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Code of Civil Procedure 01 (Sections 1 & 2) I Telegram Link in Description

1:16:31EnglishBy HalfPace LegalTranscribed Jul 13, 2026
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0:11

वेरी गुड इवनिंग ऑल नमस्कार दोस्तों बच्चे

0:13

आवाज आ रही है सभी लोगों को वीडियो क्लियर

0:15

है सर

0:17

यस सर

0:17

ऑल गुड

0:18

यस सर

0:19

सर

0:19

ठीक है ठीक है तो बच्चे हमारी पहली क्लास

0:22

है सीपीसी की पहली बार हम लोग सीपीसी

0:24

पढ़ने जा रहे हैं आज तो सीपीसी के अंदर

0:28

देखो एप्रोच कुछ बहुत सीधी रखने वाले हैं।

0:31

बिल्कुल भी मैं चीजों को कॉम्प्लिकेट

0:33

करूंगा नहीं। जितना सिंपल हो सकता है उतना

0:36

सिंपल रखूंगा अपनी क्लासेस को भी और उसके

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स्ट्रक्चर को भी। ठीक है? तो आज तो वैसे

0:40

भी फर्स्ट क्लास है तो इट इज गोइंग टू बी

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इंट्रोडक्टरी। उसमें हम लोग बस अपने आप को

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एक एक तरीके से अवगत कराएंगे कि सीपीसी है

0:48

क्या? तो कुछ इंपॉर्टेंट प्रोविजंस

0:51

पढ़ेंगे और कुछ डेफिनेशंस को देखेंगे। तो

0:53

बहुत सिंपल रहने वाला है। तो जिससे कि आप

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एकदम एक कॉन्टेक्स्ट में आ जाओ कि सीपीसी

0:58

है क्या एक्चुअल में? देखो बच्चे जितना

1:01

मेरा एक्सपीरियंस कहता है मैंने पहले भी

1:03

एक बार YouTube पर बच्चों को सीपीसी

1:05

पढ़ाया है। जितना मेरा एक्सपीरियंस कहता

1:08

है सीपीसी में देखो सीपीसी बड़ा ही प्यारा

1:12

सब्जेक्ट है। बहुत इजी सब्जेक्ट है। उसमें

1:16

ऐसा कभी ही सिचुएशन ऐसी आती है जब टीचर को

1:20

बहुत ज्यादा मतलब दिमाग लगा के किसी चीज

1:23

को एक्सप्लेन करना पड़े। कुछ ही ऐसे

1:26

प्रोविजंस हैं। आई विल से नॉट मोर देन 101

1:30

सेक्शन से ज्यादा ऐसे सेशंस नहीं है

1:32

जिसमें बहुत ज्यादा दिमाग लगेगा। सब सीधे

1:36

साधे से सेक्शंस हैं। लैंग्वेज सिंपल है।

1:38

एक बार में समझ में आ जाती है। बस परेशानी

1:41

किस बात की आती है? बच्चा चैलेंज्ड क्यों

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फील करता है सीपीसी में? एक तो

1:45

कॉन्टेक्स्ट। कॉन्टेक्स्ट बहुत जरूरी होता

1:48

है बच्चे। प्रोसीजरल लॉ हम जब भी पढ़ते

1:50

हैं ना अगर आप उसको एकदम से उठा के कहीं

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से भी पढ़ लोगे आपको जिंदगी में नहीं समझ

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में आने वाला आपको समझ में आ जाएगा वो कह

2:00

क्या रहा है ये लैंग्वेज समझ में आ जाएगी

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बट उसका मतलब नहीं समझ में आया होगा जैसे

2:04

आप देख रहे हो हम सीआरपीसी पढ़ रहे हैं

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एविडेंस पढ़ रहे है चीजें एक सीक्वेंस में

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होती जा रही है हमें पता भी नहीं चल रहा

2:10

ओवर टाइम हम लोग उस चीज को कवर करते जा

2:13

रहे हैं क्योंकि इन एव्री क्लास वी आर

2:15

अवेयर अबाउट दी कॉन्टेक्स्ट कि हम किस

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कॉन्टेक्स्ट में क्या पढ़ रहे हैं? वही

2:20

एग्जजेक्टली सेम एप्रोच कुछ भी कुछ भी

2:23

नहीं बदलने वाले। एग्जजेक्टली सेम एप्रोच

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रखेंगे सीपीसी के अंदर भी। ठीक है? काफी

2:28

मैंने देखा है कई बार टीचर्स अलग-अलग बहुत

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ज्यादा ही उसमें अपना दिमाग लगा देते हैं

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सीपीसी को पढ़ाने में और वो कॉम्बिनेशंस

2:36

बनाने की कोशिश करते हैं बिटवीन दी

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ऑर्डर्स एंड दी सेशंस। आई विल से

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स्टार्टिंग के लिए शुरुआत के लिए जब हमको

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उस सीपीसी पर होल्ड बनाना है। अभी ऐसा कुछ

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नहीं करेंगे। क्यों? उसका रीजन ये है।

2:52

क्योंकि वो एक ऐसी अप्रोच है जिसके लिए

2:54

जरूरी है कि आपको पहले से ही एक अच्छा

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खासा आपका जो बैकअप है सीपीसी के ऊपर वो

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स्ट्रांग हो। तो मैं अपना एम बहुत आपको

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क्लियर कर देता हूं पहली ही क्लास में कि

3:06

क्या मेरा एम होने वाला है जिस एम के साथ

3:09

मैं आपको सीपीसी पढ़ाऊंगा। बच्चे मेरा ऐ

3:13

बस इतना सा है कि जो हमारा सिविल प्रोसीजर

3:17

कोड है द वेरी स्टच्यू ये जो है इसको हमें

3:22

समझना है। इसमें क्या लिखा है? इसमें क्या

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प्रावधान है? उसको हमें समझना है। देखो यह

3:29

जो सीपीसी है यह मोर और लेस दो पार्ट में

3:32

डिवाइडेड की जा सकती है। पहला भाग है जहां

3:35

पर सेक्शंस दिए हुए हैं। बहुत ज्यादा

3:37

सेशंस नहीं है। कुछ ही है जिनको हम कवर कर

3:41

लेंगे। फिर उसके बाद ऑर्डर्स आते हैं। तो

3:44

पहले तो इसको बात को समझना जरूरी है कि

3:46

सेक्शन क्या करते हैं? ऑर्डर्स क्या करते

3:48

हैं?

3:49

बच्चे कुछ ऐसा रिलेशन मान लो कि जो

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सेक्शंस हैं वो ब्रॉड लॉ बताते हैं कि

3:56

मतलब जैसे कि सेक्शंस हम सीआरपीसी में पढ़

3:58

रहे हैं ना वैसे ही सेक्शंस सीपीसी में भी

4:01

होते हैं। पर सीपीसी में एक अलग चीज क्या

4:03

है? सीपीसी के अंदर रूल्स आ जाते हैं। और

4:07

रूल्स किस बारे में होते हैं वो? रूल्स

4:09

अलग-अलग चीजों के बारे में होते हैं। आपको

4:11

पता है प्रोसीजरल लॉ है। प्रोसीजरल लॉ

4:13

मतलब कोर्ट में कैसी प्रक्रिया चलेगी उसके

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बारे में होगा। तो सीआरपीसी के अंदर क्या

4:19

किया है? हर एक चीज को सेक्शंस के ही अंदर

4:24

बताया गया है। और वही रीजन है कि इतने

4:26

सारे सेक्शंस हैं ओवर 400। ठीक है? और

4:30

उनको हम कवर कर रहे हैं। सीपीसी के अंदर

4:32

अच्छी बात क्या है? उन्होंने रूल्स कीेंस

4:36

के हिसाब से उनको डिवाइड कर दिया है

4:39

बिटवीन दी सेशंस एंड बिटवीन दी रूल्स। और

4:43

ये जो रूल्स है उनको अलग-अलग ऑर्डर्स के

4:46

अंदर

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एक ग्रुप में बांट दिया है कि अच्छा जहां

4:50

तक बात केस फाइल करने की है तो यह सारे

4:53

रूल्स लगेंगे। जहां तक बात जजमेंट सुनाने

4:55

की है ये सारे रूल्स लगेंगे। तो उन्होंने

4:58

पहले से ही हमको जहां तक बात मैं सीपीसी

5:01

की करूं उन्होंने पहले से ही हमको पूरा

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स्ट्रक्चर बना के दिया है। हमें कुछ नहीं

5:07

करना। पूरा स्ट्रक्चर सीपीसी के अंदर पहले

5:10

से ही बना हुआ है कि देखो यह रहे सेशंस और

5:13

ये रहे ऑर्डर्स और ऑर्डर्स के अंदर

5:15

रेलेवेंट रूल्स लिखे हुए हैं। तो एज अ

5:18

स्टूडेंट हमें उन सारी चीजों को कवर कैसे

5:21

करना है? देखो बच्चे कवर करने के लिए तो

5:24

जो कंटेंट की मैं बात करूं कंटेंट लगभग

5:27

उतना ही है जितना सीआरपीसी के अंदर है। ना

5:30

उससे बहुत ज्यादा है ना उससे बहुत कम है।

5:32

लगभग लगभग बराबर ही है। और आपको फील भी

5:35

होगा कि हम कुछ कुछ वैसा ही अप्रोच ले रहे

5:38

हैं। वो क्रिमिनल के कॉन्टेक्स्ट में है।

5:40

ये सिविल के कॉन्टेक्स्ट में है। पर यहां

5:42

पे हमारा टाइम सेव हो जाता है। सेव इसलिए

5:46

हो जाता है दो रीजन की वजह से। एक तो हम

5:49

जब सेशंस पढ़ते हैं तो उन पर तो एक-ए

5:52

सेक्शन पर एक-ए पॉइंट पर पूरा ध्यान रहता

5:54

है हमारा एक-एक चीज। पर जब हम ऑर्डर्स को

5:57

पढ़ते हैं तो ऑर्डर्स तो इंपॉर्टेंट है और

6:00

उसके अंदर जो रूल्स दिए गए हैं वो भी

6:01

इंपॉर्टेंट है। पर क्या होता है इन मोस्ट

6:04

ऑफ द केसेस जो ऑर्डर्स के अंदर रूल्स होते

6:07

हैं वो एक लाइन का दो लाइन का। कई कभी-कभी

6:10

किसी ऑर्डर में बहुत सारे रूल्स होते हैं।

6:12

100 से भी ज्यादा। तो जरूरी नहीं है कि हर

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एक पढ़े। जो जो इंपॉर्टेंट है उसको पकड़

6:17

के चलते हैं जो एग्जाम में आता है और

6:19

जिनका इस्तेमाल किया जाता है आमतौर पर

6:21

कोर्ट ऑफ लॉ में। तो यहां पर सीपीसी के

6:24

अंदर ये जो आइडेंटिफिकेशन वाला प्रोसेस है

6:27

वो कंपैरेटिवली इजी है। सीआरपीसी में क्या

6:30

है? आपको सारे सेक्शंस पढ़ने ही पढ़ने

6:32

हैं। बाय एंड बाय बाय एंड बाय बाय एंड बाय

6:34

चलता ही रहेगा वो सफर। पर सीपीसी में

6:37

एक्चुअल में आपके पास ये चॉइस है। सेक्शंस

6:40

तो आप पढ़ो। ऑर्डर्स भी आप पढ़ो। पर जो

6:42

ऑर्डर्स के अंदर रूल्स दिए गए हैं उसमें

6:45

आपको फोकस करना है स्पेसिफिकली उन रूल्स

6:48

के ऊपर जो कि एग्जाम पर्सेपेक्टिव से आपसे

6:51

पूछे जाएंगे। ठीक है? क्योंकि वही इस बात

6:54

को हमेशा दिमाग में रखना है कि जब भी मैं

6:56

एग्जाम लिखूंगा तो ऑब्वियसली पूरी महाभारत

6:59

लिखने का तो मेरे पास टाइम नहीं होगा।

7:01

मेरे पास टाइम लिमिटेड है। तो वहां पर

7:04

हमारी सोच ये होनी चाहिए कि उस लिमिटेड

7:06

टाइम में अपना बेस्ट पॉसिबल रिजल्ट कैसे

7:09

दे? और बेस्ट पॉसिबल रिजल्ट कैसे दे

7:11

पाओगे? तभी दे पाओगे जब आप पूरी

7:13

इंफॉर्मेशन को क्यूरेट करोगे उस आंसर के

7:16

हिसाब से। ठीक है? तो इस इस चीज में जो

7:19

सीबीसी का स्ट्रक्चर है वो बहुत ही बढ़िया

7:21

है। बहुत ही बढ़िया है। एक नंबर बिल्कुल

7:24

उसका स्ट्रक्चर है। तो बिल्कुल हम उस चीज

7:26

को डिस्टर्ब करेंगे नहीं। आज की क्लास को

7:29

सिंपल रखेंगे। सेक्शंस को पढ़ने की कोशिश

7:32

करेंगे। सेक्शन वन से ले सेक्शन फोर तक

7:35

समझने की कोशिश करेंगे। इन सेक्शंस के

7:37

अंदर क्या है और बेसिक बेसिक एक आईडिया ले

7:41

जाएंगे। फिर जो कल की क्लास होगी वहां से

7:45

हम लोग थोड़ा सा अपना गियर अप करेंगे और

7:47

चीजों में थोड़ा सा कॉनसेप्चुअलिटी में

7:50

घुसने की कोशिश करेंगे। पर जितना मेरा

7:52

एक्सपीरियंस कह रहा है मैंने पुराने जो

7:54

मेरे बच्चे रहे हैं उनका भी जितना

7:56

एक्सपीरियंस रहा था वो यही था कि शुरू में

7:59

थोड़े से हिक अप्स ज्यादा आते हैं। मतलब

8:01

शुरू की जो दो तीन चार पांच क्लासेस होंगी

8:04

तब थोड़े से हिक अप ज्यादा आएंगे क्योंकि

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कुछ नए-नए कांसेप्ट्स इंट्रोड्यूस होंगे

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जो अभी तक हमने नहीं पढ़े हैं। तो जब एक

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बार वो कवर हो जाते हैं फिर रिपीटेशन बहुत

8:13

ज्यादा है। सीपीसी के अंदर रिपीटेशन बहुत

8:16

ज्यादा है। ये अच्छी भी बात है, बुरी भी

8:18

बात है। अच्छी बात ये है कि बार-बार कुछ

8:20

नया नहीं पढ़ना पड़ता। बुरी बात ये है कि

8:22

कभी-कभी वो बोरिंग भी हो जाता है। तो एक

8:25

बार हम जब कांसेप्चुअल क्लेरिटी ले लेंगे

8:27

फिर तो इजी है। कांसेप्चुअल क्लेरिटी वो

8:30

मैं आपको दे दूंगा। उसमें आपको परेशान

8:31

होने की जरूरत नहीं है। ठीक है? तो

8:34

बिल्कुल भी ऐसा नहीं करना। आप लोगों को

8:36

बिल्कुल माहौल नहीं बनाना है कि अरे

8:38

सीपीसी पढ़ रहे हैं। मैं ये भी कर लूं,

8:40

मैं वो भी कर लूं। मैं आपको एक बात

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बार-बार बोल रहा हूं। शुरू से बोल रहा हूं

8:44

कि आप लोगों ने मेरे से सिक्स मंथ्स का

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कोर्स लिया है।

8:48

पर आपको सिक्स मंथ्स मुझे अपने देने हैं।

8:53

देने हैं मतलब ट्रूली ऑनेस्टली देने हैं।

8:55

कुछ भी मत करो एक्स्ट्रा

8:59

उन चीजों से जो मैं यहां पे करा रहा हूं।

9:02

एस फार एस दी एट सब्जेक्ट्स आर कंसर्न।

9:04

मेरे को अपने तरीके से पढ़ाने दो और उसी

9:06

तरीके से आप पढ़ो। छ महीने बाद आप फ्री

9:09

हो। आप जो जो करना हो वो करना। तो अभी मैं

9:12

बोलूंगा अभी सीपीसी में कुछ भी अपनी तरफ

9:15

से बच्चे ऐड अप करने की कोशिश मत करना।

9:18

अपनी तरफ से ऐड अप करने की कोशिश करने का

9:20

मतलब ये है कोई भी कोचिंग के नोट्स कोई भी

9:23

किताब कोई भी हो उसको कोई किसी पॉइंट पे

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क्लेरिफिकेशन चाहिए। मैं आपके पास हूं।

9:29

Google आपके पास है। किताब से भी आप

9:31

क्लेरिफिकेशन ले लो। बट अगेन द सेम थिंग

9:33

ऐसा मत करना कि आप दूसरे ही रास्ते पे चले

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जाओ। क्योंकि यहां पे थोड़ी सी अप्रोच मैं

9:38

बेसिक रखूंगा। ऐसे आपको पढ़ाने की कोशिश

9:41

करूंगा जैसे कोई बच्चा सीपीसी को पहली बार

9:43

पढ़ रहा है। तो उसी एकदम सिंपल चीजों को

9:46

रखते हुए कवर करेंगे, समझने की कोशिश

9:48

करेंगे। एक बार जब ये स्टच्यूट खत्म हो

9:50

जाएगा ना फिर आपको जरूरत ही नहीं पड़ेगी।

9:55

फिर तो जरूरत ही नहीं पड़ेगी। आप खुद आपके

9:57

पास खुद इतना बड़ा रजिस्टर होगा सीपीसी के

10:00

नोट्स का जो आपकी किताब से ज्यादा मोटा

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होगा। आपको फिर किसी चीज की जरूरत नहीं

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है। तो बस बने रहो। थोड़ा सा बस पेशेंस

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रखना पड़ेगा। अपने ऊपर थोड़ा सा होल्ड

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करके रखना पड़ेगा। थोड़े से चैलेंजेस

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आएंगे पर कर लेंगे सारी चीजों को। ठीक है?

