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JIM ROHN 1981 : The Speech that will FIX Your Life in 1 DAY (Hindi Dubbed)

40:53EnglishBy Swaroop Singh RajputTranscribed Jul 13, 2026
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कुछ दिन पहले मैं YouTube स्टोर कर रहा था

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तो मैंने यह सुना हैव मोर देन [संगीत]

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बिकम मोर देन यू आर समय

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बेस्ट मिलियनी

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जिम रोन की स्पीच की सिर्फ चार लाइंस और

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सच बोलूं यह सुनने के बाद मेरे रोंगटे

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खड़े हो गए। आई एम श्योर आपने भी इनकी कोई

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रैंडम क्लिप जरूर देखी होगी। ये जिम रोन

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का 1981 का एक पेड सेमिनार था। YouTube पे

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अभी इसकी बहुत सारी क्लिप्स वायरल हो रही

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है। हर शॉट हर क्लिप पे मिलियंस में व्यूज

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और काफी सर्च करने के बाद मुझे एक चैनल पर

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2ाई घंटे का पूरा सेमिनार मिला। मैंने

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पूरा सुना एक-एक लाइन। और अब मैं कह सकता

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हूं मैंने अभी तक जितने भी सेमिनार्स देखे

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हैं, स्पीचेस और टॉक्स देखे हैं, जिम रोन

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की ये स्पीच उनमें से वन ऑफ द बेस्ट एंड

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मोस्ट पावरफुल स्पीच लगी। क्योंकि जो सात

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प्रिंसिपल इन्होंने बताए हैं स्पीच में यह

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सच में आपकी लाइफ को खोल के रख देते हैं।

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और इसी के बाद ही मैंने डिसाइड किया कि

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मैं उनकी यह कीमती और शक्तिशाली बातें आप

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तक हिंदी में पहुंचाऊंगा। तो आधे घंटे का

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टाइम निकाल के ईयरफोन ले बैठ जाइए और मैं

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आपको रेकमेंड करूंगा आप साथ-साथ में नोट्स

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भी बनाते चलिए क्योंकि यह कोई फ्री

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मोटिवेशन नहीं है। यह प्रीमियम लाइफ

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एजुकेशन है। शुरू। नंबर वन वैल्यू। लाइफ

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का सबसे बड़ा सीक्रेट क्या है पता है?

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आपके पास जो कुछ भी है उससे ज्यादा हमेशा

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आपको मिल सकता है क्योंकि आप अभी जो हो

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[संगीत] उससे ज्यादा हमेशा बन सकते हो।

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यही है सीक्रेट और इस बात की दूसरी साइड

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भी है कि अगर आप वही रहते हो जो आज हो

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[संगीत] तो आपके पास हमेशा उतना ही रहेगा

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जितना आज है। मैंने अपने पर्सनल

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एक्सपीरियंस से अपनी और बाकी हजारों लोगों

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की लाइफ में एक बात क्लियरली देखी है कि

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इनकम कभी आप जो हो उससे ज्यादा नहीं होती।

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हो सकता है कभी लकीली आपके पास कहीं से

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एकदम से अचानक ज्यादा पैसे आ जाए। आप

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अचानक से मिलनेर बन जाओ। [संगीत] लेकिन

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याद रखना अगर आप अंदर से उस पैसे के लेवल

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के नहीं हो तो वो पैसा ज्यादा देर तक नहीं

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टिकेगा। वो निकलने की जगह ढूंढ ही लेगा।

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धीरे-धीरे वापस चला जाएगा। क्योंकि पैसा

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कभी भी आपसे ज्यादा पावरफुल नहीं होता।

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पैसा आपके पास उतना ही होता है जिस लेवल

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के आप हो। जैसे अगर इस दुनिया का सारा

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पैसा उठाकर सब लोगों में बराबर बांट दिया

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जाए तो कुछ ही टाइम में देखना वो सारा

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पैसा फिर से उन्हीं लोगों के पास वापस

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जाएगा जिनके पास आज है [संगीत] इनक्रेडिबल

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है ना क्योंकि पैसा, इज्जत, लड़की, पावर

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यह सब डेस्पिरेट लोगों को नहीं मिलता है

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जो पीसा करते हैं। यह चीजें अट्रैक्टिव

2:21

लोगों के पास खुद चलकर आती है। सक्सेस

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अट्रैक्ट करी जाती है। पीछे नहीं पड़ा

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जाता। अगर आप अपने बैंक बैलेंस और इनकम से

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खुश नहीं हो तो प्रॉब्लम किस्मत की नहीं

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है। प्रॉब्लम यह भी नहीं है कि आप मेहनत

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नहीं करते। प्रॉब्लम कहीं और है। मेरी

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लाइफ में एक टाइम पर मुझे एक बात बहुत

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परेशान करती थी कि दो लोग एक ही कंपनी में

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काम कर रहे हैं। सेम एज, सेम स्कूल से

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पढ़े हुए हैं। सेम सिटी, सेम ट्रैफिक से

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वो आते जाते हैं। सेम प्रॉब्लम्स हैं उनकी

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लेकिन एक महीने के $000 कमाता है और दूसरा

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$2000। यह बात मुझे कंफ्यूज करती थी।

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[संगीत] सब सेम था लेकिन इनकम डबल कैसे?

2:55

आखिर फर्क कहां है? पहले मुझे लगा कि शायद

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टाइम का फर्क होगा। लेकिन फिर समझ आया कि

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यार टाइम तो सबके पास बराबर होता है।

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दोनों के लिए रात के 12:00 बजे दिन खत्म

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होता है। जो लोग कहते हैं कि बस थोड़ा

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एक्स्ट्रा टाइम मिल जाए लेकिन एक्स्ट्रा

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टाइम कहीं नहीं मिलता भाई। तो जब टाइम

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बढ़ाया ही नहीं जा सकता तो वो क्या चीज है

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जो बढ़ा सकते हैं जो पूरा गेम ही बदल के

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रख दे। और अब मैं जो शब्द बोलने वाला हूं

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वो सबसेेंट है। वैल्यू [संगीत] रिजल्ट का

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फर्क वैल्यू से पड़ता है। वैल्यू ही

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डिसाइड करती है कि कोई आदमी एवरेज रहेगा

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या बहुत आगे निकल जाएगा। अब हम इसको गहराई

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से समझेंगे। ध्यान देना। देखो सक्सेस कोई

3:31

चीज नहीं है। जिसे तुम चस करोगे तो वह

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तुम्हें मिल जाएगी। सक्सेस अट्रैक्टिव

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लोगों के पास खुद चलकर सामने से आती है।

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और अट्रैक्टिव कैसे माना जाता है? खुद पे

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काम करके। खुद पर काम करना सीखो। क्योंकि

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काम पे मेहनत जिंदगी चलाती है और खुद पर

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मेहनत [संगीत] जिंदगी बनाती है। जब तक मैं

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अपनी जॉब पर मेहनत कर रहा था तब कुछ भी

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बदल नहीं रहा था। ना मैं ज्यादा पैसे कमा

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रहा था ना मेरे रिश्ते अच्छे थे। कुछ भी

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सही नहीं था। लेकिन जब मैंने अपने ऊपर काम

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करना शुरू किया तो सब बदलना शुरू हो गया।

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अगर आप कहीं जॉब कर रहे हो तो आपको यह

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नहीं सोचना चाहिए कि यार मुझे यहां कितनी

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सैलरी मिल रही है। असली सवाल यह होना

4:05

चाहिए कि मैं यहां काम करते-करते क्या बन

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रहा हूं। मैं यहां कितना कमा रहा हूं।

4:10

इससे ज्यादा इंपॉर्टेंट है मैं यहां क्या

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बन रहा हूं। क्योंकि आपका असली खजाना यही

4:14

छुपा है कि आप क्या बन रहे हो। क्योंकि

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देखो आप ज्यादा टाइम क्रिएट नहीं कर सकते

4:19

लेकिन ज्यादा वैल्यू जरूर क्रिएट कर सकते

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हो। और यही पैसे बनाने का सबसे बड़ा लेसन

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है जो हर इंसान को तब से सीखना चाहिए जब

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[संगीत] उसके हाथ में पहली बार पैसा आता

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है। याद रखना मार्केट में जो आप वैल्यू

4:30

लाते हो उसी के लिए आपको पेमेंट मिलती है।

4:33

आपको टाइम के लिए पैसा नहीं मिलता। बहुत

4:34

से लोगों को लगता है कि मैं यहां 8 घंटे

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काम करता हूं, 10 घंटे करता हूं तो मुझे

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टाइम के लिए मिलता है। लेकिन यह सच नहीं

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है। हां, आप जो काम कर रहे हो, जो वहां

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वैल्यू ला रहे हो, उसमें टाइम लगता है।

4:45

लेकिन पैसा वैल्यू का मिलता है, [संगीत]

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टाइम का नहीं। तो क्या यह पॉसिबल है कि आप

4:50

दो गुना ज्यादा वैल्यूुएबल बन जाओ और सेम

4:52

टाइम में दो गुना ज्यादा पैसा बना लो।

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क्या आप तीन गुना ज्यादा वैल्यूुएबल बन

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सकते हो? और तीन गुना इनकम बना सकते हो

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बिना एक्स्ट्रा टाइम के। जवाब है हां।

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क्योंकि याद रखना ज्यादा पैसा ऊंची सैलरी

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यह काम का या मेहनत का रिवॉर्ड नहीं होती।

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उस इंसान का रिवॉर्ड होती है। और आप

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मार्केट में तभी बेहतर कर सकते हो अगर आप

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सबसे पहले खुद पे काम करो। लेकिन दिक्कत

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यह है कि बहुत से लोग सक्सेसफुल बनना तो

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चाहते हैं लेकिन बेसिक चीजों पर काम ही

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नहीं करते। लोग अपनी हैंडशेक तक इंप्रूव

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नहीं करते। सोचो इतनी छोटी चीज से शुरू हो

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सकता है लेकिन लोग उसे भी इग्नोर कर देते

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हैं। अच्छी स्माइल, एवरेज लोगों से ज्यादा

