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How a Poor Marwari Boy Built Haldiram's

13:16HindiBy Shivanshu AgrawalTranscribed Jul 12, 2026
0:00

साल 1919 बीकानेर की गलियों में एक 12 साल

0:03

का बच्चा अपनी बुआ से भुजिया बनाना सीखता

0:06

है और केवल दो पैसे में उसे बेचना चालू

0:09

करता है इस बात से बिल्कुल अनजान कि यही

0:12

भुजिया एक दिन हजारों करोड़ों के बिजनेस

0:14

एंपायर की नीव बनेगी और एक दिन पूरी

0:17

दुनिया में बिकने वाले लाखों भुजिया

0:19

पैकेट्स में उसका नाम हल्दीराम प्रिंटेड

0:22

होगा यह कहानी है इंडिया के सबसे बड़े

0:24

स्नैकिंग ब्रांड हल्दीराम्स

0:27

की हल्दीराम का जन्म 1908 में बीकानेर में

0:30

एक गरीब परिवार में हुआ था उनके

0:32

ग्रैंडफादर भुजिया बाजार में अपनी छोटी सी

0:35

शॉप में भुजिया बेचते थे और बचपन से ही

0:37

हल्दीराम को भुजिया में बहुत इंटरेस्ट था

0:40

इसीलिए सिर्फ 12 साल की उम्र में उन्होंने

0:42

हर दिन घंटों मेहनत करके भुजिया मेकिंग

0:45

प्रोसेस को मास्टर कर लिया और बहुत जल्द

0:47

अपने ग्रैंडफादर की शॉप में रेगुलरली

0:50

बैठने लगे लेकिन वह अपने ग्रैंडफादर की

0:52

तरह भुजिया से केवल कुछ एक्स्ट्रा पैसे

0:54

कमाकर सेटिस्फाइड नहीं थे वो अपने बिजनेस

0:57

को बढ़ाना चाहते थे हल्दीराम जो भुजिया

0:59

बेच रहे थे वो बेसन से बनती थी लेकिन

1:02

उन्होंने देखा कि राजस्थान के लोगों को

1:04

मोठ की दाल बहुत पसंद है वहां के लोग कई

1:06

डिशेस में मोठ की दाल यूज करते थे इसीलिए

1:09

हल्दीराम ने भी अपनी भुजिया को बेसन के

1:11

साथ मोठ की दाल मिला के बनाना चालू कर

1:14

दिया उनकी ये नई भुजिया लोगों को काफी

1:16

डिलीशियस लगी और एक इंस्टेंट हिट बन गई

1:19

लेकिन वो यहां नहीं रुके उन्होंने रियलाइफ

1:21

किया कि उनकी अभी की भुजिया काफी मोटी और

1:24

सॉफ्ट है लेकिन अगर वो इसे थिन और

1:26

क्रिस्पी बना दें तो कस्टमर्स का ईटिंग

1:28

एक्सपीरियंस काफी सेटिस्फाइंग बन जाएगा

1:30

इसे अंजाम देने के लिए उन्हें सबसे पहले

1:32

अपने बैटर को पतला बनाना था और साथ में एक

1:35

ऐसा मेश चाहिए था जिसके होल्स एक

1:38

स्टैंडर्ड मेश से छोटे हो ताकि उसमें से

1:40

पतली भोजिया बन सके उन्होंने मार्केट में

1:43

कई मैश मेकर्स के साथ लगकर एक परफेक्ट मेश

1:46

बनवाया और अपने बैटर के कई आइट शंस भी

1:49

ट्राई किए फाइनली कई महीनों की

1:50

एक्सपेरिमेंटेशन के बाद उन्होंने एक

1:52

परफेक्टली थिन और क्रिस्पी भुजिया बना ली

1:55

इस नई भुजिया ने सेल्स को एक्सपो एं शियली

1:57

बढ़ा दिया लेकिन हल्दीराम का इनोवेशन केवल

2:00

भुजिया की रेसिपी तक लिमिटेड नहीं था

2:02

टर्न्स आउट कि हल्दीराम सीक्रेट एक

2:04

ब्रांडिंग जीनियस भी थे मार्केट में ऐसी

2:06