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ऐसा ही कुछ टीपीए में भी है और टीपीए को

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हम लोग थर्सडे से शुरुआत करेंगे। पर टीपीए

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कंपैरेटिवली इजी पड़ जाता है। उसमें आपको

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कुछ नहीं है। आराम से मैं आपको बहुत इजीली

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निकाल दिया। जी बच्चे

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सर ये वन आवर की क्लासेस होंगी या वन एंड

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हाफ?

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भाई बच्चे वही है जो नॉर्मल ड्यूरेशन

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हमारा क्लासेस का चलता है। वही ड्यूरेशन

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चलेगा। एक एक घंटा 15 मिनट से ले एक घंटा

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30 मिनट के बीच में कुछ भी ओके ठीक है चलो

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तो हमारा बच्चे जो पहला सेक्शन है वो है

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आपको सभी को पता है कि ज्यादातर स्टच्यूट

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में जो सेक्शन वन होता है उसका पर्पस क्या

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होता है वो उस स्टच्यूट का नाम बताता है

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कि नाम क्या है उसकी कमेंसमेंट की डेट

10:55

बताता है और उसका एक्सटेंट बताता है। फिर

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से मैं आपको हर एक प्रोविजन पे आपको थोड़ा

11:00

सा इशारा दे देता रहूंगा साथ के साथ कि

11:03

कौन सा प्रोविजन कितना इंपॉर्टेंट है

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एग्जाम पर्सपेक्टिव से। तो आज जितने हम

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प्रोविजंस पढ़ने वाले हैं चार सेक्शंस

11:10

पढ़ने वाले हैं। अ उसमें से बहुत ज्यादा

11:14

इंपॉर्टेंट प्रोविजंस है नहीं। जो

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डेफिनेशंस मैं पढ़ाऊंगा अभी आपको वो तो सच

11:19

में बहुत महत्वपूर्ण है। उनको तो बहुत

11:21

ध्यान से पढ़ेंगे। पर जैसे ये पहला सेक्शन

11:23

है कुछ भी नहीं। ये कभी एग्जाम में नहीं

11:26

आते आपके। ठीक है? ऑब्जेक्टिव में भी वो

11:28

शर्म आएगी उसको ऐसा कुछ पूछने में। आप सभी

11:30

को पता है सीपीसी का नाम है कोड ऑफ सिविल

11:33

प्रोसीजर। ये कब आया था? ये ऐसा कभी-कभी

11:36

पूछ लेते हैं बेवकूफी भरा ऑब्जेक्टिव टाइप

11:38

क्वेश्चन। ठीक है? 1909 में आया था। ठीक

11:41

है? अब ये जो जम्मू एंड कश्मीर वाली चीज

11:45

हो चुकी है। उसके बाद ये पूरे के पूरे

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भारत में लगता है। बस एक जगह को छोड़ के।

11:52

ठीक है? बस एक जगह को छोड़ के। और वो जगह

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कौन सी है? दी स्टेट ऑफ नागालैंड।

11:57

नागालैंड में सीपीसी लागू नहीं होता है।

12:00

तो कभी जैसे ऑब्जेक्टिव टाइप क्वेश्चन

12:02

आपसे पूछ ले एक्सटेंट के बारे में तो

12:05

स्टेट ऑफ नागालैंड को आपको एक्सक्लूड करना

12:07

होगा। और स्टेट ऑफ नागालैंड तो एक राज्य

12:09

हो गया। उसके साथसाथ जो भी ट्राइबल एरियाज

12:12

है उनको एक्सक्लूड किया गया है। मतलब जो

12:15

ट्राइबल पीपल होते हैं हम अपने का्स में

12:18

पढ़ रहे हैं ना शेड्यूल ट्राइब्स कुछ वैसा

12:21

ही आईडिया वैसा ही प्रिंसिपल ले समझो कि

12:24

जो ट्राइबल एरियाज है वहां पे सीपीसी को

12:27

एक्सक्लूड किया गया है स्पेसिफिकली। बच्चे

12:29

जब भी ट्राइबल्स के लिए किसी भी चीज का

12:31

एक्सक्लूजन किया जाता है ना वहां पर पर्पस

12:34

यही होता है कि उनके जो कल्चर है उनके जो

12:37

ट्रेडिशन है उनके अंदर प्रक्रियाएं बताई

12:41

गई है उन सारी चीजों के बारे में मतलब

12:43

ट्राइबल्स जो है उनका मानना ये है कि

12:46

हमारी अपने आप में एक कम्युनिटी है हमको

12:49

हमारे हिसाब से जीने दो हमें ना आपके

12:52

कानून की जरूरत है ना किसी की जरूरत है वो

12:54

अपने कल्चर ट्रेडिशन के हिसाब से अपने आप

12:57

को छोटे-छोटे ग्रुप्स में बांट

12:59

रेगुलेट करते रहते हैं और वो खुश है। दैट

13:01

इजेंट। तो ये जितने भी प्रोविजंस कभी भी

13:04

आप देखते हो ट्राइबल के बारे में

13:06

एक्सक्लूजन चाहे वो कास्टी हो चाहे वो

13:07

सीपीसी हो वहां पर एजेंडा यही होता है कि

13:10

अननेसेसरीली इंटरफेयर करने की कोशिश नहीं

13:13

करनी है। तो पहले तो यहां पर जेएन के का

13:16

भी प्रोविजन था। था जम्मू एंड कश्मीर में

13:17

भी नहीं लागू होता था बिकॉज़ ऑफ 370 बट अब

13:20

वो सीन खत्म हो चुका है तो वहां पे तो

13:23

लागू हो गया बट स्टेट ऑफ नागालैंड स्टिल

13:25

एक्सक्लूडेड और जो ट्राइबल एरियाज है वहां

13:28

से भी एक्सक्लूजन है फिर से मैं बोल रहा

13:29

हूं सब्जेक्टिव कभी नहीं फंसेगी ऐसी बात

13:32

ऑब्जेक्टिव आएगी ऑब्जेक्टिव आए तो ट्राइबल

13:35

एरियाज और स्टेट ऑफ नागालैंड आपको याद

13:37

रखना है इतना याद रखोगे चलेगा इस पर बहुत

13:40

ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत नहीं है बस

13:42

एक छोटी सी बात और है कि जो गवर्नमेंट है

13:47

उसको हमने क्या किया है पावर दी है सीटीसी

13:50

के अंदर कि अगर वो चाहे तो नोटिफिकेशन से

13:53

नोटिफिकेशन का सहारा लेते हुए ये जो हमारा

13:56

सिविल प्रोसीजर कोड है उसको स्टेट ऑफ

13:59

नागालैंड पे भी लागू कर सकती है और ऐसे

14:03

ट्राइबल एरियाज पर लागू कर सकती है जो

14:05

उसको ठीक लगे और उनको लागू करते वक्त उसको

14:08

सीपीसी में कुछ बदलाव करने हैं कुछ

14:10

मॉडिफिकेशन करने है ऐसा भी कर सकती है तो

14:13

कहने का मतलब है कि एक्सक्लूजन तो है

14:16

स्टेट ऑफ नागालैंड पे लागू नहीं होगा

14:18

ट्राइबल एरियाज पर लागू नहीं होगा बट एट

14:21

दी सेम टाइम जो हमारी राज्य सरकार है उसको

14:24

ये पावर दी गई है कि अगर वो चाहे तो वो

14:27

सीपीसी को स्वीकार कर सकती है और सीपीसी

14:31

को लागू कर सकती है ठीक है जिन बदलावों के

14:34

साथ जरूरी हो उन बदलावों के साथ तो आपको

14:36

क्या याद रखना है कि पावर दी गई है पावर

14:39

किसको दी गई है स्टेट गवर्नमेंट को ठीक है

14:42

स्टेट गवर्नमेंट चाहती है जैसे स्टेट ऑफ

14:44

नागालैंड है एक्सक्लूड कर रखा है। अब

14:46

नागालैंड की गवर्नमेंट को लग रहा है फॉर

14:48

व्हाटएवर रीजन कि सीपीसी को लागू कर लेना

14:51

चाहिए। ठीक है? तो अगर वो चाहते हैं तो

14:53

उसको लागू कर सकते हैं। इतनी सी बात है।

14:55

उनको बस चॉइस दे रखी है। ठीक है? तो ये तो

14:58

हो गया सेक्शन वन जिसमें थोड़ी सी ये बस

15:01

नागालैंड वाली बात है। बस इतना सा याद रख

15:03

लो। नागालैंड ऑब्लिक मतलब नोट्स में जो

15:06

लिखना है आपको नागालैंड ऑब्लिक ट्राइबल

15:09

एरिया इज एक्सक्लूडेड। और उसके एक नीचे

15:12

लाइन में लिख लो पावर गिवन टू दी स्टेट

15:14

गवर्नमेंट। ठीक है? पावर गिवन टू दी स्टेट

15:16

गवर्नमेंट का मतलब कि अगर वो चाहे तो

15:18

सीपीसी को एक्सेप्ट भी कर सकते हैं। ठीक

15:20

है? बस इतना सा। उसके आगे कुछ लिखने की

15:22

जरूरत नहीं।

15:24

शुरुआत होती है अब। जो कॉनसेप्चुअल शुरुआत

15:27

शुरुआत है वो होती है अब। जो बच्चे सेक्शन

15:31

टू का सेक्शन टू है सीपीसी का। इसमें

15:35

अलग-अलग वर्ड्स की डेफिनेशंस प्रोवाइड की

15:38

गई है। वैसे तो बहुत सारी डेफिनेशंस है और

15:41

मैं यह नहीं कह रहा कि वो डेफिनेशनंस

15:42

इंपॉर्टेंट नहीं है। बट सबसे इंपॉर्टेंट

15:45

डेफिनेशंस जो है वो हम आज की क्लास में

15:48

कवर करेंगे और बाकी के जो शब्द है बाय एंड

15:51

बाय जैसे के जैसे सेक्शंस आते रहेंगे उनको

15:53

हम डील करते रहेंगे। पर ये ऐसी डेफिनेशंस

15:56

है जो आपको जरूर ही पड़ेगी एग्जाम में

15:59

लिखने की। ठीक है? इनको आपको मेंशन करना

16:02

पड़ेगा क्योंकि ऐसी स्थिति आ सकती है जब

16:05

इसी के ऊपर बात उठ जाए। ना केवल

16:07

ऑब्जेक्टिव टाइप क्वेश्चन बल्कि

16:09

सब्जेक्टिव टाइप क्वेश्चन आल्सो। तो

16:12

डेफिनेशंस पे खासा ध्यान देना और

16:14

डेफिनेशंस पे कैसी अप्रोच रखनी है। फिर से

16:16

मैं बता रहा हूं। बच्चे सीपीसी अभी हमने

16:18

पढ़ना शुरू नहीं किया। ठीक है? अभी हम

16:20

उसकी शुरुआत कर रहे हैं। तो हमें नहीं पता

16:23

कि अंदर हम किन चीजों का सामना करने वाले

16:25

हैं। क्या-क्या स्थितियां आने वाली है। तो

16:28

आप इस चीज को दिमाग में रख के ही डेफिनेशन

16:30

को पढ़ना। ऐसा मत सोचना कि मैं अभी

16:33

डेफिनेशन पढ़ रहा हूं। तो मेरे को एक एक

16:35

शब्द या एक एक चीज या पूरा एक्सप्रेशन समझ

16:38

में आ जाए कि कब हो रहा है, कैसे हो रहा

16:39

है। वो तो आपको तब समझ में आएगा जब आप

16:41

सीपीसी पूरा पढ़ लोगे कि अच्छा अच्छा

16:44

अच्छा अच्छा ये ऐसा होता है ये कोर्ट ऐसा

16:46

करता है। अच्छा अभी बस हमारा पर्पस यह

16:50

होगा कि जो लिखा हुआ है यहां जो डेफिनेशन

16:54

में बात कही गई है उसका हम एक आईडिया ले

16:57

पाए जिससे क्या होगा ये शब्द बार-बार

17:01

आएंगे आगे वाले सेक्शंस में कल जो हम

17:04

पढ़ेंगे अगली क्लासेस में जो हम पढ़ेंगे

17:06

वहां पर ये बार-बार शब्दों का इस्तेमाल

17:08

होगा तो वहां पर हम समझ पाए कि यहां पर इस

17:12

सेक्शन ये सेक्शन कहने की कोशिश क्या कर

17:15

रहा है बस इतना सा एजेंडा है अभी इन

17:18

डेफिनेशन के पीछे तो अपने सर में बहुत

17:20

ज्यादा दर्द नहीं करना है। बहुत लाइटली लो

17:23

और सुनो मैं कह क्या रहा हूं। ठीक है? जो

17:26

सबसे पहली डेफिनेशन है जिस पर हमको खासा

17:28

ध्यान देना है वो डेफिनेशन है बच्चे

17:31

किसकी? डिक्री की। किसकी? डिग्री की। ये

17:35

एक ऐसा शब्द है जो हमारे सामने आ चुका है

17:39

पहले भी। पर थोड़ा सा कॉन्टेक्स्ट डिफरेंट

17:41

था। आपको याद होगा जब हम हिंदू मैरिज एक्ट

17:44

पढ़ रहे थे तो वहां पर हमने थोड़ा सा ये

17:47

डिग्री वाली बात को डिस्कस किया था। उसके

17:49

ऊपर एक केस भी पढ़ा था। पर वो चलो जो भी

17:51

चीज रही हो जो भी कॉन्टेक्स्ट रहा हो जहां

17:54

तक सीपीसी की बात है वहां पे डिग्री को

17:57

कैसे डिफाइन किया जा रहा है? डिग्री को

18:00

बताया जा रहा है कि डिग्री एक फॉर्मल

18:02

ध्यान से सुनना बच्चे। शब्दों को देखना।

18:04

एक फॉर्मल एक्सप्रेशन है। फॉर्मल एक्स

18:09

एक्सप्रेशन है। किस चीज का फॉर्मल

18:12

एक्सप्रेशन है? एक एडजुडिकेशन का। किसका?