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जोश, दूसरे लोगों में जेन्युइन इंटरेस्ट,

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जीतने की स्ट्रांग इंटेंसिटी। ये चीजें सब

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कुछ बदल सकती है। लेकिन लोगों को लगता है

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कि इन छोटी चीजों से क्या फर्क पड़ता है।

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लाइफ का सबसे फ्रस्टेटिंग एक्सपीरियंस

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क्या होता है पता है? खुद नॉर्मल रहना और

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जिंदगी से स्पेशल रिजल्ट मांगना। सोचो जरा

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आप खुद को अपग्रेड किए बिना बेटर जॉब

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चाहते हो, ज्यादा सैलरी चाहते हो,

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रिस्पेक्ट चाहते हो, कंफर्टेबल लाइफ चाहते

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हो और जब वो नहीं मिलता तो लगता है कि यार

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किस्मत खराब है, सिस्टम खराब है,

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अपॉर्चुनिटीज नहीं है। यही सबसे बड़ी

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फ्रस्ट्रेशन है जो आप में से कई लोगों ने

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फील की होगी। इसलिए याद रखना जिंदगी आपको

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उतना ही देगी जिस लेवल के आप खुद बने हो।

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मेरे मेंटर ने मुझे एक सबसे बड़ी सीख दी

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जिम अगर तू पूरी जिंदगी अमीर और खुश रहना

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चाहता है तो एक चीज सीख ले अपनी जॉब, अपने

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काम से ज्यादा खुद पर काम करना। अगर चीजें

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बदलनी है तो [संगीत] पहले तुम्हें बदलना

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पड़ेगा। यह वो जवाब था जो आप ही की तरह

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मैं सुनना नहीं चाहता था। लेकिन यही वो

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पावरफुल जवाब था जिसने मेरी लाइफ बदल के

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रख दी। [संगीत][प्रशंसा]

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आपकी भी बदलेगी क्योंकि आज आप बिल्कुल सही

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जगह आए हो। आगे हम बात करेंगे जिससे आपको

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पता चलेगा कि क्या गलत चल रहा है और क्या

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चेंज करना है और पूरी कोशिश करेंगे कि आज

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की शाम यह सेमिनार आपकी लाइफ का सबसे

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यादगार दिन बन जाए। नंबर टू ब्रह्मांड के

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कुछ नियम। देखो पूरी दुनिया पूरा यूनिवर्स

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कुछ नियमों पे चल रहा है। हर चीज के कुछ

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नियम है। अब हम अगर इस धरती पर पैदा हो गए

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हैं तो एक काम जरूरी है लाइफ के रूल्स को

6:53

समझना। हमने ये रूल्स नहीं बनाए। लेकिन हम

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जाने अनजाने में इन्हीं रूल्स के अगेंस्ट

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या इनके साथ काम कर रहे होते हैं। आपको

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उनके बारे में जानना ही चाहिए क्योंकि

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रीजन नंबर वन तुम नुकसान से बच सको। तुम

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पैसों से कंगाल लाइफ जी सकते हो हर दिन

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दुखी और हर्ट होते हुए सिर्फ इसलिए

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क्योंकि तुम्हें यह रूल्स पता ही नहीं थे।

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जैसे एक सिंपल एग्जांपल किसी बिल्डिंग की

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10वीं मंजिल से कूदना सही नहीं है। यह

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आपको पता है। और यह इंफॉर्मेशन बहुत काम

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की है। अब अगर कोई बोले यार लेकिन इस

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बेचारे को पता नहीं था। लाइफ बोलेगी मुझे

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फर्क नहीं पड़ता। इसे जानना चाहिए था।

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इसीलिए इस दुनिया में ना जानना कोई

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एक्सक्यूज नहीं होता। और दूसरा रीजन है

7:30

तुम लाइफ में अमेजिंग चीजों का लाभ ले

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सको। [संगीत] लाइफ में बहुत अमेजिंग चीजें

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इसलिए सीखो ताकि तुम इनका बेनिफिट ले सको।

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पहला नियम लॉ ऑफ यूज़। यह एक बेसिक लॉ है

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कि इस दुनिया में जो चीज यूज़ में नहीं आती

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है, वो खत्म हो जाती है। यानी यूज़ इट और

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लूज़ इट। एग्जांपल अगर आप अपना हाथ अपनी

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बॉडी से बांध दो, काफी टाइम तक उसका यूज़

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ही ना करो, हाथ [संगीत] डेड हो जाएगा। हाथ

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रहेगा लेकिन काम का नहीं रहेगा। और यह रूल

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सिर्फ बॉडी के लिए नहीं है। सब जगह है।

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अपना टैलेंट यूज नहीं किया कम होता जाएगा।

8:00

स्ट्रांग इमोशंस यूज नहीं किए धीरे-धीरे

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मर जाएंगे। एनर्जी यूज़ नहीं की खत्म हो

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जाएगी। आज का दिन यूज [संगीत] नहीं किया

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वो भी गया। कल नहीं किया कल भी जाएगा। और

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इसके ऊपर एक प्राचीन और पावरफुल स्टोरी

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है। सुनना आपको सब समझ आ जाएगा। एक मास्टर

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होता है उसके पास कुछ सोने के बिस्किट

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होते हैं। एक दिन मास्टर अपने तीन

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सर्वेंट्स को बुलाता है और कहता है मैं

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कुछ टाइम के लिए बाहर जा रहा हूं। तो मैं

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तुम्हें कुछ गोल्ड के बिस्किट्स देकर जा

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रहा हूं। जब मैं वापस आऊंगा तो हम देखेंगे

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कि तुमने इनका क्या किया। पहले सर्वेंट को

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पांच देता है। दूसरे को दो और तीसरे

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सर्वेंट को भी दो बिस्किट्स देता है। फिर

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मास्टर चला जाता है। पहला सर्वेंट उसने

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पांच बिस्किट्स को यूज़ किया। उसने रिस्क

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लिया। उनको काम में लगाया। फेल हुआ, सीखा

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और करता रहा और धीरे-धीरे टाइम के साथ वो

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पांच से छ, छ से आठ और 10 बिस्किट्स में

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बदल गए। कुछ टाइम बाद मास्टर वापस आता है

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तो वह कहता है मास्टर जो पांच बिस्किट्स

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आपने मुझे दिए थे मैंने उन्हें यूज किया

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और आज वह डबल हो गए तो वह मास्टर खुश हो

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जाता है कहता है बहुत अच्छा दूसरा सर्वेंट

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इसके पास भी दो थे लेकिन इसने भी वही किया

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और उसके भी दो से चार हुए मास्टर उसे भी

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शाबाशी देता है अब तीसरा सर्वेंट इसको भी

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दो मिले थे लेकिन इसके दिमाग में गेम शुरू

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हो गया उसने सोचा अगर यह खो गए तो क्या

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होगा अगर फेल हो गया तो मेरे पास कम है

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रिस्क लेना बेकार है और इसलिए उसने उसको

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कपड़े कपड़े में लपेटा और जमीन में गड्ढा

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खोदा और दबा दिया ताकि सेफ रहे खो ना जाए।

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और अब वो सर्वेंट कहता है मास्टर आपने जो

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मुझे दो बिस्किट दिए थे वह मैंने संभाल के

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रखे। यह लीजिए देखिए जो दिया था वही वापस

9:28

ले आया हूं। मैंने कुछ भी नहीं खोया। तो

9:30

मास्टर कहता है तुमने कुछ खोया नहीं लेकिन

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तुमने कुछ बनाया भी नहीं। और फिर मास्टर

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इस आदमी से वह बिस्किट्स लेके जिसके पास

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10 होते हैं उसको दे देता है। कुछ लोग

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कहेंगे यह सही नहीं है। उसके पास तो पहले

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से ही 10 है। लेकिन याद रखो लाइफ ऐसे ही

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काम करती है। जो चीज तुम यूज नहीं करते वो

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धीरे-धीरे तुमसे छीन ली जाती है। इसीलिए

9:50

आज ही चेक करो तुम्हारा टैलेंट यूज हो रहा

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है या नहीं। तुम्हारी एबिलिटी यूज हो रही

9:55

है या नहीं। जो यूज नहीं हो रहा है वो तुम

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लूज कर रहे हो। आज तुम्हारे पास जो कुछ भी

10:01

है थोड़ा है ज्यादा है या बहुत कम उसे यूज

10:04

करो। दो गुना 10 गुना 100 गुना कर दो।

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नहीं तो कल वो भी नहीं रहेगा। सेकंड लॉ

10:09

बीज और फसल का नियम। यह नियम हमने बचपन से

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सुना है। जो बोया जाता है वही काटा जाता

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है। बहुत सिंपल, बहुत क्लियर। राइट? और यह

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मुझे भी पता था लेकिन मेरी लाइफ में कुछ

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भी नहीं बदला। फिर मेरे मेंटर ने एक बात

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बोली जिसने पूरा गेम क्लियर कर दिया।

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उन्होंने कहा इस लॉ को उल्टा पढ़ के देखो।

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यानी जो बोया जाता है वही काटा जाता है।

10:29

इसको जो काटा जा रहा है वही बोया गया था।

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और बस मेरी आंखें खुल गई। लाइफ के पास

10:35

आपको देने के लिए सिर्फ स्ट्रगल्स ही नहीं

10:37

है। गरीबी कोई रूल नहीं है कि यहां तुम

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गरीब रहने के लिए ही पैदा हुए हो। जिंदगी

10:42

के पास अमेजिंग चीजें हैं हमें देने को।

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आप बहुत अमीर हो सकते हो। यह कोई मोटिवेशन

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नहीं है। यह फैक्ट है। इस दुनिया में बहुत

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सारा पैसा कमाना पॉसिबल है। हर चीज का मजा

10:52

लेना पॉसिबल है। यह क्वालिटी लाइफ पॉसिबल

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है। सवाल पॉसिबल है या नहीं इसका नहीं है।

10:56

सवाल चॉइस का है। तो आप बोलोगे कि यार

10:59

ज्यादातर लोग फिर रिच क्यों नहीं बनते?