कई और दुकानें थी जो भुजिया बेचती थी

2:08

लेकिन हल्दीराम चाहते थे कि कस्टमर्स के

2:10

दिमाग में उनकी भुजिया की इंपॉर्टेंस एक

2:12

नॉर्मल भुजिया से कई गुना ज्यादा हो

2:15

हल्दीराम को पता था कि महाराजा दंग सिंह

2:17

बीकानेर के सबसे पॉपुलर महाराजा रहे थे और

2:20

लोग उन्हें बहुत रिस्पेक्ट करते थे इसीलिए

2:22

हल्दीराम ने अपनी भुजिया का नाम महाराजा

2:24

दंग सिंह के नाम पे दंग सेव रख दिया

2:27

महाराजा के नाम से उनकी भुजिया बाकी सब भी

2:30

नॉर्मल भुजिया से

2:32

डिफरेंशिएबल गई इस नई ब्रांडिंग के साथ

2:35

उन्होंने प्राइसेस भी बढ़ा दिए और

2:37

कस्टमर्स ने उस प्राइस को खुशी-खुशी

2:39

एक्सेप्ट भी कर लिया अगले कुछ सालों में

2:41

हल्दीराम ने अपने दो भाइयों के साथ मिलके

2:43

बिजनेस को अच्छा खासा एस्टेब्लिश कर लिया

2:46

था और अब 36 साल की ऐज में उनकी एक वाइफ

2:48

और तीन बेटे भी थे बेहद गरीबी से उठकर आए

2:51

हल्दीराम के लिए सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा

2:54

था कि तभी 1944 में उनकी लाइफ में एक बहुत

2:57

बड़ा ट्विस्ट आया घर की लेडीज के बीच में

3:00

रिलेशंस बिगड़ने लगे बात इतनी बिगड़ गई कि

3:02

फाइनली हल्दीराम को घर छोड़कर अलग होना

3:05

पड़ा लेकिन प्रॉब्लम यह थी कि घर के साथ

3:07

साथ हल्दीराम को बिजनेस से भी अलग कर दिया

3:10

गया था जिस बिजनेस को हल्दीराम ने अपनी जी

3:13

जान लगा के बनाया था आज उसी बिजनेस से

3:15

उन्हें एक फूटी कौड़ी तक नहीं मिली और वह

3:18

रातों-रात अपनी फैमिली के साथ सड़क पे आ

3:20

गए लेकिन जिम्मेदारियों के चलते उनके पास

3:22

इमोशनल होने का कोई टाइम नहीं था हल्दीराम

3:25

ने जल्द से जल्द अपने आप को संभाला और काम

3:27

ढूंढने लगे एक दिन मार्केट में काम ढूं

3:29

ढूंढते वक्त किसी ने उनका नाम पुकारा जब

3:32

हल्दीराम ने मुड़कर देखा तो पीछे उनका एक

3:34

बचपन का दोस्त खड़ा था उनका यह दोस्त कई

3:37

सालों बाद बीकानेर लौटा था हल्दीराम ने

3:40

उसे अपनी सिचुएशन के बारे में सब कुछ बता

3:42

दिया सालों पहले हल्दीराम ने

3:50

₹2000000 लौटा दिए और यही ₹1 हल्दीराम के

3:54

लिए लाइफलाइन साबित हुए सबसे पहले तो

3:56

उन्होंने अपनी फैमिली के लिए एक छोटा सा

3:58

घर रेंट पे लिया और फिर बिजनेस आइडियाज

4:01

सोचने लगे उनकी वाइफ चंपा देवी काफी

4:03

डिलीशियस मूंग दाल बनाती थी और बिकानेर के

4:06

लोगों के लिए भी मूंग दाल एक स्टेपल डिश

4:08

थी फिर क्या उन्होंने मूंग दाल का बिजनेस

4:10

करने का फैसला लिया उन्होंने बचे हुए

4:12

पैसों से मूंग दाल स्पाइसेज और बाकी

4:15

आइटम्स खरीदे और एक काम चलाओ किचन भी

4:17

सेटअप कर लिया वो दोनों अर्ली मॉर्निंग

4:20

उठकर मूंग दाल प्रिपेयर करते और फिर

4:22

हल्दीराम पूरे दिन मार्केट में घूम-घूम कर

