0:00
श्याम विंध्यवासिनी हर हर महादेव आप सभी
0:02
का स्वागत है आपके अपनी युटुब पर फेसबुक
0:04
पेज में भगवती शाकंभरी का पूजन मुख्य रूप
0:07
से वही लोग करते हैं जिनकी वह कुलदेवी हैं
0:09
अथवा जिनके क्षेत्र में शाकंभरी पीठ
0:11
स्थापित है लेकिन आप सभी को जानकर के
0:13
आश्चर्य होगा आप सभी को जानना चाहिए की
0:16
काली कल में विशेष करके अभी जो कप चल रहा
0:18
है श्री श्वेत द्वारा कल इसमें भगवती
0:21
शाकंभरी छह प्रमुख दूर गांव में से एक
0:24
प्रमुख दुर्ग की स्वरूप में है जो लोग
0:26
गुरु दीक्षित हैं या सख्त अथवा कल परंपरा
0:30
के सड़क हैं जिनको अपने इस्ट जो जगदंबा के
0:34
जी भी स्वरूप की पूजन कर रहे हैं उनमें
0:36
उनके गुरु के द्वारा मंडल पीठ पूजन
0:39
इत्यादि का की विधि बताई जाति है तो उनमें
0:42
उन्हें अवश्य ही बताया गया होगा की जब भी
0:45
आप पीठ पूजन करेंगे तो उसमें प्रमुख मंडल
0:48
पूजन के कम में 6 मा दुर्गा की पूजन होती
0:53
वह भगवती शाकंभरी का होता है तो भगवती
0:56
शकुंभ महा दुर्गा के स्वरूप में से
0:59
छह मा दुर्गा में से प्रथम दुर्गा जो है
1:02
भगवती नंदजा है फिर रक्त डानिका है फिर
1:05
भगवती शाकंभरी हैं तो इसलिए इनका पूजन ऐसा
1:07
नहीं है की सामान्यतः जो लोग केवल जिनकी
1:09
कुलदेवी है वही कर सकते सभी कोई इनका पूजन
1:12
उनके कवच का पाठ इतना ही कर सकते हैं आज
1:14
की जानकारी विशेष रूप से उन सभी लोगों के
1:16
लिए हैं जो गृहस्थिरम में जिनके ऊपर उनकी
1:20
पुरी परिवार की जिम्मेदारी है परिवार का
1:22
पूरा योग शिवा वहां करना है यानी की
1:24
गृहस्ती को भी चलानी है आध्यात्मिक उन्नति
1:27
भी करनी है परिवार का भरण पोषण भी करना है
1:30
कामना भी है स्वयं के लिए भी सर कार्य
1:33
करना है तो ऐसे व्यक्ति के लिए ऐसा समर्थ
1:35
चाहिए जिससे की वह परिवार का भरण पोषण
1:38
उचित प्रकार से कर सकें
1:40
है उन लोगों के लिए भगवती शाकंभरी का कवच
1:43
इस जीवन के रन में इस जीवन का युद्ध में
1:46
साक्षात इंद्र के वज्र के समाज है भगवान
1:49
कार्तिकेय जी ने यह कवच देवराज इंद्र को
1:53
बताया था और इस कवच का पूरा शरण मंत्र
1:55
1000 पाठ करने से हो जाता है इस कवच के
1:58
पाठ से इस कवच के जब से सिद्ध आदि के बाद
2:01
जब आप इसका पाठ करते हैं तो हर प्रकार की
2:04
समस्या चाहे वो आदि भौतिक और दैविक हो या
2:07
फिर शारीरिक मानसिक रोग हो किसी प्रकार के
2:09
वृत्त के बढ़ावा बेचारी प्रकार से रक्षण
2:12
होती है और उसके साथी साथ में अगर शत्रु
2:15
के द्वारा किसी प्रकार का विचार एक प्रयोग
2:17
हो रहा हो उससे भी रक्षण होता है भगवती की
2:20
कृपा से आपके ऊपर किसी प्रकार का झूठ कैसे
2:22
मुकदमा इत्यादि हो उसमें भी आप इसका
2:24