11:01

असली जवाब है कि लोग बेसिक रूल्स ही नहीं

11:03

समझना चाहते। लोग बोना स्किप करके सिर्फ

11:05

काटना चाहते। बोलते हैं पैसा नहीं आ रहा

11:08

है। लाइफ अनफेयर है, लाइफ में प्रॉब्लम्स

11:10

है। पर यह नहीं देखते कि वह रोज बीज क्या

11:13

बो रहे हैं। देखो आज प्रॉब्लम यह नहीं है

11:14

कि टाइम कम है। प्रॉब्लम यह है कि टाइम

11:17

टीवी और डिस्ट्रक्शंस में जा रहा है।

11:19

मैंने एक इंसान को पूछा कि तुम्हारा टीवी

11:21

कितने में पड़ा? तो वो बोलता है $450। तो

11:24

मैंने बोला गलत। तुमने सही प्राइस टैग

11:26

नहीं देखा। बोला क्या मतलब? मैंने कहा

11:29

टीवी खरीदना सस्ता है लेकिन उसे देखना

11:31

बहुत महंगा। मेरे हिसाब से यह टीवी

11:34

तुम्हें साल के $12,000 खर्च करवा रहा है।

11:36

वो बंदा हैरान? मैंने बोला टीवी पैसे से

11:39

नहीं टाइम से महंगा होता है। टीवी जेब से

11:41

नहीं जिंदगी से पेमेंट लेता है। टाइम नाम

11:44

का। $450 एक बार गए पर जो रोज के 3-4 घंटे

11:48

टीवी ले जाता है साल के हजार प्लस घंटे वो

11:51

घंटे स्किल्स बन सकते थे। वो अपनी वैल्यू

11:53

बढ़ाने में लग सकती थी। वह घंटे इनकम बना

11:55

सकते थे। फ्यूचर सेट कर सकते थे। आराम से

11:58

हजारों डॉलर बन सकते थे।

12:00

[संगीत]

12:00

लेकिन टीवी ने उन्हें खा लिया। देखो थोड़ा

12:03

बहुत टीवी देखना डिस्ट्रैक्ट होना कोई

12:04

बुरी बात नहीं है। लेकिन $2,000 साल के

12:07

देना सिर्फ टीवी देखने के लिए डिस्ट्रैक्ट

12:09

होने के लिए यह बहुत महंगा है। जो चीज

12:12

फ्री लगती है वह अक्सर [संगीत] सबसे महंगी

12:14

होती है। हो सकता है पैसे नहीं ले लेकिन

12:16

आपकी लाइफ और आपके फ्यूचर को खा जाती है।

12:19

और इसका स्यूशन नंबर तीन गोल सेटिंग। अब

12:22

हम बात करेंगे मेरे सबसे फेवरेट टॉपिक के

12:24

बारे में गोल सेटिंग। जब मैं 25 साल का था

12:27

तब मैं एक ऐसे इंसान से मिला जिन्होंने

12:29

मुझे गोल सेट करने का एक ऐसा तरीका सिखाया

12:31

जो मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग

12:33

पॉइंट बना। यही वजह है कि ज्यादातर लोग

12:36

पूरी जिंदगी बिजी तो रहते हैं मेहनत तो

12:38

करते हैं लेकिन कहीं पहुंच नहीं पाते

12:40

लेकिन मेरी किस्मत अच्छी थी कि 25 की ऐज

12:42

में मुझे वो इंसान मिला जिसने मुझे यह

12:44

स्किल सिखाई जिसने मेरी पूरी जिंदगी बदल

12:47

दी। एक सुबह ब्रेकफास्ट पे उन्होंने मुझे

12:48

पूछा कि जिम अपनी करंट गोल लिस्ट दिखाओ।

12:51

मैंने कहा सर मेरे पास कोई लिस्ट नहीं है।

12:53

तब उन्होंने कहा यहीं से प्रॉब्लम शुरू

12:55

होती है। और फिर उन्होंने एक लाइन बोली

12:57

जिसने मुझे हिला दिया। अगर तुम्हारे पास

12:59

गोल्स की लिस्ट नहीं है तो मैं तुम्हारा

13:01

बैंक बैलेंस आराम से गेस कर सकता हूं। और

13:04

पता है उन्होंने बिल्कुल सही गेस किया। तो

13:06

मैंने तुरंत पूछा सर क्या सिर्फ गोल्स

13:08

लिखने से मेरा बैंक बैलेंस बदल जाएगा?

13:10

उनका जवाब था बिल्कुल 100%। उस दिन के बाद

13:14

मैंने वही किया और रिजल्ट जो उन्होंने कहा

13:17

था वही हुआ। मेरी पूरी जिंदगी पलट गई।

13:19

इकोनॉमिकली, सोशली, पर्सनली, हायर लेवल पर

13:23

और मुझे [संगीत] आज तक यह बात समझ में

13:24

नहीं आई कि यार मैं 25 साल का हो गया था,

13:27

स्कूल गया, कॉलेज गया, जॉब की, शादी हो

13:29

चुकी थी। मेरी फैमिली थी। लेकिन यह एक चीज

13:32

कैसे छूट गई? तो इसलिए यह चीज मैं आज आपको

13:35

भी [संगीत] सिखाऊंगा। क्योंकि यह एक चीज

13:37

आपकी पूरी लाइफ को 180° पलट सकती है। इसके

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दो पार्ट है। नंबर वन, एक वजह और नंबर टू