4:24

लोकल वर्कर्स और ऑफिस गोयर्ड बेचने लगे

4:27

कुछ ही टाइम में उन्होंने मूंग दाल के साथ

4:29

अपने ओरिजिनल पैशन यानी भुजिया को भी

4:31

बेचना शुरू कर दिया हार्ड वर्क टेस्ट और

4:34

क्वालिटी के चलते उनका एक लॉयल कस्टमर बेस

4:36

बन गया और कुछ ही टाइम में उन्होंने एक

4:38

छोटी सी शॉप को रेंट पे लेने के पैसे जमा

4:41

कर लिए शॉप खुलने के कुछ ही समय में

4:43

मार्केट में बात फैल गई कि हल्दीराम और

4:45

उनकी दंग सेव अब वापस आ चुके हैं उनकी

4:48

दुकान में लोगों की लाइन लगने लगी और

4:50

देखते ही देखते हल्दीराम फिर से लोकल

4:52

भुजिया किंग बन गए अगले कुछ सालों में

4:55

हल्दीराम ने केवल इसी दुकान को ग्रो करने

4:57

में पूरा फोकस किया लेकिन फिर 1950 सज में

5:00

कुछ ऐसा हुआ जो उनके लिए एक बहुत बड़ा

5:02

टर्निंग पॉइंट साबित हुआ हल्दीराम अपने एक

5:04

दोस्त की बेटी की शादी में कोलकाता गए थे

5:07

वहां उन्होंने सभी मेहमानों के लिए भुजिया

5:09

बनाई थी और जब उन्होंने भुजिया खाने के

5:11

बाद मेहमानों का रिएक्शन देखा तो वो काफी

5:13

सरप्राइज थे उन लोगों को भुजिया इतनी पसंद

5:16

आ रही थी कि वो तारीफ तो कर ही रहे थे साथ

5:18

में हल्दीराम को बल्क ऑर्डर्स भी दे रहे

5:20

थे हल्दीराम को समझ आ गया था कि कोलकाता

5:23

में अपने बिजनेस को एक्सपेंड करना एक बहुत

5:25

बड़ी अपॉर्चुनिटी है स्पेशली इसलिए

5:27

क्योंकि वहां ऐसा कोई बड़ा कंपटीशन था ही

5:30

नहीं जो भुजिया बेचता हो 1955 में

5:32

हल्दीराम ने अपने छोटे बेटे रामेश्वर लाल

5:35

और अपने सबसे बड़े पोते शिव किशन को

5:37

कोलकाता में बिजनेस सेटअप करने को भेजा

5:39

यहां भी उनकी शुरुआत एक छोटे से घर और

5:41

केवल 8 स्क्वायर फीट की दुकान से हुई

5:44

शुरुआत तो स्लो थी लेकिन इवेंचर काता में

5:46

भी उनका बिजनेस वर्ल्ड ऑफ माउथ के कारण

5:48

ग्रो करने लगा और देखते ही देखते वो दिन

5:51

की 150 से 200 किलो भुजिया बेचने लगे

5:53

आल्सो बंगाली को अट्रैक्ट करने के लिए

5:55

इन्होंने वहां के टेस्ट के हिसाब से

5:57

बंगाली मिक्सचर नाम की नम कीन लॉन्च की जो

6:00

काफी सक्सेसफुल हो गई अगले 12 सालों में

6:03

उनकी शॉप 8 स्क्वायर फीट से बढ़कर 25

6:05

स्क्वा फीट की हो गई और बिजनेस भी हर साल

6:08

डबल हो रहा था एक बड़ा शहर होने के कारण

6:10

कोलकाता ब्रांच का बिजनेस अब बिकानेर

6:13

ब्रांच से भी बड़ा हो चुका था 1968 तक

6:16

हल्दीराम के तीनों बेटे सेटल्ड थे उनके

6:18

बड़े बेटे मूलचंद बिकानेर का बिजनेस

6:20

संभालते थे सती दस ने फैमिली से अलग होकर

6:23

इंडिपेंडेंट शॉप्स खोल ली थी और रामेश्वर

6:26

लाल कोलकाता बिजनेस चला रहे थे इसे देखते

6:28

हुए हल्दीराम ने बिजनेस से सेमी

6:30

रिटायरमेंट ले ली और वो केवल कभी-कभी