18:16

एक एडजुडिकेशन का। एजुडिकेशन होता है मतलब

18:18

डिसीजन का। निर्णय का। ठीक है?

18:22

जो जो कि जहां तक उस कोर्ट का सवाल है जो

18:26

यह फॉर्मल एक्सप्रेशन दे रहा है। अब सुनना

18:30

सबसे महत्वपूर्ण बात डिग्री की

18:33

कंक्लूसिवली

18:35

कौन सा शब्द है? कंक्लूसिवली

18:38

डिटरमाइन करता है। क्या करता है?

18:40

कंक्लूसिवली डिटरमाइन राइट्स ऑफ दी

18:44

पार्टीज।

18:46

जो भी पार्टीज इनवॉल्व है किसी भी केस के

18:49

अंदर कोर्ट के सामने उनके बीच में जो भी

18:53

राइट्स इनवॉल्व है उनको कंक्लूसिवली

18:57

निर्णायक रूप से हमेशा के लिए डिटरमाइन

19:00

करता है।

19:04

वो जो भी मुद्दों से जुड़े हुए हो।

19:08

ठीक है?

19:10

और यह जो आखरी बात यह जो डिग्री है यह दो

19:15

प्रकार की हो सकती है बच्चे। देयर आर टू

19:19

टाइप्स ऑफ डिग्रीज। पहली प्रीिलिमिनरी

19:22

डिग्री। दूसरी फाइनल डिग्री। अभी इस बात

19:26

को तो रख दो साइड में कि प्रीिलिमिनरी

19:29

डिग्री क्या होता है? फाइनल डिग्री क्या

19:31

होता है? इसको रख दो साइड में। पहले इस

19:34

बात पे आ जाओ। यह क्या कहने की कोशिश कर

19:36

रहे हैं? डिग्री का मतलब क्या है?

19:39

बच्चे अगर मैं साधारण भाषा में आपको

19:42

समझाने की कोशिश करूं तो डिग्री की जो

19:45

डेफिनेशन बताई जा रही है वह बस इतना सा कह

19:47

रही है कि डिग्री का मतलब है जब भी कोई

19:52

कोर्ट ध्यान से सुनना जब भी कोई कोर्ट

19:57

किसी भी मुद्दे में किसी भी केस के अंदर

19:59

किसी भी कंट्रोवर्सी के अंदर

20:03

जो भी पार्टीज इनवॉल्वड है उसके सामने दो

20:06

पार्टीज हैं उनके उनके राइट्स को ध्यान से

20:10

सुनना। उनके राइट्स को उनके अधिकारों को

20:14

हर लड़ाई बच्चे है तो अधिकारों की ही

20:16

लड़ाई है। ठीक है? यहां पर सिविल नेचर है

20:19

उन अधिकारों का इसलिए हम सीपीसी के अंदर

20:21

पढ़ रहे हैं। तो जो पार्टीज है उनके

20:24

अधिकारों को कंक्लूसिवली डिटरमाइन करते

20:28

हैं। ये जो शब्द मैं बोल रहा हूं

20:30

कंक्लूसिवली

20:32

ये असल में असली पहचान है डिग्री की। मतलब

20:38

जो यह कोर्ट डिसाइड कर रहा है ना यह कोर्ट

20:41

जो डिटरमाइन कर रहा है ना यह किसी भी चीज

20:45

को कंक्लूसिवली डिसाइड कर रहा है।

20:47

कंक्लूसिवली मतलब वो जो भी फैसला ले रहा

20:51

है किसी भी पॉइंट के बारे में वो फैसला

20:56

उस चीज को पूरी तरीके से उसको खत्म करता

21:00

है। उस डिस्प्यूट को पूरी तरीके से खत्म

21:02

करता है। को पूरी तरीके से डिसाइड करता

21:06

है। उस पर पूरी तरीके से निर्णय देता है।

21:08

ऐसा नहीं है कि आज कुछ दे दिया कल को कुछ

21:11

और दे देगा। नहीं किसी भी पॉइंट को ध्यान

21:15

से सुनना इस बात को। किसी भी पॉइंट को

21:18

चाहे वो कितना ही छोटा पॉइंट क्यों ना हो।

21:22

किसी भी पॉइंट को जब वो कंक्लूसिवली

21:24

डिसाइड करता है, डिटरमाइन करता है,

21:27

निर्णायक रूप से डिटरमाइन करता है, उसको

21:30

हम बोलते हैं डिग्री।

21:33

अब यहां पर दिमाग में दो दो लेडर बनाओ। दो

21:38

कॉन्टेक्स्ट को बनाओ। पहला डिग्री का मतलब

21:42

है किसी भी चीज को, किसी भी पॉइंट को

21:45

कंक्लूसिवली डिटरमाइन करना। यह पहली बात।

21:50

पर इसका मतलब यह नहीं है कि जब पूरा केस

21:53

खत्म हो जाएगा,

21:56

जब पूरा केस कोर्ट डिसाइड कर रहा होगा

22:00

तभी डिग्री आएगी।

22:02

दो बातों में फर्क है। देखो मैं क्या कह

22:06

रहा हूं

22:08

बच्चे? किसी भी सिनेरियो में, किसी भी

22:10

स्थिति में जब कोर्ट के सामने कोई भी सवाल

22:12

उठते हैं, दो पार्टीज लड़ रही होती हैं तो

22:16

जरूरी नहीं है कि एक ही पॉइंट पे लड़ाई हो

22:18

रही हो। कई पॉइंट्स पे लड़ाई है। मानो तीन

22:22

तीन पॉइंट इनवर्ड है। पॉइंट नंबर वन,

22:24

पॉइंट नंबर टू, पॉइंट नंबर थ्री। आप में

22:27

से कुछ बच्चे हैं जिन्होंने मेरे साथ

22:28

जजमेंट राइटिंग की भी क्लासेस ली है। तो

22:31

उनको काफी इसकी एक्सपीरियंस हो गया है कि

22:34

कैसे हम लोग डिवाइड करते हैं इश्यूज को और

22:38

नॉर्मली आप जजमेंट भी पढ़ते हो कभी आप

22:40

देखते हो कि हर एक केस में कई सारे

22:43

पॉइंट्स इनवॉल्व होते हैं जिसको कोर्ट को

22:45

डिसाइड करना पड़ता है किसी भी सिचुएशन को

22:48

सॉल्व करने के लिए। ठीक है?

22:52

तो हमारा यह जो डेफिनेशन है डिग्री का वो

22:55

यह कह रहा है जब भी कोई कोर्ट किसी भी

22:59

पॉइंट को

23:01

जब भी कोई कोड किसी भी पॉइंट को

23:05

कंक्लूसिवली डिटरमाइन करता है

23:10

उसको हम डिग्री बोलते हैं। कहने का मतलब

23:13

है जहां तक उस पॉइंट की बात है जिसको वो

23:16

डिटरमाइन कर रहा है उसको तो कंक्लूसिवली

23:18

डिसाइड कर दिया। अब उसको दोबारा नहीं

23:20

देखेगा। उसकी बात खत्म। पर ये जरूरी नहीं

23:24

है। ये डिग्री तभी आएगी जब सारे के सारे

23:28

पॉइंट्स डिसाइड हो जाएंगे।

23:31

ऐसा बिल्कुल जरूरी नहीं। अगर एक पॉइंट पर

23:33

भी कंक्लूसिव डिसीजन आ गया है तो उसको

23:36

डिग्री बोल सकते हैं। दो पॉइंट पर आ गया

23:39

है उसको भी डिग्री बोल सकते हैं। और अगर

23:41

केस के सारे ही पॉइंट्स में आ गया है उसको

23:44

भी डिग्री बोल सकते हैं।

23:47

इसलिए डिग्री होने की पहचान ये नहीं है।

23:51

ध्यान से सुनना। बच्चे 90% बच्चे इस बात

23:54

को नहीं समझ पाते। डिग्री होने की पहचान

23:57

ये नहीं है कि किसी केस को पूरी तरीके से

23:59

डिसाइड कर दिया गया।

24:02

डिग्री होने की यह पहचान है कि किसी भी

24:05

पॉइंट को कंक्लूसिवली डिसाइड कर दिया जाए।

24:08

चाहे उसकी वजह से पूरा केस डिसाइड हुआ या

24:11

नहीं हुआ। और इसी बात की वजह से

24:16

ये दो शब्द निकल के आते हैं। दो प्रकार की

24:19

डिग्रियां निकल के आती है।

24:22

प्रीलिमिनरी डिग्री और फाइनल डिग्री।

24:27

दोनों डिग्रियां है।

24:30

प्रीिमरी भी डिग्री है, फाइनल भी डिग्री

24:33

है। पर फर्क क्या है? किसी भी डिग्री को

24:36

प्रीिमरी तब बोलते हैं जब वो किसी केस में

24:40

इनवॉल्वड किसी पॉइंट को तो डिसाइड करती

24:42

है।

24:44

पर अभी पूरा केस खत्म नहीं हुआ है। बाकी

24:46

पॉइंटों पर डिसीजन आना अभी भी बाकी है। तो

24:50

जब ऐसी स्थिति होती है कि कई सारे पॉइंट्स

24:52

इन्वॉल्व है। किसी एक को कंक्लूसली

24:54

डिटरमाइन कर रहा है कोर्ट।

24:57

ऐसी स्थिति को बोलते हैं कि वह एक

24:59

प्रीलिमिनरी डिग्री है।

25:02

पर जब कोर्ट किसी केस में इनवॉल्व सारे

25:04

पॉइंट्स को डिटरमाइन कर देता है

25:06

कंक्लूसिवली

25:08

तब आती है फाइनल डिग्री। तो ये दो प्रकार

25:12

हैं डिग्री के। दोनों ही डिक्री है। जो एक

25:17

पॉइंट पर आई थी वह भी डिक्री थी और जो

25:20

सारे पॉइंट्स पर आई है वो भी डिक्री है।

25:23

इसलिए क्राइटेरिया ये नहीं है कि केस पूरी

25:27

तरीके से डिसाइड हुआ या नहीं। क्राइटेरिया

25:30

ये है कि जो भी पॉइंट डिसाइड हुआ है वो

25:33

कंक्लूसिवली डिसाइड हुआ है या नहीं। अगर

25:35

कोई भी पॉइंट कंक्लूसिवली डिसाइड हुआ है।

25:38

भले ही पूरा केस डिसाइड ना हुआ हो

25:41

प्रीिलिमिनरी डिग्री। और अगर पॉइंट

25:44

कंक्लूसिवली डिसाइड भी हुए हैं और पूरा

25:46

केस भी डिस्पोज ऑफ हो गया है। फाइनल

25:51

यह है बच्चे हमारे जो डिक्री शब्द है उसकी

25:54

डेफिनेशन और उसके दो प्रकार। ठीक है? अभी

25:58

भी मैं समझ रहा हूं क्योंकि अभी शुरुआत

26:00

है। आप लोग नए हो सीपीसी के लिए तो काफी

26:02

चीजें अभी उतना कॉन्फिडेंस नहीं आ रहा

26:04

होगा। पर ये जो मैंने बातें बोली है जो

26:07

आपको दो दो एस्टेब्लिश क्राइटेरिया बताए

26:09

हैं क्या? किसी भी पॉइंट का कंक्लूसिवली

26:12

डिटरमाइन होना और उसके दो प्रकार सारे

26:16

पॉइंट्स का और केवल किसी इंडिविजुअल

26:18

पॉइंट्स का जिसकी वजह से प्रीिलिमरी और

26:19

फाइनल डिग्री का डिस्क्रिमिनेशन आता है।

26:22

इन बातों को अपने नोट्स में लिख लो। ये

26:24

चीज बार-बार आएगी। बार-बार आएगी। जब तक हम

26:26

कंप्लीट करेंगे ना सीपीसी कम से कम 100

26:29

बार तो ये चीज बार-बार उठेगी। ठीक है? समझ

26:32

में आ रहा है मोटा तौर। मतलब मैं जो बोल

26:34

रहा हूं वो आपको समझ में आ रहा है? यस बोल

26:37

देंगे बच्चे एक बार सभी लोग।

26:39

यस सर।

26:40

यस सर।

26:40

सर

26:41

यस सर।

26:42

बस इतना अपने अंदर स्टैंडर्ड रखो कि जो

26:45

मैं बोल रहा हूं उतना समझ में आना चाहिए।

26:47

उसके बियों्ड कुछ भी नहीं।

26:49

सर का और फाइनल का एक बार कंक्लूड कर दिया

26:52

डिफरेंस में। नहीं नहीं देखो वही इस इसी

26:55

बात पे मैं बार-बार आपको एम्फेसाइज कर रहा

26:56

हूं क्योंकि इसमें बहुत बच्चे गलती करते

26:59

हैं। देखो बच्चे डिग्री ये जो शब्द है

27:02

पहले शब्दों को तोड़ो। हम डेफिनेशन किसकी

27:05

पढ़ रहे हैं? डिग्री की। ठीक है? डिग्री

27:07

का मतलब होता है कि जब भी कोई जब भी कोर्ट

27:10

किसी भी पॉइंट को कंक्लूसिवली डिटरमाइन

27:13

करता है उसको हम डिग्री बोलते हैं। बात

27:15

खत्म। फिर आते हैं हम दूसरी बात पे कि

27:18

डिग्री जो है वो दो टाइप्स की होती है।

27:21

प्रीलिमरी फाइनल है दोनों ही डिग्री।

27:24

प्रीिलिमरी डिग्री वो होती है जब कोर्ट

27:26

किसी पॉइंट को कंक्लूसिवली डिटरमाइन करता

27:28

है। पर वो केवल किसी केस का कोई इनवॉल्वड

27:31

एक पॉइंट है। उसकी वजह से पूरा केस डिसाइड

27:33

नहीं हुआ। ठीक है? जब भी कोर्ट किसी एक

27:35

इंडिविजुअल पॉइंट को या कुछ पॉइंट्स को

27:38

डिसाइड कर रहा है पर पूरा केस डिसाइड नहीं

27:40

हो रहा है। उसको बोलते हैं प्रिलिमिनरी

27:42

डिग्री। पर जब कोर्ट सारे पॉइंट्स को

27:45

डिसाइड कर देता है कंक्लूसिवली उसको बोलते

27:48

हैं हम फाइनल डिग्री। तो ये टू डिफरेंट

27:50

टाइप्स है। एक है डिग्री होने का कांसेप्ट

27:53

एक है उसके दो प्रकार। इन दोनों को अलग

27:56

रखना अपने दिमाग के अंदर अपने नोट्स के

27:58

अंदर। क्लियर है?

