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L-2 Biochemistry - Bonds & Interactions CSIR NET JUNE 2026 | KC Sir I IFAS - CSIR NET, SET GATE

2:09:40EnglishBy IFAS LIFESCIENCE LIVE - CSIR, UGC, DBT, GATE, SETTranscribed Jul 17, 2026
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0:10

सो डिअ स्टूडेंट्स कल हम बात कर रहे थे

0:13

एटॉमिक मास के बारे में एटॉमिक यूनिट के

0:16

बारे में

0:18

है ना राम जांगिड़ कल हम बात कर रहे थे

0:20

एटॉमिक मास के बारे में एटॉमिक वेट के

0:22

बारे में जैसे हमने कहा कि कार्बन का

0:27

एटॉमिक मास

0:29

या एटॉमिक वेट 12 के आसपास है। नाइट्रोजन

0:33

का 14, ऑक्सीजन का 16।

0:39

व्हाट दिस मीन्स टू अस? इसका मतलब क्या

0:43

है? कार्बन का एटॉमिक मास 12 है। पर 12 के

0:48

आगे इसकी क्या यूनिट होगी?

0:55

12 किलोग्राम, 12 ग्राम, 12 मिलीलीटर, 12

0:59

कि.मी. कुछ तो यूनिट होनी चाहिए।

1:04

एटॉमिक मास इज़ 12 बट बायोफेट 12 के आगे

1:07

क्या? व्हाट शुड बी द यूनिट?

1:11

आज हम बात कर रहे हैं कि एटॉमिक मास को

1:14

मेजर करने के लिए जो यूनिट हम इस्तेमाल

1:17

करते हैं, उस यूनिट का नाम ही है एटॉमिक

1:21

मास यूनिट। जिसको हम शॉर्ट में amu कहते

1:25

हैं। 12 के आगे हम क्या लिखेंगे? एटॉमिक

1:28

मास यूनिट। जिसको आजकल हम सिर्फ 12 यूनिट

1:33

इस तरीके से भी लिखते हैं।

1:37

ओके? amu जिसको अब हम पूरा डिटेल में

1:41

लिखने की बजाय सिर्फ u से रिप्रेजेंट करते

1:44

हैं। यस नेहा बिल्कुल विकास बिल्कुल सही

1:46

बात कह रहे हैं। डिंपल गुड गुड गुड इवनिंग

1:49

विनीत।

1:53

एएमय या यूनिट को डाल्टन के होनर में दिस

1:58

इज आल्सो रेफर्ड टू एज डाल्टन। सो हम ये

2:02

भी कह सकते हैं कि कार्बन

2:04

12 डाल्टन।

2:07

कार्बन का एटॉमिक मास कितना है? 12

2:10

डाल्टन। इन अ होनर ऑफ़ अ डाल्टन।

2:15

दिस कुड आल्सो बी रेफर्ड टू एज ग्राम

2:19

पर

2:20

मोल।

2:22

कार्बन का एटॉमिक मास कितना है? 12 ग्राम

2:28

पर मोल।

2:30

कहने का मतलब ये है कि अगर कार्बन

2:35

हम 12 ग्राम लें। कार्बन एटम को 12 ग्राम

2:40

लें तो उसमें 1 मोल

2:44

कार्बन एटम आएगा। आगे नेक्स्ट क्लास में

2:48

हम मोल कांसेप्ट पढ़ेंगे तो यह भी क्लियर

2:51

होगा। ओके? सो

2:54

अब तक हम ये कहना चाहते हैं कि एटॉमिक मास

2:57

को मेजर करने के लिए जो यूनिट्स है वह amu

3:01

हो सकती है जिसको हम u लिख सकते हैं। इट

3:03

कुड आल्सो बी रेफर्ड टू एज डाल्टन और इट

3:06

कुड आल्सो बी रेफर्ड टू एज ग्राम पर मोल।

3:10

सो ये दीज़ आर द थ्री डिफरेंट वेज़ जिससे हम

3:13

एटॉमिक मास यूनिट को रिप्रेजेंट कर सकते

3:16

हैं।

3:20

ओके

3:23

नाउ

3:26

दिस amu

3:29

या ग्राम पर मोल या डाल्टन ये एक रिलेटिव

3:32

यूनिट है। ये एक एब्सोल्यूट यूनिट नहीं

3:35

है।

3:38

रिलेटिव यूनिट का मतलब क्या है? या हाउ वी

3:40

कैन डिफाइन व्हाट वी मीन बाय 1 amu 1 amu

3:46

या 1 यूनिट का मतलब क्या?

3:49

तो वी कैन से दैट

3:53

मोर प्रेसाइजली

3:55

1 यूनिट मींस इट इज़

3:59

112

4:01

मास ऑफ

4:04

कार्बन

4:06

एटम।

4:09

यानी अगर कार्बन एटम 12 डाल्टन का है या

4:15

12 amu का है तो 1 amu कितना हो गया? इट

4:19

वुड बी 1 / 12.

4:22

सो

4:24

इन अदर वर्ड्स 1 amu और 1 डाल्टन इज़ इक्वल

4:29

टू द मास ऑफ़ 1थ ऑफ़ कार्बन।

4:36

इसको हम लगभग यह भी कह सकते हैं कि इट इज

4:40

इक्विवेलेंट टू नॉट प्रिसाइजली एकदम बराबर

4:44

तो नहीं और लगभग हम ये भी कह सकते हैं इट

4:47

इज़ इक्विवेलेंट टू मास ऑफ़

4:51

वन

4:53

प्रोटॉन

4:55

और

4:58

न्यूट्रॉन।

5:00

एग्जैक्ट डेफिनेशन तो AU की ही होगी।

5:05

दैट

5:07

इट इज 112 मास ऑफ कार्बन। बट हम जानते हैं

5:11

कार्बन 12 में देयर आर सिक्स प्रोटॉन्स

5:13

एंड देयर आर सिक्स न्यूट्रॉन्स

5:16

इन इट्स न्यूक्लियस।

5:19

यानी 12 न्यूक्लियों्स की वजह से 12 amu

5:23

है। तो वन न्यूक्लियों की वजह से कितना

5:25

होगा? 1

5:28

या हम ये भी कह सकते हैं कि रफली इट इज़

5:32

इक्विवेलेंट टू मास ऑफ़

5:36

वन हाइड्रोजन एटम। और हम हाइड्रोजन की कौन

5:40

सी फॉर्म की बात कर रहे हैं? वन H1 के

5:45

बारे में।

5:46

सो ये कुछ तरीके हैं डिफाइन करने के लिए

5:50

कि 1 amu इज इक्वल टू मास 112 मास ऑफ़

5:56

कार्बन। रफली इट इज़ इक्विवेलेंट टू अ मास

5:59

ऑफ़ वन प्रोटॉन और मास ऑफ़ वन न्यूट्रॉन।

6:01

एंड नॉर्मल हाइड्रोजन दैट इज़ 1H1

6:04

प्रोटोनियम जिसके बारे में कल भी बात कर

6:06

रहे थे। इट हैज़ ओनली वन प्रोटॉन। सो उसे

6:09

भी 1 amu कहा जा सकता है। हां पूजा यही

6:14

मैं कह रहा हूं। इन अदर वर्ड्स, तो मास ऑफ

6:16

वन प्रोटॉन और मास या मास ऑफ वन न्यूट्रॉन

6:18

कितना होता है? एब्सोल्यूट पूछा जाए तो

6:21

एब्सोल्यूट मास इज़ 1.67

6:25

* 10 रे टू - 24 ग्राम या किलोग्राम में

6:30

पूछा जाए तो 1.67

6:33

* 10 टू पावर - 27 कि.ग्र. सो हम कह सकते

6:38

हैं रफली वन एटॉमिक मास यूनिट इज

6:42

इक्विवेलेंट टू

6:44

1.67 * 10 -2 ग्राम दैट इज रफली इट इज

6:48

इक्वलेंट टू मास ऑफ वन प्रोटॉन।

6:51

ये एक रिलेटिव यूनिट है। रिलेटिव यूनिट का

6:56

मतलब कि

6:58

अगर आपको कार्बन और हाइड्रोजन को कंपेयर

7:02

कराना है। टोटल फाइंड दैट कि एक तरफ अगर

7:05

आप कार्बन एटम लें तो दूसरी तरफ आपको कम

7:08

से कम 12 हाइड्रोजन एटम लेने पड़ेंगे। तब

7:13

चीजें बराबर होगी। दैट इज़ कार्बन एटम इज़

7:16

12 टाइम्स हैवियर एज कंपेयर टू दैट ऑफ

7:20

हाइड्रोजन एटम। यही एटॉमिक मास यूनिट्स जो

7:24

एटम के लिए इस्तेमाल की जाती है। दैट इज़

7:26

आल्सो यूज्ड फॉर इवन मॉलिक्यूल्स।

7:30

मॉलिक्यूलर वेट के लिए भी यही चीज

7:32

इस्तेमाल होती है। मतलब कि आपको कहा वाटर

7:37

का मॉलिक्यूलर वेट 18 है। तो इससे क्या

7:40

मतलब निकाला जाए?

7:44

इसका मतलब ये हुआ कि वाटर हाइड्रोजन एटम

7:48

के कंपैरिजन में 18 टाइम्स हैवियर है।

7:56

ओके?

7:58

अगर आपको लिखा है कि C6H12O6

8:02

का मॉलिक्यूलर वेट 180 है सपोज तो इसका

8:05

मतलब क्या? 180 यूनिट है तो इसका मतलब

8:09

क्या?

8:12

यस बायो बिल्कुल सही बात है। कार्बन एटम

8:14

इज़ 12 टाइम्स हैवियर एज़ कंपेयर टू अ

8:16

हाइड्रोजन एटम। यानी एक तरफ एक कार्बन एटम

8:19

लें और तो उसको बैलेंस करने के लिए दूसरी

8:22

तरफ हमें 12 हाइड्रोजन एटम लेने पड़ेंगे।

8:25

इस तरीके से हम हाइड्रोजन एटम के कंपैरिजन

8:28

में या कार्बन एटम के कंपैरिजन में किसी

8:30

को भी रिलेट कर सकते हैं। जैसे वाटर 18

8:34

डाल्टन इसका मतलब वाटर की साइज या जो मास

8:38

है वह 18 टाइम्स ग्रेटर है एज़ कंपेयर टू

8:40

हाइड्रोजन एटम। अगर हम ग्लूकोज यस प्रदीप

8:44

बिल्कुल सही कह रहे हैं। ग्लूकोज 180 उसका

8:48

डाल्टन मॉलिक्यूलर वेट है। इसका मींस इट

8:50

इज़ 180 टाइम्स हैवियर एज़ कंपेयर टू मास ऑफ़

8:54

वन हाइड्रोजन एटम। अब जरूरत पड़े तो उसको

8:58

कन्वर्ट कर सकते हैं एब्सोल्यूट मास में

9:00

भी कि 180 टाइम्स ऑफ़ हाइड्रोजन एटम है

9:03

मींस एक हाइड्रोजन एटम का मास कितना होता

9:05

है? तो दैट इज़ 1.67 * 10 टू -24 ग्राम।

9:08

इसको उससे मल्टीप्लाई करेंगे तो आपके पास

9:10

एब्सोल्यूट मास भी आ जाएगा। बट जनरली हम

9:13

रिलेटिव बात करते हैं। हां नेहा ये बात भी

9:16

सही है कि हम ये कह सकते हैं ग्लूकोस इज़

9:17

ऑलमोस्ट 10 टाइम्स हैवियर एज़ कंपेयर टू

9:21

वाटर। ओके? बात समझ में आई? हम बात कर रहे

9:25

हैं रिलेटिव रिलेटिव मास की। और रिलेटिव

9:28

मास के लिए जो यूनिट इस्तेमाल की जाती है

9:30

दैट इज़ amu दैट इज़ आल्सो रेफर्ड टू ऐज़ अह

9:33

ग्राम पर मोल एंड इन होनर ऑफ़ डाल्टन। एंड

9:36

दिस इज़ आल्सो रेफर्ड टू ऐज़ डाल्टन। चलो

9:39

समझ में आया तो एक

9:42

अप्लाई करते हैं इस चीज को हमारे

9:44

बायोलॉजिकल सिस्टम में।

9:48

यस आदिल इट इज़ अ कंपेरेटिव वे। इट इज़

9:50

ईज़ियर टू से कंपेयर द थिंग्स एज़ कंपेयर टू

9:53

हाइड्रोजन एटम। सो वी कैन मेक एन आईडिया

9:55

दैट हाउ दैट हाउ बिगर दैट एटम इज़ और हाउ

9:58

बिगर दैट मॉलिक्यूल इज़। वह मॉलिक्यूल या

10:00

एटम जिसके बारे में हम बात कर रहे हैं, वह

10:03

हाइड्रोजन के कंपैरिजन में कितना मास में

10:07

बड़ा होगा। उसका एक अंदाजा लगाया जा सकता

10:09

है यूजिंग एन एटॉमिक मास यूनि इट और अ

10:11

डाल्टन जिसे हम ग्राम पर मोल कहते हैं।

10:14

ओके? चलो अब इस क्वेश्चन पर अपना दिमाग

10:18

लगाते हैं। रेडी क्वेश्चन है कि ह्यूमन

10:22

जीनोम 3 गीगा बेस पेयर का है। सपोज व्हाट

10:26

वुड बी इट्स टोटल मॉलिक्यूलर वेट इन

10:28

ग्राम?

10:30

हां मोहित यही कह रहा हूं मैं। ए म्यू को

10:32

हम डाल्टन भी कह रहे हैं। बिल्कुल सही है।

10:36

आपको ह्यूमन जीनोम 3 गीगा बेस पेयर का है।

10:39

यानी ह्यूमन जीनोम यहां पर क्वेश्चन में

10:41

लिखा हुआ है 3 * 10 पावर 9 बेस पेयर का

10:45

है।

10:47

ओके? तो वह कितने ग्राम होगा? यानी टोटल

10:50

ह्यूमन जीनोम को अगर वेइंग बैलेंस पे रखें

10:53

तो वो कितने ग्राम निकल कर आएगा? तो कैसे

10:55

सॉल्व करेंगे?

10:58

तो उसके लिए सबसे पहले आपको यह पता होना

11:00

चाहिए कि एक बेस पेयर

11:03

हाइड्रोजन के कंपैरिजन में कितना बड़ा है।

11:08

रिलेटिव मास पता होना चाहिए। और रिलेटिव

11:13

मास यहां पर दे रखा है

11:16

वन बेस पेयर इज़ 660 डाल्टन। इससे क्या समझ

11:19

में आया? कि एक बेस पेयर मोर एक्यूरेटली

11:22

हमें बेस पेयर नहीं कहना चाहिए।

11:24

न्यूक्लियोटाइड पेयर कहना चाहिए। बट जैसे

11:26

ज्यादातर बुक्स में लिखा हुआ है उसी तरीके

11:28

से हम बात कर रहे हैं कि वन बेस पेयर इज़

11:31

इक्विवेलेंट टू 660 डाल्टन। इट मींस वन

11:35

बेस पेयर इज़ 660 टाइम्स हैवियर एज़ कंपेयर

11:39

टू दैट ऑफ़ हाइड्रोजन एटम। ठीक है? हां

11:43

उतरादास कुछ भी ले सकते हैं। यहां पर जो

11:45

वैल्यू है वो क्वेश्चन में जो दे रखी है

11:47

हम उस वैल्यू को दे ले रहे हैं। ठीक है?

11:50

वन बेस पेयर इज़ 660 डाल्टन। ओके? दैट इज़

11:54

गिवन इन द क्वेश्चन। तो वी आर नॉट अपाइंग

11:56

अ माइंड ओवर इट।

11:58

तो पहला स्टेप होगा कि बेस पेयर को डाल्टन

12:02

में कन्वर्ट करें। तो 3 * 10 पावर 9 बेस

12:05

पेयर की जगह पर आप क्या लिख सकते हैं? एक

12:07

बेस पेयर कितना होता है? इट वुड बी 60

12:13

डाल्टन। सो ये पहला

12:17

स्टेप हुआ जहां पर बेस पेयर की जगह पर

12:20

हमने डाल्टन रखा।

12:26

वेरी गुड वेरी गुड शिवकांत मिश्रा वेरी

12:29

गुड थोड़ा सा न्यूमेरिकली में कहीं गड़बड़

12:32

हो रही होगी शिवकांत

12:34

कंचन ने बहुत बढ़िया आंसर निकाला वेरी गुड

12:36

शाबाश शाबाश

12:39

ओके सुषमा ये डिबेट का बात नहीं है कि 660

12:43

डाल्टन लें या 650 डाल्टन लें क्वेश्चन

12:44

में जो लिखा हुआ है वो ले लेना चाहिए हम

12:46

हमारे न्यूमेरिकल के लिए वन बेस पेयर को

12:48

660 डाल्टन के बराबर लेंगे और जब कभी भी

12:50

हम अमीनो एसिड की बात करेंगे तो वी विल

12:52

टेक अराउंड 110 डाल्टन। ओके? हम जब भी आगे

12:56

बात करेंगे तो वी विल कंसीडर दैट वन बेस

12:58

पेयर इज़ इक्विवेलेंट टू 660 डाल्टन।

13:01

न्यूमेरिकल के लिए आप 650 भी लें। हमें

13:03

कोई प्रॉब्लम नहीं है। वन न्यूक्लियोटाइट

13:05

वी विल टेक इट एज 330 डाल्टन।

13:10

एंड वन अमीनो एसिड की जहां कहीं पर भी

13:12

हमें बायोलॉजिकल सिस्टम में रिक्वायरमेंट

13:13

पड़ेगी, तो उसका जो मॉलिक्यूलर वेट लिया

13:15

जाएगा दैट वुड बी 110 डाल्टन। सो वी आर

13:17

गोइंग टू कंसीडर दीज़ वैल्यूज़। ओके? खैर

13:21

अभी हम उसके बारे में बात नहीं कर रहे

13:23

हैं।

13:26

ओके अब बात हुई कि हमें आंसर डाल्टन में

13:29

नहीं देना था। हमें आंसर ग्राम में देना

13:31

था। तो आपको ये पता होना चाहिए कि वन

13:34

डाल्टन कितना ग्राम होता है। तो अभी हमने

13:36

डिस्कस किया है कि वन डाल्टन इज़

13:39

इक्विवेलेंट टू मास ऑफ़ वन हाइड्रोजन एटम।

13:41

और इट इज़ इक्विवेलेंट टू वन प्रोटॉन। एंड

13:43

मास ऑफ़ वन प्रोटॉन इज़ इक्विवेलेंट टू 1.67

13:47

* 10 टू -2 ग्राम। सो इस वैल्यू को हम

13:50

यहां प्लेस कर लेते हैं। हमारा आंसर अब आ

13:52

जाएगा नेक्स्ट स्टेप पर जो हमारा आंसर आ

13:54

रहा है दैट वुड बी 3 * 10 पावर 9 * 660 *

14:00

1.67

14:01

* 10 रे टू -2 ग्राम। ओके? बस अब आपका

14:07

आंसर ग्राम में है। बाकी तो अब वैल्यूज़ को

14:10

सॉल्व करना है।

14:14

हां मानी हम यही वैल्यूज़ को कंसीडर

14:16

करेंगे। है ना? 660 330 110 व्हेन अ बेस

14:21

पेयर ऑन अ न्यूक्लोटाइड और एन अमीनो एसिड

14:23

दे आर अ पार्ट ऑफ़ पॉलीमर वी आर गोइंग टू

14:25

कंसीडर दीज़ वैल्यूज़ ओके मंसली और ज्यादातर

14:28

न्यूमेरिकल क्वेश्चंस में वैल्यूज़ दे रखी

14:30

होती है कि हमें क्या एवरेज वैल्यू कंसीडर

14:32

करनी है। ओके? अब इसको जब सॉल्व करेंगे तो

14:36

रफली आपका आंसर 3 * 10 रेज़ टू - 12 ग्राम

14:42

आएगा। और 10 -12 को पिकको भी कहा जाता है।

14:45

तो वी कैन से दैट इट विल कम आउट टू बी 3

14:48

पिको ग्राम। एप्रोक्समेटली मोर एग्जैक्टली

14:51

3.2 के आसपास कुछ वैल्यू्यूज आएगी। ओके?

14:54

सो हम ये कह सकते हैं या 3.2 3.3 के आसपास

14:58

कुछ वैल्यू्यूज आ सकती है। आप एक बार

14:59

एग्जैक्ट इसको सॉल्व करके देख लें।

15:05

तो हम क्या कहना चाहते हैं कि ह्यूमन

15:07

जीनोम 3 गीगा बेस है

15:11

बेस पेयर्स में वही ह्यूमन जीनोम लगभग 3

15:14

पिकोग्राम है। उसको एब्सोल्यूट मास में भी

15:17

कैलकुलेट कर सकते हैं। इससे हमें ये पता

15:21

चलता है कि

15:24

टोटल एंटायर जीनोम

15:27

को अगर वेइंग बैलेंस पर रखें तो उसका मास

15:30

ग्राम में कितना आएगा? तो ग्राम में वो

15:31

माइक्रो ग्राम भी नहीं होगा। नैनोग्राम भी

15:33

नहीं होगा। इट विल बी इन अ पिको रेंज।

15:35

मींस द मास ऑफ़ एन एंटायर जीनोम इज़

15:38

नेगिलिजिबल। इसलिए हम रिलेटिव टर्म्स में

15:40

बात करते हैं। देखो बहुत जनों ने सही आंसर

15:43

निकाला है। वेरी गुड शीला

15:46

बायोकैफे वेरी गुड

15:50

आकाश बिल्कुल वेरी गुड। शाबाश शाबाश। सबने

15:52

बहुत अच्छा किया। बात समझ में आई ना? हम

15:54

ये कहना चाहते हैं कि एएमय या डाल्टन नाम

15:57

से घबराने की जरूरत नहीं है। वन एएमय या

16:00

वन डाल्टन वन एटॉमिक मास यूनिट प्रेसाइज़ली

16:03

तो 1थ ऑफ़ कार्बन है। बट हम हमारे

16:05

न्यूमेरिकल के लिए कह देंगे इट इज़

16:06

इक्विवेलेंट टू वन हाइड्रोजन एटम। और एक

16:08

नॉर्मल प्रोटोनियम हाइड्रोजन एटम में एक

16:10

सिर्फ प्रोटॉन होता है। सो वी विल से से

16:12

दैट कि इट इज़ वन डाल्टन इज़ इक्विवेलेंट टू

16:16

1.67 * 10 टू -24 ग्राम।

16:23

अब आदिल वो तो मुझे पता नहीं है। तो मेरे

16:25

दिमाग में क्वेश्चन आया था इसलिए हां पर

16:26

इस तरह क्वेश्चन गेट के अंदर या कई कई

16:28

सारे एग्जाम के अंदर आ सकता है। बात ये है

16:31

कि फर्स्ट स्टेप वाज़ बेस पेयर को हमें

16:33

कन्वर्ट करना था डाल्टन में। नेक्स्ट

16:35

स्टेप में आपको एक डाल्टन का मतलब पता

16:37

होना चाहिए। एक डाल्टन का मतलब है

16:39

एब्सोल्यूट मास में 1.67 * 10 - 24 ग्राम।

16:42

उसको मल्टीप्लाई करेंगे। यू विल गेट द

16:44

आंसर। वेरी गुड दीक्षा। वेरी गुड सुषमा

16:46

वेरी गुड कासिफ खान। वेरी गुड। हां, अगर

16:48

ये कैलकुलेशन आप कर सकते हो तो फिर आप

16:50

सारी कैलकुलेशन कर पाएंगे।

16:53

Okay? चलो आगे बात करते हैं। तो ये हमने

16:56

बात की एटम के बारे में, एटॉमिक मास के

16:59

बारे में।

17:01

Okay? अब

17:05

जो

17:07

इलेक्ट्रॉन्स हैं, अब तक हमने न्यूक्लियस

17:09

के बारे में बात की और न्यूक्लियस के अंदर

17:11

प्रोटॉन्स होते हैं। न्यूक्लियस के अंदर

17:13

न्यूट्रॉन्स होते हैं। पर हमें पता है कि

17:15

न्यूक्लियस के अलावा। सो लेट्स से दिस इज

17:18

अ न्यूक्लियस।

17:20

न्यूक्लियस के अलावा न्यूक्लियस के

17:23

सराउंडिंग के अंदर देयर आर रिवॉल्विंग

17:26

इलेक्ट्रॉन्स।

17:28

ओके?

