आज हम बात करेंगे पॉलिटिकल थ्योरी के एक
नेक्स्ट टॉपिक की जिसका नाम है पावर।
तो जब हम बात करते हैं पावर की यहां पर
समझने की कोशिश करते हैं कि एक सिंपल
लैंग्वेज में पावर का मतलब क्या होता है?
तो पावर जो है यहां पर डिबेट इस चीज का
होता है सबसे पहले कि यह आती कहां से है?
दूसरा डिबेट यहां पर यह होता है जो
थिंकर्स पूछते हैं जिनको हम अभी देखेंगे
भी कि कई थिंकर्स जो हैं वो कहते हैं कि
पावर आती है खास करके वेल्थ से। कई
थिंकर्स कहते हैं पावर आती है रिसोर्सेज
और वेल्थ से।
ओनरशिप ऑफ फैक्ट्रीज से। तो अब आप समझ गए
होंगे कि हम बात कर रहे हैं कार्ल मार्क्स
की। दूसरे लोग जो है वह कहते हैं कि भाई
पावर आती है फॉर दैट मैटर रूल्स और सिस्टम
से
तो रूल बनाना, सिस्टम बनाना,
इंस्टीटशंस बनाना इनसे पावर आती है। तो
यहां पर यह चर्चा जो है इसको वेबर ने आगे
बढ़ाया।
सिमिलरली कुछ थिंकर्स का मानना है कि पावर
आती है आइडियाज और बिलीफ से।
और यह जो प्रकार के थिंक थे यह ग्रामस्की
के थॉट प्रोसेस वाले लोग थे। सिमिलरली कुछ
थिंकर्स का मानना यह भी है कि पावर जो है
वो हमारी डेली लाइफ से आती है।
और डेली लाइफ में वो कहते हैं कि हम कैसे
बात करते हैं? हम कैसे सोचते हैं?
हम कैसे बिहेव करते हैं? पावर यहां से आती
है। तो सिंपल लैंग्वेज में यह जो थॉट
प्रोसेस है, यह फोकल्ट ने दिया था। तो यह
जो पूरा का पूरा थॉट प्रोसेस है इस नजरिए
से पहली बात तो पावर को यहां पर देखा गया।
एक चीज यहां पर क्लियर हो जाती है कि पावर
जो है वो कोई
सिंगुलर फिनोमिना नहीं है।
सिंगुलर फिनोमिना नहीं है का मतलब ये है
कि वो एक रिलेशनल इफेक्ट है। रिलेशनल
इफेक्ट का मतलब ये होता है कि पावर इज़
ऑलवेज सीन इन रिलेशन टू समबडी। इन रिलेशन
टू समथिंग। पहली बात। दूसरी बात यहां पर
पावर के हमने जो अभी पिछले पॉइंट में भी
देखा कि मल्टीपल
डिटरमिनेंट्स हैं।
मल्टीपल डिटरमिनेंट्स में अलग-अलग
सोर्सेस के थ्रू पावर को ट्रेस किया गया
है। मार्क्स अगर मान लीजिए मटेरियल वेल्थ
को लेके बात कर रहा है तो वेबर
इंस्टीट्यूशन को लेके बात कर रहा है।
ग्राम्स की आइडियाज को लेके बात कर रहा
है। सिमिलरली फॉर दैट मैटर फोकल्ट जो है
वह बोल रहा है कि इट इज इन आवर डेली लाइफ
हाउ वी बिहेव हाउ वी थिंक हाउ वी स्पीक
एटसेट्रा तो यह चीज है। सिमिलरली यहां पर
अगर हम बात करें पार्थ चैटर्जी की जो एक
पोस्ट कॉलोनियल थिंकर हैं जिनके बारे में
हम लोग कई बार पहले भी चर्चा कर चुके हैं
तो पार्थ चैटर्जी ये कहते हैं कि भाई पावर
जो है आज की डेट में अगर हम ध्यान से
ऑब्जर्व करें तो वो कहीं ना कहीं
एसिमिट्रिक सिचुएशंस में देखनी चाहिए।
एसिमिट्रिक सिचुएशंस का मतलब यह है कि वह
कहते हैं पोस्ट कॉलोनियल कंट्रीज में जो
मार्जिनलाइज्ड लोग हैं उन मार्जिनलाइज्ड
लोगों को पावर कैसे मिल रही है हमें उसके
बारे में फोकस करना चाहिए। दैट वाज़ हिज
ओपिनियन एंड हिज व्यू एज सच। तो एनीवे हम
लोग इन सारी चीजों को और डिटेल में
देखेंगे। बट यहां पर एक चीज वै क्लियर है
कि जब हम बात करते हैं पावर की तो पावर
होती है एक सिंपल लैंग्वेज में एक
एबिलिटी।
एबिलिटी किस चीज की? टू मेक
अदर्स डू
व्हाट यू वांट
इवन इफ दे डोंट वांट टू डू इट।
इस नजरिए से हम पावर को पहली बात तो
डिफाइन करते हैं कि ये एक ऐसी चीज है जो
दूसरे लोगों से हम करवाना चाहते हैं कोई
एक्टिविटी जो अदरवाइज वो लोग नहीं करेंगे।
पहली बात। दूसरी बात एक एग्ज़ांपल में अगर
आप देखो अगर एक टीचर है मैं हूं यहां पर
मैं आपको यहां पर एक असाइनमेंट दे रहा हूं
और मैं असाइनमेंट देके आपको यह बोल रहा
हूं कि भाई इस असाइनमेंट को आपको सॉल्व
करना है।
आप सिंपल लाइफ में ये असाइनमेंट अदरवाइज
सॉल्व नहीं करोगे। पर क्योंकि आपको टीचर
ने यह असाइनमेंट करवाने के लिए बोला है।
मैंने आपको यह एग्जांपल यहां पर दिया
इसलिए कि अगर मैं आपको कोई टास्क दूं करने
का जैसे मैंने आपको टास्क दिया है कि रोज
क्लास के बाद आपको जिस्ट बनानी है। तो अगर
आप जस्ट बनाओगे और आप बना रहे हो एंड आई
एम श्योर जो आप यहां पर रोज सुन रहे हो वो
बना भी रहे हैं। तो ये जो चीज है इसमें हो
क्या रहा है? मैं आपके ऊपर एक पावर
एक्सरसाइज कर रहा हूं। दिस इज़ व्हाट वी आर
ट्राइंग टू से कि वी आर ट्राइंग टू यूज़
पावर ओवर यू। सो पावर जो है वह किसी भी
तरीके से आ सकती है। वो पैसे से भी आ सकती
है, पोजीशन से भी आ सकती है,
नॉलेज से भी आ सकती है, फोर्स से भी आ
सकती है, लव से भी आ सकती है और रिस्पेक्ट
से भी आ सकती है। आप जो पावर यहां पर
डिस्प्ले कर रहे हो मेरे केस में कि जस्ट
बनानी है वो आउट ऑफ रिस्पेक्ट है। क्योंकि
आपको पता है कि यहां पर आपको एग्जाम के
लिए गाइड किया जा रहा है। मिसगाइड तो नहीं
कर रहे। तो आपको क्योंकि यह चीज पता है कि
यहां पर हमें एक चीज मिल रही है जिससे कि
कल को हमारा करियर बनेगा। तो आप उस चीज के
पर्पस से इसको कर रहे हो यहां। तो ये चीज
यहां पर हमें समझने की आवश्यकता है। तो
पावर हमेशा जो है इसको पहली बात तो याद
रखिएगा इस एग्जांपल के बाद भी कि वायलेंट
या हारश वे से नहीं देखते। सिर्फ
वायलेंट और हारश वे से पावर नहीं देखी
जाती। पावर यहां पर यह पोजीशन, नॉलेज, लव,
रिस्पेक्ट से भी देखी जाती है। तो दी आर
आल्सो फॉर्म्स ऑफ पावर।
ठीक है? तो पावर को डोंट लुक एट इट ओनली
इन द नेगेटिव सेंस। दैट इज़ व्हाट वी आर
ट्राइंग टू से हियर एज सच। अब सबसे बड़ी
बात
जब हम कहते हैं पावर के बारे में तो यहां
पर कुछ ऐसे एक थिंकर्स हैं जो
पॉजिटिविस्टिक अंडरस्टैंडिंग भी देते हैं।
वो पॉजिटिविस्ट अंडरस्टैंडिंग क्या है?