27:59

यस सर।

28:00

सर एक ही केस में कई प्रीिलिमिनरी डिग्री

28:02

हो सकती है।

28:03

हां बिल्कुल हो सकती है। जितने भी

28:05

इन्वॉल्व हो फाइनल

28:07

फाइनली ओके सर।

28:09

फाइनल डिग्री एक होती है।

28:11

ठीक है जी बच्चे। सर ये सेक्शन वन में सर

28:15

ये क्लोज फोर था सर ये थोड़ा मतलब ईस्ट

28:18

गोदावरी वेस्ट गोदावरी लैंड वाला जो दिया

28:20

हुआ था

28:20

एक्सक्लूड कर दो देखो एक एक और मैं चीज

28:23

बता रहा हूं जो चीज मैं यहां पे नहीं करूं

28:25

ना कवर उसको अपने आप समझ जाया करो कि उसको

28:28

पढ़ना नहीं है।

28:29

ठीक है

28:32

जो दूसरी डेफिनेशन है जो हमारे लिए

28:35

महत्वपूर्ण है।

28:38

अच्छा अभी अभी डिग्री की डेफिनेशन बची हुई

28:40

है। तो यहां पर एक इंक्लूजन दिया हुआ है।

28:45

फिर से फिर से थोड़ी सी हमको यहां पर

28:47

समझदारी देनी पड़ेगी क्योंकि हमने अभी

28:49

सीपीसी पढ़ा नहीं और ये आगे आने वाली

28:51

बातों का जिक्र कर रहा है थोड़ा सा

28:53

इंक्लूजन। ठीक है? तो ध्यान से सुनिए। ये

28:57

जो डिग्री शब्द है उसमें हम इंक्लूड

29:01

करेंगे जब भी किसी प्लेेंट को

29:06

रिजेक्ट किया जाता है तब।

29:09

ठीक है? अभी ये देख रहे हो आप प्लेेंट

29:11

क्या होता है? रिजेक्शन क्या होता है? ये

29:14

सब चीजें हमने अभी पढ़ी नहीं है। ये तो

29:16

बल्कि अभी काफी आगे जाके आएंगी। या फिर

29:19

कोई भी क्वेश्चन जब डिटरमाइन होता है

29:22

सेक्शन 144 के अंदर देख रहे हो 144 दो

29:26

महीने लग जाएंगे पहुंचने में।

29:29

पर अब क्या करें? अब हमें पढ़नी तो है

29:31

डेफिनेशन। तो इसको कैसे समझेंगे? समझदारी

29:34

से समझेंगे। कैसे समझेंगे?

29:38

जो पहला पॉइंट है जो कह रहा है कि जब भी

29:42

कोई प्लेेंट रिजेक्ट होगा उसको भी डिग्री

29:45

मानेंगे। इसका सीधा सा मतलब है

29:49

कि जब भी मानो कोई व्यक्ति गया और किसी ने

29:54

केस फाइल किया। जब कोई व्यक्ति केस फाइल

29:57

करता है सिविल कोर्ट के अंदर बच्चे उसको

30:00

हम बोलते हैं प्लट।

30:02

जो वो ले जाता है कि साहब मेरे को यह

30:05

रिलीफ चाहिए आपसे।

30:08

उसको बोलते हैं प्लेंट। ठीक है? आपने बहुत

30:11

सुना होगा एक शब्द प्लेंटिफ। सिविल केसेस

30:14

में जो व्यक्ति रिलीफ मांग रहा होता है

30:16

उसको हम बोलते हैं प्लिंटिफ। तो उसी से

30:19

निकला है ये शब्द प्लिंट। जो रिलीफ मांग

30:22

रहा है वो कोर्ट के सामने लेके जाता है

30:24

अपनी गुहार को। तो कभी किसी भी वजह से अभी

30:29

हम रीजन की पीछे नहीं जाएंगे। जब भी कोर्ट

30:32

किसी भी वजह से किसी प्लेंट को रिजेक्ट कर

30:35

देता है मतलब किसी के केस की सुनवाई को

30:37

अस्वीकार कर देता है

30:40

उसको भी डिग्री ही माना जाता है।

30:44

ठीक है?

30:46

उसको भी डिग्री ही माना जाता है। क्योंकि

30:49

वही बात वही लॉजिक लगाओ। कोर्ट किसी भी

30:52

पॉइंट को कंक्लूसिवली डिटरमाइन कर रहा है।

30:58

तो जब भी कोर्ट ने किसी भी प्लेट को

31:00

रिजेक्ट किया होगा बच्चे कोई ना कोई तो

31:04

उसका आधार रहा होगा और एक कॉमन आधार ले लो

31:07

जो आमतौर पर बहुत चलता है लिमिटेशन का

31:10

कानून। अब हमारा लिमिटेशन एक्ट है वह कहता

31:14

है कि आपको कोर्ट से रिलीफ चाहिए तो सबके

31:17

लिए उसने टाइम लाइन बता दी है कि अगर ये

31:19

वाला रिलीफ चाहिए तो कम से कम तीन साल के

31:22

अंदर आओ। ये वाला चाहिए तो 12 साल के अंदर

31:24

आओ और अलग-अलग उन्होंने स्टैंडर्ड सेटल कर

31:26

रखे हैं। मानो लिमिटेशन की वजह से कोई

31:30

व्यक्ति समय के बाद आ रहा है। तो कोर्ट

31:33

किसी प्लेन को रिजेक्ट कर रहा है। फॉर

31:34

एग्जांपल हजारों रीजन हो सकते हैं किसी भी

31:36

प्लेन को रिजेक्ट होने के। पर एक एग्जांपल

31:39

ले लो।

31:40

तो उसको भी एक डिग्री ही माना जाता है।

31:44

ठीक है? क्योंकि जहां तक किसी भी केस की

31:46

एडमिसिबिलिटी की बात है

31:50

उसको वो कंक्लूसिवली डिटरमाइन कर रहा है।

31:53

और जैसा कि मैंने बोला किसी भी डिग्री

31:56

होने के लिए बिल्कुल भी जरूरी नहीं है कि

31:58

कोई पूरा का पूरे केस में सुनवाई हो गई हो

32:02

या किसी के किसी केस के फैक्ट्स के ही

32:04

बारे में वो पॉइंट होना चाहिए। बिल्कुल

32:07

जरूरी नहीं है।

32:09

बस एक सिंपल सी बात दिमाग में रखनी। जब भी

32:13

कोई कोर्ट किसी पॉइंट को कंक्लूसिवली

32:16

डिटरमाइन करता है, रिजेक्ट कर रहा है भाई।

32:18

कंक्लूसिवली डिटरमाइन कर रहा है। ऐसा तो

32:20

कह कह नहीं रहा होगा कि कल दोबारा आ जाना।

32:22

तो उसको भी डिग्री मानते हैं। ठीक है? तो

32:26

अपने नोट्स में लिख लो। रिजेक्शन ऑफ प्लेट

32:31

इज आल्सो

32:34

अ डिग्री। और फिर आ जाओ इस दूसरे पॉइंट

32:38

पर। अब यहां पर थोड़ा सा मैं आपको चाहूंगा

32:40

कि आप थोड़ा सा पेशेंस रखो क्योंकि ये जो

32:43

सेक्शन 144 है यह बहुत ही ज्यादा

32:47

स्पेसिफिक है। अभी इसमें हमको जाने की

32:51

जरूरत नहीं है। छोटा सेक्शन नहीं है। बड़ा

32:52

सेक्शन है। 111 लाइन का सेक्शन है।

32:56

यहां पर अभी अपने नोट्स में जैसे ही आपने

32:59

ये रिजेक्शन ऑफ प्लेेंट वाली बात लिखी उसी

33:02

के नीचे लिख दो कि सेक्शन 144 के अंदर जब

33:07

हम 144 पे पहुंचेंगे तो हम उसका

33:09

इंटररिलेशन समझ लेंगे। सेक्शन 144 के अंदर

33:13

जो भी डिटरमिनेशंस होंगे, डिटरमिनेशंस

33:15

होंगे मतलब जो भी चीज डिसाइड की जाएगी

33:19

उसको भी डिग्री ही कंसीडर किया जाएगा।

33:23

ठीक है? तो जहां तक डेफिनेशन की बात आप

33:27

देख रहे हो लेवल बाय लेवल जहां तक उसके

33:30

मीनिंग की बात है जब भी कोई पॉइंट

33:33

कंक्लूसिवली डिटरमाइन होता है उसको डिग्री

33:35

कहते हैं। फिर उसके टू टाइप्स की पार्ट आ

33:38

गई कि कोई सिंगल पॉइंट या कोई कुछ पॉइंट्स

33:41

डिटरमाइन हो रहे हैं तो वो प्रिलिमिनरी

33:43

डिग्री है। कोई केस पूरी तरीके से डिस्पोज

33:45

ऑफ हो रहा है तो वो फाइनल डिग्री है। फिर

33:48

आते हैं इंक्लूसिव कैटेगरीज कि कौन-कौन सी

33:50

चीजें स्पेसिफिकली इंक्लूड करी गई है।

33:53

जिसमें पहला हो गया कि कोई भी प्लेट जब

33:55

रिजेक्ट होता है वह एक डिग्री है और एक हो

33:58

गया 144 वाला। तो हमने तीन बातें पढ़ ली

34:02

डिक्री की डेफिनेशन और फिर आती है आखरी

34:05

बात और आखरी कैटेगरी है एक्सक्लूजंस की

34:10

क्या-क्या चीजें डिग्री की डेफिनेशन में

34:14

इंक्लूड नहीं होंगी।

34:19

ठीक है?

34:20

इसमें जो पहली कैटेगरी है

34:23

वह बताई जा रही है कि जब भी

34:26

कोई एडजुडिकेशन हुआ मतलब कोई भी निर्णय

34:29

लिया गया

34:31

जिसके अगेंस्ट अपील

34:36

फाइल की जा सकती है पर वो जो अपील है

34:40

ध्यान से सुनना ये बातें भी आपको आगे चलके

34:42

ही समझ में आएंगी पर कोशिश करो कि जितना

34:45

दिमाग में फिट हो पाए उतना अच्छा है

34:49

जब भी किसी भी बात पर निर्णय लिया लिया

34:52

गया है। किसी भी पॉइंट पे निर्णय लिया गया

34:54

है। पहली बात।

34:57

दूसरी बात उसके खिलाफ अपील फाइल की जा

34:59

सकती है। उस निर्णय के खिलाफ और तीसरी बात

35:04

वो जो अपील है जो फाइल की जा रही है उस

35:08

चीज के निर्णय के खिलाफ उसको जो हमारा

35:10

सीपीसी है अपील फ्रॉम डिग्री नहीं मानता

35:15

है।

35:17

बल्कि अपील फ्रॉम एन ऑर्डर मानता है।

35:23

क्या मानता है? अपील फ्रॉम एन ऑर्डर।

35:29

अब देखो एक और शब्द आपके सामने आ रहा है।

35:33

अगली डेफिनेशन भी इसी शब्द की है।

35:38

बच्चे सीपीसी के अंदर

35:41

जो भी ये कोर्ट की पूरी ये जो न्यायिक

35:44

प्रक्रिया है जिसमें वो डिसीजन सुना रहे

35:46

हैं। चीजों को डिसाइड कर रहे हैं। उनको

35:49

ब्रॉडली हमारे सीपीसी ने दो भागों में

35:52

बांटा है।

35:55

ठीक है?

35:57

कुछ कॉन्टेक्स्ट में उन डिसीजंस को उन

36:00

निर्णयों को हमारा सीपीसी डिग्री कहता है।

36:04

इसके कुछ फीचर्स होते हैं जो हम अभी पढ़

36:06

रहे हैं कि ऐसा होना चाहिए किसी पॉइंट को

36:09

कंक्लूसिवली डिटरमाइन किया होना चाहिए तो

36:11

वो डिग्री है। और जो भी चीजें डिग्री नहीं

36:15

कहलाई जा सकती

36:18

उनको ऑर्डर मानता है।

36:24

इन दो शब्दों में हमारा सीपीसी हमेशा

36:28

कोशिश करता है कि डिफरेंशिएट करें

36:32

और दोनों में अगर मैं आपको एक नॉर्मल भाषा

36:36

में समझाने की कोशिश करूं फर्क क्या है?

36:39

डिग्री में फाइनलिटी होती है। फाइनलिटी

36:42

मतलब एक ऐसी स्थिति होती है जहां पर किसी

36:45

पॉइंट को डिसाइड कर दिया गया। बात खत्म।

36:50

याद है ना? कंक्लूसिवली डिटरमाइन करना।

36:54

ऑर्डर के अंदर

36:56

किसी पॉइंट को डिसाइड तो किया गया है।

36:59

निर्णय तो आया है पर उसके पास

37:04

वो फाइनलिटी नहीं है जो एक डिग्री के पास

37:07

है। वो कंक्लूसिवनेस नहीं है। उसमें बदलाव

37:11

हो सकते हैं। उसको बदला जा सकता है।

37:16

तो असल में

37:20

जो लिटरल डिफरेंस है जो लॉजिकल डिफरेंस है

37:24

किसी भी डिग्री होने में किसी भी ऑर्डर

37:26

होने में वो उनके नेचर पे ही आधारित है।

37:31

डिग्री में थोड़ा सा प्रभाव ज्यादा होता

37:33

है। कंक्लूसिवनेस ज्यादा होती है। ऑर्डर

37:37

में कंपैरेटिवली कम होती है।

37:41

ठीक है? तो यह वाला जो एक्सक्लूजन है पहला

37:44

वाला वो इसी डिस्क्रिमिनेशन को इसी

37:48

डिस्टिंग को टैप कर रहा है और बोल रहा है

37:52

कि जब भी हमारा सीपीसी

37:55

किसी भी निर्णय के खिलाफ

37:58

अपील का प्रावधान कर रहा है और उसको अपील

38:02

फ्रॉम ऑर्डर मान रहा है ना कि अपील फ्रॉम

38:05

डिग्री तो वो जो चीज है जिससे अपील आ रही

38:08

है उसको हम डिग्री कंसीडर नहीं कर सकते।

38:12

अब आप देख रहे हो कितनी घुमा फिरा के बात

38:15

बोली जा रही है। और कितनी लॉजिकल बात है।

38:18

सीधी सी बात है। जब सीपीसी ही उसको खुद ही

38:23

अपील फ्रॉम एन ऑर्डर मान रहा है और मैंने

38:26

अभी आपको बताया कि सीपीसी फर्क करता है

38:29

डिग्री में और ऑर्डर में तो उसको क्यों

38:31

मानेंगे भाई डिग्री? क्यों मानेंगे?

38:35

जब आपका सीपीसी ही उसको ऑर्डर मान रहा है

38:38

तो क्यों मानेंगे डिग्री? तो पहला

38:40

एक्सक्लूजन ये हो गया। बस वही है। किसी भी

38:43

चीज को कॉम्प्लिकेटेड तरीके से कैसे लिखा

38:46

जाए वो काम यहां पर किया गया है। तो कहने

38:48

की बात क्या है? एक लाइन जब भी किसी

38:51

निर्णय के खिलाफ अपील फाइल की जा सकती है

38:56

और उसको अपील फ्रॉम ऑर्डर मानता है हमारा

38:59

सीपीसी

39:00

उसको डिग्री नहीं कंसीडर किया जा सकता। और

39:04

दूसरी कैटेगरी कौन सी है जो डिग्री की

39:06

डेफिनेशन में बिल्कुल नहीं आएगी। वह भी

39:08

आर्डर है। यह क्या कौन सा आर्डर है? ऐसा

39:11

ऑर्डर

39:14

जिसके तहत डिसमिस किया जा रहा है।

39:19

ध्यान से सुनना बच्चे।

39:22

एक ऐसा ऑर्डर

39:24

जो जिसके अंदर डिसमिस किया जा रहा है किसी

39:27

भी सूट को।

39:30

पर यहां पर जो वजह है डिसमिस करने की वह

39:34

डिफॉल्ट है। डिफॉल्ट है।

39:39

अब यहां पर थोड़ा सा आपको सावधानी देनी

39:42

पड़ेगी। इसका जो संबंध है इस बी पॉइंट का

39:45

इस पहले वाले पॉइंट से है। जहां पर हमने

39:49

पढ़ा था कि जब भी कोर्ट किसी भी प्लेन को

39:52

रिजेक्ट कर देगा उसको हम डिग्री मानेंगे।

39:56

उसका ऑोजिट यह है कि जब भी कोर्ट किसी

39:59

प्लेेंट को डिसमिस कर देगा, किसी भी केस

40:01

को डिसमिस कर देगा, उसको हम डिग्री नहीं

40:04

मानेंगे। दोनों में फर्क क्या है?

