L-2 Biochemistry - Bonds & Interactions CSIR NET JUNE 2026 | KC Sir I IFAS - CSIR NET, SET GATE
सो डिअ स्टूडेंट्स कल हम बात कर रहे थे
एटॉमिक मास के बारे में एटॉमिक यूनिट के
बारे में
है ना राम जांगिड़ कल हम बात कर रहे थे
एटॉमिक मास के बारे में एटॉमिक वेट के
बारे में जैसे हमने कहा कि कार्बन का
एटॉमिक मास
या एटॉमिक वेट 12 के आसपास है। नाइट्रोजन
का 14, ऑक्सीजन का 16।
व्हाट दिस मीन्स टू अस? इसका मतलब क्या
है? कार्बन का एटॉमिक मास 12 है। पर 12 के
आगे इसकी क्या यूनिट होगी?
12 किलोग्राम, 12 ग्राम, 12 मिलीलीटर, 12
कि.मी. कुछ तो यूनिट होनी चाहिए।
एटॉमिक मास इज़ 12 बट बायोफेट 12 के आगे
क्या? व्हाट शुड बी द यूनिट?
आज हम बात कर रहे हैं कि एटॉमिक मास को
मेजर करने के लिए जो यूनिट हम इस्तेमाल
करते हैं, उस यूनिट का नाम ही है एटॉमिक
मास यूनिट। जिसको हम शॉर्ट में amu कहते
हैं। 12 के आगे हम क्या लिखेंगे? एटॉमिक
मास यूनिट। जिसको आजकल हम सिर्फ 12 यूनिट
इस तरीके से भी लिखते हैं।
ओके? amu जिसको अब हम पूरा डिटेल में
लिखने की बजाय सिर्फ u से रिप्रेजेंट करते
हैं। यस नेहा बिल्कुल विकास बिल्कुल सही
बात कह रहे हैं। डिंपल गुड गुड गुड इवनिंग
विनीत।
एएमय या यूनिट को डाल्टन के होनर में दिस
इज आल्सो रेफर्ड टू एज डाल्टन। सो हम ये
भी कह सकते हैं कि कार्बन
12 डाल्टन।
कार्बन का एटॉमिक मास कितना है? 12
डाल्टन। इन अ होनर ऑफ़ अ डाल्टन।
दिस कुड आल्सो बी रेफर्ड टू एज ग्राम
पर
मोल।
कार्बन का एटॉमिक मास कितना है? 12 ग्राम
पर मोल।
कहने का मतलब ये है कि अगर कार्बन
हम 12 ग्राम लें। कार्बन एटम को 12 ग्राम
लें तो उसमें 1 मोल
कार्बन एटम आएगा। आगे नेक्स्ट क्लास में
हम मोल कांसेप्ट पढ़ेंगे तो यह भी क्लियर
होगा। ओके? सो
अब तक हम ये कहना चाहते हैं कि एटॉमिक मास
को मेजर करने के लिए जो यूनिट्स है वह amu
हो सकती है जिसको हम u लिख सकते हैं। इट
कुड आल्सो बी रेफर्ड टू एज डाल्टन और इट
कुड आल्सो बी रेफर्ड टू एज ग्राम पर मोल।
सो ये दीज़ आर द थ्री डिफरेंट वेज़ जिससे हम
एटॉमिक मास यूनिट को रिप्रेजेंट कर सकते
हैं।
ओके
नाउ
दिस amu
या ग्राम पर मोल या डाल्टन ये एक रिलेटिव
यूनिट है। ये एक एब्सोल्यूट यूनिट नहीं
है।
रिलेटिव यूनिट का मतलब क्या है? या हाउ वी
कैन डिफाइन व्हाट वी मीन बाय 1 amu 1 amu
या 1 यूनिट का मतलब क्या?
तो वी कैन से दैट
मोर प्रेसाइजली
1 यूनिट मींस इट इज़
112
मास ऑफ
कार्बन
एटम।
यानी अगर कार्बन एटम 12 डाल्टन का है या
12 amu का है तो 1 amu कितना हो गया? इट
वुड बी 1 / 12.
सो
इन अदर वर्ड्स 1 amu और 1 डाल्टन इज़ इक्वल
टू द मास ऑफ़ 1थ ऑफ़ कार्बन।
इसको हम लगभग यह भी कह सकते हैं कि इट इज
इक्विवेलेंट टू नॉट प्रिसाइजली एकदम बराबर
तो नहीं और लगभग हम ये भी कह सकते हैं इट
इज़ इक्विवेलेंट टू मास ऑफ़
वन
प्रोटॉन
और
न्यूट्रॉन।
एग्जैक्ट डेफिनेशन तो AU की ही होगी।
दैट
इट इज 112 मास ऑफ कार्बन। बट हम जानते हैं
कार्बन 12 में देयर आर सिक्स प्रोटॉन्स
एंड देयर आर सिक्स न्यूट्रॉन्स
इन इट्स न्यूक्लियस।
यानी 12 न्यूक्लियों्स की वजह से 12 amu
है। तो वन न्यूक्लियों की वजह से कितना
होगा? 1
या हम ये भी कह सकते हैं कि रफली इट इज़
इक्विवेलेंट टू मास ऑफ़
वन हाइड्रोजन एटम। और हम हाइड्रोजन की कौन
सी फॉर्म की बात कर रहे हैं? वन H1 के
बारे में।
सो ये कुछ तरीके हैं डिफाइन करने के लिए
कि 1 amu इज इक्वल टू मास 112 मास ऑफ़
कार्बन। रफली इट इज़ इक्विवेलेंट टू अ मास
ऑफ़ वन प्रोटॉन और मास ऑफ़ वन न्यूट्रॉन।
एंड नॉर्मल हाइड्रोजन दैट इज़ 1H1
प्रोटोनियम जिसके बारे में कल भी बात कर
रहे थे। इट हैज़ ओनली वन प्रोटॉन। सो उसे
भी 1 amu कहा जा सकता है। हां पूजा यही
मैं कह रहा हूं। इन अदर वर्ड्स, तो मास ऑफ
वन प्रोटॉन और मास या मास ऑफ वन न्यूट्रॉन
कितना होता है? एब्सोल्यूट पूछा जाए तो
एब्सोल्यूट मास इज़ 1.67
* 10 रे टू - 24 ग्राम या किलोग्राम में
पूछा जाए तो 1.67
* 10 टू पावर - 27 कि.ग्र. सो हम कह सकते
हैं रफली वन एटॉमिक मास यूनिट इज
इक्विवेलेंट टू
1.67 * 10 -2 ग्राम दैट इज रफली इट इज
इक्वलेंट टू मास ऑफ वन प्रोटॉन।
ये एक रिलेटिव यूनिट है। रिलेटिव यूनिट का
मतलब कि
अगर आपको कार्बन और हाइड्रोजन को कंपेयर
कराना है। टोटल फाइंड दैट कि एक तरफ अगर
आप कार्बन एटम लें तो दूसरी तरफ आपको कम
से कम 12 हाइड्रोजन एटम लेने पड़ेंगे। तब
चीजें बराबर होगी। दैट इज़ कार्बन एटम इज़
12 टाइम्स हैवियर एज कंपेयर टू दैट ऑफ
हाइड्रोजन एटम। यही एटॉमिक मास यूनिट्स जो
एटम के लिए इस्तेमाल की जाती है। दैट इज़
आल्सो यूज्ड फॉर इवन मॉलिक्यूल्स।
मॉलिक्यूलर वेट के लिए भी यही चीज
इस्तेमाल होती है। मतलब कि आपको कहा वाटर
का मॉलिक्यूलर वेट 18 है। तो इससे क्या
मतलब निकाला जाए?
इसका मतलब ये हुआ कि वाटर हाइड्रोजन एटम
के कंपैरिजन में 18 टाइम्स हैवियर है।
ओके?
अगर आपको लिखा है कि C6H12O6
का मॉलिक्यूलर वेट 180 है सपोज तो इसका
मतलब क्या? 180 यूनिट है तो इसका मतलब
क्या?
यस बायो बिल्कुल सही बात है। कार्बन एटम
इज़ 12 टाइम्स हैवियर एज़ कंपेयर टू अ
हाइड्रोजन एटम। यानी एक तरफ एक कार्बन एटम
लें और तो उसको बैलेंस करने के लिए दूसरी
तरफ हमें 12 हाइड्रोजन एटम लेने पड़ेंगे।
इस तरीके से हम हाइड्रोजन एटम के कंपैरिजन
में या कार्बन एटम के कंपैरिजन में किसी
को भी रिलेट कर सकते हैं। जैसे वाटर 18
डाल्टन इसका मतलब वाटर की साइज या जो मास
है वह 18 टाइम्स ग्रेटर है एज़ कंपेयर टू
हाइड्रोजन एटम। अगर हम ग्लूकोज यस प्रदीप
बिल्कुल सही कह रहे हैं। ग्लूकोज 180 उसका
डाल्टन मॉलिक्यूलर वेट है। इसका मींस इट
इज़ 180 टाइम्स हैवियर एज़ कंपेयर टू मास ऑफ़
वन हाइड्रोजन एटम। अब जरूरत पड़े तो उसको
कन्वर्ट कर सकते हैं एब्सोल्यूट मास में
भी कि 180 टाइम्स ऑफ़ हाइड्रोजन एटम है
मींस एक हाइड्रोजन एटम का मास कितना होता
है? तो दैट इज़ 1.67 * 10 टू -24 ग्राम।
इसको उससे मल्टीप्लाई करेंगे तो आपके पास
एब्सोल्यूट मास भी आ जाएगा। बट जनरली हम
रिलेटिव बात करते हैं। हां नेहा ये बात भी
सही है कि हम ये कह सकते हैं ग्लूकोस इज़
ऑलमोस्ट 10 टाइम्स हैवियर एज़ कंपेयर टू
वाटर। ओके? बात समझ में आई? हम बात कर रहे
हैं रिलेटिव रिलेटिव मास की। और रिलेटिव
मास के लिए जो यूनिट इस्तेमाल की जाती है
दैट इज़ amu दैट इज़ आल्सो रेफर्ड टू ऐज़ अह
ग्राम पर मोल एंड इन होनर ऑफ़ डाल्टन। एंड
दिस इज़ आल्सो रेफर्ड टू ऐज़ डाल्टन। चलो
समझ में आया तो एक
अप्लाई करते हैं इस चीज को हमारे
बायोलॉजिकल सिस्टम में।
यस आदिल इट इज़ अ कंपेरेटिव वे। इट इज़
ईज़ियर टू से कंपेयर द थिंग्स एज़ कंपेयर टू
हाइड्रोजन एटम। सो वी कैन मेक एन आईडिया
दैट हाउ दैट हाउ बिगर दैट एटम इज़ और हाउ
बिगर दैट मॉलिक्यूल इज़। वह मॉलिक्यूल या
एटम जिसके बारे में हम बात कर रहे हैं, वह
हाइड्रोजन के कंपैरिजन में कितना मास में
बड़ा होगा। उसका एक अंदाजा लगाया जा सकता
है यूजिंग एन एटॉमिक मास यूनि इट और अ
डाल्टन जिसे हम ग्राम पर मोल कहते हैं।
ओके? चलो अब इस क्वेश्चन पर अपना दिमाग
लगाते हैं। रेडी क्वेश्चन है कि ह्यूमन
जीनोम 3 गीगा बेस पेयर का है। सपोज व्हाट
वुड बी इट्स टोटल मॉलिक्यूलर वेट इन
ग्राम?
हां मोहित यही कह रहा हूं मैं। ए म्यू को
हम डाल्टन भी कह रहे हैं। बिल्कुल सही है।
आपको ह्यूमन जीनोम 3 गीगा बेस पेयर का है।
यानी ह्यूमन जीनोम यहां पर क्वेश्चन में
लिखा हुआ है 3 * 10 पावर 9 बेस पेयर का
है।
ओके? तो वह कितने ग्राम होगा? यानी टोटल
ह्यूमन जीनोम को अगर वेइंग बैलेंस पे रखें
तो वो कितने ग्राम निकल कर आएगा? तो कैसे
सॉल्व करेंगे?
तो उसके लिए सबसे पहले आपको यह पता होना
चाहिए कि एक बेस पेयर
हाइड्रोजन के कंपैरिजन में कितना बड़ा है।
रिलेटिव मास पता होना चाहिए। और रिलेटिव
मास यहां पर दे रखा है
वन बेस पेयर इज़ 660 डाल्टन। इससे क्या समझ
में आया? कि एक बेस पेयर मोर एक्यूरेटली
हमें बेस पेयर नहीं कहना चाहिए।
न्यूक्लियोटाइड पेयर कहना चाहिए। बट जैसे
ज्यादातर बुक्स में लिखा हुआ है उसी तरीके
से हम बात कर रहे हैं कि वन बेस पेयर इज़
इक्विवेलेंट टू 660 डाल्टन। इट मींस वन
बेस पेयर इज़ 660 टाइम्स हैवियर एज़ कंपेयर
टू दैट ऑफ़ हाइड्रोजन एटम। ठीक है? हां
उतरादास कुछ भी ले सकते हैं। यहां पर जो
वैल्यू है वो क्वेश्चन में जो दे रखी है
हम उस वैल्यू को दे ले रहे हैं। ठीक है?
वन बेस पेयर इज़ 660 डाल्टन। ओके? दैट इज़
गिवन इन द क्वेश्चन। तो वी आर नॉट अपाइंग
अ माइंड ओवर इट।
तो पहला स्टेप होगा कि बेस पेयर को डाल्टन
में कन्वर्ट करें। तो 3 * 10 पावर 9 बेस
पेयर की जगह पर आप क्या लिख सकते हैं? एक
बेस पेयर कितना होता है? इट वुड बी 60
डाल्टन। सो ये पहला
स्टेप हुआ जहां पर बेस पेयर की जगह पर
हमने डाल्टन रखा।
वेरी गुड वेरी गुड शिवकांत मिश्रा वेरी
गुड थोड़ा सा न्यूमेरिकली में कहीं गड़बड़
हो रही होगी शिवकांत
कंचन ने बहुत बढ़िया आंसर निकाला वेरी गुड
शाबाश शाबाश
ओके सुषमा ये डिबेट का बात नहीं है कि 660
डाल्टन लें या 650 डाल्टन लें क्वेश्चन
में जो लिखा हुआ है वो ले लेना चाहिए हम
हमारे न्यूमेरिकल के लिए वन बेस पेयर को
660 डाल्टन के बराबर लेंगे और जब कभी भी
हम अमीनो एसिड की बात करेंगे तो वी विल
टेक अराउंड 110 डाल्टन। ओके? हम जब भी आगे
बात करेंगे तो वी विल कंसीडर दैट वन बेस
पेयर इज़ इक्विवेलेंट टू 660 डाल्टन।
न्यूमेरिकल के लिए आप 650 भी लें। हमें
कोई प्रॉब्लम नहीं है। वन न्यूक्लियोटाइट
वी विल टेक इट एज 330 डाल्टन।
एंड वन अमीनो एसिड की जहां कहीं पर भी
हमें बायोलॉजिकल सिस्टम में रिक्वायरमेंट
पड़ेगी, तो उसका जो मॉलिक्यूलर वेट लिया
जाएगा दैट वुड बी 110 डाल्टन। सो वी आर
गोइंग टू कंसीडर दीज़ वैल्यूज़। ओके? खैर
अभी हम उसके बारे में बात नहीं कर रहे
हैं।
ओके अब बात हुई कि हमें आंसर डाल्टन में
नहीं देना था। हमें आंसर ग्राम में देना
था। तो आपको ये पता होना चाहिए कि वन
डाल्टन कितना ग्राम होता है। तो अभी हमने
डिस्कस किया है कि वन डाल्टन इज़
इक्विवेलेंट टू मास ऑफ़ वन हाइड्रोजन एटम।
और इट इज़ इक्विवेलेंट टू वन प्रोटॉन। एंड
मास ऑफ़ वन प्रोटॉन इज़ इक्विवेलेंट टू 1.67
* 10 टू -2 ग्राम। सो इस वैल्यू को हम
यहां प्लेस कर लेते हैं। हमारा आंसर अब आ
जाएगा नेक्स्ट स्टेप पर जो हमारा आंसर आ
रहा है दैट वुड बी 3 * 10 पावर 9 * 660 *
1.67
* 10 रे टू -2 ग्राम। ओके? बस अब आपका
आंसर ग्राम में है। बाकी तो अब वैल्यूज़ को
सॉल्व करना है।
हां मानी हम यही वैल्यूज़ को कंसीडर
करेंगे। है ना? 660 330 110 व्हेन अ बेस
पेयर ऑन अ न्यूक्लोटाइड और एन अमीनो एसिड
दे आर अ पार्ट ऑफ़ पॉलीमर वी आर गोइंग टू
कंसीडर दीज़ वैल्यूज़ ओके मंसली और ज्यादातर
न्यूमेरिकल क्वेश्चंस में वैल्यूज़ दे रखी
होती है कि हमें क्या एवरेज वैल्यू कंसीडर
करनी है। ओके? अब इसको जब सॉल्व करेंगे तो
रफली आपका आंसर 3 * 10 रेज़ टू - 12 ग्राम
आएगा। और 10 -12 को पिकको भी कहा जाता है।
तो वी कैन से दैट इट विल कम आउट टू बी 3
पिको ग्राम। एप्रोक्समेटली मोर एग्जैक्टली
3.2 के आसपास कुछ वैल्यू्यूज आएगी। ओके?
सो हम ये कह सकते हैं या 3.2 3.3 के आसपास
कुछ वैल्यू्यूज आ सकती है। आप एक बार
एग्जैक्ट इसको सॉल्व करके देख लें।
तो हम क्या कहना चाहते हैं कि ह्यूमन
जीनोम 3 गीगा बेस है
बेस पेयर्स में वही ह्यूमन जीनोम लगभग 3
पिकोग्राम है। उसको एब्सोल्यूट मास में भी
कैलकुलेट कर सकते हैं। इससे हमें ये पता
चलता है कि
टोटल एंटायर जीनोम
को अगर वेइंग बैलेंस पर रखें तो उसका मास
ग्राम में कितना आएगा? तो ग्राम में वो
माइक्रो ग्राम भी नहीं होगा। नैनोग्राम भी
नहीं होगा। इट विल बी इन अ पिको रेंज।
मींस द मास ऑफ़ एन एंटायर जीनोम इज़
नेगिलिजिबल। इसलिए हम रिलेटिव टर्म्स में
बात करते हैं। देखो बहुत जनों ने सही आंसर
निकाला है। वेरी गुड शीला
बायोकैफे वेरी गुड
आकाश बिल्कुल वेरी गुड। शाबाश शाबाश। सबने
बहुत अच्छा किया। बात समझ में आई ना? हम
ये कहना चाहते हैं कि एएमय या डाल्टन नाम
से घबराने की जरूरत नहीं है। वन एएमय या
वन डाल्टन वन एटॉमिक मास यूनिट प्रेसाइज़ली
तो 1थ ऑफ़ कार्बन है। बट हम हमारे
न्यूमेरिकल के लिए कह देंगे इट इज़
इक्विवेलेंट टू वन हाइड्रोजन एटम। और एक
नॉर्मल प्रोटोनियम हाइड्रोजन एटम में एक
सिर्फ प्रोटॉन होता है। सो वी विल से से
दैट कि इट इज़ वन डाल्टन इज़ इक्विवेलेंट टू
1.67 * 10 टू -24 ग्राम।
अब आदिल वो तो मुझे पता नहीं है। तो मेरे
दिमाग में क्वेश्चन आया था इसलिए हां पर
इस तरह क्वेश्चन गेट के अंदर या कई कई
सारे एग्जाम के अंदर आ सकता है। बात ये है
कि फर्स्ट स्टेप वाज़ बेस पेयर को हमें
कन्वर्ट करना था डाल्टन में। नेक्स्ट
स्टेप में आपको एक डाल्टन का मतलब पता
होना चाहिए। एक डाल्टन का मतलब है
एब्सोल्यूट मास में 1.67 * 10 - 24 ग्राम।
उसको मल्टीप्लाई करेंगे। यू विल गेट द
आंसर। वेरी गुड दीक्षा। वेरी गुड सुषमा
वेरी गुड कासिफ खान। वेरी गुड। हां, अगर
ये कैलकुलेशन आप कर सकते हो तो फिर आप
सारी कैलकुलेशन कर पाएंगे।
Okay? चलो आगे बात करते हैं। तो ये हमने
बात की एटम के बारे में, एटॉमिक मास के
बारे में।
Okay? अब
जो
इलेक्ट्रॉन्स हैं, अब तक हमने न्यूक्लियस
के बारे में बात की और न्यूक्लियस के अंदर
प्रोटॉन्स होते हैं। न्यूक्लियस के अंदर
न्यूट्रॉन्स होते हैं। पर हमें पता है कि
न्यूक्लियस के अलावा। सो लेट्स से दिस इज
अ न्यूक्लियस।
न्यूक्लियस के अलावा न्यूक्लियस के
सराउंडिंग के अंदर देयर आर रिवॉल्विंग
इलेक्ट्रॉन्स।
ओके?