पॉजिटिविस्ट अंडरस्टैंडिंग देते हैं मिशल
फोको।
और स्टीवन लूकास।
तो यह मिशल फोकस स्टीवन लुक्स क्या कहते
हैं? यह कहते हैं कि भाई पावर जो है
वो एक सल वे में ऑपरेट करती है। जिसमें वो
कहते हैं कि एजेंडा सेटिंग का काम करना,
डिस्कोर्स को कंट्रोल करना,
नरेटिव को कंट्रोल करना यानी कि जिसको हम
कहते हैं लोगों के प्रेफरेंसेस को शेप
करना।
यह भी एक फॉर्म ऑफ पावर होती है। आपने
Instagram खोला वहां पर एक कन्या आ गई।
कन्या मुंह पे जो है क्रीमें मल रही है।
क्रीमें मलमल के दिखा रही है कि देखो मेरा
बदसूरत चेहरा कितना खूबसूरत हो गया
क्रीमें लगा के। आप प्रभावित हो गए। आपने
कहा यह क्रीम हम भी लगाएंगे। कल को हो
सकता है हम भी प्रिटिसेंटा बन जाए। आपने
यह क्रीम जो है प्रभावित होकर मंगा ली। तो
इसको फोकल्ट और स्टीवन लुक्स क्या कहेंगे
कि आपकी प्रेफरेंस को शेप करती है।
आपने YouTube खोला। वहां
[गला साफ़ करने की आवाज़] पर एक सस्ता सा
फूड ब्लॉगर जो था उसने आपको दिखाया कि
₹170 में अनलिमिटेड खाना। आप वैसे ही वैशी
जानवर थे। आप उस जगह पर पहुंच गए। आपने
₹170 देकर जो है ₹17,000 का खाना खा लिया।
आपने अपने अंदर का जानवर उस दुकान पे दिखा
दिया। यह क्या था? शेपिंग ऑफ द प्रेफरेंस।
आपका एजेंडा सेट हो गया कि भाई ₹170 में
मैं ठगूंगा दुकान को जाके। तो यहां पर
फोकल्ड और लक्स क्या बोल रहे हैं? इस चीज
के ऊपर चर्चा कर रहे हैं। तो वह कह रहे
हैं कि पावर को हमें मल्टीपल तरीकों से
यहां पर समझने की आवश्यकता है। यह चीज हम
यहां पर कहने की कोशिश कर रहे हैं।
सिमिलरली अगर आप देखो तो रॉबर्ट डाल की
अगर हम बात करें रॉबर्ट डाल इस तरीके से
नहीं देखता। वो कहता है कि पावर जो है
मेरे हिसाब से बिल्कुल डायरेक्ट होती है
और स्ट्रांग होती है।
डायरेक्ट और स्ट्रांग का मतलब यह है कि
भाई पावर जो है यह इनविज़िबल तरीकों से
नहीं चलती। इनविज़िबल तरीकों से नहीं चलती।
डायरेक्ट डेस्क स्ट्रांग है। इस पॉइंट को
अगर किसी और ने इस्टैब्लिश करके और थोड़ी
सी चर्चा करी तो उसका नाम था फ्रेडरिक
नीश।
तो फ्रेडरिक नीश ने क्या बोला? उसने कहा
कि भाई पावर जो है वह सिर्फ दूसरों को
कंट्रोल करने की चीज नहीं होती है बल्कि
पावर वह कहता है कि मेरे मुताबिक जो है
किसी दूसरे को अपने पोटेंशियल को
एक्सप्लोर करने की पावर भी होती है।
अपने पोटेंशियल को एक्सप्रेस करने की पावर
भी होती है। इसको उसने कहा था विल विल टू
पावर।
विल टू पावर का मतलब यह है कि एक ऐसा डीप
डिजायर
जो ह्यूमंस को मदद करेगा ग्रो करने में।
जो ह्यूमंस को मदद करेगा उनको
अपने प्रेफरेंसेस को डोमिनेट करने में।
जो उनको मदद करेगा वर्ल्ड को शेप करने
में।
तो यह कहा उसने तो पावर को यहां पर उसने
किस नजरिए से देखा? मोरालिटी के नजरिए से।
मोरालिटी के नजरिए से। तो नीश का मानना यह
था कि भ यहां पर जब हम बात करते हैं गुड
और बैड की तो यह गुड और बैड के आइडियाज
केवल नहीं होते।
पावर का मेन मकसद होता है कि क्या आदमी
पावर का प्रयोग करके अपने ट्रू पोटेंशियल
को एक्सप्रेस कर पा रहा है या नहीं कर पा
रहा है।
लेकिन आपको याद होगा जब अपन ने हेना आरेंट
की बात की थी तो हेना आरंट ने अपनी पॉल
थॉट में एक बड़ा इंपॉर्टेंट पॉइंट बोला
था। आई विल नॉट इबोरेट इट। हम लोग डिस्कस
कर चुके हैं। उसने कहा था कि पावर इज ऑफन
कंफ्यूज्ड विद वायलेंस।
इस रीज़न से एनआरेंट ने क्या बात बोली थी
कि पावर का क्या मेन मकसद होता है कि भाई
ऑल पीपल कम टुगेदर
फॉर अ शेयरर्ड गोल। तो वी हैव ऑलरेडी
डिस्कस दैट। वी विल नॉट रिपीट इट अगेन।
तो उसने कहा था कि पावर और वायलेंस को
कंफ्यूज नहीं करने का
क्योंकि उसने एक शेयरर्ड पावर का कांसेप्ट
यहां पर दिया था।
तो इस नजरिए से हमें देखने की आवश्यकता है
कि पावर में एक विल टू पावर भी होती है।
सिमिलरली अगर हम बात करें तो यहां पर
देखें तो एक चीज और भी क्लियर है। यहां पर
जब हम बात करते हैं एक और थिंकर की जिसका
नाम है बचराज बराड्स।
तो बचराज एंड बराट्स क्या वो कहते हैं कि
पावर जो होती है वह इस तरीके से मॉडर्न
टाइम्स में यूज़ होती है कि वो पॉलिटिकल
एजेंडा को कंट्रोल करती है
और डिसेंट को सप्रेस करती है।
डिसेंट को सप्रेस करती है। तो उसने क्या
बोला कि पावर अगर पॉलिटिकल एजेंडा को
कंट्रोल कर रही है मतलब पावर यहां पर क्या
कर रही है? वह सिर्फ डिसीजंस नहीं ले रही
है।
वह डिस्कोर्स को भी सेट कर रही है।
तो इन्होंने एक नया नजरिया यहां पर देने
की कोशिश करी कि वो डिस्कोर्स को भी
बेसिकली यहां पर सेट कर रही है। इस नजरिए
से उसने देखने की कोशिश करी। तो एक चीज
क्लियर है जो हमने स्टार्टिंग में भी बोली
कि मल्टीडमेंशनल कांसेप्ट है पावर और
अलग-अलग नजरियों से एक्सपोज होता है,
एक्सप्रेस होता है। अब हम आते हैं बेसिस
एंड सोर्सेस ऑफ पावर पर।
जब हम बात करते हैं बेसिस एंड सोर्सेस ऑफ
पावर की तो पावर जो है वो रैंडमली
नहीं देखनी चाहिए क्योंकि पावर के कुछ ना
कुछ बेसिस होते हैं। बेसिस का मतलब होता
है देयर आर सर्टेन रीज़ंस बिहाइंड पावर।
सर्टेन रीज़ंस का मतलब क्या है? अभी हमने
एक चीज बोली कि पावर का मतलब है एबिलिटी
टू इन्फ्लुएंस अदर्स।
अगर पावर का मतलब है एबिलिटी टू
इन्फ्लुएंस अदर्स तो इसका कोई ना कोई रीजन
होगा ना। वो जो रीजन है कि किसी के पास एक
एबिलिटी है दूसरे को इन्फ्लुएंस करने की।
तो उसको रीजन को अपन लोग पहली बात तो बेस
कहते हैं। तो अगर आज की डेट में मान लो कि
एक स्पिरिचुअल गुरु है
जो डीप स्पिरिचुअल बातें करता है जैसे वो
धीरेंद्र शास्त्री आपने देखा है बहुत
हाईली एडवांस स्पिरिचुअल गुरु माइंड
ट्रेनिंग वगैरह की बातें करता है वो तो वो
जिस प्रकार से स्पिरिचुअल स्पिरिचुअल गुरु
जो हैं जब वो अपने भक्तों में
लोगों को सिखाते हैं कि कैसे दूसरे का
रिस्पेक्ट करो तो यह भी एक तरीके की पावर
है। यह यहां पर कहने की कोशिश हो रही है।
सिमिलरली अगर एक पुलिस वाला खड़ा है।
मुठुल्ले ने आपको जो है रेड लाइट पर रोक
लिया। अब वो आपको कह रहा है कि भ तूने रेड
लाइट जंप करी है। ₹100 का चालान दे या 500
का पत्ता साइड में जेब में डाल। तो यह जो
फियर ऑफ पनिशमेंट था। यह पनिशमेंट क्या
है? यह भी एक प्रकार की पावर है।
तो हर जगह पर अगर आप देखो तो एक रीजन जो
होता है जिसके बेसिस पर आप इन्फ्लुएंस
दूसरे को कर रहे हो वो बड़ा अलग होता है।
इस रीजन से हम कहते हैं कि जब आप इन बेसिस
को समझते हो तब आप समझ पाते हो कि भ पावर
आफ्टर ऑल फ्लो कैसे कर रही है?