6:32

बिजनेस को सुपरवाइज करने के लिए विजिट्स

6:35

करते थे बिजनेस ऑलरेडी अच्छा खासा चल रहा

6:37

था लेकिन इसके बाद जो हुआ वह हल्दीराम्स

6:40

की बिजनेस जर्नी में एक सुनहरा चैप्टर

6:42

साबित होने वाला था हल्दीराम के सबसे बड़े

6:44

पोते शिव किशन जो अभी तक कोलकाता बिजनेस

6:47

में अपने चाचा के साथ काम कर रहे थे वह

6:49

1968 में नागपुर में हल्दीराम की ब्रांच

6:52

खोलने का फैसला लेते हैं नागपुर आके

6:54

शिवकिशन ने देखा कि वहां के लोग बालू शज

6:56

गुजराती पेड़ा मैसूर पाक और लड्डू जैसे

6:59

स्वीट्स को बहुत पसंद करते थे मतलब वहां

7:01

के लोगों को स्वीट्स तो बहुत पसंद थे

7:03

लेकिन अभी तक इन्हें इंडिया के बाकी

7:05

हिस्सों के स्वीट्स का ज्यादा एक्सपोजर

7:07

नहीं मिला था इस अपॉर्चुनिटी को देखते हुए

7:09

शिव किशन ने नागपुर में भुजिया के साथ-साथ

7:12

अपनी फेवरेट काजू कतली भी बेचना चालू किया

7:15

स्टार्टिंग में कस्टमर उसे खरीदने में

7:17

हेजिन थे इसलिए शिव किशन अपने कस्टमर्स को

7:19

फ्री सैंपल्स ऑफर करने लगे एक बार टेस्ट

7:22

करते ही लोग काजू कतली के दीवाने होने लगे

7:25

और डिमांड स्काई रॉकेट कर गई इस सक्सेस को

7:27

देखते हुए शिफ किशन ने मलाई लड्डू

7:29

रसगुल्ला और रस मलाई जैसे स्वीट्स भी ऑफर

7:32

करना चालू कर दिए और जाने-अनजाने यहीं से

7:35

शुरुआत हुई थी हल्दी राम्स की इंडियन

7:37

स्वीट इंडस्ट्री में सबसे बड़े प्लेयर

7:39

बनने की 1971 तक नागपुर में हल्दीराम के

7:42

दो आउटलेट्स खुल गए थे लेकिन शिव किशन

7:44

यहां रुकना नहीं चाहते थे एक दिन शिव किशन

7:47

कीर्ति नाम के रेस्टोरेंट में गए जिसने

7:49

उनकी आंखें खोल दी वो रेस्टोरेंट केवल

7:51

डोसा और लस्सी ऑफर करता था और वहां हमेशा

7:54

कस्टमर्स की भीड़ लगी रहती थी यहीं से शिव

7:57

किशन को आईडिया आया हल्दीराम्स को एक शॉप

7:59

से एक रेस्टोरेंट में बदलने का मार्केट को

8:02

समझने पे उन्हें पता चला कि महाराष्ट्र

8:04

में लोगों को साउथ इंडियन डिशेस जैसे डोसा

8:06

और इडली बहुत पसंद है अब वो तो अपने

8:08

रेस्टोरेंट में बिकानेर के पॉपुलर स्नैक्स

8:11

जैसे समोसा और कचौड़ी ऑफर करना चाहते थे

8:13

लेकिन उससे पहले उन्हें कस्टमर्स को अपने

8:15

रेस्टोरेंट तक लाना था इसीलिए उन्होंने

8:17

शुरुआत उन्हीं डिशेस से करी जिनकी डिमांड

8:20

थी यानी डोसा और इडली शिव किशन ने एक 30

8:23

सीटर रेस्टोरेंट खोला और बहुत जल्द उनके

8:25

रेस्टोरेंट की सारी सीट्स ऑक्यूपाइड रहने

8:27

लगी इसे देखते हुए उन्होंने अपनी सीटिंग

8:29

कैपेसिटी डबल कर दी और मेन्यू में समोसा

8:32

और कचौड़ी भी ऐड कर दिया जो कस्टमर्स डोसा

8:35

और इडली खाने आते थे शिवकिशन उन्हें समोसा

8:37

और कचौड़ी ट्राई करने को कहते थे और जैसा