दीज़ इलेक्ट्रॉन्स
दे आर प्रेजेंट इन सर्टेन शेल्स।
शेल्स दे कुड बी फर्दर डिवाइडेड इंटू अ
सबशेल्स।
और सबशेल्स में देयर आर
वेरियस ऑर्बिटल्स।
सो
शेल्स
जैसे कहा हमने k l m एंड दीज़ आर डिफरेंट
शेल्स।
शेल उन सभी
को सिंगल शेल में रखा जाता है। दैट इज़ ऑल
ऑर्बिटल्स
व्हिच हैज़ सेम
प्रिंसिपल
क्वांटम नंबर
दे आर केप्ट इन अ सेम शेल। यानी प्रिंसिपल
क्वांटम नंबर n से रिप्रेजेंट करते हैं।
जिनका भी ऐसे सारे ऑर्बिटल्स जिनका
प्रिंसिपल क्वांटम नंबर वन होगा उन सबको
सेम शेल में रखा जाएगा। जिनका प्रिंसिपल
क्वांटम नंबर टू होगा उन सबको शेम शेल में
रखा जाएगा। के के लिए वन, एल के लिए टू,
एम के लिए थ्री और एन के लिए फोर। सो दीज़
आर फोर प्रिंसिपल शेल्स के, एल, एम, एन।
एक शेल ये एक शेल के अंदर देयर मे बी
वेरियस सबशेल्स।
सो वी कैन से एक सबशेल में हम क्या
रखेंगे?
सो सबशेल्स आर ऑर्बिटल्स हैविंग अ सेम
एंगुलर
मोमेंटम
क्वांटम
नंबर यानी जैसे s p d या f कहते हैं।
ऐसे सारे ऑर्बिटल्स जो 2p से स्टार्ट होते
हैं दे विल बिलोंग टू अ सेम सबशेल। 2s
वाला एक अलग सबशेल है। तो इलेक्ट्रॉन्स
को ब्रॉडर रेंज में शेल्स में
डिस्ट्रीब्यूशन बताया जाता है। और हर शेल
को फर्दर डिवाइड किया जा सकता है सबशेल
में। और सबशेल्स में जो ऑर्बिटल्स हैं
देयर आर पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स दे आर
प्रेजेंट।
देयर आर फोर प्रिंसिपल शेल्स दैट इज K, L,
M.
हर शेल में मैक्सिमम इलेक्ट्रॉन्स कितने आ
सकते हैं? यानी कोई पूछे शेल नंबर भी यहां
पे लिख देते हैं। n इसका वन है, l का टू
है, m का थ्री है, फोर है। तो शेल K शेल
में मैक्सिमम इलेक्ट्रॉन कितने आ सकते
हैं?
व्हाट आर द मैक्सिमम नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स
इन अ k शेल? व्हाट आर द मैक्सिमम नंबर ऑफ
इलेक्ट्रॉन्स इन l शेल
और m और n? क्या आप फार्मूला अप्लाई कर
सकते हैं? आर यू हैविंग सम आईडिया?
वेरी गुड। वेरी गुड सुषमा अमित वेरी गुड
मोहम्मद
गुफान वेरी गुड यूंका
गुड सो फार्मूला इज़ जैसे यूंका ने कहा है
इट इज़ 2 n²
वेयर n इज़ शेल नंबर यस कावेरी वेरी गुड
वेरी गुड तो फार्मूला इज़ 2n² तो k में
कितने आएंगे तो 2
1² दैट विल गिव Q 2 L में कितने आएंगे? तो
टू टू का स्क्वायर दैट विल बी एट एंड सो
ऑन। सो वी विल गेट 2 8 16 एंड सो ऑन। वेरी
गुड वेरी गुड। सो फार्मूला कि किस शेल में
मैक्सिमम कितने इलेक्ट्रॉन आएंगे? द
फार्मूला इज़ 2n²
गुड वेरी गुड स्टूडेंट्स। वेरी गुड वेरी
गुड।
वेरी गुड भाग्यश्री विजय वेरी गुड मोहित
के में टू बिल्कुल सही बात है गुड
स्टूडेंट्स वेरी गुड वेरी गुड
तो इसी को हम टेबल के फॉर्म में भी
रिप्रेजेंट कर सकते हैं
कि शेल नंबर 1 2 3 4
के शेल के अंदर मैक्सिमम देयर आर टू
इलेक्ट्रॉन्स l के अंदर देयर आर मैक्सिमम
एट इलेक्ट्रॉन्स m के अंदर 18 और n के
अंदर 32
यस बायो कैफे बिल्कुल सही कह रहे हो आप तो
के शेल के अंदर देयर आर ओनली
के में सिर्फ एक सबशेल है दैट इज़ एस
एल के अंदर देयर आर टू सबशेल्स दैट इज़ एस
एंड पी एम के अंदर देयर आर थ्री सबशेल्स
नेमली एस पी एंड डी और एन एन के अंदर देयर
आर फोर सबशेल्स s
और जैसा आप सबको पता है s सबशेल में
मैक्सिमम कितने इलेक्ट्रॉन्स फिल कर सकते
हैं आप टू वैरी गुड पी के अंदर सिक्स
डी के अंदर 10
एफ के अंदर 14
ओके
सो के शेल के अंदर एक ही सबशेल है दैट इज़
एस एल शेल के अंदर देयर आर टू सबशेल्स
नेमली एस एंड पी एम शेल के अंदर देयर आर
थ्री सबशेल्स नेमली एस पी डी एन शेल के
अंदर देयर आर फोर सबशेल्स सबशेल्स आर
ऑर्बिटल्स व्ह आर हैविंग सिमिलर एजुमिटल
नंबर ओके चलो आगे बात करते हैं यहां तक की
बात समझ में आई
गुड गुड मोहित गुड वेरी गुड
अब
आपने ये भी पढ़ रखा होगा कि जब
इलेक्ट्रॉन्स को शेल्स में फिल किया जाता
है तो सबसे पहले हाई एनर्जी स्टेट को फिल
किया जाएगा। हाई एनर्जी स्टेट में
इलेक्ट्रॉन्स आएंगे। वेकेंट शेल्स में
आएंगे। इनर शेल्स को पहले भरा जाएगा और
फिर आउटर शेल्स को भरा जाएगा। जैसे
हाइड्रोजन में एक ही इलेक्ट्रॉन है तो
फर्स्ट शेल के अंदर उस इलेक्ट्रॉन को भरा
जाएगा k को।
हीलियम के अंदर दो इलेक्ट्रॉन है तो पहले
सिर्फ K को ही फिल किया गया। कार्बन के
अंदर टोटल देयर आर सिक्स इलेक्ट्रॉन्स। तो
पहले K को फिल करने के बाद फिर एल शेल की
बारी आई।
इस तरीके से नियॉन की बात करें तो वहां तक
आते-आते के शेल भी फुल हो गया। एल शेल भी
फुल हो गया। जब K और एल दोनों फुल हो गए।
तो फिर थर्ड शेल यानी एम की बारी आती।
सो सबसे पहले के शेल को फिल किया जाता है।
फिर
एल फिर एम फिर एन ऑलदो देयर आर सम
एक्सेप्शनंस
लेकिन हम यहां पर उन एक्सेप्शनंस की बात
नहीं कर रहे हैं। जनरल रूल ये है कि इनर
टू आउटर। ऑलदो इस रूल में देयर आर सम
एक्सेप्शनंस बट वी आर नॉट टॉकिंग अबाउट
दैट एक्सेप्शनंस। सो वी विल से दैट फेला
वन एस फिल किया जाएगा। फर्स्ट शेल में भी
फिर 1s के बाद 2s फिर उसके बाद 2p फिर
उसके बाद
2f 2d एंड सो ऑन सॉरी 2s 2p फिर 3s 3p 3f
फिर इस तरीके से 4s 4p 4f 4d इस तरीके से
फिल किया जाएगा। ओके?
यस। दैट इज कॉल्ड एज जैसा ओमी ने बताया कि
दिस इज कॉल्ड एज़ अफबाऊ प्रिंसिपल। वेरी
गुड ओमी। पर वापस हमें इतने डिटेल
केमिस्ट्री में नहीं जाना। हमें इस बात से
भी कोई मतलब नहीं है। अबव प्रिंसिपल क्या
होता है। अभी सिर्फ इतनी सी बात ध्यान
रखने वाली बात है कि पहले इनर शेल्स फिल
किए जाते हैं और फिर हम आउटर शेल्स की तरफ
बढ़ते हैं।
आपने ये भी पढ़ा होगा लोअर क्लासेस में कि
अगर शेल्स
कंप्लीटली फिल्ड है शेल्स दे आर कंप्लीटली
फिल्ड।
तो दे आर
स्टेबल दे आर इनर्ट
जैसे कि
हीलियम जिसमें एक ही शेल है वो फिल है
नियन जिसमें K और L दोनों शेल है बट दोनों
के दोनों फिल है। आर्गन जिसमें तीन शेल है
K एल एम बट तीनों के तीनों फुल हैं। ऐसे
एटम्स ऑलरेडी दे आर स्टेबल।
दे आर रेफिड टू एज इनट। दे आर रेपिड टू एज
नॉन रिएक्टिव।
यानी जो पहले से स्टेबल है तो ऑब्वियसली
वह उन्हें कुछ ज्यादा करने की जरूरत नहीं
है।
दे विल नॉट ट्राई
एनीथिंग
टू अचीव स्टेबिलिटी बिकॉज़ ऑलरेडी दे आर
स्टेबल।
यस। इसलिए उन्हें इनर्ट गैसेस भी कह रहे
हैं।
लेकिन उन एटम्स का क्या जिनके आउटरमोस्ट
शेल के अंदर फोर इलेक्ट्रॉन्स हैं या फाइव
इलेक्ट्रॉन्स हैं या
सिक्स इलेक्ट्रॉन्स हैं। वन इलेक्ट्रॉन,
टू इलेक्ट्रॉन्स, फाइव इलेक्ट्रॉन्स इस
तरीके के इलेक्ट्रॉन्स हैं उनका क्या? जो
कंप्लीटली जिनके पास कंप्लीटली फिल्ड
शेल्स नहीं है उनका क्या होगा?
वेरी गुड बायोके। सो
हम क्या कह सकते हैं?
एटम्स व्हिच हैव अ अनकंप्लीट
फिल्ड
शेल्स दे आर
अनस्टेबल।
और जैसा मैं कल बात कर रहा था कि अगर
अनस्टेबल है तो दे विल डू समथिंग टू अचीव
स्टेबिलिटी। स्टेबिलिटी को अचीव करने के
लिए कुछ ना कुछ तो जरूर करेंगे।
सो इफ यू आर नॉट स्टेबल एनी हाउ यू विल
ट्राई टू अचीव स्टेबिलिटी।
अगर आप पहले से स्टेबल है तो कुछ ज्यादा
करने की जरूरत नहीं है। बट इफ आउटर शेल इज
नॉट कंप्लीट देन सच एटम्स
दे विल ट्राई टू अचीव स्टेबिलिटी।
एंड हाउ दे कैन डू द स्टेबिलिटी?
दे विल कीप ऑन ट्राइंग कि किसी एटम से
उन्हें इलेक्ट्रॉन मिल जाए।
यानी जिसे हम कहते हैं इलेक्ट्रॉन
ट्रांसफर। और अगर इलेक्ट्रॉन ट्रांसफर
नहीं है तो कम से कम शेयरिंग ही करें।
यानी दोनों एटम एक जैसे बोथ एटम्स दे आर
नॉट एबल टू गिव देयर इलेक्ट्रॉन्स देन
एटलीस्ट दे कैन गो फॉर अ पार्टनरशिप। दैट
इज़ शेयरिंग।
अश्विनी रेडिएशंस एमिट तब करेंगे जब हम
न्यूक्लियस की अनस्टेबिलिटी की बात कर रहे
हैं। आज हम न्यूक्लियस अनस्टेबिलिटी आज हम
न्यूक्लियस से बाहर इलेक्ट्रॉन की तरफ आ
गए हैं। और एटम की स्टेबिलिटी की बात कर
रहे हैं। ओके? यस। सो अनकंप्लीटली एटम्स
व्हिच आर नॉट हैविंग अ फिल्ड शेल्स विद एन
इलेक्ट्रॉन ऐसे एटम्स स्टेबल नहीं होते और
वो हमेशा इस कोशिश में लगे रहते हैं कि
किसी तरीके से उनका ऑक्टेट या डुप्लेट
कंप्लीट हो जाए।
इसके लिए इलेक्ट्रॉन को एक्सेप्ट करना
पड़े वह मंजूर डोनेट करना पड़े वह मंजूर।
यह दोनों ही पॉसिबिलिटी नहीं तो दे विल
शेयर द इलेक्ट्रॉन्स।
कुल मिलाकर बात ये है कि उन्हें अब किसी
दूसरे एटम के साथ इंटरेक्ट करना पड़ेगा।
इंटरेक्ट करने का मतलब है कि अब बारी आई
बॉन्डिंग की।
दैट इज़ इफ द टू एटम्स दे आर इंटरेक्टिंग
इन सम वे इट मींस दे आर बॉन्ड। दे आर
इनवॉल्वड इन अ बॉन्डिंग। ओके? सो सभी एटम
हीलियम, नियन, आर्गन इनके जितने
सौभाग्यशाली नहीं होते। उनकी किस्मत इतनी
अच्छी नहीं होती कि वह स्टेबल हो। दे हैव
एन अनस्टेबल कंडीशंस बिकॉज़ द आउटर शेल इज़
नॉट कंप्लीट। सो दे विल ट्राई टू अचीव
स्टेबिलिटी सम हाउ।
दैट कुड बी शेयरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉन्स और
दैट कुड बी अ ट्रांसफर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स।
अब उसके ऊपर ही हमारी बॉन्डिंग हो जाएगी।
अगर वो ट्रांसफर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स में
इन्वॉल्वड है तो उन्हें हम आयनिक बॉन्ड्स
कहेंगे और शेयरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉन्स के
अंदर इन्वॉल्वड है तो उसे हम कोवेंट बॉन्ड
कहेंगे। दीज़ आर द टू मेजर वेज़ व्हेयर द टू
एटम्स दे आर गोइंग टू इंटरेक्ट। सो एज़ टू
अचीव स्टेबिलिटी। सो दैट बोथ द एटम्स दे
बिकम स्टेबल व्हेन दे आर बॉन्डेड टुगेदर
एंड देन इंस्टेड ऑफ़ नेमिंग देम एज़ अ
सेपरेट एटम हम उन्हें मॉलिक्यूल कहना शुरू
करेंगे। चलो उसके बारे में बाद में बात
करते हैं। चलो आगे बहुत सिंपल सी बात
कि अब हम ये डिस्कस करने वाले हैं कि
एटम्स की इलेक्ट्रोनेगेटिविटी
से हम क्या समझते हैं?
व्हाट वी मीन बाय इलेक्ट्रोनेगेटिविटी ऑफ़
एटम?
बेसिकली एन इलेक्ट्रोनेगेटिविटी ऑफ़ एन एटम
इट रिप्रेजेंट्स
एन एफिनिटी
और वी कैन से टेंडेंसी
टू अट्रैक्ट
शेयर्ड
पेयर
ऑफ इलेक्ट्रॉन्स। इन अदर वर्ड्स
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी ऑफ एन एटम इज सिंपली
अ टेंडेंसी
और एफिनिटी
फॉर इलेक्ट्रॉन्स।
सिंपल वर्ड्स में हम ये भी कह सकते हैं कि
किसी भी एटम
किसी भी एटम का इलेक्ट्रॉन के लिए
इलेक्ट्रॉन के लिए कितना प्यार है? कितना
वह इलेक्ट्रॉन को अपनी तरफ अट्रैक्ट करता
है। उसके लिए एक टर्म है इलेक्ट्रॉन या
इलेक्ट्रॉन पेयर को या शेयर्ड इलेक्ट्रॉन
पेयर को अपनी तरफ अट्रैक्ट करता है। उसके
लिए
एक टर्म इस्तेमाल करते हैं
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी।
लो इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का मतलब एफिनिटी
इज़ लो। हाई इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का मतलब
उस एटम की इलेक्ट्रॉन को एक्सेप्ट करने की
टेंडेंसी बहुत ज्यादा है।
यानी आपको सिंपली कहा कि कोई एटम
इलेक्ट्रॉन हंग्री है।
इलेक्ट्रॉन हंगरी मींस उसकी एफ़िनिटी
इलेक्ट्रॉन के लिए ज्यादा है।
इज इट क्लियर? सो इलेक्ट्रोनेगेटिविटी
बेसिकली इट रिप्रेजेंट्स
द एफिनिटी ऑफ एन
एटम फॉर इलेक्ट्रॉन
और इलेक्ट्रोनेगेटिविटी आप देखेंगे
पीरियडिक टेबल के अंदर
फ्लोरीन से लेकर ट्रेंशियम तक
लाई करती है।
दैट इज इफ यू लुक इन अ
इफ यू लुक एट द पीरियडिक टेबल एज यू मूव
फ्रॉम
लेफ्ट टू राइट इलेक्ट्रोनेगेटिविटी
इंक्रीसेस
एंड एज़ यू मूव फ्रॉम टॉप मूव टू बॉटम
देन द इलेक्ट्रोनेगेटिविटी
डिक्रीजसेस। सो देयर इज़ एन इंक्रीज इन
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी फ्रॉम लेफ्ट टू राइट।
और टॉप टू डाउन जाते-जाते
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी है वह डिक्रीज होती
जाती है। हम इसमें हीलियम, नियॉन, आर्गन,
क्रोनशियम, ज़ीनोन इसकी बात नहीं कर रहे
हैं क्योंकि वह इनट है।
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का कांसेप्ट वहां पर
अप्लाई होगा व्हिच हैज़ सम व्हिच हैज़ अ
पार्शियली फिल्ड शेल्स। सो दे विल हैव सम
टेंडेंसी टू अट्रैक्ट अट्रैक्ट एन
इलेक्ट्रॉन। तो इसका मतलब सबसे ज्यादा
इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम यहां पर आ जाएगा।
दैट वुड बी फ्लोरीन
और फ्रेंशियम लगभग यहां पर जो एटम आ रहा
है वह सबसे कम इलेक्ट्रो नेगेटिव हो
जाएगा।
श्वेता शेयर्ड पेयर जब हम कोवेंट बॉन्ड्स
की टर्मिनोलॉजी में बात करेंगे तो शेड
पेयर वुड बी वेरीेंट। जब कोवेंट बॉन्ड्स
की टर्मिनोलॉजी में हम बात कर रहे हैं तब
हम शेड पेयर टर्म्स इस्तेमाल करेंगे। जब
हम आयनिक बॉन्ड्स की बात करेंगे तो वहां
पर वी कैन यूज़ अ टर्म इलेक्ट्रोपजिटिव और
अ इलेक्ट्रोनेगेटिव बिकॉज़ वहां पर
ट्रांसफर ऑफ इलेक्ट्रॉन होगा।
खैर चलो आगे बात करते हैं हम। पर
बायोलॉजिकल सिस्टम में फ्लोरीन जो काफी
इलेक्ट्रोनेगेटिव है। क्लोरीन, ब्रोमीन,
आयोडीन इस तरीके के एटम्स बायोलॉजिकल
सिस्टम में प्रेजेंट नहीं होते। कल हम बात
कर चुके हैं कि बायोलॉजिकल सिस्टम के अंदर
मोस्ट कॉमन जो एटम्स होते हैं दीज़ इंक्लूड
कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन,
फास्फोरस और सल्फर। अगर सिर्फ हम अपने आप
को बायोलॉजिकल सिस्टम तक ही फोकस करके
रखें तो बायोलॉजिकल सिस्टम में सबसे
ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम कौन है?
व्हिच इज़ मोस्ट इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम इन
बायोलॉजिकल सिस्टम?