40:07

बच्चे जब भी कोर्ट किसी प्लेंट को रिजेक्ट

40:10

करता है उसका मतलब यह होता है कि केस फाइल

40:13

किया गया कोर्ट के सामने और उसमें कोई

40:18

ऐसी कमी थी जिसकी वजह से कोर्ट को कोर्ट

40:23

के पास आधार ही नहीं रहा कि वो उस केस की

40:26

सुनवाई करे। जैसे कि लिमिटेशन एक एग्जांपल

40:29

हो गया। समय निकल चुका है। कोर्ट को नहीं

40:31

लग रहा कि माफी करनी चाहिए देरी को तो वो

40:34

मना कर देगा। रिजेक्ट कर देगा।

40:37

पर मानिए कोई प्लेट फाइल की गई

40:41

उसमें कानूनी परेशानी कोई भी नहीं है। सब

40:44

कुछ ठीक है। पर उसके अंदर कोई गलती हो गई

40:47

है। कोई डिफॉल्ट हो गया है। किसी को

40:50

पार्टी बनाना था। किसी को पार्टी नहीं

40:52

बनाया। कुछ गलत लिख गया है। कुछ ऊंचनीच हो

40:55

गई है। या फिर कोर्ट फी इतनी लगानी थी,

40:59

उतनी लगानी थी, कम ज्यादा हो गई है वो। आप

41:02

देख रहे हो परेशानी यहां पर भी है किसी भी

41:05

प्लेट के साथ पर वो कोई फंडामेंटल परेशानी

41:08

नहीं है कि जिसकी वजह से कोर्ट उसको

41:10

सुनवाई ना कर पाए। परेशानी ऐसी है जिसको

41:14

ठीक किया जा सकता है। तो यहां पर कोर्ट

41:17

उसको मना तो कर रहा है, डिसमिस तो कर रहा

41:20

है पर डिसमिस करने का आधार यह नहीं है कि

41:23

मैं कानूनी तौर पर इस केस को सुन ही नहीं

41:25

सकता क्योंकि इसमें यह परेशानी है वो

41:27

परेशानी है।

41:29

आधार यह है कि उसके अंदर कोई कमी है। कोई

41:33

डिफॉल्ट है।

41:36

तो यह जो कोर्ट बोलता है कि आपके इस

41:38

प्लेेंट में कोई डिफॉल्ट है, कोई परेशानी

41:41

है, इसको हम बोलते हैं ऑर्डर जारी करना

41:46

डिसमिसल का। जैसा कि शब्द खुद में बोल रहा

41:50

है कि वो एक ऑर्डर है। मतलब आप अपनी

41:54

परेशानी को ठीक कर लो। जिस भी परेशानी की

41:57

वजह से वो डिसमिस हुआ है आपका सूट। उसको

42:00

दोबारा कोर्ट के सामने पेश कर दो। तो आप

42:03

देख रहे हो निर्णय लिया कानून ने कोर्ट ने

42:07

निर्णय लिया पर उसमें कंक्लूसिव नेचर नहीं

42:10

है। आप बदलाव कर रहे हो, सुधार कर रहे हो,

42:12

कोर्ट के सामने जा रहे हो कि भाई आपने जिस

42:14

डिफॉल्ट की वजह से मेरा डिसमिस किया था अब

42:17

मैंने ठीक कर दिया।

42:19

ठीक है? तो ये जो डिफरशिएशन है हमको दिमाग

42:23

में रखना है। जब किसी प्लेट का रिजेक्शन

42:26

होता है तो उसको डिग्री मानते हैं। जब

42:31

किसी को डिसमिस किया जाता है किसी सूट को

42:34

किसी डिफॉल्ट की वजह से, किसी कमी की वजह

42:36

से, किसी चूक की वजह से, उसको हम ऑर्डर

42:40

बोलते हैं। उसको डिग्री की डेफिनेशन में

42:42

नहीं डालेंगे। ठीक है? तो ये तीन बातें हो

42:46

गई। और इसके बाद क्या आती है?

42:51

जो यह हमने डिस्टिंशन समझा कि एक

42:55

प्रीिलिमरी डिग्री होती है, एक फाइनल

42:57

डिग्री होती है। उसके बारे में ये आखिरी

42:59

भाग है। ये कहता है कि कोई भी डिग्री

43:02

ध्यान से देखिएगा। कोई भी डिग्री

43:04

प्रिलिमिनरी तब कहलाती है जब उसके बाद भी

43:09

फदर प्रोसीडिंग्स होनी है कोर्ट के सामने।

43:15

उस उस केस को उस सूट को डिसाइड करने के

43:18

लिए।

43:19

वही बात कई सारे पॉइंट्स इन्वॉल्व है।

43:22

आपने एक को डिसाइड कर दिया, दो को डिसाइड

43:24

कर दिया। अभी बाकी के बचे हुए हैं उनका भी

43:25

डिसीजन होना है। जब सारे डिसाइड हो जाएंगे

43:28

तभी केस डिसाइड हो पाएगा। तो ऐसी स्थिति

43:31

कौन सी है? प्रीिलिमरी डिग्री जैसा कि

43:32

मैंने आपको बताया। और फाइनल डिग्री कौन सी

43:35

होती है? उसकी जस्ट अपोजिट। जब कोर्ट

43:37

कंप्लीटली डिस्पोज कर देता है जो भी पॉइंट

43:40

इनवॉल्व थे कोर्ट के सामने उन सब पर एक

43:44

अपना डिसीजन दे देता है निर्णय दे देता है

43:47

कंक्लूजन तब हम बोलते हैं कि फाइनल डिग्री

43:50

आ गई है ठीक है तो ये तो हो गया हमारा

43:52

प्रीलिमरी और फाइनल डिग्री में डिस्टिंशन

43:55

ठीक है तो जहां तक बात डेफिनेशन की है

43:59

जहां तक बात डिग्री की डेफिनेशन की है

44:02

आपको बस कुछ बातें याद रखनी है बिल्कुल भी

44:06

जरूरी नहीं है। मैं आपको फिर से बोल रहा

44:08

हूं। स्मार्ट प्ले करना पड़ेगा। आपको

44:11

एग्जाम क्रैक करना है। बेवकूफों की तरह हर

44:14

चीज रटते मत रह जाना। समझना है और स्मार्ट

44:17

प्ले करना है। टोटल चार या पांच बातें

44:20

हैं। उससे ज्यादा नहीं है। उनको क्रॉस चेक

44:23

कर लो दिमाग में और नोट्स में। अगर इतना

44:25

लिख लिया है, इतना समझ लिया है, यू आर वेल

44:27

वेल एंड गुड टू गो। पहला पॉइंट डिक्री का

44:30

मतलब होता है जब भी कोई कोर्ट किसी भी

44:33

पॉइंट को कंक्लूसिवली

44:35

स्पेसिफिक वर्ड्स कंक्लूसिवली डिटरमाइन

44:38

करता है। पहली बात डिग्री दो प्रकार की

44:42

होती है। प्रिलिमिनरी डिग्री और फाइनल

44:44

डिग्री। ठीक है? डिग्री की डेफिनेशन में

44:47

वह स्थिति भी गिरती है जब कोर्ट किसी

44:50

प्लेट को रिजेक्ट करता है। डिग्री की

44:53

डेफिनेशन में वह स्थिति भी गिरती है जब

44:55

कोर्ट 100 सेक्शन 144 के अंदर एडजुडिकेट

44:58

करता है। वो मैं आपको बता दूंगा जब हम 144

45:00

पर पहुंचेंगे।

45:02

डिग्री की डेफिनेशन में दो चीजें नहीं

45:04

गिरती है। पहले याद करना है ऑर्डर और

45:07

डिग्री का डिमार्केशन। कोई भी एक ऐसा

45:11

डिसीजन जिसके खिलाफ जो अपील फाइल की जा

45:13

रही है वो एस अपील फ्रॉम एन ऑर्डर फाइल

45:16

करी जा रही है। जो सीपीसी है उसको ऑर्डर

45:18

के खिलाफ अपील मान रहा है वो डिग्री की

45:21

डेफिनेशन में नहीं गिरेगा। ठीक है? और एक

45:25

ऐसा ऑर्डर जिससे किसी सूट को डिसमिस किया

45:28

गया है डिफॉल्ट की वजह से।

45:31

ठीक है? उसको ऑर्डर माना जाएगा डिग्री

45:34

नहीं माना जाएगा। छह पॉइंट हो गए। और

45:35

आखिरी सातवा पॉइंट है प्रीिलिमिनरी और

45:38

फाइनल डिग्री का डेफिनेशन। जब भी कोर्ट के

45:41

सामने किसी पॉइंट को डिटरमाइन करने के बाद

45:44

भी कुछ पॉइंट्स बचते हैं उस केस को फाइनली

45:47

डिसाइड करने के लिए ऐसी डिग्री को हम

45:50

प्रिलिमिनरी डिग्री बोलते हैं। और जब भी

45:52

कोर्ट सारे पॉइंट्स को डिटरमाइन कर देता

45:54

है कंक्लूसिवली उसको हम बोलते हैं फाइनल

45:57

डिग्री। तो दीज़ आर दी सेवन पॉइंट्स जो

46:00

यहां भी फिट हो जाने चाहिए और पेपर पे भी।

46:03

क्या सभी के हो गए? यस बोल दो फटाफट से

46:07

क्लियर है

46:08

यस सर

46:09

सरस

46:11

यस सर

46:13

सर अपील फ्रॉम एन आर्डर थोड़ा एक बार और

46:15

क्लियर कर दीजिए

46:16

अपील फ्रॉम एन आर्डर मतलब सीपीसी का कानून

46:20

उस डिसीजन के खिलाफ जो अपील फाइल की जा

46:23

रही है उसको अपील फ्रॉम ऑर्डर मानता है।

46:26

ऐसी जब भी स्थिति होगी उसको हम डिग्री

46:30

नहीं मानेंगे। देखो बच्चे सीपीसी के अंदर

46:32

ये डिमार्केशन बार-बार चलेगा और उसने

46:35

दोनों के बारे में अलग-अलग कानून बनाए

46:37

हैं। कब ऑर्डर के खिलाफ अपील फाइल कर करी

46:40

जा सकती है। कब डिग्री के खिलाफ अपील फाइल

46:42

की जा सकती है और सब पूरा पूरा स्ट्रक्चर

46:44

अलग-अलग है। अगर सीपीसी ही उसको आर्डर के

46:48

खिलाफ अपील मान रहा है तो उसको डिग्री

46:50

नहीं मान सकते। बस इतनी सी बात है। ठीक

46:53

है।

46:54

ओके सर।

46:55

सर वो डिफॉल्ट का एक एग्जांपल देंगे।

46:57

डिफॉल्ट का बच्चे देखो आपको देखो एग्जांपल

47:00

से ज्यादा महत्वपूर्ण है आपके दिमाग में

47:02

कि मानो आप उस गद्दी पर बैठे हो आपके

47:06

सामने कोई केस आया कोई प्लेंट आपके सामने

47:09

फाइल हुई है। अब अगर उस प्लेेंट में जो

47:13

परेशानी है जो दिक्कत है वो ऐसी दिक्कत है

47:16

जिसकी वजह से आप उस पॉइंट को उस केस को

47:19

डिटरमाइन नहीं कर सकते हो। उसमें कानूनी

47:22

वाध्यता है, लीगल प्रॉब्लम है तो आप उस

47:26

प्लेेंट को क्या कर देते हो? रिजेक्ट कर

47:28

देते हो। और जब आप प्लेेंट को रिजेक्ट

47:31

करते हो तो वही वाली बात आ जाती है कि

47:33

किसी भी पॉइंट को जिस भी आधार पे आपने

47:34

उसको रिजेक्ट किया होगा उस पॉइंट को आपने

47:37

कंक्लूसिवली डिटरमाइन कर दिया है। जैसे

47:40

लिमिटेशन का एक एग्जांपल पर वही कोई

47:43

प्लेंट फाइल हुई, कोई केस फाइल हुआ। उसमें

47:46

कोई परेशानी, कोई डिफॉल्ट है, कोई गलती

47:48

है, कोई चूक है। एक ऐसी चूक, एक ऐसी गलती

47:52

जिसमें सुधार किया जा सकता है। जिसको ठीक

47:55

किया जा सकता है। जैसे कोर्ट फी कोर्ट फी

47:58

पी पे करनी थी। आप केस फाइल कर रहे थे।

48:01

सही से कैलकुलेट नहीं कर पाए। वकील साहब

48:03

ने गलती कर दी। कम लग गई, ज्यादा लग गई जो

48:05

भी हजार सिनेरियोस हो सकते हैं। तो ये एक

48:08

ऐसी चीज है जिसको कंपनसेट करा जा सकता है।

48:10

और कोर्ट फीट लो कोर्ट को दे दो। नए

48:12

प्लेंट के साथ बात खत्म। तो कभी भी जब

48:15

डिफॉल्ट की वजह से सूट डिसमिस हो रहा है,

48:17

किसी चूक की वजह से सूट डिसमिस हो रहा है

48:20

ना कि ना कि कानूनी प्रक्रिया की वजह से

48:24

ऐसी स्थिति को हम ऑर्डर मानते हैं ना कि

48:26

डिग्री क्योंकि बच्चे किसी पॉइंट को

48:27

कंक्लूसिवली डिटरमाइन तो कर नहीं रहे। कोई

48:30

कमी है हम कह रहे हैं इसमें कमी है भैया

48:31

ठीक करो।

48:33

ठीक है ना? क्लियर है?

48:35

जी सर।

48:37

सर

48:37

हां जी। सर जुरिसडिक्शन की वजह से जो

48:41

डिफॉल्ट हुआ है उसको क्या? ऑर्डर बोलेंगे

48:43

या डिग्री

48:44

आप बताओ

48:47

सर ऑर्डर ही होना चाहिए सर ऑर्डर ही होना

48:49

चाहिए सर हम देखो दो चीजें हैं यहां पर

48:53

सीपीसी इसके बारे में वही बहुत डिटेल्ड

48:55

प्रक्रिया करता है तभी मैं थोड़ा सा बच

48:57

रहा हूं इस सवालों से देखो जुरिसडिक्शन का

49:00

क्वेश्चन बहुत ही महत्वपूर्ण क्वेश्चन

49:03

होता है। आप सही जुरिडिक्शन में अपना सूट

49:06

फाइल करो वो बहुत ही जरूरी होता है। पर जब

49:09

भी किसी कोर्ट के सामने सूट आता है कोई

49:13

जिसके जिसके ऊपर उसका जुरिसडिक्शन नहीं

49:16

बनता है वहां पर कोर्ट को भी कुछ

49:19

जिम्मेदारियां बताई ही गई है। कोर्ट के

49:22

पास भी कई ऐसी परिस्थितियों में ये पावर

49:25

है कि वो खुद से उस केस को ट्रांसफर कर

49:27

सकता है ऐसे कोर्ट में जहां पर

49:29

जुरिसडिक्शन बनता है। तो इन पॉइंट्स का

49:32

बहुत क्लियर आंसर देना इज नॉट इज नॉट दी

49:35

वे टू गो फॉर क्योंकि बहुत डिटेल्ड

49:37

प्रोविजंस है। हां जो आप समझ रहे हो कि एक

49:39

ऐसी स्थिति है जिसमें उसमें कोई कानूनी

49:42

वाध्यता नहीं है। वो बस एक गलती है जिसको

49:44

सुधारा जा सकता है।

49:46

कोर्ट ये बोल सकता है कि भ आप इस प्लेंट

49:48

को दूसरी कोर्ट में लगा।

49:49

बिल्कुल बिल्कुल क्योंकि किसी पॉइंट को

49:51

कंक्लूसिवली वो वाली चीज नहीं आ रही। कोई

49:53

लागू कानूनी बाध्यता नहीं आ रही।

49:55

थैंक यू सर।

49:57

हां हां जी।

49:59

सर शंकर चंद्रकांत का केस था सर 995 का।

50:02

उसमें कहा है कि मोर देन टू फाइनल डिग्री

50:05

आ सकती है।

50:07

मोर देन

50:08

अभी केसेस पर आएंगे बच्चे। अभी तो पहली

50:10

क्लास है। डेफिनेशन पढ़ रहे हैं। करेक्ट

50:12

ये जो मैं बातें बोल रहा हूं उतना ही समझ

50:14

में आना चाहिए। अभी आपको एक सेकंड रुक

50:16

जाओ। बच्ची कौन बीच में बोलने की कोशिश कर

50:18

रही है बार-बार?

