JIM ROHN 1981 : The Speech that will FIX Your Life in 1 DAY (Hindi Dubbed)
कुछ दिन पहले मैं YouTube स्टोर कर रहा था
तो मैंने यह सुना हैव मोर देन [संगीत]
बिकम मोर देन यू आर समय
बेस्ट मिलियनी
जिम रोन की स्पीच की सिर्फ चार लाइंस और
सच बोलूं यह सुनने के बाद मेरे रोंगटे
खड़े हो गए। आई एम श्योर आपने भी इनकी कोई
रैंडम क्लिप जरूर देखी होगी। ये जिम रोन
का 1981 का एक पेड सेमिनार था। YouTube पे
अभी इसकी बहुत सारी क्लिप्स वायरल हो रही
है। हर शॉट हर क्लिप पे मिलियंस में व्यूज
और काफी सर्च करने के बाद मुझे एक चैनल पर
2ाई घंटे का पूरा सेमिनार मिला। मैंने
पूरा सुना एक-एक लाइन। और अब मैं कह सकता
हूं मैंने अभी तक जितने भी सेमिनार्स देखे
हैं, स्पीचेस और टॉक्स देखे हैं, जिम रोन
की ये स्पीच उनमें से वन ऑफ द बेस्ट एंड
मोस्ट पावरफुल स्पीच लगी। क्योंकि जो सात
प्रिंसिपल इन्होंने बताए हैं स्पीच में यह
सच में आपकी लाइफ को खोल के रख देते हैं।
और इसी के बाद ही मैंने डिसाइड किया कि
मैं उनकी यह कीमती और शक्तिशाली बातें आप
तक हिंदी में पहुंचाऊंगा। तो आधे घंटे का
टाइम निकाल के ईयरफोन ले बैठ जाइए और मैं
आपको रेकमेंड करूंगा आप साथ-साथ में नोट्स
भी बनाते चलिए क्योंकि यह कोई फ्री
मोटिवेशन नहीं है। यह प्रीमियम लाइफ
एजुकेशन है। शुरू। नंबर वन वैल्यू। लाइफ
का सबसे बड़ा सीक्रेट क्या है पता है?
आपके पास जो कुछ भी है उससे ज्यादा हमेशा
आपको मिल सकता है क्योंकि आप अभी जो हो
[संगीत] उससे ज्यादा हमेशा बन सकते हो।
यही है सीक्रेट और इस बात की दूसरी साइड
भी है कि अगर आप वही रहते हो जो आज हो
[संगीत] तो आपके पास हमेशा उतना ही रहेगा
जितना आज है। मैंने अपने पर्सनल
एक्सपीरियंस से अपनी और बाकी हजारों लोगों
की लाइफ में एक बात क्लियरली देखी है कि
इनकम कभी आप जो हो उससे ज्यादा नहीं होती।
हो सकता है कभी लकीली आपके पास कहीं से
एकदम से अचानक ज्यादा पैसे आ जाए। आप
अचानक से मिलनेर बन जाओ। [संगीत] लेकिन
याद रखना अगर आप अंदर से उस पैसे के लेवल
के नहीं हो तो वो पैसा ज्यादा देर तक नहीं
टिकेगा। वो निकलने की जगह ढूंढ ही लेगा।
धीरे-धीरे वापस चला जाएगा। क्योंकि पैसा
कभी भी आपसे ज्यादा पावरफुल नहीं होता।
पैसा आपके पास उतना ही होता है जिस लेवल
के आप हो। जैसे अगर इस दुनिया का सारा
पैसा उठाकर सब लोगों में बराबर बांट दिया
जाए तो कुछ ही टाइम में देखना वो सारा
पैसा फिर से उन्हीं लोगों के पास वापस
जाएगा जिनके पास आज है [संगीत] इनक्रेडिबल
है ना क्योंकि पैसा, इज्जत, लड़की, पावर
यह सब डेस्पिरेट लोगों को नहीं मिलता है
जो पीसा करते हैं। यह चीजें अट्रैक्टिव
लोगों के पास खुद चलकर आती है। सक्सेस
अट्रैक्ट करी जाती है। पीछे नहीं पड़ा
जाता। अगर आप अपने बैंक बैलेंस और इनकम से
खुश नहीं हो तो प्रॉब्लम किस्मत की नहीं
है। प्रॉब्लम यह भी नहीं है कि आप मेहनत
नहीं करते। प्रॉब्लम कहीं और है। मेरी
लाइफ में एक टाइम पर मुझे एक बात बहुत
परेशान करती थी कि दो लोग एक ही कंपनी में
काम कर रहे हैं। सेम एज, सेम स्कूल से
पढ़े हुए हैं। सेम सिटी, सेम ट्रैफिक से
वो आते जाते हैं। सेम प्रॉब्लम्स हैं उनकी
लेकिन एक महीने के $000 कमाता है और दूसरा
$2000। यह बात मुझे कंफ्यूज करती थी।
[संगीत] सब सेम था लेकिन इनकम डबल कैसे?
आखिर फर्क कहां है? पहले मुझे लगा कि शायद
टाइम का फर्क होगा। लेकिन फिर समझ आया कि
यार टाइम तो सबके पास बराबर होता है।
दोनों के लिए रात के 12:00 बजे दिन खत्म
होता है। जो लोग कहते हैं कि बस थोड़ा
एक्स्ट्रा टाइम मिल जाए लेकिन एक्स्ट्रा
टाइम कहीं नहीं मिलता भाई। तो जब टाइम
बढ़ाया ही नहीं जा सकता तो वो क्या चीज है
जो बढ़ा सकते हैं जो पूरा गेम ही बदल के
रख दे। और अब मैं जो शब्द बोलने वाला हूं
वो सबसेेंट है। वैल्यू [संगीत] रिजल्ट का
फर्क वैल्यू से पड़ता है। वैल्यू ही
डिसाइड करती है कि कोई आदमी एवरेज रहेगा
या बहुत आगे निकल जाएगा। अब हम इसको गहराई
से समझेंगे। ध्यान देना। देखो सक्सेस कोई
चीज नहीं है। जिसे तुम चस करोगे तो वह
तुम्हें मिल जाएगी। सक्सेस अट्रैक्टिव
लोगों के पास खुद चलकर सामने से आती है।
और अट्रैक्टिव कैसे माना जाता है? खुद पे
काम करके। खुद पर काम करना सीखो। क्योंकि
काम पे मेहनत जिंदगी चलाती है और खुद पर
मेहनत [संगीत] जिंदगी बनाती है। जब तक मैं
अपनी जॉब पर मेहनत कर रहा था तब कुछ भी
बदल नहीं रहा था। ना मैं ज्यादा पैसे कमा
रहा था ना मेरे रिश्ते अच्छे थे। कुछ भी
सही नहीं था। लेकिन जब मैंने अपने ऊपर काम
करना शुरू किया तो सब बदलना शुरू हो गया।
अगर आप कहीं जॉब कर रहे हो तो आपको यह
नहीं सोचना चाहिए कि यार मुझे यहां कितनी
सैलरी मिल रही है। असली सवाल यह होना
चाहिए कि मैं यहां काम करते-करते क्या बन
रहा हूं। मैं यहां कितना कमा रहा हूं।
इससे ज्यादा इंपॉर्टेंट है मैं यहां क्या
बन रहा हूं। क्योंकि आपका असली खजाना यही
छुपा है कि आप क्या बन रहे हो। क्योंकि
देखो आप ज्यादा टाइम क्रिएट नहीं कर सकते
लेकिन ज्यादा वैल्यू जरूर क्रिएट कर सकते
हो। और यही पैसे बनाने का सबसे बड़ा लेसन
है जो हर इंसान को तब से सीखना चाहिए जब
[संगीत] उसके हाथ में पहली बार पैसा आता
है। याद रखना मार्केट में जो आप वैल्यू
लाते हो उसी के लिए आपको पेमेंट मिलती है।
आपको टाइम के लिए पैसा नहीं मिलता। बहुत
से लोगों को लगता है कि मैं यहां 8 घंटे
काम करता हूं, 10 घंटे करता हूं तो मुझे
टाइम के लिए मिलता है। लेकिन यह सच नहीं
है। हां, आप जो काम कर रहे हो, जो वहां
वैल्यू ला रहे हो, उसमें टाइम लगता है।
लेकिन पैसा वैल्यू का मिलता है, [संगीत]
टाइम का नहीं। तो क्या यह पॉसिबल है कि आप
दो गुना ज्यादा वैल्यूुएबल बन जाओ और सेम
टाइम में दो गुना ज्यादा पैसा बना लो।
क्या आप तीन गुना ज्यादा वैल्यूुएबल बन
सकते हो? और तीन गुना इनकम बना सकते हो
बिना एक्स्ट्रा टाइम के। जवाब है हां।
क्योंकि याद रखना ज्यादा पैसा ऊंची सैलरी
यह काम का या मेहनत का रिवॉर्ड नहीं होती।
उस इंसान का रिवॉर्ड होती है। और आप
मार्केट में तभी बेहतर कर सकते हो अगर आप
सबसे पहले खुद पे काम करो। लेकिन दिक्कत
यह है कि बहुत से लोग सक्सेसफुल बनना तो
चाहते हैं लेकिन बेसिक चीजों पर काम ही
नहीं करते। लोग अपनी हैंडशेक तक इंप्रूव
नहीं करते। सोचो इतनी छोटी चीज से शुरू हो
सकता है लेकिन लोग उसे भी इग्नोर कर देते
हैं। अच्छी स्माइल, एवरेज लोगों से ज्यादा
