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परिवार के मुखिया को अवश्य करना चाहिए शाकंभरी कवच-जाने क्यूं।#navratri2023 #ambubachimela2023

5:10EnglishTranscribed Jul 14, 2026
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श्याम विंध्यवासिनी हर हर महादेव आप सभी

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का स्वागत है आपके अपनी युटुब पर फेसबुक

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पेज में भगवती शाकंभरी का पूजन मुख्य रूप

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से वही लोग करते हैं जिनकी वह कुलदेवी हैं

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अथवा जिनके क्षेत्र में शाकंभरी पीठ

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स्थापित है लेकिन आप सभी को जानकर के

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आश्चर्य होगा आप सभी को जानना चाहिए की

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काली कल में विशेष करके अभी जो कप चल रहा

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है श्री श्वेत द्वारा कल इसमें भगवती

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शाकंभरी छह प्रमुख दूर गांव में से एक

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प्रमुख दुर्ग की स्वरूप में है जो लोग

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गुरु दीक्षित हैं या सख्त अथवा कल परंपरा

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के सड़क हैं जिनको अपने इस्ट जो जगदंबा के

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जी भी स्वरूप की पूजन कर रहे हैं उनमें

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उनके गुरु के द्वारा मंडल पीठ पूजन

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इत्यादि का की विधि बताई जाति है तो उनमें

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उन्हें अवश्य ही बताया गया होगा की जब भी

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आप पीठ पूजन करेंगे तो उसमें प्रमुख मंडल

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पूजन के कम में 6 मा दुर्गा की पूजन होती

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है

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[संगीत]

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वह भगवती शाकंभरी का होता है तो भगवती

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शकुंभ महा दुर्गा के स्वरूप में से

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छह मा दुर्गा में से प्रथम दुर्गा जो है

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भगवती नंदजा है फिर रक्त डानिका है फिर

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भगवती शाकंभरी हैं तो इसलिए इनका पूजन ऐसा

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नहीं है की सामान्यतः जो लोग केवल जिनकी

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कुलदेवी है वही कर सकते सभी कोई इनका पूजन

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उनके कवच का पाठ इतना ही कर सकते हैं आज

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की जानकारी विशेष रूप से उन सभी लोगों के

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लिए हैं जो गृहस्थिरम में जिनके ऊपर उनकी

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पुरी परिवार की जिम्मेदारी है परिवार का

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पूरा योग शिवा वहां करना है यानी की

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गृहस्ती को भी चलानी है आध्यात्मिक उन्नति

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भी करनी है परिवार का भरण पोषण भी करना है

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कामना भी है स्वयं के लिए भी सर कार्य

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करना है तो ऐसे व्यक्ति के लिए ऐसा समर्थ

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चाहिए जिससे की वह परिवार का भरण पोषण

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उचित प्रकार से कर सकें

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है उन लोगों के लिए भगवती शाकंभरी का कवच

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इस जीवन के रन में इस जीवन का युद्ध में

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साक्षात इंद्र के वज्र के समाज है भगवान

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कार्तिकेय जी ने यह कवच देवराज इंद्र को

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बताया था और इस कवच का पूरा शरण मंत्र

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1000 पाठ करने से हो जाता है इस कवच के

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पाठ से इस कवच के जब से सिद्ध आदि के बाद

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जब आप इसका पाठ करते हैं तो हर प्रकार की

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समस्या चाहे वो आदि भौतिक और दैविक हो या

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फिर शारीरिक मानसिक रोग हो किसी प्रकार के

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वृत्त के बढ़ावा बेचारी प्रकार से रक्षण

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होती है और उसके साथी साथ में अगर शत्रु

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के द्वारा किसी प्रकार का विचार एक प्रयोग

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हो रहा हो उससे भी रक्षण होता है भगवती की

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कृपा से आपके ऊपर किसी प्रकार का झूठ कैसे

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मुकदमा इत्यादि हो उसमें भी आप इसका

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प्रयोग करते हैं पाठ करते हैं तो विजय

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प्राप्त होती है यानी की विशेष करके यह

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कवच आपके जीवन में जितने भी परेशानियां आई

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हैं उनमें आपको यह विजय प्रधान करने के

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लिए पूर्व तरीके से तत्पर होता है

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न नई पशुधन विशेष करके इसके हेतु

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कुटुंबकीय भरण पोषण के हेतु परिवार के

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पालनपुर पोषण के हेतु योग चुंबकीय हेतु

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भगवती का यह स्वरूप अत्यंत ही विशेष है और

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प्रत्येक गृहस्ती के मुखिया को यह कवच का

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पाठ अवश्य करना चाहिए सिद्ध करके रखना

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चाहिए नित्य कम से कम एक ध पाठ भी जरूर कर

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लेना चाहिए शत्रुओं का भिक्षया होता है हर

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प्रकार से आरोग्यता की प्रताप होती है

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संतति संपत्ति सभी की प्रताप होती है और

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जिनकी भगवती कल देवी है अथवा जिनके

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क्षेत्र में शाकंभरी पीठ स्थापित है

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सहारनपुर जैसे क्षेत्र में उन लोगों को तो

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जरूर ही भगवती का यह कवच का प्रदर्शन कर

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लेना चाहिए और नेट अपने पाठ में रखना

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चाहिए किस प्रकार से सिद्ध करेंगे किसी भी

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नवरात्र में प्रतिपदा से नवमी पर्यंत तक

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पाठ करके 18 कंप्लीट कर लीजिए

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[संगीत]

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शुक्ला पक्ष के अष्टमी से लेकर चतुर्दशी

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तक यानी 7 दिन के भीतर कंप्लीट कर लेना है

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अंतिम दिन आप

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गूगल और गी का मिश्रण करके उससे आप भगवती

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शाकंभरी के हजार आठ नाम या 108 नाम अथवा

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श्री शाकंभरी डब्बे इस मंत्रालय से ही

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केवल आहुति करते हैं 1008 तो यह कवच पूर्ण

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रूप से जागृत हो जाता है इस कवच को

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भोजपत्र पे शुभ कल में पाव कलित में

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शिवरात्रि है नवरात्र में अष्टमी तिथि है

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दीपावली की रात है उसमें अगर भोजपत्र पे

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अनार की कलाम से लिखने हैं अष्टगंध की

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स्याही से देवी अष्टगंध की स्याही से और

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उसे रजत या सोनी की कवच में भर के अपने

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गले में धरण करते हैं तो अनेक प्रकार से

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आपका रक्षण होता है हर प्रकार से उन्नति

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होती है तो इस प्रकार से यह कवच आप सभी

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सिद्ध करें विशेष करके इस कवच के सिद्धि

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के समय में प्रीत या रक्त वस्त्र यानी लाल

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या पीला वस्त्र पहनना चाहिए बिना सील हुए

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कपड़े पूर्व या उत्तर की और मुख रहेगा

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[संगीत]

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क्योंकि भगवती हर प्रकार के संपदा को देने

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वाली है आपके परिवार में धन धन बहुपुत्र

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सभी कुछ देगी तो इसलिए कुलदेवी के साथ

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उनका जो प्रज्वलित करें और जब कभी भी

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भगवती शाकंभरी का पूजन होता है तो साथ में

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बटुक भैरव जी के नाम से भी उठा शक्ति पूजन

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करना चाहिए यानी की अगर आप भगवती

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कर रहे हैं कवच का तो कम से कम हवन के समय

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बटुक भैरव जी के भी नाम

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इस प्रकार से इसकवच को सिद्ध करके आप

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प्रयोग करें अवश्य ही आप सभी को लाभ होगा

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जय मां विंध्यवासिनी हर हर महादेव

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