17:32

दीज़ इलेक्ट्रॉन्स

17:35

दे आर प्रेजेंट इन सर्टेन शेल्स।

17:39

शेल्स दे कुड बी फर्दर डिवाइडेड इंटू अ

17:41

सबशेल्स।

17:43

और सबशेल्स में देयर आर

17:46

वेरियस ऑर्बिटल्स।

17:50

सो

17:52

शेल्स

17:54

जैसे कहा हमने k l m एंड दीज़ आर डिफरेंट

17:59

शेल्स।

18:02

शेल उन सभी

18:06

को सिंगल शेल में रखा जाता है। दैट इज़ ऑल

18:08

ऑर्बिटल्स

18:10

व्हिच हैज़ सेम

18:13

प्रिंसिपल

18:17

क्वांटम नंबर

18:20

दे आर केप्ट इन अ सेम शेल। यानी प्रिंसिपल

18:24

क्वांटम नंबर n से रिप्रेजेंट करते हैं।

18:27

जिनका भी ऐसे सारे ऑर्बिटल्स जिनका

18:31

प्रिंसिपल क्वांटम नंबर वन होगा उन सबको

18:33

सेम शेल में रखा जाएगा। जिनका प्रिंसिपल

18:35

क्वांटम नंबर टू होगा उन सबको शेम शेल में

18:39

रखा जाएगा। के के लिए वन, एल के लिए टू,

18:43

एम के लिए थ्री और एन के लिए फोर। सो दीज़

18:46

आर फोर प्रिंसिपल शेल्स के, एल, एम, एन।

18:50

एक शेल ये एक शेल के अंदर देयर मे बी

18:54

वेरियस सबशेल्स।

18:57

सो वी कैन से एक सबशेल में हम क्या

19:01

रखेंगे?

19:03

सो सबशेल्स आर ऑर्बिटल्स हैविंग अ सेम

19:09

एंगुलर

19:13

मोमेंटम

19:17

क्वांटम

19:20

नंबर यानी जैसे s p d या f कहते हैं।

19:29

ऐसे सारे ऑर्बिटल्स जो 2p से स्टार्ट होते

19:32

हैं दे विल बिलोंग टू अ सेम सबशेल। 2s

19:35

वाला एक अलग सबशेल है। तो इलेक्ट्रॉन्स

19:40

को ब्रॉडर रेंज में शेल्स में

19:44

डिस्ट्रीब्यूशन बताया जाता है। और हर शेल

19:45

को फर्दर डिवाइड किया जा सकता है सबशेल

19:49

में। और सबशेल्स में जो ऑर्बिटल्स हैं

19:52

देयर आर पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स दे आर

19:55

प्रेजेंट।

19:59

देयर आर फोर प्रिंसिपल शेल्स दैट इज K, L,

20:03

M.

20:07

हर शेल में मैक्सिमम इलेक्ट्रॉन्स कितने आ

20:09

सकते हैं? यानी कोई पूछे शेल नंबर भी यहां

20:12

पे लिख देते हैं। n इसका वन है, l का टू

20:14

है, m का थ्री है, फोर है। तो शेल K शेल

20:19

में मैक्सिमम इलेक्ट्रॉन कितने आ सकते

20:20

हैं?

20:27

व्हाट आर द मैक्सिमम नंबर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स

20:29

इन अ k शेल? व्हाट आर द मैक्सिमम नंबर ऑफ

20:31

इलेक्ट्रॉन्स इन l शेल

20:34

और m और n? क्या आप फार्मूला अप्लाई कर

20:38

सकते हैं? आर यू हैविंग सम आईडिया?

20:52

वेरी गुड। वेरी गुड सुषमा अमित वेरी गुड

20:56

मोहम्मद

20:58

गुफान वेरी गुड यूंका

21:01

गुड सो फार्मूला इज़ जैसे यूंका ने कहा है

21:04

इट इज़ 2 n²

21:08

वेयर n इज़ शेल नंबर यस कावेरी वेरी गुड

21:13

वेरी गुड तो फार्मूला इज़ 2n² तो k में

21:17

कितने आएंगे तो 2

21:20

1² दैट विल गिव Q 2 L में कितने आएंगे? तो

21:25

टू टू का स्क्वायर दैट विल बी एट एंड सो

21:30

ऑन। सो वी विल गेट 2 8 16 एंड सो ऑन। वेरी

21:35

गुड वेरी गुड। सो फार्मूला कि किस शेल में

21:39

मैक्सिमम कितने इलेक्ट्रॉन आएंगे? द

21:41

फार्मूला इज़ 2n²

21:44

गुड वेरी गुड स्टूडेंट्स। वेरी गुड वेरी

21:47

गुड।

21:50

वेरी गुड भाग्यश्री विजय वेरी गुड मोहित

21:56

के में टू बिल्कुल सही बात है गुड

21:58

स्टूडेंट्स वेरी गुड वेरी गुड

22:02

तो इसी को हम टेबल के फॉर्म में भी

22:05

रिप्रेजेंट कर सकते हैं

22:08

कि शेल नंबर 1 2 3 4

22:12

के शेल के अंदर मैक्सिमम देयर आर टू

22:16

इलेक्ट्रॉन्स l के अंदर देयर आर मैक्सिमम

22:18

एट इलेक्ट्रॉन्स m के अंदर 18 और n के

22:22

अंदर 32

22:27

यस बायो कैफे बिल्कुल सही कह रहे हो आप तो

22:30

के शेल के अंदर देयर आर ओनली

22:33

के में सिर्फ एक सबशेल है दैट इज़ एस

22:38

एल के अंदर देयर आर टू सबशेल्स दैट इज़ एस

22:41

एंड पी एम के अंदर देयर आर थ्री सबशेल्स

22:45

नेमली एस पी एंड डी और एन एन के अंदर देयर

22:49

आर फोर सबशेल्स s

22:52

और जैसा आप सबको पता है s सबशेल में

22:55

मैक्सिमम कितने इलेक्ट्रॉन्स फिल कर सकते

22:58

हैं आप टू वैरी गुड पी के अंदर सिक्स

23:04

डी के अंदर 10

23:09

एफ के अंदर 14

23:14

ओके

23:15

सो के शेल के अंदर एक ही सबशेल है दैट इज़

23:18

एस एल शेल के अंदर देयर आर टू सबशेल्स

23:21

नेमली एस एंड पी एम शेल के अंदर देयर आर

23:24

थ्री सबशेल्स नेमली एस पी डी एन शेल के

23:26

अंदर देयर आर फोर सबशेल्स सबशेल्स आर

23:30

ऑर्बिटल्स व्ह आर हैविंग सिमिलर एजुमिटल

23:32

नंबर ओके चलो आगे बात करते हैं यहां तक की

23:36

बात समझ में आई

23:39

गुड गुड मोहित गुड वेरी गुड

23:43

अब

23:44

आपने ये भी पढ़ रखा होगा कि जब

23:50

इलेक्ट्रॉन्स को शेल्स में फिल किया जाता

23:53

है तो सबसे पहले हाई एनर्जी स्टेट को फिल

23:59

किया जाएगा। हाई एनर्जी स्टेट में

24:00

इलेक्ट्रॉन्स आएंगे। वेकेंट शेल्स में

24:03

आएंगे। इनर शेल्स को पहले भरा जाएगा और

24:06

फिर आउटर शेल्स को भरा जाएगा। जैसे

24:09

हाइड्रोजन में एक ही इलेक्ट्रॉन है तो

24:10

फर्स्ट शेल के अंदर उस इलेक्ट्रॉन को भरा

24:12

जाएगा k को।

24:15

हीलियम के अंदर दो इलेक्ट्रॉन है तो पहले

24:17

सिर्फ K को ही फिल किया गया। कार्बन के

24:21

अंदर टोटल देयर आर सिक्स इलेक्ट्रॉन्स। तो

24:23

पहले K को फिल करने के बाद फिर एल शेल की

24:26

बारी आई।

24:28

इस तरीके से नियॉन की बात करें तो वहां तक

24:32

आते-आते के शेल भी फुल हो गया। एल शेल भी

24:34

फुल हो गया। जब K और एल दोनों फुल हो गए।

24:38

तो फिर थर्ड शेल यानी एम की बारी आती।

24:42

सो सबसे पहले के शेल को फिल किया जाता है।

24:46

फिर

24:47

एल फिर एम फिर एन ऑलदो देयर आर सम

24:51

एक्सेप्शनंस

24:55

लेकिन हम यहां पर उन एक्सेप्शनंस की बात

24:58

नहीं कर रहे हैं। जनरल रूल ये है कि इनर

25:01

टू आउटर। ऑलदो इस रूल में देयर आर सम

25:05

एक्सेप्शनंस बट वी आर नॉट टॉकिंग अबाउट

25:06

दैट एक्सेप्शनंस। सो वी विल से दैट फेला

25:08

वन एस फिल किया जाएगा। फर्स्ट शेल में भी

25:10

फिर 1s के बाद 2s फिर उसके बाद 2p फिर

25:14

उसके बाद

25:17

2f 2d एंड सो ऑन सॉरी 2s 2p फिर 3s 3p 3f

25:23

फिर इस तरीके से 4s 4p 4f 4d इस तरीके से

25:29

फिल किया जाएगा। ओके?

25:33

यस। दैट इज कॉल्ड एज जैसा ओमी ने बताया कि

25:36

दिस इज कॉल्ड एज़ अफबाऊ प्रिंसिपल। वेरी

25:39

गुड ओमी। पर वापस हमें इतने डिटेल

25:41

केमिस्ट्री में नहीं जाना। हमें इस बात से

25:43

भी कोई मतलब नहीं है। अबव प्रिंसिपल क्या

25:45

होता है। अभी सिर्फ इतनी सी बात ध्यान

25:47

रखने वाली बात है कि पहले इनर शेल्स फिल

25:50

किए जाते हैं और फिर हम आउटर शेल्स की तरफ

25:52

बढ़ते हैं।

25:55

आपने ये भी पढ़ा होगा लोअर क्लासेस में कि

25:59

अगर शेल्स

26:01

कंप्लीटली फिल्ड है शेल्स दे आर कंप्लीटली

26:04

फिल्ड।

26:06

तो दे आर

26:09

स्टेबल दे आर इनर्ट

26:13

जैसे कि

26:15

हीलियम जिसमें एक ही शेल है वो फिल है

26:18

नियन जिसमें K और L दोनों शेल है बट दोनों

26:22

के दोनों फिल है। आर्गन जिसमें तीन शेल है

26:26

K एल एम बट तीनों के तीनों फुल हैं। ऐसे

26:30

एटम्स ऑलरेडी दे आर स्टेबल।

26:35

दे आर रेफिड टू एज इनट। दे आर रेपिड टू एज

26:38

नॉन रिएक्टिव।

26:40

यानी जो पहले से स्टेबल है तो ऑब्वियसली

26:42

वह उन्हें कुछ ज्यादा करने की जरूरत नहीं

26:45

है।

26:49

दे विल नॉट ट्राई

26:51

एनीथिंग

26:54

टू अचीव स्टेबिलिटी बिकॉज़ ऑलरेडी दे आर

26:57

स्टेबल।

27:00

यस। इसलिए उन्हें इनर्ट गैसेस भी कह रहे

27:02

हैं।

27:06

लेकिन उन एटम्स का क्या जिनके आउटरमोस्ट

27:09

शेल के अंदर फोर इलेक्ट्रॉन्स हैं या फाइव

27:11

इलेक्ट्रॉन्स हैं या

27:14

सिक्स इलेक्ट्रॉन्स हैं। वन इलेक्ट्रॉन,

27:17

टू इलेक्ट्रॉन्स, फाइव इलेक्ट्रॉन्स इस

27:18

तरीके के इलेक्ट्रॉन्स हैं उनका क्या? जो

27:21

कंप्लीटली जिनके पास कंप्लीटली फिल्ड

27:23

शेल्स नहीं है उनका क्या होगा?

27:32

वेरी गुड बायोके। सो

27:36

हम क्या कह सकते हैं?

27:38

एटम्स व्हिच हैव अ अनकंप्लीट

27:43

फिल्ड

27:45

शेल्स दे आर

27:48

अनस्टेबल।

27:53

और जैसा मैं कल बात कर रहा था कि अगर

27:57

अनस्टेबल है तो दे विल डू समथिंग टू अचीव

28:00

स्टेबिलिटी। स्टेबिलिटी को अचीव करने के

28:02

लिए कुछ ना कुछ तो जरूर करेंगे।

28:06

सो इफ यू आर नॉट स्टेबल एनी हाउ यू विल

28:09

ट्राई टू अचीव स्टेबिलिटी।

28:12

अगर आप पहले से स्टेबल है तो कुछ ज्यादा

28:15

करने की जरूरत नहीं है। बट इफ आउटर शेल इज

28:19

नॉट कंप्लीट देन सच एटम्स

28:23

दे विल ट्राई टू अचीव स्टेबिलिटी।

28:27

एंड हाउ दे कैन डू द स्टेबिलिटी?

28:30

दे विल कीप ऑन ट्राइंग कि किसी एटम से

28:33

उन्हें इलेक्ट्रॉन मिल जाए।

28:37

यानी जिसे हम कहते हैं इलेक्ट्रॉन

28:39

ट्रांसफर। और अगर इलेक्ट्रॉन ट्रांसफर

28:41

नहीं है तो कम से कम शेयरिंग ही करें।

28:43

यानी दोनों एटम एक जैसे बोथ एटम्स दे आर

28:45

नॉट एबल टू गिव देयर इलेक्ट्रॉन्स देन

28:48

एटलीस्ट दे कैन गो फॉर अ पार्टनरशिप। दैट

28:51

इज़ शेयरिंग।

28:55

अश्विनी रेडिएशंस एमिट तब करेंगे जब हम

28:58

न्यूक्लियस की अनस्टेबिलिटी की बात कर रहे

28:59

हैं। आज हम न्यूक्लियस अनस्टेबिलिटी आज हम

29:01

न्यूक्लियस से बाहर इलेक्ट्रॉन की तरफ आ

29:03

गए हैं। और एटम की स्टेबिलिटी की बात कर

29:05

रहे हैं। ओके? यस। सो अनकंप्लीटली एटम्स

29:09

व्हिच आर नॉट हैविंग अ फिल्ड शेल्स विद एन

29:12

इलेक्ट्रॉन ऐसे एटम्स स्टेबल नहीं होते और

29:16

वो हमेशा इस कोशिश में लगे रहते हैं कि

29:18

किसी तरीके से उनका ऑक्टेट या डुप्लेट

29:22

कंप्लीट हो जाए।

29:24

इसके लिए इलेक्ट्रॉन को एक्सेप्ट करना

29:27

पड़े वह मंजूर डोनेट करना पड़े वह मंजूर।

29:30

यह दोनों ही पॉसिबिलिटी नहीं तो दे विल

29:34

शेयर द इलेक्ट्रॉन्स।

29:37

कुल मिलाकर बात ये है कि उन्हें अब किसी

29:39

दूसरे एटम के साथ इंटरेक्ट करना पड़ेगा।

29:47

इंटरेक्ट करने का मतलब है कि अब बारी आई

29:50

बॉन्डिंग की।

29:53

दैट इज़ इफ द टू एटम्स दे आर इंटरेक्टिंग

29:55

इन सम वे इट मींस दे आर बॉन्ड। दे आर

29:58

इनवॉल्वड इन अ बॉन्डिंग। ओके? सो सभी एटम

30:03

हीलियम, नियन, आर्गन इनके जितने

30:07

सौभाग्यशाली नहीं होते। उनकी किस्मत इतनी

30:11

अच्छी नहीं होती कि वह स्टेबल हो। दे हैव

30:14

एन अनस्टेबल कंडीशंस बिकॉज़ द आउटर शेल इज़

30:18

नॉट कंप्लीट। सो दे विल ट्राई टू अचीव

30:20

स्टेबिलिटी सम हाउ।

30:23

दैट कुड बी शेयरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉन्स और

30:26

दैट कुड बी अ ट्रांसफर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स।

30:28

अब उसके ऊपर ही हमारी बॉन्डिंग हो जाएगी।

30:30

अगर वो ट्रांसफर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स में

30:32

इन्वॉल्वड है तो उन्हें हम आयनिक बॉन्ड्स

30:33

कहेंगे और शेयरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉन्स के

30:35

अंदर इन्वॉल्वड है तो उसे हम कोवेंट बॉन्ड

30:37

कहेंगे। दीज़ आर द टू मेजर वेज़ व्हेयर द टू

30:40

एटम्स दे आर गोइंग टू इंटरेक्ट। सो एज़ टू

30:43

अचीव स्टेबिलिटी। सो दैट बोथ द एटम्स दे

30:45

बिकम स्टेबल व्हेन दे आर बॉन्डेड टुगेदर

30:47

एंड देन इंस्टेड ऑफ़ नेमिंग देम एज़ अ

30:48

सेपरेट एटम हम उन्हें मॉलिक्यूल कहना शुरू

30:51

करेंगे। चलो उसके बारे में बाद में बात

30:53

करते हैं। चलो आगे बहुत सिंपल सी बात

30:58

कि अब हम ये डिस्कस करने वाले हैं कि

31:01

एटम्स की इलेक्ट्रोनेगेटिविटी

31:04

से हम क्या समझते हैं?

31:08

व्हाट वी मीन बाय इलेक्ट्रोनेगेटिविटी ऑफ़

31:10

एटम?

31:12

बेसिकली एन इलेक्ट्रोनेगेटिविटी ऑफ़ एन एटम

31:16

इट रिप्रेजेंट्स

31:18

एन एफिनिटी

31:22

और वी कैन से टेंडेंसी

31:26

टू अट्रैक्ट

31:31

शेयर्ड

31:33

पेयर

31:34

ऑफ इलेक्ट्रॉन्स। इन अदर वर्ड्स

31:38

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी ऑफ एन एटम इज सिंपली

31:40

अ टेंडेंसी

31:45

और एफिनिटी

31:48

फॉर इलेक्ट्रॉन्स।

31:51

सिंपल वर्ड्स में हम ये भी कह सकते हैं कि

31:53

किसी भी एटम

32:02

किसी भी एटम का इलेक्ट्रॉन के लिए

32:08

इलेक्ट्रॉन के लिए कितना प्यार है? कितना

32:11

वह इलेक्ट्रॉन को अपनी तरफ अट्रैक्ट करता

32:14

है। उसके लिए एक टर्म है इलेक्ट्रॉन या

32:16

इलेक्ट्रॉन पेयर को या शेयर्ड इलेक्ट्रॉन

32:18

पेयर को अपनी तरफ अट्रैक्ट करता है। उसके

32:20

लिए

32:23

एक टर्म इस्तेमाल करते हैं

32:24

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी।

32:26

लो इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का मतलब एफिनिटी

32:29

इज़ लो। हाई इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का मतलब

32:32

उस एटम की इलेक्ट्रॉन को एक्सेप्ट करने की

32:36

टेंडेंसी बहुत ज्यादा है।

32:39

यानी आपको सिंपली कहा कि कोई एटम

32:41

इलेक्ट्रॉन हंग्री है।

32:44

इलेक्ट्रॉन हंगरी मींस उसकी एफ़िनिटी

32:48

इलेक्ट्रॉन के लिए ज्यादा है।

32:52

इज इट क्लियर? सो इलेक्ट्रोनेगेटिविटी

32:54

बेसिकली इट रिप्रेजेंट्स

32:58

द एफिनिटी ऑफ एन

33:01

एटम फॉर इलेक्ट्रॉन

33:04

और इलेक्ट्रोनेगेटिविटी आप देखेंगे

33:06

पीरियडिक टेबल के अंदर

33:08

फ्लोरीन से लेकर ट्रेंशियम तक

33:13

लाई करती है।

33:16

दैट इज इफ यू लुक इन अ

33:21

इफ यू लुक एट द पीरियडिक टेबल एज यू मूव

33:24

फ्रॉम

33:26

लेफ्ट टू राइट इलेक्ट्रोनेगेटिविटी

33:29

इंक्रीसेस

33:32

एंड एज़ यू मूव फ्रॉम टॉप मूव टू बॉटम

33:37

देन द इलेक्ट्रोनेगेटिविटी

33:40

डिक्रीजसेस। सो देयर इज़ एन इंक्रीज इन

33:42

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी फ्रॉम लेफ्ट टू राइट।

33:48

और टॉप टू डाउन जाते-जाते

33:52

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी है वह डिक्रीज होती

33:54

जाती है। हम इसमें हीलियम, नियॉन, आर्गन,

33:58

क्रोनशियम, ज़ीनोन इसकी बात नहीं कर रहे

34:00

हैं क्योंकि वह इनट है।

34:02

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का कांसेप्ट वहां पर

34:04

अप्लाई होगा व्हिच हैज़ सम व्हिच हैज़ अ

34:08

पार्शियली फिल्ड शेल्स। सो दे विल हैव सम

34:10

टेंडेंसी टू अट्रैक्ट अट्रैक्ट एन

34:12

इलेक्ट्रॉन। तो इसका मतलब सबसे ज्यादा

34:14

इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम यहां पर आ जाएगा।

34:16

दैट वुड बी फ्लोरीन

34:19

और फ्रेंशियम लगभग यहां पर जो एटम आ रहा

34:22

है वह सबसे कम इलेक्ट्रो नेगेटिव हो

34:25

जाएगा।

34:29

श्वेता शेयर्ड पेयर जब हम कोवेंट बॉन्ड्स

34:32

की टर्मिनोलॉजी में बात करेंगे तो शेड

34:33

पेयर वुड बी वेरीेंट। जब कोवेंट बॉन्ड्स

34:36

की टर्मिनोलॉजी में हम बात कर रहे हैं तब

34:38

हम शेड पेयर टर्म्स इस्तेमाल करेंगे। जब

34:41

हम आयनिक बॉन्ड्स की बात करेंगे तो वहां

34:43

पर वी कैन यूज़ अ टर्म इलेक्ट्रोपजिटिव और

34:45

अ इलेक्ट्रोनेगेटिव बिकॉज़ वहां पर

34:47

ट्रांसफर ऑफ इलेक्ट्रॉन होगा।

34:52

खैर चलो आगे बात करते हैं हम। पर

34:55

बायोलॉजिकल सिस्टम में फ्लोरीन जो काफी

34:58

इलेक्ट्रोनेगेटिव है। क्लोरीन, ब्रोमीन,

35:00

आयोडीन इस तरीके के एटम्स बायोलॉजिकल

35:02

सिस्टम में प्रेजेंट नहीं होते। कल हम बात

35:04

कर चुके हैं कि बायोलॉजिकल सिस्टम के अंदर

35:06

मोस्ट कॉमन जो एटम्स होते हैं दीज़ इंक्लूड

35:08

कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन,

35:10

फास्फोरस और सल्फर। अगर सिर्फ हम अपने आप

35:14

को बायोलॉजिकल सिस्टम तक ही फोकस करके

35:16

रखें तो बायोलॉजिकल सिस्टम में सबसे

35:19

ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम कौन है?

35:23

व्हिच इज़ मोस्ट इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम इन

35:26

बायोलॉजिकल सिस्टम?