फ्लो कैसे कर रही है? तो यहां पर हमारा
फोकस सारा इस चीज के ऊपर समझने का है।
तो एक चीज क्लियर है बॉस कि जो बेसिस ऑफ
पावर है उनको समझना अंडरस्टैंड करना इसलिए
क्रूशियल है क्योंकि उसको अंडरस्टैंड करने
से पावर के जो स्ट्रक्चरल
और रिलेशनल
डायनेमिक्स हैं
खास करके पॉलिटिकल अथॉरिटी के खास करके
सोशल डोमिनेशन के
हम इनको समझ पाते हैं।
ठीक है जी। अब देखो यहां पर
अमिता एडजी होनी जो है
उसने एक थ्री फोल्ड क्लासिफिकेशन दिया।
थ्री फोल्ड क्लासिफिकेशन में उसने बोला कि
पावर जो है वो कोर्सिव होती है,
यूटिलिटेरियन होती है,
नॉर्मेटिव होती है।
तो उसने कहा कि यह जो तीन कोर्सिव
यूटिलिटेरियन और नॉर्मेटिव है यह
इंस्ट्रूमेंट्स हैं।
इन इंस्ट्रूमेंट्स के तहत हम जो है
कंप्लायंस को इंश्योर कर पाते हैं।
देखो आवाज आ रही होगी आपको। देश कितना
रीसेंट डिबेट कर रहा है। कितना एक रीसेंट
थॉट प्रोसेस लोगों के अंदर उजागर हो रहा
है। सम्मेलनों के थ्रू ये हिंदू सम्मेलन
की तैयारियां चल रही हैं। इससे पावर आती
है हिंदुओं के अंदर यह सब सुनने से कि हम
देश के लिए कुछ करेंगे। हालत देखो किस
दिशा में बढ़ रहा है देश। क्या हो रहा है
यहां पर? ये भी एक तरीके की पावर है। इसको
कहते हैं न्यूसेंस पावर। कोई स्कॉलर ने
नहीं बोला। ये पवनीत सिंह स्कॉलर है। उसने
बोला है न्यूसेंस पावर।
ये ये सब करने से और सुनने से हिंदू
जागेगा।
सोचो
लानत है इस देश में।
फिर से बात करते हैं मिशल फोकल्ट की।
फोकल्ट ने क्या बोला? फोकल्ट ने कहा कि
भाई देखो जो पावर है
नॉलेज सिस्टम से फ्लो करती है।
और ग्रामस्की ने बोला आईडियोलॉजिकल कंसेंट
से फ्लो करती है।
तो फोकल्ट ने एक जगह जहां पर पावर को
नॉलेज सिस्टम के हिसाब से देखने की कोशिश
करी वहीं पर जो है ग्रामस्की ने पावर को
आईडियोलॉजिकल कंसेंट के नजरिए से देखने की
कोशिश करी।
फ्रेंच एंड रीजन जो थे
उन्होंने बोला कि भाई कोर्सिव पावर का
मतलब क्या होता है?
एक एबिलिटी टू पनिश।
रिवॉर्ड पावर क्या होती है? जहां पर आप
बेसिकली एक एबिलिटी
टू गिव बेनिफिट देते हो।
आपको असाइनमेंट दिया टीचर ने आपने सॉल्व
किया आपको मार्क्स मिले रिवॉर्ड
लेजिटमेट पावर
लेजिटमेट पावर वो पावर होती है व्हेन पीपल
फॉलो यू
फॉर योर ऑफिशियल रोल
आप एक सिविल सर्वेंट की पावर को क्यों
मानते हैं? बिकॉज़ ऑफ लेजिटमेट पावर। बिकॉज़
दे आर बेसिकली पार्ट ऑफ एन इंस्टीट्यूशन
वेयर यू कैन फॉलो देम ऑफिशियली।
एंड यू फॉलो देम फॉर द ऑफिशियल रोल दैट दे
बेसिकली आर एंटाइटल्ड टू टू एग्जीक्यूट।
एक्सपर्ट पावर
वेयर यू हैव नॉलेज।
एंड यू शेयर दैट नॉलेज टू बेसिकली मोल्ड
बिहेवियर।
एक्सपर्ट पावर का सबसे बड़ा एग्जांपल
डॉक्टर।
फ्रेंच एंड रेवन वाला ही चल रहा है।
रेफरेंड पावर
रेफरेंड पावर मींस यू एडमायर समबडी।
आप देश के प्रधानमंत्री को इतना एडमायर
करते हो घर में पीछे आपने तस्वीर भी लगा
रखी है उसकी तो इसको कहते हैं रेफरेंट
पावर कमिंग आउट ऑफ एडमाइरेशन कमिंग आउट ऑफ
ट्रस्ट
दैट यू हैव
तो यहां पर ये जो फाइव पार्ट्स ऑफ पावर था
ये किसने दिया फ्रेंचन रेमन ने
तो उन्होंने बोला कि इस नजरिए से पावर को
हमें यहां पर देखना होगा तो ये फाइव फोल्ड
क्लासिफिकेशन इनके हिसाब से एक बड़ा
इंपॉर्टेंट नजरिया है जिसके थ्रू आप पावर
को देख सकते हैं।
अच्छा यहां पर एक बड़ा इंटरेस्टिंग स्कॉलर
है पीियर बोर्दू।
पीियर उर्दू कहता है कि जो पावर है वह
हार्मलेस चीजों से भी आती है।
हार्मलेस चीजें जैसे कि स्पीच
टेस्ट
मैनर्स
कहां पर? फूड एंड क्लोथिंग में।
फूड एंड क्लोथिंग। तो ये क्या है? इनको
उसने कहा पीियर बोर्दो ने। दे आर कॉल्ड
सिंबल्स ऑफ स्टेटस।
सिंबल्स ऑफ स्टेटस।
तो वो कहता है कि जैसे आज की डेट में आप
किसी के मैनर्स को कॉपी करते हो।
जैसे बहुत सारे लोग हैं इंडिया में खास
करके बड़े एलट वर्ग के। वो पता है क्या
करते हैं?
वो ब्रिटिश रॉयल फैमिली को ऑब्जर्व करते
हैं। उनके कपड़ों को कॉपी करते हैं। उनके
टेस्ट प्रेफरेंसेस को कॉपी करते हैं। वो
छुरी कांटा पकड़ के जो है चावल काट के
खाने का काम भी कॉपी करते हैं। तो ये क्या
होता है? यह होता है एक तरीके का पीियर
बोर्दू के हिसाब से पावर हार्मलेस है। पर
यह भी आपको इन्फ्लुएंस कर रहा है कहीं ना
कहीं। तो ये जो है ना यह हिडन पावर। इसको
उसने कहा था सिंबॉलिक पावर।
तो यह सिंबॉलिक पावर का आईडिया किसने
दिया? जी पीियर बोर्दो ने। तो पीियर
बोर्दो ने यह कहा कि भाई पावर जो है उसमें
सिर्फ इंपोज करने का काम नहीं होता है।
पावर में कहीं ना कहीं आप जो है सोशल
हायरार्की जो जैसे कि किसी की स्पीच से
इंस्पायर हो गए। जैसे कई लोग प्रधानमंत्री
की स्पीच सुन के आंखों में उनके आंसू आ
जाते हैं कि इतना मधुर बोला, इतना जो है
डीप नॉलेज या पिस्टीम वाली बातें करी।
सिमिलरली किसी के टेस्ट प्रेफरेंसेस को
देख के आपको प्रभावशाली व्यवहार दिखाने को
मिला। किसी के मैनर्स को देखकर आपको वो
इन्फ्लुएंस हुआ। तो ये जो सिंबल्स हैं जो
एवरीडे लाइफ में ऑपरेट करते हैं इसके बारे
में पीियर बोर्दू ने यहां पर बात करने की
कोशिश करी और पीियर बोर्दू ने कहा कि दीज़
आर आल्सो फॉर्म्स ऑफ़ पावर दैट बेसिकली
मैटर हियर। तो आप देखो कि हमने डिफरेंट
बेसिस ऑफ़ पावर की यहां पर चर्चा करी। पर
यहां पर एक चीज जानने की आवश्यकता है कि
पावर और अथॉरिटी जो है
यह बेसिकली दिखते सेम है पर यह है
एक्चुअली में डिफरेंट।
देखो पावर का मतलब होता है कि आपके पास एक
एबिलिटी है
टू मेक समवन
डू समथिंग।
इवन इफ दे डोंट वांट टू।
पहली बात तो
तो यहां पर जो है ये इसके बेस को अभी हमने
स्टडी किया तो ये बेस क्या है? स्ट्रेंथ,
मनी,
फियर या कंट्रोल?
यह चीज है। लेकिन अगर हम बात करें अथॉरिटी
की तो अथॉरिटी का मतलब होता है कि भ पीपल
जनरली एग्री टू फॉलो यू।
बिकॉज
इट इज राइट टू डू।
वही एक तरीका है करेक्ट तरीका। तो अथॉरिटी
जो है इट कम्स फ्रॉम एक्सेप्टेंस।
अथॉरिटी कम्स फ्रॉम ट्रस्ट। अथॉरिटी कम्स
फ्रॉम लेजिटसी।
यह चीज हमें यहां पर समझनी है। अब आप एक
चीज को देखो।
एक डाकू आया।
डाकू आके आपके सामने खड़ा हो गया।
आपको कहा कि भाई मोबाइल निकाल।
आपने मोबाइल निकाल के दे दिया। इसको कहते
हैं पावर।
यह होती है पावर। क्योंकि यहां पर डाकू
क्या कर रहा है? यह फोर्स का प्रयोग कर
रहा है।
लेकिन यहां पर मान लीजिए अब एक टीचर है।
टीचर ने कहा कि भाई चलिए बैठिए सब लोग आज
एक एग्जाम होगा। आपको सभी को एक क्वेश्चन
दिया गया। आप सभी ने क्वेश्चन का आंसर
लिखा जो हम आंसर राइटिंग की क्लास में
करते हैं कि मैं आपको क्वेश्चन देता हूं
आप आंसर लिखते हो। तो जब ये होता है तो
यहां पर आप सभी जब आंसर लिखने की कोशिश
करते हो व्हेन यू ट्राई टू राइट, यू ट्राई
टू इंप्रूव, यू ट्राई टू लर्न कि कहां
गलतियां हो रही हैं? ये क्या है? ये
अथॉरिटी है।
अथॉरिटी क्यों है? क्योंकि यह एक स्पेशल
काइंड ऑफ़ पावर है।
और यह स्पेशल काइंड ऑफ़ पावर में क्या हो
रहा है कि मैं एज अ टीचर एक अपनी राइटफुल
पोजीशन को यूज़ करके
आपको एक आंसर लिखवाने की कोशिश कर रहा
हूं।
तो आप यह करते हो। तो यहां पर क्या होता
है कि हम ये कहते हैं कि पॉलिटिकल थ्योरी
में ये क्यों इंपॉर्टेंट है?