जोश, दूसरे लोगों में जेन्युइन इंटरेस्ट,
जीतने की स्ट्रांग इंटेंसिटी। ये चीजें सब
कुछ बदल सकती है। लेकिन लोगों को लगता है
कि इन छोटी चीजों से क्या फर्क पड़ता है।
लाइफ का सबसे फ्रस्टेटिंग एक्सपीरियंस
क्या होता है पता है? खुद नॉर्मल रहना और
जिंदगी से स्पेशल रिजल्ट मांगना। सोचो जरा
आप खुद को अपग्रेड किए बिना बेटर जॉब
चाहते हो, ज्यादा सैलरी चाहते हो,
रिस्पेक्ट चाहते हो, कंफर्टेबल लाइफ चाहते
हो और जब वो नहीं मिलता तो लगता है कि यार
किस्मत खराब है, सिस्टम खराब है,
अपॉर्चुनिटीज नहीं है। यही सबसे बड़ी
फ्रस्ट्रेशन है जो आप में से कई लोगों ने
फील की होगी। इसलिए याद रखना जिंदगी आपको
उतना ही देगी जिस लेवल के आप खुद बने हो।
मेरे मेंटर ने मुझे एक सबसे बड़ी सीख दी
जिम अगर तू पूरी जिंदगी अमीर और खुश रहना
चाहता है तो एक चीज सीख ले अपनी जॉब, अपने
काम से ज्यादा खुद पर काम करना। अगर चीजें
बदलनी है तो [संगीत] पहले तुम्हें बदलना
पड़ेगा। यह वो जवाब था जो आप ही की तरह
मैं सुनना नहीं चाहता था। लेकिन यही वो
पावरफुल जवाब था जिसने मेरी लाइफ बदल के
रख दी। [संगीत][प्रशंसा]
आपकी भी बदलेगी क्योंकि आज आप बिल्कुल सही
जगह आए हो। आगे हम बात करेंगे जिससे आपको
पता चलेगा कि क्या गलत चल रहा है और क्या
चेंज करना है और पूरी कोशिश करेंगे कि आज
की शाम यह सेमिनार आपकी लाइफ का सबसे
यादगार दिन बन जाए। नंबर टू ब्रह्मांड के
कुछ नियम। देखो पूरी दुनिया पूरा यूनिवर्स
कुछ नियमों पे चल रहा है। हर चीज के कुछ
नियम है। अब हम अगर इस धरती पर पैदा हो गए
हैं तो एक काम जरूरी है लाइफ के रूल्स को
समझना। हमने ये रूल्स नहीं बनाए। लेकिन हम
जाने अनजाने में इन्हीं रूल्स के अगेंस्ट
या इनके साथ काम कर रहे होते हैं। आपको
उनके बारे में जानना ही चाहिए क्योंकि
रीजन नंबर वन तुम नुकसान से बच सको। तुम
पैसों से कंगाल लाइफ जी सकते हो हर दिन
दुखी और हर्ट होते हुए सिर्फ इसलिए
क्योंकि तुम्हें यह रूल्स पता ही नहीं थे।
जैसे एक सिंपल एग्जांपल किसी बिल्डिंग की
10वीं मंजिल से कूदना सही नहीं है। यह
आपको पता है। और यह इंफॉर्मेशन बहुत काम
की है। अब अगर कोई बोले यार लेकिन इस
बेचारे को पता नहीं था। लाइफ बोलेगी मुझे
फर्क नहीं पड़ता। इसे जानना चाहिए था।
इसीलिए इस दुनिया में ना जानना कोई
एक्सक्यूज नहीं होता। और दूसरा रीजन है
तुम लाइफ में अमेजिंग चीजों का लाभ ले
सको। [संगीत] लाइफ में बहुत अमेजिंग चीजें
इसलिए सीखो ताकि तुम इनका बेनिफिट ले सको।
पहला नियम लॉ ऑफ यूज़। यह एक बेसिक लॉ है
कि इस दुनिया में जो चीज यूज़ में नहीं आती
है, वो खत्म हो जाती है। यानी यूज़ इट और
लूज़ इट। एग्जांपल अगर आप अपना हाथ अपनी
बॉडी से बांध दो, काफी टाइम तक उसका यूज़
ही ना करो, हाथ [संगीत] डेड हो जाएगा। हाथ
रहेगा लेकिन काम का नहीं रहेगा। और यह रूल
सिर्फ बॉडी के लिए नहीं है। सब जगह है।
अपना टैलेंट यूज नहीं किया कम होता जाएगा।
स्ट्रांग इमोशंस यूज नहीं किए धीरे-धीरे
मर जाएंगे। एनर्जी यूज़ नहीं की खत्म हो
जाएगी। आज का दिन यूज [संगीत] नहीं किया
वो भी गया। कल नहीं किया कल भी जाएगा। और
इसके ऊपर एक प्राचीन और पावरफुल स्टोरी
है। सुनना आपको सब समझ आ जाएगा। एक मास्टर
होता है उसके पास कुछ सोने के बिस्किट
होते हैं। एक दिन मास्टर अपने तीन
सर्वेंट्स को बुलाता है और कहता है मैं
कुछ टाइम के लिए बाहर जा रहा हूं। तो मैं
तुम्हें कुछ गोल्ड के बिस्किट्स देकर जा
रहा हूं। जब मैं वापस आऊंगा तो हम देखेंगे
कि तुमने इनका क्या किया। पहले सर्वेंट को
पांच देता है। दूसरे को दो और तीसरे
सर्वेंट को भी दो बिस्किट्स देता है। फिर
मास्टर चला जाता है। पहला सर्वेंट उसने
पांच बिस्किट्स को यूज़ किया। उसने रिस्क
लिया। उनको काम में लगाया। फेल हुआ, सीखा
और करता रहा और धीरे-धीरे टाइम के साथ वो
पांच से छ, छ से आठ और 10 बिस्किट्स में
बदल गए। कुछ टाइम बाद मास्टर वापस आता है
तो वह कहता है मास्टर जो पांच बिस्किट्स
आपने मुझे दिए थे मैंने उन्हें यूज किया
और आज वह डबल हो गए तो वह मास्टर खुश हो
जाता है कहता है बहुत अच्छा दूसरा सर्वेंट
इसके पास भी दो थे लेकिन इसने भी वही किया
और उसके भी दो से चार हुए मास्टर उसे भी
शाबाशी देता है अब तीसरा सर्वेंट इसको भी
दो मिले थे लेकिन इसके दिमाग में गेम शुरू
हो गया उसने सोचा अगर यह खो गए तो क्या
होगा अगर फेल हो गया तो मेरे पास कम है
रिस्क लेना बेकार है और इसलिए उसने उसको
कपड़े कपड़े में लपेटा और जमीन में गड्ढा
खोदा और दबा दिया ताकि सेफ रहे खो ना जाए।
और अब वो सर्वेंट कहता है मास्टर आपने जो
मुझे दो बिस्किट दिए थे वह मैंने संभाल के
रखे। यह लीजिए देखिए जो दिया था वही वापस
ले आया हूं। मैंने कुछ भी नहीं खोया। तो
मास्टर कहता है तुमने कुछ खोया नहीं लेकिन
तुमने कुछ बनाया भी नहीं। और फिर मास्टर
इस आदमी से वह बिस्किट्स लेके जिसके पास
10 होते हैं उसको दे देता है। कुछ लोग
कहेंगे यह सही नहीं है। उसके पास तो पहले
से ही 10 है। लेकिन याद रखो लाइफ ऐसे ही
काम करती है। जो चीज तुम यूज नहीं करते वो
धीरे-धीरे तुमसे छीन ली जाती है। इसीलिए
आज ही चेक करो तुम्हारा टैलेंट यूज हो रहा
है या नहीं। तुम्हारी एबिलिटी यूज हो रही
है या नहीं। जो यूज नहीं हो रहा है वो तुम
लूज कर रहे हो। आज तुम्हारे पास जो कुछ भी
है थोड़ा है ज्यादा है या बहुत कम उसे यूज
करो। दो गुना 10 गुना 100 गुना कर दो।
नहीं तो कल वो भी नहीं रहेगा। सेकंड लॉ
बीज और फसल का नियम। यह नियम हमने बचपन से
सुना है। जो बोया जाता है वही काटा जाता
है। बहुत सिंपल, बहुत क्लियर। राइट? और यह
मुझे भी पता था लेकिन मेरी लाइफ में कुछ
भी नहीं बदला। फिर मेरे मेंटर ने एक बात
बोली जिसने पूरा गेम क्लियर कर दिया।
उन्होंने कहा इस लॉ को उल्टा पढ़ के देखो।
यानी जो बोया जाता है वही काटा जाता है।
इसको जो काटा जा रहा है वही बोया गया था।
और बस मेरी आंखें खुल गई। लाइफ के पास
आपको देने के लिए सिर्फ स्ट्रगल्स ही नहीं
है। गरीबी कोई रूल नहीं है कि यहां तुम
गरीब रहने के लिए ही पैदा हुए हो। जिंदगी
के पास अमेजिंग चीजें हैं हमें देने को।
आप बहुत अमीर हो सकते हो। यह कोई मोटिवेशन
नहीं है। यह फैक्ट है। इस दुनिया में बहुत
सारा पैसा कमाना पॉसिबल है। हर चीज का मजा
लेना पॉसिबल है। यह क्वालिटी लाइफ पॉसिबल
है। सवाल पॉसिबल है या नहीं इसका नहीं है।
सवाल चॉइस का है। तो आप बोलोगे कि यार
ज्यादातर लोग फिर रिच क्यों नहीं बनते?