8:39

काजू कतली के समय हुआ था सेम वैसा ही अब

8:42

हुआ एक बार कस्टमर ने समोसा कचौड़ी टेस्ट

8:45

कर ली तो उनमें से ज्यादातर लोग उनके

8:47

रेगुलर कंज्यूमर्स बन गए अगले कुछ सालों

8:49

में नागपुर में हल्दी राम्स के मल्टीपल

8:51

आउटलेट्स खुल चुके थे और इसी के चलते

8:53

हल्दीराम्स नागपुर में केवल एक भुजिया

8:55

बिजनेस से बढ़कर एक इंडियन स्नैक्स

8:58

स्वीट्स और रेस्टोरेंट बिजनेस में बदल

9:00

चुका था 1975 में कोलकाता ब्रांच के

9:03

रामेश्वर लाल फैमिली बिजनेस स्ट्रक्चर से

9:05

अलग होक इंडिपेंडेंट हो जाते हैं एक

9:07

एग्रीमेंट होता है जिसके अकॉर्डिंग

9:09

रामेश्वर लाल वेस्ट बंगाल से बाहर बिजनेस

9:11

नहीं करेंगे और मूलचंद और उनके बेटे वेस्ट

9:14

बंगाल में एंट्री नहीं लेंगे इस समय तक

9:16

हल्दीराम्स की नागपुर ब्रांच बहुत अच्छी

9:18

चल रही थी लेकिन शिव केशन के दिमाग में

9:20

इससे भी बड़े प्लांस थे वो एक ऐसे शहर में

9:23

एक्सपेंड करना चाहते थे जो हल्दीराम्स को

9:25

एक नेशनल लेवल ब्रांड बना देने वाला था और

9:28

वह शहर था भारत की राजधानी दिल्ली दिल्ली

9:31

में एक्सपेंड करने के लिए शिव किशन ने

9:33

अपने छोटे भाई मनोहर लाल को चुना मनोहर

9:35

लाल तब तक बिकानेर बिजनेस में काम कर रहे

9:38

थे और शिव किशन को उनमें बहुत पोटेंशियल

9:40

दिख रहा था 1982 में मनोहर लाल अपने छोटे

9:43

भाई मधुसूदन के साथ दिल्ली आए और वहां

9:45

देखा कि चांदनी चौक फेमस स्नैक्स वेंडर से

9:48

भरा हुआ था उन्होंने अपनी लाइफ में इतना

9:51

कंपटीशन कभी नहीं देखा था लेकिन अच्छी बात

9:53

यह थी कि कंपटीशन के साथ-साथ वहां डिमांड

9:56

भी बहुत ज्यादा थी मनोहर लाल ने शिव किशन

9:58

की हेल्प से अपनी शॉप के लिए जगह खरीदी और

10:01

1983 में बिजनेस स्टार्ट कर दिया अगले एक

10:04

साल तक दिन रात एक करके उन्होंने मार्केट

10:06

में अपनी रेपुटेशन बिल्ड की और ब्रेक इवन

10:09

करने लगे कि तभी उनके साथ एक बहुत बड़ी

10:11

ट्रेजेडी हो गई 1984 के भयानक एंटी सिख

10:14

राइट्स ने दिल्ली को झुलसा दिया था और इसी

10:17

दौरान मनोहर लाल की वर्कशॉप और घर भी जल

10:20

गया अगले दो महीने तक हल्दीराम्स का

10:22

दिल्ली का बिजनेस जीरो पे आ चुका था लेकिन

10:24

मनोहर लाल ने हार नहीं मानी उन्होंने

10:26

नागपुर और बीकानेर से फाइनेंशियल हेल्प ली

10:29

और दिल्ली में एक नई 300 स्क्वा फीट की

10:31

वर्कशॉप एक्वायर की और बिजनेस को

10:33

रीस्टार्ट किया उन्होंने जो रेपुटेशन

10:35

बिल्ड की थी वो बहुत काम आई और बिजनेस

10:37

वापस पिकअप करने लगा अगले कुछ सालों में

10:40

उन्होंने ना केवल अपनी करंट वर्कशॉप को

10:42

एक्सपेंड किया बल्कि एक 2000 स् फीट की नई

10:45

फैक्ट्री भी इस्टैब्लिशमेंट

10:48

[संगीत]