कोई आईडिया? मोस्ट इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम
इन बायोलॉजिकल सिस्टम।
बायोलॉजिकल सिस्टम का मतलब वी आर टॉकिंग
अबाउट कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन,
नाइट्रोजन, फास्फोरस, सल्फर इनमें से
क्योंकि दीज़ आर द मोस्ट एबंड एटम।
इनमें से ही बताना है क्योंकि फ्लोरीन,
क्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन इस तरीके के एक
बायोलॉजिकल सिस्टम में देखने को नहीं
मिलती। बायो मॉलिक्यूल का हिस्सा नहीं है।
अगर वो है भी कहीं पर तो वह फ्री फॉर्म के
अंदर अवेलेबल है। यस।
वेरी गुड वेरी गुड। सो बायोलॉजिकल सिस्टम
में जो सबसे ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम
है इन सिक्स में से दैट इज द ऑक्सीजन।
इसलिए वी ऑफन से दैट ऑक्सीजन इज़
मोस्ट इलेक्ट्रोनेगेटिव।
ऑक्सीजन विल ऑलवेज हैव अ टेंडेंसी टू
अट्रैक्ट एन इलेक्ट्रॉन। हमेशा इलेक्ट्रॉन
लेने की कोशिश करेगा। बाकी एटम्स के
कंपैरिजन में भी इसकी इलेक्ट्रॉन को लेने
की टेंडेंसी सबसे ज्यादा होगी। वेरी गुड।
तो आंसर इज़ ऑक्सीजन।
ऑक्सीजन एटम
को की इलेक्ट्रॉन लेने की टेंडेंसी सबसे
ज्यादा है। अमंग द कार्बन, हाइड्रोजन,
ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, सल्फर।
ऑक्सीजन फॉललोड बाय इट इज़ नाइट्रोजन।
नाइट्रोजन के बाद नंबर आएगा सल्फर का।
सल्फर और कार्बन की इलेक्ट्रो नेगेटिविटी
लगभग बराबर होती है। उसके बाद नंबर आएगा
हाइड्रोजन एटम का और हाइड्रोजन एटम और
फास्फोरस की इलेक्ट्रोनेगेटिविटी वापस सब
लगभग बराबर होती है। सो टॉपर है इस लिस्ट
का
जो सिक्स एटम्स है उसमें सबसे ज्यादा
इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम इज़ ऑक्सीजन।
यस घनश्याम क्योंकि हमने हैलोजंस को बाहर
निकाल लिया जिसको सिर्फ एक इलेक्ट्रॉन की
कमी थी तो अब सबसे ज्यादा
इलेक्ट्रोनेगेटिव पीछे वो बच गए जिसके
आउटरमोस्ट शेल में सिर्फ दो इलेक्ट्रॉन की
कमी है और उसमें भी टॉप पर कौन आ गया दो
इलेक्ट्रॉन की कमी वाले इन सबको एक-एक
इलेक्ट्रॉन की कमी है इन सबको दो-दो
इलेक्ट्रॉन की कमी है और दो-दो इलेक्ट्रॉन
की कमी में सबसे टॉप ऑफ लिस्ट कौन आ गया
ऑक्सीजन क्योंकि जैसे-जैसे टॉप टू बॉटम की
तरफ जाएंगे वैसे-वैसे इलेक्ट्रोनेगेटिविटी
कम होती जाएगी
इज इट क्लियर? सो, बायोलॉजिकल सिस्टम में
जो एटम्स प्रेजेंट होते हैं, इन एटम्स में
सबसे ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिविटी
इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम है, वह है ऑक्सीजन।
सो ये हम बात कर रहे थे
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी के बारे में। सो
अगर जितनी ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिविटी है
एटम की, वह उतना ही ज्यादा एट इलेक्ट्रॉन
को अपनी तरफ अट्रैक्ट करने की कोशिश
करेगा। एंड जैसे कि पंकज बता रहा है इसका
मतलब इट विल हैव ऑलवेज अ चांस टू गेट
कन्वर्ट टू अ रिएक्टिव ऑसिन स्पीशीज। यही
तो ऑक्सीजन का पंगा है। ज्यादा ऑक्सीजन भी
बड़ी खतरनाक है। क्योंकि ऑक्सीजन हम इज़
हैविंग अ मोर टेंडेंसी टू एक्सेप्ट एन
इलेक्ट्रॉन। चाहे वो एटॉमिक फॉर्म है और
या चाहे वो मॉलिक्यूलर फॉर्म है। इट इज़
हैविंग अ टेंडेंसी टू एक्सेप्ट एन
इलेक्ट्रॉन एंड कैन गेट कर टू अ रिएक्टिव
ऑक्सीजन स्पीशीज़। है ना? कहते है ना
ऑक्सीडाइजिंग एनवायरमेंट।
ऑक्सीडाइजिंग एनवायरमेंट का मतलब सिंपल
वर्ड्स में हम यह भी कह सकते हैं ना
सराउंडिंग में ऑक्सीजन ही ऑक्सीजन है
और ऑक्सीजन
क्या करेगा? इलेक्ट्रॉन को अपनी तरफ
अट्रैक्ट करेगा। तो जो मॉलिक्यूल जिससे
इसने इलेक्ट्रॉन को लिया
जिसने इलेक्ट्रॉन को लूज़ किया उसका क्या
हुआ? ऑक्सीडेशन। सो ऑक्सीडाइजिंग
एनवायरमेंट में ऑक्सीडेशन होता है।
क्योंकि ऑक्सीडाइजिंग एनवायरमेंट में
सराउंडिंग में डेफिनेटली कोई इस तरीके के
एटम्स या मॉलिक्यूल्स होते हैं जो रेडी
हैं इलेक्ट्रॉन्स लेने के लिए और वो अगर
इलेक्ट्रॉन ले लेंगे तो जो भी मॉलिक्यूल
उस ऑक्सीडाइजिंग एनवायरमेंट में रखा गया
है उसका क्या होगा? ऑक्सीडेशन होगा। ओके?
तो इलेक्ट्रोनेगेटिविटी को समझना बहुत
जरूरी है बॉन्ड्स को पढ़ने के लिए। तो अब
हम बॉन्ड्स के बारे में बात करते हैं। सो
अभी हमने बात अब तक हमने ये पढ़ा कि ऐसे
कई सारे एटम्स हैं जिनके आउटरमोस्ट शेल के
अंदर इलेक्ट्रॉन्स डुप्लेट या ऑक्टेट
फील्ड नहीं है।
तो उनको स्टेबल होने के लिए
क्या करना पड़ेगा? आइदर दे हैव टू गो फॉर
अ ट्रांसफर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन और दे हैव टू गो
फॉर अ शेयरिंग ऑफ़ इलेक्ट्रॉन। इसका मतलब
एक एटम को दूसरे एटम के कांटेक्ट में आना
पड़ेगा और साथ में रहना पड़ेगा। अगर साथ में
रह रहे हैं तो वी विल से दैट दे आर
बॉन्डेड। सो व्हाट इज़ बॉन्ड? सो वी कैन से
बॉन्ड इज़ एनी फोर्स
दैट होल्ड द टू एटम्स टुगेदर। दो एटम्स को
होल्ड करने वाले फोर्स के लिए वी यूज़ अ
टर्म बॉन्ड।
ऑक्सीजन हमें क्यों किल करेगा? वो
मॉलिक्यूल है। अभी हम ऑक्सीजन एटम के बारे
में बात कर रहे हैं। ओके? ऑक्सीजन कुड
डैमेज अस इफ देयर इज़ फॉर्मेशन ऑफ़ रिएक्टिव
ऑक्सीजन स्पीशीज़। ओके? तो हम कोशिश करते
हैं कि रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज़ ना बने।
कई सारी एंटीऑक्सीडेंट मशीनरी भी हमारे
पास मौजूद होती है लोहित जो हमें मरने से
बचाती है। हां अगर वह ऑक्सीडेटिव डैमेज से
बचने वाली मशीनरी नहीं हो तो क्या स्थिति
होगी? वह आपको एनिमल फिजियोलॉजी के सर
पढ़ाएंगे या प्लांट फिजियोलॉजी के सर भी
पढ़ाएंगे। डेफिनेटली फिर ऑक्सीजन वाले
एनवायरमेंट में कोई भी बायोलॉजिकल सिस्टम
नॉर्मली एग्जिस्ट नहीं कर पाएगा क्योंकि
ऑक्सीजन विल डैमेज।
ओके? बट अच्छी बात ये है कि ऑक्सीजन होने
के बावजूद भी और ऑक्सीजन होने के का मतलब
है रिएक्टिव ऑक्सी स्पीशीज बनने के बावजूद
भी वी आर हैविंग एन वेरी गुड
एंटीऑक्सीडेंट मशीनरी।
ओके? बनते हैं पर उनका वापस कुछ उपचार भी
है। सो बॉन्ड्स दो तरीके से बॉन्ड्स बनने
में बेसिकली होता क्या है कि देयर इज़ अ
रिीस्ट्रीब्यूशन ऑफ़ इलेक्ट्रॉन्स। और
रिस्ट्रीब्यूशन ऑफ इलेक्ट्रॉन कुछ इस
तरीके से होता है कि अब उनका ऑक्टेट या
डुप्लेट कंप्लीट हो जाए। दो तरीके हैं।
आइदर देयर कुड बी अ शेयरिंग लेट्स से कि
कोई एटम है जिसके आउटरमोस्ट शेल के अंदर
एक ही इलेक्ट्रॉन है। लेट्स से हाइड्रोजन
एटम ये दूसरा हाइड्रोजन एटम है जिसकी भी
आउटरमोस्ट शेल के अंदर एक इलेक्ट्रॉन है।
अगर ये ट्रांसफर करते हैं तो फिर इसमें
कंप्लीट इलेक्ट्रॉन का लॉस हो जाएगा। इस
केस में क्या-क्या करते हैं? ये दोनों
अपने ऑर्बिटल्स को ओवरलैप कर देते हैं।
ओवरलैप करने का मतलब है कि नाउ इस एटम इस
हाइड्रोजन एटम और इस हाइड्रोजन एटम दोनों
के बीच में कॉमन ये इलेक्ट्रॉन पेयर आ
गया। कुछ जगहों पर ट्रांसफर
हो सकता है। जिस एटम से इलेक्ट्रॉन का लॉस
होगा उसके ऊपर पॉजिटिव चार्ज आ जाएगा। जो
इलेक्ट्रॉन को रिसीव करेगा उसके ऊपर
नेगेटिव चार्ज आ जाएगा। और ऐसा होने पर अब
उनके बीच में देयर वुड बी सम काइंड ऑफ़
इंटरेक्शन एंड बॉन्ड्स वुड बी रेफर्ड टू
ऐज़ आयनिक बॉन्ड। तो दो चीजें पॉसिबल है या
तो ट्रांसफर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन जैसा कि हम अभी
डिस्कस करने वाले हैं आयनिक बॉन्ड्स में
या देयर कुड बी अ शेयरिंग ऑफ़ इलेक्ट्रॉन्स
जैसा हम देखेंगे कोवेंट बॉन्ड में। ओके?
सो अगर एटम्स स्टेबल नहीं है तो दे विल कम
इन कॉन्ट्रैक्ट विथ एन अनदर एटम। देयर वुड
बी रिस्ट्रीब्यूशन और रिअरेंजमेंट ऑफ
इलेक्ट्रॉन एंड पर्पस ऑफ़ दिस
रिस्ट्रीब्यूशन ऑफ़ इलेक्ट्रॉन इज़ वेदर इट
इज़ अ ट्रांसफर और वेदर इट इज़ शेयरिंग इज़
टू मेक दीज़ एटम्स मोर स्टेबल। एंड अंडर सच
सिनेरियो दोनों एटम्स एक दूसरे से जुड़े
हुए रहेंगे। और एटम्स एक दूसरे के साथ
जुड़े हुए हैं। उस फोर्स को जो इन एटम्स को
आपस में कनेक्ट करके रख रहा है उसको हम
बॉन्ड कहते हैं।
तो
इसका मतलब
अब हम एटम से थोड़ा आगे बढ़ जाते हैं। वी
मूव टू अ मॉलिक्यूल।
व्हाट इज़ अ मॉलिक्यूल? सो अभी हमने कहा कि
एटम्स
अगर अनस्टेबल है, अनस्टेबल का मतलब उनके
शेल्स कंप्लीट फील्ड नहीं है तो उनको एक
दूसरे के कांटेक्ट में आना पड़ेगा। और अगर
वो कांटेक्ट में आते हैं और एक दूसरे के
साथ रहते हैं तो अब उन्हें हम मॉलिक्यूल
कहेंगे।
सो व्हाट इज अ मॉलिक्यूल? सो वी विल से
दैट मॉलिक्यूल इज़ न्यूट्रल
ग्रुप ऑफ
एटम्स
दैट कुड बी टू और मोर
हेल्ड
टुगेदर
बाय
केमिकल
बॉन्ड्स।
सो
इस तरीके से एक एटम दूसरे एटम के साथ
इंटरेक्ट कर रहा हो। ये कोई एक एटम ये
दूसरे एटम के साथ इंटरेक्ट कर रहा हो। ये
एक ऑक्सीजन एटम दूसरे ऑक्सीजन एटम के साथ
इंटैक्ट कर रहा हो। दिस वुड बी रेफर्ड टू
एज मॉलिक्यूल्स। सो व्हाट आर मॉलिक्यूल्स?
मॉलिक्यूल्स आर
ग्रुप ऑफ एटम्स
देयर मे बी टू 3 4 10 और मोर देन दैट
एटम्स हेल्प टुगेदर बाय सम काइंड ऑफ़
केमिकल बॉन्ड्स एंड दीज़ केमिकल बॉन्ड्स
कुड बी आयनिक और दीज़ कुड बी कोवलेंट।
यस हीना बिल्कुल सही कह रहे हो कि एटम्स
अगर बॉन्डेड हो साथ में रहते हो तो उन्हें
एटम कहने की बजाय मॉलिक्यूल कहा जाएगा।
फॉर एग्जांपल आपसे पूछा जो ऑक्सीजन आप
इन्हेल करते हो ऑक्सीजन गैस वह एटम है या
मॉलिक्यूल?
ऑक्सीजन गैस वेदर इट इज़ एन एटम और अ
मॉलिक्यूल और अ हाइड्रोजन गैस इज़ अ
एटम और मॉलिक्यूल
यस जकीर ने बिल्कुल सही कहा। टू और मोर
एटम्स ऑफ़ सेम और डिफरेंट एलिमेंट्स हेल्ड
बाय अ बॉन्ड वुड बी रेफर्ड टू एज
मॉलिक्यूल। दैट्स गुड।
आजाज अली बिल्कुल आपका नाम भी लेंगे क्यों
नहीं लेंगे जरूर लेंगे
नहीं अंजलि मारू ऐसा कुछ नहीं होगा और
एनिमल फिजियोलॉजी अभी बायोकेमिस्ट्री में
ना रखें
वेरी गुड वेरी गुड एवरी वेरी गुड सो
व्हाटएवर द ऑक्सीजन व्हिच वी आर इन्हेलिंग
इज़ नॉट अ एटम बेसिकली इट इज़ अ मॉलिक्यूल
वेरी गुड वेरी गुड वेरी गुड पिंटू कुमार
कुणाल वेरी गुड आयशा वेरी गुड ठीक है तो
ये तो बात हुई मॉलिक्यूल्स की कहने का
मतलब इसका मतलब चाहे आप ग्लूकोस की बात
करें वह एक मॉलिक्यूल है सुक्रोज़ के बारे
में बात करें वह एक मॉलिक्यूल है एलेनिन
के बारे में बात करें वह एक मॉलिक्यूल है
वाटर के बारे में बात करें वह मॉलिक्यूल
है जिसमें देयर आर वन और मोर
बॉन्ड्स व्हिच आर इनवॉल्वड और वी कैन से
देयर आर टू और मोर एटम व्हिच मे बी ऑफ़ सेम
काइंड और व्हिच मे बी ऑफ़ डिफरेंट काइंड दे
आर बॉन्डेड टुगेदर तब उसे हम मॉलिक्यूल
कहेंगे।
वेरी गुड वेरी गुड स्टूडेंट्स वेरी गुड।
ठीक है? अब हम बात कर रहे थे फिर मैक
मॉलिक्यूल किसे कहा जाएगा? तो मॉलिक्यूल्स
जिसमें एटम आपस में बॉन्ड कर रहे हैं।
मॉलिक्यूल्स
आपस में ही बॉन्ड फॉर्म करने लगे। तो अब
उन्हें हम मैक मॉलिक्यूल्स कहेंगे।
कहने का मतलब जो इंडिविजुअल मॉलिक्यूल है
उसे हम मोनोमर कह सकते हैं। और कई सारे
मोनोमर्स आपस में बॉन्डेड हो तो जो
स्ट्रक्चर बनेगा जिसे हम
पॉलीमर कहें। तो पॉलीमर्स दे ऑल आर
एग्जांपल ऑफ मैक मॉलिक्यूल्स।
मतलब अगर अमीनो एसिड आपका मॉलिक्यूल है तो
प्रोटीन क्या हो गया?
प्रोटीन एक बड़ी साइज का मॉलिक्यूल है।
उसे मैक मॉलिक्यूल कहा जा सकता है।
ठीक है रामकुमार समझ में आ रही है बात?
नेहा
नीतू बिल्कुल ठीक है।
ग्लूकोस अगर
मॉलिक्यूल है तो स्टार्च क्या हो गया?
मैक मॉलिक्यूल।
यस करिश्मा बिल्कुल सही बात है। इसी तरीके
से इफ अ न्यूक्लियोटाइट इज अ
मॉलिक्यूल देन न्यूक्लिक एसिड्स चाहे वो
डीएनए हो चाहे आरएनए हो दे वुड बी रेफर्ड
टू एज मैक मॉलिक्यूल्स। सो एटम्स के बीच
में भी बॉन्ड होते हैं और एटम्स के बीच
में बॉन्ड हो तो मॉलिक्यूल बनेंगे और कई
सारे मॉलिक्यूल आपस में जुड़कर या ऐसा कोई
भी मॉलिक्यूल जिसमें खूब सारे बॉन्ड्स हो
तो उसको हम मैक्रो मॉलिक्यूल की कैटेगरी
में रखेंगे। मोस्ट ऑफ पॉलीमर्स दे आर एन
एग्जांपल ऑफ मैक्रो मॉलिक्यूल।
आपके पास क्या ऐसा कोई एग्जांपल है दैट वि
इज मैक मॉलिक्यूल? अ क्वेश्चन सिंपल सा
बट
नॉट पॉलीमर। कोई ऐसा एग्जांपल
माय क्वेश्चन टू यू इज़
गिव द एग्जांपल
ऑफ अ मैक मॉलिक्यूल व्हिच इज नॉट अ पॉलीमर
द क्वेश्चन इज़
मोस्ट ऑफ़ द मैक्रो मॉलिक्यूल्स दे आर
पॉलीमर। फॉर एग्जांपल कार्बो
पॉलीिसैक्राइड्स दे आर पॉलीमर।
न्यूक्लिक एसिड्स दे आर पॉलीमर, प्रोटीनंस
दे आर पॉलीमर एज वेल एज मैक्रो मॉलिक्यूल।
अंजलि फैटी एसिड तो मॉलिक्यूल की कैटेगरी
में रखते हैं। आंसर बाकी लोगों ने दिया।
वेरी गुड वेरी गुड बाला साहब। यस
गुड गुड
वेरी गुड वेरी गुड वेरी गुड। सो आंसर इज़
लिपिड्स।
बड़ी साइज के मॉलिक्यूल तो हैं।
दे हैव अ टेंडेंसी टू एग्रीगेट। दे आर ऑफ़
वेरी लार्जर साइज। दे आर असेंबली ऑफ फैटी
एसिड्स एंड असम काइंड ऑफ अल्कोहल
पॉलीहाइड्रोक्सी अल्कोहल वह मैक मॉलिक्यूल
है डिअ स्टूडेंट्स पर वो ट्रू पॉलीमर नहीं
है। उसमें कोई रिपीटेटिंग यूनिट मोनोमरिक
यूनिट देखने को नहीं मिलती।
ओके? चलो आगे बात करते हैं। सो
मॉलिक्यूल्स व्हेन टू और मोर एटम्स सिमिलर
और डिसिमिलर टाइप दे आर बॉन्डेड वुड बी
रेफर्ड टू एज मॉलिक्यूल्स लार्जर साइज
मॉलिक्यूल्स व्हिच हैज़ लार्ज नंबर ऑफ़
एटम्स बॉन्डेड विद ईच अदर तो उसे हम मैक
मॉलिक्यूल कहेंगे।
बायोलॉजिकल सिस्टम में जो मॉलिक्यूल्स
प्रेजेंट होते हैं उनका डिस्ट्रीब्यूशन
देखें
तो बायोलॉजिकल सिस्टम में जो सबसे अबंडेंट
मॉलिक्यूल है दैट इज वाटर
ई कोलाई में लगभग 70%
स्पाइनच में 93% के आसपास
फ्रैट लीवर के अंदर लगभग अगेन 70% 69% के
आसपास वोटर है।
पीएसके जोरेन आईएफएस ऐप देखें आप। आप
वेबसाइट पर सारी इनेशन दे रखी है। मैं या
मेरे साथी टीचर्स किस कहां पर पढ़ाते हैं।
कंप्लीट इनेशन ifs ऑनलाइन.com पर अवेलेबल
है। पर अभी तो यहां पर पढ़ रहे हैं। दैट्स
वेरीेंट। खैर
वाटर के बाद सेकंड नंबर पर कौन सा
मॉलिक्यूल आएगा?
