वह कवच जिसे धारण करके सिद्ध मुनि विचरते हैं।श्री दत्तात्रेय वज्र कवच। #दत्तजयंती #dattaguru
जय मैन विंध्यवासिनी हर हर महादेव आप सभी
का स्वागत है हमारी यूट्यूब परिवार में आज
का रोचक अत्यंत मनमोहक और चारों पुरुषार्थ
को प्रदान करने वाले विषय से संबंधित है
भगवान दत्तात्रेय का वज्र कवच किस प्रकार
उन्हें शुद्ध करें अपने जीवन में उतारे
उनका प्रयोग करें यह कवच जो है यह आपके
जीवन के प्रतीक कष्ट हर प्रकार के
परेशानियों को दूर करने में समर्थ है
ऋषियों ने भगवान वेद व्यास जी से पूछा था
की ऐसा कोई कवच बताइए जो कलयुग में धर्म
अर्थ कम और मोक्ष की सिद्धि करें साथी जो
भी हमारे grihst जीवन में रहने वाले लोग
हो उनकी जीवन में जो भी क्लेश हो उससे भी
मुक्ति मिले और आगे का मार्ग भी प्रस्तुत
तब भगवान वेद व्यास जो हैं उन्होंने इस
चीज का वर्णन किया है और ध्यान रहे की इस
कवच का वर्णन रुद्र के अंतर्गत हिमखंड में
आता है तो रुद्र का यह कवच है उसके
अंतर्गत भगवान दत्तात्रेय का यह कवच है
इस कवच का एक बार अगर आप पाठ करते हैं तो
कहते हैं की उसे भी भगवान दत्तात्रेय
प्रसन्न होते हैं और तत्काल जो है अपने
प्रभाव से आपके कष्ट को हारते हैं इसका
वर्णन आता है की हिमालय पर्वत पर भगवती
पार्वती और महादेवी के साथ बैठे द पार्वती
जी कहती हैं की मुझे manosulok देखने की
इच्छा है तो हम लोग मानुष लोग भ्रमण की ओर
चलेंगे पृथ्वी लोक पे चलेंगे तब जो है
पृथ्वी लोक पर महादेव के साथ जाती हैं तो
एक बड़ा अत्यंत रोचक चीज देखते हैं इस चीज
का पूरा वर्णन आपको वज्र पंजर कवच में
मिलेगा जब आप पाठ करेंगे तो जिसमें उन्हें
यह चीज दिखाई देता है की एक मृग बाग को
दौड़ा रहा है तब पार्वती जी पूछती है की
आखिर में यह किस प्रकार से संभव है तब
उन्होंने बताया महादेव ने बताया की इसी
विंध्याचल पर्वत पर यह जो चीज देखती है
मैन भगवती देखती हैं तो विंध्याचल पर्वत
पे ही प्रथम
किया गया था भगवान
[संगीत]
वह भक्त द दलाल मुनि वहीं बिंदु पर्वत पर
निवास करती हुई केवल पत्तों का हर करते
हुए भगवती की सेवा पूजा करते द साधना करते
द तो एक बार उन्होंने जैसा की सुना था की
जब भी भगवान दत्त को याद किया जाएगा वह
तुरंत प्रकट हो जाएंगे तो क्या यह संभव है
क्या की इस प्रकार से हम करें और प्रकट हो
जाइए परीक्षा लेने के लिए दनादन मुनि जो द
वह परीक्षा लेने के लिए भगवान दत्त का
स्मरण करते हैं और उसी क्षण भगवान तट
प्रकट हो जाते हैं
smritigamita उसमें एक शब्द होता है
दुश्मन करते ही पहुंच जाए smritigami कहते
हैं तो स्मरण करते ही भगवान दक्षिण प्रकट
हो गए उनको उपस्थित देखकर दलाल मुनिया
बोलते हैं की आखिर में यह कैसे संभव हो
गया हालांकि उन्होंने आओ भगत किया है
भगवान को आसान पर बैठाया मधुपुर की दिया
उनका सेवा सत्कार पूजन जो संभव था उनकी
उन्होंने किया लेकिन उन्होंने फिर क्षमा
याचना करने आरंभ की केवल
दृष्टि से सामान्य रूप से आपको सम्मान
किया था लेकिन जो तो आप यहां ए गए हैं तो
मुझे मुझसे बहुत बड़ा अपराध हो गया आप
मेरे से अपराध को क्षमा करें तब भगवंत या
बोलते हैं यह तो मेरा स्वभाव है की जो कोई