13:43

है गोल्स सेट कैसे करें। नंबर वन उन्होंने

13:46

मुझे एक लाइन बोली कि जिम अगर तुम्हारे

13:48

पास एक वजह हो ना तो तुम इंपॉसिबल लगने

13:51

वाली चीजें भी कर सकते हो। बस वही लाइन

13:53

मेरे लिए गेम चेंजर थी। तुम्हारे पास

13:55

इंटेलिजेंस भी है, टैलेंट भी है। तुम

13:57

मेहनत भी कर लोगे, एबिलिटी भी है,

13:59

रिसोर्सेज है, सब कुछ है। प्रॉब्लम यह

14:02

नहीं है। प्रॉब्लम यह है कि तुम्हारे पास

14:04

एक स्ट्रांग रीजन नहीं है। याद रखना,

14:06

तुम्हारा बैंक [संगीत] बैलेंस तुम्हारी

14:07

इंटेलिजेंस का असली मेजर नहीं है। तुम

14:09

अपने बैंक बैलेंस से काफी ज्यादा स्मार्ट

14:11

हो। आपका सवाल होगा फिर ज्यादा पैसा क्यों

14:14

नहीं है? जवाब है रीजन बड़ा नहीं है। जब

14:17

तक रीज़ंस नहीं मिलते, लाइफ आपको रास्ता

14:19

नहीं दिखाती। रास्ता सिर्फ उन्हीं लोगों

14:21

को दिखाती है जो स्ट्रांग रीज़ंस लेके आते

14:23

हैं। तो अब देखते हैं कि आप किस चीज को

14:25

रीजन बना सकते हैं। नंबर वन पर्सनल रीज़ंस।

14:28

कुछ लोग होते हैं जो रिकॉग्निशन के लिए

14:30

मेहनत करते हैं। कुछ लोग रिस्पेक्ट के लिए

14:32

करते हैं। कुछ सिर्फ इस फीलिंग के लिए कि

14:34

मैं एक विनर हूं। यह सब अच्छे रीज़ंस हैं।

14:36

मेरे कुछ मिलनेियर दोस्त हैं। वो आज भी

14:38

10-12 घंटे काम करते हैं। उनको पैसा नहीं

14:40

चाहिए लेकिन जीतने का मजा चाहिए। यह भी एक

14:43

रीजन हो सकता है। नंबर टू, फैमिली रीजंस।

14:46

हम इंसान एक दूसरे से काफी गहराई से जुड़े

14:48

होते हैं। कभी-कभी हम जो अपने लिए नहीं

14:50

करते, वह किसी और के लिए कर देते हैं। मैं

14:52

एक आदमी से मिला था। उसने कहा मिस्टर रॉन

14:55

अगर मुझे अपनी फैमिली के साथ दुनिया घूमनी

14:57

है तो मुझे कम से कम $.5 लाख हर साल

15:00

चाहिए। मैंने सोचा वाओ खुद की फैमिली किसी

15:02

को इतना पुश कर सकती है। कितने लकी होते

15:05

हैं वह लोग जिनको कोई इतना इंस्पायर करता

15:07

है कि वह लोग अपनी लिमिट्स तोड़ देते हैं

15:09

और एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी काम कर जाते हैं।

15:11

नंबर थ्री एंड सबसे पावरफुल एंड्र्यू

15:13

कॉर्न की डेथ के बाद जब उनकी डेस्क खोली

15:15

गई तो उसमें एक स्लिप मिली और उस पर उनका

15:18

लाइफ गोल लिखा हुआ था और वो गोल उन्होंने

15:20

अपने 20ज में लिखा था। उस पर लिखा था मैं

15:22

अपनी लाइफ का पहला हाफ पैसा कमाने में

15:24

लगूंगा और दूसरा हाफ उन सारे पैसों को

15:27

जरूरतमंदों को वापस देने में। और इस गोल

15:29

इस रीजन से वह इतना इंस्पायर्ड हुए कि वह

15:31

दुनिया के सबसे अमीर इंसान बन गए। और फिर

15:34

लाइफ के दूसरे हाफ में उन्होंने सब कुछ

15:36

दान कर दिया। इनक्रेडिबल। है ना? यह सबसे

15:39

पावरफुल रीज़न है अनजान लोगों के लिए कुछ

15:42

करना। अब आपसे एक सवाल तुम्हें कौन सी चीज

15:45

इतना एक्साइटेड करती है कि तुम सुबह जल्दी

15:47

उठ जाओ। रात के लेट तक काम करो और पूरा

15:49

दिन लगे रहो। कौन सी वो चीज है जो तुम्हें

15:52

पूरी तरह से पैशनेट कर दे? जिस दिन मुझे

15:54

इसका जवाब मिला, मेरी लाइफ एक्सप्लोर कर

15:57

गई। मैंने अपने लिए रीज़ंस की एक लंबी

15:59

लिस्ट बना ली जो मुझे रोज वो करवाए जो

16:01

जरूरी है। जो मुझे आलस ना करने दे, जो

16:04

मुझे टाइम पास टाइम वेस्ट ना करने दे और

16:06

इस तरह वो चिंगारी 25 की उम्र में जली जो

16:09

आज तक नहीं बुझी। रीज़ंस ने मेरी लाइफ बदल

16:12

दी। अब मैं आपको अपनी दो घटनाएं बताऊंगा।

16:14

इससे तुम्हें और क्लेरिटी मिलेगी। नंबर

16:17

वन, मेरी पर्सनल स्टोरी। कि कैसे एक छोटी

16:19

चीज मेरा बड़ा रीजन बनी जिसकी वजह से

16:21

मैंने करोड़ों डॉलर कमा लिए। बात उस वक्त

16:24

की है जब मेरा टाइम बहुत खराब चल रहा था।

16:26

बहुत सारे लोन थे, कई बिल्स पे करने थे।

16:28

तो मैंने सोचा कि एक काम करते हैं कि एक

16:31

साथ बड़ा लोन ले लेते हैं। और सारे बिल्स

16:33

और लोन को एक साथ कर देते हैं। फिर

16:35

बस यह एक बड़ा लोन ही रहेगा। तो मैंने ऐसा

16:38

ही किया। थोड़े टाइम के लिए मुझे अच्छा

16:39

लगा कि बस अब एक ही लोन है। लेकिन दिक्कत

16:42

यह थी कि अब वो बड़ा लोन करना

16:44

इंपॉसिबल बन गया था। और फिर शुरू हुआ

16:46

मेंटल टेरर। एक आदमी था दिन रात फोन करता

16:49

था। सुबह कॉल, शाम को कॉल, रात को सोते

16:52

टाइम कॉल और हर कॉल पे धमकी कि कोर्ट ले

16:55

जाएंगे, क्रेडिट बर्बाद कर देंगे, गाड़ी

16:57

पड़ोसियों के सामने घसीट के ले जाएंगे,

16:59

सबके सामने तुझे और तेरी फैमिली को

17:00

बेइज्जत कर देंगे। और सच बोलूं तो उस वक्त

17:03

मैं कुछ बोल भी नहीं पाता था। बिकॉज़ मैं

17:05

कंगाल था। क्या बोलूं? लेकिन मैं यह बातें

17:08

भूला नहीं था। फिर लाइफ ने यू टर्न लिया।

17:10

मैंने खुद पे काम किया, पैसा आना शुरू हुआ

17:12

और जैसे ही बहुत सारा पैसा आना शुरू हुआ,

17:14

मेरी लिस्ट का पहला टारगेट वही इंसान था।

17:17

मैंने एक दिन बैठकर हिसाब किया और उसका

17:19

जितना भी पैसा बनता था सारा इकट्ठा किया

17:22

और एक बड़ा सूटकेस भरा और सीधा चला गया

17:24

उसके ऑफिस सीधा उसके डेस्क तक जो मुझे

17:27

जलील करता था सूटकेस खोला पूरा पैसा उसकी

17:30

टेबल पर खाली किया और सिर्फ इतना कहा गिन

17:33

लो मैं अब दोबारा इस घटिया जगह नहीं आने

17:35

वाला वो शॉक्ड कुछ भी नहीं बोल पाया और

17:37

मैं बिना पीछे देखे बाहर निकल आया यह

17:39

व्यवहार सही नहीं है आई नो पर एक बात

17:42

पक्की है यह करना जरूरी था कभी-कभी जिंदगी

17:45

में सिर्फ पैसे नहीं चुकाने होते अपनी

17:46

इज्जत भी वापस लेनी होती है। अगर तुमने

17:49

कभी अपनी इज्जत टूटते हुए देखी है तो उसको

17:51

वेस्ट मत जाने दो। ऐसे मोमेंट्स पूरी

17:53

जिंदगी की डायरेक्शन बदल सकते हैं। बस अगर

17:56

हम उसे स्ट्रांग रीजन बना दें तो। दूसरी

17:58

कहानी है मेरे एक फ्रेंड की। मेरा एक बहुत

18:00

अच्छा दोस्त था और वो एक स्कूल टीचर था।

18:02

उसने काफी साल टीचिंग की थी। अच्छा काम

18:05

रेस्पेक्टेबल जॉब। लेकिन सच यह था कि वो

18:07

यह करते-करते थक चुका था। तो एक दिन उसने

18:10

डिसाइड किया कि बस अब और नहीं। मुझे सेल्स

18:12

में जाना है और बहुत अमीर बनना है। और

18:15

हिम्मत तो देखो। बिना किसी स्ट्रांग रीजन

18:17

के, बिना किसी को बताए सीधा अपनी जॉब

18:19

छोड़ी और सेल्स में कूद गया। तो सबसे पहले

18:22

उसके अपने ही लोग हंसते हैं। जैसे ही उसने

18:24

जॉब छोड़ी, उसके भाई ने उसका मजाक उड़ाना

18:27

शुरू किया। पागल हो गया है। सेल्स और तू

18:29

एक जॉब थी वह भी गई। अब करेगा क्या? उसके

18:32

भाई ने उस बेचारे को पूरी ताकत से नीचा

18:34

दिखाया। और उसने बाद में मुझे बताया कि

18:36

जिस दिन मेरे भाई ने मुझे नीचा दिखाया ना

18:38

उस दिन मुझे इतना गुस्सा आया कि मैंने इसे

18:40

ही अपना स्ट्रांग रीजन बना दिया। मैंने

18:42

डिसाइड कर लिया कि अब मैं अमीर बन के

18:44

दिखाऊंगा। और आज वो बंदा रॉबर्ट ड्यू मेरे

18:47

मिलनेर दोस्तों में से एक है। [प्रशंसा]

18:53

द बिगेस्ट ड्यूवेंज इज मैसिव सक्सेस। बदला

18:56

लेने के लिए ना चिल्लाना पड़ता है, ना

18:58

लड़ना पड़ता है। बस इतना सक्सेसफुल बन जाओ

19:00

कि उन लोगों के मुंह बंद हो जाए। आज मैं

19:03

तुमसे एक सवाल पूछता हूं। क्या तुम इतना

19:05

गुस्सा हो सकते हो कि अपनी जिंदगी बदल दो?