तो दैट इज़ वेरिएबल। अगर हम
ई कोलाई की बात करें तो दैट विल कम आउट टू
बी प्री प्रोटीन। और अगर हम प्लांट्स की
बात करें तो दैट विल कम आउट टू बी
कार्बोहाइड्रेट। अगेन एनिमल्स की बात करें
तो दैट विल बी अ प्रोटीन। दैट कुड बी अ
वेरिएबल। हालांकि कोई नहीं पूछेगा। मोस्ट
अबंडेंट इज़ वाटर। इन केस ऑफ़ प्लांट्स, द
सेकंड मोस्ट अबंडेंट इज़ मोस्ट ऑफन
कार्बोहाइड्रेट्स। व्हाइल इन केस ऑफ
बैक्टीरिया एज वेल एज एनिमल द सेकंड मोस्ट
अबंडनेंट मॉलिक्यूल आर द प्रोटंस। ओके? और
एक बात और भी ध्यान रखें कि बायोलॉजिकल
सिस्टम में डीएनए के कंपैरिजन में आरएनए
की अमाउंट परसेंटेज के हिसाब से ज्यादा
होती है। क्योंकि डीएनए की डिप्लॉयड जीनो
में तो दो कॉपीज़ होगी। आरएनए की मल्टीपल
कॉपीज है वहां पर प्रेजेंट है।
जोरिन लिपिड इज अ एस्टर्स ऑफ अ फैटी एसिड
एंड अ पॉलीहाइड्रोक्सी अल्कोहल। बट आगे हम
लिपिड पढ़ेंगे तो हम इस डेफिनेशन में काफी
ज्यादा फ्लक्सेशन देंगे। रिलैक्सेशन देंगे
कि फ्लैक्सिबिलिटी होगी। कुछ जगह पर ईथर
बॉन्ड भी होंगे, कुछ जगह पर
मोनोहाइड्रोक्सी अल्कोहल भी होगा। कुछ जगह
पर अमाइड बॉन्ड भी देखने को मिलेगा। बट
वहां पर जनरली दो चीजें जरूर होती है। एक
अल्कोहल होता है साथ और अल्कोहल के साथ
फैटी एसिड्स आकर एसोसिएट होती है। है ना?
बीएस के मैं ये बता रहा हूं
कि लिपिड्स में दो चीजें होती है। एक कोई
अल्कोहल और दूसरा फैटी एसिड।
उत्तरादास ग्लाइकोजन एक मैक मॉलिक्यूल है
और पॉलीमर भी है।
ठीक है? तो दिस इज द डिस्ट्रीब्यूशन। आगे
चलो बात करते हैं।
नाउ हमने कहा कि एटम्स को अगर स्टेबिलिटी
अचीव करनी है तो सम हाउ दे मस्ट कमपीट अ
डुप्लेट और एन ऑक्टेट। और उसको करने के दो
तरीके थे।
आइदर शेयरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉन्स और ट्रांसफर
ऑफ इलेक्ट्रॉन्स। तो पहले हम ट्रांसफर ऑफ
इलेक्ट्रॉन्स के बारे में बात कर रहे हैं।
हम आयनिक बॉन्ड्स के बारे में बात कर रहे
हैं।
ऐसे एटम्स फॉर एग्जांपल सोडियम सोडियम एटम
के आउटरमोस्ट शेल के अंदर फर्स्ट शेल के
अंदर टू है। उससे आउटरमोस्ट शेल में एट और
जो सबसे बाहर की तरफ शेल है उसमें एक
इलेक्ट्रॉन है। अगर सोडियम को
स्टेबल होना है
तो दो पॉसिबिलिटीज़ हैं। या तो सोडियम एटम
कहीं से सेवन इलेक्ट्रॉन को गेन करे ताकि
उसका ऑक्टेट कंप्लीट हो। या वह एक
इलेक्ट्रॉन को लूज़ करे ताकि आउटरमोस्ट शेल
ही हट जाए।
श्रीकांत कोलेस्ट्रॉल हम पढ़ेंगे। ठीक है?
लिपिड्स वाले टॉपिक में क्लियर हो जाएगा।
एकदम क्लियर हो जाएगा।
साइंस कैटलिस्ट सारी इंफॉर्मेशनेशन
वेबसाइट पर अवेलेबल है। अभी हम पढ़ रहे
हैं। चलो उन पे हमें ध्यान देने दो। ठीक
है? पढ़ो। बाकी सारी इंफॉर्मेशनेशन वेबसाइट
पर इंफॉर्मेशनेशन है और या आप देखते रहें।
आपको कमेंट मिलेगा। ठीक है? हमें सिर्फ
बायोकेमिस्ट्री पर अभी फोकस करना है कि
सोडियम के आउटरमोस्ट शेल के अंदर एक
इलेक्ट्रॉन है। आइदर सम हाउ इट कैन
एक्वायर अ सेवन इलेक्ट्रॉन फ्रॉम समवेयर
और इट कैन लूज़ वन इलेक्ट्रॉन।
व्हाट इज़ मोर ईज़ियर, मोर प्रोबेबल।
मोर ईज़ियर और मोर प्रोबेबल इज़ दैट दिस एटम
विल लूज़ एन इलेक्ट्रॉन।
क्योंकि एक इलेक्ट्रॉन को लूज करना
कंपेरेटिवली आसान है। और जैसे ही
इलेक्ट्रॉन को लूज करेगा
उसके ऊपर कैसा चार्ज आएगा?
पॉजिटिव चार्ज।
इट विल बिकम इलेक्ट्रो पॉजिटिव। जैसे किरण
ने कहा इट विल बिकम इलेक्ट्रो
पॉजिटिव।
क्योंकि कल क्लास में हम पढ़ चुके थे कि
किसी भी एक न्यूट्रल एटम में प्रोटॉन और
इलेक्ट्रॉन बराबर होते हैं। और प्रोटॉन और
इलेक्ट्रॉन बराबर है। इसका मतलब
एटम के ऊपर नेट चार्ज ज़ीरो है। सोडियम जब
तक एटम था तब तक उसके पास
हम ये कह सकते हैं कि 11 प्रोटॉन्स थे और
11 इलेक्ट्रॉन्स थे।
इसलिए नेट चार्ज सोडियम एटम पर कितना था?
जीरो। बिकॉज़ पॉजिटिव चार्ज हैज़ बीन काउंटर
बैलेंस बाय नेगेटिव चार्ज। पर जैसे ही
इसने एक इलेक्ट्रॉन को लूज़ किया। अभी
प्रोटॉन तो 11 ही रहे। इलेक्ट्रॉन पीछे 10
ही बचे। नेट चार्ज उसके ऊपर क्या आ गया?
पॉजिटिव। और ऐसे एटम जो कि टेंडेंसी रखते
हैं इलेक्ट्रॉन को लूज़ करने की। ऐसे एटम
को इलेक्ट्रो पॉजिटिव एटम कहते हैं।
इसी तरीके से इधर तरफ क्लोरीन के बारे में
बात की गई है
कि
क्लोरीन के आउटरमोस्ट शेल में आप देख सकते
हैं 1 2 3 4 5 6 एंड सेवन इलेक्ट्रॉन है।
सो कुल मिलाकर हम कह सकते हैं नॉर्मल
कंडीशन में 17 प्रोटॉन हैं और 17
इलेक्ट्रॉन हैं। इसलिए नेट चार्ज इसके ऊपर
ज़ीरो होगा। अगर क्लोरीन को स्टेबल होना है
तो दो तरीके हैं। या तो अपने सेवन
इलेक्ट्रॉन को लूज करे या एक इलेक्ट्रॉन
को कहीं से एक्वायर करें।
तो मोर प्रोबेबल इज़ दैट सम हाउ क्लोरीन
विल ट्राई टू एक्वायर एन इलेक्ट्रॉन फ्रॉम
समवेयर। और जैसे ही ये इलेक्ट्रॉन को
एक्वायर करेगा। अब उसके पास 17 प्रोटॉन है
और 18 इलेक्ट्रॉन हो जाएंगे। और 18
इलेक्ट्रॉन होते ही अब उसके ऊपर नेगेटिव
चार्ज आ जाएगा। ऐसे एटम जिनके ऊपर नेगेटिव
चार्ज आ जाता है। ऐसे एटम को हम इलेक्ट्रो
नेगेटिव
एटम्स कहते हैं। सच एटम्स आर रेफर्ड टू एज
इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम्स।
ओके?
सो
ऐसे एटम्स जिनके आउटरमोस्ट शेल में एक, दो
या तीन इलेक्ट्रॉन्स होते हैं। दे जनरली
हैव अ टेंडेंसी टू लूज़ एन इलेक्ट्रॉन
उन्हें इलेक्ट्रोपॉजिटिव एटम्स कहा जाता
है। उन्हें मेटल्स कहा जाता है। जिनके
आउटरमोस्ट शेल के अंदर
सेवन सिक्स या फाइव इलेक्ट्रॉन होते हैं।
दे हैव अ जनरल टेंडेंसी
टू एक्सेप्ट एन इलेक्ट्रॉन। उन्हें
इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम कहा जाता है। और
जिनमें आउटरमोस्ट शेल में से कार्बन में
चार इलेक्ट्रॉन हैं तो दे कैन इंस्टेड ऑफ़
ट्रांसफर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन मोर कॉमनली दे वुड
बी इनवॉल्वड इन शेयरिंग ऑफ़ इलेक्ट्रॉन्स।
ओके? सो अब सोडियम को स्टेबल होना है तो
इलेक्ट्रॉन को लूज करना है। क्लोरीन को
स्टेबल होना है तो इलेक्ट्रॉन को गेन करना
है। पर सिर्फ सोडियम एटम है तो वो
इलेक्ट्रॉन को लूज़ नहीं कर सकता। या
क्लोरीन एटम तब तक कहीं से इलेक्ट्रॉन को
गेन नहीं कर सकता जब तक कि सराउंडिंग के
अंदर कोई इलेक्ट्रॉन डोनर नहीं हो। पर
लेट्स से आपने एक ही जगह पर सोडियम एटम और
क्लोरीन एटम को दोनों को साथ में रख लिया।
दोनों अनस्टेबल है क्योंकि सोडियम के पास
एक इलेक्ट्रॉन एक्सेस है। क्लोरीन के पास
एक इलेक्ट्रॉन की कमी है। व्हाट विल हैपन
इज़ अ इलेक्ट्रॉन फ्रॉम सोडियम वुड बी
ट्रांसफरर्ड टू द क्लोरीन एंड एज अ रिजल्ट
ऑफ़ दिस सोडियम विल आल्सो बिकम स्टेबल एंड
द क्लोरीन विल आल्सो बिकम अ स्टेबल। और
जैसे ही सोडियम
ने इलेक्ट्रॉन को लूज़ किया, सोडियम के ऊपर
पॉजिटिव चार्ज आ गया। क्लोरीन के ऊपर
इलेक्ट्रॉन रिसीव करने के बाद नेगेटिव
चार्ज आ गया। क्योंकि अब सोडियम के पास 11
प्रोटॉन्स हैं और 10 ही इलेक्ट्रॉन हैं।
जबकि क्लोरीन के पास अब 17 प्रोटॉन है
लेकिन 18 इलेक्ट्रॉन आ चुके हैं। एक
इलेक्ट्रॉन उसने और एक्वायर कर लिया। अब
हम कहेंगे सोडियम एटम सोडियम आयन की फॉर्म
में। और क्लोरीन एटम क्लोरीन आयंस की
फॉर्म में। और क्योंकि A के ऊपर पॉजिटिव
चार्ज है और A के ऊपर नेगेटिव चार्ज है।
ये पॉजिटिव और नेगेटिवली चार्ज वाले आयंस
एक दूसरे के साथ रहेंगे। अब एक दूसरे से
अलग नहीं होंगे क्योंकि वह ज्यादा स्टेबल
है। तो ऐसा बॉन्ड जो आयंस के बीच में होता
है उस बॉन्ड को हम क्या कहते हैं? आयनिक
बॉन्ड। सो, हाउ वी आर गोइंग टू डिफाइन
आयनिक बॉन्ड? आयनिक बॉन्ड इज़ अ बॉन्ड
व्हिच इज़ फॉर्म बिटवीन एन आयंस। एंड व्हाट
आर आयंस? आयंस दे आर फॉर्म्ड व्हेन एन एटम
आइदर लूज और गेन एन इलेक्ट्रॉन। एटम्स
व्हिच लूज़ एन इलेक्ट्रॉन आर रेफर्ड टू एज
इलेक्ट्रोपजिटिव एटम्स एंड एटम्स व्हिच
हैव जनरल टेंडेंसी टू एक्सेप्ट एन
इलेक्ट्रॉन्स आर रेफर्ड टू एज़
इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम एंड व्हेन अ
इलेक्ट्रोपज़िटिव एटम एंड इलेक्ट्रोनेगेटिव
एटम दे आर प्लेस्ड टुगेदर देयर इज़ अ
ट्रांसफर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन एंड ड्यू टू अ
ट्रांसफर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन दीज़ एटम्स दे मूव
टू देयर आयनिक स्टेट्स। वन बिकम पॉजिटिव
चार्ज, अनदर बिकम नेगेटिव चार्ज। एंड दीज़
पॉजिटिव एंड नेगेटिवली चार्ज आयंस दे
रिमेन टुगेदर अ फोर्स और इंटरेक्शन व्हिच
इज़ होल्डिंग दीज़ आयंस टुगेदर इज़ रेफर्ड टू
ऐज़ आयनिक बॉन्ड। ओके? सो, आयनिक बॉन्ड
कहां पर होता है? आयंस के बीच में।
मोल कांसेप्ट भी होगा, सब चीजें होगी। हैव
अ पेशेंस। अभी तो हमारी दूसरी
इंट्रोडक्टरी क्लास है। अभी तो
बच्चों के साथ मेरी ट्यूनिंग भी नहीं हुई।
इट विल टेक अ फोर टू फाइव डज़ कि हमारी
रिदमम फ्रीक्वेंसी हम रेजोनेंस में आ पाए।
अभी तो शुरू हुआ है। बहुत बेसिक टॉपिक है
और वो भी एटम मॉलिक्यूल्स जैसा टॉपिक
जिससे हम रोज दूर भागते हैं और सोचते हैं
इससे क्या कोई ज्यादा इंपॉर्टेंट पार्ट भी
नहीं है। ऐसा लगता है। बट इट इज़ेंट फॉर
डेवलपिंग द बेसिक्स ऑफ़ बायोकेमिस्ट्री।
ओके?
यस देवव्रत द नेम इज बॉन्ड एंड इट्स आयनिक
बॉन्ड बिकॉज़ इट इज द बॉन्ड अमंग द आयंस।
करिश्मा हम इलेक्ट्रोसिटी के बारे में बात
करेंगे। थोड़ा सा पेशेंस रखें। आयनिक बॉन्ड
और इलेक्ट्रोसिटी में कहां पर डिफरेंस है
हम डिस्कस करेंगे। नाउ कमिंग
टू द पॉइंट।
व्हाट वुड बी द फोर्स?
ऑफ द इंटरेक्शंस इन एन आयनिक बॉन्ड। बिकॉज़
आप जानते हैं कि द एनर्जी ऑफ एन आयनिक
बॉन्ड इट मे रेंजेस फ्रॉम मोस्ट कॉमनली इट
रेंजज़ फ्रॉम 40 टू 50 किलो कैलोरी पर मोल।
या इससे ज्यादा भी हो सकती है, कम भी हो
सकती है। जनरली इस रेंज में होती है।
बट ये एनर्जी या फोर्स किसके ऊपर डिपेंड
करता है?
फोर्स को डिफाइन करने के लिए हम कूलम्स लॉ
का इस्तेमाल कर सकते हैं। द फोर्स अमंग द
इलेक्ट्रोस्टेटिक इंटरेक्शन फोर्स इज
डिपेंड अपॉन k व्हिच इज़ अ कांस्टेंट q1 q2
r² d
वेयर q1 एंड q2 आर
चार्ज
बेसिकली यहां पर हम आयंस के बारे में बात
कर रहे हैं।
जितना ज़्यादा चार्ज होगा, ऑपोज़िट चार्ज
होगा, उतना ही वहां पर अट्रैक्टिव फोर्स
देखने को मिलेगा। ओके?
R इज़
डिस्टेंस
बिटवीन
आयंस।
डिस्टेंस और फोर्स के बीच में इनवर्स
रिलेशनशिप है। एंड इट इज़ हैविंग अ
स्क्वायर इनवर्स रिलेशनशिप।
एंड अनदरेंट पैरामीटर इज़ D. D स्टैंड्स
फॉर डाई इलेक्ट्रिक कांस्टेंट। अभी हम
इसके बारे में भी बात करते हैं।
सो इन अदर वर्ड्स जो फोर्स की बात कर रहे
हैं। फोर्स इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू
द चार्ज
ऑन द आयंस यानी +1 -1 चार्ज है या +2 -2
चार्ज है। +3 -3 चार्ज है। जितना ज्यादा
चार्ज उतना ही ऑपोजिट चार्ज उतना ही
ज्यादा अट्रैक्टिव फोर्स होगा। हां, अगर
चार्ज सिमिलर तरीके के हैं, तो फिर
अट्रैक्टिव फोर्सर्सेस की बजाय रिपल्सिव
फोर्स होगी। फिर बॉन्डिंग नहीं होगी। जब
तक हम बॉन्डिंग की बात कर रहे हैं तब तक
हम ये मान कर चल रहे हैं कि q1 एंड q2 दे
आर बियरिंग अ ऑपोजिट चार्ज।
एंड
r² बेसिकली इट इज़ द डिस्टेंस बिटवीन दीज़
चार्जेस जो q पॉजिटिव चार्ज है और q2
सेकंड हमारा चार्ज है। इनके बीच में
डिस्टेंस कितनी है? दैट इज गिवन बाय r और
डिस्टेंस के साथ आप देख सकते हैं डिस्टेंस
के स्क्वायर से इसके साथ रिलेशनशिप पे अगर
डिस्टेंस को अगर टू टाइम्स को बढ़ाएंगे तो
जो फोर्स है वो फोर टाइम्स कम हो जाएगा।
तो डिस्टेंस बढ़ाएं फोर्स ऑफ़ इंटरेक्शन विल
डिक्लाइन। एंड D डिपेंड्स अपॉन अ
डइलेक्टिक कांस्टेंट एंड डइलेक्टिक
कांस्टेंट ऑफ अ मीडियम इन व्हिच दीज़ आयंस
दे आर केप्ट। ओके? फॉर एग्जांपल अगर हम
एयर या वैक्यूम की बात करें। एयर या
वैक्यूम की डइलेक्टिक कांस्टेंट की वैल्यू
वन होती है। वाटर की हम बात करें तो
डइलेक्टिक कांस्टेंट की वैल्यू 80 होती
है। ओके? अभी हम इसके बारे में डिस्कस
करते हैं। और एनर्जी बिकॉज़ हम जानते हैं
कि वर्क क्या होता है? वर्क इज़ फोर्स *
डिस्प्लेसमेंट। और वी कैन से फोर्स *
डिस्टेंस इज़ r और फोर्स को हम कैसे मेजर
करते हैं? अभी हमने देखा KQ1 Q2 R² D * R
करेंगे तो एक r से R कट जाएगा। तो हमारे
पास वर्क कैपेसिटी टू वर्क इज़ रेफर्ड टू
एज़ एनर्जी। तो एनर्जी का हमारा फार्मूला
क्या हो जाएगा? KQ1
Q2
RD
यानी आयनिक बॉन्ड्स में क्या एनर्जी होगी?