35:29

कोई आईडिया? मोस्ट इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम

35:33

इन बायोलॉजिकल सिस्टम।

35:35

बायोलॉजिकल सिस्टम का मतलब वी आर टॉकिंग

35:37

अबाउट कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन,

35:39

नाइट्रोजन, फास्फोरस, सल्फर इनमें से

35:41

क्योंकि दीज़ आर द मोस्ट एबंड एटम।

35:46

इनमें से ही बताना है क्योंकि फ्लोरीन,

35:49

क्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन इस तरीके के एक

35:51

बायोलॉजिकल सिस्टम में देखने को नहीं

35:53

मिलती। बायो मॉलिक्यूल का हिस्सा नहीं है।

35:55

अगर वो है भी कहीं पर तो वह फ्री फॉर्म के

35:58

अंदर अवेलेबल है। यस।

36:01

वेरी गुड वेरी गुड। सो बायोलॉजिकल सिस्टम

36:04

में जो सबसे ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम

36:06

है इन सिक्स में से दैट इज द ऑक्सीजन।

36:11

इसलिए वी ऑफन से दैट ऑक्सीजन इज़

36:15

मोस्ट इलेक्ट्रोनेगेटिव।

36:18

ऑक्सीजन विल ऑलवेज हैव अ टेंडेंसी टू

36:22

अट्रैक्ट एन इलेक्ट्रॉन। हमेशा इलेक्ट्रॉन

36:24

लेने की कोशिश करेगा। बाकी एटम्स के

36:27

कंपैरिजन में भी इसकी इलेक्ट्रॉन को लेने

36:29

की टेंडेंसी सबसे ज्यादा होगी। वेरी गुड।

36:33

तो आंसर इज़ ऑक्सीजन।

36:37

ऑक्सीजन एटम

36:40

को की इलेक्ट्रॉन लेने की टेंडेंसी सबसे

36:43

ज्यादा है। अमंग द कार्बन, हाइड्रोजन,

36:46

ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, फास्फोरस, सल्फर।

36:48

ऑक्सीजन फॉललोड बाय इट इज़ नाइट्रोजन।

36:52

नाइट्रोजन के बाद नंबर आएगा सल्फर का।

36:55

सल्फर और कार्बन की इलेक्ट्रो नेगेटिविटी

36:58

लगभग बराबर होती है। उसके बाद नंबर आएगा

37:01

हाइड्रोजन एटम का और हाइड्रोजन एटम और

37:04

फास्फोरस की इलेक्ट्रोनेगेटिविटी वापस सब

37:06

लगभग बराबर होती है। सो टॉपर है इस लिस्ट

37:09

का

37:11

जो सिक्स एटम्स है उसमें सबसे ज्यादा

37:13

इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम इज़ ऑक्सीजन।

37:20

यस घनश्याम क्योंकि हमने हैलोजंस को बाहर

37:22

निकाल लिया जिसको सिर्फ एक इलेक्ट्रॉन की

37:24

कमी थी तो अब सबसे ज्यादा

37:25

इलेक्ट्रोनेगेटिव पीछे वो बच गए जिसके

37:27

आउटरमोस्ट शेल में सिर्फ दो इलेक्ट्रॉन की

37:29

कमी है और उसमें भी टॉप पर कौन आ गया दो

37:31

इलेक्ट्रॉन की कमी वाले इन सबको एक-एक

37:33

इलेक्ट्रॉन की कमी है इन सबको दो-दो

37:35

इलेक्ट्रॉन की कमी है और दो-दो इलेक्ट्रॉन

37:37

की कमी में सबसे टॉप ऑफ लिस्ट कौन आ गया

37:39

ऑक्सीजन क्योंकि जैसे-जैसे टॉप टू बॉटम की

37:42

तरफ जाएंगे वैसे-वैसे इलेक्ट्रोनेगेटिविटी

37:44

कम होती जाएगी

37:47

इज इट क्लियर? सो, बायोलॉजिकल सिस्टम में

37:51

जो एटम्स प्रेजेंट होते हैं, इन एटम्स में

37:54

सबसे ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिविटी

37:56

इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम है, वह है ऑक्सीजन।

37:59

सो ये हम बात कर रहे थे

38:01

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी के बारे में। सो

38:05

अगर जितनी ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिविटी है

38:08

एटम की, वह उतना ही ज्यादा एट इलेक्ट्रॉन

38:12

को अपनी तरफ अट्रैक्ट करने की कोशिश

38:14

करेगा। एंड जैसे कि पंकज बता रहा है इसका

38:17

मतलब इट विल हैव ऑलवेज अ चांस टू गेट

38:19

कन्वर्ट टू अ रिएक्टिव ऑसिन स्पीशीज। यही

38:22

तो ऑक्सीजन का पंगा है। ज्यादा ऑक्सीजन भी

38:24

बड़ी खतरनाक है। क्योंकि ऑक्सीजन हम इज़

38:28

हैविंग अ मोर टेंडेंसी टू एक्सेप्ट एन

38:30

इलेक्ट्रॉन। चाहे वो एटॉमिक फॉर्म है और

38:32

या चाहे वो मॉलिक्यूलर फॉर्म है। इट इज़

38:34

हैविंग अ टेंडेंसी टू एक्सेप्ट एन

38:36

इलेक्ट्रॉन एंड कैन गेट कर टू अ रिएक्टिव

38:37

ऑक्सीजन स्पीशीज़। है ना? कहते है ना

38:41

ऑक्सीडाइजिंग एनवायरमेंट।

38:43

ऑक्सीडाइजिंग एनवायरमेंट का मतलब सिंपल

38:46

वर्ड्स में हम यह भी कह सकते हैं ना

38:47

सराउंडिंग में ऑक्सीजन ही ऑक्सीजन है

38:50

और ऑक्सीजन

38:52

क्या करेगा? इलेक्ट्रॉन को अपनी तरफ

38:55

अट्रैक्ट करेगा। तो जो मॉलिक्यूल जिससे

38:58

इसने इलेक्ट्रॉन को लिया

39:01

जिसने इलेक्ट्रॉन को लूज़ किया उसका क्या

39:04

हुआ? ऑक्सीडेशन। सो ऑक्सीडाइजिंग

39:07

एनवायरमेंट में ऑक्सीडेशन होता है।

39:09

क्योंकि ऑक्सीडाइजिंग एनवायरमेंट में

39:10

सराउंडिंग में डेफिनेटली कोई इस तरीके के

39:12

एटम्स या मॉलिक्यूल्स होते हैं जो रेडी

39:15

हैं इलेक्ट्रॉन्स लेने के लिए और वो अगर

39:17

इलेक्ट्रॉन ले लेंगे तो जो भी मॉलिक्यूल

39:18

उस ऑक्सीडाइजिंग एनवायरमेंट में रखा गया

39:20

है उसका क्या होगा? ऑक्सीडेशन होगा। ओके?

39:24

तो इलेक्ट्रोनेगेटिविटी को समझना बहुत

39:28

जरूरी है बॉन्ड्स को पढ़ने के लिए। तो अब

39:30

हम बॉन्ड्स के बारे में बात करते हैं। सो

39:34

अभी हमने बात अब तक हमने ये पढ़ा कि ऐसे

39:38

कई सारे एटम्स हैं जिनके आउटरमोस्ट शेल के

39:43

अंदर इलेक्ट्रॉन्स डुप्लेट या ऑक्टेट

39:46

फील्ड नहीं है।

39:50

तो उनको स्टेबल होने के लिए

39:54

क्या करना पड़ेगा? आइदर दे हैव टू गो फॉर

39:57

अ ट्रांसफर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन और दे हैव टू गो

40:00

फॉर अ शेयरिंग ऑफ़ इलेक्ट्रॉन। इसका मतलब

40:04

एक एटम को दूसरे एटम के कांटेक्ट में आना

40:08

पड़ेगा और साथ में रहना पड़ेगा। अगर साथ में

40:12

रह रहे हैं तो वी विल से दैट दे आर

40:14

बॉन्डेड। सो व्हाट इज़ बॉन्ड? सो वी कैन से

40:17

बॉन्ड इज़ एनी फोर्स

40:20

दैट होल्ड द टू एटम्स टुगेदर। दो एटम्स को

40:24

होल्ड करने वाले फोर्स के लिए वी यूज़ अ

40:27

टर्म बॉन्ड।

40:33

ऑक्सीजन हमें क्यों किल करेगा? वो

40:35

मॉलिक्यूल है। अभी हम ऑक्सीजन एटम के बारे

40:37

में बात कर रहे हैं। ओके? ऑक्सीजन कुड

40:41

डैमेज अस इफ देयर इज़ फॉर्मेशन ऑफ़ रिएक्टिव

40:44

ऑक्सीजन स्पीशीज़। ओके? तो हम कोशिश करते

40:47

हैं कि रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज़ ना बने।

40:51

कई सारी एंटीऑक्सीडेंट मशीनरी भी हमारे

40:53

पास मौजूद होती है लोहित जो हमें मरने से

40:56

बचाती है। हां अगर वह ऑक्सीडेटिव डैमेज से

41:00

बचने वाली मशीनरी नहीं हो तो क्या स्थिति

41:02

होगी? वह आपको एनिमल फिजियोलॉजी के सर

41:04

पढ़ाएंगे या प्लांट फिजियोलॉजी के सर भी

41:07

पढ़ाएंगे। डेफिनेटली फिर ऑक्सीजन वाले

41:09

एनवायरमेंट में कोई भी बायोलॉजिकल सिस्टम

41:12

नॉर्मली एग्जिस्ट नहीं कर पाएगा क्योंकि

41:14

ऑक्सीजन विल डैमेज।

41:19

ओके? बट अच्छी बात ये है कि ऑक्सीजन होने

41:24

के बावजूद भी और ऑक्सीजन होने के का मतलब

41:28

है रिएक्टिव ऑक्सी स्पीशीज बनने के बावजूद

41:30

भी वी आर हैविंग एन वेरी गुड

41:32

एंटीऑक्सीडेंट मशीनरी।

41:35

ओके? बनते हैं पर उनका वापस कुछ उपचार भी

41:37

है। सो बॉन्ड्स दो तरीके से बॉन्ड्स बनने

41:42

में बेसिकली होता क्या है कि देयर इज़ अ

41:44

रिीस्ट्रीब्यूशन ऑफ़ इलेक्ट्रॉन्स। और

41:46

रिस्ट्रीब्यूशन ऑफ इलेक्ट्रॉन कुछ इस

41:48

तरीके से होता है कि अब उनका ऑक्टेट या

41:51

डुप्लेट कंप्लीट हो जाए। दो तरीके हैं।

41:54

आइदर देयर कुड बी अ शेयरिंग लेट्स से कि

41:57

कोई एटम है जिसके आउटरमोस्ट शेल के अंदर

41:58

एक ही इलेक्ट्रॉन है। लेट्स से हाइड्रोजन

42:00

एटम ये दूसरा हाइड्रोजन एटम है जिसकी भी

42:01

आउटरमोस्ट शेल के अंदर एक इलेक्ट्रॉन है।

42:04

अगर ये ट्रांसफर करते हैं तो फिर इसमें

42:05

कंप्लीट इलेक्ट्रॉन का लॉस हो जाएगा। इस

42:08

केस में क्या-क्या करते हैं? ये दोनों

42:09

अपने ऑर्बिटल्स को ओवरलैप कर देते हैं।

42:12

ओवरलैप करने का मतलब है कि नाउ इस एटम इस

42:14

हाइड्रोजन एटम और इस हाइड्रोजन एटम दोनों

42:17

के बीच में कॉमन ये इलेक्ट्रॉन पेयर आ

42:21

गया। कुछ जगहों पर ट्रांसफर

42:27

हो सकता है। जिस एटम से इलेक्ट्रॉन का लॉस

42:31

होगा उसके ऊपर पॉजिटिव चार्ज आ जाएगा। जो

42:34

इलेक्ट्रॉन को रिसीव करेगा उसके ऊपर

42:37

नेगेटिव चार्ज आ जाएगा। और ऐसा होने पर अब

42:41

उनके बीच में देयर वुड बी सम काइंड ऑफ़

42:44

इंटरेक्शन एंड बॉन्ड्स वुड बी रेफर्ड टू

42:45

ऐज़ आयनिक बॉन्ड। तो दो चीजें पॉसिबल है या

42:49

तो ट्रांसफर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन जैसा कि हम अभी

42:52

डिस्कस करने वाले हैं आयनिक बॉन्ड्स में

42:54

या देयर कुड बी अ शेयरिंग ऑफ़ इलेक्ट्रॉन्स

42:57

जैसा हम देखेंगे कोवेंट बॉन्ड में। ओके?

43:00

सो अगर एटम्स स्टेबल नहीं है तो दे विल कम

43:03

इन कॉन्ट्रैक्ट विथ एन अनदर एटम। देयर वुड

43:05

बी रिस्ट्रीब्यूशन और रिअरेंजमेंट ऑफ

43:08

इलेक्ट्रॉन एंड पर्पस ऑफ़ दिस

43:09

रिस्ट्रीब्यूशन ऑफ़ इलेक्ट्रॉन इज़ वेदर इट

43:12

इज़ अ ट्रांसफर और वेदर इट इज़ शेयरिंग इज़

43:14

टू मेक दीज़ एटम्स मोर स्टेबल। एंड अंडर सच

43:18

सिनेरियो दोनों एटम्स एक दूसरे से जुड़े

43:20

हुए रहेंगे। और एटम्स एक दूसरे के साथ

43:22

जुड़े हुए हैं। उस फोर्स को जो इन एटम्स को

43:24

आपस में कनेक्ट करके रख रहा है उसको हम

43:27

बॉन्ड कहते हैं।

43:32

तो

43:35

इसका मतलब

43:39

अब हम एटम से थोड़ा आगे बढ़ जाते हैं। वी

43:42

मूव टू अ मॉलिक्यूल।

43:48

व्हाट इज़ अ मॉलिक्यूल? सो अभी हमने कहा कि

43:51

एटम्स

43:53

अगर अनस्टेबल है, अनस्टेबल का मतलब उनके

43:55

शेल्स कंप्लीट फील्ड नहीं है तो उनको एक

43:57

दूसरे के कांटेक्ट में आना पड़ेगा। और अगर

44:00

वो कांटेक्ट में आते हैं और एक दूसरे के

44:02

साथ रहते हैं तो अब उन्हें हम मॉलिक्यूल

44:05

कहेंगे।

44:07

सो व्हाट इज अ मॉलिक्यूल? सो वी विल से

44:09

दैट मॉलिक्यूल इज़ न्यूट्रल

44:12

ग्रुप ऑफ

44:14

एटम्स

44:18

दैट कुड बी टू और मोर

44:22

हेल्ड

44:25

टुगेदर

44:28

बाय

44:29

केमिकल

44:32

बॉन्ड्स।

44:34

सो

44:37

इस तरीके से एक एटम दूसरे एटम के साथ

44:41

इंटरेक्ट कर रहा हो। ये कोई एक एटम ये

44:45

दूसरे एटम के साथ इंटरेक्ट कर रहा हो। ये

44:51

एक ऑक्सीजन एटम दूसरे ऑक्सीजन एटम के साथ

44:54

इंटैक्ट कर रहा हो। दिस वुड बी रेफर्ड टू

44:56

एज मॉलिक्यूल्स। सो व्हाट आर मॉलिक्यूल्स?

45:00

मॉलिक्यूल्स आर

45:02

ग्रुप ऑफ एटम्स

45:05

देयर मे बी टू 3 4 10 और मोर देन दैट

45:08

एटम्स हेल्प टुगेदर बाय सम काइंड ऑफ़

45:11

केमिकल बॉन्ड्स एंड दीज़ केमिकल बॉन्ड्स

45:13

कुड बी आयनिक और दीज़ कुड बी कोवलेंट।

45:18

यस हीना बिल्कुल सही कह रहे हो कि एटम्स

45:22

अगर बॉन्डेड हो साथ में रहते हो तो उन्हें

45:25

एटम कहने की बजाय मॉलिक्यूल कहा जाएगा।

45:29

फॉर एग्जांपल आपसे पूछा जो ऑक्सीजन आप

45:32

इन्हेल करते हो ऑक्सीजन गैस वह एटम है या

45:35

मॉलिक्यूल?

45:38

ऑक्सीजन गैस वेदर इट इज़ एन एटम और अ

45:41

मॉलिक्यूल और अ हाइड्रोजन गैस इज़ अ

45:46

एटम और मॉलिक्यूल

46:01

यस जकीर ने बिल्कुल सही कहा। टू और मोर

46:04

एटम्स ऑफ़ सेम और डिफरेंट एलिमेंट्स हेल्ड

46:08

बाय अ बॉन्ड वुड बी रेफर्ड टू एज

46:10

मॉलिक्यूल। दैट्स गुड।

46:16

आजाज अली बिल्कुल आपका नाम भी लेंगे क्यों

46:18

नहीं लेंगे जरूर लेंगे

46:27

नहीं अंजलि मारू ऐसा कुछ नहीं होगा और

46:29

एनिमल फिजियोलॉजी अभी बायोकेमिस्ट्री में

46:31

ना रखें

46:33

वेरी गुड वेरी गुड एवरी वेरी गुड सो

46:36

व्हाटएवर द ऑक्सीजन व्हिच वी आर इन्हेलिंग

46:38

इज़ नॉट अ एटम बेसिकली इट इज़ अ मॉलिक्यूल

46:41

वेरी गुड वेरी गुड वेरी गुड पिंटू कुमार

46:46

कुणाल वेरी गुड आयशा वेरी गुड ठीक है तो

46:49

ये तो बात हुई मॉलिक्यूल्स की कहने का

46:52

मतलब इसका मतलब चाहे आप ग्लूकोस की बात

46:54

करें वह एक मॉलिक्यूल है सुक्रोज़ के बारे

46:56

में बात करें वह एक मॉलिक्यूल है एलेनिन

46:59

के बारे में बात करें वह एक मॉलिक्यूल है

47:01

वाटर के बारे में बात करें वह मॉलिक्यूल

47:03

है जिसमें देयर आर वन और मोर

47:07

बॉन्ड्स व्हिच आर इनवॉल्वड और वी कैन से

47:10

देयर आर टू और मोर एटम व्हिच मे बी ऑफ़ सेम

47:13

काइंड और व्हिच मे बी ऑफ़ डिफरेंट काइंड दे

47:15

आर बॉन्डेड टुगेदर तब उसे हम मॉलिक्यूल

47:17

कहेंगे।

47:20

वेरी गुड वेरी गुड स्टूडेंट्स वेरी गुड।

47:24

ठीक है? अब हम बात कर रहे थे फिर मैक

47:26

मॉलिक्यूल किसे कहा जाएगा? तो मॉलिक्यूल्स

47:30

जिसमें एटम आपस में बॉन्ड कर रहे हैं।

47:34

मॉलिक्यूल्स

47:36

आपस में ही बॉन्ड फॉर्म करने लगे। तो अब

47:41

उन्हें हम मैक मॉलिक्यूल्स कहेंगे।

47:45

कहने का मतलब जो इंडिविजुअल मॉलिक्यूल है

47:48

उसे हम मोनोमर कह सकते हैं। और कई सारे

47:51

मोनोमर्स आपस में बॉन्डेड हो तो जो

47:54

स्ट्रक्चर बनेगा जिसे हम

47:56

पॉलीमर कहें। तो पॉलीमर्स दे ऑल आर

47:59

एग्जांपल ऑफ मैक मॉलिक्यूल्स।

48:03

मतलब अगर अमीनो एसिड आपका मॉलिक्यूल है तो

48:06

प्रोटीन क्या हो गया?

48:09

प्रोटीन एक बड़ी साइज का मॉलिक्यूल है।

48:12

उसे मैक मॉलिक्यूल कहा जा सकता है।

48:16

ठीक है रामकुमार समझ में आ रही है बात?

48:19

नेहा

48:23

नीतू बिल्कुल ठीक है।

48:28

ग्लूकोस अगर

48:31

मॉलिक्यूल है तो स्टार्च क्या हो गया?

48:35

मैक मॉलिक्यूल।

48:39

यस करिश्मा बिल्कुल सही बात है। इसी तरीके

48:42

से इफ अ न्यूक्लियोटाइट इज अ

48:48

मॉलिक्यूल देन न्यूक्लिक एसिड्स चाहे वो

48:51

डीएनए हो चाहे आरएनए हो दे वुड बी रेफर्ड

48:55

टू एज मैक मॉलिक्यूल्स। सो एटम्स के बीच

48:59

में भी बॉन्ड होते हैं और एटम्स के बीच

49:01

में बॉन्ड हो तो मॉलिक्यूल बनेंगे और कई

49:04

सारे मॉलिक्यूल आपस में जुड़कर या ऐसा कोई

49:07

भी मॉलिक्यूल जिसमें खूब सारे बॉन्ड्स हो

49:10

तो उसको हम मैक्रो मॉलिक्यूल की कैटेगरी

49:13

में रखेंगे। मोस्ट ऑफ पॉलीमर्स दे आर एन

49:16

एग्जांपल ऑफ मैक्रो मॉलिक्यूल।

49:20

आपके पास क्या ऐसा कोई एग्जांपल है दैट वि

49:25

इज मैक मॉलिक्यूल? अ क्वेश्चन सिंपल सा

49:30

बट

49:32

नॉट पॉलीमर। कोई ऐसा एग्जांपल

49:36

माय क्वेश्चन टू यू इज़

49:41

गिव द एग्जांपल

49:45

ऑफ अ मैक मॉलिक्यूल व्हिच इज नॉट अ पॉलीमर

49:58

द क्वेश्चन इज़

50:00

मोस्ट ऑफ़ द मैक्रो मॉलिक्यूल्स दे आर

50:02

पॉलीमर। फॉर एग्जांपल कार्बो

50:04

पॉलीिसैक्राइड्स दे आर पॉलीमर।

50:07

न्यूक्लिक एसिड्स दे आर पॉलीमर, प्रोटीनंस

50:10

दे आर पॉलीमर एज वेल एज मैक्रो मॉलिक्यूल।

50:20

अंजलि फैटी एसिड तो मॉलिक्यूल की कैटेगरी

50:22

में रखते हैं। आंसर बाकी लोगों ने दिया।

50:24

वेरी गुड वेरी गुड बाला साहब। यस

50:28

गुड गुड

50:30

वेरी गुड वेरी गुड वेरी गुड। सो आंसर इज़

50:34

लिपिड्स।

50:35

बड़ी साइज के मॉलिक्यूल तो हैं।

50:39

दे हैव अ टेंडेंसी टू एग्रीगेट। दे आर ऑफ़

50:41

वेरी लार्जर साइज। दे आर असेंबली ऑफ फैटी

50:45

एसिड्स एंड असम काइंड ऑफ अल्कोहल

50:47

पॉलीहाइड्रोक्सी अल्कोहल वह मैक मॉलिक्यूल

50:50

है डिअ स्टूडेंट्स पर वो ट्रू पॉलीमर नहीं

50:52

है। उसमें कोई रिपीटेटिंग यूनिट मोनोमरिक

50:54

यूनिट देखने को नहीं मिलती।

51:01

ओके? चलो आगे बात करते हैं। सो

51:03

मॉलिक्यूल्स व्हेन टू और मोर एटम्स सिमिलर

51:07

और डिसिमिलर टाइप दे आर बॉन्डेड वुड बी

51:09

रेफर्ड टू एज मॉलिक्यूल्स लार्जर साइज

51:12

मॉलिक्यूल्स व्हिच हैज़ लार्ज नंबर ऑफ़

51:14

एटम्स बॉन्डेड विद ईच अदर तो उसे हम मैक

51:17

मॉलिक्यूल कहेंगे।

51:22

बायोलॉजिकल सिस्टम में जो मॉलिक्यूल्स

51:25

प्रेजेंट होते हैं उनका डिस्ट्रीब्यूशन

51:28

देखें

51:30

तो बायोलॉजिकल सिस्टम में जो सबसे अबंडेंट

51:34

मॉलिक्यूल है दैट इज वाटर

51:39

ई कोलाई में लगभग 70%

51:42

स्पाइनच में 93% के आसपास

51:48

फ्रैट लीवर के अंदर लगभग अगेन 70% 69% के

51:52

आसपास वोटर है।

52:02

पीएसके जोरेन आईएफएस ऐप देखें आप। आप

52:05

वेबसाइट पर सारी इनेशन दे रखी है। मैं या

52:07

मेरे साथी टीचर्स किस कहां पर पढ़ाते हैं।

52:10

कंप्लीट इनेशन ifs ऑनलाइन.com पर अवेलेबल

52:13

है। पर अभी तो यहां पर पढ़ रहे हैं। दैट्स

52:15

वेरीेंट। खैर

52:18

वाटर के बाद सेकंड नंबर पर कौन सा

52:21

मॉलिक्यूल आएगा?

52:23

तो दैट इज़ वेरिएबल। अगर हम

52:28

ई कोलाई की बात करें तो दैट विल कम आउट टू

52:30

बी प्री प्रोटीन। और अगर हम प्लांट्स की

52:32

बात करें तो दैट विल कम आउट टू बी

52:34

कार्बोहाइड्रेट। अगेन एनिमल्स की बात करें

52:37

तो दैट विल बी अ प्रोटीन। दैट कुड बी अ

52:38

वेरिएबल। हालांकि कोई नहीं पूछेगा। मोस्ट

52:40

अबंडेंट इज़ वाटर। इन केस ऑफ़ प्लांट्स, द

52:43

सेकंड मोस्ट अबंडेंट इज़ मोस्ट ऑफन

52:46

कार्बोहाइड्रेट्स। व्हाइल इन केस ऑफ

52:47

बैक्टीरिया एज वेल एज एनिमल द सेकंड मोस्ट

52:50

अबंडनेंट मॉलिक्यूल आर द प्रोटंस। ओके? और

52:54

एक बात और भी ध्यान रखें कि बायोलॉजिकल

52:56

सिस्टम में डीएनए के कंपैरिजन में आरएनए

53:00

की अमाउंट परसेंटेज के हिसाब से ज्यादा

53:02

होती है। क्योंकि डीएनए की डिप्लॉयड जीनो

53:05

में तो दो कॉपीज़ होगी। आरएनए की मल्टीपल

53:07

कॉपीज है वहां पर प्रेजेंट है।

53:10

जोरिन लिपिड इज अ एस्टर्स ऑफ अ फैटी एसिड

53:15

एंड अ पॉलीहाइड्रोक्सी अल्कोहल। बट आगे हम

53:17

लिपिड पढ़ेंगे तो हम इस डेफिनेशन में काफी

53:19

ज्यादा फ्लक्सेशन देंगे। रिलैक्सेशन देंगे

53:22

कि फ्लैक्सिबिलिटी होगी। कुछ जगह पर ईथर

53:25

बॉन्ड भी होंगे, कुछ जगह पर

53:26

मोनोहाइड्रोक्सी अल्कोहल भी होगा। कुछ जगह

53:29

पर अमाइड बॉन्ड भी देखने को मिलेगा। बट

53:31

वहां पर जनरली दो चीजें जरूर होती है। एक

53:33

अल्कोहल होता है साथ और अल्कोहल के साथ

53:35

फैटी एसिड्स आकर एसोसिएट होती है। है ना?