भी भाव से उद्धव से भक्ति से भक्ति से
टोलेट पूर्वक स्मरण करें तो मैं दक्षिण
उसके पास पहुंच जाता हूं उसकी अवास्ट
वस्तु से प्रदान कर देता हूं तब बोलते हैं
भगवान दत्त फिर बोलते हैं की आप मेरा
स्मरण किए हैं अब हम ए गए हैं जो आपको
मांगना है मांग लीजिए तो इस कवच का सबसे
बड़ा प्रभाव तो यह जान लीजिए की जैसे ही
आप एक पाठ भी करेंगे भगवान दत्त अपने
sathmak शक्ति के साथ आपके पुण्य के हिसाब
से अवश्य वहां प्रकट होंगे खाली कल है
स्कूली क्षेत्र में भगवान दत्त अवश्य आपकी
सहायता करेंगे इसलिए वज्रपाणि जो कवच जो
है इसको अवश्य पाठ करना चाहिए नेट तब
भगवान दत्तात्रेय चूंकि दलाल मुनि ने के
पास गए द उनका जाना व्रत नहीं हो सकता था
तब उन्होंने वज्र कवच जो है बिना पर्वत पर
विंध्याचल पर्वत पर उन्हें प्रदान किया और
उसका सारा उपदेश उपदेश दिया जिस समय उसे
कवच का पूर्ण उपदेश हो रहा था उसी समय
वहां पर एक व्यक्ति और खड़ा था जो उसे बात
को सन रहा था वह मृग रूप धारी एक व्याध था
जिसने उसे कवच के पाठ को सन लिया और उसके
कारण से उसकी भी आपसी अतुलित बाल जो है वह
ए गया
[संगीत]
अब इसका पूरा विधि विधान जो कवच में है
विनियोग करना है विनियोग करने के पक्ष
न्यास की प्रक्रिया है न्यास विनियोग
इत्यादि कर सकते हैं और पहले ही भगवान
दत्त को गुरु स्वरूप में किस प्रकार धारण
करें उसकी विधि चैनल पे हम दल चुके हैं आप
लोग कृपया उसे देखें अगर आपकी कोई गुरु
नहीं है तो उसे विधि-विधान से भगवंत को
गुरु स्वरूप में स्वीकार करते हुए उसकी
पक्ष जो अगर आप बदरपुर करते हैं न्यास की
प्रक्रिया करते हैं तो atuttam है अगर आप
किसी भी प्रत्यक्ष रूप से किसी भी प्रकार
की गुरु संबंधित क्रियो को नहीं किए हैं
गुरु उदाहरण नहीं किए हैं तब ऐसी स्थिति
में आप सामान्य जो है ध्यान करके और उसके
पक्ष कवच का पाठ करें कवच पाठ से पहले
पूरा जो इसका purvalokan है पूरे पूरा जो
कथा है उसका एक बार पाठ करना चाहिए अगर आप
एक से अधिक बार पाठ कर रहे हैं सिद्ध करने
की विधि में आप हैं आप जैसे सिद्ध करने के
लिए प्रतिदिन 11 पाठ कर रहे हैं तो जो
इसका मूल पाठ है उसको करना चाहिए मूल पाठ
का आरंभ होने से पहले जो ध्यान
aamantritya दी है उन सभी चीजों को कर
लेना चाहिए कवच का पाठ armbh होता है
दत्तात्रेय सिरप पातु यहां से ठीक है वहां
लिखा हुआ कवच कपट इस प्रकार करना चाहिए तो
वहां से मूल कवच शुरू होगा तो मूल कवच का
पाठ आपको एक से अधिक बार करना है इसका इस
कवच को सिद्ध करने के लिए पूर्णिमा से
पूर्णिमा जो है पूरा पाठ करना चाहिए एक
पूर्णिमा से लेकर के अगले पूर्णिमा तक
प्रतिदिन 11 पाठ करते हैं या कम से कम आप
पंच पाठ भी करते हैं तो विशेष कृपा की
प्राप्ति होती है और आधिकारिक जो है आप
जितना इसमें सक्रिय तो इसमें मूल कवच जो
है उसका ही पाठ आपको अधिक मात्रा में करना
है इस कवच को सिद्ध करने के पक्ष जो है
भगवान दत्त की 108 नाम से प्रत्येक नाम की
11 11 होती घी और खीर को मिलाकर के देनी
चाहिए संविधान नवग्रह लकड़ी विशेष करके
रखनी चाहिए पीपल की लकड़ी की मात्रा और गे
गोबर के उपलों की मात्रा अधिक रखनी चाहिए
साथ ही जब भी आप इस वज्र पंज और कवच की