10:57

क्लास कंज्यूमर ब्रांड बने इंडिया के हर

11:00

घर के लोग उनके प्रोडक्ट्स कंज्यूम करें

11:02

उन्होंने देखा कि लिबरलाइजेशन के बाद

11:19

pso2 करोड़ों लगा रहे थे लेकिन उस समय कोई

11:23

भी ब्रांड इंडियन स्नैक्स को लॉन्ग सेल्फ

11:25

लाइफ वाली पैकेजिंग में नहीं बेच रहा था

11:28

इसी अपॉर्चुनिटी को देखते हुए हल्दी राम्स

11:30

ने सबसे पहले अपनी बिकानेरी भुजिया और आलू

11:33

भुजिया जैसे प्रोडक्ट्स को नाइट्रोजन

11:35

पैकेजिंग में बेचना चालू किया जिससे इनके

11:37

शेल्फ लाइफ कुछ दिनों से बढ़कर कुछ महीनों

11:39

तक पहुंच गई इस नई पैकेजिंग के कारण

11:41

हल्दीराम्स का बिजनेस अब नागपुर या दिल्ली

11:44

तक लिमिटेड नहीं था अब लोग इंडिया के छोटे

11:46

से छोटे शहर में हल्दी राम्स की भुजिया

11:48

खरीद सकते थे लॉन्च के बाद कस्टमर्स ने इन

11:51

प्रोडक्ट्स को बहुत अच्छा रिस्पांस दिया

11:53

और इसीलिए हल्दीराम्स ने अपने पैकेज्ड फूड

11:55

सेगमेंट में रसगुल्ला सोनपापड़ी पिकल्स

11:58

कचौड़ी और इवन भे तेल पूड़ी में

11:59

डायवर्सिफाई किया देखते ही देखते

12:01

हल्दीराम्स ने 400 से ज्यादा पैकेज फूड

12:04

आइटम्स बेचना चालू कर दिए अलग-अलग

12:06

परचेसिंग पावर वाले कंज्यूमर्स को टारगेट

12:08

करने के लिए इन्होंने अलग-अलग पैक साइजेस

12:11

में अपने प्रोडक्ट्स ऑफर किए जैसे इनके कई

12:13

प्रोडक्ट्स का छोटा पैक केवल 5च में मिल

12:15

जाता है और बड़े पैक्स

12:28

₹2000000 के लिए हल्दीराम्स ने 100 से

12:30

ज्यादा डिस्ट्रीब्यूटर्स और लाखों

12:32

रिटेलर्स को ऑन बोर्ड किया इन्हीं

12:34

स्ट्रेटजी के चलते आज इंडिया के ऑलमोस्ट

12:36

हर घर में लोग हल्दीराम के स्नैक्स खाते

12:38

हैं और इवन यूएस सिंगापुर और यूके जैसे 80

12:41

से ज्यादा देशों में हल्दीराम्स वन ऑफ द

12:44

मोस्ट पॉपुलर इंडियन स्नैक्स ब्रांड है

12:46

करीब 100 साल पहले हल्दीराम्स की शुरुआत

12:49

भुजिया को दो पैसों में बेच के हुई थी और

12:51

आज उसी हल्दी राम्स ने 9 हज करोड़ से

12:54

ज्यादा का बिजनेस किया है हल्दीराम्स की

12:56

कहानी यह प्रूफ करती है कि कस्टमर्स को

12:58

डिलाइट करके लगातार प्रोडक्ट्स को इनोवेट

13:00

करके और समय के साथ खुद को बदल के कितना

13:03

भी बड़ा बिजनेस बनाया जा सकता है चाहे

13:05

शुरुआत कितनी ही छोटी क्यों ना

13:08

हो अगर आपको यह वीडियो अच्छी लगी तो मैं

13:10

रिकमेंड करूंगा कि आप नेक्स्ट इस वीडियो

13:12

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