19:07

लोग समझते हो कि पैसा इंटेलिजेंस का गेम

19:09

है? नहीं, वेल्थ या पैसा इंटेलिजेंस

19:12

[संगीत] का नहीं, इंस्पिरेशन का गेम है।

19:14

अपने रीज़ंस की लिस्ट इतनी लंबी बनाओ कि

19:16

तुम्हें कभी मोटिवेशन की जरूरत ही ना

19:18

पड़े। लाइफ को बदलने के लिए ना ज्यादा

19:19

ज्ञान चाहिए, ना परफेक्ट प्लान बस एक ऐसा

19:22

रीजन चाहिए जो तुम्हें अंदर से हिला दे।

19:25

क्योंकि जब रीजन स्ट्रांग होते हैं ना तो

19:27

डिसिप्लिन, मेहनत, कंसिस्टेंसी सब अपने आप

19:30

पीछे पीछे आ जाते हैं। फेडरिक नीचे ने कहा

19:32

है कि अगर आपको अपना क्यों पता है तो आप

19:34

किसी भी कैसे को सहन कर सकते हो। इसलिए

19:36

आपकी लाइफ का रिजल्ट इस बात पर डिपेंड

19:38

करता है कि आपके पास कितने स्ट्रांग रीज़ंस

19:41

हैं। हो सकता है अभी तुम्हें कुछ भी

19:42

क्लियर ना हो कि मैं क्या करूं। लेकिन

19:45

डोंट वरी जैसे ही आप अपनी रीज़ंस की लिस्ट

19:47

बनाओगे, छोटे-छोटे एकशंस लेना शुरू करोगे,

19:50

रास्ता दिखता जाएगा। सारे जवाब आते

19:52

जाएंगे। गोल सेट कैसे करें? मैंने कैसे

19:55

किए? सबसे पहले आपको प्लान करने हैं अपने

19:58

लॉन्ग रेंज गोल्स। यह तुम्हारे ड्रीम्स

20:00

होते हैं 2 साल, 3 साल, 5 साल के।

20:03

तुम्हारे लिए, तुम्हारी फैमिली के लिए।

20:05

कहां जाना है, क्या बनना है, क्या देखना

20:07

है, कैसी लाइफ जीनी है, प्यार के सपने,

20:09

फ्रीडम के सपने, ट्रैवल के सपने जो भी मन

20:12

में है लिख डालो और टाइम टू टाइम देखते

20:15

रहो। अब इनको अचीव करने के लिए मैंने

20:17

गोल्स को तीन कैटेगरी में डिवाइड करा है।

20:19

कैटेगरी नंबर वन इकोनॉमिक गोल्स। पैसा हर

20:22

इंसान की लाइफ में मेजर रोल प्ले करता है।

20:24

इसलिए इसे डिटेल में प्लान करो। हर महीने

20:26

हर साल तुम्हें कितना कमाना है। अगर कल

20:28

तुम किसी से पूछो कि बताओ इस साल एग्जैक्ट

20:31

तुम्हें कितना कमाना है? तो वो क्या

20:32

बोलेगा पता है? क्या बक रहे हो? लेकिन

20:34

सक्सेस का सिंपल डेफिनेशन है जो एवरेज लोग

20:37

नहीं करते हैं वो करना। फेलियर्स

20:39

इकोनॉमिक्स को प्लान नहीं करते इसलिए वह

20:41

फेल रहते हैं। विनर्स इकोनॉमिक्स को डिटेल

20:43

में प्लान करते हैं। इसलिए वो टॉप 5% में

20:46

आ जाते हैं। और गुड न्यूज़ यह है कि मुझे

20:48

सुन रहा कोई भी बंदा टॉप 5% जॉइ कर सकता

20:51

है। अगर वो चाहे कोई स्पेशल इंटेलिजेंस

20:54

नहीं चाहिए। कोई लक नहीं चाहिए। टैलेंट

20:56

नहीं चाहिए। सिर्फ एक चीज चाहिए

20:58

इकोनॉमिक्स को सीरियसली प्लान करना। बस

21:01

सेकंड कैटेगरी [संगीत] थिंग्स चीजें।

21:03

इसमें तुम उन सब चीजों की लिस्ट बनाओ जो

21:06

तुम चाहते हो। मैं अपनी लिस्ट में छोटी

21:08

चीजें भी रखता हूं और बड़ी चीजें भी।

21:10

क्यों? क्योंकि लिस्ट बनाने का एक बड़ा

21:12

मजा होता है। कंप्लीट करते जाओ, चेक मार्क

21:14

लगाते जाओ। आप सोच के देखो। हर दिन हर

21:17

हफ्ते तुम लिस्ट देखो और बोलो गॉट इट, गॉट

21:20

इट, गॉट इट। चाहा और उसे कंप्लीट किया। और

21:23

यह सच में जादू की तरह काम करता है। आगे

21:25

हम सब समझने वाले हैं कि कैसे यूनिवर्स

21:28

तुम तक वो पहुंचाता है जो तुम इससे मांगते

21:30

हो। तो इस तरह अपनी लिस्ट को भर दो उन सब

21:33

चीजों से जो तुम चाहते हो। तीसरी और

21:35

मोस्टेंट कैटेगरी पर्सनल डेवलपमेंट। यही

21:38

वो चीज है जो आपके ड्रीम्स, आपकी चीजों की

21:41

लिस्ट और आप कितना पैसा कमाओगे उसको पूरा

21:44

करती है। इसमें तुम हर दिन गोल सेट करते

21:46

हो खुद को बेटर बनाने के लिए। कल के

21:48

गोल्स, इस वीक के, इस मंथ के, इस साल के

21:51

गोल्स और इन्हें बोला जाता है कॉन्फिडेंस

21:53

बिल्डर्स। जब तुम छोटा गोल सेट करते हो,

21:56

मेहनत करते हो, उसे अचीव कर लेते हो, तो

21:58

तुम्हारा कॉन्फिडेंस ग्रो होता है और यह

22:00

कॉन्फिडेंस ही तुम्हें बड़े सपनों के लिए

22:02

रेडी करता है। जैसे स्ट्रांग बनना, पब्लिक

22:04

स्पीकिंग सीखना, मेंटली स्ट्रांग होना,

22:06

लीडरशिप स्किल्स सीखना, नई लैंग्वेज सीखना

22:09

या जो भी आपका काम है उससे रिलेटेड

22:11

स्किल्स। यानी वही चीज जिसकी हमने पहले

22:13

बात की थी खुद पे काम करना, खुद को

22:16

वैल्यूुएबल बनाना। यही चीज पैसा और सक्सेस

22:18

अट्रैक्ट करती है। और इसमें एक और

22:20

इंपॉर्टेंट बात जो चीज तुमने अपने से वादा

22:22

किया और फिर वह आपने पूरी की तो सेलिब्रेट

22:25

इट। खुश हो जाओ थोड़ा चिल करो। क्योंकि हम

22:28

इंसान सिर्फ दो एक्सपीरियंसेस से ग्रो

22:30

करते हैं। पेन ऑफ लूजिंग यानी हारने का

22:32

दर्द और जॉय ऑफ विनिंग यानी जीतने का

22:35

आनंद। और इन दोनों को जितना हो सके

22:36

एम्प्लीफाई करो। लूजिंग को पेनफुल बनाओ।

22:39

अगर तुमने कोई गोल सेट किया और फिर उसके

22:41

साथ टाइम पास किया सीरियस नहीं रहे तो खुद

22:44

को फील करवाओ कि यह गलत हुआ। और दोबारा

22:46

दुगुनी मेहनत के साथ लग जाओ। आपने देखा

22:49

होगा कि कुछ लोग इतनी बेकार लाइफ जीते हैं

22:51

कि दिन के एंड में उन्हें पता ही नहीं

22:53

होता कि आज मैंने किया क्या है। मैं जीता

22:55

या हारा उनको कोई क्लू नहीं होता। यह लोग

22:58

बस दिन काट रहे होते हैं। लाइफ जीने का यह

23:00

सबसे बेकार तरीका है। और आप ऐसे नहीं

23:02

जिओगे क्योंकि अब आपके पास हर वक्त काम

23:05

करने के लिए पूरा पैकेज [संगीत] है। नंबर

23:06

वन इकोनॉमिक्स, नंबर टू थिंग्स एंड नंबर

23:09

थ्री पर्सनल डेवलपमेंट। इन तीनों पर काम

23:12

करो कल के लिए, इस वीक के लिए, [संगीत] इस

23:14

मंथ के लिए, इस ईयर के लिए और लॉन्ग रेंज

23:17

के लिए। बस इतना कर दो आपकी लाइफ चलना

23:19

शुरू कर देगी। और गोल सेटिंग में एक और

23:21

आखिरी बात इसके बाद हम लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन पे

23:24

बात करेंगे कि गोल्स की साइज तुम्हें

23:26

अफेक्ट करती है। और इसलिए चेक करो कि

23:28

तुम्हारे गोल्स कितने बड़े हैं। कुछ लोगों

23:30

के पास गोल्स होते हैं लेकिन इतने छोटे

23:32

होते हैं कि उनको कोई फर्क ही नहीं पड़ता।

23:33

एक आदमी ने मुझे बोला कि इस महीने मेरा

23:35

गोल यह है कि किसी तरह इन फालतू बिल्स के

23:38

पैसे भर दो। गोल है लेकिन बहुत घटिया गोल।

23:41

इस गोल के साथ तुम मंडे सुबह उठकर यह नहीं

23:43

बोलते वाओ आज का दिन क्या दिन है। मैं आज

23:46

अपने बिल्स चुकाने वाला हूं। नहीं तुम

23:48

बोलते [संगीत] हो ओह शिट मंडे फिर से आ

23:50

गया। सच में कुछ लोग लाइफ से इतना थक चुके

23:53

होते हैं कि वो बस फ्राइडे नाइट का वेट

23:55

करते हैं। यह वही लोग होते हैं जो बस लाइफ

23:57

को काट रहे होते हैं। जो एंड में बोलेंगे

23:59

थैंक गॉड यह लाइफ खत्म हुई। नंबर फोर लॉ

24:02

ऑफ अट्रैक्शन। अब मैं तुम्हें एक फिलॉसफी

24:05

बताता हूं जो सिखाती है कि लाइफ में जो

24:07

चाहो वो कैसे पाया जा सकता है। और इसका

24:09

फार्मूला क्या है? सिर्फ एक शब्द आस्क

24:13

मांगो। बस अगर लाइफ में एक कला है जो बहुत

24:16

अच्छे से सीखनी चाहिए तो वो है द आर्ट ऑफ

24:19

आस्किंग। [संगीत] मांगने या चाहने की कला।

24:22

क्योंकि इस यूनिवर्स में आपको देने के लिए

24:24

अनलिमिटेड है। सवाल यह नहीं कि आपको

24:26

मिलेगा या नहीं। सवाल यह है कि आप कितना

24:29

चाहते हैं। तो चाहने और उसे पाने के तीन

24:31

पावरफुल रूल्स। रूल नंबर वन मिलने की

24:34

शुरुआत मांगने से होती [संगीत] है। जैसे

24:36

ही आप कुछ चाहते हो और फिर उसे मांगते हो

24:38

तो एक अजीब सी प्रोसेस शुरू हो जाती है।

24:40

मेंटल भी और फिजिकल भी। मैं ऑनेस्टली नहीं

24:43

जानता कि यह कैसे काम करता है। बस इतना

24:46

जानता हूं कि यह [संगीत] 100% काम करता

24:48

है। देखो जिंदगी में बहुत सी ऐसी चीजें

24:50

होती है जिनके कैसे को समझना जरूरी नहीं

24:52

होता है कि यार यह कैसे होगा, कहां से

24:55

होगा। बस उस शक्ति का फायदा उठाना होता

24:57

है। बहुत सारे लोग हमेशा पेड़ की जड़ों को

24:59

समझते रह जाते हैं और कुछ लोग सीधा फल

25:02

तोड़ के खा [संगीत] लेते हैं। चॉइस

25:03

तुम्हारी है। रूल नंबर टू मिलना प्रॉब्लम

25:06

नहीं है। मिलना तो है ही चाहे कैसे भी

25:08

मिले। तो प्रॉब्लम क्या है? प्रॉब्लम है

25:10

लोग मांगते ही नहीं है। हो सकता है तुम

25:12

पूरे साल काम करते हो, मेहनत करते हो

25:15

लेकिन तुम्हें लाइफ से एक्चुअल में क्या

25:16

चाहिए वो तुमने कहीं भी लिख नहीं रखा है।

25:18

क्यों? [संगीत] रूल नंबर थ्री। लोगों को

25:20

लगता है कि इस यूनिवर्स में सब कुछ

25:22

लिमिटेड है लेकिन सक्सेस लिमिटेड नहीं है।

25:24

ऐसा नहीं है कि यह इरेशन की तरह बांटी जा

25:27

रही है और तुम जब टाइम पर नहीं पहुंचे तो

25:29

वो खत्म हो जाएगी। इस दुनिया में सब कुछ

25:31

प्रचुर मात्रा में है। बिल्कुल समंदर जैसा

25:34

है। [संगीत] प्रॉब्लम क्या है? लोग समंदर

25:35

के पास चम्मच लेके जाते हैं। समझ रहे हो?

