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वह कवच जिसे धारण करके सिद्ध मुनि विचरते हैं।श्री दत्तात्रेय वज्र कवच। #दत्तजयंती #dattaguru

11:59EnglishTranscribed Jul 14, 2026
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जय मैन विंध्यवासिनी हर हर महादेव आप सभी

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का स्वागत है हमारी यूट्यूब परिवार में आज

0:05

का रोचक अत्यंत मनमोहक और चारों पुरुषार्थ

0:10

को प्रदान करने वाले विषय से संबंधित है

0:12

भगवान दत्तात्रेय का वज्र कवच किस प्रकार

0:14

उन्हें शुद्ध करें अपने जीवन में उतारे

0:16

उनका प्रयोग करें यह कवच जो है यह आपके

0:20

जीवन के प्रतीक कष्ट हर प्रकार के

0:23

परेशानियों को दूर करने में समर्थ है

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ऋषियों ने भगवान वेद व्यास जी से पूछा था

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की ऐसा कोई कवच बताइए जो कलयुग में धर्म

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अर्थ कम और मोक्ष की सिद्धि करें साथी जो

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भी हमारे grihst जीवन में रहने वाले लोग

0:35

हो उनकी जीवन में जो भी क्लेश हो उससे भी

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मुक्ति मिले और आगे का मार्ग भी प्रस्तुत

0:40

तब भगवान वेद व्यास जो हैं उन्होंने इस

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चीज का वर्णन किया है और ध्यान रहे की इस

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कवच का वर्णन रुद्र के अंतर्गत हिमखंड में

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आता है तो रुद्र का यह कवच है उसके

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अंतर्गत भगवान दत्तात्रेय का यह कवच है

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इस कवच का एक बार अगर आप पाठ करते हैं तो

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कहते हैं की उसे भी भगवान दत्तात्रेय

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प्रसन्न होते हैं और तत्काल जो है अपने

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प्रभाव से आपके कष्ट को हारते हैं इसका

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वर्णन आता है की हिमालय पर्वत पर भगवती

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पार्वती और महादेवी के साथ बैठे द पार्वती

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जी कहती हैं की मुझे manosulok देखने की

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इच्छा है तो हम लोग मानुष लोग भ्रमण की ओर

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चलेंगे पृथ्वी लोक पे चलेंगे तब जो है

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पृथ्वी लोक पर महादेव के साथ जाती हैं तो

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एक बड़ा अत्यंत रोचक चीज देखते हैं इस चीज

1:20

का पूरा वर्णन आपको वज्र पंजर कवच में

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मिलेगा जब आप पाठ करेंगे तो जिसमें उन्हें

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यह चीज दिखाई देता है की एक मृग बाग को

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दौड़ा रहा है तब पार्वती जी पूछती है की

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आखिर में यह किस प्रकार से संभव है तब

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उन्होंने बताया महादेव ने बताया की इसी

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विंध्याचल पर्वत पर यह जो चीज देखती है

1:38

मैन भगवती देखती हैं तो विंध्याचल पर्वत

1:41

पे ही प्रथम

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किया गया था भगवान

1:47

[संगीत]

1:50

वह भक्त द दलाल मुनि वहीं बिंदु पर्वत पर

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निवास करती हुई केवल पत्तों का हर करते

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हुए भगवती की सेवा पूजा करते द साधना करते

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द तो एक बार उन्होंने जैसा की सुना था की

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जब भी भगवान दत्त को याद किया जाएगा वह

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तुरंत प्रकट हो जाएंगे तो क्या यह संभव है

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क्या की इस प्रकार से हम करें और प्रकट हो

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जाइए परीक्षा लेने के लिए दनादन मुनि जो द

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वह परीक्षा लेने के लिए भगवान दत्त का

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स्मरण करते हैं और उसी क्षण भगवान तट

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प्रकट हो जाते हैं

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smritigamita उसमें एक शब्द होता है

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दुश्मन करते ही पहुंच जाए smritigami कहते

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हैं तो स्मरण करते ही भगवान दक्षिण प्रकट

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हो गए उनको उपस्थित देखकर दलाल मुनिया

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बोलते हैं की आखिर में यह कैसे संभव हो

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गया हालांकि उन्होंने आओ भगत किया है

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भगवान को आसान पर बैठाया मधुपुर की दिया

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उनका सेवा सत्कार पूजन जो संभव था उनकी

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उन्होंने किया लेकिन उन्होंने फिर क्षमा

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याचना करने आरंभ की केवल

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दृष्टि से सामान्य रूप से आपको सम्मान

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किया था लेकिन जो तो आप यहां ए गए हैं तो

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मुझे मुझसे बहुत बड़ा अपराध हो गया आप

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मेरे से अपराध को क्षमा करें तब भगवंत या