53:38

बीएस के मैं ये बता रहा हूं

53:43

कि लिपिड्स में दो चीजें होती है। एक कोई

53:46

अल्कोहल और दूसरा फैटी एसिड।

53:52

उत्तरादास ग्लाइकोजन एक मैक मॉलिक्यूल है

53:55

और पॉलीमर भी है।

54:04

ठीक है? तो दिस इज द डिस्ट्रीब्यूशन। आगे

54:06

चलो बात करते हैं।

54:10

नाउ हमने कहा कि एटम्स को अगर स्टेबिलिटी

54:15

अचीव करनी है तो सम हाउ दे मस्ट कमपीट अ

54:19

डुप्लेट और एन ऑक्टेट। और उसको करने के दो

54:22

तरीके थे।

54:24

आइदर शेयरिंग ऑफ इलेक्ट्रॉन्स और ट्रांसफर

54:28

ऑफ इलेक्ट्रॉन्स। तो पहले हम ट्रांसफर ऑफ

54:30

इलेक्ट्रॉन्स के बारे में बात कर रहे हैं।

54:32

हम आयनिक बॉन्ड्स के बारे में बात कर रहे

54:34

हैं।

54:38

ऐसे एटम्स फॉर एग्जांपल सोडियम सोडियम एटम

54:42

के आउटरमोस्ट शेल के अंदर फर्स्ट शेल के

54:46

अंदर टू है। उससे आउटरमोस्ट शेल में एट और

54:48

जो सबसे बाहर की तरफ शेल है उसमें एक

54:50

इलेक्ट्रॉन है। अगर सोडियम को

54:55

स्टेबल होना है

54:58

तो दो पॉसिबिलिटीज़ हैं। या तो सोडियम एटम

55:02

कहीं से सेवन इलेक्ट्रॉन को गेन करे ताकि

55:06

उसका ऑक्टेट कंप्लीट हो। या वह एक

55:09

इलेक्ट्रॉन को लूज़ करे ताकि आउटरमोस्ट शेल

55:12

ही हट जाए।

55:21

श्रीकांत कोलेस्ट्रॉल हम पढ़ेंगे। ठीक है?

55:23

लिपिड्स वाले टॉपिक में क्लियर हो जाएगा।

55:25

एकदम क्लियर हो जाएगा।

55:28

साइंस कैटलिस्ट सारी इंफॉर्मेशनेशन

55:29

वेबसाइट पर अवेलेबल है। अभी हम पढ़ रहे

55:31

हैं। चलो उन पे हमें ध्यान देने दो। ठीक

55:33

है? पढ़ो। बाकी सारी इंफॉर्मेशनेशन वेबसाइट

55:35

पर इंफॉर्मेशनेशन है और या आप देखते रहें।

55:37

आपको कमेंट मिलेगा। ठीक है? हमें सिर्फ

55:40

बायोकेमिस्ट्री पर अभी फोकस करना है कि

55:43

सोडियम के आउटरमोस्ट शेल के अंदर एक

55:45

इलेक्ट्रॉन है। आइदर सम हाउ इट कैन

55:47

एक्वायर अ सेवन इलेक्ट्रॉन फ्रॉम समवेयर

55:50

और इट कैन लूज़ वन इलेक्ट्रॉन।

55:57

व्हाट इज़ मोर ईज़ियर, मोर प्रोबेबल।

56:02

मोर ईज़ियर और मोर प्रोबेबल इज़ दैट दिस एटम

56:06

विल लूज़ एन इलेक्ट्रॉन।

56:09

क्योंकि एक इलेक्ट्रॉन को लूज करना

56:10

कंपेरेटिवली आसान है। और जैसे ही

56:12

इलेक्ट्रॉन को लूज करेगा

56:15

उसके ऊपर कैसा चार्ज आएगा?

56:18

पॉजिटिव चार्ज।

56:21

इट विल बिकम इलेक्ट्रो पॉजिटिव। जैसे किरण

56:24

ने कहा इट विल बिकम इलेक्ट्रो

56:29

पॉजिटिव।

56:33

क्योंकि कल क्लास में हम पढ़ चुके थे कि

56:35

किसी भी एक न्यूट्रल एटम में प्रोटॉन और

56:38

इलेक्ट्रॉन बराबर होते हैं। और प्रोटॉन और

56:41

इलेक्ट्रॉन बराबर है। इसका मतलब

56:45

एटम के ऊपर नेट चार्ज ज़ीरो है। सोडियम जब

56:49

तक एटम था तब तक उसके पास

56:53

हम ये कह सकते हैं कि 11 प्रोटॉन्स थे और

56:58

11 इलेक्ट्रॉन्स थे।

57:01

इसलिए नेट चार्ज सोडियम एटम पर कितना था?

57:05

जीरो। बिकॉज़ पॉजिटिव चार्ज हैज़ बीन काउंटर

57:08

बैलेंस बाय नेगेटिव चार्ज। पर जैसे ही

57:11

इसने एक इलेक्ट्रॉन को लूज़ किया। अभी

57:13

प्रोटॉन तो 11 ही रहे। इलेक्ट्रॉन पीछे 10

57:16

ही बचे। नेट चार्ज उसके ऊपर क्या आ गया?

57:17

पॉजिटिव। और ऐसे एटम जो कि टेंडेंसी रखते

57:21

हैं इलेक्ट्रॉन को लूज़ करने की। ऐसे एटम

57:24

को इलेक्ट्रो पॉजिटिव एटम कहते हैं।

57:32

इसी तरीके से इधर तरफ क्लोरीन के बारे में

57:34

बात की गई है

57:37

कि

57:39

क्लोरीन के आउटरमोस्ट शेल में आप देख सकते

57:42

हैं 1 2 3 4 5 6 एंड सेवन इलेक्ट्रॉन है।

57:49

सो कुल मिलाकर हम कह सकते हैं नॉर्मल

57:51

कंडीशन में 17 प्रोटॉन हैं और 17

57:54

इलेक्ट्रॉन हैं। इसलिए नेट चार्ज इसके ऊपर

57:56

ज़ीरो होगा। अगर क्लोरीन को स्टेबल होना है

58:00

तो दो तरीके हैं। या तो अपने सेवन

58:01

इलेक्ट्रॉन को लूज करे या एक इलेक्ट्रॉन

58:04

को कहीं से एक्वायर करें।

58:08

तो मोर प्रोबेबल इज़ दैट सम हाउ क्लोरीन

58:11

विल ट्राई टू एक्वायर एन इलेक्ट्रॉन फ्रॉम

58:14

समवेयर। और जैसे ही ये इलेक्ट्रॉन को

58:16

एक्वायर करेगा। अब उसके पास 17 प्रोटॉन है

58:18

और 18 इलेक्ट्रॉन हो जाएंगे। और 18

58:20

इलेक्ट्रॉन होते ही अब उसके ऊपर नेगेटिव

58:22

चार्ज आ जाएगा। ऐसे एटम जिनके ऊपर नेगेटिव

58:25

चार्ज आ जाता है। ऐसे एटम को हम इलेक्ट्रो

58:29

नेगेटिव

58:31

एटम्स कहते हैं। सच एटम्स आर रेफर्ड टू एज

58:34

इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम्स।

58:40

ओके?

58:45

सो

58:48

ऐसे एटम्स जिनके आउटरमोस्ट शेल में एक, दो

58:51

या तीन इलेक्ट्रॉन्स होते हैं। दे जनरली

58:54

हैव अ टेंडेंसी टू लूज़ एन इलेक्ट्रॉन

58:56

उन्हें इलेक्ट्रोपॉजिटिव एटम्स कहा जाता

58:58

है। उन्हें मेटल्स कहा जाता है। जिनके

59:02

आउटरमोस्ट शेल के अंदर

59:05

सेवन सिक्स या फाइव इलेक्ट्रॉन होते हैं।

59:11

दे हैव अ जनरल टेंडेंसी

59:15

टू एक्सेप्ट एन इलेक्ट्रॉन। उन्हें

59:17

इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम कहा जाता है। और

59:21

जिनमें आउटरमोस्ट शेल में से कार्बन में

59:23

चार इलेक्ट्रॉन हैं तो दे कैन इंस्टेड ऑफ़

59:26

ट्रांसफर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन मोर कॉमनली दे वुड

59:28

बी इनवॉल्वड इन शेयरिंग ऑफ़ इलेक्ट्रॉन्स।

59:31

ओके? सो अब सोडियम को स्टेबल होना है तो

59:35

इलेक्ट्रॉन को लूज करना है। क्लोरीन को

59:37

स्टेबल होना है तो इलेक्ट्रॉन को गेन करना

59:39

है। पर सिर्फ सोडियम एटम है तो वो

59:41

इलेक्ट्रॉन को लूज़ नहीं कर सकता। या

59:43

क्लोरीन एटम तब तक कहीं से इलेक्ट्रॉन को

59:45

गेन नहीं कर सकता जब तक कि सराउंडिंग के

59:47

अंदर कोई इलेक्ट्रॉन डोनर नहीं हो। पर

59:49

लेट्स से आपने एक ही जगह पर सोडियम एटम और

59:53

क्लोरीन एटम को दोनों को साथ में रख लिया।

59:56

दोनों अनस्टेबल है क्योंकि सोडियम के पास

59:59

एक इलेक्ट्रॉन एक्सेस है। क्लोरीन के पास

1:00:01

एक इलेक्ट्रॉन की कमी है। व्हाट विल हैपन

1:00:04

इज़ अ इलेक्ट्रॉन फ्रॉम सोडियम वुड बी

1:00:07

ट्रांसफरर्ड टू द क्लोरीन एंड एज अ रिजल्ट

1:00:10

ऑफ़ दिस सोडियम विल आल्सो बिकम स्टेबल एंड

1:00:14

द क्लोरीन विल आल्सो बिकम अ स्टेबल। और

1:00:16

जैसे ही सोडियम

1:00:19

ने इलेक्ट्रॉन को लूज़ किया, सोडियम के ऊपर

1:00:22

पॉजिटिव चार्ज आ गया। क्लोरीन के ऊपर

1:00:24

इलेक्ट्रॉन रिसीव करने के बाद नेगेटिव

1:00:26

चार्ज आ गया। क्योंकि अब सोडियम के पास 11

1:00:29

प्रोटॉन्स हैं और 10 ही इलेक्ट्रॉन हैं।

1:00:32

जबकि क्लोरीन के पास अब 17 प्रोटॉन है

1:00:34

लेकिन 18 इलेक्ट्रॉन आ चुके हैं। एक

1:00:36

इलेक्ट्रॉन उसने और एक्वायर कर लिया। अब

1:00:38

हम कहेंगे सोडियम एटम सोडियम आयन की फॉर्म

1:00:41

में। और क्लोरीन एटम क्लोरीन आयंस की

1:00:45

फॉर्म में। और क्योंकि A के ऊपर पॉजिटिव

1:00:47

चार्ज है और A के ऊपर नेगेटिव चार्ज है।

1:00:50

ये पॉजिटिव और नेगेटिवली चार्ज वाले आयंस

1:00:52

एक दूसरे के साथ रहेंगे। अब एक दूसरे से

1:00:54

अलग नहीं होंगे क्योंकि वह ज्यादा स्टेबल

1:00:57

है। तो ऐसा बॉन्ड जो आयंस के बीच में होता

1:01:00

है उस बॉन्ड को हम क्या कहते हैं? आयनिक

1:01:02

बॉन्ड। सो, हाउ वी आर गोइंग टू डिफाइन

1:01:06

आयनिक बॉन्ड? आयनिक बॉन्ड इज़ अ बॉन्ड

1:01:09

व्हिच इज़ फॉर्म बिटवीन एन आयंस। एंड व्हाट

1:01:11

आर आयंस? आयंस दे आर फॉर्म्ड व्हेन एन एटम

1:01:14

आइदर लूज और गेन एन इलेक्ट्रॉन। एटम्स

1:01:17

व्हिच लूज़ एन इलेक्ट्रॉन आर रेफर्ड टू एज

1:01:20

इलेक्ट्रोपजिटिव एटम्स एंड एटम्स व्हिच

1:01:22

हैव जनरल टेंडेंसी टू एक्सेप्ट एन

1:01:24

इलेक्ट्रॉन्स आर रेफर्ड टू एज़

1:01:25

इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम एंड व्हेन अ

1:01:27

इलेक्ट्रोपज़िटिव एटम एंड इलेक्ट्रोनेगेटिव

1:01:30

एटम दे आर प्लेस्ड टुगेदर देयर इज़ अ

1:01:32

ट्रांसफर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन एंड ड्यू टू अ

1:01:34

ट्रांसफर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन दीज़ एटम्स दे मूव

1:01:37

टू देयर आयनिक स्टेट्स। वन बिकम पॉजिटिव

1:01:40

चार्ज, अनदर बिकम नेगेटिव चार्ज। एंड दीज़

1:01:42

पॉजिटिव एंड नेगेटिवली चार्ज आयंस दे

1:01:44

रिमेन टुगेदर अ फोर्स और इंटरेक्शन व्हिच

1:01:48

इज़ होल्डिंग दीज़ आयंस टुगेदर इज़ रेफर्ड टू

1:01:51

ऐज़ आयनिक बॉन्ड। ओके? सो, आयनिक बॉन्ड

1:01:54

कहां पर होता है? आयंस के बीच में।

1:02:03

मोल कांसेप्ट भी होगा, सब चीजें होगी। हैव

1:02:06

अ पेशेंस। अभी तो हमारी दूसरी

1:02:07

इंट्रोडक्टरी क्लास है। अभी तो

1:02:11

बच्चों के साथ मेरी ट्यूनिंग भी नहीं हुई।

1:02:13

इट विल टेक अ फोर टू फाइव डज़ कि हमारी

1:02:15

रिदमम फ्रीक्वेंसी हम रेजोनेंस में आ पाए।

1:02:18

अभी तो शुरू हुआ है। बहुत बेसिक टॉपिक है

1:02:19

और वो भी एटम मॉलिक्यूल्स जैसा टॉपिक

1:02:22

जिससे हम रोज दूर भागते हैं और सोचते हैं

1:02:24

इससे क्या कोई ज्यादा इंपॉर्टेंट पार्ट भी

1:02:26

नहीं है। ऐसा लगता है। बट इट इज़ेंट फॉर

1:02:28

डेवलपिंग द बेसिक्स ऑफ़ बायोकेमिस्ट्री।

1:02:31

ओके?

1:02:34

यस देवव्रत द नेम इज बॉन्ड एंड इट्स आयनिक

1:02:38

बॉन्ड बिकॉज़ इट इज द बॉन्ड अमंग द आयंस।

1:02:47

करिश्मा हम इलेक्ट्रोसिटी के बारे में बात

1:02:49

करेंगे। थोड़ा सा पेशेंस रखें। आयनिक बॉन्ड

1:02:51

और इलेक्ट्रोसिटी में कहां पर डिफरेंस है

1:02:53

हम डिस्कस करेंगे। नाउ कमिंग

1:02:57

टू द पॉइंट।

1:02:59

व्हाट वुड बी द फोर्स?

1:03:03

ऑफ द इंटरेक्शंस इन एन आयनिक बॉन्ड। बिकॉज़

1:03:06

आप जानते हैं कि द एनर्जी ऑफ एन आयनिक

1:03:09

बॉन्ड इट मे रेंजेस फ्रॉम मोस्ट कॉमनली इट

1:03:12

रेंजज़ फ्रॉम 40 टू 50 किलो कैलोरी पर मोल।

1:03:16

या इससे ज्यादा भी हो सकती है, कम भी हो

1:03:17

सकती है। जनरली इस रेंज में होती है।

1:03:21

बट ये एनर्जी या फोर्स किसके ऊपर डिपेंड

1:03:24

करता है?

1:03:27

फोर्स को डिफाइन करने के लिए हम कूलम्स लॉ

1:03:29

का इस्तेमाल कर सकते हैं। द फोर्स अमंग द

1:03:31

इलेक्ट्रोस्टेटिक इंटरेक्शन फोर्स इज

1:03:33

डिपेंड अपॉन k व्हिच इज़ अ कांस्टेंट q1 q2

1:03:38

r² d

1:03:41

वेयर q1 एंड q2 आर

1:03:47

चार्ज

1:03:49

बेसिकली यहां पर हम आयंस के बारे में बात

1:03:51

कर रहे हैं।

1:03:54

जितना ज़्यादा चार्ज होगा, ऑपोज़िट चार्ज

1:03:57

होगा, उतना ही वहां पर अट्रैक्टिव फोर्स

1:04:00

देखने को मिलेगा। ओके?

1:04:03

R इज़

1:04:06

डिस्टेंस

1:04:09

बिटवीन

1:04:11

आयंस।

1:04:14

डिस्टेंस और फोर्स के बीच में इनवर्स

1:04:19

रिलेशनशिप है। एंड इट इज़ हैविंग अ

1:04:22

स्क्वायर इनवर्स रिलेशनशिप।

1:04:29

एंड अनदरेंट पैरामीटर इज़ D. D स्टैंड्स

1:04:34

फॉर डाई इलेक्ट्रिक कांस्टेंट। अभी हम

1:04:38

इसके बारे में भी बात करते हैं।

1:04:41

सो इन अदर वर्ड्स जो फोर्स की बात कर रहे

1:04:44

हैं। फोर्स इज़ डायरेक्टली प्रोपोर्शनल टू

1:04:46

द चार्ज

1:04:48

ऑन द आयंस यानी +1 -1 चार्ज है या +2 -2

1:04:54

चार्ज है। +3 -3 चार्ज है। जितना ज्यादा

1:04:57

चार्ज उतना ही ऑपोजिट चार्ज उतना ही

1:04:59

ज्यादा अट्रैक्टिव फोर्स होगा। हां, अगर

1:05:01

चार्ज सिमिलर तरीके के हैं, तो फिर

1:05:03

अट्रैक्टिव फोर्सर्सेस की बजाय रिपल्सिव

1:05:05

फोर्स होगी। फिर बॉन्डिंग नहीं होगी। जब

1:05:07

तक हम बॉन्डिंग की बात कर रहे हैं तब तक

1:05:08

हम ये मान कर चल रहे हैं कि q1 एंड q2 दे

1:05:11

आर बियरिंग अ ऑपोजिट चार्ज।

1:05:17

एंड

1:05:19

r² बेसिकली इट इज़ द डिस्टेंस बिटवीन दीज़

1:05:24

चार्जेस जो q पॉजिटिव चार्ज है और q2

1:05:27

सेकंड हमारा चार्ज है। इनके बीच में

1:05:30

डिस्टेंस कितनी है? दैट इज गिवन बाय r और

1:05:33

डिस्टेंस के साथ आप देख सकते हैं डिस्टेंस

1:05:35

के स्क्वायर से इसके साथ रिलेशनशिप पे अगर

1:05:37

डिस्टेंस को अगर टू टाइम्स को बढ़ाएंगे तो

1:05:40

जो फोर्स है वो फोर टाइम्स कम हो जाएगा।

1:05:42

तो डिस्टेंस बढ़ाएं फोर्स ऑफ़ इंटरेक्शन विल

1:05:45

डिक्लाइन। एंड D डिपेंड्स अपॉन अ

1:05:47

डइलेक्टिक कांस्टेंट एंड डइलेक्टिक

1:05:49

कांस्टेंट ऑफ अ मीडियम इन व्हिच दीज़ आयंस

1:05:52

दे आर केप्ट। ओके? फॉर एग्जांपल अगर हम

1:05:58

एयर या वैक्यूम की बात करें। एयर या

1:06:01

वैक्यूम की डइलेक्टिक कांस्टेंट की वैल्यू

1:06:04

वन होती है। वाटर की हम बात करें तो

1:06:07

डइलेक्टिक कांस्टेंट की वैल्यू 80 होती

1:06:09

है। ओके? अभी हम इसके बारे में डिस्कस

1:06:12

करते हैं। और एनर्जी बिकॉज़ हम जानते हैं

1:06:16

कि वर्क क्या होता है? वर्क इज़ फोर्स *

1:06:19

डिस्प्लेसमेंट। और वी कैन से फोर्स *

1:06:21

डिस्टेंस इज़ r और फोर्स को हम कैसे मेजर

1:06:24

करते हैं? अभी हमने देखा KQ1 Q2 R² D * R

1:06:29

करेंगे तो एक r से R कट जाएगा। तो हमारे

1:06:32

पास वर्क कैपेसिटी टू वर्क इज़ रेफर्ड टू

1:06:35

एज़ एनर्जी। तो एनर्जी का हमारा फार्मूला

1:06:37

क्या हो जाएगा? KQ1

1:06:39

Q2

1:06:40

RD

1:06:42

यानी आयनिक बॉन्ड्स में क्या एनर्जी होगी?