असली जवाब है कि लोग बेसिक रूल्स ही नहीं
समझना चाहते। लोग बोना स्किप करके सिर्फ
काटना चाहते। बोलते हैं पैसा नहीं आ रहा
है। लाइफ अनफेयर है, लाइफ में प्रॉब्लम्स
है। पर यह नहीं देखते कि वह रोज बीज क्या
बो रहे हैं। देखो आज प्रॉब्लम यह नहीं है
कि टाइम कम है। प्रॉब्लम यह है कि टाइम
टीवी और डिस्ट्रक्शंस में जा रहा है।
मैंने एक इंसान को पूछा कि तुम्हारा टीवी
कितने में पड़ा? तो वो बोलता है $450। तो
मैंने बोला गलत। तुमने सही प्राइस टैग
नहीं देखा। बोला क्या मतलब? मैंने कहा
टीवी खरीदना सस्ता है लेकिन उसे देखना
बहुत महंगा। मेरे हिसाब से यह टीवी
तुम्हें साल के $12,000 खर्च करवा रहा है।
वो बंदा हैरान? मैंने बोला टीवी पैसे से
नहीं टाइम से महंगा होता है। टीवी जेब से
नहीं जिंदगी से पेमेंट लेता है। टाइम नाम
का। $450 एक बार गए पर जो रोज के 3-4 घंटे
टीवी ले जाता है साल के हजार प्लस घंटे वो
घंटे स्किल्स बन सकते थे। वो अपनी वैल्यू
बढ़ाने में लग सकती थी। वह घंटे इनकम बना
सकते थे। फ्यूचर सेट कर सकते थे। आराम से
हजारों डॉलर बन सकते थे।
[संगीत]
लेकिन टीवी ने उन्हें खा लिया। देखो थोड़ा
बहुत टीवी देखना डिस्ट्रैक्ट होना कोई
बुरी बात नहीं है। लेकिन $2,000 साल के
देना सिर्फ टीवी देखने के लिए डिस्ट्रैक्ट
होने के लिए यह बहुत महंगा है। जो चीज
फ्री लगती है वह अक्सर [संगीत] सबसे महंगी
होती है। हो सकता है पैसे नहीं ले लेकिन
आपकी लाइफ और आपके फ्यूचर को खा जाती है।
और इसका स्यूशन नंबर तीन गोल सेटिंग। अब
हम बात करेंगे मेरे सबसे फेवरेट टॉपिक के
बारे में गोल सेटिंग। जब मैं 25 साल का था
तब मैं एक ऐसे इंसान से मिला जिन्होंने
मुझे गोल सेट करने का एक ऐसा तरीका सिखाया
जो मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग
पॉइंट बना। यही वजह है कि ज्यादातर लोग
पूरी जिंदगी बिजी तो रहते हैं मेहनत तो
करते हैं लेकिन कहीं पहुंच नहीं पाते
लेकिन मेरी किस्मत अच्छी थी कि 25 की ऐज
में मुझे वो इंसान मिला जिसने मुझे यह
स्किल सिखाई जिसने मेरी पूरी जिंदगी बदल
दी। एक सुबह ब्रेकफास्ट पे उन्होंने मुझे
पूछा कि जिम अपनी करंट गोल लिस्ट दिखाओ।
मैंने कहा सर मेरे पास कोई लिस्ट नहीं है।
तब उन्होंने कहा यहीं से प्रॉब्लम शुरू
होती है। और फिर उन्होंने एक लाइन बोली
जिसने मुझे हिला दिया। अगर तुम्हारे पास
गोल्स की लिस्ट नहीं है तो मैं तुम्हारा
बैंक बैलेंस आराम से गेस कर सकता हूं। और
पता है उन्होंने बिल्कुल सही गेस किया। तो
मैंने तुरंत पूछा सर क्या सिर्फ गोल्स
लिखने से मेरा बैंक बैलेंस बदल जाएगा?
उनका जवाब था बिल्कुल 100%। उस दिन के बाद
मैंने वही किया और रिजल्ट जो उन्होंने कहा
था वही हुआ। मेरी पूरी जिंदगी पलट गई।
इकोनॉमिकली, सोशली, पर्सनली, हायर लेवल पर
और मुझे [संगीत] आज तक यह बात समझ में
नहीं आई कि यार मैं 25 साल का हो गया था,
स्कूल गया, कॉलेज गया, जॉब की, शादी हो
चुकी थी। मेरी फैमिली थी। लेकिन यह एक चीज
कैसे छूट गई? तो इसलिए यह चीज मैं आज आपको
भी [संगीत] सिखाऊंगा। क्योंकि यह एक चीज
आपकी पूरी लाइफ को 180° पलट सकती है। इसके
दो पार्ट है। नंबर वन, एक वजह और नंबर टू
है गोल्स सेट कैसे करें। नंबर वन उन्होंने
मुझे एक लाइन बोली कि जिम अगर तुम्हारे
पास एक वजह हो ना तो तुम इंपॉसिबल लगने
वाली चीजें भी कर सकते हो। बस वही लाइन
मेरे लिए गेम चेंजर थी। तुम्हारे पास
इंटेलिजेंस भी है, टैलेंट भी है। तुम
मेहनत भी कर लोगे, एबिलिटी भी है,
रिसोर्सेज है, सब कुछ है। प्रॉब्लम यह
नहीं है। प्रॉब्लम यह है कि तुम्हारे पास
एक स्ट्रांग रीजन नहीं है। याद रखना,
तुम्हारा बैंक [संगीत] बैलेंस तुम्हारी
इंटेलिजेंस का असली मेजर नहीं है। तुम
अपने बैंक बैलेंस से काफी ज्यादा स्मार्ट
हो। आपका सवाल होगा फिर ज्यादा पैसा क्यों
नहीं है? जवाब है रीजन बड़ा नहीं है। जब
तक रीज़ंस नहीं मिलते, लाइफ आपको रास्ता
नहीं दिखाती। रास्ता सिर्फ उन्हीं लोगों
को दिखाती है जो स्ट्रांग रीज़ंस लेके आते
हैं। तो अब देखते हैं कि आप किस चीज को
रीजन बना सकते हैं। नंबर वन पर्सनल रीज़ंस।
कुछ लोग होते हैं जो रिकॉग्निशन के लिए
मेहनत करते हैं। कुछ लोग रिस्पेक्ट के लिए
करते हैं। कुछ सिर्फ इस फीलिंग के लिए कि
मैं एक विनर हूं। यह सब अच्छे रीज़ंस हैं।
मेरे कुछ मिलनेियर दोस्त हैं। वो आज भी
10-12 घंटे काम करते हैं। उनको पैसा नहीं
चाहिए लेकिन जीतने का मजा चाहिए। यह भी एक
रीजन हो सकता है। नंबर टू, फैमिली रीजंस।
हम इंसान एक दूसरे से काफी गहराई से जुड़े
होते हैं। कभी-कभी हम जो अपने लिए नहीं
करते, वह किसी और के लिए कर देते हैं। मैं
एक आदमी से मिला था। उसने कहा मिस्टर रॉन
अगर मुझे अपनी फैमिली के साथ दुनिया घूमनी
है तो मुझे कम से कम $.5 लाख हर साल
चाहिए। मैंने सोचा वाओ खुद की फैमिली किसी