वह इसलिए इंपॉर्टेंट है क्योंकि सोसाइटीज
जो हैं
वह तब रन करती हैं बेटर
जब लीडर्स वहां के जो हैं अथॉरिटी क्रिएट
करते हैं रादर देन पावर।
क्योंकि अथॉरिटी की वजह से जो लेजिटिमेसी
आती है ना?
क्योंकि यहां पर अथॉरिटी में क्या हो रहा
है बॉस? यू आर अग्रीइंग टू फॉलो समवन और
समवनस ऑर्डर जस्ट बिकॉज़ यू बिलीव दैट इट
इज राइट टू डू इट।
तो यहां पर इस लेजिटिमेसी से क्या होगा कि
कोऑपरेशन बेटर होगी।
कोऑपरेशन बेटर होगी। तो यह कहने की हम
कोशिश कर रहे हैं। तो बेसिकली अगर हम
देखें यहां पर तो एक चीज तो क्लियर है कि
अगर एक पावर यहां पर कैपेसिटी है
एक इंडिविजुअल की या एक इंस्टीट्यूशन की
टू इन्फ्लुएंस द बिहेवियर।
तो हम यहां पर अथॉरिटी को देखते हैं एक
नॉर्मेटिव डायमेंशन के नजरिए से।
और एक नॉर्मेटिव डायमेंशन के नजरिए से हम
अथॉरिटी को देखकर क्या कहते हैं कि इट इज
बेसिकली द राइट टू एक्सरसाइज पावर।
राइट टू एक्सरसाइज पावर। क्योंकि यहां पर
क्या हो रहा है अथॉरिटी में कि आप बेसिकली
एक्सेप्ट कर रहे हो अथॉरिटी को सुनने को।
क्योंकि आपको लगता है कि यह राइट थिंग है
करने की। तो अथॉरिटी से क्या हो रहा है?
लेजिटिमेसी भी आ रही है,
कंसेंट भी आ रहा है और क्योंकि लोग अपनी
इच्छा से कर रहे हैं तो यह कोऑपरेटिव भी
है।
तो अथॉरिटी जो है बस यहां पर यह याद रखना
है कि वो कैपेसिटी से नहीं आती है कि भाई
मैं एक टीचर की कैपेसिटी में बैठ के आपके
ऊपर अथॉरिटी जता रहा हूं। अथॉरिटी आती है
एक मोरल राइटफुलनेस से।
एक मोरल राइटफुलनेस से तो अथॉरिटी यहां पर
इस पर्पस और इस तरीके से पहली बात तो आती
है। अब दूसरी बात
वेबर जो है
उसने कहा कि अथॉरिटी
थ्री टाइप्स की होती है।
ट्रेडिशनल अथॉरिटी
जो किंग की अथॉरिटी होती थी जो रूल करते
थे लोग फॉलो करते थे बिना सोचे समझे राजा
है हमें फॉलो करना ही होगा दूसरा था
करिस्मैटिक अथॉरिटी
लोगों के चाम की वजह से आपने उनको फॉलो
करा जैसे हमारे फ्रीडम फाइटर्स
आज हम उनके चाम की वजह से उनको मानते हैं।
हमारे लोकप्रिय वीर सावरकर इतने वीर थे कि
ऐसे म्यूजिक लगा के लोगों को वीरता आ जाती
है सावरकर का नाम सुन के।
फिर एक होती है लीगल रैशन।
वो होती है कि वो अथॉरिटी जो आप फॉलो करते
हो। बिकॉज़ वहां पर रूल्स हैं। वहां पर लॉस
इन्वॉल्व है।
पॉलिटिशियंस की पावर, ब्यूरोक्रेट्स की
पावर, पुलिस की पावर, लीगल रैशन अथॉरिटी।
सिमिलरली
हैना आरंट ने क्या बोला था?
आरंट ने बोला कि भाई पावर इज
व्हेन पीपल एक्ट टुगेदर।
तो उसके मुताबिक क्या है कि अथॉरिटी इस
कॉन्टेक्स्ट में एक बड़ी स्पेशल चीज है।
वो स्पेशल इसलिए है कि इसके लिए आपको कोई
शाउटिंग नहीं करनी। अथॉरिटी के लिए आपको
कोई बल का प्रयोग नहीं करना। बल्कि
अथॉरिटी यहां पर क्या है? वो रिस्पेक्ट और
एक शेयरर्ड गोल से आती है।
अच्छा यहां पर अब एक और स्कॉलर है बर्टन
रसल।
तो बर्टन रसेल ने क्या बोला?
रसेल ने बोला कि भाई पावर का मतलब है
एबिलिटी टू प्रोड्यूस
इंटेंडेड रिजल्ट।
और अगर उसका मतलब है एबिलिटी टू प्रोड्यूस
इंटेंडेड रिजल्ट तो उसने कहा कि अथॉरिटी
एक हायर फॉर्म है
क्योंकि यह एक्सेप्टेड होती है
और यहां पर बेसिकली कोई इनफोर्समेंट नहीं
होता
और यह पॉइंट बर्टन रसेल का इसलिए
इंपॉर्टेंट है क्योंकि इस पॉइंट को अगर हम
जॉन लॉक के नजरिए से देखें तो आप बेटर
समझोगे क्योंकि जॉन लॉक ने क्या कहा था?
अथॉरिटी ऑलवेज कम्स फ्रॉम द कंसेंट ऑफ द
गवर्नर।
तो आपको एक फाइन चीज यहां पर क्लियर हो
रही होगी।
एक सिंपल लैंग्वेज में पावर का मतलब है एक
एबिलिटी दूसरे से काम करवाने का। दूसरा
अगर नहीं भी करना चाहता है तो अथॉरिटी का
मतलब है कि आपने उसको बोला काम करने को।
अगला बिना किसी फोर्स के, बिना किसी
प्रयोग ऑफ एनी काइंड ऑफ वायलेंस के, फियर
के। अगला आपका काम कर रहा है प्योरली
बिकॉज़ अगले को लगता है कि जो आप बोल रहे
हो वह सही है। हमें वह करने की आवश्यकता
है। तो एक ट्रस्ट है, एक फेथ है, एक
कंसेंट है कि आप मेरे हित की ही बात
करोगे। आप समझ रहे हो? तो एक बड़ा फाइन
लाइन ऑफ डिफरेंस है जो आई बिलीव आपको यहां
पर अब पावर और अथॉरिटी के बीच में पहली
बात तो क्लियर हो जाना चाहिए। वरना आप इस
चीज में थोड़ा सा आगे जाकर परेशान ही होते
रहोगे। तो यह नजरिए से पहली बात तो देखा
अगर हम बोले तो पावर और अथॉरिटी के
रिलेशनशिप।
लेकिन अगर हम बात करते हैं पावर और एक
इंस्टीट्यूशन की यानी कि अगर पावर को
इंस्टीट्यूशनलाइज कर दिया जाए
और वो की जाती है लेट्स से कॉन्स्टिट्यूशन
से तो क्या यहां पर रिलेशनशिप बनता है
फिर? तो देखो हर सोसाइटी के अंदर हमें
चाहिए रूल्स।
हमें चाहिए सिस्टम्स। इन रूल और सिस्टम से
क्या होता है? पावर मैनेज होती है।
इस कॉन्टेक्स्ट में हम कहते हैं कि जो
कॉन्स्टिट्यूशन है वो क्या है? एक रूल बुक
है।
वो क्या बोलती है कि एक कंट्री को
कैसे लॉस बनाने हैं? कैसे इनफोर्स करने
हैं,
कैसे जज करना है कि भाई जो लॉस बने हैं,
वह फेयर है या नहीं है।
तो कॉन्स्टिट्यूशन यहां पर एक रूल बुक
सिर्फ पावर ग्रांट नहीं करती है। एज अ रूल
बुक कॉन्स्टिट्यूशन क्या करती है? पावर के
ऊपर लिमिट्स भी इंपोज करती है। पावर को
चेक भी करती है।
तो कॉन्स्टिट्यूशन जो है इस कॉन्टेक्स्ट
में क्या हो रहा है? वो ये बताती है एक
डॉक्यूमेंट के तहत कि पावर कैसे शेयर
होगी? पावर कैसे यूज़ होगी? पावर कैसे
कंट्रोल होगी?
तीन चीजों के ऊपर चर्चा करती
कॉन्स्टिट्यूशन यहां पर। तो इस रीजन से हम
कॉन्स्टिट्यूशन को एक
पावर मैप के नजरिए से देखते हैं।
कॉन्स्टिट्यूशन को हम एक पावर मैप के
नजरिए से देखते हैं। तो कॉन्स्टिट्यूशन
यहां पर क्या है?