1:06:48

वेदर इट वुड बी 40 किलो कैलोरी पर मोल

1:06:52

और 50 किलो कैलोरी पर मोल। और 80 किलो

1:06:55

कैलोरी पर मोल और अ 5 किलो कैलोरी पर मोल

1:06:58

दैट डिपेंड्स अपॉन फर्स्ट द चार्ज इट इज़

1:07:02

हैविंग अ इनवर्स रिलेशनशिप वि द डिस्टेंस

1:07:04

फोर्स स्क्वायर की पावर से था एनर्जी

1:07:06

सिंपली r से इनवर्स प्रोपोर्शनल है एंड

1:07:09

अनदरेंट पैरामीटर दैट इज़ द डइलेक्टिक

1:07:13

कांस्टेंट d

1:07:15

तो दीज़ आर मेजर फैक्टर्स

1:07:21

हां राकेश अब से हमने 4:00 बजे से क्लास

1:07:23

क्लास स्टार्ट कर दी। उसका रीज़न यह है

1:07:25

क्योंकि

1:07:29

6:00 बजे के बाद बफरिंग की बहुत ज्यादा कल

1:07:31

प्रॉब्लम हुई थी। तो उससे बचने के लिए अब

1:07:34

से हम आज से 4:00 बजे स्टार्ट कर रहे हैं

1:07:36

और देख रहे हैं कि क्या इस समय भी बफरिंग

1:07:38

वाली प्रॉब्लम आती है या नहीं आती है। टच

1:07:40

वुड अब तक तो प्रॉब्लम देखने को नहीं

1:07:42

मिली।

1:07:51

वेरी गुड नाथूराम। बिलकुल सही।

1:08:03

चलो।

1:08:06

आगे बात करते हैं। सो

1:08:11

एनर्जी किसके ऊपर डिपेंड करती है? K Q1,

1:08:14

Q2

1:08:17

RD

1:08:18

जैसे हमने Q1 Q2 चार्ज के बारे में बात

1:08:21

की। R डिस्टेंस हो गया आयंस के बीच में।

1:08:25

जितने पास में आयन रखेंगे इंटरेक्शंस या

1:08:28

एनर्जी ज्यादा होगी। एक इंपॉर्टेंट

1:08:30

पैरामीटर जिसके बारे में अब हम बात कर रहे

1:08:32

हैं दैट इज़ अ डाईइलेक्टिक कांस्टेंट।

1:08:36

यस अंजली चार्ज के डायरेक्टली प्रोपोर्शनल

1:08:38

है और डिस्टेंस के इन्वर्सली प्रोपोर्शनल

1:08:41

है।

1:08:52

थैंक यू उत्तरादास। इसीलिए टाइम थोड़ा चेंज

1:08:54

किया क्योंकि एक्चुअली 5 6:00 बजे के बाद

1:08:57

ऐसा लगता है कि नेट यूज़र्स बढ़ जाते हैं

1:08:59

इसलिए थोड़ी स्पीड के साथ प्रॉब्लम आती है।

1:09:01

इसलिए हमने आज ट्रायल के लिए 4:00 बजे से

1:09:03

क्लास स्टार्ट की और नोटिफाई कर दिया था।

1:09:05

आज सुबह वाले लोग जो आए थे आपको पता है ना

1:09:07

सुबह भी मैं आया था हमने प्ले विन जो

1:09:11

कॉन्टेस्ट वन था उसके क्वेश्चंस को डिस्कस

1:09:13

किए जो उस समय शामिल नहीं हो पाए वो देख

1:09:16

सकते हैं।

1:09:20

चलो आगे बात करते हैं। कमिंग टू द पॉइंट

1:09:24

व्हाट वी मीन बाय अ डाईइलेक्टिक

1:09:26

कांस्टेंट।

1:09:28

अब हम

1:09:30

डइलेक्टिक कांस्टेंट के बारे में बात करते

1:09:32

हैं।

1:09:34

बेसिकली डाईइलेक्टिक कांस्टेंट

1:09:38

वाटर का या डइलेक्टिक कांस्टेंट किसी भी

1:09:43

मटेरियल की हम बात करें द

1:09:47

डइलेक्टिक कांस्टेंट

1:09:50

बात

1:09:52

डइलेक्टिक कांस्टेंट ऑफ अ वाटर और अ

1:09:55

डइलेक्टिक कांस्टेंट ऑफ़ एनी इंसुलेटिक

1:09:56

मटेरियल इट कैन बी डिफाइंड एज दैट हाउ मच

1:10:00

और हाउ मच अमाउंट ऑफ़ चार्ज इट इज़ स्टर्ड

1:10:03

बाय दैट पर्टिकुलर र इंसुलेटिंग मटेरियल

1:10:05

एज़ कंपेयर टू व्हेन द सेम मैटेलिक प्लेट्स

1:10:08

दे वर बीइंग केप्ट इन अ वैक्यूम और एयर।

1:10:10

सो दो चीज़ इसमें इंपॉर्टेंट है कि दो आपके

1:10:13

पास मैटेलिक प्लेट्स हैं। एक पॉजिटिव

1:10:16

चार्ज और एक नेगेटिव चार्ज। उसके बीच में

1:10:18

हमने कुछ मीडियम रखा। इंसुलेटिंग मीडियम

1:10:21

रखा। ये इंसुलेटिंग मीडियम।

1:10:25

कुछ भी हो सकता है। दैट कुड बी वाटर, दैट

1:10:27

कुड बी बेंजीन, दिस कुड बी हेक्सेन, दिस

1:10:29

कुड बी एयर और दिस कुड बी

1:10:34

सो हम कह रहे थे कि किसी भी मीडियम की

1:10:39

चार्ज स्टोर कर स्टोर करने की कैपेबिलिटी

1:10:42

को हम डइलेक्टिक कांस्टेंट से मेजर करते

1:10:45

हैं। तो दो चार्ज प्लेट्स रखें उनके बीच

1:10:48

में मीडियम रखें और वो मीडियम कितना चार्ज

1:10:51

को स्टोर करके रखता है दैट इज़ दैट

1:10:54

प्रॉपर्टी इज़ रेफर्ड टू एज़ डइलेक्टिक

1:10:56

कांस्टेंट। और रेफरेंस के तौर पर हम क्या

1:10:58

ले रहे हैं? एयर या वैक्यूम।

1:11:00

ओके?

1:11:02

सो बेसिकली डइलेक्टिक कांस्टेंट चार्ज

1:11:05

सेपरेशन के बारे में बताता है।

1:11:12

जिस मीडियम की डइलेक्टिक कांस्टेंट की

1:11:14

वैल्यू जितनी ज्यादा होगी वह उतना ही

1:11:17

ज्यादा चार्ज को स्टोर करके रखेगा। और

1:11:21

चार्ज को स्टोर करके रखने का मतलब है एज

1:11:24

कंपेयर टू एयर और वैक्यूम। उसका मतलब है

1:11:26

वो उतने ही कम आयंस को आपस में इंटैक्ट

1:11:29

होने देगा। एयर या वैक्यूम जिनकी

1:11:32

डइलेक्टिक कांस्टेंट की वैल्यू सबसे कम

1:11:34

है। एयर या

1:11:37

एयर या वैक्यूम की जिसको हम रेफरेंस लेते

1:11:41

हैं उसकी डइलेक्टिक कांस्टेंट वैल्यू वन

1:11:44

है। उसके कंपैरिजन में वाटर की डइलेक्टिक

1:11:48

कांस्टेंट की वैल्यू 80 है।

1:11:52

जिसकी डइलेक्ट्रिक कॉन्स्टेंट वैल्यू

1:11:53

जितनी ज़्यादा वह उनके अंदर हम जितने

1:11:58

ज़्यादा सॉल्ट को ऐड करें या कोई भी साल्ट

1:12:00

को ऐड करें, वह उतनी आसानी से डिॉल्व

1:12:03

होगा। बिकॉज़ हाई डइलेक्टिक कांस्टेंट

1:12:05

वैल्यू मींस इट इज़ हैविंग एन हाई एबिलिटी

1:12:08

टू स्टोर अ चार्ज। इट कैन अलाउ द डिसोसशन

1:12:12

ऑफ़ चार्ज। तो इसको हम थोड़ा और समझते हैं।

1:12:21

जैसे ही

1:12:23

किसी भी सॉल्ट को वाटर में ऐड करते हैं।

1:12:29

जैसे NaCl को वाटर में ऐड करते हैं। तो

1:12:36

व्हाट यू फाइंड इज़ दैट इट गेट डिसोसिएट

1:12:37

इंटू रेडली इट गेट डिसोसिएट इंटू सोडियम

1:12:40

आयन एंड क्लोरीन आयन। ऐसा क्यों होता है?

1:12:44

तो उसका सीधा सा हम आंसर देते हैं। ऐसा

1:12:47

इसलिए होता है कि

1:12:50

वाटर की डइलेक्टिक कांस्टेंट वैल्यू बहुत

1:12:54

ज्यादा होती है।

1:12:58

जितनी ज्यादा डाईइिक कांस्टेंट की वैल्यू

1:13:03

होगी

1:13:10

उतनी ही

1:13:13

जितनी डइलेक्ट कांस्टेंट की वैल्यू ज्यादा

1:13:15

होगी उतनी ही आसानी से उसमें आयंस डिॉल्व

1:13:17

होंगे। इसको कुछ और समझ समझा जा सकता है

1:13:21

कि जब NaCl

1:13:24

क्रिस्टल फॉर्म में है

1:13:27

अगर इसको आपको आयनिक फॉर्म में कन्वर्ट

1:13:30

करना है तो लैटिस को ब्रेक करना पड़ेगा।

1:13:33

और लैटिस को ब्रेक करने के लिए जो एनर्जी

1:13:36

चाहिए उसे एंथैल्पी कहा जाता है।

1:13:43

सो

1:13:45

इन अदर वर्ड्स सॉल्ट अगर ब्रेक हो रहा है

1:13:47

तो एंथैल्पी

1:13:49

दिस प्रोसेस वुड बी

1:13:52

एंडोथर्मिक क्योंकि हमें बाहर से एनर्जी

1:13:55

लगानी पड़ेगी।

1:14:01

और जब सॉल्ट को वाटर में ऐड किया जाए

1:14:03

सिर्फ सॉल्ट आयंस में ही डिसोसिएट नहीं

1:14:05

होता है। उल्टा जो वाटर के मॉलिक्यूल्स

1:14:08

हैं जो आपस में हाइड्रोजन बॉन्ड कर रहे थे

1:14:10

उनको भी एक दूसरे से डिसोसिएट होना पड़ता

1:14:13

है। यानी को भी सेपरेट होना पड़ेगा। यानी

1:14:16

जो वाटर है दे विल आल्सो स्प्लिट।

1:14:20

वह प्रोसेस भी एंडोथर्मिक हुआ।

1:14:24

लेकिन यह फिर भी प्रोसेस

1:14:27

क्यों हो पाता है? तो इसका रीजन है कि जब

1:14:30

कभी भी आयंस

1:14:33

वाटर के साथ इंटरेक्ट करते हैं।

1:14:38

आयंस वाटर के साथ इंटरेक्ट करते हैं। तो

1:14:42

यहां पर इनके बीच में जो एंथैल्पी होती है

1:14:45

जिसे कहा जाता है एंथैल्पी ऑफ़ हाइड्रेशन।

1:14:48

एंड दिस एंथैल्पी ऑफ़ हाइड्रेशन दिस इज़

1:14:52

वेरी हाई। एंथैल्पी ऑफ़ हाइड्रेशन इज़ वेरी

1:14:54

हाई। दिस इज़ एन एग्जोथर्मिक

1:14:58

प्रोसेस।

1:14:59

या इसको हम सिंपल वर्ड्स में इस तरीके से

1:15:02

समझ सकते हैं।

1:15:05

द एनर्जी व्हिच इज़ रिक्वायर्ड टू ब्रेक अ

1:15:09

बॉन्ड।

1:15:12

और व्हिच इज़ रिक्वायर्ड टू डिस्टर्ब द

1:15:14

लैटिस स्ट्रक्चर ऑफ़ NaCl इज़ रेफर्ड टू एज

1:15:16

लैटिस एनर्जी।

1:15:19

एंड द एनर्जी

1:15:23

व्हिच इज इन व्हिच इज प्रेजेंट इन द

1:15:25

इंटरेक्शन बिटवीन आयंस एंड वाटर इज रेफर्ड

1:15:29

टू एज हाइड्रेशन एनर्जी। और जैसे हम

1:15:32

स्मॉल क्लासेस में पढ़ते हैं

1:15:36

कि अगर

1:15:39

हाइड्रेशन एनर्जी

1:15:41

लैटिस एनर्जी से ज्यादा हो तो उस कंडीशन

1:15:45

में आयंस दे विल गेट रेडीली डिॉल्व इन आवर

1:15:49

वाटर।

1:15:51

सो व्हाई सॉल्ट इट गेट डिॉल्व इन अ वाटर

1:15:54

या सॉल्ट्स दे विल गेट डिॉल्व ओनली अंडर अ

1:15:57

सिनेरियो इफ एन हाइड्रेशन एनर्जी एंथैल्पी

1:16:01

एनर्जी को मेजर करने के लिए जो टर्म्स

1:16:03

इस्तेमाल करते हैं दैट इज़ रेफर टू एज़

1:16:04

एंथैल्पी एंथैल्पी एंट्रॉपी फ्री एनर्जी

1:16:07

के बारे में हम आगे डिस्कस करेंगे। पर अभी

1:16:09

सिर्फ इतना सा ही बहुत है कि हाइड्रेशन

1:16:12

एनर्जी अगर लैटिस एनर्जी से ज्यादा है उस

1:16:15

कंडीशन में सॉल्ट है दैट विल गेट डिॉल्व

1:16:17

इन अ वाटर।

1:16:26

तो

1:16:29

अब

1:16:31

हमें इन बातों का

1:16:34

ध्यान रखना है। ठीक है? ठीक है? हमें तो

1:16:36

बिल्कुल

1:16:40

छोटी-छोटी चीजें हमें याद रखनी है।

1:16:44

अब

1:16:48

हम ये भी कह सकते हैं सॉल्ट्स जिनकी

1:16:51

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी में डिफरेंस बहुत

1:16:53

ज्यादा होता है। इलेक्ट्रोनेगेटिविटी में

1:16:55

डिफरेंस बहुत हाई होता है।

1:17:00

हाई डिफरेंस जहां ज्यादा होगा दे विल गेट

1:17:03

ईजीली सॉलीबलाइज।

1:17:06

क्योंकि इलेक्ट्रोनेगेटिविटी में बहुत

1:17:08

ज्यादा डिफरेंस होने का मतलब वहां पर

1:17:10

आयनिक बॉन्ड्स होंगे और आयनिक बॉन्ड्स

1:17:13

होंगे उनको वाटर में जैसे ही हम ऐड करेंगे

1:17:15

वाटर का डइलेक्ट्रिक कां्सेंट वैल्यू

1:17:16

ज्यादा होती है। वो आसानी से डिॉल्व हो

1:17:18

जाएगी। डइलेक्ट्रिक कांस्टेंट वैल्यू

1:17:20

ज्यादा होने की वजह से जो हाइड्रेशन

1:17:23

एनर्जी होगी दैट इज द इंटरेक्शन व्हिच इज़

1:17:25

ड्यू टू एन इंटरेक्शन बिटवीन एन आयंस एंड

1:17:27

अ वाटर मॉलिक्यूल दैट वुड बी हायर एज़

1:17:29

कंपेयर टू

1:17:31

द स्ट्रेंथ ऑफ़ इंटरेक्शन व्हिच वाज़ दैट इज़

1:17:34

एनर्जी दैट वाज़ द स्ट्रेंथ ऑफ़ इंटरेक्शन

1:17:35

बिटवीन द आयंस टुगेदर। चलो आगे बात करते

1:17:38

हैं हम।

1:17:42

कमिंग टू द पॉइंट व्हाट डू वी मीन बाय

1:17:45

कोवेंट बॉन्ड्स?

1:17:47

उत्तरादास लैटिस एनर्जी का मतलब देयर वास

1:17:50

सम एंथैल्पी और हीट कंटेंट वि वाज

1:17:53

होल्डिंग द आयंस टुगेदर

1:18:03

यस सॉल्वेशन एनर्जी बिल्कुल बिल्कुल सही

1:18:06

बात है

1:18:12

यस अंजलि बिल्कुल आप सही कह रहे हैं

1:18:16

और एंथैल्पी वाला कांसेप्ट हमारा थोड़ा आगे

1:18:18

और क्लियर हो जाएगा। हम आगे बात करते हैं।

1:18:21

चलो आज कोवेंट बॉन्ड्स के बारे में।

1:18:25

सो कमिंग टू द पॉइंट व्हाट वी मीन बाय

1:18:27

कोवलेंट बॉन्ड्स।

1:18:29

कोवलेंट बॉन्ड्स दे आर फॉर्म बाय शेयरिंग

1:18:33

ऑफ़

1:18:34

इलेक्ट्रॉन्स।

1:18:38

लेट्स से जैसे हमने स्टार्टिंग में बात की

1:18:40

कि हाइड्रोजन एटम के आउटरमोस्ट शेल में एक

1:18:43

ही इलेक्ट्रॉन है।

1:18:46

सो वहां पर ट्रांसफर पॉसिबल नहीं है। इस

1:18:49

हाइड्रोजन एटम को भी स्टेबल होने के लिए

1:18:51

एक डुप्लेट को कंप्लीट करने के लिए एक

1:18:53

इलेक्ट्रॉन चाहिए। इसको भी अपने डुप्लेट

1:18:55

को कंप्लीट करने के लिए एक इलेक्ट्रॉन और

1:18:56

चाहिए। इस केस में ट्रांसफर की बजाय इस

1:19:03

इलेक्ट्रॉन पेयर को दोनों शेयर करेंगे

1:19:06

ताकि इसका डुप्लेट भी कंप्लीट हो जाए और

1:19:08

इसका डुप्लेट भी कंप्लीट हो जाए।

1:19:12

सिमिलरली एक ऑक्सीजन एटम के आउटरमोस्ट शेल

1:19:16

के अंदर लेट्स से

1:19:19

सिक्स

1:19:20

इलेक्ट्रॉन हैं। दूसरे ऑक्सीजन एटम के

1:19:23

आउटरमोस्ट शेल में भी सिक्स इलेक्ट्रॉन

1:19:26

हैं।

1:19:27

यहां पर भी ट्रांसफर पॉसिबल नहीं है।

1:19:30

क्योंकि ऐसा करने पर दोनों के ऑक्टेट

1:19:32

कंप्लीट नहीं होंगे।

1:19:38

यहां पर वापस क्या होगा? शेयरिंग ऑफ

1:19:39

इलेक्ट्रॉन। ताकि इस ऑक्सीजन एटम का भी

1:19:42

ऑक्टेट कंप्लीट हो जाए। इस ऑक्सीजन एटम का

1:19:44

भी ऑक्टेट कंप्लीट हो जाए। जिसको इस तरीके

1:19:47

से रिप्रेजेंट किया जा सकता है।

1:19:52

ओके? सो व्हाट इज़ कोवलेंट बॉन्ड्स? कोवेंट

1:19:55

बॉन्ड्स आर फॉर्म्ड व्हेन द डिफरेंस इन

1:19:59

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी

1:20:01

इज़ आइदर ज़ीरो और द डिफरेंस इन

1:20:03

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी इज़ नेगिलिजिबल।

1:20:06

सच दैट ट्रांसफर ऑफ इलेक्ट्रॉन इज़ नॉट

1:20:09

पॉसिबल।

1:20:10

सो दो एटम्स के बीच में दो ही सिनेरियो हो

1:20:13

सकते हैं। या तो इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का

1:20:17

बहुत ज्यादा डिफरेंस होगा। एक

1:20:19

इलेक्ट्रोपॉजिटिव होगा और एक

1:20:20

इलेक्ट्रोनेगेटिव होगा। उस कंडीशन में

1:20:22

देयर वुड बी अ ट्रांसफर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन्स।

1:20:28

लेकिन अगर इलेक्ट्र इलेक्ट्रोनेगेटिविटी

1:20:30

का डिफरेंस इतना ज्यादा नहीं है

1:20:34

या बिल्कुल भी डिफरेंस नहीं है। जैसे

1:20:36

हाइड्रोजन एटम और हाइड्रोजन एटम की दोनों

1:20:37

की इलेक्ट्रोनेगेटिविटी सेम होगी। इन

1:20:39

दोनों ऑक्सीजन एटम की इलेक्ट्रोनेगेटिविटी

1:20:41

सेम होगी। दोनों की इलेक्ट्रॉन के लिए

1:20:44

टेंडेंसी एक जैसी हो या लगभग एक जैसी है।

1:20:46

उस कंडीशन के अंदर ट्रांसफर ऑफ इलेक्ट्रॉन

1:20:49

पॉसिबल नहीं है। बल्कि वहां पर क्या होगा?

1:20:51

शेयरिंग ऑफ़ इलेक्ट्रॉन।

1:21:00

सो व्हाट आर कोवेंट बॉन्ड्स? सो कोवेंट

1:21:02

बॉन्ड्स

1:21:04

दीज़ आर द बॉन्ड्स फॉर्म्ड बिटवीन द एटम्स

1:21:08

व्हिच आर हैविंग आइदर सिमिलर

1:21:10

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी

1:21:11

ऑ अ डिफरेंस इन इलेक्ट्रोनेगेटिविटी इज़

1:21:14

नेगिलिजिबल इट इज़ नॉट सफिशिएंट इनफ टू

1:21:17

कैरी आउट अ ट्रांसफर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन।

1:21:21

ओके?