25:38

और इस यूनिवर्स से मांगने का सही तरीका।

25:40

पहली [संगीत] बात आस्क विद इंटेलिजेंस।

25:42

मतलब घुमा फिरा के मत बोलो। क्लियर बोलो।

25:45

स्पेसिफिक बोलो। कितना, [संगीत]

25:47

कब, कैसे, किस कलर का, कितना जल्दी लिखो

25:50

और डिफाइन करो, डिस्क्राइब करो। क्योंकि

25:52

गोल्स मैग्नेट जैसे होते हैं, वह तुम्हें

25:54

अपनी तरफ खींचने लगते [संगीत] हैं। और

25:56

जितनी क्लियरली तुम उन्हें डिफाइन करोगे,

25:58

उतनी ही ज्यादा ताकत से वो तुम्हें खींच

26:00

लेंगे। दूसरी बात आस्क [संगीत] विद फेथ।

26:03

बच्चों जैसा बिलीव करो कि वह तुम्हें

26:04

मिलेगा और उम्र में बड़े लोग यहीं पर फेल

26:07

होते हैं। वह बहुत ज्यादा स्केप्टिकल होते

26:09

हैं। यानी बहुत ज्यादा डाउट करते हैं।

26:11

इसलिए बेस्ट फार्मूला यह है कि प्लान

26:13

बड़ों जैसा बनाओ लेकिन विश्वास बच्चों

26:15

जैसा और फिर देखना कैसे कमाल के रिजल्ट्स

26:17

मिलते हैं तुम्हें। [संगीत] लेकिन यह इतना

26:19

भी आसान नहीं है। इसलिए आप चाहते हो

26:21

प्रकृति या यह ब्रह्मांड आपका साथ दें तो

26:24

अब मैं जो बताऊंगा उसे ध्यान से सुनना।

26:26

सबसे पहला काम है आपके विचार। [संगीत] अगर

26:28

आपके पास पैसा नहीं है तो यह प्रॉब्लम

26:30

नहीं है। प्रॉब्लम पैसों की नहीं होती।

26:32

प्रॉब्लम होती है विचारों की। ज्यादातर

26:34

लोग इसलिए गरीब नहीं होते क्योंकि वो काम

26:36

नहीं करते, मेहनत नहीं करते [संगीत] बल्कि

26:38

इसलिए क्योंकि वो सोचते ही गलत है। दिमाग

26:41

एक फैक्ट्री है मेंटल फैक्ट्री। और तुम

26:44

पूरा दिन जो सोचते हो, जो पढ़ते हो, जो

26:47

सुनते हो, जो देखते हो वो सब रॉ मटेरियल

26:49

के रूप में इस मेंटल फैक्ट्री में जाता

26:51

है। और वही रॉ मटेरियल तुम्हारी

26:53

फाइनेंशियल, सोशल, इमोशनल लाइफ बनके बाहर

26:56

आता है। तुम बिलीव नहीं करोगे लोग अपने घर

26:58

में क्या-क्या पढ़ते रहते हैं। योद्ध,

27:00

दंगे, मर्डर, लूट, एक्सीडेंट, [संगीत]

27:03

ट्रेजडीज। पता नहीं क्यों। फिर कहते हैं

27:05

कि चलो अब दिन की शुरुआत करते हैं। सोचो

27:07

ऐसा दिन कैसा जाता होगा। रोज भर-भर के

27:09

कचरा मेंडल फैक्ट्री में डालोगे और

27:11

एक्सपेक्ट करोगे एक रिच, पॉजिटिव और

27:13

पावरफुल लाइफ। इंपॉसिबल। आपके दिमाग में

27:16

दिन भर क्या घूमता है? किस तरह के विचार?

27:18

जो आपके दिमाग में दिन भर घूमता है वही

27:21

आपके एक्शंस में दिखेगा। [संगीत] क्योंकि

27:22

विचार के बिना कोई एक्शन नहीं होता। इसलिए

27:25

अपने दिमाग को सही विचारों से भरो। दिन के

27:27

हर वक्त में ध्यान दो। आपके दिमाग में जा

27:30

क्या रहा है? और सही विचारों का एक ही

27:32

सोर्स है स्टडी। [संगीत] पढ़ो। सक्सेसफुल

27:34

बनना है। स्टडी सक्सेस। खुश रहना है।

27:36

स्टडी हैप्पीनेस। अमीर बनना है। स्टडी

27:39

वेल्थ। बहुत सारी बुक्स हैं। कोर्सेज हैं,

27:41

कॉन्फिडेंस पे, लीडरशिप पे, कम्युनिकेशन

27:43

पे, पर्सनालिटी पे। लेकिन लोग पढ़ते ही

27:46

नहीं है। और जब मैं पूछता हूं पढ़ते क्यों

27:48

नहीं हो? [संगीत] तो जॉब सिंपल होता है।

27:50

भाई बिजी रहते हैं। काम के बाद थक जाते

27:52

हैं। ऑफिस से निकलते निकलते शाम हो जाती

27:54

है। फिर घर आओ, थोड़ा खाना, थोड़ा टीवी और

27:57

फिर सीधा बेड पे। यह लोग मेहनती भी होते

28:00

हैं। हार्ड वर्किंग, बहुत सिंसियर।

28:02

[संगीत] लेकिन यही प्रॉब्लम है। सिर्फ

28:04

मेहनत से काम नहीं चलता। अगर तुम बस काम

28:06

करते रहे और सही विचारों को दिमाग में

28:08

डालना भूल गए तो पूरी लाइफ लगा के भी एंड

28:10

में एक ही जगह पहुंचोगे गरीबी और पैसों की

28:13

तंगी में। सच कड़वा है लेकिन सच है

28:16

क्योंकि सिर्फ काम करना जिंदगी चलाता है।

28:18

खुद पर काम करना जिंदगी बनाता है। [संगीत]

28:22

[प्रशंसा]