हमारे लिए एक फाउंडेशनल
लीगल पॉलिटिकल डॉक्यूमेंट है
जो बाबर को
इंस्टिट्यूशनलाइज करता है,
डिस्ट्रीब्यूट करता है,
और एक पॉलिटिकल सिस्टम में
रेगुलेट करता है।
एक पॉलिटिकल सिस्टम में रेगुलेट करता है।
तो कॉन्स्टिट्यूशन बेसिकली क्या करने की
कोशिश कर रहा है? वह जो अपनी रॉ पिटिकल
पावर होती है
उसको एक लीगली रिकॉग्नाइज्ड
अथॉरिटी में ट्रांसफॉर्म करता है।
इस रीजन से हमने क्या बोला कि
कॉन्स्टिट्यूशन एक पावर मैप है। मतलब एक
स्ट्रक्चरल ब्लूप्रिंट है।
स्ट्रक्चरल ब्लूप्रिंट है। पावर मैप है जो
क्या कर रहा है?
डिसीजन मेकिंग को
और उसके रोल्स को एलोकेट कर रहा है।
लिमिट्स को सेट कर रहा है।
अकाउंटेबिलिटी के मैकेनिज्म्स को
एक्सप्लेन कर रहा है।
तो इस नजरिए से कॉन्स्टिट्यूशन क्या कर
रहा है? एक इंस्टीट्यूशनलाइज
कर रहा है।
पावर को इस नजरिए से ताकि
आर्बिट्रेरीनेस जो है
वो इफेक्टिवली रूल बेस्ड गवर्नेंस में
बदले।
ये चीज तो आपको समझ आ ही रही है।
रूल बेस्ड गवर्नेंस में बदले। इस रीजन से
वो कहते हैं हम लोग कि कॉन्स्टिट्यूशन एक
ऐसा फ्रेमवर्क है
जो रूल ऑफ लॉ को चलाने के लिए पाथ बताता
है।
और आपको याद होगा कि जब हमने इंडियन
गवर्नमेंट एंड पॉलिटिक्स आईजीपी पढ़ा था
तो ग्रेनविल ऑस्टिन ने क्या बात बोली थी?
ग्रेनविल ऑस्टिन ने बोला था कि भाई इंडियन
कॉन्स्टिट्यूशन क्या है? एक सीमलेस वेब है
थ्री स्ट्रैंड्स का। मैंने आपको बताई थी
मेकिंग ऑफ द इंडियन कॉन्स्टिट्यूशन वाले
डिबेट में अगर आपको याद होगा डेमोक्रेसी
सेकुलरिज्म सोशल जस्टिस
हमने सोशल डेमोक्रेसी से सोशल जस्टिस का
पूरा आर्क एनालाइज किया था ग्रनविल ऑस्टिन
के कॉन्टेक्स्ट में।
तो ग्रनविल ऑस्टिन के मुताबिक एक चीज तो
क्लियर है कि बॉस कॉन्स्टिट्यूशन जो है वह
केवल एक पावर को डिस्ट्रीब्यूट करने का
डॉक्यूमेंट नहीं है।
पावर को डिस्ट्रीब्यूट करने के साथ-साथ वह
नॉर्मेटिव गोल्स को भी बताता है।
ये चीज की चर्चा हम लोग कर चुके। देखो बॉस
आपको एग्जाम में ये चीजों को फ्यूज करके
लिखना है। और अगर ये एबिलिटी आप नहीं ला
पाओगे कि पावर के कांसेप्ट्स को
कॉन्स्टिट्यूशन में अपनाना,
पार्ट ए पॉलिटिकल थ्योरी को पार्ट बी
आईजीपी के साथ ब्लेंड करना तो आप आंसर लिख
नहीं पाओगे। अगर आप आइसोलेटेड तरीके से
लिखते हो।
सिमिलरली आप देखो कि कार्ल फ्रेडरिक है।
उसने क्या बोला? उसने कहा कि बेसिकली
कॉन्स्टिट्यूशन जो है इट इज़ बेसिकली अ वे
अ कम्युनिटी डिसाइड्स
हाउ पावर शुड बी यूज्ड।
कम्युनिटी डिसाइड पावर शुड बी यूज्ड।
क्योंकि वह हमें यह बताता है कि भाई
कौन रूल करेगा,
कैसे करेगा?
उनको रिस्पांसिबल हमें कैसे पकड़ना है।
तो कॉन्स्टिट्यूशन यहां पर क्या कर रहा
है? वो सिर्फ एक पावर डॉक्यूमेंट या पावर
मैप नहीं है जो अभी हम देख रहे थे। बल्कि
वो हाउ टू यूज़ पावर का भी डॉक्यूमेंट है।
तो कार्ल फेडरेशन ने एक नया थॉट प्रोसेस
दिया बॉस यहां पर इस नजरिए से। दूसरी बात
अगर आप देखो
एवी डाइसी है
कॉन्स्टिट्यूशनल एक्सपर्ट जिसको पॉलिटी
में पढ़ते हैं। उसने आईडिया इंट्रोड्यूस
किया था रूल ऑफ लॉ का।
उसने कहा कि भ पावर मस्ट ऑलवेज बी यूज्ड
अकॉर्डिंग टू लॉ। नॉट अकॉर्डिंग टू
पर्सनल।
तो उसने कहा कि इस कॉन्टेक्स्ट में डाइस
कॉन्स्टिट्यूशन को कैसे देखेगा? एक सेफ्टी
नेट
जो बेसिकली पर्सनल विशेस के विपरीत जाकर
रूल ऑफ लॉ को इंश्योर कर रही है।
सिमिलरली अगर हम फिर से फोकल्ट की बात
करें तो फोकल्ट ने क्या बोला? उसने कहा कि
भाई कॉन्स्टिट्यूशन को मैं केवल एक लीगल
फ्रेमवर्क नहीं देखता।
मैं देखता हूं कॉन्स्टिट्यूशन को इस नजरिए
से कि वह एक इनेबलर भी है
और पावर की
एक रैशनलिटी का आउटकम भी है
इसका मतलब यह है कि वो कहता है कि
कॉन्स्टिट्यूशन पावर
कैसे एग्जीक्यूट होगी वह भी बताएगा
और क्योंकि वह एक मैनमेड डॉक्यूमेंटेड
डिजाइंड है।
तो वह एक ट्रुथ को अपोल्ड करता है और वह
ट्रुथ आता है रैशन थिंकिंग से।
तो फोकल्ड का ये रैशन थिंकिंग का आईडिया
बहुत सिमिलर था। किसके अगर हम बात करें तो
अपन के रॉय साहब के
जो इंडियन पॉलिटिकल थॉट में हमने देखा। तो
नाउ ट्राई टू डेवलप द रिलेशन बिटवीन दम।
लेकिन यहां पर अगर हम बात करते हैं पार्थ
चटर्जी की तो पार्थ चटर्जी ने क्या बात
बोली? कि पार्थ चटर्जी ने कहा कि बस मेरे
मुताबिक कॉन्स्टिट्यूशन जो है वो सिर्फ एक
छोटे वर्ग के लोगों के लिए बात करती है
और वो वर्ग है बेसिकली एजुकेटेड अर्बन
इलीट।
वो कहते हैं कॉन्स्टिट्यूशन से एक ग्रामीण
लेवल पर एक गांव वाले का क्या लेना देना?