50:20

सर मेरा क्वेश्चन था कि ऐसा भी कभी

50:23

सिचुएशन होती है कि कंक्लूसिवली डिटरमाइन

50:26

नहीं कर रहा हो कोई केस। कोर्ट।

50:28

हम कंक्लूसिवली डिटरमाइन नहीं कर रहा हो

50:31

केस को।

50:35

सर मतलब आपने बोला कि किसी किसी जो ऑर्डर

50:40

पास हो रहा है या डिग्री डिग्री को

50:42

कंक्लूसिवली डिटरमाइनिंग होना चाहिए तो

50:46

ऐसी भी कोई सिचुएशन होती है जब कोर्ट के

50:49

पास ऐसा कुछ इंटेंशन हो कि मैं

50:50

कंक्लूसिवली डिटरमाइन नहीं कर रहे हैं

50:53

तो तो केस पेंडिंग बना रहेगा कैसे डिस्पोज

50:55

ऑफ तो करना पड़ेगा ना ऊपर से डंडा रहता है

50:57

केस क्यों नहीं डिसाइड कर रहे हो आप कभी

51:00

तो करोगे

51:02

यस सर

51:03

है ना जब भी किसी एक पॉइंट को डिसाइड

51:06

करोगे पूरे केस को डिसाइड नहीं करोगे

51:07

प्रीमियर डिग्री हो जाएगी पर कभी तो एक

51:09

साल बाद दो साल बाद तीन साल बाद कभी तो

51:12

उसको करना पड़ेगा ना डिटरमाइन जब भी करोगे

51:14

आप डिक्री दोगे इधर या उधर इन व्हाटएवर

51:16

सेंस कभी तो कंक्लूसिवली डिटरमाइन करोगे

51:20

यस सर

51:20

ठीक है

51:21

सर

51:22

सर ये पार्टली फाइनल क्या होता है

51:25

हां ये ये एक एक चीज है जो हमको मैं आपको

51:29

समझाऊंगा क्योंकि इसमें थोड़ा सा हमको

51:32

समझदारी का लेवल थोड़ा सा डेवलप करना

51:34

पड़ेगा। तो अभी मैं इसको नहीं उसमें नहीं

51:37

जाना चाह रहा क्योंकि उसमें थोड़ी सी अभी

51:39

टेक्निकिटी है। आई विल कम टू दैट।

51:41

ओके सर।

51:42

सर

51:42

सर

51:43

सर

51:44

हां हां हां बच्चे

51:47

सर अगर हम डिग्री और ऑर्डर में हम

51:49

डिफरेंशिएट करना चाहे तो बस हमें इतना ही

51:51

हमें ध्यान रखना होगा कि मतलब ऑर्डर में

51:53

हम किसी भी मॉडिफिकेशंस के बाद हम उसे

51:55

दोबारा रिप्रेजेंट कर सकते हैं। बट डिग्री

51:56

कैन नॉट बी रिप्रेजेंटेड। देखो डिग्री और

51:59

जो आपका ऑर्डर है उसमें जहां तक लीगल

52:02

डिफरशिएशन की बात है बहुत डिफरेंस होते

52:05

हैं। पांच छ सात पॉइंट्स तक बना देते हैं

52:08

लोग बुक्स में आप गूगल गूगल पर सर्च करोगे

52:10

और ऑनेस्टली वो सारे डिफरेंसेस है। बट हां

52:13

क्योंकि दिस इस द वेरी फर्स्ट क्लास। तो

52:15

जो सबसे सबसे फंडामेंटल डिफरेंस है एक

52:18

डिग्री होने में और एक ऑर्डर होने में जो

52:21

उनकी डेफिनेशन से दिखता है हमें अपना कुछ

52:24

बहुत ज्यादा उसमें रॉकेट साइंस नहीं लगाना

52:26

वो यही बात है जो फाइनल का नेचर है ना

52:28

डिग्री का वो उसको बहुत आगे ले जाता है

52:31

ऑर्डर से कंपेरेटिवली पर बाकी की भी चीजें

52:34

हैं जो आगे आएंगी बाकी और भी डिफरेंसेस

52:37

सर जी बी वाला सर जी बी वाला समझा दीजिए

52:40

जिसमें लिखा है व्यतिक्रम के लिए खारिज

52:42

करने का कोई आदेश आएगा सर सर

52:47

में लिखा है कौन सा बी वाला बचे जिसमें

52:50

डिग्री नहीं मानी जाएगी हां ये वाला तो

52:54

अभी तो इसी को तो एक्सप्लेन कर रहा हूं

52:56

मैं तब से कि डिसमिसल कर रहे हो आप किसी

52:59

प्लेेंट को डिफॉल्ट की वजह से उसमें कोई

53:01

कमी है कोई दिक्कत है कोई परेशानी है उसको

53:04

आप डिसमिस कर रहे हो तो ऐसी को हम ऑर्डर

53:07

बोलते हैं ना कि डिग्री इसका संबंध इस

53:09

वाले बॉक्स से है ये वाला जो रिजेक्शन

53:12

वाली बात है जिसको हम डिग्री मान रहे हैं

53:14

और यह वाली एक बात है जिसमें डिफ़ॉल्ट की

53:16

वजह से उसको ऑर्डर पार है। डायरेक्टली

53:17

रिलेटेड है।

53:19

ओके सर।

53:20

ठीक है। चलो आगे बढ़ो। अभी देखो ये अब देख

53:24

रहे हो आप हमारा एक एक बिल्कुल फंडामेंटल

53:28

बेसिस पे कॉनसेप्चुअल क्लेरिटी धीरे-धीरे

53:31

ये बढ़ती जाएगी। बढ़ती जाएगी। क्योंकि अब

53:33

देखो अभी जिस बातों को हम डिस्कस कर रहे

53:36

हैं, जिस पे हमारे सवाल जवाब हो रहे हैं।

53:38

देखो वही बात आ गई। आ गया ऑर्डर है ना? तो

53:43

जहां तक बात ऑर्डर की है,

53:48

ऑर्डर को कैसे डिफाइन कर रहा है हमारा

53:50

सीपीसी? ऑर्डर में भी वही शब्द इस्तेमाल

53:52

हो रहा है। ऑर्डर क्या है? ऑर्डर भी

53:54

फॉर्मल एक्सप्रेशन है और इसमें भी डिसीजन

53:58

दिया जा रहा है

54:00

और सिविल कोर्ट दे रहा है सीपीसी है। तो

54:03

इसको तो हमको बहुत ज्यादा भाव नहीं देना

54:05

है। पर फॉरल फॉर्मल एक्सप्रेशन है किसी भी

54:08

डिसीजन का। पर आर्डर को कैसे डिफाइन किया

54:11

जा रहा है कि हर एक वो डिसीजन

54:15

एक सिविल कोर्ट का जो डिग्री नहीं है

54:20

वो ऑर्डर

54:23

ये वही बच्ची जो पूछ रही थी ना सर ऑर्डर

54:26

और डिग्री में क्या डिफरेंस

54:30

ऑर्डर हर वो चीज है हर वो डिसीजन जब भी

54:34

कोर्ट किसी भी पॉइंट पर कोई भी निर्णय

54:37

देता है

54:39

अगर वो डिग्री की डेफिनेशन में नहीं गिर

54:41

रहा और डिग्री की डेफिनेशन क्या है? जो

54:42

अभी हमने पढ़े सात पॉइंट्स जिसमें आखरी के

54:45

तीन तो इंपॉर्टेंट नहीं है कि आखरी में

54:47

प्रिलिमिनरी और उसमें फर्क बता रहे हैं।

54:49

जो आपका पांचवा और छठवा था उसमें

54:51

एक्सक्लूजन है जो शुरू के चार थे।

54:55

क्या-क्या चीजें डिग्री की डेफिनेशन में

54:57

गिर रही थी। जब भी किसी भी पॉइंट को

54:58

कंक्लूसिवली डिटरमाइन कर रहे थे। प्ले का

55:02

रिजेक्शन 144 वाली बात तो जो भी डिसीजन

55:06

ध्यान से सुनना इस बात को।

55:08

जो भी डिसीजन जो भी निर्णय किसी भी कोर्ट

55:11

का डिग्री नहीं माना जा सकता उसको ऑर्डर

55:15

मानते हैं। तो कहने का मतलब क्या है? पहली

55:18

चीज सबसे महत्वपूर्ण बात कोर्ट ने जितने

55:22

भी डिसीजंस हैं सिविल सीपीसी ने जितने भी

55:26

डिसीजंस हैं कोर्ट के उनको दो कैटेगरी में

55:29

बांटा है। कितने में? दो में। जिसमें छोटी

55:33

कैटेगरी एक्सक्लूसिव कैटेगरी है डिग्री

55:36

की। क्योंकि डिग्री की जो कैटेगरी है वह

55:39

बंधी हुई है अपनी डेफिनेशन से। केवल वही

55:42

चीजें जो उस डेफिनेशन को सेटिसफाई करेंगी

55:45

वही डिग्री कहलाएंगी।

55:48

कंक्लूसिवली डिटरमाइन करना चाहिए डिग्री

55:51

के लिए। और जो बाकी के सारे के सारे

55:54

डिसीजंस होंगे जो डिग्री की डेफिनेशन में

55:57

नहीं गिर पा रहे क्योंकि वो कंक्लूसिवली

55:59

डिटरमाइन नहीं कर रहे। इसको खटखटाओ।

56:03

वो सारे के सारे डिसीजंस जो किसी भी पॉइंट

56:06

को कंक्लूसिवली डिटरमाइन नहीं कर रहे वो

56:10

सारे ऑर्डर्स हो जाएंगे। खत्म। कितना

56:13

सिंपल है। ठीक है? क्लियर है? ऑर्डर की

56:17

डेफिनेशन समझ में आ गई है बच्चे? यस बोल

56:18

दो एक बार सभी लोग।

56:20

यस सर।

56:21

ठीक है।

56:22

कोई सर कोई एग्जांपल जो कंक्लूसिव प्रूफ

56:25

की डेफिनेशन में ना आए।

56:27

हां। देखो एग्जांपल्स अभी मैं दूंगा भी तो

56:29

समझ नहीं आएंगे क्योंकि हम लोग अभी उस पे

56:32

सिविल प्रक्रिया में ज्यादा हद तक आगे बढ़े

56:34

नहीं है। बस आप अपने दिमाग को यह समझाने

56:37

की कोशिश करो। ठीक है? और वो क्या पॉइंट

56:40

है कि जब भी कोर्ट जो है किसी भी चीज को

56:45

इस तरीके से डिसाइड कर रहा है कि जहां तक

56:47

इस चीज का सवाल है उस पे उसने डिसीजन दे

56:51

दिया। अब उस पे वो चर्चा करने नहीं वाला

56:54

है। उसको वो डिस्कस करने नहीं वाला है। वो

56:56

पॉइंट हो गया उसका डिसाइड। कंक्लूसिवली

56:59

डिटरमाइन कर दिया उसने उस चीज को। यह

57:01

स्थिति किधर की तरफ जाएगी? डिग्री की तरफ।

57:04

और जब भी कोई कोर्ट डिसीजन तो ले रहा है

57:08

यहां पर ऑर्डर में भी डिसीजन है पर वहां

57:11

पर वो कंक्लूसिविटी नहीं है। कोर्ट उस उस

57:15

अपने डिसीजन को वो वैल्यू नहीं दे रहा। वो

57:19

पावर नहीं दे रहा जिससे ये लगे कि उस उस

57:22

पॉइंट का जहां तक सवाल है उससे उसने अपना

57:25

दिमाग हटा लिया। उस चीज को उसने डिसाइड कर

57:27

लिया है। ये स्थिति ऑर्डर में आ रही है।

57:30

ठीक है? इस इस बात को समझो। अगर इतना समझ

57:32

में आ रहा है उतना काफी है। ठीक है

57:35

सर एक डिफरेंस और कंक्लूड जो कर सकते हैं

57:37

वो होगा कि डिग्री में राइट ऑफ पार्टीज को

57:41

डिटरमाइन करते हैं एंड ऑर्डर में नहीं

57:42

करते।

57:43

सो ये राइट ऑफ पार्टीज एक्सक्टली है क्या?