1:21:23

हियर इन कोवलेंट बॉन्ड्स देयर इज़ अ

1:21:25

शेयरिंग ऑफ़ इलेक्ट्रॉन्स।

1:21:28

सो कुछ हम एग्जांपल ले सकते हैं।

1:21:31

जैसे ऑक्सीजन एटम और ऑक्सीजन एटम के बीच

1:21:34

के अंदर

1:21:36

देयर आर

1:21:39

अभी हमने बताया ऑक्सीजन एटम और दूसरे

1:21:42

ऑक्सीजन एटम के बीच में जब ऑक्सीजन

1:21:45

मॉलिक्यूल की हम बात करेंगे

1:21:48

तो वहां पर टू पेयर्स ऑफ इलेक्ट्रॉन्स दे

1:21:52

आर शेयर्ड इसको इस तरीके से हम रिप्रेजेंट

1:21:56

कर सकते हैं।

1:22:01

इस ऑक्सीजन का ऑक्टेट भी कंप्लीट हो गया।

1:22:03

इस ऑक्सीजन का ऑक्टेट भी कंप्लीट हो गया।

1:22:09

इनको कहा जाता है शेयर्ड पेयर ऑफ

1:22:11

इलेक्ट्रॉन।

1:22:15

और जो

1:22:18

पार्टिसिपेट नहीं कर रहे हैं शेयरिंग के

1:22:20

अंदर दीज़ आर एफ टू एज़ लोन पेयर ऑफ़

1:22:24

इलेक्ट्रॉन्स।

1:22:26

सो वी विल से दैट ईच ऑक्सीजन एटम व्हिच इज़

1:22:29

हैविंग अ फोर पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन आउट ऑफ

1:22:30

व्हिच द टू आर लोन पेयर्स एंड रेस्ट ऑफ द

1:22:36

पेयर्स वुड बी रेफर्ड टू एज़ टू ऑफ़ देम दे

1:22:39

आर शेयर्ड पेयर एंड रेस्ट ऑफ़ द टू वुड बी

1:22:41

रेफर्ड टू एज़ लोन पेयर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन्स।

1:22:47

जब कभी भी एक पेयर इलेक्ट्रॉन का शेयर हो

1:22:50

रहा हो तो उसके लिए हम एक बॉन्ड सिंगल

1:22:53

बॉन्ड रिप्रेजेंट कर रहे हैं। दो अगर

1:22:56

शेड पेयर हैं तो डबल बॉन्ड से रिप्रेजेंट

1:22:59

करेंगे। सो यहां पर क्योंकि दो

1:23:02

पेयर्स इलेक्ट्रॉन के शेयर हो रहे हैं। वी

1:23:05

विल रिप्रेजेंट इट विद अ डबल बॉन्ड।

1:23:09

सो ऑक्सीजन और ऑक्सीजन के बीच में दो

1:23:11

शेयर्ड पेयर्स हैं। नाइट्रोजन और

1:23:14

नाइट्रोजन के बीच में तीन ट्रिपल कोवेंट

1:23:16

बॉन्ड का फॉर्मेशन हो रहा है। क्योंकि

1:23:17

देयर आर थ्री शेयर्ड पेयर। हमेशा सिमिलर

1:23:21

एटम्स के बीच में ही कोवेंट बॉन्डिंग हो

1:23:23

ऐसा जरूरी नहीं है। जैसे कि इधर की तरफ आप

1:23:27

देख सकते हैं हाइड्राजीन का स्ट्रक्चर बना

1:23:29

हुआ है। जहां पर NH2 NH2 कंडीशन

1:23:32

यहां पर इथेन

1:23:34

इथाईलीन एसिटाइलन का स्ट्रक्चर बना हुआ

1:23:37

है। तो दीज़ आर वेरियस एग्जांपल ऑफ़ कोवलेंट

1:23:39

बॉन्ड्स। और बायोलॉजिकल सिस्टम में तो

1:23:41

ज्यादातर मॉलिक्यूल्स जो बायोलॉजिकल

1:23:43

सिस्टम प्रेजेंट है उन सबके अंदर कोवलेंट

1:23:44

बॉन्ड्स हैं वो प्रेजेंट होता है।

1:23:56

तो

1:24:00

देयर आर वेरियस एग्जांपल कोवलेंट बॉन्ड

1:24:02

जैसे ग्लूकोस है उनके अंदर सभी एटम्स के

1:24:05

बीच में कोवेंट बॉन्ड दिखाई देगा। अमीनो

1:24:07

एसिड्स के अंदर आप देखेंगे कोवलेंट

1:24:09

बॉन्ड्स देखने को मिलेंगे। ऑक्सीजन,

1:24:12

हाइड्रोजन, नाइट्रोजन गैस के अंदर आपको

1:24:14

कोवेंट बॉन्ड देखने को मिलेंगे। मिथेन के

1:24:17

बीच में और भी कई सारे आप एग्जांपल C2H5OH

1:24:21

हाइड्राजीन एटसेट्रा दीज़ ऑल आर द

1:24:24

एग्जांपल्स व्हेयर यू आर गोइंग टू गेट द

1:24:26

कोवेंट बॉन्ड्स और बायोलॉजिकल सिस्टम में

1:24:28

तो जितने भी मॉलिक्यूल्स हैं उन सब जगह पर

1:24:30

कोवेंट बॉन्ड देखने को मिलेंगे। मोस्ट ऑफ़

1:24:32

द ऑर्गेनिक कंपाउंड्स दे शोज़ अ कोवलेंट

1:24:35

बॉन्ड्स।

1:24:37

देन

1:24:40

वी आर नाउ डिफाइनिंग अ बॉन्ड लेंथ।

1:24:46

सो बेसिकली

1:24:48

द बॉन्ड लेंथ कुड बी डिफाइंड एज

1:24:53

इंटर

1:24:55

न्यूक्लियर

1:24:58

डिस्टेंस

1:25:01

बिटवीन

1:25:03

या इलेक्ट्र इंटरनक्लियर डिस्टेंस वी कैन

1:25:06

से व्हेन

1:25:09

अट्रैक्टिव

1:25:11

एंड रिपल्सिव

1:25:15

फोर्सर्सेस

1:25:17

आर इन

1:25:19

बैलेंस स्टेट।

1:25:24

सो हमने अभी तक ये बात की कि सपोज़ ये एटम

1:25:28

है A ये उसका न्यूक्लियस है।

1:25:33

ये दूसरा एटम है और ये उसका न्यूक्लियस

1:25:37

मान जैसे यहां पर डायग्राम में डॉ किया

1:25:38

गया है और शेयर्ड पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन को

1:25:42

यहां पर बीच में रखा गया है। सो

1:25:47

इसका पॉजिटिव चार्ज न्यूक्लियस इस

1:25:49

इलेक्ट्रॉन को अट्रैक्ट करेगा। इसका

1:25:51

पॉजिटिव चार्ज न्यूक्लियस इस इलेक्ट्रॉन

1:25:53

के पेयर को अट्रैक्ट करेगा। देयर वुड बी

1:25:55

सम काइंड ऑफ़ अट्रैक्टिव फोर्स। जैसे-जैसे

1:25:58

पास में लाते जाएंगे अट्रैक्टिव फोर्स

1:26:00

बढ़ेंगे। पर एक लेवल के बाद और ज्यादा पास

1:26:03

में लाने पर न्यूक्लियस और ज्यादा नजदीक

1:26:06

आएंगे और न्यूक्लियस ज्यादा नजदीक आने पर

1:26:08

उसे हम रिपल्सिव फिर वहां पर अट्रैक्ट की

1:26:11

बजाय देयर वुड बी अ रिपल्सिव फोर्स। तो हम

1:26:14

कह रहे हैं एटम्स अगर बहुत ज्यादा दूर है

1:26:17

तो ना कोई अट्रैक्टिव फ़ है ना कोई

1:26:18

रिपल्सिव फ़ है। जैसे-जैसे दो हाइड्रोजन

1:26:20

एटम नजदीक आते जाते हैं देयर इज़ अ शेयरिंग

1:26:23

ऑफ़ इलेक्ट्रॉन। नाउ द बोथ द न्यूक्लियस दे

1:26:26

आर बीइंग अट्रैक्टेड टुवर्ड द शेयर्ड पेयर

1:26:28

ऑफ इलेक्ट्रॉन इन्हें ए अट्रैक्टिव फोर्स

1:26:30

कहा अब और ज्यादा पास में लेकर आए तो

1:26:33

न्यूक्लियस नजदीक आएंगे अब अट्रैक्टिव की

1:26:35

बजाय वहां पर बहुत ज्यादा नजदीक आने पर

1:26:37

देयर वुड बी अ रिपल्सिव फोर्स तो इस

1:26:40

डिस्टेंस पर जहां पर अट्रैक्टिव फोर्स

1:26:42

सबसे मैक्सिमम है और रिपल्सिव फोर्स सबसे

1:26:45

मिनिमम है इसे कहा जाएगा बॉन्ड लेंथ ओके

1:26:50

सो बॉन्ड लेंथ वी कैन से इट इज़ एन इंटर

1:26:54

न्यूक्लियर डिस्टेंस बिटवीन द टू एटम्स

1:26:57

वेयर द अट्रैक्टिव फोर्सर्सेस दे आर

1:27:00

काउंटर बैलेंस्ड बाय अ रिपल्सिव

1:27:02

फोर्सर्सेस।

1:27:04

ये बात हुई बॉन्ड लेंथ के बारे में। और हम

1:27:08

बात कर चुके हैं सिंगल डबल या ट्रिपल

1:27:10

कोवेलेंट बॉन्ड के बारे में।

1:27:21

सिंगल

1:27:23

जब दो एटम्स के बीच में अगर जैसे

1:27:30

हाइड्रोजन का एग्जांपल ले लें ओनली वन

1:27:33

पेयर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन इज़ शेयरर्ड इट इज़ रिटन

1:27:37

बाय सिंगल बॉन्ड। व्हेन द टू शेयर्ड पेयर

1:27:40

ऑफ़ इलेक्ट्रॉन इज़ इनवोल्व देन इज़ रेफर्ड

1:27:42

टू ऐज़ डबल बॉन्ड।

1:27:45

व्हेन अ थ्री पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स दे आर

1:27:48

शेयर्ड इट इज रिप्रेजेंट बाय अ ट्रिपल बंड

1:27:53

सयाली हम आगे बात करेंगे वंडर वाल

1:27:56

इंटरेक्शन के बारे में भी

1:27:58

ठीक है ए हैव अ पेशेंस अभी हम बहुत

1:28:00

बेसिक्स को क्लियर कर रहे हैं धीरे-धीरे

1:28:03

पढ़ेंगे हमारा लेवल बढ़ाएंगे अभी बहुत

1:28:05

बेसिक अभी लोगों को लग सकता है बहुत हम

1:28:07

बेसिक पढ़ रहे हैं प्रॉपर हमें बेसिक से

1:28:08

स्टार्ट करना पड़ेगा क्योंकि मेरे जैसे कई

1:28:10

सारे स्टूडेंट यहां सामने होंगे जिनको

1:28:12

केमिस्ट्री बिल्कुल नहीं आती या बहुत कम

1:28:14

आती है। हम इसलिए हमें बेसिक लेवल से

1:28:16

स्टार्ट करना पड़ेगा। ओके? सो, हम आगे

1:28:19

वंडरबल कांसेप्ट पर भी जाएंगे।

1:28:22

जब कभी भी देयर इज़ अ

1:28:26

सिंगल कोवलेंट बॉन्ड देयर इज़ एन ओ

1:28:29

ओवरलैपिंग ऑफ़ S ऑर्बिटल हेड टू हेड

1:28:31

ओवरलैपिंग होती है। और हेयर टू हेयर

1:28:34

ओवरलैपिंग या जिसको हम बॉन्ड को हम सिग्मा

1:28:36

बॉन्ड कहते हैं। दैट इज़ कंपेरेटली मोर

1:28:38

स्टेबल।

1:28:40

सो सिंगल बॉन्ड में एक सिग्मा बॉन्ड होता

1:28:42

है। जहां पर हेड टू हेड ओवरलैपिंग है। डबल

1:28:45

बॉन्ड में एक सिग्मा

1:28:50

बॉन्ड और जो दूसरा बॉन्ड बना उसमें साइड

1:28:52

बाय साइड इस तरीके से साइड बाय साइड

1:28:54

ओवरलैपिंग होगी। सेकंड बॉन्ड के अंदर जिसे

1:28:58

हम

1:28:59

पाई बॉन्ड कहते हैं। पाई बॉन्ड में

1:29:02

क्योंकि साइड बाय साइड ओवरलैपिंग होती है

1:29:04

तो जितनी स्ट्रेंथ मिलनी चाहिए उतनी

1:29:05

स्ट्रेंथ नहीं मिलेगी। जितनी सिग्मा बॉन्ड

1:29:07

स्ट्रेंथ देता है उतनी पाई बॉन्ड स्ट्रेंथ

1:29:09

नहीं देता।

1:29:14

ऐसे ही

1:29:17

नाइट्रोजन में एक सिग्मा बॉन्ड और बाकी

1:29:20

साइड बाय साइड ओवरलैपिंग की वजह से देयर

1:29:23

आर टू पाई बॉन्ड्स।

1:29:26

सिग्मा बॉन्ड्स प्रोवाइड मैक्सिमम

1:29:27

स्ट्रेंथ। पाई की वजह से स्ट्रेंथ उतनी

1:29:29

नहीं मिल पाती जितनी कि

1:29:33

एक सिग्मा बॉन्ड से मिलती है। ओवरऑल

1:29:36

स्ट्रेंथ अगर हम बात करें कि सिंगल बॉन्ड

1:29:38

से ज्यादा एनर्जी

1:29:40

डबल बॉन्ड में होगी। डबल बॉन्ड से भी

1:29:42

ज्यादा एनर्जी ट्रिपल बॉन्ड में होगी। बट

1:29:45

इट इज़ नॉट लाइक दैट कि अ एनर् बॉन्ड

1:29:47

एनर्जी इन अ ट्रिपल बॉन्ड वुड बी थ्राइस

1:29:50

ऑफ़ अ सिंगल बॉन्ड। नहीं ऐसा नहीं होगा।

1:29:52

क्योंकि ट्रिपल बॉन्ड के अंदर देयर इज़ अ

1:29:54

वन सिग्मा एंड देन देयर आर टू पाई

1:29:56

बॉन्ड्स। तो पाई बॉन्ड्स इतनी ज़्यादा

1:29:58

एनर्जी नहीं देंगे जितना कि सिग्मा

1:29:59

बॉन्ड्स एनर्जी देते हैं।

1:30:05

सो पाई बॉन्ड्स यानी जैसे ही डबल बॉन्ड या

1:30:07

ट्रिपल बॉन्ड आया उसकी वजह से पाई बॉन्ड्स

1:30:09

आते ही रेस्ट्रिक्टेड रोटेशन और देखने को

1:30:11

मिलेगा। यू विल फाइंड अ रेस्ट्रिक्टेड

1:30:14

रोटेशन।

1:30:16

सो पाई

1:30:19

ऑर्बिटल्स

1:30:21

के ओवरलैप होते ही रोटेशन भी रेस्टेड होना

1:30:24

शुरू होगा। हम आगे पढ़ेंगे।

1:30:27

यानी अगर सिंगल बॉन्ड है दो एटम्स के बीच

1:30:29

में यानी सिर्फ अगर सिग्मा बॉन्ड है तो

1:30:32

रोटेशन पॉसिबल है। जैसे ही एटम्स के बीच

1:30:35

में सिग्मा बॉन्ड के अलावा ये कोई सेकंड

1:30:38

बॉन्ड भी आ गया।

1:30:41

पाई ऑर्बिटल्स जैसे ही आए तो फिर आप

1:30:44

देखेंगे कि अब रोटेशन पॉसिबल नहीं होगा।

1:30:46

ये कांसेप्ट भी आगे चलकर हम डिटेल में

1:30:48

डिस्कस करेंगे।

1:30:54

सो स्टूडेंट्स थोड़ा पेशेंस रखें। हम आगे

1:30:56

पढ़ते रहेंगे। धीरे-धीरे बायोकेमिस्ट्री

1:30:58

हमारी डेवलप होगी। एक या दो दिन में हम

1:31:00

पूरी बायोकेमिस्ट्री को स्ट्रांग नहीं कर

1:31:02

सकते। चलो धीरे-धीरे हम आगे बात करते हैं।

1:31:06

तो अभी तक हमने बात की सिंगल बॉन्ड के

1:31:08

बारे में, डबल बॉन्ड के बारे में और

1:31:10

ट्रिपल कोवेलेंट बॉन्ड के बारे में। हमने

1:31:12

कहा सिंगल कोवेलेंट बॉन्ड में एक सिग्मा

1:31:14

बॉन्ड होता है जो काफी स्टेबल है। डबल

1:31:16

कोवेलेंट बॉन्ड में एक सिग्मा और एक पाई

1:31:17

बॉन्ड होता है। ट्रिपल कोवेलेंट बॉन्ड में

1:31:20

एक सिग्मा और दो पाई बॉन्ड होते हैं। पाई

1:31:23

बॉन्ड ओवरऑल स्ट्रेंथ को तो बढ़ाते हैं पर

1:31:25

जितनी सिग्मा बॉन्ड में स्ट्रेंथ होती है

1:31:27

उतनी पाई बॉन्ड्स में नहीं होगी। और जब

1:31:29

कभी पाई ऑर्बिटल्स की ओवरलैपिंग होती है,

1:31:32

वह एटम्स के बीच में जो या बॉन्ड्स के

1:31:34

अक्रॉस जो रोटेशन हो सकता है, उस रोटेशन

1:31:36

को और रेस्ट्रिक्ट करते हैं।

1:31:39

नाउ कमिंग टू अ पोलर एंड नॉन पोलर

1:31:43

कोवेलेंट बॉन्ड्स।

1:31:46

एटम्स

1:31:47

जैसे हाइड्रोजन एटम दूसरे हाइड्रोजन एटम

1:31:50

के साथ

1:31:52

जब कभी भी शेयरिंग करता है तो आप देखेंगे

1:31:56

कि जितनी इस हाइड्रोजन एटम की

1:31:58

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी है दूसरे एटम की

1:32:01

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी भी एग्जैक्टली सेम

1:32:03

होगी। इस कंडीशन में जो ये शेयर्ड पेयर ऑफ़

1:32:06

इलेक्ट्रॉन है वह एग्जैक्टली सेंटर में

1:32:09

रहेगा। और शेयर्ड पेयर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन अगर

1:32:11

सेंटर में रहता है तो कोई पोल का फॉर्मेशन

1:32:13

नहीं होगा। और पोल का फॉर्मेशन नहीं होगा।

1:32:16

तो ऐसे मॉलिक्यूल को हम क्या कहेंगे? सॉरी

1:32:18

ऐसे बॉन्ड को हम क्या कहेंगे? दिस वुड बी

1:32:20

रेफर्ड टू एज नॉन पोलर कोवलेंट बॉन्ड। और

1:32:24

ऐसे मॉलिक्यूल्स जिसमें नॉन पोलर कोवलेंट

1:32:26

बॉन्ड ज्यादा होते हैं। ऐसे मॉलिक्यूल्स

1:32:28

को हम नॉन पोलर मॉलिक्यूल कहेंगे।

1:32:32

सो इन अदर वर्ड्स हाइड्रोजन इज़ अ नॉन पोलर

1:32:36

मॉलिक्यूल। बिकॉज़ इट हैज़ अ नॉन पोलर

1:32:38

कोवेलेंट बॉन्ड। व्हाई नॉन पोलर? बिकॉज़ दो

1:32:41

एटम्स हैं उनकी इलेक्ट्रोनेगेटिविटी में

1:32:43

कोई डिफरेंस नहीं है। शेयर्ड पेयर ऑफ़

1:32:45

इलेक्ट्रॉन एग्जैक्टली सेंटर के अंदर है।

1:33:06

सिमिलरली

1:33:08

ऑक्सीजन और दूसरा ऑक्सीजन एटम है ऑक्सीजन

1:33:11

मॉलिक्यूल में।

1:33:14

वहां पर हमने कहा कि देयर आर टू शेयर्ड

1:33:17

पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन्स।

1:33:19

तो ऑक्सीजन

1:33:22

आपके हिसाब से इनके बीच में बीच में जो

1:33:24

बॉन्ड होना चाहिए वो पोलर है या नॉन पोलर

1:33:26

है। ऑक्सीजन मॉलिक्यूल पोलर मॉलिक्यूल है

1:33:27

या नॉन पोलर मॉलिक्यूल है?

1:33:43

ठीक है अंजली हम देखेंगे अगर बफरिंग

1:33:46

ज्यादा हुई तो हम आगे भी टाइम को और चेंज

1:33:48

करेंगे।

1:33:54

यस बिल्कुल ये नॉन पोलर है क्योंकि अगेन

1:33:57

देयर इज़ नो डिफरेंस इन

1:33:59

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी। ये ऑक्सीजन भी नो

1:34:01

डाउट इलेक्ट्रोनेगेटिव है। ये ऑक्सीजन भी

1:34:02

इलेक्ट्रोनेगेटिव है। बट दोनों की

1:34:04

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी एग्जैक्टली सेम है।

1:34:05

इसलिए शेयर्ड पेयर ऑफ इलेक्ट्रॉन

1:34:07

एग्जैक्टली सेंटर में होगा। और अगर ये

1:34:08

शेयर पेयर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन एग्जैक्टली सेंटर

1:34:10

में है तो उस कंडीशन में कोई पोल्स का

1:34:12

फॉर्मेशन नहीं होगा। इसलिए नॉन इन

1:34:15

मॉलिक्यूल्स को हाइड्रोजन गैस को भी नॉन

1:34:17

पोलर कहा जाएगा। ऑक्सीजन को भी नॉन पोलर

1:34:19

कहा जाएगा। नेहा नहीं यही तो बात है। ये

1:34:22

पोलर नहीं है। नॉन पोलर है। क्यों नॉन

1:34:24

पोलर है? क्योंकि पोल्स है ही नहीं। पोल्स

1:34:26

तो तब होंगे ना जब इलेक्ट्रॉन्स को कोई

1:34:28

अपनी तरफ खींचे। यहां पर दोनों तरफ

1:34:29

ऑक्सीजन एटम है। दोनों की

1:34:30

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी सेम है। इसलिए शेयर्ड

1:34:33

पेयर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन एग्जैक्टली सेंटर में

1:34:35

होंगे। कहते है ना एक रूल भी है। लाइक

1:34:38

डिॉल्व्स इन अ लाइक। पोलर मॉलिक्यूल पोलर

1:34:41

सॉल्वेंट में डिॉल्व होते हैं। नॉन पोलर

1:34:43

मॉलिक्यूल नॉन पोलर सॉल्वेंट में डिॉल्व

1:34:45

होते हैं। ऑक्सीजन वाटर में डिॉल्व आसानी

1:34:48

से नहीं हो पाता। वो वाटर से एस्केप करने

1:34:51

की कोशिश करता है क्योंकि ऑक्सीजन गैस एक

1:34:54

नॉन पोलर मॉलिक्यूल है। जबकि लगभग सभी

1:34:57

गैसेस हाइड्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड सब की

1:34:59

बात करेंगे तो नॉन पोलर है। वाटर में

1:35:01

आसानी से डिॉल्व नहीं होती क्योंकि वह नॉन

1:35:03

पोलर है। ओके? जबकि उसके कंट्रास्ट अगर हम

1:35:07

वाटर की बात करें जिसमें एक ऑक्सीजन एटम

1:35:11

है और दूसरा

1:35:13

ये दो हाइड्रोजन एटम के साथ कोवलेंट बॉन्ड

1:35:16

का फॉर्मेशन करता है। अब यहां पर अगर आप

1:35:19

ऑक्सीजन एटम और हाइड्रोजन एटम की

1:35:22

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी की बात करें। वी विल

1:35:25

फाइंड दैट देयर इज़ अ लार्ज डिफरेंस इन

1:35:28

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी ऑफ़ एन ऑक्सीजन एटम

1:35:30

एंड अ हाइड्रोजन एटम। जो शेयर्ड पेयर ऑफ

1:35:33

इलेक्ट्रॉन है वह हाइड्रोजन से

1:35:37

ऑक्सीजन की तरफ शिफ्ट हो जाएगा। इट विल

1:35:39

नॉट बी एग्जैक्टली इन सेंटर इट विल गेट

1:35:42

शिफ्टेड टुवर्ड द ऑक्सीजन। जो इलेक्ट्रॉन

1:35:46

कंप्लीटली अपनी तरफ ले ले, छीन ही ले तो

1:35:49

उसके ऊपर प्योर नेगेटिव चार्ज आएगा। पर

1:35:51

यहां पर प्योर नेगेटिव तो नहीं बट

1:35:53

इलेक्ट्रॉन इट इज़ बीइंग टेकन। इट हैज़ इट

1:35:54

हैज़ बीन शिफ्टेड टुवर्ड ऑक्सीजन एटम। वी

1:35:56

विल से दैट नाउ ऑक्सीजन विल बियर अ

1:35:59

पार्शियल नेगेटिव चार्ज।

1:36:03

और जिससे इलेक्ट्रॉन दूर हुए हैं उसके ऊपर

1:36:06

पार्शियल पॉजिटिव चार्ज।

1:36:09

अगर कंप्लीट इलेक्ट्रॉन लॉस ही हो जाता तो

1:36:11

प्योर पॉजिटिव चार्ज आता है। इलेक्ट्रॉन

1:36:13

दूसरा गेन कर लेता तो उस पे नेगेटिव चार्ज

1:36:15

आता। इतना इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का डिफरेंस

1:36:17

नहीं है कि ट्रांसफर पॉसिबल हो। बट इट हैज़

1:36:20

बीन शिफ्टेड टुवर्ड्स वन साइड। तो इस

1:36:22

बॉन्ड के अक्रॉस देखें एक तरफ पॉजिटिव एंड

1:36:26

है और एक तरफ नेगेटिव एंड है। तो इस तरीके

1:36:28

के बॉन्ड को हम क्या कहेंगे? सच बॉन्ड वुड

1:36:30

बी रेफर्ड टू एज़ पोलर कोवलेंट बॉन्ड। सच

1:36:34

बॉन्ड वुड बी रेफर्ड टू एज़ पोलर कोवलेंट

1:36:36

बॉन्ड। इवन इस सेकंड बॉन्ड को भी देखें।

1:36:39

दिस इज़ आल्सो पोलर। बिकॉज़ अगेन इस ऑक्सीजन

1:36:42

एटम और इस हाइड्रोजन एटम के बीच में

1:36:43

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का बहुत ज्यादा

1:36:45

डिफरेंस है। इलेक्ट्रॉन इट इज़ बीइंग

1:36:48

शिफ्टेड टुवर्ड द ऑक्सीजन। अगेन देयर इज़ अ

1:36:52

पोल। सो वाटर मॉलिक्यूल के अंदर दो

1:36:54

कोवलेंट बॉन्ड है और दोनों के दोनों

1:36:56

कोवलेंट बॉन्ड पर पोल्स बने हुए हैं। सो

1:36:59

सच कोवलेंट बॉन्ड्स आर रेफर्ड टू एज़ पोलर

1:37:01

कोवलेंट बॉन्ड। सच मॉलिक्यूल वुड बी

1:37:03

रेफर्ड टू एज़ पोलर मॉलिक्यूल। सो वाटर इज़

1:37:05

अ पोलर मॉलिक्यूल।

1:37:08

ओके?

1:37:11

सो फजंस रूल बेसिकली

1:37:15

इसके बारे में बात करता है कि जैसे-जैसे

1:37:19

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का कोई डिफरेंस नहीं

1:37:21

है उस कंडीशन के अंदर डेफिनेटली देयर वुड

1:37:23

बी द शेड फेयर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन वुड बी

1:37:25

एग्जैक्टली इन सेंटर। बट जैसे-जैसे

1:37:27

डिफरेंस बढ़ता जाएगा इलेक्ट्रॉन्स शिफ्ट

1:37:30

होते जाएंगे टुवर्ड इलेक्ट्रोनेगेटिव एटम।

1:37:32

बहुत ज्यादा इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का

1:37:33

डिफरेंस है। तो फिर देन देयर वुड बी अ

1:37:35

ट्रांसफर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन। और ट्रांसफर ऑफ़

1:37:36

इलेक्ट्रॉन हुआ तो फिर कोवेंट बॉन्ड नहीं

1:37:38

होगा। फिर देयर वुड बी एन फॉर्मेशन ऑफ़

1:37:40

आयनिक बॉन्ड। सो अगेन दो एटम्स के बीच में

1:37:44

जो इलेक्ट्रॉन है वो एग्जैक्टली सेंटर में

1:37:47

हो सकता है। तो उसे नॉन पोलर कहा। शिफ्ट

1:37:49

हो गया थोड़ा सा। तो अब हमने कहा कि ये

1:37:52

पोलर कोवलेंट बॉन्ड और इलेक्ट्रॉन

1:37:54

कंप्लीटली दूसरे एटम के पास ही चला गया तो

1:37:56

फिर वो कोवलेंट बॉन्ड रहा ही नहीं। फिर वह

1:37:59

आयनिक बॉन्ड हो गया। बात समझ में आ रही है

1:38:02

ना?