वेदर इट वुड बी 40 किलो कैलोरी पर मोल
और 50 किलो कैलोरी पर मोल। और 80 किलो
कैलोरी पर मोल और अ 5 किलो कैलोरी पर मोल
दैट डिपेंड्स अपॉन फर्स्ट द चार्ज इट इज़
हैविंग अ इनवर्स रिलेशनशिप वि द डिस्टेंस
फोर्स स्क्वायर की पावर से था एनर्जी
सिंपली r से इनवर्स प्रोपोर्शनल है एंड
अनदरेंट पैरामीटर दैट इज़ द डइलेक्टिक
कांस्टेंट d
तो दीज़ आर मेजर फैक्टर्स
हां राकेश अब से हमने 4:00 बजे से क्लास
क्लास स्टार्ट कर दी। उसका रीज़न यह है
क्योंकि
6:00 बजे के बाद बफरिंग की बहुत ज्यादा कल
प्रॉब्लम हुई थी। तो उससे बचने के लिए अब
से हम आज से 4:00 बजे स्टार्ट कर रहे हैं
और देख रहे हैं कि क्या इस समय भी बफरिंग
वाली प्रॉब्लम आती है या नहीं आती है। टच
वुड अब तक तो प्रॉब्लम देखने को नहीं
मिली।
वेरी गुड नाथूराम। बिलकुल सही।
चलो।
आगे बात करते हैं। सो
एनर्जी किसके ऊपर डिपेंड करती है? K Q1,
Q2
RD
जैसे हमने Q1 Q2 चार्ज के बारे में बात
की। R डिस्टेंस हो गया आयंस के बीच में।
जितने पास में आयन रखेंगे इंटरेक्शंस या
एनर्जी ज्यादा होगी। एक इंपॉर्टेंट
पैरामीटर जिसके बारे में अब हम बात कर रहे
हैं दैट इज़ अ डाईइलेक्टिक कांस्टेंट।
यस अंजली चार्ज के डायरेक्टली प्रोपोर्शनल
है और डिस्टेंस के इन्वर्सली प्रोपोर्शनल
है।
थैंक यू उत्तरादास। इसीलिए टाइम थोड़ा चेंज
किया क्योंकि एक्चुअली 5 6:00 बजे के बाद
ऐसा लगता है कि नेट यूज़र्स बढ़ जाते हैं
इसलिए थोड़ी स्पीड के साथ प्रॉब्लम आती है।
इसलिए हमने आज ट्रायल के लिए 4:00 बजे से
क्लास स्टार्ट की और नोटिफाई कर दिया था।
आज सुबह वाले लोग जो आए थे आपको पता है ना
सुबह भी मैं आया था हमने प्ले विन जो
कॉन्टेस्ट वन था उसके क्वेश्चंस को डिस्कस
किए जो उस समय शामिल नहीं हो पाए वो देख
सकते हैं।
चलो आगे बात करते हैं। कमिंग टू द पॉइंट
व्हाट वी मीन बाय अ डाईइलेक्टिक
कांस्टेंट।
अब हम
डइलेक्टिक कांस्टेंट के बारे में बात करते
हैं।
बेसिकली डाईइलेक्टिक कांस्टेंट
वाटर का या डइलेक्टिक कांस्टेंट किसी भी
मटेरियल की हम बात करें द
डइलेक्टिक कांस्टेंट
बात
डइलेक्टिक कांस्टेंट ऑफ अ वाटर और अ
डइलेक्टिक कांस्टेंट ऑफ़ एनी इंसुलेटिक
मटेरियल इट कैन बी डिफाइंड एज दैट हाउ मच
और हाउ मच अमाउंट ऑफ़ चार्ज इट इज़ स्टर्ड
बाय दैट पर्टिकुलर र इंसुलेटिंग मटेरियल
एज़ कंपेयर टू व्हेन द सेम मैटेलिक प्लेट्स
दे वर बीइंग केप्ट इन अ वैक्यूम और एयर।
सो दो चीज़ इसमें इंपॉर्टेंट है कि दो आपके
पास मैटेलिक प्लेट्स हैं। एक पॉजिटिव
चार्ज और एक नेगेटिव चार्ज। उसके बीच में
हमने कुछ मीडियम रखा। इंसुलेटिंग मीडियम
रखा। ये इंसुलेटिंग मीडियम।
कुछ भी हो सकता है। दैट कुड बी वाटर, दैट
कुड बी बेंजीन, दिस कुड बी हेक्सेन, दिस
कुड बी एयर और दिस कुड बी
सो हम कह रहे थे कि किसी भी मीडियम की
चार्ज स्टोर कर स्टोर करने की कैपेबिलिटी
को हम डइलेक्टिक कांस्टेंट से मेजर करते
हैं। तो दो चार्ज प्लेट्स रखें उनके बीच
में मीडियम रखें और वो मीडियम कितना चार्ज
को स्टोर करके रखता है दैट इज़ दैट
प्रॉपर्टी इज़ रेफर्ड टू एज़ डइलेक्टिक
कांस्टेंट। और रेफरेंस के तौर पर हम क्या
ले रहे हैं? एयर या वैक्यूम।
ओके?
सो बेसिकली डइलेक्टिक कांस्टेंट चार्ज
सेपरेशन के बारे में बताता है।
जिस मीडियम की डइलेक्टिक कांस्टेंट की
वैल्यू जितनी ज्यादा होगी वह उतना ही
ज्यादा चार्ज को स्टोर करके रखेगा। और
चार्ज को स्टोर करके रखने का मतलब है एज
कंपेयर टू एयर और वैक्यूम। उसका मतलब है
वो उतने ही कम आयंस को आपस में इंटैक्ट
होने देगा। एयर या वैक्यूम जिनकी
डइलेक्टिक कांस्टेंट की वैल्यू सबसे कम
है। एयर या
एयर या वैक्यूम की जिसको हम रेफरेंस लेते
हैं उसकी डइलेक्टिक कांस्टेंट वैल्यू वन
है। उसके कंपैरिजन में वाटर की डइलेक्टिक
कांस्टेंट की वैल्यू 80 है।
जिसकी डइलेक्ट्रिक कॉन्स्टेंट वैल्यू
जितनी ज़्यादा वह उनके अंदर हम जितने
ज़्यादा सॉल्ट को ऐड करें या कोई भी साल्ट
को ऐड करें, वह उतनी आसानी से डिॉल्व
होगा। बिकॉज़ हाई डइलेक्टिक कांस्टेंट
वैल्यू मींस इट इज़ हैविंग एन हाई एबिलिटी
टू स्टोर अ चार्ज। इट कैन अलाउ द डिसोसशन
ऑफ़ चार्ज। तो इसको हम थोड़ा और समझते हैं।
जैसे ही
किसी भी सॉल्ट को वाटर में ऐड करते हैं।
जैसे NaCl को वाटर में ऐड करते हैं। तो
व्हाट यू फाइंड इज़ दैट इट गेट डिसोसिएट
इंटू रेडली इट गेट डिसोसिएट इंटू सोडियम
आयन एंड क्लोरीन आयन। ऐसा क्यों होता है?
तो उसका सीधा सा हम आंसर देते हैं। ऐसा
इसलिए होता है कि
वाटर की डइलेक्टिक कांस्टेंट वैल्यू बहुत
ज्यादा होती है।
जितनी ज्यादा डाईइिक कांस्टेंट की वैल्यू
होगी
उतनी ही
जितनी डइलेक्ट कांस्टेंट की वैल्यू ज्यादा
होगी उतनी ही आसानी से उसमें आयंस डिॉल्व
होंगे। इसको कुछ और समझ समझा जा सकता है
कि जब NaCl
क्रिस्टल फॉर्म में है
अगर इसको आपको आयनिक फॉर्म में कन्वर्ट
करना है तो लैटिस को ब्रेक करना पड़ेगा।
और लैटिस को ब्रेक करने के लिए जो एनर्जी
चाहिए उसे एंथैल्पी कहा जाता है।
सो
इन अदर वर्ड्स सॉल्ट अगर ब्रेक हो रहा है
तो एंथैल्पी
दिस प्रोसेस वुड बी
एंडोथर्मिक क्योंकि हमें बाहर से एनर्जी
लगानी पड़ेगी।
और जब सॉल्ट को वाटर में ऐड किया जाए
सिर्फ सॉल्ट आयंस में ही डिसोसिएट नहीं
होता है। उल्टा जो वाटर के मॉलिक्यूल्स
हैं जो आपस में हाइड्रोजन बॉन्ड कर रहे थे
उनको भी एक दूसरे से डिसोसिएट होना पड़ता
है। यानी को भी सेपरेट होना पड़ेगा। यानी
जो वाटर है दे विल आल्सो स्प्लिट।
वह प्रोसेस भी एंडोथर्मिक हुआ।
लेकिन यह फिर भी प्रोसेस
क्यों हो पाता है? तो इसका रीजन है कि जब
कभी भी आयंस
वाटर के साथ इंटरेक्ट करते हैं।
आयंस वाटर के साथ इंटरेक्ट करते हैं। तो
यहां पर इनके बीच में जो एंथैल्पी होती है
जिसे कहा जाता है एंथैल्पी ऑफ़ हाइड्रेशन।
एंड दिस एंथैल्पी ऑफ़ हाइड्रेशन दिस इज़
वेरी हाई। एंथैल्पी ऑफ़ हाइड्रेशन इज़ वेरी
हाई। दिस इज़ एन एग्जोथर्मिक
प्रोसेस।
या इसको हम सिंपल वर्ड्स में इस तरीके से
समझ सकते हैं।
द एनर्जी व्हिच इज़ रिक्वायर्ड टू ब्रेक अ
बॉन्ड।
और व्हिच इज़ रिक्वायर्ड टू डिस्टर्ब द
लैटिस स्ट्रक्चर ऑफ़ NaCl इज़ रेफर्ड टू एज
लैटिस एनर्जी।
एंड द एनर्जी
व्हिच इज इन व्हिच इज प्रेजेंट इन द
इंटरेक्शन बिटवीन आयंस एंड वाटर इज रेफर्ड
टू एज हाइड्रेशन एनर्जी। और जैसे हम
स्मॉल क्लासेस में पढ़ते हैं
कि अगर
हाइड्रेशन एनर्जी
लैटिस एनर्जी से ज्यादा हो तो उस कंडीशन
में आयंस दे विल गेट रेडीली डिॉल्व इन आवर
वाटर।
सो व्हाई सॉल्ट इट गेट डिॉल्व इन अ वाटर
या सॉल्ट्स दे विल गेट डिॉल्व ओनली अंडर अ
सिनेरियो इफ एन हाइड्रेशन एनर्जी एंथैल्पी
एनर्जी को मेजर करने के लिए जो टर्म्स
इस्तेमाल करते हैं दैट इज़ रेफर टू एज़
एंथैल्पी एंथैल्पी एंट्रॉपी फ्री एनर्जी
के बारे में हम आगे डिस्कस करेंगे। पर अभी
सिर्फ इतना सा ही बहुत है कि हाइड्रेशन
एनर्जी अगर लैटिस एनर्जी से ज्यादा है उस
कंडीशन में सॉल्ट है दैट विल गेट डिॉल्व
इन अ वाटर।
तो
अब
हमें इन बातों का
ध्यान रखना है। ठीक है? ठीक है? हमें तो
बिल्कुल
छोटी-छोटी चीजें हमें याद रखनी है।
अब
हम ये भी कह सकते हैं सॉल्ट्स जिनकी
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी में डिफरेंस बहुत
ज्यादा होता है। इलेक्ट्रोनेगेटिविटी में
डिफरेंस बहुत हाई होता है।
हाई डिफरेंस जहां ज्यादा होगा दे विल गेट
ईजीली सॉलीबलाइज।
क्योंकि इलेक्ट्रोनेगेटिविटी में बहुत
ज्यादा डिफरेंस होने का मतलब वहां पर
आयनिक बॉन्ड्स होंगे और आयनिक बॉन्ड्स
होंगे उनको वाटर में जैसे ही हम ऐड करेंगे
वाटर का डइलेक्ट्रिक कां्सेंट वैल्यू
ज्यादा होती है। वो आसानी से डिॉल्व हो
जाएगी। डइलेक्ट्रिक कांस्टेंट वैल्यू
ज्यादा होने की वजह से जो हाइड्रेशन
एनर्जी होगी दैट इज द इंटरेक्शन व्हिच इज़
ड्यू टू एन इंटरेक्शन बिटवीन एन आयंस एंड
अ वाटर मॉलिक्यूल दैट वुड बी हायर एज़
कंपेयर टू
द स्ट्रेंथ ऑफ़ इंटरेक्शन व्हिच वाज़ दैट इज़
एनर्जी दैट वाज़ द स्ट्रेंथ ऑफ़ इंटरेक्शन
बिटवीन द आयंस टुगेदर। चलो आगे बात करते
हैं हम।
कमिंग टू द पॉइंट व्हाट डू वी मीन बाय
कोवेंट बॉन्ड्स?
उत्तरादास लैटिस एनर्जी का मतलब देयर वास
सम एंथैल्पी और हीट कंटेंट वि वाज
होल्डिंग द आयंस टुगेदर
यस सॉल्वेशन एनर्जी बिल्कुल बिल्कुल सही
बात है
यस अंजलि बिल्कुल आप सही कह रहे हैं
और एंथैल्पी वाला कांसेप्ट हमारा थोड़ा आगे
और क्लियर हो जाएगा। हम आगे बात करते हैं।
चलो आज कोवेंट बॉन्ड्स के बारे में।
सो कमिंग टू द पॉइंट व्हाट वी मीन बाय
कोवलेंट बॉन्ड्स।
कोवलेंट बॉन्ड्स दे आर फॉर्म बाय शेयरिंग
ऑफ़
इलेक्ट्रॉन्स।
लेट्स से जैसे हमने स्टार्टिंग में बात की
कि हाइड्रोजन एटम के आउटरमोस्ट शेल में एक
ही इलेक्ट्रॉन है।
सो वहां पर ट्रांसफर पॉसिबल नहीं है। इस
हाइड्रोजन एटम को भी स्टेबल होने के लिए
एक डुप्लेट को कंप्लीट करने के लिए एक
इलेक्ट्रॉन चाहिए। इसको भी अपने डुप्लेट
को कंप्लीट करने के लिए एक इलेक्ट्रॉन और
चाहिए। इस केस में ट्रांसफर की बजाय इस
इलेक्ट्रॉन पेयर को दोनों शेयर करेंगे
ताकि इसका डुप्लेट भी कंप्लीट हो जाए और
इसका डुप्लेट भी कंप्लीट हो जाए।
सिमिलरली एक ऑक्सीजन एटम के आउटरमोस्ट शेल
के अंदर लेट्स से
सिक्स
इलेक्ट्रॉन हैं। दूसरे ऑक्सीजन एटम के
आउटरमोस्ट शेल में भी सिक्स इलेक्ट्रॉन
हैं।
यहां पर भी ट्रांसफर पॉसिबल नहीं है।
क्योंकि ऐसा करने पर दोनों के ऑक्टेट
कंप्लीट नहीं होंगे।
यहां पर वापस क्या होगा? शेयरिंग ऑफ
इलेक्ट्रॉन। ताकि इस ऑक्सीजन एटम का भी
ऑक्टेट कंप्लीट हो जाए। इस ऑक्सीजन एटम का
भी ऑक्टेट कंप्लीट हो जाए। जिसको इस तरीके
से रिप्रेजेंट किया जा सकता है।
ओके? सो व्हाट इज़ कोवलेंट बॉन्ड्स? कोवेंट
बॉन्ड्स आर फॉर्म्ड व्हेन द डिफरेंस इन
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी
इज़ आइदर ज़ीरो और द डिफरेंस इन
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी इज़ नेगिलिजिबल।
सच दैट ट्रांसफर ऑफ इलेक्ट्रॉन इज़ नॉट
पॉसिबल।
सो दो एटम्स के बीच में दो ही सिनेरियो हो
सकते हैं। या तो इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का
बहुत ज्यादा डिफरेंस होगा। एक
इलेक्ट्रोपॉजिटिव होगा और एक
इलेक्ट्रोनेगेटिव होगा। उस कंडीशन में
देयर वुड बी अ ट्रांसफर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन्स।
लेकिन अगर इलेक्ट्र इलेक्ट्रोनेगेटिविटी
का डिफरेंस इतना ज्यादा नहीं है
या बिल्कुल भी डिफरेंस नहीं है। जैसे
हाइड्रोजन एटम और हाइड्रोजन एटम की दोनों
की इलेक्ट्रोनेगेटिविटी सेम होगी। इन
दोनों ऑक्सीजन एटम की इलेक्ट्रोनेगेटिविटी
सेम होगी। दोनों की इलेक्ट्रॉन के लिए
टेंडेंसी एक जैसी हो या लगभग एक जैसी है।
उस कंडीशन के अंदर ट्रांसफर ऑफ इलेक्ट्रॉन
पॉसिबल नहीं है। बल्कि वहां पर क्या होगा?
शेयरिंग ऑफ़ इलेक्ट्रॉन।
सो व्हाट आर कोवेंट बॉन्ड्स? सो कोवेंट
बॉन्ड्स
दीज़ आर द बॉन्ड्स फॉर्म्ड बिटवीन द एटम्स
व्हिच आर हैविंग आइदर सिमिलर
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी
ऑ अ डिफरेंस इन इलेक्ट्रोनेगेटिविटी इज़
नेगिलिजिबल इट इज़ नॉट सफिशिएंट इनफ टू
कैरी आउट अ ट्रांसफर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन।
ओके?