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बोलते हैं यह तो मेरा स्वभाव है की जो कोई

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भी भाव से उद्धव से भक्ति से भक्ति से

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टोलेट पूर्वक स्मरण करें तो मैं दक्षिण

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उसके पास पहुंच जाता हूं उसकी अवास्ट

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वस्तु से प्रदान कर देता हूं तब बोलते हैं

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भगवान दत्त फिर बोलते हैं की आप मेरा

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स्मरण किए हैं अब हम ए गए हैं जो आपको

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मांगना है मांग लीजिए तो इस कवच का सबसे

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बड़ा प्रभाव तो यह जान लीजिए की जैसे ही

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आप एक पाठ भी करेंगे भगवान दत्त अपने

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sathmak शक्ति के साथ आपके पुण्य के हिसाब

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से अवश्य वहां प्रकट होंगे खाली कल है

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स्कूली क्षेत्र में भगवान दत्त अवश्य आपकी

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सहायता करेंगे इसलिए वज्रपाणि जो कवच जो

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है इसको अवश्य पाठ करना चाहिए नेट तब

3:30

भगवान दत्तात्रेय चूंकि दलाल मुनि ने के

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पास गए द उनका जाना व्रत नहीं हो सकता था

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तब उन्होंने वज्र कवच जो है बिना पर्वत पर

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विंध्याचल पर्वत पर उन्हें प्रदान किया और

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उसका सारा उपदेश उपदेश दिया जिस समय उसे

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कवच का पूर्ण उपदेश हो रहा था उसी समय

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वहां पर एक व्यक्ति और खड़ा था जो उसे बात

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को सन रहा था वह मृग रूप धारी एक व्याध था

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जिसने उसे कवच के पाठ को सन लिया और उसके

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कारण से उसकी भी आपसी अतुलित बाल जो है वह

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ए गया

4:00

[संगीत]

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अब इसका पूरा विधि विधान जो कवच में है

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विनियोग करना है विनियोग करने के पक्ष

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न्यास की प्रक्रिया है न्यास विनियोग

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इत्यादि कर सकते हैं और पहले ही भगवान

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दत्त को गुरु स्वरूप में किस प्रकार धारण

4:15

करें उसकी विधि चैनल पे हम दल चुके हैं आप

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लोग कृपया उसे देखें अगर आपकी कोई गुरु

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नहीं है तो उसे विधि-विधान से भगवंत को

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गुरु स्वरूप में स्वीकार करते हुए उसकी

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पक्ष जो अगर आप बदरपुर करते हैं न्यास की

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प्रक्रिया करते हैं तो atuttam है अगर आप

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किसी भी प्रत्यक्ष रूप से किसी भी प्रकार

4:34

की गुरु संबंधित क्रियो को नहीं किए हैं

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गुरु उदाहरण नहीं किए हैं तब ऐसी स्थिति

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में आप सामान्य जो है ध्यान करके और उसके

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पक्ष कवच का पाठ करें कवच पाठ से पहले

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पूरा जो इसका purvalokan है पूरे पूरा जो

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कथा है उसका एक बार पाठ करना चाहिए अगर आप

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एक से अधिक बार पाठ कर रहे हैं सिद्ध करने

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की विधि में आप हैं आप जैसे सिद्ध करने के

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लिए प्रतिदिन 11 पाठ कर रहे हैं तो जो

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इसका मूल पाठ है उसको करना चाहिए मूल पाठ

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का आरंभ होने से पहले जो ध्यान

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aamantritya दी है उन सभी चीजों को कर

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लेना चाहिए कवच का पाठ armbh होता है

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दत्तात्रेय सिरप पातु यहां से ठीक है वहां

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लिखा हुआ कवच कपट इस प्रकार करना चाहिए तो

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वहां से मूल कवच शुरू होगा तो मूल कवच का

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पाठ आपको एक से अधिक बार करना है इसका इस

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कवच को सिद्ध करने के लिए पूर्णिमा से

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पूर्णिमा जो है पूरा पाठ करना चाहिए एक

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पूर्णिमा से लेकर के अगले पूर्णिमा तक

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प्रतिदिन 11 पाठ करते हैं या कम से कम आप

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पंच पाठ भी करते हैं तो विशेष कृपा की

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प्राप्ति होती है और आधिकारिक जो है आप

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जितना इसमें सक्रिय तो इसमें मूल कवच जो

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है उसका ही पाठ आपको अधिक मात्रा में करना

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है इस कवच को सिद्ध करने के पक्ष जो है

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भगवान दत्त की 108 नाम से प्रत्येक नाम की

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11 11 होती घी और खीर को मिलाकर के देनी

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चाहिए संविधान नवग्रह लकड़ी विशेष करके

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रखनी चाहिए पीपल की लकड़ी की मात्रा और गे

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गोबर के उपलों की मात्रा अधिक रखनी चाहिए

