुआ एक अच्छी चीज
इस हादसे के बाद यह हुई कि बोइंग के जितने
भी पुराने एरोप्लेंस थे उन सबको दोबारा से
इंस्पेक्ट किया गया और पता है क्या पाया
गया उनमें से कई सारों में एक्चुअली में
क्रैक्स मौजूद थे वैसे ही क्रैक्स जो इस
फ्लाइट 243 में मौजूद थे इससे पता चलता है
कि यह जो प्रॉब्लम थी यह सिर्फ इस एक
इकलौते प्लेन की नहीं थी बल्कि ढेर सारे
प्लेंस की थी जो इस फ्लीट का हिस्सा थे
दूसरी अच्छी चीज यह होती है कि इस हादसे
के बाद से सेफ्टी रेगुलेशंस दुनिया भर में
और मजबूत बना दिए जाते हैं ताकि ऐसे हाद
से दोबारा कभी ना हो साल 1991 में फेडरल
एविएशन अथॉरिटी अपना एजिंग एयरक्राफ्ट
सेफ्टी प्रोग्राम लॉन्च करती है इसके तहत
जितने भी पुराने एयरक्राफ्ट्स हैं उनको
मैंडेटरी इंस्पेक्शंस और कंट्रोल
प्रोग्राम से गुजरना होगा होगा इसके बाद
से एयरक्राफ्ट की मेंटेनेंस में जिन
टेक्निक्स का इस्तेमाल किया जाता है
क्रैक्स ढूंढने के लिए वो टेक्निक्स भी
हमेशा के लिए बदल गई ये एडी करंट का
इस्तेमाल करना अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग वो
सारे तरीके जो इंसानों की आंखों पर रिलाई
नहीं करते अब उनका इस्तेमाल किया जाता है
ऐसे क्रैक्स को पहले ही धूं निकालने के
लिए नए रूल्स बनाए जाते हैं हाई साइकिल
प्लेंस के लिए जो फ्लाइट्स अलोहा एयरलाइंस
की तरह बहुत छोटी ड्यूरेशन की होती हैं
लेकिन ये प्लेंस एक दिन में कई सारी
फ्लाइट्स करते हैं 10-20 फ्लाइट्स कर लेते
हैं इनकी इंस्पेक्शन और फ्रीक्वेंसी
है एविएशन सेफ्टी रिसर्च एक्ट पुराने
एजिंग एयरक्राफ्ट के स्ट्रक्चर्स और
इश्यूज को और बेहतर समझने के लिए और प्लान
करने के लिए ओवरऑल ये एक हादसा दोस्तों
हमेशा के लिए एविएशन सेफ्टी स्टैंडर्ड्स
को बदल डालता है जिसकी वजह से थैंकफूली
इसके बाद से लेकर आज तक कभी भी इस लेवल का
हादसा इस तरीके से दोबारा कभी नहीं हुआ है
लेकिन जहां एक तरफ दोस्तों साइंस और टेक
की दुनिया में इतनी सारी इंप्रूवमेंट्स हो
रही है वहां आज भी कुछ लोग बेसिक से
कांसेप्ट को अप्लाई करते वक्त मात खा जाते
हैं इसका सबसे अजीबोगरीब एग्जांपल है
टाइटन सबमरीन का डिजास्टर जो पिछले साल
हुआ था इसे मैंने इस वीडियो में एक्सप्लेन
किया है यह सबमरीन जो इस डूबे हुए टाइटनिक
जहाज की एक सैर करने निकली थी एक बिलियने
की लापरवाही जो एक खौफनाक हादसे में बदल
गई यहां क्लिक करके देख सकते हैं
बहुत-बहुत धन्यवाद
[संगीत]
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