को इतना पुश कर सकती है। कितने लकी होते
हैं वह लोग जिनको कोई इतना इंस्पायर करता
है कि वह लोग अपनी लिमिट्स तोड़ देते हैं
और एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी काम कर जाते हैं।
नंबर थ्री एंड सबसे पावरफुल एंड्र्यू
कॉर्न की डेथ के बाद जब उनकी डेस्क खोली
गई तो उसमें एक स्लिप मिली और उस पर उनका
लाइफ गोल लिखा हुआ था और वो गोल उन्होंने
अपने 20ज में लिखा था। उस पर लिखा था मैं
अपनी लाइफ का पहला हाफ पैसा कमाने में
लगूंगा और दूसरा हाफ उन सारे पैसों को
जरूरतमंदों को वापस देने में। और इस गोल
इस रीजन से वह इतना इंस्पायर्ड हुए कि वह
दुनिया के सबसे अमीर इंसान बन गए। और फिर
लाइफ के दूसरे हाफ में उन्होंने सब कुछ
दान कर दिया। इनक्रेडिबल। है ना? यह सबसे
पावरफुल रीज़न है अनजान लोगों के लिए कुछ
करना। अब आपसे एक सवाल तुम्हें कौन सी चीज
इतना एक्साइटेड करती है कि तुम सुबह जल्दी
उठ जाओ। रात के लेट तक काम करो और पूरा
दिन लगे रहो। कौन सी वो चीज है जो तुम्हें
पूरी तरह से पैशनेट कर दे? जिस दिन मुझे
इसका जवाब मिला, मेरी लाइफ एक्सप्लोर कर
गई। मैंने अपने लिए रीज़ंस की एक लंबी
लिस्ट बना ली जो मुझे रोज वो करवाए जो
जरूरी है। जो मुझे आलस ना करने दे, जो
मुझे टाइम पास टाइम वेस्ट ना करने दे और
इस तरह वो चिंगारी 25 की उम्र में जली जो
आज तक नहीं बुझी। रीज़ंस ने मेरी लाइफ बदल
दी। अब मैं आपको अपनी दो घटनाएं बताऊंगा।
इससे तुम्हें और क्लेरिटी मिलेगी। नंबर
वन, मेरी पर्सनल स्टोरी। कि कैसे एक छोटी
चीज मेरा बड़ा रीजन बनी जिसकी वजह से
मैंने करोड़ों डॉलर कमा लिए। बात उस वक्त
की है जब मेरा टाइम बहुत खराब चल रहा था।
बहुत सारे लोन थे, कई बिल्स पे करने थे।
तो मैंने सोचा कि एक काम करते हैं कि एक
साथ बड़ा लोन ले लेते हैं। और सारे बिल्स
और लोन को एक साथ कर देते हैं। फिर
बस यह एक बड़ा लोन ही रहेगा। तो मैंने ऐसा
ही किया। थोड़े टाइम के लिए मुझे अच्छा
लगा कि बस अब एक ही लोन है। लेकिन दिक्कत
यह थी कि अब वो बड़ा लोन करना
इंपॉसिबल बन गया था। और फिर शुरू हुआ
मेंटल टेरर। एक आदमी था दिन रात फोन करता
था। सुबह कॉल, शाम को कॉल, रात को सोते
टाइम कॉल और हर कॉल पे धमकी कि कोर्ट ले
जाएंगे, क्रेडिट बर्बाद कर देंगे, गाड़ी
पड़ोसियों के सामने घसीट के ले जाएंगे,
सबके सामने तुझे और तेरी फैमिली को
बेइज्जत कर देंगे। और सच बोलूं तो उस वक्त
मैं कुछ बोल भी नहीं पाता था। बिकॉज़ मैं
कंगाल था। क्या बोलूं? लेकिन मैं यह बातें
भूला नहीं था। फिर लाइफ ने यू टर्न लिया।
मैंने खुद पे काम किया, पैसा आना शुरू हुआ
और जैसे ही बहुत सारा पैसा आना शुरू हुआ,
मेरी लिस्ट का पहला टारगेट वही इंसान था।
मैंने एक दिन बैठकर हिसाब किया और उसका
जितना भी पैसा बनता था सारा इकट्ठा किया
और एक बड़ा सूटकेस भरा और सीधा चला गया
उसके ऑफिस सीधा उसके डेस्क तक जो मुझे
जलील करता था सूटकेस खोला पूरा पैसा उसकी
टेबल पर खाली किया और सिर्फ इतना कहा गिन
लो मैं अब दोबारा इस घटिया जगह नहीं आने
वाला वो शॉक्ड कुछ भी नहीं बोल पाया और
मैं बिना पीछे देखे बाहर निकल आया यह
व्यवहार सही नहीं है आई नो पर एक बात
पक्की है यह करना जरूरी था कभी-कभी जिंदगी
में सिर्फ पैसे नहीं चुकाने होते अपनी
इज्जत भी वापस लेनी होती है। अगर तुमने
कभी अपनी इज्जत टूटते हुए देखी है तो उसको
वेस्ट मत जाने दो। ऐसे मोमेंट्स पूरी
जिंदगी की डायरेक्शन बदल सकते हैं। बस अगर
हम उसे स्ट्रांग रीजन बना दें तो। दूसरी
कहानी है मेरे एक फ्रेंड की। मेरा एक बहुत
अच्छा दोस्त था और वो एक स्कूल टीचर था।
उसने काफी साल टीचिंग की थी। अच्छा काम
रेस्पेक्टेबल जॉब। लेकिन सच यह था कि वो
यह करते-करते थक चुका था। तो एक दिन उसने
डिसाइड किया कि बस अब और नहीं। मुझे सेल्स
में जाना है और बहुत अमीर बनना है। और
हिम्मत तो देखो। बिना किसी स्ट्रांग रीजन
के, बिना किसी को बताए सीधा अपनी जॉब
छोड़ी और सेल्स में कूद गया। तो सबसे पहले
उसके अपने ही लोग हंसते हैं। जैसे ही उसने
जॉब छोड़ी, उसके भाई ने उसका मजाक उड़ाना
शुरू किया। पागल हो गया है। सेल्स और तू
एक जॉब थी वह भी गई। अब करेगा क्या? उसके
भाई ने उस बेचारे को पूरी ताकत से नीचा
दिखाया। और उसने बाद में मुझे बताया कि
जिस दिन मेरे भाई ने मुझे नीचा दिखाया ना
उस दिन मुझे इतना गुस्सा आया कि मैंने इसे
ही अपना स्ट्रांग रीजन बना दिया। मैंने
डिसाइड कर लिया कि अब मैं अमीर बन के
दिखाऊंगा। और आज वो बंदा रॉबर्ट ड्यू मेरे
मिलनेर दोस्तों में से एक है। [प्रशंसा]
द बिगेस्ट ड्यूवेंज इज मैसिव सक्सेस। बदला
लेने के लिए ना चिल्लाना पड़ता है, ना
लड़ना पड़ता है। बस इतना सक्सेसफुल बन जाओ
कि उन लोगों के मुंह बंद हो जाए। आज मैं
तुमसे एक सवाल पूछता हूं। क्या तुम इतना
गुस्सा हो सकते हो कि अपनी जिंदगी बदल दो?