57:45

हां ये ये देखो ये एक ऐसा सवाल है जो

57:49

डायरेक्टली व्हाट हैज़ बीन रिटेन इन दी

57:51

डेफिनेशन ओनली वहां से निकल के आ रहा है

57:54

कि ये राइट ऑफ पार्टीज क्या है? देखो जिस

57:56

तरीके से मैं इसको समझता हूं और मैं चाहता

57:58

हूं कि आप भी उसको उसी तरीके से समझो।

58:01

देखो कोई भी जब कोई भी प्रोसीडिंग्स हो

58:06

ठीक है

58:08

वहां पर जो भी स्थिति बनती है चाहे कोई भी

58:12

नेचर हो उसका चाहे प्रॉपर्टी का डिस्प्यूट

58:14

हो चाहे फैमिली का डिस्प्यूट हो या जो भी

58:17

चीजें सिविल सिविल प्रोसीडिंग्स की

58:19

कैटेगरी में गिर सकती है काफी ब्रॉड है ये

58:22

हर एक स्थिति में आप उस उस फैक्ट्स को

58:24

एनालाइज करो

58:26

ओवर दी एंड आप एक ही चीज पाओगे

58:30

कि यह जो दो पार्टियां आपस में एक दूसरे

58:33

से लड़ रही हैं प्लेंटिफ डिफेंडेंट यह जो

58:35

बहसबाजी चल रही है सालों से

58:38

यह इन लोगों को अपना अधिकार साबित करने के

58:42

ही पीछे पूरा झगड़ा है। एक व्यक्ति कह रहा

58:45

है कि मेरा अधिकार है। एक व्यक्ति कह रहा

58:47

है कि आपका अधिकार नहीं है। मेरा अधिकार

58:48

है। फॉर एग्जांपल किसी प्रॉपर्टी का

58:50

डिस्प्यूट ले। एक कह रहा है मेरी लैंड है।

58:53

दूसरा कह रहा है मेरी लैंड है। जब कह रहा

58:56

है कि ये विल नकली है तो क्या कहना चाह

58:58

रहा है? क्योंकि यह विल नकली है। आपकी

59:00

लैंड नहीं है। आपका राइट नहीं है। तो इन

59:03

इन एसेंस एव्री केस एव्री प्रोसीडिंग्स

59:08

इज अबाउट दी फाइट्स ओवर दी राइट्स कि

59:11

पार्टीज के राइट्स एस्टेब्लिश होने चाहिए

59:14

किसी भी केस के अंदर। अब ये डिमार्केशन

59:16

कहां से आ रहा है कि डिग्री में लिखा हुआ

59:18

है स्पेसिफिकली कि पार्टीज के राइट्स को

59:22

डिटरमाइन हो रहे हैं। बच्चे वो एसेंशियल

59:24

है, लॉजिकल है। जब हर केस ही

59:28

पार्टीज के राइट्स के बारे में है तो उस

59:31

पर डिसीजन दोगे आप कुछ तो बोलोगे यह विल

59:33

है असली है या नकली है दोनों में से कुछ

59:36

भी बोलो आप पार्टीज के राइट को ही

59:39

डिटरमाइन कर रहे हो इन द एंड ठीक है चाहे

59:42

इसके चाहे उसके पहली चीज दूसरी चीज ऑर्डर

59:47

में ये बात मिसिंग क्यों है इसकी एक वजह

59:50

तो ये है कि ऑर्डर जो है मैंने जैसे कि

59:53

बोला बहुत ब्रॉडर टर्म है क्योंकि इसके

59:57

अंदर अंदर वो कंक्लूसिविटी नहीं है। ऑर्डर

59:59

एक ऐसी चीज है जब भी कोई भी कोर्ट किसी भी

1:00:03

पॉइंट पर डिसीजन लेता है। ठीक है? किसी भी

1:00:06

चीज के बारे में डिसीजन ले रहा है। वो

1:00:08

जरूरी नहीं है सीधे तौर पर किसी चीज को

1:00:11

डिसाइड कर रहा हो कि ये विल असली है या

1:00:13

नकली।

1:00:15

किसी भी छोटी सी जुड़े हुए पॉइंट पे भी एक

1:00:18

डिसीजन दे रहा है। जो पूरी तरीके से उसको

1:00:22

कंक्लूसिवली डिटरमाइन नहीं कर रहा चीज को।

1:00:24

वो भी ऑर्डर की डेफिनेशन में गिर सकता है।

1:00:27

तो ऑर्डर में भी कई बार ऐसा होगा कि

1:00:30

राइट्स इन्वॉल्वड होंगे। बिकॉज़ दैट इज

1:00:32

वेरी लॉजिकल। क्योंकि हर केस में बहुत

1:00:34

सारे राइट्स का ही क्लैश होता है। बट

1:00:37

ऑर्डर के सिनेरियो में इट इज नॉट नेसेसरी

1:00:39

बिकॉज़ मेनी टाइम्स देयर आर ऑर्डर्स फ्रॉम

1:00:41

द कोर्ट। कई बार कोर्ट ऐसे ऑर्डर्स भी

1:00:43

देता है जो सीधे तरीके से किसी भी पार्टी

1:00:46

के राइट्स को हिट नहीं करते हैं। बट दे आर

1:00:48

क्रूशियल। दे प्ले प्ले अ क्रूशियल रोल इन

1:00:51

अ केस। ठीक है

1:00:53

सर। हां जी बच्चे

1:00:55

सर जैसे ऑर्डर ऑर्डर क्या बोल जो डिग्री

1:00:58

है सर वो राइट क्रिएट कर रहा है सर ठीक है

1:01:01

सर डिटरमाइन कर रहा है क्रिएट थोड़ी

1:01:03

डिटरमाइन कर रहा है राइट को

1:01:05

तो सर लायबिलिटी भी होगा वहां पे

1:01:07

क्या होगा

1:01:08

लायबिलिटी भी डिटरमिनेशन हो रहा होगा अगले

1:01:10

पार्टी के लिए

1:01:12

राइट और लायबिलिटी और लायबिलिटी क्या आप

1:01:17

ये सोचो कि राइट का जो भी आप अपोजिट

1:01:21

कॉन्टेक्स्ट समझना चाहते हो जैसे मैं आपको

1:01:23

प्रैक्टिकल लाइफ में बताऊ नुकसान एक ऐसी

1:01:26

चीज है एक का फायदा दूसरे का नुकसान जब एक

1:01:29

का अधिकार स्वीकार कर रहे हो तो दूसरे का

1:01:31

अधिकार अस्वीकार कर रहे हो दैट मींस उसका

1:01:33

नुकसान हो रहा है तो ऑब्वियसली अगर एक को

1:01:35

बेनिफिट होगा तो दूसरे को कॉन्सिक्वेंस

1:01:37

होगा एंड दैट इज समथिंग वो हमेशा हैंड इन

1:01:40

हैंड ही जाएंगे अब वो जरिसेंस में बोलते

1:01:42

है ना क्या बोलता है वो जरिडिकल

1:01:44

कोरिलेटिव

1:01:45

हां कोरिलेटिव

1:01:47

पर क्या होता है बच्चे राइट का लायबिलिटी

1:01:49

होता है

1:01:52

सर राइट का ड्यूटी सर राइट का ड्यूटी होता

1:01:54

है। हां जो भी है मतलब जो भी अपोजिट है

1:01:56

दैट विल ब्लाइडली बी इनवॉल्व। ठीक है

1:02:00

सर एक क्वेश्चन मेरा भी है।

1:02:02

सर जैसे कोई केस है सर जैसे कोई केस है

1:02:05

उसमें चार चार डिस्प्यूटेड पॉइंट्स है और

1:02:07

कोर्ट ने किसी एक पॉइंट पे डिसीजन दे दिया

1:02:10

सर। लेकिन वो ऑर्डर नहीं है। सॉरी डिग्री

1:02:13

नहीं है सर ऑर्डर है। तो सर जो जिस पार्टी

1:02:17

के अगेंस्ट ये आर्डर गया है वो पार्टी इस

1:02:20

इस ऑर्डर के अगेंस्ट अपील में जा सकती है

1:02:22

या नहीं जा सकती है?

1:02:23

देखो ये एक ऐसा सवाल है जो हम अभी जिस

1:02:26

पोजीशन पे अभी है उससे आगे क्या पूछ रहे

1:02:28

हो? आप पूछ रहे हो कि ऑर्डर्स के खिलाफ हम

1:02:30

अपील फाइल कर सकते हैं या नहीं? वो अभी

1:02:32

बहुत बाद में आएगा बच्चे। अपील कब होती

1:02:34

है? फाइल कब नहीं होती है? कौन से ऑर्डर्स

1:02:36

के खिलाफ अपील फाइल कर सकते हो? किसके

1:02:38

खिलाफ नहीं? दैट इज नॉट द कंड अभी

1:02:40

डेफिनेशन पढ़ रहे हैं बच्चे अभी समझ रहे

1:02:41

हैं ऑर्डर है क्या उसको तो समझ ले

1:02:44

ओके सर

1:02:45

सर कोई ऐसा एग्जांपल जो

1:02:47

सर सिंपली

1:02:48

हां

1:02:50

हम बोलो बच्चे बारी-बारी से बोलो

1:02:52

सर सिंपली ऐसे कंसीडर कर सकते हैं क्या

1:02:55

जैसे मेंटेनेंस का केस है अगर वो फाइनली

1:02:59

डिसाइड नहीं हुआ है और उसमें इंट्रिम

1:03:01

ऑर्डर किया है जैसे

1:03:02

तो उसको ऐसे ये कंसीडर किया जा सकता है आई

1:03:05

थिंक

1:03:07

एक एक ये अच्छी अच्छी वो बनाई है। देखो आई

1:03:11

विल नॉट कमेंट ऑन दैट क्योंकि मेरे को एक

1:03:13

बार क्रॉस चेक करना पड़ेगा। बट जितना मेरी

1:03:15

समझदारी करी है फॉर एग्जांपल हमने सेक्शन

1:03:18

24 पढ़ा था उसका

1:03:20

एचएमए का हिंदू मैरिज एक्ट के अंदर जिसके

1:03:23

अंदर केस के चलते चलते द कोर्ट हैड दी

1:03:26

पावर कि वो मेंटेनेंस देने का ऑर्डर दे

1:03:28

सकता था। याद करो द टर्म दैट वास यूज्ड

1:03:31

वास ऑर्डर। तो ये कैसी परिस्थिति है कि वो

1:03:34

ऐसा नहीं कह रहा कि आपको जिंदगी भर

1:03:35

मेंटेनेंस देना है या वो पॉइंट हमेशा के

1:03:37

लिए डिटरमाइन हो गया। इट वास समथिंग जो

1:03:39

उसने

1:03:41

फॉर अ लिटिल बिटस

1:03:43

राइट और जब सेक्शन 25 के अंदर जब वो

1:03:47

परमानेंट एलुमिनी भी दे रहा था तो डिग्री

1:03:49

का होना जरूरी था बट उस चीज को भी डिग्री

1:03:53

मानेंगे। दैट इज अ क्वेश्चन क्योंकि उसमें

1:03:55

चेंजेस हो सकते थे एस पर दी सरकमस्ट्ससेस।

1:03:58

राइट?

1:03:58

हां जी। तो इसको एक बार हम लोग क्रॉस चेक

1:04:00

करेंगे कि कौन सी कैटेगरी में गिरना

1:04:02

चाहिए। ठीक है

1:04:04

सर जब कोर्ट कोई भी डिग्री पास करती है तो

1:04:07

सर उस पर लिखा हुआ होता है ना डिग्री तो

1:04:10

वो जो अपील में जाके

1:04:13

नहीं सर जब अपील में जाके जब ऑर्डर बन

1:04:15

जाता है तो मतलब कुछ रिटर्न होता है या

1:04:16

फिर ऐसे ओरली उसको मतलब वो किया जाता है

1:04:20

बोला जाता है

1:04:21

नहीं मैं समझा ही नहीं आपके क्वेश्चन को

1:04:23

मतलब एक डिग्री

1:04:24

सर जैसे कोई भी डिग्री है

1:04:26

सर जैसे ये बोला है ना कि मतलब डिग्री

1:04:28

होती है वो डिग्री अगर अपील उसका किया जा

1:04:30

रहा है तो सीपीसी में उसको ऑर्डर बोला

1:04:32

जाता है अगर अगर वो डिग्री अपील में जा

1:04:34

रही है तो

1:04:34

नहीं नहीं कहां बोला किसने बोला

1:04:38

उस वाले पॉइंट को आप समझ नहीं पाए अच्छा

1:04:41

देखो देखो वो जो वाला पॉइंट है ना वो

1:04:44

लैंग्वेज ऐसी है देखो यही तो है पता है

1:04:47

यही वजह होती है कि आपको टीचर्स की जरूरत

1:04:49

पड़ती है क्योंकि आपके स्टच्यूट साथ नहीं

1:04:51

देता वो कोशिश करता है कि आपको जितना

1:04:53

कंफ्यूज कर सके वो बच्चे बी वाला जो पॉइंट

1:04:56

है वो कह रहा है कि सीपीसी देखो सीपीसी जो

1:05:00

है दोनों के अपील के बारे बारे में

1:05:02

प्रावधान करता है। डिग्री के खिलाफ भी आप

1:05:04

अपील फाइल कर सकते हो। उसके लिए कुछ

1:05:06

सरकमस्ट्ससेस है, कुछ सिचुएशन है। ऑर्डर्स

1:05:09

के खिलाफ भी आप अपील फाइल कर सकते हो।

1:05:10

दोनों की अलग-अलग जगह प्रावधान बनाए गए

1:05:13

हैं और अलग-अलग प्रावधान बनाए हैं सीपीसी

1:05:15

ने। तो वो बस पॉइंट इतना से कह रहा है कि

1:05:18

सीपीसी के अंदर जब भी किसी अपील को ऑर्डर

1:05:22

के खिलाफ अपील माना जाता है तो उसको

1:05:24

डिक्री नहीं मानी। बस इतनी सी बात है। आ

1:05:28

रही है बात समझ में? सर वो कहना चाह रही

1:05:31

है कि जैसे कोई डिग्री कोर्ट ने इशू की तो

1:05:33

वो रिटन में होती है कि ओरल में होती है?

1:05:37

रिटन में

1:05:38

आगे जाके अगर

1:05:39

नहीं नहीं सर वो होती तो जैसे रिटन में है

1:05:42

तो लेकिन वो दूसरा कांसेप्ट है सर उसको

1:05:44

शायद मैं गलत समझ रही थी जस्ट सर जैसे वो

1:05:46

डिग्री होती है अपील में जाके हम उसे

1:05:48

ऑर्डर बोलते हैं। मैं ये समझ रही थी कि

1:05:49

डिग्री अपील में जाके ऑर्डर बन जाती है।

1:05:51

डिग्री डिग्री ही रहती है बच्चे। डिग्री

1:05:53

के खिलाफ डिग्री की तरह अपील होगा। ऑर्डर

1:05:55

के खिलाफ ऑर्डर की तरह अपील होगा। अपील

1:05:57

कभी आएंगे। हम लोग जंप क्यों कर रहे मेरे

1:05:59

को समझ नहीं आ रहा

1:06:00

सर ऐसे ऐसे ही मैंने समझा था लेकिन मैंने

1:06:02

सब पढ़ा सही से आपने समझाया फिर मुझे समझ

1:06:04

में आया फिर मैंने पूछा नहीं आपसे

1:06:06

हां तो ये तो डेफिनेशनल वाली वीडियोस है

1:06:09

आई विल सजेस्ट की इसको एक एक बार और देख

1:06:11

लेना ठीक है बढ़े आगे बढ़े

1:06:14

लास्ट क्वेश्चन है ये

1:06:16

कोई एक एग्जांपल जिससे थोड़ा हम लोग

1:06:18

अरे एक्स सीपीसी इतना मोटा है भाई इतने

1:06:20

एग्जांपल्स आएंगे कि पागल हो जाओगे पढ़ते

1:06:22

पढ़ते एग्जांपल आएंगे बच्चे अभी अभी

1:06:25

डेफिनेशन पढ़ रहे है अभी देखो दो ही

1:06:26

डेफिनेशन पढ़ी है

1:06:29

आ जाओ आगे।

1:06:30

ओके सर।

1:06:31

अगली जो डेफिनेशन है वो है डिग्री होल्डर

1:06:35

की। ठीक है? किसकी? डिग्री होल्डर की।

1:06:40

इसका मतलब क्या है? बहुत सिंपल सी

1:06:43

डेफिनेशंस है। अपनी तरफ से कंफ्यूज मत

1:06:46

करना। बहुत ध्यान से सुनना जो मैं बोल रहा

1:06:49

हूं। देखो ये मैं लाता हूं आपको समझाने के

1:06:52

लिए। और ये आपके पास रहेगा। आपके

1:06:53

स्टैच्यूट में भी लिखा हुआ है। और अभी

1:06:56

बहुत ध्यान से सुनना। मैं बोल क्या रहा

1:06:57

हूं क्योंकि मैं आपको एक स्ट्रक्चर बना के

1:06:59

देता हूं। उसको अपने दिमाग में जाने दिया

1:07:02

करो। देखो डिग्री होल्डर का मतलब क्या है?