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साथ ही जब भी आप इस वज्र पंज और कवच की

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साधना करेंगे तो प्रतिदिन कुत्तों को और

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गांव को गायों को यथाशक्ति भोजन अवश्य

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कराएंगे जो आपका अमृत हो आप गौशाला स्वयं

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सेवा कर सकते हैं या फिर जो भी आवारा पशु

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होती है गे होती हैं कुत्ते होते हैं उनको

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जो भी अब भोजन दे पाएं बिस्कुट रोटी ब्रेड

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जो आपका समर्थ हो जो आप देखना चाहे देना

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चाहे वो दे सकते हैं तो इस प्रकार से आपको

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इस कवच का पूर्ण पाठ करना है इसमें आपको

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जो वस्त्र धारण करना है या तो वो सफेद

6:21

होगा श्वेत होगा या तो फिर पीला होगा

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महिलाएं स्त्रियां जो हैं वो जभी भी इस

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कवच को सिद्ध करने के लिए पाठ करेंगे तो

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वो दो रंग के वस्त्र कम से कम रखेंगे पीला

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है तो उसमें लाल पहाड़ होना चाहिए आसान जो

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है कुशा का असंस रश तो होता है कंबल के

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आसान में रख सकते हैं लेकिन कला कंबल ना

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हो सिद्धासन में ही बैठकर के यानी की

6:40

पार्टी मार के सामान्य सुखासन में बैठ

6:42

करके आप इसमें विधि-विधान को करें तो

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ज्यादा अच्छा रहे रहेगा और इसके साथ ही

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साथ आपको नित्य प्रति जो दीप prajut करना

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है वो घी का दीपक अति उत्तम होता है अगर

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घी का समर्थन हो तो शुद्ध तेल का जो है

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दीपक प्रज्वलित करना चाहिए भोग में मीठे

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का भोग लगाना चाहिए प्रतिदिन जब तक आप पाठ

7:00

पूजा करेंगे जब तक है साध मिलेगा आपको

7:02

पूर्ण रूप से सात्विक अचार विचार व्यवहार

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रखना है ब्रह्मचर्य

7:07

भी नहीं खाना होता है इस बात का भी आपको

7:10

विशेष रूप से ध्यान रखना होता है अब जब इस

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पूरे कवच का पाठ इत्यादि आप करेंगे कवच के

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सिद्धि आपको प्राप्त होगी देखिए इसमें

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अनुभव बहुत ज्यादा होता है अनुभव की

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दृष्टि से आप इस नाटक मत जाइए जब अनुभव

7:25

होना आरंभ होगा तो थोड़ा आपको सत्तर करना

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है केवल अनुभव की दृष्टि से नहीं कर रहे

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हैं क्योंकि कवच जो है इसमें बहुत सारी

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शक्तियों का आवन है भगवान दत्त की पूर्ण

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कृपा इसका वसुंधरा रहती है माला मंत्र के

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लिए इसमें आगे दिया गया है दत्तात्रेय

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माला मंत्र का विधान जो है वो अलग से है

7:40

आपको माला मंत्र अगर करना हो इसी चैनल पर

7:43

पिछले साल का एक साल ये वीडियो जब आप देख

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रहे हैं 1 साल पहले का दिया गया है माला

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मंत्र का विधान आप चाहे तो सिर्फ माला

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मंत्र का पीडीएफ डाउनलोड करके उसका जो

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विधान दिया गया है यहां पर वो कर सकते हैं

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अगर आप gurudharan नहीं किए हैं तो आपको

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यह प्रक्रिया करने की आवश्यकता नहीं है आप

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सामान्य पाठ केवल कर सकते हैं

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ठीक है इस तरीके से यह पाठ आपको करना

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चाहिए

8:08

[संगीत]

8:09

जिसको प्राप्त हो गया

8:15

इसका उपदेश दे रहे द जिसके कारण उसका सर

8:18

वज़ीर का हो गया और वही मेरे को दुख धारण

8:20

करके सिंह के पीछे जा रहा था तो इस प्रकार

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से इस कवच का विधान है इस कवच को सिद्ध

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करें इसका अनेकों अनेक प्रभाव फल श्रुति

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में बहुत कुछ बताया गया है की falsuti से

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इसको कैसे क्या हो सकता है इसमें भगवान

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भगवती पार्वती जब भगवान शिव से पूछते हैं

8:37

तो बोलते हैं भगवान शिव के चारों

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पुरुषार्थ को देने वाले हर प्रकार के

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ईश्वर को प्रदान करने वाला है जो भी लौकी

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का सूर्य है वो सभी कुछ प्राप्त होगा

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पुत्र मित्र सभी का जो भी संतोष कारक

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स्वरूप होता है वह सभी भी प्राप्त होता है