1:38:06

चलो आगे डिस्कस करते हैं। तो ये तो बात

1:38:09

हुई पोलार और नॉन पोलर कोवेलेंट बॉन्ड के

1:38:13

बारे में। सो

1:38:17

मिथेन

1:38:19

के अंदर आप देखेंगे एक कार्बन है और चार

1:38:22

हाइड्रोजन एटम है। और यहां पर कार्बन और

1:38:24

हाइड्रोजन के बीच में इलेक्ट्रोनेगेटिविटी

1:38:26

का कोई बहुत ज्यादा डिफरेंस नहीं है। यहां

1:38:28

पर शेयर्ड पेयर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन एग्जैक्टली

1:38:30

सेंटर में होंगे। इसलिए मीथेन भी क्या

1:38:32

कहलाएगा? नॉन पोलर। ऑक्सीजन इज़ आल्सो नॉन

1:38:35

पोलर। हाइड्रोजन इज़ आल्सो नॉन पोलर। इवन

1:38:37

कार्बन डाइऑक्साइड इज़ आल्सो नॉन पोलर। सो

1:38:40

दीज़ ऑल आर द नॉन पोलर मॉलिक्यूल्स बिकॉज़

1:38:42

दे हैव अ नॉन पोलर कोवलेंट बॉन्ड्स।

1:38:47

बाला साहब CH3OH आप खुद बना कर देखें।

1:38:50

कार्बन और हाइड्रोजन में डिफरेंसेस कम है।

1:38:52

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का सिर्फ O और H के

1:38:54

अंदर इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का डिफरेंस है।

1:38:56

तो लिमिटेड बॉन्ड्स हैं वो पोलर है। बाकी

1:38:58

ज्यादातर बॉन्ड्स हैं नॉन पोलर हैं। ओवरऑल

1:39:00

नेचर हम मिथेनॉल को वाटर के कंपैरिजन में

1:39:03

नॉन पोलर कहेंगे।

1:39:07

चलो आगे बात करते हैं।

1:39:12

पोलरिटी को डिफाइन करने के लिए एक टर्म

1:39:14

इस्तेमाल की जाती है। दैट इज रेफर्ड टू एस

1:39:16

डपोल मोमेंट या μ से रिप्रेजेंट किया जाता

1:39:19

है। सो पोलार मॉलिक्यूल की पोलरिटी कितनी

1:39:22

है? पोलरिटी को रिप्रेजेंट करने के लिए वी

1:39:25

यूज़ अ टर्म रेफर टू एज डपोल मोमेंट। और

1:39:29

डपोल मोमेंट बहुत आसानी से डिफाइन किया जा

1:39:32

सकता है। डपोलर मोमेंट μ इज़ इज़

1:39:34

इक्विवेलेंट टू द प्रोडक्ट ऑफ इलेक्ट्रिक

1:39:37

चार्ज जो पार्शियल जो भी इस तरीके से

1:39:41

हमारा मॉलिक्यूल है। उसके ऊपर जो नेगेटिव

1:39:46

और पॉजिटिव चार्ज है उनका प्रोडक्ट कितना

1:39:48

है? दैट इज गिवन बाय E इंटू उनके बीच में

1:39:53

डिस्टेंस कितनी है? D ये दोनों मिलकर इसे

1:39:56

डपोल मोमेंट कहा जाता है। अभी इतना ही

1:40:00

बहुत है हमारे डपोल मोमेंट क्या काम की

1:40:02

चीज है? तो डपोल मोमेंट से हम पता कर सकते

1:40:06

हैं कि मॉलिक्यूल्स की पोलरिटी कितनी है।

1:40:08

जितनी ज्यादा डपोल मोमेंट उतनी ही पोलर

1:40:11

कोवलेंट बॉन्ड्स का कररेक्टर ज्यादा होगा।

1:40:13

सो पोलरिटी को मेजर करने के लिए एक टर्म

1:40:16

इस्तेमाल की जाती है और उस टर्म का नाम है

1:40:18

डायपोल मोमेंट। और आप नोट डाउन कर सकते

1:40:19

हैं। डपोल मोमेंट क्या है? इट इज द

1:40:22

प्रोडक्ट ऑफ इलेक्ट्रिक चार्ज इन ईएसuय

1:40:25

एंड अ डिस्टेंस बिटवीन दीज़ चार्ज। और वी

1:40:28

कैन से अ डिस्टेंस बिटवीन अ बॉन्ड

1:40:30

डिस्टेंस व्हिच व्हिच इज़ बिटवीन दीज़ टू

1:40:32

एटम्स।

1:40:34

दैट इज़ बिटवीन अ पॉज़िटिव एंड नेगेटिव

1:40:36

सेंटर्स।

1:40:40

देन कमिंग टू द पॉइंट व्हाट वी मीन बाय

1:40:43

बॉन्ड स्ट्रेंथ।

1:40:46

सो बॉन्ड स्ट्रेंथ कैन बी डिफाइंड एज द

1:40:51

अमाउंट ऑफ

1:40:54

एनर्जी

1:40:56

रिक्वायर्ड

1:40:59

टू ब्रेक

1:41:03

बॉन्ड। उसे बॉन्ड स्ट्रेंथ कहा जाएगा।

1:41:06

सो जैसे हाइड्रोजन और हाइड्रोजन के बीच

1:41:10

में कोई कोवेंट बॉन्ड है। अगर इसको हमें

1:41:12

डिसोसिएट करना है, बॉन्ड को ब्रेक करना है

1:41:14

तो डेफिनेटली वी हैव टू गिव एन सम एनर्जी

1:41:17

फ्रॉम आउटसाइड एंड द एनर्जी व्हिच इज़ गिवन

1:41:19

फ्रॉम आउटसाइड। द एनर्जी व्हिच इज़

1:41:20

एब्जॉर्ब

1:41:22

व्हिच इज़ यूटिलाइज़ टू ब्रेक द बॉन्ड। दैट

1:41:25

एनर्जी इज़ रेफर्ड टू ऐज़ दैट एनर्जी

1:41:28

रिफ्लेक्ट्स द बॉन्ड स्ट्रेंथ। अगर बहुत

1:41:32

बाहर से बहुत ज्यादा एनर्जी देनी पड़ रही

1:41:34

है बॉन्ड को तोड़ने के लिए तो हम कहेंगे

1:41:36

कि बॉन्ड स्ट्रेंथ ज्यादा है। तो जब बॉन्ड

1:41:40

फॉर्म हो रहा है उस दौरान सेम एनर्जी है

1:41:43

वापस रिलीज होगी।

1:41:46

सो बॉन्ड स्ट्रेंथ बेसिकली इट इज़ मेजर

1:41:49

जिससे ये पता चलता है कि दो एटम्स कितने

1:41:52

स्ट्रोंगली एक दूसरे के साथ हेल्ड हो रहे

1:41:54

हैं। इसको इस तरीके से भी डिफाइन कर सकते

1:41:56

हैं कि दिस इज़ द अमाउंट ऑफ़ एन एनर्जी

1:41:58

व्हिच इज़ एब्जॉर्ड बाय अ मॉलिक्यूल। सो

1:42:00

दैट इट बॉन्ड्स कैन ब्रेक।

1:42:07

गुड इवनिंग हर्षिता।

1:42:11

कुछ इंपॉर्टेंट एटम्स

1:42:14

की बॉन्ड एनर्जी यहां पर टेबल में

1:42:17

रिप्रेजेंट की गई है। सल्फर और सल्फर के

1:42:20

बीच में 214

1:42:23

कार्बन-कार्बन के बीच में 350, कार्बन और

1:42:26

ऑक्सीजन के बीच में 350, OH के बीच में

1:42:30

461। एक ट्रेंड आप आसानी से देख सकते हैं

1:42:33

कि सिंगल बॉन्ड के कंपैरिजन में डबल बॉन्ड

1:42:36

में ज्यादा एनर्जी है। डबल बॉन्ड से भी

1:42:38

ज्यादा एनर्जी ट्रिपल बॉन्ड में। ओके? सो

1:42:41

कार्बन कार्बन सिंगल बॉन्ड में एनर्जी 350

1:42:44

है। बॉन्ड एनर्जी को किलोजूल पर मोल में

1:42:47

यहां पर रिप्रेजेंट किया गया है। तो

1:42:48

कार्बन कार्बन डबल बॉन्ड के अंदर जो बॉन्ड

1:42:51

एनर्जी है वो इसका डबल होकर

1:42:54

700 नहीं है बल्कि उससे कम है। ये 611

1:42:57

kjूल/ मोल। क्योंकि हमने कहा कि पहला

1:42:59

बॉन्ड है वो सिग्मा बॉन्ड होता है। सेकंड

1:43:01

बॉन्ड है वह पाई होता है। और कार्बन और

1:43:04

कार्बन के बीच में ट्रिपल बॉन्ड होने पर

1:43:05

एनर्जी ट्रिपल नहीं हो गई है। इट इज़

1:43:07

अराउंड 86 kjूल पर मोल। सो बट वन थिंग इज़

1:43:11

मोर क्लियर कि सिंगल बॉन्ड से ज्यादा

1:43:12

एनर्जी डबल बॉन्ड में। डबल बॉन्ड से भी

1:43:14

ज्यादा एनर्जी ट्रिपल बॉन्ड में होती है।

1:43:17

और दूसरा इस टेबल में एक ट्रेंड और देख

1:43:20

सकते हैं कि स्मॉल एटम्स है जैसे

1:43:22

हाइड्रोजन और हाइड्रोजन।

1:43:26

उसके बीच में एनर्जी ज्यादा है एज कंपेयर

1:43:31

टू इफ यू लुक एट कार्बन एंड कार्बन

1:43:35

हाइड्रोजन और हाइड्रोजन के बीच में 436 kज

1:43:38

है और कार्बन और कार्बन के बीच में 350 सो

1:43:42

कल भी हम बात कर रहे थे जितने ज्यादा

1:43:44

स्ट्रांग एटम्स होंगे वहां पर

1:43:48

बॉन्डिंग

1:43:49

ज्यादा होगी क्योंकि सरफेस एरिया टू

1:43:52

वॉल्यूम रेशियो ज्यादा होता है।

1:44:00

उसके बाद एक और चीज भी आप देख सकते हैं कि

1:44:04

कार्बन कार्बन

1:44:08

के बीच में जो बॉन्ड एनर्जी है वह 350 है।

1:44:13

जबकि

1:44:15

ऑक्सीजन और हाइड्रोजन के बीच में 461 है।

1:44:19

दैट इज इन जनरल हम कह सकते हैं पोलार

1:44:24

कोवेंट बॉन्ड में स्ट्रेंथ कंपेरेटिवली

1:44:26

ज्यादा होती है क्योंकि उसमें थोड़ा आयनिक

1:44:28

नेचर भी होता है एज़ कंपेयर टू अ नॉन पोलर

1:44:32

कोवलेंट बॉन्ड।

1:44:34

ओके? सो दोेंट फैक्टर हो गए। एक साइज़ जो

1:44:37

मेजर डिटरर्मिनेंट है। जितनी स्मॉल साइज़

1:44:39

कोवलेंट बॉन्ड की एनर्जी उतनी ज्यादा

1:44:41

होगी। अगर सिमिलर साइज के दो एटम्स हैं

1:44:43

जिनके बीच में बॉन्ड हो रहा है। ऑलमोस्ट

1:44:44

सिमिलर साइज के एटम्स हैं तो फिर पोलरिटी

1:44:47

वाला कांसेप्ट भी वहां पर आएगा।

1:44:52

देन तो ये बातें थी हमारी कोवलेंट बॉन्ड्स

1:44:55

के बारे में।

1:44:58

तो बॉन्ड एनर्जी की अगर हम बात करें

1:45:02

एवरेज थर्मल मोशन में जो एनर्जी होती है

1:45:05

दैट इज़ ऑल लेसर देन वन। कल हम डिस्कस करने

1:45:09

वाले हैं कई सारे नॉन कोवलेंट बॉन्ड्स और

1:45:11

नॉन कोवलेंट बॉन्ड्स की एनर्जी 10 किलो

1:45:13

कैलोरी पर मोल से कम होती है। एटीपी

1:45:17

हाइड्रोलाइसिस में जो बॉन्ड एनर्जी मिलती

1:45:19

है वो 7.2 से लेकर 12 किलो कैलोरी के बीच

1:45:22

में रिलीज होगी। कल हम इसके बारे में भी

1:45:23

डिस्कस करेंगे। कार्बन कार्बन के बीच में

1:45:26

जो बॉन्ड है एनर्जी आ रही है किलो कैलोरीज

1:45:27

में बात करें तो दैट विल कम आउट टू बी

1:45:29

अराउंड 80 और कंप्लीट ग्लूकोस का

1:45:31

ऑक्सीडेशन करने पर जो एनर्जी निकल कर आएगी

1:45:33

दैट वुड बी 686 किलो कैलोरी। सो जितने

1:45:38

ज्यादा बॉन्ड

1:45:40

उतनी ज्यादा एनर्जी होगी और जितने ज्यादा

1:45:43

स्ट्रंगर बॉन्ड उतनी ही ज्यादा एनर्जी

1:45:45

लिबरेट होगी।

1:45:50

बायोफे दो कांसेप्ट अलग-अलग है।

1:45:54

स्मॉलर साइज

1:45:56

और लार्जर साइज में से स्मॉलर साइज जो

1:45:58

एटम्स हैं उनके अंदर स्ट्रांग बॉन्डिंग

1:46:02

होती है। और पोलार और नॉन पोलर कोवेंट

1:46:06

बॉन्ड है। जहां पर अब साइज को हम वेरीरी

1:46:07

ना करें या साइज में वेरिएशन बहुत

1:46:09

नेग्लिजिबल हो। तो वहां पर देखेंगे जहां

1:46:10

पर थोड़ा पोलर कररेक्टर है उसकी थोड़ी बॉन्ड

1:46:13

स्ट्रेंथ ज्यादा होती है। आउट ऑफ़ दीज़ टू

1:46:16

फर्स्ट प्रेफरेंस वुड बी गिवन टू द

1:46:18

साइड्स।

1:46:19

ओके

1:46:22

करिश्मा

1:46:25

ओके

1:46:29

यस अंजलि एवरेज एनर्जी इज़ मोर इन अ सिंगल

1:46:32

बॉन्ड। यस दैट वी कैन से

1:46:35

चलो यह बात हुई अब तक की बॉन्डिंग के बारे

1:46:38

में।

1:46:40

जो अब तक हमने पढ़ा थोड़ा सा दिमाग लगाकर

1:46:43

बताओ कि इनमें से कौन सा बॉन्ड तोड़ना

1:46:47

मुश्किल होगा।

1:46:49

अप्लाई योर माइंड

1:46:52

जो अब तक पढ़ा

1:46:54

उसको इस्तेमाल करते हुए अपना दिमाग लगाओ।

1:46:58

व्हिच ऑफ द फॉलोइंग बॉन्ड वुड बी मोस्ट

1:47:00

डिफिकल्ट टू ब्रेक?

1:47:10

जो जी सिंगल बॉन्ड के कंप्रेशन डबल बॉन्ड

1:47:13

में ज्यादा एनर्जी होती है। हम ये नहीं कह

1:47:15

रहे हैं पर हम ये नहीं कह रहे हैं ऑलमोस्ट

1:47:16

डबल नहीं होती। डबल इसलिए नहीं होती

1:47:18

क्योंकि

1:47:20

वहां पर पहली जो ओवरलैपिंग होगी वह हेड टू

1:47:24

हेड होगी। सिग्मा बॉन्ड होगा। बाद में

1:47:25

साइड बाय साइड ओवरलैपिंग होगी। पाई

1:47:27

ऑर्बिटल्स इनवॉल्व होंगे जहां पर इतनी

1:47:29

एनर्जी नहीं आ पाएगी। चलो इसका आंसर बताओ।

1:47:32

देखो यहां पर एक क्राइटेरिया तो बिल्कुल

1:47:34

फिक्स है कि कार्बन कार्बन कार्बन कार्बन

1:47:37

सभी जगह पर है

1:47:39

और दूसरी जगह पर जो एटम्स हैं ये बड़ी

1:47:41

साइज का है तो ये तो आंसर होने से रहा।

1:47:45

ऑक्सीजन कार्बन और नाइट्रोजन के एटम की

1:47:48

साइज में कोई बहुत ज्यादा डिफरेंस नहीं

1:47:50

है। तो अब हम यहां पर ये कांसेप्ट लगाएंगे

1:47:53

कि जब डिफरेंस में ज्यादा डिफरेंस जब साइज

1:47:55

में ज्यादा डिफरेंस नहीं है तो हमें क्या

1:47:57

देखना पड़ेगा?

1:47:59

हमें देखना पड़ेगा कि दिस इज़ अ पोलर

1:48:03

कोवलेंट बॉन्ड एंड दिस इज़ अ नॉन पोलर। एंड

1:48:07

द डिफरेंस इन साइज ऑफ़ ऑक्सीजन एंड कार्बन

1:48:10

कोई बहुत ज्यादा नहीं है। तो लॉजिकली

1:48:13

आंसर फर्स्ट और वन और टू में से कुछ होना

1:48:18

चाहिए।

1:48:20

ये नहीं होगा। ये नहीं होगा।

1:48:23

फर्स्ट आंसर दे रहे हैं तो वो यह देते हुए

1:48:26

दे रहे हैं कि कार्बन और ऑक्सीजन के बीच

1:48:30

में कोवेंट बॉन्ड पोलर है। सेकंड जो आंसर

1:48:33

दे रहे हैं वो ये देखते हुए दे रहे हैं कि

1:48:34

दोनों तरफ कार्बन एटम है उनकी साइज स्मॉल

1:48:38

है।

1:48:41

और सही आंसर क्या है? अब क्या चूज़ करें?

1:48:45

इस कंडीशन में आप पता लेंगे तो पता लगेगा

1:48:47

C और O के बीच में भी बॉन्ड एनर्जी 350 है

1:48:50

और इसमें भी 350 किलJ पर मोल है। सो आंसर

1:48:53

डियर स्टूडेंट्स

1:48:55

होना चाहिए वन एंड टू बोथ। तो जिन्होंने

1:48:58

वन कहा वह भी सही है। जिन्होंने टू कहा वह

1:49:01

भी सही है। पर इन दोनों में से अगर आपको

1:49:04

एक ही आंसर चूज़ करना है, देन यू मस्ट गो

1:49:07

विद अ फर्स्ट चॉइस दैट कंपेरेटिवली पोलर

1:49:09

कोवलेंट बॉन्ड्स दे आर हैविंग अ मोर

1:49:11

एनर्जी एज़ कंपेयर टू अ नॉन पोलर कोवलेंट

1:49:13

बॉन्ड। सो अदरवाइज अगर आप पता करेंगे

1:49:18

एनर्जी के हिसाब से तो कार्बन ऑक्सीजन के

1:49:20

बीच में बॉन्ड एनर्जी अगर हम यहां पर

1:49:22

देखें टेबल के अंदर कार्बन और ऑक्सीजन के

1:49:24

बीच में बॉन्ड एनर्जी कितनी थी? 350 किJ

1:49:27

पर मोल। कार्बन और कार्बन के बीच में

1:49:29

बॉन्ड एनर्जी कितनी है? 350 किJ पर मोल।

1:49:32

दोनों के अंदर बॉन्ड एनर्जी बराबर है। तो

1:49:34

मेरे हिसाब से तो वन एंड टू दोनों ही आंसर

1:49:37

होने चाहिए क्योंकि यहां पर एनर्जी लगभग

1:49:39

सेम है। बट हमें इन दोनों में से एक ही

1:49:41

आंसर अगर चूज़ करना है तो स्लाइट लिटिल बिट

1:49:44

मोर एनर्जी यू कैन फाइंड आउट बिटवीन अ

1:49:46

कार्बन एंड ऑक्सीजन। जैसे देव मिश्रा कह

1:49:48

रहे हैं कि क्योंकि कार्बन और ऑक्सीजन है

1:49:50

वह पोलार है। चलो एक और दिमाग लगाओ। यह

1:49:55

क्वेश्चन दिसंबर में आया हुआ है। इस

1:49:57

क्वेश्चन

1:50:00

पर अपना दिमाग लगाओ।

1:50:11

ठीक है यूंका आपका आंसर सही है प्रजक्ता

1:50:13

बिल्कुल सही बात है बायोफे सीओ हैव हायर

1:50:17

ओके ठीक है

1:50:22

अब इस क्वेश्चन पर दिमाग लगाएं आप

1:50:52

सो चलो एक-एक कर हम स्टेटमेंट पढ़ते हैं।

1:50:59

पहला स्टेटमेंट

1:51:02

हाइड्रोजन ड्यूटेरियम ट्रिटियम डिफर इन द

1:51:05

नंबर ऑफ प्रोटॉन्स। नो दे आर द फॉर्म ऑफ

1:51:08

सेम एटम्स तो नंबर ऑफ प्रोटॉन्स वुड बी

1:51:12

सेम ए स्टेटमेंट नहीं हो सकता ए स्टेटमेंट

1:51:15

नहीं हो सकता बी स्टेटमेंट हाइड्रोजन

1:51:20

ड्यूटेरियम ट्रिटियम डिफर इन नंबर ऑफ

1:51:21

न्यूट्रॉन्स यस बिकॉज़ हाइड्रोजन

1:51:23

ड्यूटेरियम एंड ट्रिटियम दे आर आइसोटोप्स

1:51:28

सी स्टेटमेंट बोथ ड्यूटेरियम एंड ट्रिटियम

1:51:31

आर रेडियोएक्टिव नहीं कल हमने देखा था कि

1:51:34

रेडियोएक्टिव तब होंगे जब वहां वहां पर

1:51:36

न्यूक्लियों्स डिसक्लिब्रियम में होंगे।

1:51:40

सो ड्यूटेरियम इज़ नॉट रेडियोएक्टिव। सी

1:51:43

स्टेटमेंट भी बाहर चला गया और सी

1:51:45

स्टेटमेंट बाहर चला गया। तो पीछे एक ही

1:51:47

आंसर बचा। चलो उसको भी पढ़ते हैं। ट्रिटियम

1:51:49

इज़ रेडियोएक्टिव एंड डीके टू हीलियम। यस।

1:51:51

कल ही हमने बात किया था कि 3H1 उससे बीटा

1:51:54

डीके होता है। तो इट गेट करंट टू हीलियम

1:51:56

32 बीटा पार्टिकल्स का एमिशन होता है।

1:52:00

प्लस हमने कहा था एंटी न्यूट्रिनो रिलीज

1:52:03

होगा।

1:52:06

कार्बन 14 डीके टू नाइट्रोजन 14 यस ये कल

1:52:09

हमने बात की थी C14 डीके * अ नाइट्रोजन 14

1:52:14

+ 1 बीटा पार्टिकल इज़ एमिटेड ये भी हमने

1:52:17

कल बात की थी कार्बन4 डीके इंटू कार्बन 13

1:52:21

नो इट इज़ फॉल्स सो करेक्ट स्टेटमेंट इज़ बी

1:52:24

डी एंड ई वेरी गुड सोनाली स्मृति ठाकुर

1:52:28

रानी शेख वेरी गुड कावेरी वेरी गुड रेनू

1:52:31

वर्मा वेरी गुड ओम प्रकाश वेरी गुड रानी

1:52:34

शेख टू करेक्ट वेरी गुड सुषमा पटेल वेरी

1:52:36

गुड तमीमा शेख वेरी गुड भाग्यश्री वेरी

1:52:39

गुड पूजा वेरी गुड सोनाली दास वेरी गुड

1:52:44

वेरी गुड वेरी गुड वेरी गुड तो समझ में

1:52:48

आया मतलब इस जो अब तक पढ़ा है इससे भी

1:52:50

हमारे क्वेश्चंस आते हैं ऐसा नहीं है कि

1:52:51

इससे क्वेश्चंस नहीं आते करिश्मा शर्मा

1:52:53

वेरी गुड मोहम्मद आरिफ वेरी गुड

1:53:02

चलो एक और क्वेश्चन पर अपना दिमाग लगाओ।

1:53:15

ये अकॉर्डिंग टू कूलम्स लॉ टू पॉइंट

1:53:18

चार्जेस आर 5.5 एंगस्ट्रोम अ पार्ट इन

1:53:21

वैक्यूम वुड इंटरेक्ट गिव राइज़ टू एनर्जी

1:53:24

ऑफ़ 60 किलो कैलोरी पर मोल। द एनर्जी ऑफ

1:53:26

इंटरेक्शन ऑफ़ सेम सिस्टम इन अ वाटर वुड बी

1:53:29

गिवन दैट डइलेक्ट्रिक कांस्टेंट ऑफ वाटर

1:53:31

इज़ AT चलो इसको ट्राई करो।

1:53:35

हां विकास वेरी गुड आपने अच्छा दिया जवाब

1:53:39

आर एच फैक्टर वेरी गुड स्वप्नल वेरी गुड

1:53:42

गोलू यादव क्यों कंफ्यूज हो गए? किस

1:53:45

स्टेटमेंट में कंफ्यूज हुए? शुभश्री

1:53:47

चटर्जी वेरी गुड। अब इस क्वेश्चन को हमें

1:53:49

सॉल्व करना है। कूलम्स लॉ क्या कहता है?