प्रयोग करते हैं पाठ करते हैं तो विजय
2:26
प्राप्त होती है यानी की विशेष करके यह
2:30
कवच आपके जीवन में जितने भी परेशानियां आई
2:33
हैं उनमें आपको यह विजय प्रधान करने के
2:35
लिए पूर्व तरीके से तत्पर होता है
2:39
न नई पशुधन विशेष करके इसके हेतु
2:43
कुटुंबकीय भरण पोषण के हेतु परिवार के
2:46
पालनपुर पोषण के हेतु योग चुंबकीय हेतु
2:48
भगवती का यह स्वरूप अत्यंत ही विशेष है और
2:52
प्रत्येक गृहस्ती के मुखिया को यह कवच का
2:56
पाठ अवश्य करना चाहिए सिद्ध करके रखना
2:58
चाहिए नित्य कम से कम एक ध पाठ भी जरूर कर
3:00
लेना चाहिए शत्रुओं का भिक्षया होता है हर
3:03
प्रकार से आरोग्यता की प्रताप होती है
3:05
संतति संपत्ति सभी की प्रताप होती है और
3:08
जिनकी भगवती कल देवी है अथवा जिनके
3:10
क्षेत्र में शाकंभरी पीठ स्थापित है
3:12
सहारनपुर जैसे क्षेत्र में उन लोगों को तो
3:15
जरूर ही भगवती का यह कवच का प्रदर्शन कर
3:18
लेना चाहिए और नेट अपने पाठ में रखना
3:19
चाहिए किस प्रकार से सिद्ध करेंगे किसी भी
3:22
नवरात्र में प्रतिपदा से नवमी पर्यंत तक
3:24
पाठ करके 18 कंप्लीट कर लीजिए
3:31
शुक्ला पक्ष के अष्टमी से लेकर चतुर्दशी
3:33
तक यानी 7 दिन के भीतर कंप्लीट कर लेना है
3:39
गूगल और गी का मिश्रण करके उससे आप भगवती
3:41
शाकंभरी के हजार आठ नाम या 108 नाम अथवा
3:44
श्री शाकंभरी डब्बे इस मंत्रालय से ही
3:47
केवल आहुति करते हैं 1008 तो यह कवच पूर्ण
3:50
रूप से जागृत हो जाता है इस कवच को
3:52
भोजपत्र पे शुभ कल में पाव कलित में
3:55
शिवरात्रि है नवरात्र में अष्टमी तिथि है
3:56
दीपावली की रात है उसमें अगर भोजपत्र पे
3:59
अनार की कलाम से लिखने हैं अष्टगंध की
4:02
स्याही से देवी अष्टगंध की स्याही से और
4:04
उसे रजत या सोनी की कवच में भर के अपने
4:08
गले में धरण करते हैं तो अनेक प्रकार से
4:10
आपका रक्षण होता है हर प्रकार से उन्नति
4:13
होती है तो इस प्रकार से यह कवच आप सभी
4:15
सिद्ध करें विशेष करके इस कवच के सिद्धि
4:17
के समय में प्रीत या रक्त वस्त्र यानी लाल
4:20
या पीला वस्त्र पहनना चाहिए बिना सील हुए
4:22
कपड़े पूर्व या उत्तर की और मुख रहेगा
4:33
क्योंकि भगवती हर प्रकार के संपदा को देने
4:36
वाली है आपके परिवार में धन धन बहुपुत्र
4:40
सभी कुछ देगी तो इसलिए कुलदेवी के साथ
4:42
उनका जो प्रज्वलित करें और जब कभी भी
4:45
भगवती शाकंभरी का पूजन होता है तो साथ में
4:48
बटुक भैरव जी के नाम से भी उठा शक्ति पूजन
4:50
करना चाहिए यानी की अगर आप भगवती
4:53
कर रहे हैं कवच का तो कम से कम हवन के समय
4:56
बटुक भैरव जी के भी नाम
5:00
इस प्रकार से इसकवच को सिद्ध करके आप
5:03
प्रयोग करें अवश्य ही आप सभी को लाभ होगा
5:05
जय मां विंध्यवासिनी हर हर महादेव