गांव वाले का तो कोई लेना देना नहीं है।
तो इस कॉन्टेक्स्ट में वो कहते हैं कि
वहां पर तो जो पावर होती है
वह होती है बेसिकली एक अलग तरीके की पावर।
उस पावर को वह कहते हैं बेसिकली एक
पॉलिटिकल सोसाइटी।
ये हम कांसेप्ट पढ़ चुके हैं कई बार। तो
मैं रिपीट नहीं करूंगा कि किस तरीके से एक
पॉलिटिकल सोसाइटी में बारगेनिंग होती है।
तो वो कहते हैं कि मैं कॉन्स्टिट्यूशन को
एक
सोल गिवर ऑफ पावर नहीं मानता।
कॉन्स्टिट्यूशन पावर दे रही है व्हिच इज
ट्रू। कॉन्स्टिट्यूशन पावर प्रदान कर रही
है व्हिच इज आल्सो ट्रू। बट आई डोंट फाइंड
कॉन्स्टिट्यूशन एस अ सोल गिवर ऑफ पावर। इस
नजरिए से उन्होंने देखने की कोशिश करी।
लेकिन सबसे इंपॉर्टेंट यहां पर जो फोकल्ट
है उसको समझना जरूरी है। फोकल्ट ने कहा
जैसे कि भैया अगर हम बात करें पावर की
तो वो कहता है कि अभी तक का नोशन यह है कि
पावर इज ऑलवेज हेल्ड बाय पीपल।
किसी ना किसी ने होल्ड करके रखी है। हेल्ड
बाय समवन।
बट वो कहता है कि मेरा मानना यह है कि
पावर बेसिकली फ्लोस एवरीवेयर।
वो कहता है पावर आपको स्कूल में भी
मिलेगी। पावर आपको अस्पताल में भी मिलेगी।
पावर आपको फैमिली में भी मिलेगी। पावर
आपको हाउ वी स्पीक वहां पर भी मिलेगी।
पावर आपको हाउ वी थिंक वहां पर भी मिलेगी।
तो वो कहता है कि भ मेरे मुताबिक पहली बात
तो पावर इज नॉट अबाउट होल्डिंग
एनी प्रिविलेज। इट इज़ नॉट अबाउट यूजिंग
फोर्स। इट इज नॉट अबाउट यूजिंग एनी
वायलेंस।
बल्कि उसने कहा कि पावर इज़ बेसिकली अबाउट
रूल्स, हैबिट्स
एंड एवरीथिंग दैट वी फाइंड नॉर्मल इन आवर
लाइफ।
तो इस का्टेक्स्ट में पावर को उसने बहुत
क्लोजली नॉलेज के साथ एसोसिएट करने की
कोशिश करी।
उसने कहा कि भ आप सिंपल सी चीज देखो ना
बॉस अगर आज की डेट में एक स्कूल है। अगर
वो स्कूल किसी बच्चे को कुछ सिखा रहा है
और वो सिखाने से बेसिकली बच्चे का माइंड
शेप हो रहा है। तो वो माइंड शेप होना क्या
है? वो भी एक फॉर्म ऑफ़ पावर है।
तो फोकल्ड ने क्या बोला? यह भी एक फॉर्म
ऑफ पावर है।
आप समझ रहे हो इस चीज को? तो पावर उसने
कहा कि बॉस एक डे टू डे लाइफ का फिनोमिना
है। पावर यहां पर कोई इस प्रकार से नहीं
देखने की आवश्यकता है कि नहीं सिर्फ
प्रिविलेज्ड लोगों के हाथ में ही होगी। तो
यहां पर हम यह कहते हैं कि फोकल्ट ने सबसे
पहले क्या किया
कि एक पोस्ट
स्ट्रक्चरलिस्ट
[नाक से की जाने वाली आवाज़]
क्रिटिक ऑफर किया।
व्हाई डू वी से दिस? क्योंकि अभी तक जो
पावर का कांसेप्ट था मैंने आपको बताया कि
समबडी इज होल्डिंग इट मींस देयर इज अ
स्ट्रक्चर
वेबर के हिसाब से भी वो एक स्ट्रक्चर था
चाहे वो लीगल रैशन अथॉरिटी हो तो समबडी इज़
होल्डिंग पावर देयर इज़ अ स्ट्रक्चर इन
व्हिच अ पर्सन इज़ प्रिविलेज्ड टू होल्ड
इट। आप समझ रहे हो? वो जब कहता है लीगल
रैशन तो एक प्रिविलज्ड है। करिश्मा है तो
कोई एक आदमी है जो आपसे ऊपर है हायरार्की
में।
इसके साथ-साथ ट्रेडिशनल में एक राजा है जो
प्रजा से अलग है। तो यहां पर वह क्या कहने
की कोशिश कर रहा है? वो कह रहा है कि बॉस
कहीं ना कहीं हमें एक स्ट्रक्चरल लेवल ऑफ
पावर से हटकर देखना है। फोकल्ट ने ये कहा
तो वो कहता है कि पोस्ट स्ट्रक्चरलिस्ट
लेवल पर पावर को अगर हम देखें तो यहां पर
हमें पावर को इस तरीके से देखना है कि वो
किसी पर्टिकुलर इंस्टीट्यूशन या
इंडिविजुअल में नहीं होती है। पावर रादर
वो कहता है कि डिस्पर्स्ड है।
रिलेशनल है।
प्रोडक्टिव है।
वो ऑपरेट करती है नेटवर्कक्स के थ्रू। वो
ऑपरेट करती है डिस्कोर्सेज के थ्रू। वो
ऑपरेट करती है नॉर्म्स के थ्रू। वो ऑपरेट
करती है हाउ पीपल थिंक, टॉक एटसेट्रा इन
सबके थ्रू।
तो यहां पर पोस्ट स्ट्रक्चरलिस्ट क्रिटिक
में फोकल्ड क्या कर रहा है? वह कह रहा है
आई एम नॉट कंसर्न विद हु व्हील्स पावर।
किसके पास स्ट्रक्चर है पावर का? बट आई एम
कंसर्न विद हाउ पावर इज ऑपरेटेड।
हाउ पावर ऑपरेट्स।
वो इस चीज के बारे में फोकस करता है।
आप समझ रहे हो इस चीज को? तो यहां पर उसका
नजरिया बिल्कुल अलग है। वह पावर नॉलेज
नेक्सस की बात कर रहा है।
यानी कि हर एक नॉलेज सिचुएशन में एक पावर
है।
क्योंकि हर एक नॉलेज जो है वो ट्रुथ के
ऊपर सर्वाइव करती है।
ट्रुथ के ऊपर सर्वाइव करती है।
इस रीजन से उसने इवेंचुअली आगे जाकर एक
कांसेप्ट भी दिया बायोपावर का। बायोपावर
में वह कहता है कि स्टेट्स आज की डेट में
गवर्न करते हैं
सिर्फ टेरिटरी को नहीं बल्कि हर एक
टेरिटरी के अंदर रहने वाले हर एक
इंडिविजुअल की बॉडी को, पूरी पपुलेशन को,
लोगों के लाइफ को
इसको उसने कहा बायोपावर। जाहिर सी बात है
ना देखो आपके सामने की चीज है। यह तो आज
की डेट में कैसे आपके सामने की चीज है? आप
इंडिया में रह रहे हो। इंडिया में रहने से
स्टेट जो है वह सिर्फ आपको टेरिटरी के
अंदर गवर्न थोड़ी कर रहा है।
वो तो आज की डेट में क्या कर रहा है? आपकी
बॉडी को भी गवर्न कर रहा है। बॉडी को
गवर्न कैसे कर रहा है? आज की डेट में आपका
स्टेट कि भाई आपके लिए उसने जॉगिंग
ट्रैक्स बनाए हैं। साइकिलिंग पाथ बनाए हैं
कि आप जाकर यहां पर अपनी बॉडी को लेकर
फिटनेस करो। लाइफ को आपके कर रहा है।
माइंड को आपके कर रहा है।
किस प्रकार की आप जो है नोएडा के लश्कर
नोएडा वाले न्यूज़ चैनल्स की न्यूज़
सुनोगे। अपने आप को अवेयर बनाओगे। नॉलेज
प्राप्त करोगे
अंजना और मोदी जैसे लोगों को सुन के तो
उससे क्या होगा कि जब आप इस प्रकार की
नॉलेज लोगे स्टेट क्या कर रहा है? आपकी
लाइफ को भी कंट्रोल कर रहा है। उस लाइफ से
आपके बॉडी में किस प्रकार के बॉडीली
रिएक्शन होंगे वह भी चीज को कंट्रोल कर
रहा है।
तो फोकल्ड यहां पर क्या कह रहा है? वह कह
रहा है कि बॉस बायो पावर है। सिर्फ हम
टेरिटरी की बात नहीं करते हैं।
स्टेट यहां पर आपके हर एक एस्पेक्ट को
कंट्रोल कर रहा है। सोसाइटी के हर एक
एस्पेक्ट ऑफ लिविंग को कंट्रोल कर रहा है।
फोकल्ड यहां पर यह कहने की कोशिश कर रहा
है। तो उसने यह जो बायोपावर का कांसेप्ट
इंट्रोड्यूस किया ना बॉस यह उसने
इंट्रोड्यूस किया था अपनी किताब द
हिस्ट्री ऑफ सेक्सुअलिटी में।
इस हिस्ट्री ऑफ सेक्सुअलिटी की किताब में
उसने यह बात बोली थी कि बायोपावर एक ऐसा
फॉर्म ऑफ गवर्नेंस है
जो इंडिविजुअल को सिर्फ पनिश नहीं करता है
जो पपुलेशन को रेगुलेट करता है
उनकी नॉलेज को उनके मेडिकल डिजीजसेस को
कोरोना काल में टीका लग गया तो भाई एक ऐप
के थ्रू आपकी पूरी जो
टीकाकरण की डोसेज है वह अपडेट हो गई सरकार
को पहुंच के मेडिकल डिसीज बायोपावर
सिमिलरली वो आपकी यहां पर इस केस में
पॉलिसी को
आपकी बॉडी को
आपकी हेल्थ को सबको रेगुलेट करता है
क्योंकि उसका ऑब्जेक्टिव क्या है? वह कहता
है कि भाई यह करने से आपकी लाइफ की
लोंजिविटी को स्टेट एनहांस कर रहा है।
लोंजिविटी को स्टेट एनहांस कर रहा है।
तो फोकल्ड की इस थ्योरी ऑफ़ पावर को ना
निकोलस रोज़ नाम के एक स्कॉलर ने और इबोरेट
किया था। निकोलस रोज़ ने एक कांसेप्ट दिया
था गवर्नमेंटा का।
सो गैलिटी का मतलब होता है कि एक आर्ट ऑफ
गवर्निंग बिय्ड स्टेट।
यहां पर उसने यह बात बोलने की कोशिश करी
कि कैसे जो है एनजीओस के थ्रू, मार्केट्स