1:53:53

कूलम्स लॉ के हिसाब से हमने कहा कि एनर्जी

1:53:56

ऑफ इंटरेक्शन डिपेंड अपॉन KQ1

1:54:00

Q2

1:54:02

R D

1:54:04

पहले कहा गया कि ये पॉइंट चार्जेस कहां पर

1:54:07

रखे गए थे?

1:54:09

वैक्यूम में। वैक्यूम का मतलब D की वैल्यू

1:54:12

कितनी है?

1:54:14

वन। सो एनर्जी कितनी है? इन सब से मिलाकर

1:54:20

एनर्जी कितनी आ रही है? 60 किलो कैलोरी।

1:54:23

व्हेन द वैल्यू ऑफ़ Q, K, Q1, Q2, K, Q1,

1:54:27

Q2 आर इनकी वैल्यू को हम कुछ प्लेस करें

1:54:30

और d की जगह पर हम वैल्यू को वन प्लेस

1:54:32

करें। ओके? सो एनर्जी इज़ इक्वल टू हम ये

1:54:35

भी कह सकते हैं 60। D की वैल्यू हम यहां

1:54:38

पर वन रखें।

1:54:41

सो, K, Q1, Q2 R की वजह से वैल्यू कितनी आ

1:54:45

रही है? 60 और D की वैल्यू है वन।

1:54:50

अब कहा है कि व्हाट वुड द एनर्जी व्हेन द

1:54:54

सेम इज प्लेस्ड इन अ वाटर?

1:54:57

तो अब

1:55:00

क्योंकि एनर्जी और डइलेक्टिक कांस्टेंट

1:55:03

में इनवर्स रिलेशनशिप होती है।

1:55:06

जितना डइलेक्टिक कांस्टेंट बढ़ेगा उतनी ही

1:55:09

एनर्जी कम होती जाएगी।

1:55:13

तो

1:55:15

डइलेक्टिक कांस्टेंट कितना हो गया है?

1:55:19

वन की जगह पर और एनर्जी और डइलेक्टिक

1:55:23

कांस्टेंट में रिलेशनशिप कैसी है? इनवर्स।

1:55:26

मतलब अब

1:55:28

60 की बजाय वन की बजाय अब वैल्यू कितनी

1:55:32

रखी जाएगी? 80 और 80 रखते ही हमारे पास

1:55:34

आंसर कितना हो जाएगा? 0.75

1:55:37

किलो कैलोरी पर मोल।

1:55:41

सो डिअ स्टूडेंट्स डइलेक्टिक कांस्टेंट और

1:55:44

एनर्जी में इनवर्स रिलेशनशिप होता है।

1:55:48

यस वेरी गुड वेरी गुड आशा अंजलि वेरी गुड

1:55:51

आकाश वेरी गुड पंकज वेरी गुड नेहा वेरी

1:55:54

गुड यश शर्मा वेरी गुड विक्रम वेरी गुड यू

1:55:57

लें वेरी गुड युवराज सिंह वेरी गुड

1:55:59

दुष्यंत यादव वेरी गुड वेरी गुड

1:56:05

समझ में आया ना ये बात

1:56:08

मैं क्या कह रहा हूं कि जैसे-जैसे

1:56:09

डइलेक्टिक कांस्टेंट की वैल्यू बढ़ेगी

1:56:12

वैसे-वैसे स्ट्रेंथ ऑफ इंटरेक्शन कम होगी।

1:56:14

हम पढ़ रहे थे ना आयनिक बॉन्ड्स के अंदर

1:56:15

कि अगर मीडियम का डइलेक्टिक्रिक कांस्टेंट

1:56:17

ज्यादा होगा तो फिर उस कंडीशन के अंदर जो

1:56:20

सॉल्ट है वह आसानी से वाटर में डिॉल्व हो

1:56:23

जाएगा।

1:56:25

वहां पर आयनिक बॉन्ड की स्ट्रेंथ नेगिजिबल

1:56:28

होगी। ट्रू आयनिक बॉन्ड्स वहां पर फॉर्म

1:56:29

नहीं हो पाएंगे। वेरी गुड रोही

1:56:36

मीर इरशाद वेरी गुड। चलो आपको समझ में आया

1:56:39

तो बिल्कुल सेम कांसेप्ट पर ये दिसंबर

1:56:41

2013 में आया था। ये क्वेश्चन दिसंबर 2019

1:56:45

में आया था। सेम कांसेप्ट पर क्वेश्चन।

1:56:50

चलो अब इसको पता करके बताओ।

1:56:54

दिसंबर 2019 में ये क्वेश्चन आया है।

1:56:59

इसको ट्राई करो।

1:57:10

D वैल्यू वैक्यूम के लिए या एयर के लिए वन

1:57:13

होती है।

1:57:15

यस आदिल बिल्कुल सही बात है।

1:57:20

आई एग्री विद यू आदिल।

1:57:23

चलो इसको ट्राई करो। सेम कासेप्ट पर ये

1:57:24

क्वेश्चन है। फटाफट फटाफट आंसर दो।

1:57:42

द क्वेश्चन इज़ द इंटरेक्शन एनर्जी बिटवीन

1:57:46

टू ऑोजिट चार्ज सेपरेट बाय थ्री एंगस्ट्रो

1:57:48

वैक्यूम इज़ 50 kjूल पर मोल। यानी वापस

1:57:50

एनर्जी की बात की गई है। KQ1 Q2 R² D और

1:57:56

वो अभी कब? वैक्यूम के अंदर। तो वैक्यूम

1:58:00

के अंदर एनर्जी कितनी आ रही है? 500 जब d

1:58:04

की वैल्यू को हम कितना रख रहे हैं? वन। सो

1:58:06

500 को वन से डिवाइड भी करेंगे तो दैट विल

1:58:08

कम आउट टू बी 500। यानी इन सब पैराटर्स की

1:58:11

वजह से एनर्जी कितनी आ रही है? 500। एंड

1:58:14

इफ 500 बाय वन इट कम्स आउट टू बी 500।

1:58:17

यानी द कंट्रीब्यूशन

1:58:20

ड्यू टू K Q1 Q2 R इज 500 एंड वंस इट

1:58:24

डिवाइड बाय वन द वैल्यू विल रिमेन 500 बट

1:58:27

व्हाट विल हैपन व्हेन दिस इज़ ट्रांसफर टू

1:58:30

अ वाटर

1:58:32

ध्यान बस यहां पर अभी आपको याद होना चाहिए

1:58:34

वाटर का डइलेक्टिक कांस्टेंट वैल्यू कितनी

1:58:36

है? 80 ये यहां पर क्वेश्चन में नहीं दे

1:58:38

रखी थी। ये क्योंकि ये बहुत ज्यादा कॉमन

1:58:40

चीज़ है। द डइलेक्टिक्रिक कांस्टेंट ऑफ़

1:58:41

वाटर इज़

1:58:43

80। तो अब हमें क्या करना है? एनर्जी को

1:58:46

वाटर की प्रेजेंस में निकालना है। तो वाटर

1:58:47

पहले तो हमने डइलेक्टिक्रिक कांस्टेंट की

1:58:49

वैल्यू वैक्यूम वाली रखी। अब हमें

1:58:51

डइलेक्टिक कास्टेंट 500 की नीचे

1:58:52

डइलेक्टिक्र कांस्टेंट वैल्यू किसकी रखनी

1:58:54

चाहिए? वाटर की। और डइलेक्टिक कांस्टेंट

1:58:56

की वैल्यू वाटर की कितनी है? 80

1:59:00

और इसको हमने डिवाइड किया तो हमारे पास

1:59:04

लगभग

1:59:06

6

1:59:09

किलोजूल पर मोल के आसपास एनर्जी आई। आंसर

1:59:13

वुड बी फोर। यस वेरी गुड वेरी गुड प्रीतम

1:59:15

वेरी गुड पिंटू देव मिश्रा वेरी गुड

1:59:17

दुष्यंत वेरी गुड परमेश्वर वेरी गुड

1:59:22

जेम्स बोंड वेरी गुड दुष्यंत गुड गुड

1:59:24

सोनाली वेरी गुड कृष्णा वेरी गुड विकास

1:59:28

वेरी गुड सबका आंसर फोर आ रहा है ना

1:59:30

कांसेप्ट समझ में आ गया ना कि वैक्यूम के

1:59:32

कंपैरिजन में वाटर

1:59:36

जब मीडियम हो तो आयनिक बॉन्ड की स्ट्रेंथ

1:59:39

80 टाइम रिड्यूस हो जाती है। जो भी

1:59:41

स्ट्रेंथ वैक्यूम में होगी या एयर में

1:59:43

होगी उसके कंपैरिजन में आयनिक बॉन्ड की

1:59:46

स्ट्रेंथ वाटर में 80 टाइम्स कम होगी।

1:59:51

यस अंजलि वेरी गुड

1:59:55

वेरी गुड शास्त्री कविता वेरी गुड प्रज्ञा

1:59:58

वेरी गुड बायो कैफे वेरी गुड शाबाश इसी

2:00:02

तरीके से पढ़ते रहें यस आदिल वेरी गुड

2:00:04

शाबाश

2:00:08

कृष्णा आ गया गुड गुड वेरी गुड

2:00:15

चलो अब यह क्वेश्चन आउट ऑफ द बॉक्स है अब

2:00:18

तक जो

2:00:21

हमने पढ़ा है

2:00:24

उससे थोड़ी बाहर की चीज है

2:00:28

जिसको हम आगे डिस्कस करेंगे लेकिन क्या

2:00:31

फिर भी आप अपना दिमाग लगाकर इस क्वेश्चन

2:00:33

को सॉल्व कर सकते हैं

2:00:36

कृष्णा कल का टाइम शाम को 4:00 बजे है। हम

2:00:38

कल से क्लासेस 4:00 बजे ही स्टार्ट करेंगे

2:00:40

क्योंकि इस दौरान अब मैं कुछ कहना नहीं

2:00:42

चाहूं लेकिन बफरिंग की समस्या कम होती है

2:00:45

क्योंकि जैसे मैं बफरिंग की बात करता हूं

2:00:47

कई लोग कहने लग जाते हैं बफरिंग आ रही है।

2:00:51

थैंक यू प्राजक्ता।

2:00:55

दिस इज़ आउट ऑफ बॉक्स।

2:00:57

यहां पर कहा गया है द फ्री एनर्जी ऑफ अ

2:01:00

डिजॉल्वड सॉल्यूट

2:01:02

विल इंक्रीज विद अ सॉल्यूट कंसंट्रेशन

2:01:06

डिक्रीज विद अ सॉल्यूट कंसंट्रेशन इज़

2:01:08

इंडिपेंडेंट ऑफ अ सॉल्यूट कंसंट्रेशन

2:01:10

डिपेंड्स ओनली ऑन अ टेंपरेचर

2:01:19

ठीक है युवलियंका वन शायद आकाश ने कहा दो

2:01:23

होना चाहिए रूही गुप्ता ने कहा वन पूजा ने

2:01:25

कहा दो प्रीतम ने का दो

2:01:29

फ्री एनर्जी इज द एनर्जी व्हिच इज़ अवेलेबल

2:01:33

टू डू वर्क। और किसी भी चीज की कंसंट्रेशन

2:01:37

बढ़ाते जाएं तो उस मॉलिक्यूल उस सॉल्यूट की

2:01:41

कैपेबिलिटी टू डू वर्क बढ़ेगी या घटेगी?

2:01:45

सिर्फ इतना सा दिमाग लगाओ।

2:01:47

व्हाट इज़ फ्री एनर्जी? फ्री एनर्जी इज़

2:01:50

कैपेबिलिटी टू डू वर्क। सो सॉल्यूट जो

2:01:54

हमने ऐड किए उस सॉल्यूट की कुछ ना कुछ

2:01:57

एबिलिटी होगी काम करने की। और जैसे-जैसे

2:02:01

सॉल्यूट की कंसंट्रेशन बढ़ाएंगे उसकी

2:02:02

एबिलिटी घटेगी या बढ़ेगी काम करने की।

2:02:09

इट इज़ टॉकिंग अबाउट द फ्री एनर्जी ऑफ़

2:02:12

डिॉल्व्ड सॉल्यूट। वाटर की बात नहीं कर

2:02:14

रहा है। सॉल्यूट की फ्री एनर्जी में क्या

2:02:17

चेंज आएगा? जैसे-जैसे सॉल्यूट की

2:02:18

कंसंट्रेशन को बढ़ाएंगे। अगर सॉल्यूट की

2:02:20

कंसंट्रेशन बढ़ाते हैं तो क्या सॉल्यूट के

2:02:23

काम करने की एबिलिटी बढ़ेगी या घटेगी?

2:02:32

सो व्हेनएवर यू इंक्रीस द कंसंट्रेशन ऑफ़

2:02:35

सॉल्यूट

2:02:37

सॉल्यूट की कंसंट्रेशन क्योंकि बढ़ती जा

2:02:39

रही है। इसलिए सॉल्यूट

2:02:42

मतलब किसी की भी कंसंट्रेशन अगर एयर की

2:02:45

अमाउंट को बढ़ा दिया तो एयर की एबिलिटी

2:02:47

बढ़ जाएगी। वाटर की कंसंट्रेशन को बढ़ा

2:02:49

दिया तो वाटर की एबिलिटी काम करने की बढ़

2:02:51

जाती है। ऐसे ही सॉल्यूट की कंसंट्रेशन को

2:02:53

रेज करोगे तो सॉल्यूट की कंसंट्रेशन रेज

2:02:55

करने पर उसकी आपकी खुद की कंसंट्रेशन बढ़ा

2:02:58

दी जाए तो आपकी एबिलिटी घटेगी कि बढ़ेगी

2:03:01

काम करने की।

2:03:07

आप समझ नहीं रहे एक छोटी सी बात कि अगर

2:03:10

किसी भी

2:03:12

आयन मॉलिक्यूल ऑब्जेक्ट की कंसंट्रेशन को

2:03:16

रेज करो तो उसकी कंसंट्रेशन बढ़ाने पर

2:03:18

उसकी एनर्जी कम कैसे होगी मुझे ये समझाओ

2:03:21

ना सब लोग कह रहे हैं डिक्रीज डिक्रीज

2:03:23

डिक्रीज व्हाई इट विल डिक्रीज

2:03:28

मैं सॉल्यूट प्लस वाटर यानी पूरे सॉल्यूशन

2:03:33

की बात नहीं कर रहा हूं

2:03:34

ज्यादातर लोग ये दिमाग लगा रहे हैं कि

2:03:36

क्योंकि सॉल्ट है वह वाटर में डिॉल्व हो

2:03:39

गया। प्रोसेस स्पॉनटेनियस हो गया। इसलिए

2:03:42

फ्री एनर्जी है वह घट गई। नहीं मैं ये

2:03:44

नहीं कह रहा हूं कि सॉल्यूशन की फ्री

2:03:46

एनर्जी क्या होगी? आई एम नॉट आस्किंग द

2:03:50

फ्री एनर्जी ऑफ़ सॉल्यूशन। आई एम आस्किंग द

2:03:53

फ्री एनर्जी ऑफ़ सॉल्यूट। द फ्री एनर्जी ऑफ़

2:03:56

डिॉल्वड सॉल्यूट।

2:04:02

सो अभी नहीं समझ में आया तो आगे समझ में आ

2:04:04

जाएगा। लेकिन अभी हम इसके बारे में यह कह

2:04:06

सकते हैं कि इट विल इंक्रीज विद द सॉल्यूट

2:04:08

कंसंट्रेशन। हम वापस सॉल्यूशन की बात नहीं

2:04:10

कर रहे हैं। हम यहां पर सिर्फ सॉल्यूट की

2:04:12

बात कर रहे हैं। ठीक है? तो ध्यान से

2:04:14

देखें कि किसके बारे में बात की गई है।

2:04:16

डिॉल्व सॉल्यूट के बारे में बात की गई है।

2:04:21

सो

2:04:24

अब चलो ये एक लास्ट क्वेश्चन आप ट्राई

2:04:27

करो।

2:04:29

दिस इज बेस्ड अपॉन अ वेरी सिंपल कांसेप्ट

2:04:32

लाइक डिॉल्व्स इन अ लाइक।

2:04:37

हां नेहा मैं समझ गया। ज्यादातर स्टूडेंट

2:04:39

एक्चुअली इसको गलत इसीलिए करते हैं

2:04:40

क्योंकि वो सोचते हैं कि सॉल्ट वाटर में

2:04:42

डिॉल्व हो गया इसलिए स्पॉनटेनियस है और

2:04:45

स्पॉनटेनियस है इसलिए फ्री एनर्जी नेगेटिव

2:04:47

होगी। पर यहां पर सॉल्यूशन की फ्री एनर्जी

2:04:48

की बात नहीं की गई थी। यहां पर सॉल्यूट के

2:04:50

फ्री एनर्जी की बात

2:04:53

की गई थी।

2:04:58

अब यहां पर चार डिफरेंट गैसेस है और यह

2:05:01

बताना है कि इन चार गैसेस में से उनका

2:05:04

सॉलीबिलिटी का ऑर्डर क्या होगा? लाइक

2:05:07

डिॉल्व्स इन लाइक आपको ये ध्यान में रखना

2:05:09

है कि इनमें से सबसे ज्यादा पोलर गैस कौन

2:05:10

सी है और नॉन पोलर गैस कौन सी?

2:05:14

जो पोलार गैस होगी वह सबसे ज्यादा

2:05:16

सॉलबलाइज होगी और जो सबसे ज्यादा नॉन

2:05:18

पोलार होगी वह सबसे कम सॉलबुलाइज होगी।

2:05:26

हां आदिल बिल्कुल यही मैं कह रहा था।

2:05:28

सिर्फ हम सॉल्यूट की बात करें

2:05:32

तो की बात करें। हम सॉल्यूशन के बारे में

2:05:33

दिमाग नहीं लगा। वेरी गुड। शाबाश। अब इसको

2:05:35

ट्राई करो।

2:05:40

सबसे पहले तो देखो

2:05:42

अमोनिया

2:05:44

या ऑक्सीजन

2:05:46

या सल्फर डाइऑक्साइड।

2:05:50

इनमें से ज्यादा सॉलबलाइज कौन होगा? तो

2:05:54

ऑब्वियसली ऑक्सीजन तो होने से रहा क्योंकि

2:05:56

ऑक्सीजन नॉन पोलर है। अभी हम देख चुके

2:05:59

हैं। ऑक्सीजन की सॉलीबिलिटी सबसे कम होगी।

2:06:01

इसलिए सेकंड ऑप्शन कट गया। SO2 भी नॉन

2:06:04

पोलर है इसलिए ऑप्शन भी कट गया। पीछे बचा।

2:06:06

अमोनिया सबसे ज्यादा सॉलीबल होगा। अमोनिया

2:06:08

सबसे ज्यादा सॉलीबल क्यों होगा? क्योंकि

2:06:09

अमोनिया के अंदर

2:06:11

बॉन्ड्स हैं वो नाइट्रोजन और हाइड्रोजन के

2:06:13

बीच में हैं। देयर इज़ अ डिफरेंस इन

2:06:14

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी। दैट्स व्हाई द

2:06:16

बॉन्ड्स आर पोलर कोवलेंट बॉन्ड।

2:06:20

सो अमोनिया सबसे ज्यादा पोलार इसलिए

2:06:23

सॉलीबलाइज सबसे ज्यादा ऑक्सीजन

2:06:27

सबसे ज्यादा नॉन पोलर क्योंकि वहां

2:06:29

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का बिल्कुल भी

2:06:31

डिफरेंस नहीं है। यहां पर कार्बन और

2:06:32

ऑक्सीजन के बीच में थोड़ा बहुत

2:06:34

इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का डिफरेंस है।

2:06:37

यहां पर सल्फर और ऑक्सीजन के बीच में भी

2:06:40

थोड़ा बहुत इलेक्ट्रोनेगेटिविटी का

2:06:43

डिफरेंस है। इसलिए आंसर हो गया ऑप्शन फोर।

2:06:47

यस बिल्कुल सही बिल्कुल सही

2:06:51

वेरी गुड वेरी गुड बायोफे ने भी सही किया

2:06:53

देव मिश्रा ने भी सही बात बता रहे हैं

2:06:55

अंजलि भी सही बात बताई

2:06:58

तो अब तक जो हमने पढ़ा वह समझ में आया या

2:07:01

नहीं आया आप लोगों को क्या कंटिन्यू करें

2:07:03

क्लास को अगर क्लास को हमें कंटिन्यू करना

2:07:05

है तो एक बार लाइक करके बताएं कि अगर लाइक

2:07:08

करेंगे तो उसे समझ में आएगा कि यस वी शुड

2:07:10

कंटिन्यू द क्लासेस मतलब चीजें समझ में आ

2:07:12

रही है कि नहीं आ रही है हां मैं समझता

2:07:13

हूं दो-ती दिन और लगेंगे हमारे बीच में

2:07:15

ट्यूनिंग बैठने

2:07:16

बट अगर समझ में आ रही है तो एक बार लाइक

2:07:18

कर बताएं।

2:07:21

चैट की बजाय एक बार लाइक करें जिससे पता

2:07:23

चलेगा कितने लोग वास्तव में इस लोग इस

2:07:26

चीजों को ये चीज समझ में आ पा रही है।

2:07:36

वेरी गुड सोनाली वेरी गुड सोनल वेरी गुड

2:07:38

नेहा वेरी गुड मीर इरशाद वेरी गुड जेम्स

2:07:42

बोंड

2:07:44

अंजलि

2:07:46

थैंक यू थैंक यू थैंक यू तो इफ यू वांट टू

2:07:49

कंटिन्यू जस्ट

2:07:51

क्लिक लाइक चैट की बजाय लाइक में क्योंकि

2:07:55

जितना आप लाइक करेंगे उतना वीडियो ज्यादा

2:07:57

आसानी से आपको मिलेगा।

2:08:01

सो डिअ स्टूडेंट्स आज की क्लास हम यहीं पर

2:08:04

खत्म करते हैं। लेकिन जैसा मैंने कल कहा

2:08:06

था कि आप अपने फ्रेंड्स को शेयर करें कि

2:08:09

आईएफएस केमिस्ट्री पर भी फ्री क्लासेस है

2:08:12

वह हो रही है। अभी वहां पर ऑर्गनोमेटलिक

2:08:15

केमिस्ट्री की क्लासेस चल रही है। नदीम सर

2:08:17

हैं। प्रोफेसर तौहिद नदीम वो क्लासेस ले

2:08:19

रहे हैं। फिजिक्स के अंदर भी क्लासेस चल

2:08:23

रही है। डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स पर विनोद

2:08:25

है। वह क्लासेस को कंटीन्यूअसली ले रहे

2:08:28

हैं।

2:08:29

सो आप बायोकेमिस्ट्री की क्लासेस के बारे

2:08:33

में भी ज्यादा से ज्यादा स्टूडेंट्स को

2:08:36

शेयर करें। चाहे वो नेट की प्रिपरेशन कर

2:08:38

रहे हैं नहीं कर रहे हैं। एमएससी भी कर

2:08:39

रहे हैं तो इंफॉर्मेशन जरूर शेयर करें।

2:08:41

आपके कॉलेज के ग्रुप के अंदर, आपके

2:08:43

यूनिवर्सिटी के WhatsApp ग्रुप के अंदर,

2:08:44

tlegram ग्रुप के अंदर और इसको लाइक करें।

2:08:49

बस आपका फीडबैक यह लाइक और डिसलाइक ही है

2:08:52

हमारे लिए

2:08:56

जो हमें बता पाएगा कि चीजें समझ में आ रही

2:08:59

है या नहीं आ रही।

2:09:02

तो अगेन स्टूडेंट्स आई एम सेइंग कि थोड़ा

2:09:04

सा पेशेंस रखो दो-ती दिन और हमारी एक बार

2:09:08

रेजोनेंस हो गई तो उसको बायोकेमिस्ट्री

2:09:10

आपको बहुत सही ढंग से समझ में आने लग

2:09:12

जाएगी। हमें वापस बहुत हाईफाई

2:09:14

बायोकेमिस्ट्री नहीं पढ़नी है। बहुत

2:09:16

बेसिक्स बायोकेमिस्ट्री पढ़नी है।

2:09:19

धीरे-धीरे हम अपना लेवल बढ़ाएंगे और आगे

2:09:22

बढ़ेंगे। और ये यकीन है कि बायोकेमिस्ट्री

2:09:25

हम जो यहां पर पढ़ेंगे वो करने के बाद आप

2:09:27

पार्ट सी में एटलीस्ट थ्री टू फोर

2:09:28

क्वेश्चन सॉल्व कर लेंगे।

2:09:35

तो थैंक यू एवरीवन। थैंक यू।

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