लोग समझते हो कि पैसा इंटेलिजेंस का गेम
है? नहीं, वेल्थ या पैसा इंटेलिजेंस
[संगीत] का नहीं, इंस्पिरेशन का गेम है।
अपने रीज़ंस की लिस्ट इतनी लंबी बनाओ कि
तुम्हें कभी मोटिवेशन की जरूरत ही ना
पड़े। लाइफ को बदलने के लिए ना ज्यादा
ज्ञान चाहिए, ना परफेक्ट प्लान बस एक ऐसा
रीजन चाहिए जो तुम्हें अंदर से हिला दे।
क्योंकि जब रीजन स्ट्रांग होते हैं ना तो
डिसिप्लिन, मेहनत, कंसिस्टेंसी सब अपने आप
पीछे पीछे आ जाते हैं। फेडरिक नीचे ने कहा
है कि अगर आपको अपना क्यों पता है तो आप
किसी भी कैसे को सहन कर सकते हो। इसलिए
आपकी लाइफ का रिजल्ट इस बात पर डिपेंड
करता है कि आपके पास कितने स्ट्रांग रीज़ंस
हैं। हो सकता है अभी तुम्हें कुछ भी
क्लियर ना हो कि मैं क्या करूं। लेकिन
डोंट वरी जैसे ही आप अपनी रीज़ंस की लिस्ट
बनाओगे, छोटे-छोटे एकशंस लेना शुरू करोगे,
रास्ता दिखता जाएगा। सारे जवाब आते
जाएंगे। गोल सेट कैसे करें? मैंने कैसे
किए? सबसे पहले आपको प्लान करने हैं अपने
लॉन्ग रेंज गोल्स। यह तुम्हारे ड्रीम्स
होते हैं 2 साल, 3 साल, 5 साल के।
तुम्हारे लिए, तुम्हारी फैमिली के लिए।
कहां जाना है, क्या बनना है, क्या देखना
है, कैसी लाइफ जीनी है, प्यार के सपने,
फ्रीडम के सपने, ट्रैवल के सपने जो भी मन
में है लिख डालो और टाइम टू टाइम देखते
रहो। अब इनको अचीव करने के लिए मैंने
गोल्स को तीन कैटेगरी में डिवाइड करा है।
कैटेगरी नंबर वन इकोनॉमिक गोल्स। पैसा हर
इंसान की लाइफ में मेजर रोल प्ले करता है।
इसलिए इसे डिटेल में प्लान करो। हर महीने
हर साल तुम्हें कितना कमाना है। अगर कल
तुम किसी से पूछो कि बताओ इस साल एग्जैक्ट
तुम्हें कितना कमाना है? तो वो क्या
बोलेगा पता है? क्या बक रहे हो? लेकिन
सक्सेस का सिंपल डेफिनेशन है जो एवरेज लोग
नहीं करते हैं वो करना। फेलियर्स
इकोनॉमिक्स को प्लान नहीं करते इसलिए वह
फेल रहते हैं। विनर्स इकोनॉमिक्स को डिटेल
में प्लान करते हैं। इसलिए वो टॉप 5% में
आ जाते हैं। और गुड न्यूज़ यह है कि मुझे
सुन रहा कोई भी बंदा टॉप 5% जॉइ कर सकता
है। अगर वो चाहे कोई स्पेशल इंटेलिजेंस
नहीं चाहिए। कोई लक नहीं चाहिए। टैलेंट
नहीं चाहिए। सिर्फ एक चीज चाहिए
इकोनॉमिक्स को सीरियसली प्लान करना। बस
सेकंड कैटेगरी [संगीत] थिंग्स चीजें।
इसमें तुम उन सब चीजों की लिस्ट बनाओ जो
तुम चाहते हो। मैं अपनी लिस्ट में छोटी
चीजें भी रखता हूं और बड़ी चीजें भी।
क्यों? क्योंकि लिस्ट बनाने का एक बड़ा
मजा होता है। कंप्लीट करते जाओ, चेक मार्क
लगाते जाओ। आप सोच के देखो। हर दिन हर
हफ्ते तुम लिस्ट देखो और बोलो गॉट इट, गॉट
इट, गॉट इट। चाहा और उसे कंप्लीट किया। और
यह सच में जादू की तरह काम करता है। आगे
हम सब समझने वाले हैं कि कैसे यूनिवर्स
तुम तक वो पहुंचाता है जो तुम इससे मांगते
हो। तो इस तरह अपनी लिस्ट को भर दो उन सब
चीजों से जो तुम चाहते हो। तीसरी और
मोस्टेंट कैटेगरी पर्सनल डेवलपमेंट। यही
वो चीज है जो आपके ड्रीम्स, आपकी चीजों की
लिस्ट और आप कितना पैसा कमाओगे उसको पूरा
करती है। इसमें तुम हर दिन गोल सेट करते
हो खुद को बेटर बनाने के लिए। कल के
गोल्स, इस वीक के, इस मंथ के, इस साल के
गोल्स और इन्हें बोला जाता है कॉन्फिडेंस
बिल्डर्स। जब तुम छोटा गोल सेट करते हो,
मेहनत करते हो, उसे अचीव कर लेते हो, तो
तुम्हारा कॉन्फिडेंस ग्रो होता है और यह
कॉन्फिडेंस ही तुम्हें बड़े सपनों के लिए
रेडी करता है। जैसे स्ट्रांग बनना, पब्लिक
स्पीकिंग सीखना, मेंटली स्ट्रांग होना,
लीडरशिप स्किल्स सीखना, नई लैंग्वेज सीखना
या जो भी आपका काम है उससे रिलेटेड
स्किल्स। यानी वही चीज जिसकी हमने पहले
बात की थी खुद पे काम करना, खुद को
वैल्यूुएबल बनाना। यही चीज पैसा और सक्सेस
अट्रैक्ट करती है। और इसमें एक और
इंपॉर्टेंट बात जो चीज तुमने अपने से वादा
किया और फिर वह आपने पूरी की तो सेलिब्रेट
इट। खुश हो जाओ थोड़ा चिल करो। क्योंकि हम
इंसान सिर्फ दो एक्सपीरियंसेस से ग्रो
करते हैं। पेन ऑफ लूजिंग यानी हारने का
दर्द और जॉय ऑफ विनिंग यानी जीतने का
आनंद। और इन दोनों को जितना हो सके
एम्प्लीफाई करो। लूजिंग को पेनफुल बनाओ।
अगर तुमने कोई गोल सेट किया और फिर उसके
साथ टाइम पास किया सीरियस नहीं रहे तो खुद
को फील करवाओ कि यह गलत हुआ। और दोबारा
दुगुनी मेहनत के साथ लग जाओ। आपने देखा
होगा कि कुछ लोग इतनी बेकार लाइफ जीते हैं
कि दिन के एंड में उन्हें पता ही नहीं
होता कि आज मैंने किया क्या है। मैं जीता
या हारा उनको कोई क्लू नहीं होता। यह लोग
बस दिन काट रहे होते हैं। लाइफ जीने का यह
सबसे बेकार तरीका है। और आप ऐसे नहीं
जिओगे क्योंकि अब आपके पास हर वक्त काम
करने के लिए पूरा पैकेज [संगीत] है। नंबर
वन इकोनॉमिक्स, नंबर टू थिंग्स एंड नंबर
थ्री पर्सनल डेवलपमेंट। इन तीनों पर काम
करो कल के लिए, इस वीक के लिए, [संगीत] इस
मंथ के लिए, इस ईयर के लिए और लॉन्ग रेंज
के लिए। बस इतना कर दो आपकी लाइफ चलना
शुरू कर देगी। और गोल सेटिंग में एक और
आखिरी बात इसके बाद हम लॉ ऑफ़ अट्रैक्शन पे
बात करेंगे कि गोल्स की साइज तुम्हें
अफेक्ट करती है। और इसलिए चेक करो कि
तुम्हारे गोल्स कितने बड़े हैं। कुछ लोगों
के पास गोल्स होते हैं लेकिन इतने छोटे
होते हैं कि उनको कोई फर्क ही नहीं पड़ता।
एक आदमी ने मुझे बोला कि इस महीने मेरा
गोल यह है कि किसी तरह इन फालतू बिल्स के
पैसे भर दो। गोल है लेकिन बहुत घटिया गोल।
इस गोल के साथ तुम मंडे सुबह उठकर यह नहीं
बोलते वाओ आज का दिन क्या दिन है। मैं आज
अपने बिल्स चुकाने वाला हूं। नहीं तुम
बोलते [संगीत] हो ओह शिट मंडे फिर से आ
गया। सच में कुछ लोग लाइफ से इतना थक चुके
होते हैं कि वो बस फ्राइडे नाइट का वेट
करते हैं। यह वही लोग होते हैं जो बस लाइफ
को काट रहे होते हैं। जो एंड में बोलेंगे
थैंक गॉड यह लाइफ खत्म हुई। नंबर फोर लॉ
ऑफ अट्रैक्शन। अब मैं तुम्हें एक फिलॉसफी
बताता हूं जो सिखाती है कि लाइफ में जो
चाहो वो कैसे पाया जा सकता है। और इसका
फार्मूला क्या है? सिर्फ एक शब्द आस्क
मांगो। बस अगर लाइफ में एक कला है जो बहुत
अच्छे से सीखनी चाहिए तो वो है द आर्ट ऑफ
आस्किंग। [संगीत] मांगने या चाहने की कला।
क्योंकि इस यूनिवर्स में आपको देने के लिए
अनलिमिटेड है। सवाल यह नहीं कि आपको
मिलेगा या नहीं। सवाल यह है कि आप कितना
चाहते हैं। तो चाहने और उसे पाने के तीन
पावरफुल रूल्स। रूल नंबर वन मिलने की
शुरुआत मांगने से होती [संगीत] है। जैसे
ही आप कुछ चाहते हो और फिर उसे मांगते हो
तो एक अजीब सी प्रोसेस शुरू हो जाती है।
मेंटल भी और फिजिकल भी। मैं ऑनेस्टली नहीं
जानता कि यह कैसे काम करता है। बस इतना
जानता हूं कि यह [संगीत] 100% काम करता
है। देखो जिंदगी में बहुत सी ऐसी चीजें
होती है जिनके कैसे को समझना जरूरी नहीं
होता है कि यार यह कैसे होगा, कहां से
होगा। बस उस शक्ति का फायदा उठाना होता
है। बहुत सारे लोग हमेशा पेड़ की जड़ों को
समझते रह जाते हैं और कुछ लोग सीधा फल
तोड़ के खा [संगीत] लेते हैं। चॉइस
तुम्हारी है। रूल नंबर टू मिलना प्रॉब्लम
नहीं है। मिलना तो है ही चाहे कैसे भी
मिले। तो प्रॉब्लम क्या है? प्रॉब्लम है
लोग मांगते ही नहीं है। हो सकता है तुम
पूरे साल काम करते हो, मेहनत करते हो
लेकिन तुम्हें लाइफ से एक्चुअल में क्या
चाहिए वो तुमने कहीं भी लिख नहीं रखा है।
क्यों? [संगीत] रूल नंबर थ्री। लोगों को
लगता है कि इस यूनिवर्स में सब कुछ
लिमिटेड है लेकिन सक्सेस लिमिटेड नहीं है।
ऐसा नहीं है कि यह इरेशन की तरह बांटी जा
रही है और तुम जब टाइम पर नहीं पहुंचे तो
वो खत्म हो जाएगी। इस दुनिया में सब कुछ
प्रचुर मात्रा में है। बिल्कुल समंदर जैसा
है। [संगीत] प्रॉब्लम क्या है? लोग समंदर
के पास चम्मच लेके जाते हैं। समझ रहे हो?