हियर इन कोवलेंट बॉन्ड्स देयर इज़ अ
शेयरिंग ऑफ़ इलेक्ट्रॉन्स।
सो कुछ हम एग्जांपल ले सकते हैं।
जैसे ऑक्सीजन एटम और ऑक्सीजन एटम के बीच
के अंदर
देयर आर
अभी हमने बताया ऑक्सीजन एटम और दूसरे
ऑक्सीजन एटम के बीच में जब ऑक्सीजन
मॉलिक्यूल की हम बात करेंगे
तो वहां पर टू पेयर्स ऑफ इलेक्ट्रॉन्स दे
आर शेयर्ड इसको इस तरीके से हम रिप्रेजेंट
कर सकते हैं।
इस ऑक्सीजन का ऑक्टेट भी कंप्लीट हो गया।
इस ऑक्सीजन का ऑक्टेट भी कंप्लीट हो गया।
इनको कहा जाता है शेयर्ड पेयर ऑफ
इलेक्ट्रॉन।
और जो
पार्टिसिपेट नहीं कर रहे हैं शेयरिंग के
अंदर दीज़ आर एफ टू एज़ लोन पेयर ऑफ़
इलेक्ट्रॉन्स।
सो वी विल से दैट ईच ऑक्सीजन एटम व्हिच इज़
हैविंग अ फोर पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन आउट ऑफ
व्हिच द टू आर लोन पेयर्स एंड रेस्ट ऑफ द
पेयर्स वुड बी रेफर्ड टू एज़ टू ऑफ़ देम दे
आर शेयर्ड पेयर एंड रेस्ट ऑफ़ द टू वुड बी
रेफर्ड टू एज़ लोन पेयर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन्स।
जब कभी भी एक पेयर इलेक्ट्रॉन का शेयर हो
रहा हो तो उसके लिए हम एक बॉन्ड सिंगल
बॉन्ड रिप्रेजेंट कर रहे हैं। दो अगर
शेड पेयर हैं तो डबल बॉन्ड से रिप्रेजेंट
करेंगे। सो यहां पर क्योंकि दो
पेयर्स इलेक्ट्रॉन के शेयर हो रहे हैं। वी
विल रिप्रेजेंट इट विद अ डबल बॉन्ड।
सो ऑक्सीजन और ऑक्सीजन के बीच में दो
शेयर्ड पेयर्स हैं। नाइट्रोजन और
नाइट्रोजन के बीच में तीन ट्रिपल कोवेंट
बॉन्ड का फॉर्मेशन हो रहा है। क्योंकि
देयर आर थ्री शेयर्ड पेयर। हमेशा सिमिलर
एटम्स के बीच में ही कोवेंट बॉन्डिंग हो
ऐसा जरूरी नहीं है। जैसे कि इधर की तरफ आप
देख सकते हैं हाइड्राजीन का स्ट्रक्चर बना
हुआ है। जहां पर NH2 NH2 कंडीशन
यहां पर इथेन
इथाईलीन एसिटाइलन का स्ट्रक्चर बना हुआ
है। तो दीज़ आर वेरियस एग्जांपल ऑफ़ कोवलेंट
बॉन्ड्स। और बायोलॉजिकल सिस्टम में तो
ज्यादातर मॉलिक्यूल्स जो बायोलॉजिकल
सिस्टम प्रेजेंट है उन सबके अंदर कोवलेंट
बॉन्ड्स हैं वो प्रेजेंट होता है।
तो
देयर आर वेरियस एग्जांपल कोवलेंट बॉन्ड
जैसे ग्लूकोस है उनके अंदर सभी एटम्स के
बीच में कोवेंट बॉन्ड दिखाई देगा। अमीनो
एसिड्स के अंदर आप देखेंगे कोवलेंट
बॉन्ड्स देखने को मिलेंगे। ऑक्सीजन,
हाइड्रोजन, नाइट्रोजन गैस के अंदर आपको
कोवेंट बॉन्ड देखने को मिलेंगे। मिथेन के
बीच में और भी कई सारे आप एग्जांपल C2H5OH
हाइड्राजीन एटसेट्रा दीज़ ऑल आर द
एग्जांपल्स व्हेयर यू आर गोइंग टू गेट द
कोवेंट बॉन्ड्स और बायोलॉजिकल सिस्टम में
तो जितने भी मॉलिक्यूल्स हैं उन सब जगह पर
कोवेंट बॉन्ड देखने को मिलेंगे। मोस्ट ऑफ़
द ऑर्गेनिक कंपाउंड्स दे शोज़ अ कोवलेंट
बॉन्ड्स।
देन
वी आर नाउ डिफाइनिंग अ बॉन्ड लेंथ।
सो बेसिकली
द बॉन्ड लेंथ कुड बी डिफाइंड एज
इंटर
न्यूक्लियर
डिस्टेंस
बिटवीन
या इलेक्ट्र इंटरनक्लियर डिस्टेंस वी कैन
से व्हेन
अट्रैक्टिव
एंड रिपल्सिव
फोर्सर्सेस
आर इन
बैलेंस स्टेट।
सो हमने अभी तक ये बात की कि सपोज़ ये एटम
है A ये उसका न्यूक्लियस है।
ये दूसरा एटम है और ये उसका न्यूक्लियस
मान जैसे यहां पर डायग्राम में डॉ किया
गया है और शेयर्ड पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन को
यहां पर बीच में रखा गया है। सो
इसका पॉजिटिव चार्ज न्यूक्लियस इस
इलेक्ट्रॉन को अट्रैक्ट करेगा। इसका
पॉजिटिव चार्ज न्यूक्लियस इस इलेक्ट्रॉन
के पेयर को अट्रैक्ट करेगा। देयर वुड बी
सम काइंड ऑफ़ अट्रैक्टिव फोर्स। जैसे-जैसे
पास में लाते जाएंगे अट्रैक्टिव फोर्स
बढ़ेंगे। पर एक लेवल के बाद और ज्यादा पास
में लाने पर न्यूक्लियस और ज्यादा नजदीक
आएंगे और न्यूक्लियस ज्यादा नजदीक आने पर
उसे हम रिपल्सिव फिर वहां पर अट्रैक्ट की
बजाय देयर वुड बी अ रिपल्सिव फोर्स। तो हम
कह रहे हैं एटम्स अगर बहुत ज्यादा दूर है
तो ना कोई अट्रैक्टिव फ़ है ना कोई
रिपल्सिव फ़ है। जैसे-जैसे दो हाइड्रोजन
एटम नजदीक आते जाते हैं देयर इज़ अ शेयरिंग
ऑफ़ इलेक्ट्रॉन। नाउ द बोथ द न्यूक्लियस दे
आर बीइंग अट्रैक्टेड टुवर्ड द शेयर्ड पेयर
ऑफ इलेक्ट्रॉन इन्हें ए अट्रैक्टिव फोर्स
कहा अब और ज्यादा पास में लेकर आए तो
न्यूक्लियस नजदीक आएंगे अब अट्रैक्टिव की
बजाय वहां पर बहुत ज्यादा नजदीक आने पर
देयर वुड बी अ रिपल्सिव फोर्स तो इस
डिस्टेंस पर जहां पर अट्रैक्टिव फोर्स
सबसे मैक्सिमम है और रिपल्सिव फोर्स सबसे
मिनिमम है इसे कहा जाएगा बॉन्ड लेंथ ओके
सो बॉन्ड लेंथ वी कैन से इट इज़ एन इंटर
न्यूक्लियर डिस्टेंस बिटवीन द टू एटम्स
वेयर द अट्रैक्टिव फोर्सर्सेस दे आर
काउंटर बैलेंस्ड बाय अ रिपल्सिव
फोर्सर्सेस।
ये बात हुई बॉन्ड लेंथ के बारे में। और हम
बात कर चुके हैं सिंगल डबल या ट्रिपल
कोवेलेंट बॉन्ड के बारे में।
सिंगल
जब दो एटम्स के बीच में अगर जैसे
हाइड्रोजन का एग्जांपल ले लें ओनली वन
पेयर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन इज़ शेयरर्ड इट इज़ रिटन
बाय सिंगल बॉन्ड। व्हेन द टू शेयर्ड पेयर
ऑफ़ इलेक्ट्रॉन इज़ इनवोल्व देन इज़ रेफर्ड
टू ऐज़ डबल बॉन्ड।
व्हेन अ थ्री पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स दे आर
शेयर्ड इट इज रिप्रेजेंट बाय अ ट्रिपल बंड
सयाली हम आगे बात करेंगे वंडर वाल
इंटरेक्शन के बारे में भी
ठीक है ए हैव अ पेशेंस अभी हम बहुत
बेसिक्स को क्लियर कर रहे हैं धीरे-धीरे
पढ़ेंगे हमारा लेवल बढ़ाएंगे अभी बहुत
बेसिक अभी लोगों को लग सकता है बहुत हम
बेसिक पढ़ रहे हैं प्रॉपर हमें बेसिक से
स्टार्ट करना पड़ेगा क्योंकि मेरे जैसे कई
सारे स्टूडेंट यहां सामने होंगे जिनको
केमिस्ट्री बिल्कुल नहीं आती या बहुत कम
आती है। हम इसलिए हमें बेसिक लेवल से
स्टार्ट करना पड़ेगा। ओके? सो, हम आगे
वंडरबल कांसेप्ट पर भी जाएंगे।
जब कभी भी देयर इज़ अ
सिंगल कोवलेंट बॉन्ड देयर इज़ एन ओ
ओवरलैपिंग ऑफ़ S ऑर्बिटल हेड टू हेड
ओवरलैपिंग होती है। और हेयर टू हेयर
ओवरलैपिंग या जिसको हम बॉन्ड को हम सिग्मा
बॉन्ड कहते हैं। दैट इज़ कंपेरेटली मोर
स्टेबल।
सो सिंगल बॉन्ड में एक सिग्मा बॉन्ड होता
है। जहां पर हेड टू हेड ओवरलैपिंग है। डबल
बॉन्ड में एक सिग्मा
बॉन्ड और जो दूसरा बॉन्ड बना उसमें साइड
बाय साइड इस तरीके से साइड बाय साइड
ओवरलैपिंग होगी। सेकंड बॉन्ड के अंदर जिसे
हम
पाई बॉन्ड कहते हैं। पाई बॉन्ड में
क्योंकि साइड बाय साइड ओवरलैपिंग होती है
तो जितनी स्ट्रेंथ मिलनी चाहिए उतनी
स्ट्रेंथ नहीं मिलेगी। जितनी सिग्मा बॉन्ड
स्ट्रेंथ देता है उतनी पाई बॉन्ड स्ट्रेंथ
नहीं देता।
ऐसे ही
नाइट्रोजन में एक सिग्मा बॉन्ड और बाकी
साइड बाय साइड ओवरलैपिंग की वजह से देयर
आर टू पाई बॉन्ड्स।
सिग्मा बॉन्ड्स प्रोवाइड मैक्सिमम
स्ट्रेंथ। पाई की वजह से स्ट्रेंथ उतनी
नहीं मिल पाती जितनी कि
एक सिग्मा बॉन्ड से मिलती है। ओवरऑल
स्ट्रेंथ अगर हम बात करें कि सिंगल बॉन्ड
से ज्यादा एनर्जी
डबल बॉन्ड में होगी। डबल बॉन्ड से भी
ज्यादा एनर्जी ट्रिपल बॉन्ड में होगी। बट
इट इज़ नॉट लाइक दैट कि अ एनर् बॉन्ड
एनर्जी इन अ ट्रिपल बॉन्ड वुड बी थ्राइस
ऑफ़ अ सिंगल बॉन्ड। नहीं ऐसा नहीं होगा।
क्योंकि ट्रिपल बॉन्ड के अंदर देयर इज़ अ
वन सिग्मा एंड देन देयर आर टू पाई
बॉन्ड्स। तो पाई बॉन्ड्स इतनी ज़्यादा
एनर्जी नहीं देंगे जितना कि सिग्मा
बॉन्ड्स एनर्जी देते हैं।
सो पाई बॉन्ड्स यानी जैसे ही डबल बॉन्ड या
ट्रिपल बॉन्ड आया उसकी वजह से पाई बॉन्ड्स
आते ही रेस्ट्रिक्टेड रोटेशन और देखने को
मिलेगा। यू विल फाइंड अ रेस्ट्रिक्टेड
रोटेशन।
सो पाई
ऑर्बिटल्स
के ओवरलैप होते ही रोटेशन भी रेस्टेड होना
शुरू होगा। हम आगे पढ़ेंगे।
यानी अगर सिंगल बॉन्ड है दो एटम्स के बीच
में यानी सिर्फ अगर सिग्मा बॉन्ड है तो
रोटेशन पॉसिबल है। जैसे ही एटम्स के बीच
में सिग्मा बॉन्ड के अलावा ये कोई सेकंड
बॉन्ड भी आ गया।
पाई ऑर्बिटल्स जैसे ही आए तो फिर आप
देखेंगे कि अब रोटेशन पॉसिबल नहीं होगा।
ये कांसेप्ट भी आगे चलकर हम डिटेल में
डिस्कस करेंगे।
सो स्टूडेंट्स थोड़ा पेशेंस रखें। हम आगे
पढ़ते रहेंगे। धीरे-धीरे बायोकेमिस्ट्री
हमारी डेवलप होगी। एक या दो दिन में हम
पूरी बायोकेमिस्ट्री को स्ट्रांग नहीं कर
सकते। चलो धीरे-धीरे हम आगे बात करते हैं।
तो अभी तक हमने बात की सिंगल बॉन्ड के
बारे में, डबल बॉन्ड के बारे में और
ट्रिपल कोवेलेंट बॉन्ड के बारे में। हमने
कहा सिंगल कोवेलेंट बॉन्ड में एक सिग्मा
बॉन्ड होता है जो काफी स्टेबल है। डबल
कोवेलेंट बॉन्ड में एक सिग्मा और एक पाई
बॉन्ड होता है। ट्रिपल कोवेलेंट बॉन्ड में
एक सिग्मा और दो पाई बॉन्ड होते हैं। पाई
बॉन्ड ओवरऑल स्ट्रेंथ को तो बढ़ाते हैं पर
जितनी सिग्मा बॉन्ड में स्ट्रेंथ होती है
उतनी पाई बॉन्ड्स में नहीं होगी। और जब
कभी पाई ऑर्बिटल्स की ओवरलैपिंग होती है,
वह एटम्स के बीच में जो या बॉन्ड्स के
अक्रॉस जो रोटेशन हो सकता है, उस रोटेशन
को और रेस्ट्रिक्ट करते हैं।
नाउ कमिंग टू अ पोलर एंड नॉन पोलर
कोवेलेंट बॉन्ड्स।
एटम्स
जैसे हाइड्रोजन एटम दूसरे हाइड्रोजन एटम
के साथ
जब कभी भी शेयरिंग करता है तो आप देखेंगे
कि जितनी इस हाइड्रोजन एटम की
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी है दूसरे एटम की
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी भी एग्जैक्टली सेम
होगी। इस कंडीशन में जो ये शेयर्ड पेयर ऑफ़
इलेक्ट्रॉन है वह एग्जैक्टली सेंटर में
रहेगा। और शेयर्ड पेयर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन अगर
सेंटर में रहता है तो कोई पोल का फॉर्मेशन
नहीं होगा। और पोल का फॉर्मेशन नहीं होगा।
तो ऐसे मॉलिक्यूल को हम क्या कहेंगे? सॉरी
ऐसे बॉन्ड को हम क्या कहेंगे? दिस वुड बी
रेफर्ड टू एज नॉन पोलर कोवलेंट बॉन्ड। और
ऐसे मॉलिक्यूल्स जिसमें नॉन पोलर कोवलेंट
बॉन्ड ज्यादा होते हैं। ऐसे मॉलिक्यूल्स
को हम नॉन पोलर मॉलिक्यूल कहेंगे।
सो इन अदर वर्ड्स हाइड्रोजन इज़ अ नॉन पोलर
मॉलिक्यूल। बिकॉज़ इट हैज़ अ नॉन पोलर
कोवेलेंट बॉन्ड। व्हाई नॉन पोलर? बिकॉज़ दो
एटम्स हैं उनकी इलेक्ट्रोनेगेटिविटी में
कोई डिफरेंस नहीं है। शेयर्ड पेयर ऑफ़
इलेक्ट्रॉन एग्जैक्टली सेंटर के अंदर है।
सिमिलरली
ऑक्सीजन और दूसरा ऑक्सीजन एटम है ऑक्सीजन
मॉलिक्यूल में।
वहां पर हमने कहा कि देयर आर टू शेयर्ड
पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स।
तो ऑक्सीजन
आपके हिसाब से इनके बीच में बीच में जो
बॉन्ड होना चाहिए वो पोलर है या नॉन पोलर
है। ऑक्सीजन मॉलिक्यूल पोलर मॉलिक्यूल है
या नॉन पोलर मॉलिक्यूल है?
ठीक है अंजली हम देखेंगे अगर बफरिंग
ज्यादा हुई तो हम आगे भी टाइम को और चेंज
करेंगे।
यस बिल्कुल ये नॉन पोलर है क्योंकि अगेन
देयर इज़ नो डिफरेंस इन
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी। ये ऑक्सीजन भी नो
डाउट इलेक्ट्रोनेगेटिव है। ये ऑक्सीजन भी
इलेक्ट्रोनेगेटिव है। बट दोनों की
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी एग्जैक्टली सेम है।
इसलिए शेयर्ड पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन
एग्जैक्टली सेंटर में होगा। और अगर ये
शेयर पेयर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन एग्जैक्टली सेंटर
में है तो उस कंडीशन में कोई पोल्स का
फॉर्मेशन नहीं होगा। इसलिए नॉन इन
मॉलिक्यूल्स को हाइड्रोजन गैस को भी नॉन
पोलर कहा जाएगा। ऑक्सीजन को भी नॉन पोलर
कहा जाएगा। नेहा नहीं यही तो बात है। ये
पोलर नहीं है। नॉन पोलर है। क्यों नॉन
पोलर है? क्योंकि पोल्स है ही नहीं। पोल्स
तो तब होंगे ना जब इलेक्ट्रॉन्स को कोई
अपनी तरफ खींचे। यहां पर दोनों तरफ
ऑक्सीजन एटम है। दोनों की
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी सेम है। इसलिए शेयर्ड
पेयर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन एग्जैक्टली सेंटर में
होंगे। कहते है ना एक रूल भी है। लाइक
डिॉल्व्स इन अ लाइक। पोलर मॉलिक्यूल पोलर
सॉल्वेंट में डिॉल्व होते हैं। नॉन पोलर
मॉलिक्यूल नॉन पोलर सॉल्वेंट में डिॉल्व
होते हैं। ऑक्सीजन वाटर में डिॉल्व आसानी
से नहीं हो पाता। वो वाटर से एस्केप करने
की कोशिश करता है क्योंकि ऑक्सीजन गैस एक
नॉन पोलर मॉलिक्यूल है। जबकि लगभग सभी
गैसेस हाइड्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड सब की
बात करेंगे तो नॉन पोलर है। वाटर में
आसानी से डिॉल्व नहीं होती क्योंकि वह नॉन
पोलर है। ओके? जबकि उसके कंट्रास्ट अगर हम
वाटर की बात करें जिसमें एक ऑक्सीजन एटम
है और दूसरा
ये दो हाइड्रोजन एटम के साथ कोवलेंट बॉन्ड
का फॉर्मेशन करता है। अब यहां पर अगर आप
ऑक्सीजन एटम और हाइड्रोजन एटम की
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी की बात करें। वी विल
फाइंड दैट देयर इज़ अ लार्ज डिफरेंस इन
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी ऑफ़ एन ऑक्सीजन एटम
एंड अ हाइड्रोजन एटम। जो शेयर्ड पेयर ऑफ
इलेक्ट्रॉन है वह हाइड्रोजन से
ऑक्सीजन की तरफ शिफ्ट हो जाएगा। इट विल
नॉट बी एग्जैक्टली इन सेंटर इट विल गेट
शिफ्टेड टुवर्ड द ऑक्सीजन। जो इलेक्ट्रॉन
कंप्लीटली अपनी तरफ ले ले, छीन ही ले तो
उसके ऊपर प्योर नेगेटिव चार्ज आएगा। पर
यहां पर प्योर नेगेटिव तो नहीं बट
इलेक्ट्रॉन इट इज़ बीइंग टेकन। इट हैज़ इट
हैज़ बीन शिफ्टेड टुवर्ड ऑक्सीजन एटम। वी
विल से दैट नाउ ऑक्सीजन विल बियर अ
पार्शियल नेगेटिव चार्ज।
और जिससे इलेक्ट्रॉन दूर हुए हैं उसके ऊपर
पार्शियल पॉजिटिव चार्ज।
अगर कंप्लीट इलेक्ट्रॉन लॉस ही हो जाता तो
प्योर पॉजिटिव चार्ज आता है। इलेक्ट्रॉन
दूसरा गेन कर लेता तो उस पे नेगेटिव चार्ज
आता। इतना इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का डिफरेंस
नहीं है कि ट्रांसफर पॉसिबल हो। बट इट हैज़
बीन शिफ्टेड टुवर्ड्स वन साइड। तो इस
बॉन्ड के अक्रॉस देखें एक तरफ पॉजिटिव एंड
है और एक तरफ नेगेटिव एंड है। तो इस तरीके
के बॉन्ड को हम क्या कहेंगे? सच बॉन्ड वुड
बी रेफर्ड टू एज़ पोलर कोवलेंट बॉन्ड। सच
बॉन्ड वुड बी रेफर्ड टू एज़ पोलर कोवलेंट
बॉन्ड। इवन इस सेकंड बॉन्ड को भी देखें।
दिस इज़ आल्सो पोलर। बिकॉज़ अगेन इस ऑक्सीजन
एटम और इस हाइड्रोजन एटम के बीच में
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का बहुत ज्यादा
डिफरेंस है। इलेक्ट्रॉन इट इज़ बीइंग
शिफ्टेड टुवर्ड द ऑक्सीजन। अगेन देयर इज़ अ
पोल। सो वाटर मॉलिक्यूल के अंदर दो
कोवलेंट बॉन्ड है और दोनों के दोनों
कोवलेंट बॉन्ड पर पोल्स बने हुए हैं। सो
सच कोवलेंट बॉन्ड्स आर रेफर्ड टू एज़ पोलर
कोवलेंट बॉन्ड। सच मॉलिक्यूल वुड बी
रेफर्ड टू एज़ पोलर मॉलिक्यूल। सो वाटर इज़
अ पोलर मॉलिक्यूल।
ओके?
सो फजंस रूल बेसिकली
इसके बारे में बात करता है कि जैसे-जैसे
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का कोई डिफरेंस नहीं
है उस कंडीशन के अंदर डेफिनेटली देयर वुड
बी द शेड फेयर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन वुड बी
एग्जैक्टली इन सेंटर। बट जैसे-जैसे
डिफरेंस बढ़ता जाएगा इलेक्ट्रॉन्स शिफ्ट
होते जाएंगे टुवर्ड इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम।
बहुत ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का
डिफरेंस है। तो फिर देन देयर वुड बी अ
ट्रांसफर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन। और ट्रांसफर ऑफ़
इलेक्ट्रॉन हुआ तो फिर कोवेंट बॉन्ड नहीं
होगा। फिर देयर वुड बी एन फॉर्मेशन ऑफ़
आयनिक बॉन्ड। सो अगेन दो एटम्स के बीच में
जो इलेक्ट्रॉन है वो एग्जैक्टली सेंटर में
हो सकता है। तो उसे नॉन पोलर कहा। शिफ्ट
हो गया थोड़ा सा। तो अब हमने कहा कि ये
पोलर कोवलेंट बॉन्ड और इलेक्ट्रॉन
कंप्लीटली दूसरे एटम के पास ही चला गया तो
फिर वो कोवलेंट बॉन्ड रहा ही नहीं। फिर वह
आयनिक बॉन्ड हो गया। बात समझ में आ रही है
ना?