साधना करेंगे तो प्रतिदिन कुत्तों को और
गांव को गायों को यथाशक्ति भोजन अवश्य
कराएंगे जो आपका अमृत हो आप गौशाला स्वयं
सेवा कर सकते हैं या फिर जो भी आवारा पशु
होती है गे होती हैं कुत्ते होते हैं उनको
जो भी अब भोजन दे पाएं बिस्कुट रोटी ब्रेड
जो आपका समर्थ हो जो आप देखना चाहे देना
चाहे वो दे सकते हैं तो इस प्रकार से आपको
इस कवच का पूर्ण पाठ करना है इसमें आपको
जो वस्त्र धारण करना है या तो वो सफेद
होगा श्वेत होगा या तो फिर पीला होगा
महिलाएं स्त्रियां जो हैं वो जभी भी इस
कवच को सिद्ध करने के लिए पाठ करेंगे तो
वो दो रंग के वस्त्र कम से कम रखेंगे पीला
है तो उसमें लाल पहाड़ होना चाहिए आसान जो
है कुशा का असंस रश तो होता है कंबल के
आसान में रख सकते हैं लेकिन कला कंबल ना
हो सिद्धासन में ही बैठकर के यानी की
पार्टी मार के सामान्य सुखासन में बैठ
करके आप इसमें विधि-विधान को करें तो
ज्यादा अच्छा रहे रहेगा और इसके साथ ही
साथ आपको नित्य प्रति जो दीप prajut करना
है वो घी का दीपक अति उत्तम होता है अगर
घी का समर्थन हो तो शुद्ध तेल का जो है
दीपक प्रज्वलित करना चाहिए भोग में मीठे
का भोग लगाना चाहिए प्रतिदिन जब तक आप पाठ
पूजा करेंगे जब तक है साध मिलेगा आपको
पूर्ण रूप से सात्विक अचार विचार व्यवहार
रखना है ब्रह्मचर्य
भी नहीं खाना होता है इस बात का भी आपको
विशेष रूप से ध्यान रखना होता है अब जब इस
पूरे कवच का पाठ इत्यादि आप करेंगे कवच के
सिद्धि आपको प्राप्त होगी देखिए इसमें
अनुभव बहुत ज्यादा होता है अनुभव की
दृष्टि से आप इस नाटक मत जाइए जब अनुभव
होना आरंभ होगा तो थोड़ा आपको सत्तर करना
है केवल अनुभव की दृष्टि से नहीं कर रहे
हैं क्योंकि कवच जो है इसमें बहुत सारी
शक्तियों का आवन है भगवान दत्त की पूर्ण
कृपा इसका वसुंधरा रहती है माला मंत्र के
लिए इसमें आगे दिया गया है दत्तात्रेय
माला मंत्र का विधान जो है वो अलग से है
आपको माला मंत्र अगर करना हो इसी चैनल पर
पिछले साल का एक साल ये वीडियो जब आप देख
रहे हैं 1 साल पहले का दिया गया है माला
मंत्र का विधान आप चाहे तो सिर्फ माला
मंत्र का पीडीएफ डाउनलोड करके उसका जो
विधान दिया गया है यहां पर वो कर सकते हैं
अगर आप gurudharan नहीं किए हैं तो आपको
यह प्रक्रिया करने की आवश्यकता नहीं है आप
सामान्य पाठ केवल कर सकते हैं
ठीक है इस तरीके से यह पाठ आपको करना
चाहिए
[संगीत]
जिसको प्राप्त हो गया
इसका उपदेश दे रहे द जिसके कारण उसका सर
वज़ीर का हो गया और वही मेरे को दुख धारण
करके सिंह के पीछे जा रहा था तो इस प्रकार
से इस कवच का विधान है इस कवच को सिद्ध
करें इसका अनेकों अनेक प्रभाव फल श्रुति
में बहुत कुछ बताया गया है की falsuti से
इसको कैसे क्या हो सकता है इसमें भगवान
भगवती पार्वती जब भगवान शिव से पूछते हैं
तो बोलते हैं भगवान शिव के चारों
पुरुषार्थ को देने वाले हर प्रकार के
ईश्वर को प्रदान करने वाला है जो भी लौकी
का सूर्य है वो सभी कुछ प्राप्त होगा
पुत्र मित्र सभी का जो भी संतोष कारक
स्वरूप होता है वह सभी भी प्राप्त होता है
विद्या की प्राप्ति होती है बहुत सारे लोग