28:24

और एक इंपॉर्टेंट बात तुम शायद जो कुछ भी

28:26

सीखोगे वह सब अप्लाई नहीं कर पाओगे। एंड

28:29

इट्स ओके क्योंकि आपको [संगीत] अपने आपको

28:30

सक्सेस के लिए प्रोग्राम करना है। एक्शनंस

28:33

तो आपके अपने आप बदलने लग जाएंगे जब दिमाग

28:35

में जाने वाले विचार बदलेंगे। तो यह चीज

28:38

करते रहो और एक दिन अचानक ये सारे विचार

28:41

तुम्हारी इनकम, लाइफस्टाइल, पर्सनालिटी सब

28:44

जगह रिजल्ट दिखाने लगेंगे। अब अगला

28:46

सब्जेक्ट थोड़ा नेगेटिव [संगीत] है। इसमें

28:47

हम जानेंगे उस एक बीमारी से कैसे बचें जो

28:50

आपकी लाइफ को हर दिन खा रही है। और इस

28:52

टॉपिक में मैं एक्सपर्ट हूं क्योंकि यह

28:54

चीज मैंने खुद झेली है। नंबर फाइव सबसे

28:57

बड़ी बीमारी। जिंदगी जीने के तीन तरीके

29:00

होते हैं। नंबर वन हॉट। इस कैटेगरी वाले

29:03

लोग किसी भी चीज के लिए पूरी तरह से

29:04

कमिटेड एंड क्लियर होते हैं। विद फुल

29:06

एनर्जी, फुल सीरियसनेस। चाहे करियर हो,

29:09

बिजनेस हो या कोई भी काम बंदा 100% कमिटेड

29:12

होता है। नंबर टू कोल्ड। इस कैटेगरी वाला

29:15

इंसान क्लियरली कहता है यह मेरे लिए नहीं

29:17

है। काम मेरे लिए नहीं है। जिम मेरे लिए

29:19

नहीं है। बुक्स मेरे लिए नहीं है। मैं तो

29:21

बस मजे करूंगा। यह कंफ्यूज नहीं होता

29:23

क्योंकि जानता है कि वो क्या नहीं चाहता।

29:26

और फिर आती है थर्ड कैटेगरी ल्यूक वार्म

29:28

यानी बीच वाला। ना गम ना ठंडा। और यह सबसे

29:32

डेंजरस तरीका है लाइफ जीने का। ना पूरी

29:35

मेहनत करना ना क्विट करना। ना काम ढंग से

29:37

करना ना मजे। इस कैटेगरी वाले लोगों की

29:40

बातें ऐसी होती है। देखते हैं उम्मीद है

29:42

कभी ना कभी। कल करेंगे, बाद में करेंगे।

29:45

यह परफेक्ट टाइम नहीं है। इंसान जी भी

29:47

नहीं रहा है और छोड़ भी नहीं रहा है। साल

29:50

निकलते जाते हैं और लाइफ वहीं की वहीं रह

29:52

जाती है। आप हॉट या कोल्ड दोनों में से

29:54

कोई भी लाइफ जी लेना लेकिन दोस्त यह मत

29:57

करना। कोल्ड तरीके से ही जियो यानी गलत

29:59

डायरेक्शन लेकिन जियो क्योंकि इसका भी एक

30:02

फायदा है कि आपको जल्दी पता चल जाता है।

30:04

सीख मिल जाती है कि क्या नहीं करना है।

30:07

लेकिन यह जो है ना तीसरा वाला तरीका

30:09

[संगीत] बीच वाला। इसमें एक ही चीज होगी

30:11

और वह है टाइम वेस्ट। ना इधर के रहते हैं

30:13

ना उधर के। 25 साल बाद जागोगे और कहोगे कि

30:17

यार मैं तो कभी सीरियस ही नहीं हुआ और ऐसा

30:19

इंसान बनने से बचना चाहते हो। तीन रूल

30:21

सुनो। नंबर वन बहुत ज्यादा डाउट करना।

30:24

सोचना। इसमें दिमाग जम जाता है। आदमी बीच

30:27

में ही रह जाता है। ना इधर जाता है ना

30:29

उधर। सोचता है भाई अगर गलत साइड चला गया

30:31

तो क्या होगा? अरे कम से कम पता तो चलेगा

30:34

कि गलत साइड आया हूं। किसी भी साइड जाओ

30:36

लेकिन जाओ क्योंकि सही जिंदगी डिसीजंस से

30:38

बनती है। इन डिसीजन से नहीं। गलत डिसीजन

30:41

भी काम का होता है। वह एक्सपीरियंस देता

30:43

है। उससे अगला डिसीजन बेटर होता है। इसलिए

30:45

यह मत देखो कि कितने डिसीजंस मैं अवॉइड कर

30:47

सकता हूं। यह देखो कि कितने डिसीजंस मैं

30:50

ले सकता हूं। डिसीजन गलत हुआ या सही।

30:52

दोनों केस में तुम जीत रहे हो। मैं कर

30:54

पाऊंगा या नहीं। पॉसिबल है या नहीं। मैं

30:57

इतना बड़ा बन सकता हूं या नहीं। मैं खुद

30:59

जानता हूं इस तरह से सिर्फ सोचते रहना

31:01

कितना खतरनाक है। आपके सालों बर्बाद कर

31:03

देता है। तो सशन सिंपल है। डाउट या सिर्फ

31:06

सोचते रहने को एक्शन में कन्वर्ट करो।

31:09

नंबर टू बहुत ज्यादा डर या बहुत ज्यादा

31:11

सेफ्टी। यह हो गया तो क्या, वो हो गया तो

31:14

क्या? यह गरीबों की लैंग्वेज है। सच यह है

31:17

यहां सब कुछ रिस्की है। पैदा होते वक्त

31:19

रिस्क होता है। शादी करना रिस्क, बच्चे

31:21

करना रिस्क, बिजनेस रिस्क, इन्वेस्टमेंट

31:23

रिस्क और सबसे बड़ा सच आपका जन्म लेना ही

31:26

रिस्क है। क्योंकि यहां से आप जिंदा बच के

31:28

निकलने नहीं वाले। तो फिर ट्राई ना करना

31:30

कौन सा स्मार्ट डिसीजन है? कई लोग बोलते

31:32

हैं मुझे सेफ्टी चाहिए, सिक्योरिटी चाहिए।

31:34

ठीक है? कोई दिक्कत नहीं है। मैं दे दूंगा

31:36

तुम्हें सेफ्टी एंड सिक्योरिटी। एक कॉर्नर

31:38

में बैठ जाओ, चादर ओडा देंगे। तीन टाइम का

31:41

खाना दे देंगे। कुछ भी होने नहीं देंगे।

31:43

फुल सिक्योरिटी। शायद 100 साल जी जाओ। पर

31:46

सोचो यह कैसी जिंदगी होगी। 20 साल की फुल

31:49

एडवेंचर वाली जिंदगी 100 साल कॉर्नर में

31:51

सेफ रहने से कहीं ज्यादा अच्छी है।

31:53

क्योंकि बात यह नहीं है कि तुम कितने साल

31:55

जिए? बात यह है कि तुम कैसी जियो? तो सवाल

31:58

यह होना ही नहीं चाहिए कि रिस्क लूं या

32:00

नहीं। बस यह सोचो कि किस चीज का रिस्क

32:02

लूं? कौन सा काम? नंबर थ्री एंड बहुत

32:05

डेंजरस पैसिमिज्म। [संगीत]

32:06

पहले मैं हर चीज के लिए बहाने ढूंढता था।

32:08

मेरी एक पूरी लिस्ट थी कि मेरी लाइफ में

32:10

अच्छा क्यों नहीं हो रहा। उस लिस्ट में सब

32:12

थे गवर्नमेंट, टैक्सेस, चीजों की [संगीत]