1:07:06

जहां तक बात इस शब्द की है इस एक्सप्रेशन

1:07:09

की है डिग्री होल्डर की। इसका मतलब है कि

1:07:12

कोई भी व्यक्ति

1:07:14

जिसके फेवर में ध्यान से देखना। जिसके

1:07:18

फेवर में एक डिग्री पास की गई है।

1:07:23

यहां तक तो आप बड़े खुश हो रहे होंगे कि

1:07:25

सर बड़ा आसान था। या फिर

1:07:29

कोई भी ऑर्डर

1:07:32

जिसका एग्जीक्यूशन कराया जा सकता है वो

1:07:36

दिया गया हो।

1:07:39

कहने का मतलब है यह जो डिग्री होल्डर यह

1:07:44

जो एक्सप्रेशन है बार-बार आएगा सीपीसी में

1:07:48

ये बच्चे एक न्यूट्रल एक्सप्रेशन है।

1:07:51

न्यूट्रल एक्सप्रेशन का मतलब एक ऐसा

1:07:54

व्यक्ति

1:07:56

जिसके फेवर में किसी पॉइंट को डिसाइड किया

1:08:00

गया है। जिसके फेवर में जिसके जिसको

1:08:03

राइट्स दिए गए हैं। जिसके अधिकारों को

1:08:05

स्वीकार किया गया है।

1:08:09

उसको बोलते हैं डिग्री होल्डर।

1:08:12

डिग्री होल्डर।

1:08:16

तो एक ऐसा व्यक्ति जिसके फेवर में डिग्री

1:08:18

पास की गई है

1:08:21

वो कहलाता है डिग्री होल्डर।

1:08:24

पर ना केवल इतना। एक ऐसा व्यक्ति जिसके

1:08:27

फेवर में कोई ऑर्डर भी पास किया गया है।

1:08:31

उसके लिए कोई ऐसा शब्द नहीं बनाया। ऑर्डर

1:08:33

होल्डर बना भी सकते थे क्योंकि हर जगह

1:08:37

फर्क कर रहे हैं तो यहां पे भी कर सकते थे

1:08:39

ऑर्डर के लिए ऑर्डर होल्डर बना देते पर

1:08:41

ऐसा नहीं किया गया है सीपीसी के

1:08:45

एक ऐसा व्यक्ति जिसके फेवर में ऑर्डर भी

1:08:47

पास किया गया है

1:08:50

उसको भी डिग्री होल्डर ही बोलते हैं।

1:08:56

ठीक है? तो अपने नोट्स में लिख लो डिग्री

1:08:59

होल्डर।

1:09:02

पहली कैटेगरी में वह लोग जिनके फेवर में

1:09:05

डिग्री पास की गई है।

1:09:08

दूसरी कैटेगरी में वो लोग जिनके फेवर में

1:09:11

आर्डर पास किए गए हैं।

1:09:15

अब आते हैं इस एग्जीक्यूशन वाली बात पे।

1:09:17

ये स्पेसिफिकली लिखा हुआ है इस डेफिनेशन

1:09:19

के अंदर कि जिस व्यक्ति के फेवर में आर्डर

1:09:22

पास किया गया है उसको भी डिग्री होल्डर

1:09:24

मान लेंगे। पर ये जरूरी है कि वो आर्डर

1:09:27

ऐसा होना चाहिए जिसका एग्जीक्यूशन हो सके।

1:09:30

अब यह शब्द है एग्जीक्यूशन। बच्चे यह एक

1:09:33

लीगल शब्द है। हमारे सीपीसी के अंदर एक

1:09:37

पूरा का पूरा ऑर्डर है जो इस एग्जीक्यूशन

1:09:41

की ही व्याख्या करता है। पर अगर मैं आम

1:09:44

भाषा में अभी आपको समझाने की कोशिश करूं।

1:09:46

एग्जीक्यूशन का मतलब होता है कि कोई कोर्ट

1:09:50

ने आर्डर दे दिया। आपके फेवर में आदेश

1:09:52

जारी कर दिया। अब उस ऑर्डर के अनुसार जो

1:09:55

भी उसमें चीजें लिखी गई हैं उनको फॉलो

1:09:59

करवाने की शक्ति

1:10:02

कोर्ट आपकी सहायता करेगा कि कोर्ट ने जो

1:10:05

भी आदेश दिया है उसको पूरा किया जाए जो भी

1:10:09

उसके लिए रिक्वायर्ड है उसको करा जाए।

1:10:13

उसको बोलते हैं एग्जीक्यूशन कराना। उसकी

1:10:16

डिटेल में जाने की जरूरत नहीं। अभी बस एक

1:10:19

बात समझनी है हमको जिसको मैं आपको समझाने

1:10:22

की कोशिश कर रहा हूं। जहां तक उस व्यक्ति

1:10:24

की बात है जिसके फेवर में डिग्री आई है

1:10:26

उसको तो डिग्री होल्डर बोलने में कोई

1:10:28

परेशानी नहीं है। पर वो जो व्यक्ति है

1:10:30

जिसके फेवर में आर्डर आया है अगर वो आर्डर

1:10:33

ऐसा है जिसका एग्जीक्यूशन सक्षम है उसका

1:10:37

एग्जीक्यूशन कराया जा सकता है। और मैं

1:10:39

आपको बता दूं यहां पे भी सीपीसी कुछ नहीं

1:10:41

कर रहा है। आपको घुमाने की कोशिश कर रहा

1:10:44

है। कन्फ्यूजन करने की कोशिश कर रहा है।

1:10:46

इसका कोई भी पपस नहीं है। इन मोस्ट ऑफ़ द

1:10:50

केसेस इन मोस्ट ऑफ़ द सिनेरियोज़

1:10:53

जब भी कोई ऑर्डर किसी व्यक्ति के फेवर में

1:10:56

डिटरमाइन होता है,

1:10:59

उसका एग्जीक्यूशन हो सकता है। वरना उस

1:11:01

ऑर्डर का पर्पस ही क्या है? जब उसका

1:11:02

एग्जीक्यूशन ही नहीं कराया जा सकता। तो

1:11:05

ठीक है? तो बस आपको लिखने के लिए यह याद

1:11:08

रखना पड़ेगा कि एक ऐसा व्यक्ति जिसके फेवर

1:11:11

में आर्डर जारी किया गया है जिसका

1:11:13

एग्जीक्यूशन कराया जा सकता है

1:11:17

उसको भी डिग्री होल्डर बोल सकते हैं। तो

1:11:20

वो लोग जिनके फेवर में डिग्री आई है वो

1:11:23

डिग्री होल्डर है। वो लोग जिनके फेवर में

1:11:25

ऑर्डर आया है प्लस एग्जीक्यूशन वाली बात।

1:11:29

वो लोग भी डिग्री होल्डर ही कहलाते हैं।

1:11:33

ठीक है?

1:11:34

यह हो गई हमारी डेफिनेशन किसकी? डिग्री

1:11:37

होल्डर की। दोनों कैटेगरी के लोग आ गए।

1:11:40

अब यह जो डिग्री होल्डर का जो अपोजिट वर्ड

1:11:43

होता है ठीक है?

1:11:47

वो होता है जजमेंट डेटर। डिग्री होल्डर

1:11:51

कौन हो गया? जिसके फेवर में डिग्री आई है।

1:11:53

जिसके फेवर में आर्डर आया है। पर उसका

1:11:56

अपोजिट है जजमेंट डेटर। इसका मतलब क्या

1:11:59

होता है? एक ऐसा व्यक्ति जिसके खिलाफ

1:12:04

जिसके खिलाफ कोई डिग्री पास की गई है या

1:12:08

फिर जिसके खिलाफ कोई आर्डर वही वाली बात

1:12:11

जिसको एग्जीक्यूट किया जा सकता है वो पास

1:12:14

किया गया है। तो कहने का मतलब है

1:12:18

कोई पार्टी जो कि केस में हारी है या किसी

1:12:23

पॉइंट जो भी पॉइंट उसके खिलाफ डिसाइड हुआ

1:12:25

है

1:12:27

उसको हम बोलते हैं क्या? जजमेंट डेटर।

1:12:32

क्या जजमेंट डेटर डिग्री होल्डर कौन है

1:12:36

जिसके फेवर में डिग्री आई है जिसके फेवर

1:12:39

में आर्डर आया है जजमेंट डेटर कौन है

1:12:42

जिसके खिलाफ डिग्री आई है जिसके खिलाफ

1:12:45

ऑर्डर आया है डिग्री में तो कोई परेशानी

1:12:48

नहीं है ऑर्डर में बस एग्जीक्यूशन की बात

1:12:50

को याद रखना ठीक है तो अपोजिट वर्ड है

1:12:53

डिग्री होल्डर याद कर लो इन सारे शब्दों

1:12:55

को याद कर लेना आज क्योंकि ये शब्द

1:12:57

बार-बार बार-बार हमारे सामने आएंगे जिनको

1:13:01

को बड़ा महत्वपूर्ण होगा कि हमारे दिमाग

1:13:03

में हो। तो डिग्री होल्डर वर्सेस द जजमेंट

1:13:07

डेटर। चलो आज की क्लास को यहीं रोकते हैं।

1:13:10

थोड़ा सा पहला क्लास है। रिलैक्सिंग ही

1:13:12

रखते हैं इसको। कल हम अपने यही इसी पॉइंट

1:13:14

से लीगल रिप्रेजेंटेटिव की डेफिनेशन से

1:13:17

कंटिन्यू करेंगे। आप भी एक बार नजर मार

1:13:19

लेना। केस क्लास में आने से पहले लीगल

1:13:22

रिप्रेजेंटेटिव की डेफिनेशन देख लेना।

1:13:23

मेसने प्रॉफिट्स की डेफिनेशन देख लेना।

1:13:26

सेक्शन थ्री को एक बार रीड आउट कर लेना।

1:13:28

सेक्शन फोर को एक बार रीड आउट कर लेना।

1:13:30

फिर मैं आपको एक्सप्लेन कर दूं। ठीक है?

1:13:32

चलो जी बच्चे।

1:13:34

सर कैन आई से अवार्ड?

1:13:36

यस प्लीज।

1:13:37

सर लेट्स नॉट ट्राई टू रीड होल सीपीसी इन

1:13:40

वन क्लास।

1:13:42

हां हां मतलब सारे

1:13:44

एक ही क्लास में सर सीपीसी पढ़ने का कोशिश

1:13:46

नहीं करते हैं। नहीं जैसेजैसे डाउट्स आ

1:13:48

रहे थे सर उस हिसाब से लग रहा था। इसी के

1:13:51

लिए

1:13:51

नहीं नहीं नहीं इजी है। अरे तीन डेफिनेशन

1:13:54

पढ़ी है मात्र। इनफ हम लोगों ने आज स्लो

1:13:57

किया है। हमको इससे थोड़ा सा तो फास्ट

1:13:59

चलना पड़ेगा। ऐसे चलेंगे तो दो साल में

1:14:01

आई एम सेइंग दैट द डाउट्स वी वर गेटिंग

1:14:03

टुडे। राइट राइट बच्चे कहता है क्या है

1:14:06

मुझे आज आज कोई परेशानी नहीं हुई इन व्हाट

1:14:09

सेंस मैं ऐसा क्यों बोल रहा हूं क्योंकि

1:14:11

जो भी क्वेश्चन आए दे लेजिट क्वेश्चन जो

1:14:14

उनको टैकल करने में मजा आता है और उनप हां

1:14:16

मैं ये मानता हूं कि टाइम थोड़ा सा

1:14:18

कंज्यूम हो जाता है बट ठीक है कर लेंगे

1:14:20

अभी शुरू की क्लासेस है तो बच्चे थोड़ा सा

1:14:23

पूछ रहे हैं दैट इज फाइन बट मुझे इतना

1:14:25

भरोसा है कि ओवर टाइम जैसे जैसे हम चीजों

1:14:27

को समझते चलेंगे तो हमारी स्पीड भी पकड़

1:14:30

लेगा ठीक है

1:14:32

इसीलिए बोल रहा था ना एजेंडा पहले बता

1:14:33

देता तो आप मुझे भी स्टिक करते रहते सर

1:14:36

हां

1:14:38

अच्छा सीपीसी का ठीक है तो मैं अभी बता दे

1:14:40

रहा हूं आपको लीगल रिप्रेजेंटेटिव की

1:14:42

डेफिनेशन है मेसने प्रॉफिट की डेफिनेशन है

1:14:45

सेक्शन थ्री है सेक्शन फोर है सेक्शन फाइव

1:14:48

है सेक्शन सिक्स है इतना तो पक्का है 100%

1:14:52

है इतना तो उसके बाद देखते हैं अगर

1:14:54

पॉसिबिलिटी बनेगी देखो मजा आना शुरू करेगा

1:14:56

सीपीसी में मजा आना शुरू होगा आपको सेक्शन

1:15:00

न ऑनवर्ड सेक्शन न सेक्शन 10 फिर शुरू

1:15:03

शुरू होगा असली सीपीसी। अभी तो बस शुरुआत

1:15:05

है। तो मैं भी नहीं चाहूंगा कि ये जो

1:15:06

सेक्शंस अभी हम पढ़ेंगे इन पे ज्यादा टाइम

1:15:09

नहीं देना है। मैं आपको बोल रहा हूं आपके

1:15:11

एग्जाम में नहीं आएंगे। मतलब ये डेफिनेशंस

1:15:13

तो आएंगी। डेफिनेशंस बहुत इंपॉर्टेंट है।

1:15:15

बट सेक्शन तीन, सेक्शन चार, सेक्शन पांच,

1:15:18

सेक्शन छ देन नॉट्ट। कोई नहीं पूछता उनको।

1:15:21

कहानी शुरू होगी सेक्शन नौ, सेक्शन। वहां

1:15:23

मैं कह रहा हूं गारंटेड क्वेश्चन आएगा। तो

1:15:25

इस बात को भी आप लोग भी थोड़ा सा समझने की

1:15:27

कोशिश करो। हमें पढ़ना है, हमें समझनी है

1:15:31

और हमें हर जितने भी क्वेश्चन हो सकते हैं

1:15:34

पूछने हैं। बिल्कुल पूछने हैं। पर वही

1:15:37

हमें मेहनत को सही जगह पे फोकस करना है।

1:15:40

आप सेक्शन 10 में मेरे से 50 क्वेश्चन

1:15:42

पूछोगे तो वो वर्थ इट होगा क्योंकि वो

1:15:44

एग्जाम में आने वाला है। पर आप सेक्शन चार

1:15:48

में मैं ये नहीं कह रहा सेक्शन चार आसान

1:15:50

है। बेवकूफी भरा है। पर इंपॉर्टेंट नहीं

1:15:53

है। हम उसमें एक घंटा निकाल दे। गेन हमने

1:15:55

कुछ किया नहीं। टाइम हमारा वेस्ट हो गया।

1:15:57

एग्जाम में भी वो आना नहीं। तो ऐसा लगता

1:16:00

है कि हम हर हर तरीके से बीट आउट हो रहे

1:16:02

हैं। तो मैंने एक चीज तो मैंने डिसाइड की

1:16:04

है कि जब भी मैं सेक्शन को शुरुआत करूंगा

1:16:06

सबसे पहले आपको यही बताऊंगा कि वो सेक्शन

1:16:09

इंपॉर्टेंट है या नहीं। फिर उसके हिसाब से

1:16:11

हम लोग देखेंगे कि उसको कितना टाइम देना

1:16:12

है। ये वाला ठीक है। ये वाला तरीका सही है

1:16:15

ना?

1:16:15

यस सर।

1:16:16

सर

1:16:16

हां। सबसे पहलेोर्टेंस की बात को देखेंगे।

1:16:19

फिर उसी कॉन्टेक्स्ट से उसको देखना और उसी

1:16:21

हिसाब से उसको समय वेस्ट करेंगे। ठीक है?

1:16:24

यस सर। चलो फिर 7:00 बजे भी क्लास है।

1:16:26

बाय-ब रिलैक्स करो आधा घंटा।

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