के थ्रू, एक्सपर्ट नॉलेज के थ्रू
स्टेट आपको गवर्न करता है। तो पावर इज नॉट
ओनली एक्सरसाइज्ड बिटवीन यू एज एन
इंडिविजुअल एंड द स्टेट थ्रू द
कॉन्स्टिट्यूशन बट इवन थ्रू एनजीओस
मार्केट्स एंड एक्सपर्ट्स। जडिस बटलर जो
है
वह बहुत इंस्पायर्ड था फोकल्ड से। उसने यह
बात बोली कि पावर जो है वर्क्स थ्रू
लैंग्वेज एंड जेंडर आल्सो।
तो लैंग्वेज और जेंडर का भी प्रयोग होता
है जिसके थ्रू जो है पावर आगे जाकर
एक्सरसाइज होती है। तो एक चीज तो देखो
यहां पर क्लियर होती जा रही होगी आपको कि
जितनी भी अपन लोगों ने यहां पर चर्चा करी
फोकल्ड को लेकर। फोकल्ड का आईडिया सिर्फ
सिंपल था कि बॉस आई विल नॉट स्ट्रक्चरली
लुक एट पावर। आई विल गो बिय्ड दैट।
ठीक है जी। अच्छा अब यहां पर फिर पावर और
आईडियोलॉजी और हेजिमनी को अपन कैसे
देखेंगे? अब
तो आइडियोलॉजी यहां पर क्या होती है? एक
सेट ऑफ आइडियाज।
एक सेट ऑफ बिलीव्स।
जो लोगों को मजबूर करते हैं। सोचने के लिए
और फिर सोचने के बाद लोग उन आइडियाज और
बिलीव्स को फॉलो कर लेते हैं।
और फॉलो करने के बाद उनको लगता है कि यह
नॉर्मल है, नेचुरल है। और जब यह लगता है
कि यह नॉर्मल है और नेचुरल है, यहां पर
आती है हेजिमनी।
ग्रम्सकी के कांसेप्ट को हम पढ़ चुके हैं,
तो आई विल नॉट रिपीट ऑल दैट इन डिटेल
अगेन। तो एजिमिनी का मतलब होता है व्हेन
एवरीवन स्टार्ट्स बिलीविंग
दैट इट इज इन देर इंटरेस्ट टू फॉलो दिस
एंड दे डोंट नीड टू बी फोर्स टू टू फॉलो
इट
तो जैसे पावर और अथॉरिटी के बीच में एक
बड़ी हिडन और छोटी सी लाइन है डिवाइडिंग
की ना उसी तरीके से पावर आईडियोलॉजी
हेजिमिनी के बीच में भी एक बड़ी थिन
डिवाइडिंग लाइन है।
तो यहां पर आईडियोलॉजी भी एक तरीके से वही
काम कर रही है जो पावर करती है कि पावर
में हम यह कह रहे हैं कि भाई आप कुछ ना
कुछ फॉलो करोगे मेरी अथॉरिटी की वजह से और
जो अदरवाइज आप नहीं करना चाहते थे तो मैं
आपके ऊपर आपकी विल के ऊपर कुछ कंट्रोल ला
रहा हूं। लेकिन यह कंट्रोल लाने के लिए एक
आईडियोलॉजी भी टूल है कि जरूरी नहीं है कि
मुझे एज एन इंडिविजुअल या एज एन
इंस्टीट्यूशन ये करना है। मैं कुछ आइडियाज
आपके सामने रख सकता हूं। वो आइडियाज को आप
फॉलो करना शुरू कर दो। तो आप आईडियोलॉजी
से इंस्पायर हो गए। और जैसे ही आप
आईडियोलॉजी से इंस्पायर हुए और अगर आपको
लगा कि अब जो यह मैं कर रहा हूं यही एक
सही तरीका है। क्योंकि यही एक नॉर्मल है
और नेचुरल है। उसको हम एजमनी कहते हैं। तो
मूविंग फ्रॉम आईडियोलॉजी टू हेजिमनी मींस
कि भ आप आईडियोलॉजी एक विचारधारा में
मानना शुरू करें और फिर वो विचारधारा आपकी
डे टू डे लाइफ का हिस्सा बन गया। तो वो
हेजिमिनी हो गई। तो इस नजरिए से इन तीनों
के बीच में पहली बात तो एक रिलेशनशिप है
यहां पर।
तो आइडियोलॉजी और हजमनी जो है यह एक बहुत
सल इंसिडियस
और डीपली इंटरनलाइज्ड फॉर्म ऑफ पावर है।
क्योंकि आईडियोलॉजिकल पावर जो होती है वो
ऑपरेट कैसे करती है?
भाई शेपिंग
फ्रेमवर्क विद इन वि
पीपल पर्सव देयर वर्ल्ड
आइडेंटिफाई देर इंटरेस्ट
मेक पिटिकल चॉइसेस
और जब लोगों का एक वर्ल्ड व्यू होता है
जब वो ट्रांसफॉर्म हो जाए कि भाई यह कॉमन
सेंस है
तो फिर आपको यहां पर हम
उस चीज को हिजिमिनी के नजरिए से देखते
हैं।
तो आईडियोलॉजी यहां पर किसी प्रकार का
बहुत सिर्फ प्रोपोगेंडा नहीं है।
बल्कि एक रियलिटी है जिसकी वजह से लाइफ
इंटरप्रेट हो पा रही है।
आपके एस्पिरेशंस जो है वो कहीं ना कहीं
सस्टेन हो पा रहे हैं। इस्टैब्लिश हो पा
रहे हैं। चीज को समझ रहे हो आप?
गमस्की जो था वो था सबसे पहला स्कॉलर
जिसने इस चीज के बारे में चर्चा करी थी।
उसने कहा था कि भाई जो सोसाइटी में रिच और
पावरफुल होते हैं वह सिर्फ मटेरियल एसेट्स
या बैंक्स या आर्मी के थ्रू कंट्रोल नहीं
करते।
वो कंट्रोल करते हैं थ्रू आइडियाज।
और इन आइडियाज को फिर वो बनाते हैं एक
ओनली नॉर्मल वे टू लिव।
आपने अगर आज की डेट में भारतीय जनता
पार्टी के रूल को अगर समझना है ना बॉस। द
थिंकर दैट आई थिंक दैट बीजेपी लव्स द
मोस्ट इज़ बेसिकली ग्रामस्की। उन्होंने
पूरे ग्रामस्की को इंडिया में अपना दिया
है। तो आप उस नजरिए से सोच के देखना।
और यहां से फिर वो जब ओनली नॉर्मल वे बन
जाता है तो वो आईडिया से आती है फिर अपनी
हेजिमिनी।
यह चीज आपको यहां पर इसने बोली। फिर लेकिन
यही आपको याद होगा हम कई बार एक थिंकर की
बात करते हैं। लुई अलथुसर
एलूजर ने हमेशा यह बात बोली कि बॉस
सोसाइटी में क्या है कि सिर्फ
स्कूल्स न और फैमिलीज और रिलीजन जो है यह
सिर्फ नॉलेज नहीं शेयर करता
ये लोगों को शेयर करता है आल्सो हाउ टू
थिंक
और इसको उसने कहा था आइडियोलॉजिकल स्टेट
अपेरेटस
क्योंकि आइडियोलॉजिकल स्टेट अपेरेटस क्या
है? यह आइडियोलॉजिकल स्टेट अपेरेटस
बेसिकली वो है जो बेसिकली लोगों को सिर्फ
सर्वाइव करने की ट्रेनिंग नहीं देता बल्कि
उनकी ट्रेन करता है माइंड को भी लेके।
ट्रेन करता है उनकी बॉडी को भी लेके। तो
दिस आईडिया बेसिकली ऑफ़ लुई अल्तुजर कम्स
वेरी क्लोज टू दी आईडिया ऑफ़ फोकल्ट
बायोपावर।
फोकल्ड्स बायोपावर।
तो इस नजरिए से हमें देखने की आवश्यकता
है। यहां पर चीज को समझ रहे हो आप जब हम
बात करते हैं आईडियोलॉजी की इस केस में।
सिमिलरली यहां पर ना एक बड़ा इंटरेस्टिंग
स्कॉलर है नॉम चोम्सकी। ये वही है
नम चोम्सकी अपने
एप्सन फाइल्स वाले। तो नॉम चोम्सकी कहता
है मैन्युफैक्चरिंग कंसेंट।
वो कहता है कि भाई देखो मीडिया हमें दिखती
फ्री है। फ्री मीडिया है। जैसे हमारी
लश्कर नोएडा है। वो कहती है हम फ्री
मीडिया हैं। वो आज की डेट में पडकास्ट कर
करके भी जस्टिफाई करते हैं कि हम तो देखो
फ्री मीडिया है। मतलब आप सोचो कि इंसान के
अंदर कितनी इनसिक्योरिटी होगी कि उसको आके
यह बात मीडिया के सामने और दूसरों के
सामने पडकास्ट में जतानी पड़ रही है कि
भैया हम निष्पक्ष पत्रकार हैं। क्योंकि
आपकी पत्रकारिता से प्रूव नहीं हो पा रहा।
आपके कर्मा से भगवत गीता कहती है ना कि
भाई कर्मा से ही हर चीज प्रूव होनी चाहिए।
इनके कर्मा से क्योंकि प्रूव नहीं हो पा
रही तो आपको आके यहां पर जतानी पड़ रही है
लोगों के सामने कि हम निष्पक्ष हैं। देखो
हमारी बात को निष्पक्ष नजरिए से सुनो।
हमें कुछ टैग मत दो।
तो यही चीज के बारे में चोमस्की ने बोला।
वो कहता है कि हमें दिखता है कि मीडिया
फ्री है। बट रियलिटी में क्या होता है कि
वो बिग कॉरपोरेशंस जो हैं जो पावरफुल
ग्रुप्स हैं सोसाइटी के वो बेसिकली पहली
बात तो इनको कंट्रोल करते हैं।
तो वो कहता है कि भाई आज की डेट में अगर
हम बात करें कंसेंट की तो कंसेंट
मैन्युफैक्चर किया जाता है। क्योंकि
मीडिया क्या करती है कि पावरफुल लॉबीज का
जो इंटरेस्ट होता है
उस इंटरेस्ट को लाकर वो बेसिकली लोगों के
सामने इस नजरिए से पेश करती है कि लोगों
को लगता है कि यही इंटरेस्ट जो है नेशनल
इंटरेस्ट है।
यही इंटरेस्ट नेशनल इंटरेस्ट है। यहां पर
फिर एक बात आती है एक बंदे की स्टूअर्ट
हॉल।
थ्रू हॉल कहता है कि भाई मीडिया आज की डेट
में सिर्फ मैसेजेस नहीं देती है।
वो शेप भी करती है इस चीज को लेकर कि
मैसेजेस रिसीव कैसे हो रहे हैं?