बोलते हैं कॉम्पिटेटिव एग्जाम है उसमें
कैसे
ठीक है बुद्धि जो है बुरी तरीके से विकसित
नहीं हो पाई है तो उसमें वजन जो है बहुत
कार्य करता है बहुत प्रभाव देता है साथ ही
कोई कला के क्षेत्र में जाना चाहते हैं तो
उसमें भी यह कवच जो है स्वच्छता प्रदान
करता है तो इस कवच का पाठ इस हेतु भी करना
चाहिए हर प्रकार की क्लेश को नष्ट करने
वाला घर में बहुत क्लेश कला होता है तो वो
भी जब इसका पाठ आप करते हैं अभी मंत्र जल
भर पढ़ छुड़ाने हैं या इस पाठ को करने की
बचत भगवान दर्द के साथ नामावली सुहावन
इत्यादि करते हैं तो जो भी प्रयोग इत्यादि
विवाह होता है जो भी नकारात्मक चीज होती
हैं वह भी नष्ट होता है चाहे भूत-प्रेत
विचारों सभी चीजों में
किसी भी प्रकार के तंत्र टोना टोटका
विचारों सभी को नष्ट करने में समर्थ होता
है इसके साथ ही बहुत जो विशेष प्रकार के
रोग होते हैं यानी की नरवर नर्वस
ब्रेकडाउन जो होता है नेत्र के रोग होते
हैं ठीक यदि जो रोग होते हैं मधुमेह होता
है यह सारी चीज होती हैं पेट में दर्द
होना
सर्दी खांसी बुखार ये सारी चीज होती हैं
कुछ लोगों को ज्वार बराबर आते हैं अनेकों
प्रकार के ज्वार होते हैं
सामान्य जो है मौसम की चलते भी होता है इन
सभी चीजों में भी यह चीज आपको साथ देता है
कोई devdosh लग जाए
अनजाने जाने में किसी चीज का उल्लंघन हो
जाए तो उसे समय भी इसके पाठ से आपको लाभ
प्राप्त होता है अब कितना पार्ट इसका करना
चाहिए सामान्य एक महीने तक इसका पाठ जो है
प्रतिदिन 11 करना चाहिए 11 पाठ ऐसे
सामान्य बोला जाए तो हजार पाठ या 1100 पाठ
जब आप इसका फोन कर लेते हैं तो इसका
प्रभाव जो है वो आरंभ होता है तो इसलिए कम
से कम 110 पार्ट तो जरूर इसका करना है यह
जो भगवान तत्व को समर्पित हो जाते हैं
उनको यह पाठ जरूर करना चाहिए इस तरीके से
मूल कवच का पाठ जो है अधिक अधिक करना
चाहिए
बाकी जो है इसका पाठ समांतर किसे कर सकते
हैं और इसके प्रयोग विधान भी आपको उसी में
पढ़ने को मिल जाएगा पीडीएफ में आप देखेंगे
तो उसमें प्रयोग विधान भी दिया गया है की
गूलर की वृक्ष के नीचे पढ़ने से धन धन की
वृद्धि होती है उसी में अगर आप अपने दिशा
को बदल लेते हैं अगर आप दक्षिण दिशा की ओर
करते हैं तो पादरों शांति होती है ठीक है
और
शत्रु का नाश करना हो दक्षिण दिशा की ओर
मुख करके करते हैं तो शत्रु का नाश भी हो
जाता है बैठकर की अगर एक मास्टर जॉब करते
हैं तो इस प्रकार की बहुत सारे प्रयोग भी
दिए गए हैं की बेल के नीचे बैठते हैं
तो लक्ष्मी की प्राप्ति होती है ठीक है
विवाह नहीं हो रहा है तो आम ब्रेस्ट नीचे
बैठकर पढ़ते हैं तो विवाह होता है तुलसी
जी के पास पढ़ते हैं तो सभी manokamnaon
के पूर्ति ज्ञान की प्राप्ति होती हैं ठीक
है भगवान के garbhgri में बैठकर इसका पाठ
करेंगे पुत्र की प्राप्ति होगी संतान की
प्राप्ति होगी इस प्रकार से अनेकों इसके
विधान भी दिए गए हैं तो उन सभी चीजों को
आप पढ़ सकते हैं इसमें जान सकते हैं तो
भगवान दत्तात्रेय का यह
आप अवश्य
कवच सिद्ध करें और जीवन में प्रयोग करें
जय मैन विंध्यवासिनी हर हर महादेव
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