32:14

रेट्स, वेदर, ट्रैफिक, कार कंपनी, पॉलिसी,

32:18

ट्रेनिंग, नेगेटिव रिलेटिव्स, इकोनमी,

32:20

कम्युनिटी एकदम परफेक्ट लिस्ट थी। सिर्फ

32:23

एक चीज इसमें मिस थी और वो था मैं खुद। और

32:26

जब मैंने यह चीज गौर की, तो उस दिन मैंने

32:28

वो लिस्ट फाड़ दी। नया पेपर लिया और सिर्फ

32:30

एक शब्द लिखा मैं। और यहीं से मेरी लाइफ

32:33

बदली। इसलिए एक लास्ट फिलॉसफी याद रखना कि

32:36

आपके साथ क्या हुआ वो आपकी लाइफ की

32:38

क्वालिटी डिसाइड नहीं करती क्योंकि जो

32:40

होता है ऑलमोस्ट सबके साथ होता है। सिर्फ

32:42

एक चीज से फर्क पड़ता है कि तुमने उस

32:44

सिचुएशन में क्या किया। वैसे मिस्ट लोग

32:46

हमेशा यह गिनाते हैं कि क्यों यह काम नहीं

32:49

हो सकता। यह नहीं देखते कि क्या सही है।

32:51

वो यह ढूंढते हैं कि क्या गलत है। और जब

32:53

गलती मिल जाती है ना तो वह खुश हो जाते

32:55

हैं और बोलते हैं मेरे पास पांच सॉलिड

32:58

रीजंस है कि यह काम क्यों नहीं होगा।

32:59

इनमें इतनी भी अकल नहीं होती कि काम करने

33:02

के लिए सिर्फ एक रीजन चाहिए होता है। देखा

33:04

होगा आपने सेम चीज दो लोगों के साथ होती

33:06

है। दोनों की सेम सिचुएशन लेकिन एक अमीर

33:08

बन जाता है और दूसरा वाला वहीं का वहीं रह

33:11

जाता है। डिफरेंस सिर्फ एक ही है एक्शन।

33:13

प्रॉब्लम्स या परेशानियां कोई गरीब लोगों

33:15

के लिए फिक्स नहीं है। सबको मिलती है।

33:17

लेकिन तुम उनके बाद क्या करते हो? यह चीज

33:19

सब कुछ बदल देती है। मैं पहले वेदर को

33:21

ब्लेम करता था। फिर एक दिन समझ आया कि यार

33:23

बारिश तो अमीरों पे भी होती है। सेम बारिश

33:26

सेम दो लोग। एक बंदा विंडो से देखता है और

33:28

कहता है इस मौसम में कौन सेल्स करे और घर

33:31

पर बैठ जाता है। दूसरा बंदा वही रेन देखता

33:33

है और बोलता है आज परफेक्ट डे है। आज सारे

33:36

सेल्समैन घर पे होंगे और वो निकल जाता है।

33:38

[संगीत] इवेंट सेम है लेकिन रिस्पांस अलग

33:41

है। अगर तुम्हें अपनी लाइफ बदलनी है तो

33:43

बाहर से उम्मीद करना छोड़ दो। अपनी

33:45

रिस्पांसिबिलिटी पूरी तरह से खुद ले लो।

33:47

इसी रिस्पांस से आपकी लाइफ की डायरेक्शन

33:50

चेंज होना शुरू हो जाएगी। और अब आखिरी

33:52

सब्जेक्ट है वो दिन जो आपकी जिंदगी बदल

33:54

देता है। इसके अंदर हम बात करेंगे इंसान

33:56

की सबसे बड़ी सुपर पावर की इमोशंस,

33:59

भावनाएं। [संगीत] कभी-कभी हमारी पूरी लाइफ

34:01

का डायरेक्शन बदलने के लिए सालों की जरूरत

34:03

नहीं होती। सिर्फ एक दिन काफी होता है।

34:06

इतना पावरफुल कि कभी-कभी बस थोड़ा सा फील

34:09

होना ही पूरी जिंदगी को घुमा देता है। मैं

34:11

तुम्हें दो पावरफुल इमोशंस देता हूं जो एक

34:13

ही दिन में तुम्हारी लाइफ पलट सकती है।

34:15

इमोशन नंबर वन घिन नफरत। मैं 25 साल का

34:19

था। तो एक दिन किसी ने दरवाजा खटखटाया।

34:22

मैंने दरवाजा खोला। सामने एक छोटी सी

34:24

लड़की खड़ी थी। हाथ में कुकीज़ का बॉक्स

34:26

लेके। उसने बोला सर कुकीज़ लोगे? अलग-अलग

34:29

फ्लेवर्स सिर्फ $2 और मैं लेना चाहता था।

34:32

मन था मेरा। पर प्रॉब्लम यह थी कि मैं

34:35

कंगाल था [संगीत] पैसों से। आप खुद सोचो

34:37

कॉलेज कर चुका था। जॉब चल रही थी। मेरी

34:39

शादी हो चुकी थी। बच्चे थी। 25 साल का था

34:42

और मेरे पास $2 तक नहीं थे। मैंने उसे सच

34:45

नहीं बताया। हिम्मत नहीं हुई। मैंने बोला

34:47

बेटा मैंने ऑलरेडी बहुत सारी कुकीज ले रखी

34:49

है। घर में स्टॉक भरा पड़ा है। उस लड़की

34:51

ने स्माइल की थैंक यू बोला और चली गई।

34:54

जैसे ही मैंने दरवाजा बंद किया मेरे अंदर

34:56

कुछ टूट गया। मैंने खुद से कहा बस यह

34:59

जिंदगी नहीं चाहिए। और उस दिन मैंने एक

35:02

डिसीजन लिया चाहे जितना टाइम लगे, चाहे

35:04

जितनी मेहनत लगे मेरे पास हर वक्त इतना

35:07

होना चाहिए कि मैं कोई भी चीज ले सकूं।

35:09

कुछ साल बाद मैं बैंक ऑफ अमेरिका से बाहर

35:12

निकल रहा था। गेट के बाहर दो छोटी

35:14

लड़कियां कैंडी बेच रही थी। एक ने पूछा

35:16

हाय सर कैंडी लोगे? सिर्फ $2 मैंने पूछा

35:19

तुम्हारे पास कितने बॉक्सेस हैं? उसने कहा

35:21

पांच। उसके साथ उसकी दोस्त भी थी। मैंने

35:24

उससे भी पूछा तुम्हारे पास? उसने कहा चार।

35:27

मैं सब लूंगा बेटा। ठीक है। दोनों

35:29

लड़कियां खुशी से पागल। मैंने पॉकेट से

35:31

$18 निकाले। कैंडी ली और जब वो बच्चियां

35:34

पैसे ले रही थी तो उनमें से एक मुझे देख

35:36

के बोली, "सर, आप सच में कोई बड़े आदमी

35:39

हो। कौन हो आप? सोचो जरा। सिर्फ $18 खर्च

35:42

किए और किसी ने तुम्हारी आंखों में देख के

35:44

कहा आप कुछ तो हो। उस दिन मुझे समझ आया कि

35:47

मैं पैसा इसलिए नहीं चाहता था क्योंकि

35:49

चीजें खरीदनी है। मैं पैसा इसलिए चाहता

35:52

हूं ताकि कभी वो दोबारा शर्म, वो झूठ, वो

35:54

छोटापन महसूस ना करना पड़े। यह इमोशन बड़ी

35:57

वजह बन गई। मुझे झूठ बोलने से नफरत हो गई।

36:00

मुझे गरीबी से नफरत हो गई। और वह दिन मेरी

36:02

लाइफ का टर्निंग पॉइंट बना। और इसी तरह वो

36:05

आदमी जो गरीबी या मिडविक्रिटी से नफरत

36:07

करता हो। जब उसकी वाइफ ग्रोसरी स्टोर में

36:09

खड़ी होती है। उसके सामने दो कैंस हैं। एक

36:12

35 सेंट्स का और एक 45 सेंट्स का। और वह

36:14

जानता है उसकी वाइफ 35 सेंट्स वाला ही

36:16

लेगी। सिर्फ पैसे बचाने के लिए। 35 वाले

36:19

का ना ब्रांड पसंद है ना टेस्ट पसंद है पर

36:21

मजबूरी है। और यहां वो देख रहा है आदमी कह

36:24

सकता है बस अब हो गया। अब हम ऐसे नहीं

36:27

जिएंगे। नफरत वो दिन बन सकती है जो आपकी

36:29

लाइफ बदल के रख दी। इमोशन नंबर टू डिजायर

36:32

या विल। डिजायर मतलब किसी चीज को इतना

36:35

चाहना कि बिना उसके सांस ही ना आए। आई विल

36:38

मैं यह करके ही रहूंगा। यह चीज दुनिया

36:41

हिला सकती है। बेंजामिन इजराइली ने कहा था

36:43

इंसान की विल को कोई चीज नहीं रोक सकती

36:45

अगर वह अपनी पूरी एकिस्टेंस अपने पर्पस पे

36:48

लगा दे। सीधी भाषा में या तो करूंगा या

36:51

कोशिश करते-करते मर जाऊंगा। जब कोई आदमी

36:53

यह बोल देता है दुनिया खुद साइड हो जाती

36:55

है। बिल्कुल मेरे मिलनेियर दोस्त रॉबर्ट

36:57

ड्यू की तरह जिसने बोला था कि अब तो मैं

37:00

अमीर [संगीत] बनके दिखाऊंगा। नो मैटर

37:02

व्हाट डिजायर कभी-कभी ट्रिगर हो जाती है।

37:04

कभी एक बुक से, कभी एक गाने से, कभी एक

37:07

स्पीच से, कभी एक इंसिडेंट से। पता नहीं

37:09

कौन सा मोमेंट तुम में डिजायर जगह दे।

37:11

इसलिए मेरी एडवाइस यह है कि हर ह्यूमन

37:14

एक्सपीरियंस से सीखो। क्योंकि तुम नहीं

37:16

जानते कौन सा एक्सपीरियंस तुम्हें जगह दे।

37:18

अब मैं तुम्हें सेमिनार का एंड का वो

37:20

हिस्सा बता रहा हूं जो सबसे ज्यादा सुन

37:22

लेते हैं लेकिन सबसे कम लोग फॉलो करते

37:24

हैं। और यही वो जगह है जहां से जिंदगियां

37:27

बदलती है या फिर जहां है वहीं की वहीं रह

37:29

जाती है। डोंट लेट योर लर्निंग बिकम

37:32

नॉलेज। अगर आप अपनी लर्निंग को नॉलेज

37:34

बनाते हो तो आप सबसे बड़े मूर्ख हो। लेकिन

37:37

अगर आप इसको एक्शन बना लेते हो तो आप बहुत

37:39

बड़े बन सकते हो। क्योंकि नॉलेज सेफ होता

37:42

है। नॉलेज कंफर्टेबल फील कराता है। तुम

37:44

नॉलेज के साथ बिल्कुल वहीं रह सकते हो

37:46

जहां हो। तुम बोल सकते हो कि हां मुझे पता

37:49

है। हां, मैं समझता हूं। हां, यह सही है।

37:52

और फिर भी तुम्हारी लाइफ चेंज नहीं होती।

37:54

तुम पूरी लाइफ बुक्स पढ़ सकते हो, सेमिनार

37:56

अटेंड कर सकते हो, नोट्स भर सकते हो और

37:59

फिर भी गरीब रह सकते हो। इसलिए मैं हमेशा

38:01

कहता हूं नॉट लेट योर लर्निंग बिकम नॉलेज।

38:04

लेट योर लर्निंग बिकम एक्शन। यह सारी

38:07

चीजें जो आज आपने सुनी है, यह सब बेकार

38:09

है। अगर उसमें एक भी आईडिया तुम कल यूज

38:11

नहीं करते, तो यह सेमिनार सिर्फ

38:13

एंटरटेनमेंट बन जाएगा। और एंटरटेनमेंट से

38:15

किसी का भी बैंक बैलेंस नहीं बदलता। वेल्थ

38:17

का सीधा फार्मूला है जो सीखा है उसे काम

38:20

में लगाना। क्योंकि दुनिया सोचने या सुनने

38:22

वालों को रिवॉर्ड नहीं करती। दुनिया करने

38:24

वालों को रिवॉर्ड करती है। इसलिए जो फील

38:26

करते हो उस पर कुछ करो। जो सोचते हो उस पर

38:29

कुछ करो। जो चाहते हो उसके लिए कुछ करो।

38:32

और एक्शन का मतलब यह नहीं है कि कल से तुम

38:34

एवरेस्ट चढ़ जाओ। एक्शन छोटा हो सकता है।

38:36

एक पेज लिखना, एक डिसीजन लेना, एक हैबिट

38:39

छोड़ना, एक हैबिट शुरू करना, एक रिस्क

38:41

लेना। बस एक चीज पकड़ना और रोज उस पर

38:44

एक्शन लेना। अगर तुमने यह कर लिया तो यह

38:47

सिर्फ सेमिनार नहीं होगा। यह वो दिन बन

38:49

जाएगा जो तुम्हारी जिंदगी का डायरेक्शन

38:51

बदल देगा। पर एक चीज याद रखना सबसे बड़ी

38:53

डल्यूजन सबसे बड़ा झूठ क्या है पता है?

38:55

जिसने तुमको कल भी वही रखा था और आने वाले

38:58

कल भी वही रखेगा। अगर मुझे सही जॉब मिल

39:00

जाए तब मैं पूरी मेहनत करूंगा। यह हो

39:02

जाएगा तब करूंगा। कल से करूंगा। मंडे से

39:05

करूंगा। एक तारीख से करूंगा। यह खुद को

39:07

बेवकूफ बनाने के तरीके हैं। सच यह है जो

39:09

आदमी आज के काम में 10% देता है, वह कल भी

39:12

10% ही देगा। आज बहाने मार रहा है, कल भी

39:15

मारेगा। मुझे यह पता है ज्यादातर लोग

39:17

एक्शन नहीं लेंगे। वो फ्यूचर को बस छोड़

39:19

देते हैं। बस उम्मीद करते हैं। होप यानी

39:22

उम्मीद सबसे बड़ी गलती है। हर कोई बस

39:25

उम्मीद करता है कि बाद में, अगले साल, 2

39:27

साल बाद सब ठीक हो जाएगा। लेकिन याद रखना

39:30

गरीब लोग भी उम्मीद करते हैं लेकिन फिर भी

39:32

वह गरीबी में ही मरते हैं। उम्मीद से कुछ

39:34

नहीं बदलता दोस्त। बदलता है तो सिर्फ आज

39:37

प्लानिंग करने से और उस पर एक्शन लेने से

39:40

क्योंकि अगर आज से कुछ नहीं बदला तो कल और

39:42

उसके आने वाले 5 साल बाद भी सब सेम रहेगा।

39:44

पिछले 5 साल देख लो कुछ बदला कुछ चेंज

39:47

नहीं होगा अगर तुम आज चेंज नहीं करते और

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यह आपकी चॉइस की बात है। चाहो तो चेंज करो

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चाहो तो मत करो। लेकिन यह जान लेना

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इंपॉर्टेंट है कि किसी भी दिन तुम पूरी

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लाइफ का डायरेक्शन बदल सकते हो। इसलिए

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दोबारा कहता हूं सुन लो। तुम्हें एक आदमी

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को रोज स्टडी करना चाहिए और वो है खुद को।

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इस महीने इस साल क्या अचीव हुआ? क्या

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हटाया? क्या ऐड किया? प्रायोरिटीज कैसे

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चेंज हुई? अपनी अचीवमेंट्स को स्टडी करो।

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अपनी डिजायर्स को स्टडी करो। क्योंकि जो

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लोग प्लान नहीं करते हैं वो असल में

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फेलियर का प्लान कर रहे होते हैं। तुम पूछ

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सकते हो कि पैसों की तंगी है तब क्या

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करें? बहुत दुखी है, दिल टूट गया है, कोई

40:21

साथ नहीं दे रहा है, काम कर रहे हैं,

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लेकिन रिजल्ट नहीं दिख रहा है, तब क्या

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करें? जवाब एक ही है। तुम क्या कर सकते

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हो? वह करो। अगर तुम्हें इस तरह

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परेशानियों में नहीं जीना पसंद बदल डालो।

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अगर तुम्हें लगता है कि मैं बहुत कुछ

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डिर्व करता हूं, बदल डालो। अगर तुम्हें

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लगता है कि मैं पैसों की तंगी में हूं,

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मैं रोज [संगीत] चिकचिक में जीता हूं, बदल

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डालो। और तुम कर सकते हो। याद रखना

40:42

तुम्हें सेम रहने की कोई मजबूरी नहीं है।

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सिर्फ चॉइस [संगीत] है करना या ना करना।

40:51

[संगीत]

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