और इस यूनिवर्स से मांगने का सही तरीका।
पहली [संगीत] बात आस्क विद इंटेलिजेंस।
मतलब घुमा फिरा के मत बोलो। क्लियर बोलो।
स्पेसिफिक बोलो। कितना, [संगीत]
कब, कैसे, किस कलर का, कितना जल्दी लिखो
और डिफाइन करो, डिस्क्राइब करो। क्योंकि
गोल्स मैग्नेट जैसे होते हैं, वह तुम्हें
अपनी तरफ खींचने लगते [संगीत] हैं। और
जितनी क्लियरली तुम उन्हें डिफाइन करोगे,
उतनी ही ज्यादा ताकत से वो तुम्हें खींच
लेंगे। दूसरी बात आस्क [संगीत] विद फेथ।
बच्चों जैसा बिलीव करो कि वह तुम्हें
मिलेगा और उम्र में बड़े लोग यहीं पर फेल
होते हैं। वह बहुत ज्यादा स्केप्टिकल होते
हैं। यानी बहुत ज्यादा डाउट करते हैं।
इसलिए बेस्ट फार्मूला यह है कि प्लान
बड़ों जैसा बनाओ लेकिन विश्वास बच्चों
जैसा और फिर देखना कैसे कमाल के रिजल्ट्स
मिलते हैं तुम्हें। [संगीत] लेकिन यह इतना
भी आसान नहीं है। इसलिए आप चाहते हो
प्रकृति या यह ब्रह्मांड आपका साथ दें तो
अब मैं जो बताऊंगा उसे ध्यान से सुनना।
सबसे पहला काम है आपके विचार। [संगीत] अगर
आपके पास पैसा नहीं है तो यह प्रॉब्लम
नहीं है। प्रॉब्लम पैसों की नहीं होती।
प्रॉब्लम होती है विचारों की। ज्यादातर
लोग इसलिए गरीब नहीं होते क्योंकि वो काम
नहीं करते, मेहनत नहीं करते [संगीत] बल्कि
इसलिए क्योंकि वो सोचते ही गलत है। दिमाग
एक फैक्ट्री है मेंटल फैक्ट्री। और तुम
पूरा दिन जो सोचते हो, जो पढ़ते हो, जो
सुनते हो, जो देखते हो वो सब रॉ मटेरियल
के रूप में इस मेंटल फैक्ट्री में जाता
है। और वही रॉ मटेरियल तुम्हारी
फाइनेंशियल, सोशल, इमोशनल लाइफ बनके बाहर
आता है। तुम बिलीव नहीं करोगे लोग अपने घर
में क्या-क्या पढ़ते रहते हैं। योद्ध,
दंगे, मर्डर, लूट, एक्सीडेंट, [संगीत]
ट्रेजडीज। पता नहीं क्यों। फिर कहते हैं
कि चलो अब दिन की शुरुआत करते हैं। सोचो
ऐसा दिन कैसा जाता होगा। रोज भर-भर के
कचरा मेंडल फैक्ट्री में डालोगे और
एक्सपेक्ट करोगे एक रिच, पॉजिटिव और
पावरफुल लाइफ। इंपॉसिबल। आपके दिमाग में
दिन भर क्या घूमता है? किस तरह के विचार?
जो आपके दिमाग में दिन भर घूमता है वही
आपके एक्शंस में दिखेगा। [संगीत] क्योंकि
विचार के बिना कोई एक्शन नहीं होता। इसलिए
अपने दिमाग को सही विचारों से भरो। दिन के
हर वक्त में ध्यान दो। आपके दिमाग में जा
क्या रहा है? और सही विचारों का एक ही
सोर्स है स्टडी। [संगीत] पढ़ो। सक्सेसफुल
बनना है। स्टडी सक्सेस। खुश रहना है।
स्टडी हैप्पीनेस। अमीर बनना है। स्टडी
वेल्थ। बहुत सारी बुक्स हैं। कोर्सेज हैं,
कॉन्फिडेंस पे, लीडरशिप पे, कम्युनिकेशन
पे, पर्सनालिटी पे। लेकिन लोग पढ़ते ही
नहीं है। और जब मैं पूछता हूं पढ़ते क्यों
नहीं हो? [संगीत] तो जॉब सिंपल होता है।
भाई बिजी रहते हैं। काम के बाद थक जाते
हैं। ऑफिस से निकलते निकलते शाम हो जाती
है। फिर घर आओ, थोड़ा खाना, थोड़ा टीवी और
फिर सीधा बेड पे। यह लोग मेहनती भी होते
हैं। हार्ड वर्किंग, बहुत सिंसियर।
[संगीत] लेकिन यही प्रॉब्लम है। सिर्फ
मेहनत से काम नहीं चलता। अगर तुम बस काम
करते रहे और सही विचारों को दिमाग में
डालना भूल गए तो पूरी लाइफ लगा के भी एंड
में एक ही जगह पहुंचोगे गरीबी और पैसों की
तंगी में। सच कड़वा है लेकिन सच है
क्योंकि सिर्फ काम करना जिंदगी चलाता है।
खुद पर काम करना जिंदगी बनाता है। [संगीत]
[प्रशंसा]
और एक इंपॉर्टेंट बात तुम शायद जो कुछ भी
सीखोगे वह सब अप्लाई नहीं कर पाओगे। एंड
इट्स ओके क्योंकि आपको [संगीत] अपने आपको
सक्सेस के लिए प्रोग्राम करना है। एक्शनंस
तो आपके अपने आप बदलने लग जाएंगे जब दिमाग
में जाने वाले विचार बदलेंगे। तो यह चीज
करते रहो और एक दिन अचानक ये सारे विचार
तुम्हारी इनकम, लाइफस्टाइल, पर्सनालिटी सब
जगह रिजल्ट दिखाने लगेंगे। अब अगला
सब्जेक्ट थोड़ा नेगेटिव [संगीत] है। इसमें
हम जानेंगे उस एक बीमारी से कैसे बचें जो
आपकी लाइफ को हर दिन खा रही है। और इस
टॉपिक में मैं एक्सपर्ट हूं क्योंकि यह
चीज मैंने खुद झेली है। नंबर फाइव सबसे
बड़ी बीमारी। जिंदगी जीने के तीन तरीके
होते हैं। नंबर वन हॉट। इस कैटेगरी वाले
लोग किसी भी चीज के लिए पूरी तरह से
कमिटेड एंड क्लियर होते हैं। विद फुल
एनर्जी, फुल सीरियसनेस। चाहे करियर हो,
बिजनेस हो या कोई भी काम बंदा 100% कमिटेड
होता है। नंबर टू कोल्ड। इस कैटेगरी वाला
इंसान क्लियरली कहता है यह मेरे लिए नहीं
है। काम मेरे लिए नहीं है। जिम मेरे लिए
नहीं है। बुक्स मेरे लिए नहीं है। मैं तो
बस मजे करूंगा। यह कंफ्यूज नहीं होता
क्योंकि जानता है कि वो क्या नहीं चाहता।
और फिर आती है थर्ड कैटेगरी ल्यूक वार्म
यानी बीच वाला। ना गम ना ठंडा। और यह सबसे
डेंजरस तरीका है लाइफ जीने का। ना पूरी
मेहनत करना ना क्विट करना। ना काम ढंग से
करना ना मजे। इस कैटेगरी वाले लोगों की
बातें ऐसी होती है। देखते हैं उम्मीद है
कभी ना कभी। कल करेंगे, बाद में करेंगे।
यह परफेक्ट टाइम नहीं है। इंसान जी भी
नहीं रहा है और छोड़ भी नहीं रहा है। साल
निकलते जाते हैं और लाइफ वहीं की वहीं रह
जाती है। आप हॉट या कोल्ड दोनों में से
कोई भी लाइफ जी लेना लेकिन दोस्त यह मत
करना। कोल्ड तरीके से ही जियो यानी गलत
डायरेक्शन लेकिन जियो क्योंकि इसका भी एक
फायदा है कि आपको जल्दी पता चल जाता है।
सीख मिल जाती है कि क्या नहीं करना है।
लेकिन यह जो है ना तीसरा वाला तरीका
[संगीत] बीच वाला। इसमें एक ही चीज होगी
और वह है टाइम वेस्ट। ना इधर के रहते हैं
ना उधर के। 25 साल बाद जागोगे और कहोगे कि
यार मैं तो कभी सीरियस ही नहीं हुआ और ऐसा
इंसान बनने से बचना चाहते हो। तीन रूल
सुनो। नंबर वन बहुत ज्यादा डाउट करना।
सोचना। इसमें दिमाग जम जाता है। आदमी बीच
में ही रह जाता है। ना इधर जाता है ना
उधर। सोचता है भाई अगर गलत साइड चला गया
तो क्या होगा? अरे कम से कम पता तो चलेगा
कि गलत साइड आया हूं। किसी भी साइड जाओ
लेकिन जाओ क्योंकि सही जिंदगी डिसीजंस से
बनती है। इन डिसीजन से नहीं। गलत डिसीजन