चलो आगे डिस्कस करते हैं। तो ये तो बात
हुई पोलार और नॉन पोलर कोवेलेंट बॉन्ड के
बारे में। सो
मिथेन
के अंदर आप देखेंगे एक कार्बन है और चार
हाइड्रोजन एटम है। और यहां पर कार्बन और
हाइड्रोजन के बीच में इलेक्ट्रोनेगेटिविटी
का कोई बहुत ज्यादा डिफरेंस नहीं है। यहां
पर शेयर्ड पेयर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन एग्जैक्टली
सेंटर में होंगे। इसलिए मीथेन भी क्या
कहलाएगा? नॉन पोलर। ऑक्सीजन इज़ आल्सो नॉन
पोलर। हाइड्रोजन इज़ आल्सो नॉन पोलर। इवन
कार्बन डाइऑक्साइड इज़ आल्सो नॉन पोलर। सो
दीज़ ऑल आर द नॉन पोलर मॉलिक्यूल्स बिकॉज़
दे हैव अ नॉन पोलर कोवलेंट बॉन्ड्स।
बाला साहब CH3OH आप खुद बना कर देखें।
कार्बन और हाइड्रोजन में डिफरेंसेस कम है।
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का सिर्फ O और H के
अंदर इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का डिफरेंस है।
तो लिमिटेड बॉन्ड्स हैं वो पोलर है। बाकी
ज्यादातर बॉन्ड्स हैं नॉन पोलर हैं। ओवरऑल
नेचर हम मिथेनॉल को वाटर के कंपैरिजन में
नॉन पोलर कहेंगे।
चलो आगे बात करते हैं।
पोलरिटी को डिफाइन करने के लिए एक टर्म
इस्तेमाल की जाती है। दैट इज रेफर्ड टू एस
डपोल मोमेंट या μ से रिप्रेजेंट किया जाता
है। सो पोलार मॉलिक्यूल की पोलरिटी कितनी
है? पोलरिटी को रिप्रेजेंट करने के लिए वी
यूज़ अ टर्म रेफर टू एज डपोल मोमेंट। और
डपोल मोमेंट बहुत आसानी से डिफाइन किया जा
सकता है। डपोलर मोमेंट μ इज़ इज़
इक्विवेलेंट टू द प्रोडक्ट ऑफ इलेक्ट्रिक
चार्ज जो पार्शियल जो भी इस तरीके से
हमारा मॉलिक्यूल है। उसके ऊपर जो नेगेटिव
और पॉजिटिव चार्ज है उनका प्रोडक्ट कितना
है? दैट इज गिवन बाय E इंटू उनके बीच में
डिस्टेंस कितनी है? D ये दोनों मिलकर इसे
डपोल मोमेंट कहा जाता है। अभी इतना ही
बहुत है हमारे डपोल मोमेंट क्या काम की
चीज है? तो डपोल मोमेंट से हम पता कर सकते
हैं कि मॉलिक्यूल्स की पोलरिटी कितनी है।
जितनी ज्यादा डपोल मोमेंट उतनी ही पोलर
कोवलेंट बॉन्ड्स का कररेक्टर ज्यादा होगा।
सो पोलरिटी को मेजर करने के लिए एक टर्म
इस्तेमाल की जाती है और उस टर्म का नाम है
डायपोल मोमेंट। और आप नोट डाउन कर सकते
हैं। डपोल मोमेंट क्या है? इट इज द
प्रोडक्ट ऑफ इलेक्ट्रिक चार्ज इन ईएसuय
एंड अ डिस्टेंस बिटवीन दीज़ चार्ज। और वी
कैन से अ डिस्टेंस बिटवीन अ बॉन्ड
डिस्टेंस व्हिच व्हिच इज़ बिटवीन दीज़ टू
एटम्स।
दैट इज़ बिटवीन अ पॉज़िटिव एंड नेगेटिव
सेंटर्स।
देन कमिंग टू द पॉइंट व्हाट वी मीन बाय
बॉन्ड स्ट्रेंथ।
सो बॉन्ड स्ट्रेंथ कैन बी डिफाइंड एज द
अमाउंट ऑफ
एनर्जी
रिक्वायर्ड
टू ब्रेक
बॉन्ड। उसे बॉन्ड स्ट्रेंथ कहा जाएगा।
सो जैसे हाइड्रोजन और हाइड्रोजन के बीच
में कोई कोवेंट बॉन्ड है। अगर इसको हमें
डिसोसिएट करना है, बॉन्ड को ब्रेक करना है
तो डेफिनेटली वी हैव टू गिव एन सम एनर्जी
फ्रॉम आउटसाइड एंड द एनर्जी व्हिच इज़ गिवन
फ्रॉम आउटसाइड। द एनर्जी व्हिच इज़
एब्जॉर्ब
व्हिच इज़ यूटिलाइज़ टू ब्रेक द बॉन्ड। दैट
एनर्जी इज़ रेफर्ड टू ऐज़ दैट एनर्जी
रिफ्लेक्ट्स द बॉन्ड स्ट्रेंथ। अगर बहुत
बाहर से बहुत ज्यादा एनर्जी देनी पड़ रही
है बॉन्ड को तोड़ने के लिए तो हम कहेंगे
कि बॉन्ड स्ट्रेंथ ज्यादा है। तो जब बॉन्ड
फॉर्म हो रहा है उस दौरान सेम एनर्जी है
वापस रिलीज होगी।
सो बॉन्ड स्ट्रेंथ बेसिकली इट इज़ मेजर
जिससे ये पता चलता है कि दो एटम्स कितने
स्ट्रोंगली एक दूसरे के साथ हेल्ड हो रहे
हैं। इसको इस तरीके से भी डिफाइन कर सकते
हैं कि दिस इज़ द अमाउंट ऑफ़ एन एनर्जी
व्हिच इज़ एब्जॉर्ड बाय अ मॉलिक्यूल। सो
दैट इट बॉन्ड्स कैन ब्रेक।
गुड इवनिंग हर्षिता।
कुछ इंपॉर्टेंट एटम्स
की बॉन्ड एनर्जी यहां पर टेबल में
रिप्रेजेंट की गई है। सल्फर और सल्फर के
बीच में 214
कार्बन-कार्बन के बीच में 350, कार्बन और
ऑक्सीजन के बीच में 350, OH के बीच में
461। एक ट्रेंड आप आसानी से देख सकते हैं
कि सिंगल बॉन्ड के कंपैरिजन में डबल बॉन्ड
में ज्यादा एनर्जी है। डबल बॉन्ड से भी
ज्यादा एनर्जी ट्रिपल बॉन्ड में। ओके? सो
कार्बन कार्बन सिंगल बॉन्ड में एनर्जी 350
है। बॉन्ड एनर्जी को किलोजूल पर मोल में
यहां पर रिप्रेजेंट किया गया है। तो
कार्बन कार्बन डबल बॉन्ड के अंदर जो बॉन्ड
एनर्जी है वो इसका डबल होकर
700 नहीं है बल्कि उससे कम है। ये 611
kjूल/ मोल। क्योंकि हमने कहा कि पहला
बॉन्ड है वो सिग्मा बॉन्ड होता है। सेकंड
बॉन्ड है वह पाई होता है। और कार्बन और
कार्बन के बीच में ट्रिपल बॉन्ड होने पर
एनर्जी ट्रिपल नहीं हो गई है। इट इज़
अराउंड 86 kjूल पर मोल। सो बट वन थिंग इज़
मोर क्लियर कि सिंगल बॉन्ड से ज्यादा
एनर्जी डबल बॉन्ड में। डबल बॉन्ड से भी
ज्यादा एनर्जी ट्रिपल बॉन्ड में होती है।
और दूसरा इस टेबल में एक ट्रेंड और देख
सकते हैं कि स्मॉल एटम्स है जैसे
हाइड्रोजन और हाइड्रोजन।
उसके बीच में एनर्जी ज्यादा है एज कंपेयर
टू इफ यू लुक एट कार्बन एंड कार्बन
हाइड्रोजन और हाइड्रोजन के बीच में 436 kज
है और कार्बन और कार्बन के बीच में 350 सो
कल भी हम बात कर रहे थे जितने ज्यादा
स्ट्रांग एटम्स होंगे वहां पर
बॉन्डिंग
ज्यादा होगी क्योंकि सरफेस एरिया टू
वॉल्यूम रेशियो ज्यादा होता है।
उसके बाद एक और चीज भी आप देख सकते हैं कि
कार्बन कार्बन
के बीच में जो बॉन्ड एनर्जी है वह 350 है।
जबकि
ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के बीच में 461 है।
दैट इज इन जनरल हम कह सकते हैं पोलार
कोवेंट बॉन्ड में स्ट्रेंथ कंपेरेटिवली
ज्यादा होती है क्योंकि उसमें थोड़ा आयनिक
नेचर भी होता है एज़ कंपेयर टू अ नॉन पोलर
कोवलेंट बॉन्ड।
ओके? सो दोेंट फैक्टर हो गए। एक साइज़ जो
मेजर डिटरर्मिनेंट है। जितनी स्मॉल साइज़
कोवलेंट बॉन्ड की एनर्जी उतनी ज्यादा
होगी। अगर सिमिलर साइज के दो एटम्स हैं
जिनके बीच में बॉन्ड हो रहा है। ऑलमोस्ट
सिमिलर साइज के एटम्स हैं तो फिर पोलरिटी
वाला कांसेप्ट भी वहां पर आएगा।
देन तो ये बातें थी हमारी कोवलेंट बॉन्ड्स
के बारे में।
तो बॉन्ड एनर्जी की अगर हम बात करें
एवरेज थर्मल मोशन में जो एनर्जी होती है
दैट इज़ ऑल लेसर देन वन। कल हम डिस्कस करने
वाले हैं कई सारे नॉन कोवलेंट बॉन्ड्स और
नॉन कोवलेंट बॉन्ड्स की एनर्जी 10 किलो
कैलोरी पर मोल से कम होती है। एटीपी
हाइड्रोलाइसिस में जो बॉन्ड एनर्जी मिलती
है वो 7.2 से लेकर 12 किलो कैलोरी के बीच
में रिलीज होगी। कल हम इसके बारे में भी
डिस्कस करेंगे। कार्बन कार्बन के बीच में
जो बॉन्ड है एनर्जी आ रही है किलो कैलोरीज
में बात करें तो दैट विल कम आउट टू बी
अराउंड 80 और कंप्लीट ग्लूकोस का
ऑक्सीडेशन करने पर जो एनर्जी निकल कर आएगी
दैट वुड बी 686 किलो कैलोरी। सो जितने
ज्यादा बॉन्ड
उतनी ज्यादा एनर्जी होगी और जितने ज्यादा
स्ट्रंगर बॉन्ड उतनी ही ज्यादा एनर्जी
लिबरेट होगी।
बायोफे दो कांसेप्ट अलग-अलग है।
स्मॉलर साइज
और लार्जर साइज में से स्मॉलर साइज जो
एटम्स हैं उनके अंदर स्ट्रांग बॉन्डिंग
होती है। और पोलार और नॉन पोलर कोवेंट
बॉन्ड है। जहां पर अब साइज को हम वेरीरी
ना करें या साइज में वेरिएशन बहुत
नेग्लिजिबल हो। तो वहां पर देखेंगे जहां
पर थोड़ा पोलर कररेक्टर है उसकी थोड़ी बॉन्ड
स्ट्रेंथ ज्यादा होती है। आउट ऑफ़ दीज़ टू
फर्स्ट प्रेफरेंस वुड बी गिवन टू द
साइड्स।
ओके
करिश्मा
ओके
यस अंजलि एवरेज एनर्जी इज़ मोर इन अ सिंगल
बॉन्ड। यस दैट वी कैन से
चलो यह बात हुई अब तक की बॉन्डिंग के बारे
में।
जो अब तक हमने पढ़ा थोड़ा सा दिमाग लगाकर
बताओ कि इनमें से कौन सा बॉन्ड तोड़ना
मुश्किल होगा।
अप्लाई योर माइंड
जो अब तक पढ़ा
उसको इस्तेमाल करते हुए अपना दिमाग लगाओ।
व्हिच ऑफ द फॉलोइंग बॉन्ड वुड बी मोस्ट
डिफिकल्ट टू ब्रेक?
जो जी सिंगल बॉन्ड के कंप्रेशन डबल बॉन्ड
में ज्यादा एनर्जी होती है। हम ये नहीं कह
रहे हैं पर हम ये नहीं कह रहे हैं ऑलमोस्ट
डबल नहीं होती। डबल इसलिए नहीं होती
क्योंकि
वहां पर पहली जो ओवरलैपिंग होगी वह हेड टू
हेड होगी। सिग्मा बॉन्ड होगा। बाद में
साइड बाय साइड ओवरलैपिंग होगी। पाई
ऑर्बिटल्स इनवॉल्व होंगे जहां पर इतनी
एनर्जी नहीं आ पाएगी। चलो इसका आंसर बताओ।
देखो यहां पर एक क्राइटेरिया तो बिल्कुल
फिक्स है कि कार्बन कार्बन कार्बन कार्बन
सभी जगह पर है
और दूसरी जगह पर जो एटम्स हैं ये बड़ी
साइज का है तो ये तो आंसर होने से रहा।
ऑक्सीजन कार्बन और नाइट्रोजन के एटम की
साइज में कोई बहुत ज्यादा डिफरेंस नहीं
है। तो अब हम यहां पर ये कांसेप्ट लगाएंगे
कि जब डिफरेंस में ज्यादा डिफरेंस जब साइज
में ज्यादा डिफरेंस नहीं है तो हमें क्या
देखना पड़ेगा?
हमें देखना पड़ेगा कि दिस इज़ अ पोलर
कोवलेंट बॉन्ड एंड दिस इज़ अ नॉन पोलर। एंड
द डिफरेंस इन साइज ऑफ़ ऑक्सीजन एंड कार्बन
कोई बहुत ज्यादा नहीं है। तो लॉजिकली
आंसर फर्स्ट और वन और टू में से कुछ होना
चाहिए।
ये नहीं होगा। ये नहीं होगा।
फर्स्ट आंसर दे रहे हैं तो वो यह देते हुए
दे रहे हैं कि कार्बन और ऑक्सीजन के बीच
में कोवेंट बॉन्ड पोलर है। सेकंड जो आंसर
दे रहे हैं वो ये देखते हुए दे रहे हैं कि
दोनों तरफ कार्बन एटम है उनकी साइज स्मॉल
है।
और सही आंसर क्या है? अब क्या चूज़ करें?
इस कंडीशन में आप पता लेंगे तो पता लगेगा
C और O के बीच में भी बॉन्ड एनर्जी 350 है
और इसमें भी 350 किलJ पर मोल है। सो आंसर
डियर स्टूडेंट्स
होना चाहिए वन एंड टू बोथ। तो जिन्होंने
वन कहा वह भी सही है। जिन्होंने टू कहा वह
भी सही है। पर इन दोनों में से अगर आपको
एक ही आंसर चूज़ करना है, देन यू मस्ट गो
विद अ फर्स्ट चॉइस दैट कंपेरेटिवली पोलर
कोवलेंट बॉन्ड्स दे आर हैविंग अ मोर
एनर्जी एज़ कंपेयर टू अ नॉन पोलर कोवलेंट
बॉन्ड। सो अदरवाइज अगर आप पता करेंगे
एनर्जी के हिसाब से तो कार्बन ऑक्सीजन के
बीच में बॉन्ड एनर्जी अगर हम यहां पर
देखें टेबल के अंदर कार्बन और ऑक्सीजन के
बीच में बॉन्ड एनर्जी कितनी थी? 350 किJ
पर मोल। कार्बन और कार्बन के बीच में
बॉन्ड एनर्जी कितनी है? 350 किJ पर मोल।
दोनों के अंदर बॉन्ड एनर्जी बराबर है। तो
मेरे हिसाब से तो वन एंड टू दोनों ही आंसर
होने चाहिए क्योंकि यहां पर एनर्जी लगभग
सेम है। बट हमें इन दोनों में से एक ही
आंसर अगर चूज़ करना है तो स्लाइट लिटिल बिट
मोर एनर्जी यू कैन फाइंड आउट बिटवीन अ
कार्बन एंड ऑक्सीजन। जैसे देव मिश्रा कह
रहे हैं कि क्योंकि कार्बन और ऑक्सीजन है
वह पोलार है। चलो एक और दिमाग लगाओ। यह
क्वेश्चन दिसंबर में आया हुआ है। इस
क्वेश्चन
पर अपना दिमाग लगाओ।
ठीक है यूंका आपका आंसर सही है प्रजक्ता
बिल्कुल सही बात है बायोफे सीओ हैव हायर
ओके ठीक है
अब इस क्वेश्चन पर दिमाग लगाएं आप
सो चलो एक-एक कर हम स्टेटमेंट पढ़ते हैं।
पहला स्टेटमेंट
हाइड्रोजन ड्यूटेरियम ट्रिटियम डिफर इन द
नंबर ऑफ प्रोटॉन्स। नो दे आर द फॉर्म ऑफ
सेम एटम्स तो नंबर ऑफ प्रोटॉन्स वुड बी
सेम ए स्टेटमेंट नहीं हो सकता ए स्टेटमेंट
नहीं हो सकता बी स्टेटमेंट हाइड्रोजन
ड्यूटेरियम ट्रिटियम डिफर इन नंबर ऑफ
न्यूट्रॉन्स यस बिकॉज़ हाइड्रोजन
ड्यूटेरियम एंड ट्रिटियम दे आर आइसोटोप्स
सी स्टेटमेंट बोथ ड्यूटेरियम एंड ट्रिटियम
आर रेडियोएक्टिव नहीं कल हमने देखा था कि
रेडियोएक्टिव तब होंगे जब वहां वहां पर
न्यूक्लियों्स डिसक्लिब्रियम में होंगे।
सो ड्यूटेरियम इज़ नॉट रेडियोएक्टिव। सी
स्टेटमेंट भी बाहर चला गया और सी
स्टेटमेंट बाहर चला गया। तो पीछे एक ही
आंसर बचा। चलो उसको भी पढ़ते हैं। ट्रिटियम
इज़ रेडियोएक्टिव एंड डीके टू हीलियम। यस।
कल ही हमने बात किया था कि 3H1 उससे बीटा
डीके होता है। तो इट गेट करंट टू हीलियम
32 बीटा पार्टिकल्स का एमिशन होता है।
प्लस हमने कहा था एंटी न्यूट्रिनो रिलीज
होगा।
कार्बन 14 डीके टू नाइट्रोजन 14 यस ये कल
हमने बात की थी C14 डीके * अ नाइट्रोजन 14
+ 1 बीटा पार्टिकल इज़ एमिटेड ये भी हमने
कल बात की थी कार्बन4 डीके इंटू कार्बन 13
नो इट इज़ फॉल्स सो करेक्ट स्टेटमेंट इज़ बी
डी एंड ई वेरी गुड सोनाली स्मृति ठाकुर
रानी शेख वेरी गुड कावेरी वेरी गुड रेनू
वर्मा वेरी गुड ओम प्रकाश वेरी गुड रानी
शेख टू करेक्ट वेरी गुड सुषमा पटेल वेरी
गुड तमीमा शेख वेरी गुड भाग्यश्री वेरी
गुड पूजा वेरी गुड सोनाली दास वेरी गुड
वेरी गुड वेरी गुड वेरी गुड तो समझ में
आया मतलब इस जो अब तक पढ़ा है इससे भी
हमारे क्वेश्चंस आते हैं ऐसा नहीं है कि
इससे क्वेश्चंस नहीं आते करिश्मा शर्मा
वेरी गुड मोहम्मद आरिफ वेरी गुड
चलो एक और क्वेश्चन पर अपना दिमाग लगाओ।
ये अकॉर्डिंग टू कूलम्स लॉ टू पॉइंट
चार्जेस आर 5.5 एंगस्ट्रोम अ पार्ट इन
वैक्यूम वुड इंटरेक्ट गिव राइज़ टू एनर्जी
ऑफ़ 60 किलो कैलोरी पर मोल। द एनर्जी ऑफ
इंटरेक्शन ऑफ़ सेम सिस्टम इन अ वाटर वुड बी
गिवन दैट डइलेक्ट्रिक कांस्टेंट ऑफ वाटर
इज़ AT चलो इसको ट्राई करो।
हां विकास वेरी गुड आपने अच्छा दिया जवाब
आर एच फैक्टर वेरी गुड स्वप्नल वेरी गुड
गोलू यादव क्यों कंफ्यूज हो गए? किस
स्टेटमेंट में कंफ्यूज हुए? शुभश्री
चटर्जी वेरी गुड। अब इस क्वेश्चन को हमें
सॉल्व करना है। कूलम्स लॉ क्या कहता है?