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विद्या की प्राप्ति होती है बहुत सारे लोग

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बोलते हैं कॉम्पिटेटिव एग्जाम है उसमें

8:56

कैसे

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ठीक है बुद्धि जो है बुरी तरीके से विकसित

9:01

नहीं हो पाई है तो उसमें वजन जो है बहुत

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कार्य करता है बहुत प्रभाव देता है साथ ही

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कोई कला के क्षेत्र में जाना चाहते हैं तो

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उसमें भी यह कवच जो है स्वच्छता प्रदान

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करता है तो इस कवच का पाठ इस हेतु भी करना

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चाहिए हर प्रकार की क्लेश को नष्ट करने

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वाला घर में बहुत क्लेश कला होता है तो वो

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भी जब इसका पाठ आप करते हैं अभी मंत्र जल

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भर पढ़ छुड़ाने हैं या इस पाठ को करने की

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बचत भगवान दर्द के साथ नामावली सुहावन

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इत्यादि करते हैं तो जो भी प्रयोग इत्यादि

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विवाह होता है जो भी नकारात्मक चीज होती

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हैं वह भी नष्ट होता है चाहे भूत-प्रेत

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विचारों सभी चीजों में

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किसी भी प्रकार के तंत्र टोना टोटका

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विचारों सभी को नष्ट करने में समर्थ होता

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है इसके साथ ही बहुत जो विशेष प्रकार के

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रोग होते हैं यानी की नरवर नर्वस

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ब्रेकडाउन जो होता है नेत्र के रोग होते

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हैं ठीक यदि जो रोग होते हैं मधुमेह होता

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है यह सारी चीज होती हैं पेट में दर्द

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होना

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सर्दी खांसी बुखार ये सारी चीज होती हैं

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कुछ लोगों को ज्वार बराबर आते हैं अनेकों

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प्रकार के ज्वार होते हैं

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सामान्य जो है मौसम की चलते भी होता है इन

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सभी चीजों में भी यह चीज आपको साथ देता है

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कोई devdosh लग जाए

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अनजाने जाने में किसी चीज का उल्लंघन हो

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जाए तो उसे समय भी इसके पाठ से आपको लाभ

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प्राप्त होता है अब कितना पार्ट इसका करना

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चाहिए सामान्य एक महीने तक इसका पाठ जो है

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प्रतिदिन 11 करना चाहिए 11 पाठ ऐसे

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सामान्य बोला जाए तो हजार पाठ या 1100 पाठ

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जब आप इसका फोन कर लेते हैं तो इसका

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प्रभाव जो है वो आरंभ होता है तो इसलिए कम

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से कम 110 पार्ट तो जरूर इसका करना है यह

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जो भगवान तत्व को समर्पित हो जाते हैं

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उनको यह पाठ जरूर करना चाहिए इस तरीके से

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मूल कवच का पाठ जो है अधिक अधिक करना

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चाहिए

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बाकी जो है इसका पाठ समांतर किसे कर सकते

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हैं और इसके प्रयोग विधान भी आपको उसी में

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पढ़ने को मिल जाएगा पीडीएफ में आप देखेंगे

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तो उसमें प्रयोग विधान भी दिया गया है की

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गूलर की वृक्ष के नीचे पढ़ने से धन धन की

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वृद्धि होती है उसी में अगर आप अपने दिशा

10:59

को बदल लेते हैं अगर आप दक्षिण दिशा की ओर

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करते हैं तो पादरों शांति होती है ठीक है

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और

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शत्रु का नाश करना हो दक्षिण दिशा की ओर

11:08

मुख करके करते हैं तो शत्रु का नाश भी हो

11:10

जाता है बैठकर की अगर एक मास्टर जॉब करते

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हैं तो इस प्रकार की बहुत सारे प्रयोग भी

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दिए गए हैं की बेल के नीचे बैठते हैं

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तो लक्ष्मी की प्राप्ति होती है ठीक है

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विवाह नहीं हो रहा है तो आम ब्रेस्ट नीचे

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बैठकर पढ़ते हैं तो विवाह होता है तुलसी

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जी के पास पढ़ते हैं तो सभी manokamnaon

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के पूर्ति ज्ञान की प्राप्ति होती हैं ठीक

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है भगवान के garbhgri में बैठकर इसका पाठ

11:37

करेंगे पुत्र की प्राप्ति होगी संतान की

11:39

प्राप्ति होगी इस प्रकार से अनेकों इसके

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विधान भी दिए गए हैं तो उन सभी चीजों को

11:44

आप पढ़ सकते हैं इसमें जान सकते हैं तो

11:46

भगवान दत्तात्रेय का यह

11:49

आप अवश्य

11:51

कवच सिद्ध करें और जीवन में प्रयोग करें

11:54

जय मैन विंध्यवासिनी हर हर महादेव

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