भी काम का होता है। वह एक्सपीरियंस देता
है। उससे अगला डिसीजन बेटर होता है। इसलिए
यह मत देखो कि कितने डिसीजंस मैं अवॉइड कर
सकता हूं। यह देखो कि कितने डिसीजंस मैं
ले सकता हूं। डिसीजन गलत हुआ या सही।
दोनों केस में तुम जीत रहे हो। मैं कर
पाऊंगा या नहीं। पॉसिबल है या नहीं। मैं
इतना बड़ा बन सकता हूं या नहीं। मैं खुद
जानता हूं इस तरह से सिर्फ सोचते रहना
कितना खतरनाक है। आपके सालों बर्बाद कर
देता है। तो सशन सिंपल है। डाउट या सिर्फ
सोचते रहने को एक्शन में कन्वर्ट करो।
नंबर टू बहुत ज्यादा डर या बहुत ज्यादा
सेफ्टी। यह हो गया तो क्या, वो हो गया तो
क्या? यह गरीबों की लैंग्वेज है। सच यह है
यहां सब कुछ रिस्की है। पैदा होते वक्त
रिस्क होता है। शादी करना रिस्क, बच्चे
करना रिस्क, बिजनेस रिस्क, इन्वेस्टमेंट
रिस्क और सबसे बड़ा सच आपका जन्म लेना ही
रिस्क है। क्योंकि यहां से आप जिंदा बच के
निकलने नहीं वाले। तो फिर ट्राई ना करना
कौन सा स्मार्ट डिसीजन है? कई लोग बोलते
हैं मुझे सेफ्टी चाहिए, सिक्योरिटी चाहिए।
ठीक है? कोई दिक्कत नहीं है। मैं दे दूंगा
तुम्हें सेफ्टी एंड सिक्योरिटी। एक कॉर्नर
में बैठ जाओ, चादर ओडा देंगे। तीन टाइम का
खाना दे देंगे। कुछ भी होने नहीं देंगे।
फुल सिक्योरिटी। शायद 100 साल जी जाओ। पर
सोचो यह कैसी जिंदगी होगी। 20 साल की फुल
एडवेंचर वाली जिंदगी 100 साल कॉर्नर में
सेफ रहने से कहीं ज्यादा अच्छी है।
क्योंकि बात यह नहीं है कि तुम कितने साल
जिए? बात यह है कि तुम कैसी जियो? तो सवाल
यह होना ही नहीं चाहिए कि रिस्क लूं या
नहीं। बस यह सोचो कि किस चीज का रिस्क
लूं? कौन सा काम? नंबर थ्री एंड बहुत
डेंजरस पैसिमिज्म। [संगीत]
पहले मैं हर चीज के लिए बहाने ढूंढता था।
मेरी एक पूरी लिस्ट थी कि मेरी लाइफ में
अच्छा क्यों नहीं हो रहा। उस लिस्ट में सब
थे गवर्नमेंट, टैक्सेस, चीजों की [संगीत]
रेट्स, वेदर, ट्रैफिक, कार कंपनी, पॉलिसी,
ट्रेनिंग, नेगेटिव रिलेटिव्स, इकोनमी,
कम्युनिटी एकदम परफेक्ट लिस्ट थी। सिर्फ
एक चीज इसमें मिस थी और वो था मैं खुद। और
जब मैंने यह चीज गौर की, तो उस दिन मैंने
वो लिस्ट फाड़ दी। नया पेपर लिया और सिर्फ
एक शब्द लिखा मैं। और यहीं से मेरी लाइफ
बदली। इसलिए एक लास्ट फिलॉसफी याद रखना कि
आपके साथ क्या हुआ वो आपकी लाइफ की
क्वालिटी डिसाइड नहीं करती क्योंकि जो
होता है ऑलमोस्ट सबके साथ होता है। सिर्फ
एक चीज से फर्क पड़ता है कि तुमने उस
सिचुएशन में क्या किया। वैसे मिस्ट लोग
हमेशा यह गिनाते हैं कि क्यों यह काम नहीं
हो सकता। यह नहीं देखते कि क्या सही है।
वो यह ढूंढते हैं कि क्या गलत है। और जब
गलती मिल जाती है ना तो वह खुश हो जाते
हैं और बोलते हैं मेरे पास पांच सॉलिड
रीजंस है कि यह काम क्यों नहीं होगा।
इनमें इतनी भी अकल नहीं होती कि काम करने
के लिए सिर्फ एक रीजन चाहिए होता है। देखा
होगा आपने सेम चीज दो लोगों के साथ होती
है। दोनों की सेम सिचुएशन लेकिन एक अमीर
बन जाता है और दूसरा वाला वहीं का वहीं रह
जाता है। डिफरेंस सिर्फ एक ही है एक्शन।
प्रॉब्लम्स या परेशानियां कोई गरीब लोगों
के लिए फिक्स नहीं है। सबको मिलती है।
लेकिन तुम उनके बाद क्या करते हो? यह चीज
सब कुछ बदल देती है। मैं पहले वेदर को
ब्लेम करता था। फिर एक दिन समझ आया कि यार
बारिश तो अमीरों पे भी होती है। सेम बारिश
सेम दो लोग। एक बंदा विंडो से देखता है और
कहता है इस मौसम में कौन सेल्स करे और घर
पर बैठ जाता है। दूसरा बंदा वही रेन देखता
है और बोलता है आज परफेक्ट डे है। आज सारे
सेल्समैन घर पे होंगे और वो निकल जाता है।
[संगीत] इवेंट सेम है लेकिन रिस्पांस अलग
है। अगर तुम्हें अपनी लाइफ बदलनी है तो
बाहर से उम्मीद करना छोड़ दो। अपनी
रिस्पांसिबिलिटी पूरी तरह से खुद ले लो।
इसी रिस्पांस से आपकी लाइफ की डायरेक्शन
चेंज होना शुरू हो जाएगी। और अब आखिरी
सब्जेक्ट है वो दिन जो आपकी जिंदगी बदल
देता है। इसके अंदर हम बात करेंगे इंसान
की सबसे बड़ी सुपर पावर की इमोशंस,
भावनाएं। [संगीत] कभी-कभी हमारी पूरी लाइफ
का डायरेक्शन बदलने के लिए सालों की जरूरत
नहीं होती। सिर्फ एक दिन काफी होता है।
इतना पावरफुल कि कभी-कभी बस थोड़ा सा फील
होना ही पूरी जिंदगी को घुमा देता है। मैं
तुम्हें दो पावरफुल इमोशंस देता हूं जो एक
ही दिन में तुम्हारी लाइफ पलट सकती है।
इमोशन नंबर वन घिन नफरत। मैं 25 साल का
था। तो एक दिन किसी ने दरवाजा खटखटाया।
मैंने दरवाजा खोला। सामने एक छोटी सी
लड़की खड़ी थी। हाथ में कुकीज़ का बॉक्स
लेके। उसने बोला सर कुकीज़ लोगे? अलग-अलग
फ्लेवर्स सिर्फ $2 और मैं लेना चाहता था।
मन था मेरा। पर प्रॉब्लम यह थी कि मैं
कंगाल था [संगीत] पैसों से। आप खुद सोचो
कॉलेज कर चुका था। जॉब चल रही थी। मेरी
शादी हो चुकी थी। बच्चे थी। 25 साल का था
और मेरे पास $2 तक नहीं थे। मैंने उसे सच
नहीं बताया। हिम्मत नहीं हुई। मैंने बोला
बेटा मैंने ऑलरेडी बहुत सारी कुकीज ले रखी
है। घर में स्टॉक भरा पड़ा है। उस लड़की
ने स्माइल की थैंक यू बोला और चली गई।
जैसे ही मैंने दरवाजा बंद किया मेरे अंदर
कुछ टूट गया। मैंने खुद से कहा बस यह
जिंदगी नहीं चाहिए। और उस दिन मैंने एक
डिसीजन लिया चाहे जितना टाइम लगे, चाहे
जितनी मेहनत लगे मेरे पास हर वक्त इतना
होना चाहिए कि मैं कोई भी चीज ले सकूं।
कुछ साल बाद मैं बैंक ऑफ अमेरिका से बाहर
निकल रहा था। गेट के बाहर दो छोटी
लड़कियां कैंडी बेच रही थी। एक ने पूछा
हाय सर कैंडी लोगे? सिर्फ $2 मैंने पूछा
तुम्हारे पास कितने बॉक्सेस हैं? उसने कहा
पांच। उसके साथ उसकी दोस्त भी थी। मैंने
उससे भी पूछा तुम्हारे पास? उसने कहा चार।
मैं सब लूंगा बेटा। ठीक है। दोनों
लड़कियां खुशी से पागल। मैंने पॉकेट से
$18 निकाले। कैंडी ली और जब वो बच्चियां
पैसे ले रही थी तो उनमें से एक मुझे देख
के बोली, "सर, आप सच में कोई बड़े आदमी
हो। कौन हो आप? सोचो जरा। सिर्फ $18 खर्च
किए और किसी ने तुम्हारी आंखों में देख के