कूलम्स लॉ के हिसाब से हमने कहा कि एनर्जी
ऑफ इंटरेक्शन डिपेंड अपॉन KQ1
Q2
R D
पहले कहा गया कि ये पॉइंट चार्जेस कहां पर
रखे गए थे?
वैक्यूम में। वैक्यूम का मतलब D की वैल्यू
कितनी है?
वन। सो एनर्जी कितनी है? इन सब से मिलाकर
एनर्जी कितनी आ रही है? 60 किलो कैलोरी।
व्हेन द वैल्यू ऑफ़ Q, K, Q1, Q2, K, Q1,
Q2 आर इनकी वैल्यू को हम कुछ प्लेस करें
और d की जगह पर हम वैल्यू को वन प्लेस
करें। ओके? सो एनर्जी इज़ इक्वल टू हम ये
भी कह सकते हैं 60। D की वैल्यू हम यहां
पर वन रखें।
सो, K, Q1, Q2 R की वजह से वैल्यू कितनी आ
रही है? 60 और D की वैल्यू है वन।
अब कहा है कि व्हाट वुड द एनर्जी व्हेन द
सेम इज प्लेस्ड इन अ वाटर?
तो अब
क्योंकि एनर्जी और डइलेक्टिक कांस्टेंट
में इनवर्स रिलेशनशिप होती है।
जितना डइलेक्टिक कांस्टेंट बढ़ेगा उतनी ही
एनर्जी कम होती जाएगी।
तो
डइलेक्टिक कांस्टेंट कितना हो गया है?
वन की जगह पर और एनर्जी और डइलेक्टिक
कांस्टेंट में रिलेशनशिप कैसी है? इनवर्स।
मतलब अब
60 की बजाय वन की बजाय अब वैल्यू कितनी
रखी जाएगी? 80 और 80 रखते ही हमारे पास
आंसर कितना हो जाएगा? 0.75
किलो कैलोरी पर मोल।
सो डिअ स्टूडेंट्स डइलेक्टिक कांस्टेंट और
एनर्जी में इनवर्स रिलेशनशिप होता है।
यस वेरी गुड वेरी गुड आशा अंजलि वेरी गुड
आकाश वेरी गुड पंकज वेरी गुड नेहा वेरी
गुड यश शर्मा वेरी गुड विक्रम वेरी गुड यू
लें वेरी गुड युवराज सिंह वेरी गुड
दुष्यंत यादव वेरी गुड वेरी गुड
समझ में आया ना ये बात
मैं क्या कह रहा हूं कि जैसे-जैसे
डइलेक्टिक कांस्टेंट की वैल्यू बढ़ेगी
वैसे-वैसे स्ट्रेंथ ऑफ इंटरेक्शन कम होगी।
हम पढ़ रहे थे ना आयनिक बॉन्ड्स के अंदर
कि अगर मीडियम का डइलेक्टिक्रिक कांस्टेंट
ज्यादा होगा तो फिर उस कंडीशन के अंदर जो
सॉल्ट है वह आसानी से वाटर में डिॉल्व हो
जाएगा।
वहां पर आयनिक बॉन्ड की स्ट्रेंथ नेगिजिबल
होगी। ट्रू आयनिक बॉन्ड्स वहां पर फॉर्म
नहीं हो पाएंगे। वेरी गुड रोही
मीर इरशाद वेरी गुड। चलो आपको समझ में आया
तो बिल्कुल सेम कांसेप्ट पर ये दिसंबर
2013 में आया था। ये क्वेश्चन दिसंबर 2019
में आया था। सेम कांसेप्ट पर क्वेश्चन।
चलो अब इसको पता करके बताओ।
दिसंबर 2019 में ये क्वेश्चन आया है।
इसको ट्राई करो।
D वैल्यू वैक्यूम के लिए या एयर के लिए वन
होती है।
यस आदिल बिल्कुल सही बात है।
आई एग्री विद यू आदिल।
चलो इसको ट्राई करो। सेम कासेप्ट पर ये
क्वेश्चन है। फटाफट फटाफट आंसर दो।
द क्वेश्चन इज़ द इंटरेक्शन एनर्जी बिटवीन
टू ऑोजिट चार्ज सेपरेट बाय थ्री एंगस्ट्रो
वैक्यूम इज़ 50 kjूल पर मोल। यानी वापस
एनर्जी की बात की गई है। KQ1 Q2 R² D और
वो अभी कब? वैक्यूम के अंदर। तो वैक्यूम
के अंदर एनर्जी कितनी आ रही है? 500 जब d
की वैल्यू को हम कितना रख रहे हैं? वन। सो
500 को वन से डिवाइड भी करेंगे तो दैट विल
कम आउट टू बी 500। यानी इन सब पैराटर्स की
वजह से एनर्जी कितनी आ रही है? 500। एंड
इफ 500 बाय वन इट कम्स आउट टू बी 500।
यानी द कंट्रीब्यूशन
ड्यू टू K Q1 Q2 R इज 500 एंड वंस इट
डिवाइड बाय वन द वैल्यू विल रिमेन 500 बट
व्हाट विल हैपन व्हेन दिस इज़ ट्रांसफर टू
अ वाटर
ध्यान बस यहां पर अभी आपको याद होना चाहिए
वाटर का डइलेक्टिक कांस्टेंट वैल्यू कितनी
है? 80 ये यहां पर क्वेश्चन में नहीं दे
रखी थी। ये क्योंकि ये बहुत ज्यादा कॉमन
चीज़ है। द डइलेक्टिक्रिक कांस्टेंट ऑफ़
वाटर इज़
80। तो अब हमें क्या करना है? एनर्जी को
वाटर की प्रेजेंस में निकालना है। तो वाटर
पहले तो हमने डइलेक्टिक्रिक कांस्टेंट की
वैल्यू वैक्यूम वाली रखी। अब हमें
डइलेक्टिक कास्टेंट 500 की नीचे
डइलेक्टिक्र कांस्टेंट वैल्यू किसकी रखनी
चाहिए? वाटर की। और डइलेक्टिक कांस्टेंट
की वैल्यू वाटर की कितनी है? 80
और इसको हमने डिवाइड किया तो हमारे पास
लगभग
6
किलोजूल पर मोल के आसपास एनर्जी आई। आंसर
वुड बी फोर। यस वेरी गुड वेरी गुड प्रीतम
वेरी गुड पिंटू देव मिश्रा वेरी गुड
दुष्यंत वेरी गुड परमेश्वर वेरी गुड
जेम्स बोंड वेरी गुड दुष्यंत गुड गुड
सोनाली वेरी गुड कृष्णा वेरी गुड विकास
वेरी गुड सबका आंसर फोर आ रहा है ना
कांसेप्ट समझ में आ गया ना कि वैक्यूम के
कंपैरिजन में वाटर
जब मीडियम हो तो आयनिक बॉन्ड की स्ट्रेंथ
80 टाइम रिड्यूस हो जाती है। जो भी
स्ट्रेंथ वैक्यूम में होगी या एयर में
होगी उसके कंपैरिजन में आयनिक बॉन्ड की
स्ट्रेंथ वाटर में 80 टाइम्स कम होगी।
यस अंजलि वेरी गुड
वेरी गुड शास्त्री कविता वेरी गुड प्रज्ञा
वेरी गुड बायो कैफे वेरी गुड शाबाश इसी
तरीके से पढ़ते रहें यस आदिल वेरी गुड
शाबाश
कृष्णा आ गया गुड गुड वेरी गुड
चलो अब यह क्वेश्चन आउट ऑफ द बॉक्स है अब
तक जो
हमने पढ़ा है
उससे थोड़ी बाहर की चीज है
जिसको हम आगे डिस्कस करेंगे लेकिन क्या
फिर भी आप अपना दिमाग लगाकर इस क्वेश्चन
को सॉल्व कर सकते हैं
कृष्णा कल का टाइम शाम को 4:00 बजे है। हम
कल से क्लासेस 4:00 बजे ही स्टार्ट करेंगे
क्योंकि इस दौरान अब मैं कुछ कहना नहीं
चाहूं लेकिन बफरिंग की समस्या कम होती है
क्योंकि जैसे मैं बफरिंग की बात करता हूं
कई लोग कहने लग जाते हैं बफरिंग आ रही है।
थैंक यू प्राजक्ता।
दिस इज़ आउट ऑफ बॉक्स।
यहां पर कहा गया है द फ्री एनर्जी ऑफ अ
डिजॉल्वड सॉल्यूट
विल इंक्रीज विद अ सॉल्यूट कंसंट्रेशन
डिक्रीज विद अ सॉल्यूट कंसंट्रेशन इज़
इंडिपेंडेंट ऑफ अ सॉल्यूट कंसंट्रेशन
डिपेंड्स ओनली ऑन अ टेंपरेचर
ठीक है युवलियंका वन शायद आकाश ने कहा दो
होना चाहिए रूही गुप्ता ने कहा वन पूजा ने
कहा दो प्रीतम ने का दो
फ्री एनर्जी इज द एनर्जी व्हिच इज़ अवेलेबल
टू डू वर्क। और किसी भी चीज की कंसंट्रेशन
बढ़ाते जाएं तो उस मॉलिक्यूल उस सॉल्यूट की
कैपेबिलिटी टू डू वर्क बढ़ेगी या घटेगी?
सिर्फ इतना सा दिमाग लगाओ।
व्हाट इज़ फ्री एनर्जी? फ्री एनर्जी इज़
कैपेबिलिटी टू डू वर्क। सो सॉल्यूट जो
हमने ऐड किए उस सॉल्यूट की कुछ ना कुछ
एबिलिटी होगी काम करने की। और जैसे-जैसे
सॉल्यूट की कंसंट्रेशन बढ़ाएंगे उसकी
एबिलिटी घटेगी या बढ़ेगी काम करने की।
इट इज़ टॉकिंग अबाउट द फ्री एनर्जी ऑफ़
डिॉल्व्ड सॉल्यूट। वाटर की बात नहीं कर
रहा है। सॉल्यूट की फ्री एनर्जी में क्या
चेंज आएगा? जैसे-जैसे सॉल्यूट की
कंसंट्रेशन को बढ़ाएंगे। अगर सॉल्यूट की
कंसंट्रेशन बढ़ाते हैं तो क्या सॉल्यूट के
काम करने की एबिलिटी बढ़ेगी या घटेगी?
सो व्हेनएवर यू इंक्रीस द कंसंट्रेशन ऑफ़
सॉल्यूट
सॉल्यूट की कंसंट्रेशन क्योंकि बढ़ती जा
रही है। इसलिए सॉल्यूट
मतलब किसी की भी कंसंट्रेशन अगर एयर की
अमाउंट को बढ़ा दिया तो एयर की एबिलिटी
बढ़ जाएगी। वाटर की कंसंट्रेशन को बढ़ा
दिया तो वाटर की एबिलिटी काम करने की बढ़
जाती है। ऐसे ही सॉल्यूट की कंसंट्रेशन को
रेज करोगे तो सॉल्यूट की कंसंट्रेशन रेज
करने पर उसकी आपकी खुद की कंसंट्रेशन बढ़ा
दी जाए तो आपकी एबिलिटी घटेगी कि बढ़ेगी
काम करने की।
आप समझ नहीं रहे एक छोटी सी बात कि अगर
किसी भी
आयन मॉलिक्यूल ऑब्जेक्ट की कंसंट्रेशन को
रेज करो तो उसकी कंसंट्रेशन बढ़ाने पर
उसकी एनर्जी कम कैसे होगी मुझे ये समझाओ
ना सब लोग कह रहे हैं डिक्रीज डिक्रीज
डिक्रीज व्हाई इट विल डिक्रीज
मैं सॉल्यूट प्लस वाटर यानी पूरे सॉल्यूशन
की बात नहीं कर रहा हूं
ज्यादातर लोग ये दिमाग लगा रहे हैं कि
क्योंकि सॉल्ट है वह वाटर में डिॉल्व हो
गया। प्रोसेस स्पॉनटेनियस हो गया। इसलिए
फ्री एनर्जी है वह घट गई। नहीं मैं ये
नहीं कह रहा हूं कि सॉल्यूशन की फ्री
एनर्जी क्या होगी? आई एम नॉट आस्किंग द
फ्री एनर्जी ऑफ़ सॉल्यूशन। आई एम आस्किंग द
फ्री एनर्जी ऑफ़ सॉल्यूट। द फ्री एनर्जी ऑफ़
डिॉल्वड सॉल्यूट।
सो अभी नहीं समझ में आया तो आगे समझ में आ
जाएगा। लेकिन अभी हम इसके बारे में यह कह
सकते हैं कि इट विल इंक्रीज विद द सॉल्यूट
कंसंट्रेशन। हम वापस सॉल्यूशन की बात नहीं
कर रहे हैं। हम यहां पर सिर्फ सॉल्यूट की
बात कर रहे हैं। ठीक है? तो ध्यान से
देखें कि किसके बारे में बात की गई है।
डिॉल्व सॉल्यूट के बारे में बात की गई है।
सो
अब चलो ये एक लास्ट क्वेश्चन आप ट्राई
करो।
दिस इज बेस्ड अपॉन अ वेरी सिंपल कांसेप्ट
लाइक डिॉल्व्स इन अ लाइक।
हां नेहा मैं समझ गया। ज्यादातर स्टूडेंट
एक्चुअली इसको गलत इसीलिए करते हैं
क्योंकि वो सोचते हैं कि सॉल्ट वाटर में
डिॉल्व हो गया इसलिए स्पॉनटेनियस है और
स्पॉनटेनियस है इसलिए फ्री एनर्जी नेगेटिव
होगी। पर यहां पर सॉल्यूशन की फ्री एनर्जी
की बात नहीं की गई थी। यहां पर सॉल्यूट के
फ्री एनर्जी की बात
की गई थी।
अब यहां पर चार डिफरेंट गैसेस है और यह
बताना है कि इन चार गैसेस में से उनका
सॉलीबिलिटी का ऑर्डर क्या होगा? लाइक
डिॉल्व्स इन लाइक आपको ये ध्यान में रखना
है कि इनमें से सबसे ज्यादा पोलर गैस कौन
सी है और नॉन पोलर गैस कौन सी?
जो पोलार गैस होगी वह सबसे ज्यादा
सॉलबलाइज होगी और जो सबसे ज्यादा नॉन
पोलार होगी वह सबसे कम सॉलबुलाइज होगी।
हां आदिल बिल्कुल यही मैं कह रहा था।
सिर्फ हम सॉल्यूट की बात करें
तो की बात करें। हम सॉल्यूशन के बारे में
दिमाग नहीं लगा। वेरी गुड। शाबाश। अब इसको
ट्राई करो।
सबसे पहले तो देखो
अमोनिया
या ऑक्सीजन
या सल्फर डाइऑक्साइड।
इनमें से ज्यादा सॉलबलाइज कौन होगा? तो
ऑब्वियसली ऑक्सीजन तो होने से रहा क्योंकि
ऑक्सीजन नॉन पोलर है। अभी हम देख चुके
हैं। ऑक्सीजन की सॉलीबिलिटी सबसे कम होगी।
इसलिए सेकंड ऑप्शन कट गया। SO2 भी नॉन
पोलर है इसलिए ऑप्शन भी कट गया। पीछे बचा।
अमोनिया सबसे ज्यादा सॉलीबल होगा। अमोनिया
सबसे ज्यादा सॉलीबल क्यों होगा? क्योंकि
अमोनिया के अंदर
बॉन्ड्स हैं वो नाइट्रोजन और हाइड्रोजन के
बीच में हैं। देयर इज़ अ डिफरेंस इन
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी। दैट्स व्हाई द
बॉन्ड्स आर पोलर कोवलेंट बॉन्ड।
सो अमोनिया सबसे ज्यादा पोलार इसलिए
सॉलीबलाइज सबसे ज्यादा ऑक्सीजन
सबसे ज्यादा नॉन पोलर क्योंकि वहां
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का बिल्कुल भी
डिफरेंस नहीं है। यहां पर कार्बन और
ऑक्सीजन के बीच में थोड़ा बहुत
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का डिफरेंस है।
यहां पर सल्फर और ऑक्सीजन के बीच में भी
थोड़ा बहुत इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का
डिफरेंस है। इसलिए आंसर हो गया ऑप्शन फोर।
यस बिल्कुल सही बिल्कुल सही
वेरी गुड वेरी गुड बायोफे ने भी सही किया
देव मिश्रा ने भी सही बात बता रहे हैं
अंजलि भी सही बात बताई
तो अब तक जो हमने पढ़ा वह समझ में आया या
नहीं आया आप लोगों को क्या कंटिन्यू करें
क्लास को अगर क्लास को हमें कंटिन्यू करना
है तो एक बार लाइक करके बताएं कि अगर लाइक
करेंगे तो उसे समझ में आएगा कि यस वी शुड
कंटिन्यू द क्लासेस मतलब चीजें समझ में आ
रही है कि नहीं आ रही है हां मैं समझता
हूं दो-ती दिन और लगेंगे हमारे बीच में
ट्यूनिंग बैठने
बट अगर समझ में आ रही है तो एक बार लाइक
कर बताएं।
चैट की बजाय एक बार लाइक करें जिससे पता
चलेगा कितने लोग वास्तव में इस लोग इस
चीजों को ये चीज समझ में आ पा रही है।
वेरी गुड सोनाली वेरी गुड सोनल वेरी गुड
नेहा वेरी गुड मीर इरशाद वेरी गुड जेम्स
बोंड
अंजलि
थैंक यू थैंक यू थैंक यू तो इफ यू वांट टू
कंटिन्यू जस्ट
क्लिक लाइक चैट की बजाय लाइक में क्योंकि
जितना आप लाइक करेंगे उतना वीडियो ज्यादा
आसानी से आपको मिलेगा।
सो डिअ स्टूडेंट्स आज की क्लास हम यहीं पर
खत्म करते हैं। लेकिन जैसा मैंने कल कहा
था कि आप अपने फ्रेंड्स को शेयर करें कि
आईएफएस केमिस्ट्री पर भी फ्री क्लासेस है
वह हो रही है। अभी वहां पर ऑर्गनोमेटलिक
केमिस्ट्री की क्लासेस चल रही है। नदीम सर
हैं। प्रोफेसर तौहिद नदीम वो क्लासेस ले
रहे हैं। फिजिक्स के अंदर भी क्लासेस चल
रही है। डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स पर विनोद
है। वह क्लासेस को कंटीन्यूअसली ले रहे
हैं।
सो आप बायोकेमिस्ट्री की क्लासेस के बारे
में भी ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स को
शेयर करें। चाहे वो नेट की प्रिपरेशन कर
रहे हैं नहीं कर रहे हैं। एमएससी भी कर
रहे हैं तो इंफॉर्मेशन जरूर शेयर करें।
आपके कॉलेज के ग्रुप के अंदर, आपके
यूनिवर्सिटी के WhatsApp ग्रुप के अंदर,
tlegram ग्रुप के अंदर और इसको लाइक करें।
बस आपका फीडबैक यह लाइक और डिसलाइक ही है
हमारे लिए
जो हमें बता पाएगा कि चीजें समझ में आ रही
है या नहीं आ रही।
तो अगेन स्टूडेंट्स आई एम सेइंग कि थोड़ा
सा पेशेंस रखो दो-ती दिन और हमारी एक बार
रेजोनेंस हो गई तो उसको बायोकेमिस्ट्री
आपको बहुत सही ढंग से समझ में आने लग
जाएगी। हमें वापस बहुत हाईफाई
बायोकेमिस्ट्री नहीं पढ़नी है। बहुत
बेसिक्स बायोकेमिस्ट्री पढ़नी है।
धीरे-धीरे हम अपना लेवल बढ़ाएंगे और आगे
बढ़ेंगे। और ये यकीन है कि बायोकेमिस्ट्री
हम जो यहां पर पढ़ेंगे वो करने के बाद आप
पार्ट सी में एटलीस्ट थ्री टू फोर
क्वेश्चन सॉल्व कर लेंगे।
तो थैंक यू एवरीवन। थैंक यू।
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