रिसीव कैसे हो रहे हैं।
तो
ये चीज को समझने की आप कोशिश करिए कि नॉन
चोम्सकी ने इस नजरिए की यहां पर बात करने
की कोशिश करी। समझ में आया आपको?
अब आते हैं लेजिटिमेसी को ले। लेजिटिमेसी
का मतलब यह होता है कि भाई लोग जो है वह
यह सोचते हैं कि जो गवर्नमेंट है,
लॉ है, लीडर्स है
इनके पास एक राइट टू रूल है।
तो लेजिटिमेसी कहती है कि इट इज नॉट जस्ट
अबाउट
हैविंग पावर।
इट इज अबाउट बीइंग एक्सेप्टेड आल्सो।
इट इज अबाउट बीइंग एक्सेप्टेड आल्सो।
अगर कोई टीचर है अगर टीचर ने एक बच्चे को
डांटा
और बच्चे ने उस डांट को चुपचाप सुन लिया
तो सिर्फ यहां पर अगर हम देखें
तो एक बड़ी इंपॉर्टेंट चीज यहां पर हो रही
है कि यहां पर एक लेजिटिमेसी है।
लेजिटिमेसी क्यों है? बिकॉज़ उनको यह पता
है कि टीचर हमारे हित के लिए और हमारे
फेवर के लिए बात कर रही है।
लेकिन मान लो कि कई बार होता है कि
स्कूलों में आपने देखा होगा आपके भी स्कूल
में ये चीज हुई होगी कि कई टीचरें ऐसी
होती हैं वो बोलती रहती हैं, बोलती रहती
हैं, डांटती रहती हैं लेकिन स्टूडेंट्स
उसको रिस्पेक्ट नहीं करते।
स्टूडेंट्स उसको भाव नहीं देते। इस केस
में क्या है? टीचर के पास पावर है पर
लेजिटिमेसी नहीं है।
तो लेजिटिमेसी क्या हो रही है यहां पर?
लेजिटिमेसी यह हो रही है कि आप चीज को सुन
रहे हो क्योंकि आपको पता है कि वो आपके
इंटरेस्ट के लिए है। आप अपोज नहीं कर रहे,
रिजेक्ट नहीं कर रहे। तो लेजिटिमेसी क्या
करती है? पॉलिटिकल थ्योरी में गवर्नमेंट
को स्मूथली वर्क करने की मदद करती है।
लोग आज की डेट में लीडर्स को और लॉज़ को
इसलिए ओबे करते हैं नॉट बिकॉज़ कि उनसे वो
डरते हैं। बिकॉज़ उनको लग रहा है कि इट इज
द राइट थिंग टू डू।
और जब यह ट्रस्ट होता है जिन लोगों के
अंदर कि भाई हम इनको फॉलो इसलिए कर रहे
हैं क्योंकि यह हमारी हित की बात कर रहे
हैं। जब यह ट्रस्ट टूट जाए तो होता है
क्राइसिस ऑफ लेजिटिमेसी।
इट इज कॉल्ड क्राइसिस ऑफ लेजिटिमेसी।
यह चीज आपको समझ आई?
तो ये चीज जाननी आपको बहुत इंपॉर्टेंट है।
क्राइसिस ऑफ लेजिटिमेसी में क्या हो जाता
है कि फिर पॉलिटिक्स में आप देखते हो कि
लो वोटर टर्न आउट होगा।
एंगर होगा।
लेकिन लो वोटर टर्न आउट और एंगर डजंट मीन
बीजेपी विल नॉट फ्री। बट यहां पर यह है कि
क्राइसिस ऑफ लेजिटसी आप देखने को देखते ही
हो। सिमिलरली
लीडर्स और गवर्नमेंट्स जो हैं वह
लेजिटिमेसी को मेंटेन करने की कोशिश करते
हैं।
कैसे फेयर इलेक्शंस के थ्रू जैसे इंडिया
में सारे इलेक्शंस फ्री एंड फेयर होते
हैं। हाई क्लास गुड गवर्नेंस के थ्रू हर
स्टेट हमारे यहां पर प्रोवाइड कर रही है।
वेलफेयर स्कीम्स के थ्रू
और सबसेेंटली जो इंडिया का एक ग्लोबल लेवल
पर बेंचमार्क है वेरी स्ट्रांग लीगल
सिस्टम
हमारी जुडिशरी
प्रिस्टीन अनटच्ड
सीक्रेट
तो इन सब चीजों से क्या होता है कि लोगों
को लगता है कि भाई वी आर रिस्पेक्टेड वी
आर प्रोटेक्टेड
तो यह चीज जानने की आवश्यकता है
लेजिटिमेसी को लेकर। तो लेजिटिमेसी इस केस
में क्या है? एक नॉर्मेटिव जस्टिफिकेशन
है।
किस चीज का?
पॉलिटिकल अथॉरिटी का।
एक बिलीफ है कि दोज़ हु आर इन पावर विल
राइटली गवर्नस।
देर डिसीजंस हैव टू बी ओबेड।
तो बस यहां पर लेजिटिमेसी में सिर्फ कोई
लीगल वैलिडिटी की बात नहीं हो रही है कि
जो एक अथॉरिटी के पोजीशन में बैठा है उसके
पास लीगल अथॉरिटी है। लेजिटिमेसी इज मोर
टू डू विद परसेप्शन।
इट इज मोर टू डू विद एथिकल रेजोनेंस।
इट एथिकली रेजोनेट्स विद यू।
इट इज ऑल अबाउट सोशियोपॉलिटिकल कंसेंट।
इस रीज़न से हम कहते हैं कि लेजिटिमेसी जो
है वो कंप्लायंस इंश्योर करती है थ्रू
ट्रस्ट।
थ्रू रिकग्निशन ऑफ इट्स सिटीजंस।
समझ रहे हो आप इस चीज को? थ्रू रिकग्निशन
ऑफ इट्स सिटीजन एंड ट्रस्ट।
यहां पर फिर हम बात करते हैं
डेविड बीथम की। वो कहता है कि लेजिटिमेसी
के लिए तीन चीजें की आवश्यकता है। कि लॉ
मस्ट बी फॉललोड।
दूसरा है कि पीपल मस्ट बिलीव
कि रूल्स आर फेयर।
और तीसरा है यहां पर कि भ सिस्टम मस्ट
रिफ्लेक्ट शेयरर्ड वैल्यूज़।
तो यहां पर मेयरली सिर्फ रूल का एग्ज़िस्ट
होना सफ्फिशिएंट नहीं है बॉस।
बिलीफ होना
कि वह शेयरर्ड वैल्यूस और हमारे लिए बने
हैं। वह ज्यादा इंपॉर्टेंट है। अच्छा
डेविड बीथम ने तो यह बात बोली बोली लेकिन
यहां पर हैबरमास ने एक ट्विस्ट दे दिया।
हैबरमास ने कहा कि लेजिटिमेसी इन मॉडर्न
डेमोक्रेसी जो है वो कम्स फ्रॉम
ओपन कम्युनिकेशन
एंड पब्लिक डिबेट।
डेलीबेरेटिव डेमोक्रेसी कि भई हमें वी
मस्ट बी हर्ड
वी मस्ट बी अ पार्ट ऑफ द प्रोसेस।
दिस इज़ व्हाट बिल्ड्स ट्रस्ट। तो हैबरमास
ने इस चीज को लेकर बात करी।
तो एक चीज तो क्लियर है बॉस कि इन एनी
सिनेरियो एट द एंड ऑफ द डे वन थिंग इज
वेरी क्लियर
कि अगर रिजीम में ट्रस्ट नहीं होगा तो वो
ट्रस्ट ना होने से क्या होगा क्राइसिस ऑफ
लेजिटिमेसी होगी
ये चीज के बारे में उसने चर्चा करी ठीक है
जी तो ये है अब बॉस डिबेट पूरा पावर का आई
बिलीव आपको समझ आ गया होगा विद सम लाइव
इलस्ट्रेशन ऑफ न्यूसेंस पावर आल्सो टुडे
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