कहा आप कुछ तो हो। उस दिन मुझे समझ आया कि
मैं पैसा इसलिए नहीं चाहता था क्योंकि
चीजें खरीदनी है। मैं पैसा इसलिए चाहता
हूं ताकि कभी वो दोबारा शर्म, वो झूठ, वो
छोटापन महसूस ना करना पड़े। यह इमोशन बड़ी
वजह बन गई। मुझे झूठ बोलने से नफरत हो गई।
मुझे गरीबी से नफरत हो गई। और वह दिन मेरी
लाइफ का टर्निंग पॉइंट बना। और इसी तरह वो
आदमी जो गरीबी या मिडविक्रिटी से नफरत
करता हो। जब उसकी वाइफ ग्रोसरी स्टोर में
खड़ी होती है। उसके सामने दो कैंस हैं। एक
35 सेंट्स का और एक 45 सेंट्स का। और वह
जानता है उसकी वाइफ 35 सेंट्स वाला ही
लेगी। सिर्फ पैसे बचाने के लिए। 35 वाले
का ना ब्रांड पसंद है ना टेस्ट पसंद है पर
मजबूरी है। और यहां वो देख रहा है आदमी कह
सकता है बस अब हो गया। अब हम ऐसे नहीं
जिएंगे। नफरत वो दिन बन सकती है जो आपकी
लाइफ बदल के रख दी। इमोशन नंबर टू डिजायर
या विल। डिजायर मतलब किसी चीज को इतना
चाहना कि बिना उसके सांस ही ना आए। आई विल
मैं यह करके ही रहूंगा। यह चीज दुनिया
हिला सकती है। बेंजामिन इजराइली ने कहा था
इंसान की विल को कोई चीज नहीं रोक सकती
अगर वह अपनी पूरी एकिस्टेंस अपने पर्पस पे
लगा दे। सीधी भाषा में या तो करूंगा या
कोशिश करते-करते मर जाऊंगा। जब कोई आदमी
यह बोल देता है दुनिया खुद साइड हो जाती
है। बिल्कुल मेरे मिलनेियर दोस्त रॉबर्ट
ड्यू की तरह जिसने बोला था कि अब तो मैं
अमीर [संगीत] बनके दिखाऊंगा। नो मैटर
व्हाट डिजायर कभी-कभी ट्रिगर हो जाती है।
कभी एक बुक से, कभी एक गाने से, कभी एक
स्पीच से, कभी एक इंसिडेंट से। पता नहीं
कौन सा मोमेंट तुम में डिजायर जगह दे।
इसलिए मेरी एडवाइस यह है कि हर ह्यूमन
एक्सपीरियंस से सीखो। क्योंकि तुम नहीं
जानते कौन सा एक्सपीरियंस तुम्हें जगह दे।
अब मैं तुम्हें सेमिनार का एंड का वो
हिस्सा बता रहा हूं जो सबसे ज्यादा सुन
लेते हैं लेकिन सबसे कम लोग फॉलो करते
हैं। और यही वो जगह है जहां से जिंदगियां
बदलती है या फिर जहां है वहीं की वहीं रह
जाती है। डोंट लेट योर लर्निंग बिकम
नॉलेज। अगर आप अपनी लर्निंग को नॉलेज
बनाते हो तो आप सबसे बड़े मूर्ख हो। लेकिन
अगर आप इसको एक्शन बना लेते हो तो आप बहुत
बड़े बन सकते हो। क्योंकि नॉलेज सेफ होता
है। नॉलेज कंफर्टेबल फील कराता है। तुम
नॉलेज के साथ बिल्कुल वहीं रह सकते हो
जहां हो। तुम बोल सकते हो कि हां मुझे पता
है। हां, मैं समझता हूं। हां, यह सही है।
और फिर भी तुम्हारी लाइफ चेंज नहीं होती।
तुम पूरी लाइफ बुक्स पढ़ सकते हो, सेमिनार
अटेंड कर सकते हो, नोट्स भर सकते हो और
फिर भी गरीब रह सकते हो। इसलिए मैं हमेशा
कहता हूं नॉट लेट योर लर्निंग बिकम नॉलेज।
लेट योर लर्निंग बिकम एक्शन। यह सारी
चीजें जो आज आपने सुनी है, यह सब बेकार
है। अगर उसमें एक भी आईडिया तुम कल यूज
नहीं करते, तो यह सेमिनार सिर्फ
एंटरटेनमेंट बन जाएगा। और एंटरटेनमेंट से
किसी का भी बैंक बैलेंस नहीं बदलता। वेल्थ
का सीधा फार्मूला है जो सीखा है उसे काम
में लगाना। क्योंकि दुनिया सोचने या सुनने
वालों को रिवॉर्ड नहीं करती। दुनिया करने
वालों को रिवॉर्ड करती है। इसलिए जो फील
करते हो उस पर कुछ करो। जो सोचते हो उस पर
कुछ करो। जो चाहते हो उसके लिए कुछ करो।
और एक्शन का मतलब यह नहीं है कि कल से तुम
एवरेस्ट चढ़ जाओ। एक्शन छोटा हो सकता है।
एक पेज लिखना, एक डिसीजन लेना, एक हैबिट
छोड़ना, एक हैबिट शुरू करना, एक रिस्क
लेना। बस एक चीज पकड़ना और रोज उस पर
एक्शन लेना। अगर तुमने यह कर लिया तो यह
सिर्फ सेमिनार नहीं होगा। यह वो दिन बन
जाएगा जो तुम्हारी जिंदगी का डायरेक्शन
बदल देगा। पर एक चीज याद रखना सबसे बड़ी
डल्यूजन सबसे बड़ा झूठ क्या है पता है?
जिसने तुमको कल भी वही रखा था और आने वाले
कल भी वही रखेगा। अगर मुझे सही जॉब मिल
जाए तब मैं पूरी मेहनत करूंगा। यह हो
जाएगा तब करूंगा। कल से करूंगा। मंडे से
करूंगा। एक तारीख से करूंगा। यह खुद को
बेवकूफ बनाने के तरीके हैं। सच यह है जो
आदमी आज के काम में 10% देता है, वह कल भी
10% ही देगा। आज बहाने मार रहा है, कल भी
मारेगा। मुझे यह पता है ज्यादातर लोग
एक्शन नहीं लेंगे। वो फ्यूचर को बस छोड़
देते हैं। बस उम्मीद करते हैं। होप यानी
उम्मीद सबसे बड़ी गलती है। हर कोई बस
उम्मीद करता है कि बाद में, अगले साल, 2
साल बाद सब ठीक हो जाएगा। लेकिन याद रखना
गरीब लोग भी उम्मीद करते हैं लेकिन फिर भी
वह गरीबी में ही मरते हैं। उम्मीद से कुछ
नहीं बदलता दोस्त। बदलता है तो सिर्फ आज
प्लानिंग करने से और उस पर एक्शन लेने से
क्योंकि अगर आज से कुछ नहीं बदला तो कल और
उसके आने वाले 5 साल बाद भी सब सेम रहेगा।
पिछले 5 साल देख लो कुछ बदला कुछ चेंज
नहीं होगा अगर तुम आज चेंज नहीं करते और
यह आपकी चॉइस की बात है। चाहो तो चेंज करो
चाहो तो मत करो। लेकिन यह जान लेना
इंपॉर्टेंट है कि किसी भी दिन तुम पूरी
लाइफ का डायरेक्शन बदल सकते हो। इसलिए
दोबारा कहता हूं सुन लो। तुम्हें एक आदमी
को रोज स्टडी करना चाहिए और वो है खुद को।
इस महीने इस साल क्या अचीव हुआ? क्या
हटाया? क्या ऐड किया? प्रायोरिटीज कैसे
चेंज हुई? अपनी अचीवमेंट्स को स्टडी करो।
अपनी डिजायर्स को स्टडी करो। क्योंकि जो
लोग प्लान नहीं करते हैं वो असल में
फेलियर का प्लान कर रहे होते हैं। तुम पूछ
सकते हो कि पैसों की तंगी है तब क्या
करें? बहुत दुखी है, दिल टूट गया है, कोई
साथ नहीं दे रहा है, काम कर रहे हैं,
लेकिन रिजल्ट नहीं दिख रहा है, तब क्या
करें? जवाब एक ही है। तुम क्या कर सकते
हो? वह करो। अगर तुम्हें इस तरह
परेशानियों में नहीं जीना पसंद बदल डालो।
अगर तुम्हें लगता है कि मैं बहुत कुछ
डिर्व करता हूं, बदल डालो। अगर तुम्हें
लगता है कि मैं पैसों की तंगी में हूं,
मैं रोज [संगीत] चिकचिक में जीता हूं, बदल
डालो। और तुम कर सकते हो। याद रखना
तुम्हें सेम रहने की कोई मजबूरी नहीं है।
सिर्फ चॉइस [संगीत] है करना या ना करना।
[संगीत]
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